Jharkhand Exam Row: सोरेन सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, JPSC-JSSC परीक्षाएं रद्द करने के आदेश पर रोक
JPSC 11वीं-13वीं सिविल सेवा, JSSC-CGL समेत प्रभावित भर्तियों के सफल अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत; कई चयनित उम्मीदवार पहले ही सरकारी नौकरी जॉइन कर चुके थे
झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के हेमंत सोरेन सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। सफल अभ्यर्थियों ने परीक्षा और नियुक्तियां रद्द करने के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया।
Jharkhand High Court: भर्ती परीक्षाएं रद्द करने के फैसले पर रोक, सोरेन सरकार को बड़ा झटका
रांची: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर पिछले करीब एक महीने से चल रहे विवाद में गुरुवार को बड़ा कानूनी मोड़ आ गया। झारखंड हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन सरकार के उन आदेशों पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिनके जरिए विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और उनसे हुई नियुक्तियों को रद्द किया गया था। यह फैसला उन सफल अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिनकी नौकरी सरकार के फैसले के बाद खतरे में पड़ गई थी।
चार याचिकाओं पर हुई हाईकोर्ट में सुनवाई
NDTV की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में चार अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इनमें JPSC 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, JSSC-CGL और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती समेत प्रभावित परीक्षाओं के सफल अभ्यर्थी शामिल हैं।
याचिकाकर्ताओं में अवधेश कुमार, दीपमाला, सोनम कुमारी और सौरभ सिंह समेत अन्य सफल उम्मीदवारों के नाम बताए गए हैं।
अभ्यर्थियों का कहना था कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी, मेरिट लिस्ट में स्थान हासिल किया और उसके बाद कई उम्मीदवार सरकारी पदों पर नियुक्त भी हो चुके थे।
अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले पर क्या सवाल उठाया?
याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क था कि राज्य सरकार ने पूरी परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने से पहले सफल अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया।
उनका कहना है कि अगर जांच में किसी विशेष उम्मीदवार की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन सभी सफल उम्मीदवारों की नियुक्ति एक साथ रद्द करना उचित नहीं है। अभ्यर्थियों ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
कई उम्मीदवार पहले ही कर चुके थे नौकरी जॉइन
सरकार के फैसले से सबसे ज्यादा चिंता उन उम्मीदवारों में थी, जिनका चयन पूरा हो चुका था और वे विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी भी जॉइन कर चुके थे।
Moneycontrol के मुताबिक अकेले 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा के 342 सफल उम्मीदवारों ने सरकार के फैसले के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाया।
2025 में घोषित JPSC परिणाम में भी कुल 342 उम्मीदवार सफल घोषित किए गए थे। इनमें झारखंड प्रशासनिक सेवा, पुलिस सेवा और अन्य सरकारी सेवाओं के पद शामिल थे।
JSSC-CGL उम्मीदवारों ने उठाया हाईकोर्ट के पुराने आदेश का मुद्दा
JSSC-CGL से जुड़े कुछ याचिकाकर्ताओं का यह भी तर्क है कि परीक्षा परिणाम पहले हाईकोर्ट के आदेशों के अनुरूप घोषित किए गए थे। ऐसे में बाद में पूरी परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले की वैधता पर सवाल उठाया गया।
सरकार ने क्यों रद्द की थीं परीक्षाएं?
झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, अनियमितता और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर लंबे समय से छात्र आंदोलन चल रहा था।
हेमंत सोरेन सरकार ने आंदोलन के बीच बड़ा फैसला लेते हुए 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द, छह को स्थगित और कई पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं की जांच कराने की घोषणा की थी। इन फैसलों में JSSC-CGL और TDPL एजेंसी से जुड़ी कई परीक्षाएं भी शामिल थीं।
सरकार ने कहा था कि यह कदम भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता कायम करने और कथित अनियमितताओं की जांच के लिए उठाया गया है।
छात्रों ने 26 दिन बाद स्थगित किया था आंदोलन
सरकारी फैसलों के बाद JPSC-JSSC परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ चल रहा 26 दिन का छात्र आंदोलन 19 अगस्त को 60 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया था।
आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार को दो महीने का समय देते हुए कहा था कि अगर जांच और परीक्षा सुधार से जुड़ी बाकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा।
लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद दूसरी तरफ सफल और नियुक्त अभ्यर्थी विरोध में उतर आए थे, क्योंकि उन्हें अपनी नौकरियां जाने का डर था। रिपोर्ट्स के मुताबिक हजारों प्रभावित उम्मीदवारों की नियुक्तियों पर संकट खड़ा हो गया था।
अब हाईकोर्ट की रोक का क्या मतलब?
हाईकोर्ट का मौजूदा आदेश अंतरिम राहत है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के आरोपों को गलत साबित कर दिया है या सभी परीक्षाओं को अंतिम रूप से वैध घोषित कर दिया है।
फिलहाल अदालत ने सरकार के परीक्षा और नियुक्तियां रद्द करने वाले फैसले के अमल पर रोक लगाई है। मामले की आगे सुनवाई और विस्तृत आदेश के बाद यह स्पष्ट होगा कि विवादित भर्तियों और पहले से नियुक्त उम्मीदवारों का भविष्य क्या होगा।
अब सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के सामने नई स्थिति
हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद झारखंड भर्ती विवाद अब दो अलग-अलग पक्षों के बीच खड़ा दिखाई दे रहा है।
एक तरफ वे छात्र हैं जो कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आधार पर परीक्षाओं को रद्द कर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। दूसरी तरफ वे सफल उम्मीदवार हैं जिनका कहना है कि बिना व्यक्तिगत दोष साबित किए उनकी नौकरी समाप्त करना अन्याय होगा।
अब निगाह झारखंड हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और राज्य सरकार के अगले कदम पर रहेगी। यह भी देखना होगा कि सरकार अंतरिम आदेश के खिलाफ कोई कानूनी कदम उठाती है या अदालत के सामने अपने परीक्षा रद्द करने के फैसले के समर्थन में विस्तृत सबूत पेश करती है।
