वंदे मातरम् पर BJP-कांग्रेस आमने-सामने: नितिन नवीन की टीम ने पास किया प्रस्ताव, अब देशभर में अभियान
कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पहले दो पद गाने के CWC फैसले का BJP ने किया विरोध; पूर्ण गीत की विरासत और सम्मान की रक्षा का लिया संकल्प
BJP ने वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस वर्किंग कमेटी के फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है। नितिन नवीन ने कहा कि पार्टी पूर्ण वंदे मातरम् के इतिहास और महत्व को लेकर देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाएगी।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। शनिवार को BJP की राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में कांग्रेस वर्किंग कमेटी के हालिया फैसले की निंदा करते हुए एक औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया। BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि पार्टी वंदे मातरम् के सम्मान, ऐतिहासिक विरासत और राष्ट्रीय महत्व को लेकर देशभर में अभियान चलाएगी।
कांग्रेस के किस फैसले पर BJP को आपत्ति?
कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने 19 अगस्त को फैसला किया था कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पहले दो पदों के गायन की अपनी पुरानी परंपरा जारी रखेगी। कांग्रेस ने इसके लिए 1937 में लिए गए CWC के फैसले का हवाला दिया है। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा था कि कांग्रेस अपने ऐतिहासिक रुख पर कायम है और इसमें कोई भ्रम नहीं है।
BJP ने प्रस्ताव में क्या कहा?
BJP के प्रस्ताव में कहा गया है कि पार्टी वंदे मातरम् को भारत की राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता संग्राम और देशभक्ति की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा प्रतीक मानती है। पार्टी ने कांग्रेस के दो पदों तक सीमित रहने के निर्णय का विरोध किया है।
नितिन नवीन ने कहा कि BJP वंदे मातरम् को राजनीतिक तुष्टीकरण, सांप्रदायिक दबाव या वोट-बैंक की राजनीति से जोड़ने के किसी भी प्रयास का विरोध करेगी। ये BJP के प्रस्ताव में व्यक्त राजनीतिक आरोप और उसका आधिकारिक रुख हैं।
देशभर में अभियान चलाएगी BJP
प्रस्ताव का सबसे बड़ा राजनीतिक पहलू BJP का देशव्यापी अभियान है। पार्टी ने कहा है कि कार्यकर्ताओं के जरिए वंदे मातरम् के इतिहास, अर्थ और स्वतंत्रता आंदोलन में उसके योगदान की जानकारी जनता तक पहुंचाई जाएगी।
विशेष रूप से युवाओं के बीच जागरूकता अभियान चलाने की योजना है। BJP का कहना है कि नई पीढ़ी को राष्ट्रीय गीत की पूरी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से परिचित कराया जाना चाहिए।
2026 में वंदे मातरम् को मिला नया कानूनी संरक्षण
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब इसी महीने Prevention of Insults to National Honour Act में संशोधन के जरिए वंदे मातरम् को भी राष्ट्रीय गान की तरह कानूनी संरक्षण के दायरे में शामिल किया गया है।
सरकारी तथ्यपत्र के मुताबिक संशोधन जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकने या उसके गायन में लगी सभा में व्यवधान पैदा करने को कानून के दायरे में लाता है।
क्या कानून में पूरा छह पद गाना अनिवार्य है?
यहां एक महत्वपूर्ण फर्क समझना जरूरी है। BJP का तर्क है कि कांग्रेस का पुराना राजनीतिक फैसला संसद और संवैधानिक संस्थाओं के फैसलों से ऊपर नहीं हो सकता। हालांकि 2026 के संशोधित कानून का उपलब्ध सरकारी विवरण मुख्य रूप से गायन रोकने या उसमें जानबूझकर व्यवधान डालने को दंडनीय बनाने की बात करता है। उसमें हर राजनीतिक कार्यक्रम में सभी छह पद गाना अनिवार्य होने की स्पष्ट शर्त इस सरकारी तथ्यपत्र में नहीं बताई गई है।
इसीलिए खबर में “कांग्रेस ने कानून तोड़ा” जैसा निष्कर्ष सीधे लिखना उचित नहीं होगा, जब तक इस पर किसी अदालत या अधिकृत सरकारी कानूनी स्पष्टीकरण का आधार न हो।
कांग्रेस क्या कह रही है?
कांग्रेस का कहना है कि दो पद गाने की उसकी परंपरा कोई नया फैसला नहीं है, बल्कि 1937 के ऐतिहासिक निर्णय पर आधारित है। पार्टी नेताओं ने BJP पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप भी लगाया है।
केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस दशकों से वंदे मातरम् का सम्मान करती रही है और उसके लिए यह भावनात्मक विषय है, जबकि पार्टी का आरोप है कि BJP इसे राजनीतिक विवाद बना रही है।
अमित शाह भी कर चुके हैं कांग्रेस पर हमला
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कांग्रेस के फैसले पर तीखा हमला करते हुए इसे तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने वंदे मातरम् के साथ ऐतिहासिक रूप से गलत व्यवहार किया। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया है।
अब राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा मुद्दा बनेगा वंदे मातरम्?
BJP द्वारा औपचारिक प्रस्ताव पारित करने और देशव्यापी अभियान घोषित करने के बाद यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है। आने वाले दिनों में पार्टी के प्रदेश संगठन भी इस मुद्दे पर कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं।
दूसरी ओर कांग्रेस अपने 1937 के फैसले पर कायम है। ऐसे में वंदे मातरम् का सवाल अब BJP और कांग्रेस के बीच राष्ट्रीय प्रतीकों, इतिहास और राजनीतिक विचारधारा को लेकर नए टकराव का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है।
