मथुरा से मुंबई और द्वारका से श्रीनगर तक कृष्णमय हुआ भारत, जानें किस शहर में कैसे मनी जन्माष्टमी

मथुरा-वृंदावन में मध्यरात्रि को गूंजे जयकारे, गुजरात में रास-गरबा, दक्षिण भारत में सजे कान्हा के चरण; श्रीनगर में कश्मीरी पंडितों ने निकाली शोभायात्रा

मथुरा, मुंबई, द्वारका और श्रीनगर में जन्माष्टमी 2026 के उत्सव का कोलाज

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर में भक्ति और उत्सव का अनूठा संगम दिखाई दिया। मथुरा-वृंदावन के मंदिरों से लेकर द्वारका, गुरुवायूर, दिल्ली और श्रीनगर तक विशेष पूजा, कीर्तन और शोभायात्राएं हुईं, जबकि महाराष्ट्र में दही हांडी उत्सव आकर्षण का केंद्र बना।

मथुरा से श्रीनगर तक कृष्ण भक्ति में डूबा देश

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मथुरा से मुंबई, द्वारका, गुरुवायूर और श्रीनगर तक अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया गया भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव।

नई दिल्ली। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर शुक्रवार, 4 सितंबर को पूरा देश कृष्णमय नजर आया। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार जन्माष्टमी मनाई गई। कहीं मध्यरात्रि में कान्हा के प्राकट्य पर शंख और घंटियां गूंजीं तो कहीं रास-गरबा, भजन-कीर्तन और शोभायात्राओं ने उत्सव को भव्य बना दिया।

उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृंदावन में आस्था का जनसैलाब उमड़ा, गुजरात के द्वारका और डाकोर में विशेष श्रृंगार हुआ, दक्षिण भारत में घरों के बाहर बाल गोपाल के प्रतीकात्मक पदचिह्न बनाए गए और श्रीनगर में कश्मीरी पंडितों ने पारंपरिक शोभायात्रा निकाली। महाराष्ट्र में जन्माष्टमी के अगले दिन 5 सितंबर को दही हांडी उत्सव आयोजित किया गया।

मथुरा-वृंदावन में मध्यरात्रि को गूंजे कान्हा के जयकारे

 

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा और उनकी बाल लीलाओं से जुड़े वृंदावन में जन्माष्टमी का सबसे भव्य स्वरूप देखने को मिला। श्रीकृष्ण जन्मभूमि सहित ब्रज के प्रमुख मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया। मध्यरात्रि में कान्हा के प्राकट्य के साथ मंदिरों में शंखनाद और घंटियों की ध्वनि गूंज उठी। श्रद्धालुओं ने ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे लगाए।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मथुरा पहुंचकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की। उन्होंने केशव देव मंदिर, योगमाया मंदिर, गर्भगृह और भागवत भवन में दर्शन किए। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री लगभग 45 मिनट मंदिर परिसर में रहे और उन्होंने गो-पूजन भी किया। स्रोत: अर्थ न्यूज़

स्पष्टता: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन्माष्टमी पर मथुरा में दर्शन किए थे, लेकिन मध्यरात्रि की पूजा में उनकी मौजूदगी की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती। इसलिए दोनों बातों को एक ही घटना के रूप में नहीं लिखा गया है।

महाराष्ट्र में दही हांडी बनी आकर्षण का केंद्र

 

महाराष्ट्र, विशेषकर मुंबई और ठाणे में जन्माष्टमी का सबसे लोकप्रिय रूप दही हांडी है। जन्माष्टमी के अगले दिन शनिवार, 5 सितंबर को गोविंदा मंडलों की टोलियों ने मानव पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर लटकी मटकी फोड़ने का प्रयास किया।

‘गोविंदा आला रे’ के जयकारों, ढोल-नगाड़ों और संगीत के बीच बड़ी संख्या में लोग आयोजनों को देखने पहुंचे। दही हांडी की परंपरा को भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और माखन प्रेम से जोड़कर देखा जाता है। वर्ष 2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर और दही हांडी 5 सितंबर को आयोजित हुई। स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया

