स्वरा भास्कर के खिलाफ आगरा में प्रदर्शन, ‘जुबान काटने पर ₹1.51 लाख’ की घोषणा से बढ़ा पद्मावत विवाद

जौहर दृश्य पर अभिनेत्री की टिप्पणी के बाद योगी यूथ ब्रिगेड ने जलाए पोस्टर; स्वरा बोलीं—मैंने रानी पद्मावती को कायर नहीं कहा

पद्मावत के जौहर दृश्य पर टिप्पणी के बाद आगरा में स्वरा भास्कर के खिलाफ प्रदर्शन

फिल्म ‘पद्मावत’ में दिखाए गए जौहर के दृश्य पर स्वरा भास्कर की टिप्पणी को लेकर विवाद बढ़ गया है। आगरा में प्रदर्शन के दौरान योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर अजय तोमर ने कथित रूप से अभिनेत्री की जुबान काटने वाले को ₹1.51 लाख देने की घोषणा की। स्वरा का कहना है कि उनके बयान को गलत अर्थ में पेश किया जा रहा है।

स्वरा भास्कर के खिलाफ आगरा में प्रदर्शन, ‘जुबान काटने पर ₹1.51 लाख का इनाम’ घोषित होने से मचा बवाल

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स्वरा भास्कर की ‘पद्मावत’ संबंधी टिप्पणी के विरोध में आगरा में प्रदर्शन किया गया।

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर की फिल्म ‘पद्मावत’ के जौहर दृश्य पर की गई टिप्पणी को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। अभिनेत्री की सफाई सामने आने के बावजूद उत्तर प्रदेश के आगरा में उनके खिलाफ प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने स्वरा के पोस्टर जलाए और उन्हें पैरों से कुचलकर विरोध जताया।

प्रदर्शन में हुई ₹1.51 लाख के इनाम की विवादित घोषणा

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आगरा में हुए प्रदर्शन का नेतृत्व योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर अजय तोमर ने किया। आरोप है कि उन्होंने स्वरा भास्कर की जुबान काटने वाले व्यक्ति को ₹1.51 लाख देने की विवादित घोषणा की। उन्होंने अभिनेत्री के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा का भी इस्तेमाल किया।

यह किसी सरकारी अथवा वैधानिक संस्था की इनामी घोषणा नहीं है, बल्कि प्रदर्शन के दौरान संगठन के पदाधिकारी की ओर से दिया गया कथित बयान है। किसी व्यक्ति के विचारों से असहमति के कारण उसके खिलाफ हिंसा की धमकी देने को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

आगरा में जलाए गए स्वरा भास्कर के पोस्टर

प्रदर्शनकारियों ने स्वरा भास्कर के पोस्टर जलाकर और उन्हें पैरों से कुचलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। कुंवर अजय तोमर ने आरोप लगाया कि अभिनेत्री को उस दौर की ऐतिहासिक परिस्थितियों तथा रानी पद्मावती सहित जौहर करने वाली राजपूत महिलाओं के साहस और बलिदान की जानकारी नहीं है।

किस बयान से शुरू हुआ विवाद?

यह विवाद 31 अगस्त को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘वुमन, लाइफ, फ्रीडम’ कार्यक्रम के बाद दोबारा चर्चा में आया। इस कार्यक्रम में स्वरा भास्कर ने संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ के अंत में दिखाए गए जौहर के दृश्य पर सवाल उठाए थे।

स्वरा का तर्क था कि जौहर को सम्मान और वीरता के प्रतीक के रूप में दिखाए जाने से यौन हिंसा का सामना कर चुकी महिलाओं के बीच गलत संदेश जा सकता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी महिला के सम्मान को उसके जीवन से ज्यादा मूल्यवान माना जाना चाहिए।

स्वरा भास्कर ने क्या सफाई दी?

सोशल मीडिया पर विरोध बढ़ने के बाद स्वरा भास्कर ने एक वीडियो जारी कर अपना पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो रानी पद्मावती और न ही जौहर करने वाली दूसरी महिलाओं को कायर कहा था।

स्वरा के मुताबिक, उनके बयान का उद्देश्य ऐतिहासिक परिस्थितियों में महिलाओं द्वारा लिए गए निर्णयों का अपमान करना नहीं था। वह आधुनिक सिनेमा में जौहर को पेश करने के तरीके और उससे समाज में जाने वाले संदेश पर सवाल उठा रही थीं।

‘यौन हिंसा की पीड़िता को जीने का पूरा अधिकार’

अभिनेत्री का कहना है कि यौन हिंसा का सामना करने वाली किसी महिला को यह महसूस नहीं कराया जाना चाहिए कि जीवित रहने का उसका निर्णय उसे कम साहसी या कम सम्मानित बनाता है। उन्होंने दावा किया कि उनकी टिप्पणी का गलत अर्थ निकालकर उसे अलग तरीके से पेश किया गया।

दूसरी ओर, विरोध करने वाले संगठनों का आरोप है कि स्वरा भास्कर ऐतिहासिक घटनाओं को वर्तमान समय के नजरिए से देख रही हैं और उनकी टिप्पणी से राजपूत समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है।

भाजपा और करणी सेना ने भी जताई आपत्ति

स्वरा भास्कर के बयान पर भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अभिनेत्री की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि महिलाओं को दूसरी महिलाओं और उनके निर्णयों का सम्मान करना चाहिए।

करणी सेना से जुड़ी महिला पदाधिकारियों ने भी स्वरा की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि राजपूत इतिहास और जौहर जैसे संवेदनशील विषय पर बात करते समय उस दौर की परिस्थितियों और ऐतिहासिक तथ्यों को समझना जरूरी है।

‘पद्मावत’ के लेखक ने किया दृश्य का बचाव

फिल्म ‘पद्मावत’ के सह-लेखक प्रकाश कपाड़िया ने जौहर दृश्य का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी उपलब्ध ऐतिहासिक सामग्री और उस दौर की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी। उनके मुताबिक, प्रत्येक दर्शक किसी फिल्म और उसके दृश्यों की अलग-अलग व्याख्या कर सकता है।

आठ साल बाद फिर चर्चा में आई ‘पद्मावत’

दीपिका पादुकोण, शाहिद कपूर और रणवीर सिंह अभिनीत ‘पद्मावत’ वर्ष 2018 में रिलीज हुई थी। फिल्म रिलीज होने से पहले भी ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ के आरोप लगाते हुए देश के कई हिस्सों में विरोध किया गया था।

विवाद के बाद फिल्म का नाम ‘पद्मावती’ से बदलकर ‘पद्मावत’ किया गया था। रिलीज के लगभग आठ साल बाद इसका जौहर दृश्य एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है।

असहमति के जवाब में हिंसा की धमकी कितना उचित?

इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी फिल्म, ऐतिहासिक घटना या सार्वजनिक बयान से असहमति का जवाब हिंसक घोषणा से दिया जा सकता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति को किसी बयान की आलोचना और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है, लेकिन शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकी वैचारिक बहस को व्यक्तिगत सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था से जुड़े गंभीर मामले में बदल देती है।

खबर लिखे जाने तक इस कथित घोषणा पर पुलिस की कार्रवाई की स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी।

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