सहारनपुर में काजी परिवार की विरासत पर जंग: इमरान मसूद के दामाद शायान सपा में, हमजा ने खोला मोर्चा

दशकों से पश्चिमी यूपी की राजनीति में प्रभाव रखने वाले काजी परिवार की नई पीढ़ी आमने-सामने; शायान मसूद के कांग्रेस छोड़ सपा में जाने के बाद राजनीतिक मतभेद और पारिवारिक आरोप सार्वजनिक हुए

सहारनपुर में काजी परिवार की राजनीति, इमरान मसूद और शायान मसूद के अलग राजनीतिक रास्ते

सहारनपुर के प्रभावशाली काजी परिवार में राजनीतिक विरासत को लेकर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। इमरान मसूद के दामाद शायान सपा में जा चुके हैं, जबकि भतीजे हमजा नोमान ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

सहारनपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में दशकों से प्रभाव रखने वाला काजी परिवार एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह किसी चुनावी जीत से ज्यादा परिवार की नई पीढ़ी में राजनीतिक विरासत को लेकर सामने आई खींचतान है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के दामाद शायान मसूद के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद परिवार के राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। अब एक तरफ इमरान मसूद और उनके भतीजे हमजा नोमान दिखाई दे रहे हैं तो दूसरी ओर शायान मसूद अपनी अलग राजनीतिक राह बनाने में जुटे हैं।

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। इसलिए काजी परिवार की यह रार सिर्फ पारिवारिक विवाद नहीं बल्कि सहारनपुर में कांग्रेस-सपा और मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व के समीकरण से भी जोड़कर देखी जा रही है।

कहां से शुरू हुई ताजा राजनीतिक रार?

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सहारनपुर के प्रभावशाली काजी परिवार में शायान मसूद के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आए हैं। फाइल/प्रतीकात्मक तस्वीर।

इस विवाद की राजनीतिक पृष्ठभूमि तब बनी जब इमरान मसूद ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में उनके परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। इसके कुछ ही समय बाद उनके दामाद शायान मसूद ने कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया।

20 अगस्त को लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शायान को पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। इसके बाद शायान ने इमरान मसूद की राजनीतिक लाइन से असहमति जताते हुए कहा था कि BJP को हराने के लिए अखिलेश यादव के साथ खड़ा होना जरूरी है। अभी शायान को किसी विधानसभा सीट से टिकट दिए जाने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

दामाद के सपा में जाते ही परिवार का विवाद सार्वजनिक

शायान के सपा में शामिल होने और इमरान मसूद की राजनीतिक सोच पर सवाल उठाने के बाद मामला और गरमा गया।

इमरान मसूद के भतीजे हमजा नोमान ने सोशल मीडिया पर सामने आकर शायान पर कई गंभीर व्यक्तिगत और पारिवारिक आरोप लगाए। उनका दावा था कि उनकी बहन के साथ लंबे समय से खराब व्यवहार किया जा रहा था और राजनीतिक कारणों से उसे परेशान किया गया। हमजा ने अपने आरोपों के समर्थन में रिकॉर्डिंग होने का भी दावा किया।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये हमजा नोमान के आरोप हैं और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

शायान मसूद ने क्या जवाब दिया?

शायान मसूद ने भी इन आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के कारण परिवार की निजी बातें सार्वजनिक करना उचित नहीं है।

शायान ने हमजा को राजनीतिक लड़ाई मैदान में लड़ने की चुनौती देते हुए कहा कि उनके पास भी कई बातों के जवाब हैं, लेकिन वह घरेलू मामलों को सार्वजनिक नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि परिवार के भीतर बैठकर बातचीत होगी तो वह आरोपों का जवाब देने के लिए तैयार हैं।

यानी अभी स्थिति आरोप बनाम जवाब की है। किसी व्यक्तिगत आरोप को स्थापित तथ्य की तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।


काजी परिवार का सहारनपुर की राजनीति में कितना प्रभाव?

इस विवाद की अहमियत समझने के लिए काजी परिवार का राजनीतिक इतिहास समझना जरूरी है।

परिवार की राजनीति की शुरुआती पहचान काजी मसूद के दौर से मानी जाती है। बाद में पूर्व केंद्रीय मंत्री काजी रशीद मसूद ने इसे राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। वह 1970 के दशक से सक्रिय राजनीति में रहे और कई बार लोकसभा तथा राज्यसभा पहुंचे। उनकी राजनीति ने काजी परिवार को सहारनपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली राजनीतिक घरानों में स्थापित किया।

बाद के वर्षों में इमरान मसूद इस परिवार के सबसे प्रमुख राजनीतिक चेहरों में उभरे।

2024 के लोकसभा चुनाव में इमरान मसूद कांग्रेस के टिकट पर सहारनपुर से सांसद बने। वर्तमान दौर में जिले की राजनीति में परिवार की मुख्य राजनीतिक पहचान उनसे ही जुड़ी हुई है।

अब नई पीढ़ी में ‘राजनीतिक वारिस’ कौन?

