वंदे मातरम् के सवाल पर पत्रकार से भिड़े अखिलेश? वायरल वीडियो में '2 दिन' का दावा, लेकिन कहानी में बड़ा ट्विस्ट
सोशल मीडिया पर दो वीडियो जोड़कर अखिलेश यादव के रुख में बदलाव का दावा; 'मां तुझे सलाम' वाला बयान फरवरी 2026 की रिपोर्ट्स में पहले से दर्ज
वंदे मातरम् को लेकर अखिलेश यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें पत्रकार से उनकी तीखी बातचीत दिखाई जा रही है। पोस्ट में एक अन्य क्लिप को दो दिन पुराना बताया गया है, लेकिन उसी 'वंदे मातरम्-मां तुझे सलाम' बयान की रिपोर्ट फरवरी 2026 में प्रकाशित हो चुकी है।
लखनऊ: राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में जारी विवाद के बीच समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल पोस्ट में दो अलग-अलग क्लिप को जोड़कर दावा किया जा रहा है कि दो दिन के भीतर वंदे मातरम् पर अखिलेश यादव का अंदाज बदल गया।
एक X यूजर की ओर से शेयर किए गए वीडियो के साथ दावा किया गया है कि एक क्लिप में अखिलेश यादव A.R. Rahman के प्रसिद्ध देशभक्ति गीत 'मां तुझे सलाम' का जिक्र कर रहे थे, जबकि दूसरी क्लिप में वंदे मातरम् से जुड़े सवाल पर वह पत्रकार से नाराज होते दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि इस वायरल दावे की timeline की जांच करने पर तस्वीर कुछ अलग नजर आती है।
'2 दिन पहले' वाला बयान वास्तव में कितना नया?
वायरल पोस्ट में जिस 'मां तुझे सलाम' वाली क्लिप को दो दिन पहले की बताया जा रहा है, उसी आशय का बयान मीडिया रिपोर्ट्स में फरवरी 2026 में ही दर्ज है।
17 फरवरी 2026 को प्रकाशित ABP की एक रिपोर्ट के मुताबिक अखिलेश यादव ने योगी सरकार और RSS पर निशाना साधते हुए सवाल किया था कि क्या संघ से जुड़े नेताओं ने कभी 'वंदे मातरम्' या 'मां तुझे सलाम' कहा है।
Live Hindustan की 16 फरवरी की रिपोर्ट में भी अखिलेश यादव की ओर से RSS नेताओं और वंदे मातरम् को लेकर इसी तरह सवाल उठाए जाने का उल्लेख मिलता है।
ऐसे में किसी पुराने वीडियो को बिना मूल तारीख बताए 'दो दिन पहले' का बताना भ्रामक हो सकता है।
क्या अखिलेश ने 'मां तुझे सलाम' गाना गाया था?
यहां एक और फर्क समझना जरूरी है। उपलब्ध फरवरी की मीडिया रिपोर्ट में अखिलेश यादव की ओर से 'मां तुझे सलाम' शब्दों का उल्लेख दर्ज है, लेकिन रिपोर्ट यह नहीं कहती कि उन्होंने मंच पर A.R. Rahman का पूरा गीत गाया था।
'मां तुझे सलाम' A.R. Rahman का प्रसिद्ध देशभक्ति गीत है। इसलिए वायरल पोस्ट में 'गाना गा रहे थे' जैसी wording मूल बयान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर सकती है।
पत्रकार से बातचीत का वीडियो क्यों वायरल?
सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही दूसरी क्लिप में वंदे मातरम् से जुड़ा सवाल पूछे जाने के दौरान अखिलेश यादव और एक पत्रकार के बीच बातचीत दिखाई जा रही है।
वायरल पोस्ट के मुताबिक अखिलेश यादव पत्रकार से कहते दिखाई देते हैं कि उन्हें विषय की जानकारी नहीं है और वह केवल सिर हिला रहे हैं।
फिलहाल इस दूसरी क्लिप की पूरी, बिना एडिट की गई रिकॉर्डिंग और उसका संपूर्ण संदर्भ स्वतंत्र मीडिया रिपोर्ट्स में स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए केवल छोटे वायरल हिस्से के आधार पर अखिलेश यादव ने 'वंदे मातरम् का विरोध किया' या 'गाने से इनकार किया' जैसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
वंदे मातरम् पर पहले क्या कहते रहे हैं अखिलेश?
वंदे मातरम् को लेकर अखिलेश यादव का रुख इससे पहले भी चर्चा में रहा है। नवंबर 2025 में उन्होंने यूपी के शिक्षण संस्थानों में वंदे मातरम् को अनिवार्य किए जाने पर सवाल उठाया था।
अखिलेश का तर्क था कि संविधान निर्माताओं ने राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को सम्मान दिया, लेकिन देशभक्ति को जबरन लागू करने के बजाय लोगों के चुनाव की गुंजाइश रखी। उन्होंने अपने सैनिक स्कूल के दिनों का जिक्र करते हुए यह भी कहा था कि वहां राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों नियमित रूप से गाए जाते थे।
यानी उनका सार्वजनिक रुख वंदे मातरम् के अस्तित्व या महत्व को नकारने के बजाय इसे अनिवार्य करने के सवाल पर केंद्रित रहा है।
स्वतंत्रता दिवस के बाद फिर क्यों गरमाया विवाद?
15 अगस्त के आसपास कांग्रेस के एक कार्यक्रम में वंदे मातरम् को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ। BJP ने कांग्रेस नेताओं पर राष्ट्रगीत के कथित अनादर का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस ने इन आरोपों का विरोध किया।
इसके बाद 16 अगस्त को अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया देते हुए BJP पर इस मुद्दे को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगाया था और कहा था कि पार्टी के पास जनता से जुड़े बेहतर काम दिखाने को नहीं हैं।
इसके बाद वंदे मातरम् लगातार यूपी और राष्ट्रीय राजनीति की बयानबाजी का हिस्सा बना हुआ है।
वायरल वीडियो से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
इस समय उपलब्ध जानकारी से तीन बातें स्पष्ट होती हैं।
पहली, सोशल मीडिया पोस्ट में 'दो दिन पहले' बताया जा रहा 'वंदे मातरम्-मां तुझे सलाम' वाला बयान कम से कम फरवरी 2026 से सार्वजनिक रिकॉर्ड में मौजूद है।
दूसरी, उपलब्ध रिपोर्ट यह साबित नहीं करती कि अखिलेश यादव ने A.R. Rahman का पूरा 'मां तुझे सलाम' गीत गाया था; उन्होंने उस नाम का उल्लेख अपने राजनीतिक बयान में किया था।
तीसरी, पत्रकार से बातचीत वाली वायरल क्लिप का पूरा संदर्भ सामने आए बिना उससे राजनीतिक निष्कर्ष निकालते समय सावधानी जरूरी है।
सोशल मीडिया पर राजनीतिक वीडियो अक्सर छोटे हिस्सों में काटकर साझा किए जाते हैं। ऐसे में किसी नेता के रुख में बदलाव साबित करने के लिए दोनों वीडियो की मूल तारीख, पूरा बयान और संदर्भ देखना जरूरी है।
