सर्किट हाउस में नमाज, रास्ते में खड़ी कार और फिर FIR: जानिए सपा विधायक के चाचा पर क्यों हुई कार्रवाई?
मुरादाबाद में हाजी मोहम्मद उस्मान का कथित वीडियो वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों ने जताया विरोध; विधायक ने क्लिप को बताया AI से बना, पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
मुरादाबाद सर्किट हाउस परिसर में नमाज पढ़ने का कथित वीडियो वायरल होने के बाद सपा जिला उपाध्यक्ष हाजी मोहम्मद उस्मान के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शिकायत में नमाज से अधिक रास्ते में गाड़ी खड़ी करके आवागमन बाधित करने का आरोप लगाया गया है। वहीं, बिलारी के सपा विधायक मोहम्मद फहीम इरफान ने वायरल वीडियो को AI से बना बताया है।
मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सर्किट हाउस परिसर के भीतर नमाज पढ़ने का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक और धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में एक व्यक्ति खड़ी कार के पीछे चटाई बिछाकर नमाज पढ़ता दिखाई दे रहा है। वायरल पोस्ट में इस व्यक्ति की पहचान समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष हाजी मोहम्मद उस्मान के रूप में की गई है, जो बिलारी से सपा विधायक मोहम्मद फहीम इरफान के चाचा बताए जा रहे हैं।
वीडियो सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने सरकारी परिसर में नमाज पढ़े जाने का विरोध किया और पुलिस तथा प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। मामला बढ़ने पर मुरादाबाद के मझोला थाने में हाजी मोहम्मद उस्मान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। हालांकि, दर्ज शिकायत का मुख्य आधार केवल धार्मिक गतिविधि नहीं, बल्कि रास्ते में गाड़ी खड़ी करके कथित रूप से आवागमन बाधित करना बताया गया है।
सर्किट हाउस में कैसे शुरू हुआ विवाद?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव बृहस्पतिवार को मुरादाबाद के सर्किट हाउस पहुंचे थे। यहां उन्होंने एमएलसी चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की थी।
इसी दौरान का बताया जा रहा एक वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो में एक व्यक्ति सर्किट हाउस परिसर में एक कार के पीछे नमाज पढ़ता नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पोस्ट में इस व्यक्ति को सपा नेता हाजी मोहम्मद उस्मान बताया गया। देखते ही देखते वीडियो अलग-अलग अकाउंट से शेयर होने लगा और मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया।
किसकी शिकायत पर दर्ज हुई FIR?
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्किट हाउस के प्रभारी जूनियर इंजीनियर अनिल कुमार की तहरीर पर मझोला थाने में हाजी मोहम्मद उस्मान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सर्किट हाउस के रास्ते में गाड़ी खड़ी करने के बाद नमाज पढ़ी गई, जिससे आने-जाने का रास्ता बाधित हुआ और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि प्राप्त तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गई है और मामले की जांच की जा रही है। स्रोत: अमर उजाला
इसलिए यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि केवल नमाज पढ़ने के कारण FIR दर्ज की गई। पुलिस शिकायत में रास्ता रोकने और उससे लोगों को हुई परेशानी का आरोप भी शामिल है। जांच पूरी होने के बाद ही कानूनी स्थिति और साफ होगी।
हिंदू संगठनों ने उठाए सवाल
वीडियो वायरल होने के बाद शिवसेना और दूसरे हिंदू संगठनों ने सरकारी परिसर में कथित रूप से धार्मिक गतिविधि किए जाने पर विरोध जताया। शिवसेना के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र अरोड़ा ने इस मामले को जिलाधिकारी के सामने उठाने की बात कही। उन्होंने यह भी घोषणा की कि संगठन सर्किट हाउस परिसर में आरती करेगा।
राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रदेश अध्यक्ष रोहन सक्सेना ने भी कथित घटना पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सरकारी परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति किस नियम के तहत दी गई थी। संगठनों ने पुलिस अधिकारियों से मिलकर कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद मामला और गरमा गया। स्रोत: पत्रिका
सपा विधायक ने वीडियो को बताया AI से बना
इस पूरे विवाद में बिलारी से समाजवादी पार्टी के विधायक मोहम्मद फहीम इरफान का पक्ष भी सामने आया है। उन्होंने वायरल वीडियो की सत्यता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि यह वीडियो AI की मदद से तैयार किया गया है और इसकी प्रामाणिकता संदिग्ध है।
हालांकि, विधायक की ओर से किए गए इस दावे के समर्थन में अभी कोई तकनीकी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। वहीं, पुलिस ने सर्किट हाउस के प्रभारी की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ऐसे में वीडियो असली है, संपादित है या AI से बनाया गया है—इसका अंतिम निष्कर्ष पुलिस या फॉरेंसिक जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा।
हाजी मोहम्मद उस्मान ने क्या कहा?
हाजी मोहम्मद उस्मान ने वायरल वीडियो को लेकर अनभिज्ञता जताई। उनका कहना है कि वह शुक्रवार को सर्किट हाउस नहीं गए थे और उन्हें नहीं मालूम कि वीडियो कहां का है तथा किस उद्देश्य से बनाया या प्रसारित किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि पूजा और इबादत व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार करता है तथा इस मामले को इतना अधिक क्यों उछाला जा रहा है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उनका यह बयान पुलिस में शिकायत दर्ज होने से पहले प्रकाशित रिपोर्ट में सामने आया था। स्रोत: लाइव हिन्दुस्तान
वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि पर अब भी सवाल
शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में यह स्पष्ट किया गया था कि वायरल वीडियो कब बनाया गया और किन परिस्थितियों में रिकॉर्ड हुआ, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी थी। कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि वीडियो सर्किट हाउस परिसर का है और उसे किसी व्यक्ति ने मोबाइल से रिकॉर्ड किया। हालांकि, विधायक ने इसे AI से बनाया हुआ बताया है।
वीडियो में दिखाई देने वाला वाहन और परिसर मामले की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं। पुलिस CCTV फुटेज, वाहन के पंजीकरण, मौके पर उपस्थित लोगों और वीडियो की तकनीकी जांच के जरिए वास्तविकता पता कर सकती है।
नमाज या रास्ता रोकना—FIR की वजह क्या?
सोशल मीडिया पर इस मामले को “सर्किट हाउस में नमाज पढ़ने पर FIR” के रूप में शेयर किया जा रहा है। लेकिन उपलब्ध शिकायत के अनुसार, आरोप यह भी है कि वाहन रास्ते में खड़ा किया गया और इससे लोगों के आने-जाने में परेशानी हुई।
इस अंतर को समझना जरूरी है। धार्मिक गतिविधि को लेकर संगठनों ने राजनीतिक और प्रशासनिक विरोध जताया, जबकि FIR सर्किट हाउस प्रभारी की शिकायत पर दर्ज की गई, जिसमें रास्ता बाधित करने का आरोप प्रमुख रूप से सामने आया है।
जांच के बाद खुलेगा वायरल वीडियो का सच
मामले में फिलहाल तीन अलग-अलग पक्ष सामने हैं। वायरल पोस्ट में हाजी मोहम्मद उस्मान को नमाज पढ़ते हुए बताया जा रहा है। सपा विधायक इसे AI से तैयार वीडियो बता रहे हैं। दूसरी ओर, उस्मान ने वीडियो के बारे में जानकारी होने से इनकार किया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वायरल वीडियो असली है और क्या वास्तव में गाड़ी खड़ी होने से सर्किट हाउस का रास्ता बाधित हुआ था। इसका प्रमाणित उत्तर पुलिस जांच और उपलब्ध CCTV या तकनीकी रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मिलेगा।