यहीं से मौजूदा विवाद का सबसे दिलचस्प राजनीतिक पहलू शुरू होता है।

एक ओर हमजा नोमान स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उन्हें इमरान मसूद के राजनीतिक खेमे के युवा चेहरों में देखा जाता है। दूसरी ओर शायान मसूद भी अब समाजवादी पार्टी के जरिए अपना स्वतंत्र राजनीतिक आधार बनाने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। Aaj Tak की रिपोर्ट भी मौजूदा खींचतान को नई पीढ़ी के बीच राजनीतिक वर्चस्व और विरासत के संघर्ष से जोड़ती है।

यानी कहानी सिर्फ ससुर-दामाद के संबंधों की नहीं है।

असल राजनीतिक सवाल है—

काजी परिवार की अगली पीढ़ी में सहारनपुर की सियासत का बड़ा चेहरा कौन बनेगा?


2014 में भी परिवार में हो चुका है राजनीतिक टकराव

काजी परिवार में राजनीतिक मतभेद कोई नई बात नहीं हैं।

2012 के बाद इमरान मसूद और काजी रशीद मसूद के बीच राजनीतिक रास्ते अलग हुए थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में इमरान मसूद कांग्रेस से मैदान में थे, जबकि परिवार के दूसरे खेमे से सपा उम्मीदवार चुनाव लड़ रहा था। उस दौर में भी परिवार की राजनीतिक एकता टूटने का असर सहारनपुर के चुनावी समीकरणों पर दिखाई दिया था।

करीब एक दशक बाद अब फिर वैसी ही स्थिति बनती दिखाई दे रही है—अंतर सिर्फ इतना है कि इस बार परिवार की अगली पीढ़ी भी सीधे राजनीतिक मुकाबले में उतर रही है।


सहारनपुर में सपा-कांग्रेस की खींचतान पहले भी दिखी

काजी परिवार का विवाद ऐसे समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही सहारनपुर की दिशा बैठक में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा विधायक आशु मलिक के बीच बोलने को लेकर तीखी नोकझोंक का वीडियो वायरल हुआ था।

बाद में दोनों पक्षों ने इसे बड़ा राजनीतिक विवाद मानने से इनकार किया, लेकिन BJP ने इस घटनाक्रम को सपा-कांग्रेस के बीच कथित वर्चस्व की लड़ाई से जोड़कर हमला किया था।

इसके तुरंत बाद इमरान मसूद के दामाद का कांग्रेस छोड़कर सपा में जाना और फिर परिवार का विवाद सार्वजनिक होना सहारनपुर की राजनीति को और दिलचस्प बना रहा है।


UP Election 2027 में क्या असर पड़ सकता है?

अभी विधानसभा चुनाव में समय है और शायान मसूद या हमजा नोमान में से किसी को भी किसी विशेष सीट से उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है।

फिर भी इस पूरे घटनाक्रम के तीन राजनीतिक प्रभाव हो सकते हैं।

पहला, काजी परिवार का पारंपरिक राजनीतिक प्रभाव दो अलग-अलग दलों में बंट सकता है।

दूसरा, सहारनपुर में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच 2027 के टिकट बंटवारे के समय स्थानीय नेतृत्व की दावेदारी बड़ा मुद्दा बन सकती है।

तीसरा, यदि शायान सपा के भीतर विधानसभा चुनाव की दावेदारी मजबूत करते हैं और इमरान मसूद कांग्रेस में अपनी पकड़ कायम रखते हैं, तो एक ही राजनीतिक परिवार के लोग अलग-अलग दलों की रणनीति का हिस्सा बन सकते हैं।

हालांकि ये संभावित राजनीतिक परिणाम हैं; फिलहाल किसी उम्मीदवार या सीट को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

सहारनपुर की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल

कभी काजी परिवार की एकजुटता को उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत माना जाता था। अब उसी परिवार की नई पीढ़ी अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

इमरान मसूद कांग्रेस में अपना प्रभाव बनाए हुए हैं, शायान मसूद ने अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी का रास्ता चुन लिया है और हमजा नोमान खुलकर उनके खिलाफ राजनीतिक मोर्चा संभाल रहे हैं।

ऐसे में UP Election 2027 तक यह लड़ाई केवल पारिवारिक विवाद रहती है या सहारनपुर की सीटों और वोट समीकरण तक पहुंचती है—यही इस कहानी का अगला बड़ा अध्याय होगा।

नोट: शायान मसूद के खिलाफ व्यक्तिगत या पारिवारिक व्यवहार से जुड़े आरोप हमजा नोमान के सार्वजनिक दावे हैं। उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। शायान ने इन आरोपों पर कहा है कि पारिवारिक बातों को राजनीतिक विवाद में सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। इस रिपोर्ट में किसी अपुष्ट आरोप को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

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