द्वारका में भजन और रास-गरबा, डाकोर में जगमगाया मंदिर

गुजरात के द्वारका स्थित प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर, जिसे जगत मंदिर भी कहा जाता है, में जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। भगवान द्वारकाधीश का विशेष श्रृंगार किया गया और मंदिर परिसर में भजन, ढोल-नगाड़े तथा रास-गरबा के बीच उत्सव मनाया गया।

डाकोर के रणछोड़रायजी मंदिर को भी फूलों और रोशनी से सजाया गया। ऐतिहासिक दीपमाला पर दीप जलाए गए और श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन की व्यवस्था की गई। गुजरात के कई कृष्ण मंदिरों में जन्माष्टमी के कार्यक्रमों का ऑनलाइन प्रसारण भी किया गया। स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस गुजराती

गुरुवायूर मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़

केरल के प्रसिद्ध गुरुवायूर श्रीकृष्ण मंदिर को जन्माष्टमी, जिसे यहां अष्टमी रोहिणी भी कहा जाता है, के अवसर पर विशेष रूप से सजाया गया। सुबह से दर्शन और पूजा के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंची। कान्हा के जन्मोत्सव पर मंदिर में विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। स्रोत: ANI/X

दक्षिण भारत में जन्माष्टमी केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहती। तमिलनाडु के घरों में इसे कृष्ण जयंती या गोकुलाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। घर के प्रवेश द्वार से पूजा स्थल तक चावल के घोल या रंगोली से बाल कृष्ण के छोटे-छोटे पदचिह्न बनाए जाते हैं। यह परंपरा भगवान कृष्ण के घर आगमन का प्रतीक मानी जाती है। मक्खन, दूध, दही, अवल और पारंपरिक पकवानों का भोग भी लगाया जाता है। स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस तमिल

श्रीनगर में कश्मीरी पंडितों ने निकाली शोभायात्रा

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में भी जन्माष्टमी पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाई गई। कश्मीरी पंडित समुदाय ने हब्बा कदल क्षेत्र के गनपत्यार मंदिर से शोभायात्रा निकाली। यह यात्रा क्रालखुद और बरबरशाह से गुजरते हुए लाल चौक स्थित घंटाघर तक पहुंची।

भक्तों ने भजन-कीर्तन किए और भगवान कृष्ण की झांकी के साथ उत्सव मनाया। कश्मीर में जन्माष्टमी के इस आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकता का संदेश दिया। स्रोत: द प्रिंट

दिल्ली और दूसरे शहरों में ISKCON मंदिर बने भक्ति के केंद्र

दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित ISKCON मंदिर सहित देशभर के ISKCON मंदिरों में दिनभर कीर्तन, भजन, अभिषेक और विशेष आरती हुई। मंदिरों में सजी झांकियां और बाल गोपाल का श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। दिल्ली ISKCON ने 4 सितंबर को पूरे दिन जन्माष्टमी कार्यक्रम और मध्यरात्रि तक उपवास का कार्यक्रम निर्धारित किया था। स्रोत: ISKCON दिल्ली

बेंगलुरु के ISKCON मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण, रुक्मिणी, सत्यभामा और लड्डू गोपाल का अभिषेक किया गया। भजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और मध्यरात्रि की महाआरती के साथ भक्तों ने कान्हा का जन्मोत्सव मनाया। स्रोत: ISKCON बेंगलुरु

इस तरह मथुरा के मध्यरात्रि जन्मोत्सव, मुंबई की दही हांडी, द्वारका के रास-गरबा, दक्षिण भारत के बाल कृष्ण पदचिह्न और श्रीनगर की शोभायात्रा ने भारत की सांस्कृतिक विविधता के बीच कृष्ण भक्ति की एक साझा तस्वीर प्रस्तुत की।

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