अमेरिका में हिंदू मंदिर पर गोलीबारी की साजिश, बंदूक जाम होने का दावा; भारत ने जताई नस्ली नफरत पर चिंता
अमेरिका के इलिनॉय में हिंदू मंदिर पर सामूहिक गोलीबारी की कथित साजिश में 19 वर्षीय युवक गिरफ्तार। अभियोजन पक्ष के मुताबिक उसकी राइफल जाम हो गई थी। भारत ने नस्ली नफरत पर चिंता जताकर जांच और भारतीय समुदाय की सुरक्षा की मांग की।
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US Hindu Temple Attack Plot: अमेरिका में मंदिर पर गोलीबारी की कथित साजिश में 19 साल का युवक गिरफ्तार। जानिए राइफल जाम होने का दावा, पुलिस की जांच और भारत की प्रतिक्रिया।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली/शिकागो | 15 अक्टूबर 2026
खबर में खास
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अमेरिका के इलिनॉय में हिंदू मंदिर पर सामूहिक गोलीबारी की कथित साजिश में 19 वर्षीय युवक गिरफ्तार।
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अभियोजन पक्ष का दावा है कि आरोपी की राइफल जाम होने के कारण गोलीबारी की कथित कोशिश नाकाम हो गई।
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पुलिस को आरोपी के घर से राइफल, सैकड़ों कारतूस और नस्ली नफरत से जुड़ी सामग्री मिली।
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भारत ने अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ नस्ली नफरत पर चिंता जताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की।
अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमले की कथित साजिश, भारत ने जताई चिंता
अमेरिका के इलिनॉय राज्य में एक हिंदू मंदिर पर सामूहिक गोलीबारी की कथित साजिश सामने आने के बाद भारत ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। अमेरिकी पुलिस ने इस मामले में 19 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। जांच में उसके पास से हथियार, बड़ी मात्रा में गोला-बारूद और भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ हिंसा का उल्लेख करने वाला कथित दस्तावेज बरामद हुआ है।
गिरफ्तार युवक की पहचान अलेक्जेंड्रोस पापोराकिस (Alexandros Paporakis) के रूप में हुई है। वह इलिनॉय के पैलेटाइन इलाके का निवासी है।
अमेरिकी अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने 11 अक्टूबर को ऑरोरा क्षेत्र में एक हिंदू पूजा स्थल को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। आरोप है कि उसने हथियार के साथ हमले की कोशिश भी की, लेकिन राइफल जाम हो गई।
हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी विशेष मंदिर को निशाना बनाए जाने की अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इस मामले पर 15 अक्टूबर को भारत के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका से पूरी जांच कराने और भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
आखिर कैसे नाकाम हुई गोलीबारी की कथित योजना?
अमेरिकी जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी पर बड़े पैमाने पर गोलीबारी की योजना बनाने का आरोप है।
अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में दी गई जानकारी के मुताबिक, आरोपी ने अपने सहकर्मियों से हिंसक इरादों के बारे में बात की थी।
स्थानीय मीडिया में प्रकाशित अदालती विवरण के अनुसार, आरोपी ने एक सहकर्मी से संपर्क करके बताया था कि उसकी बंदूक जाम हो गई और वह घटनास्थल से वापस लौट आया।
आरोप है कि इसके बाद उसने हथियार से संबंधित वीडियो और अन्य सामग्री भी भेजी।
सहकर्मियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पैलेटाइन और माउंट प्रॉस्पेक्ट पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि बंदूक जाम होने और घटनास्थल तक पहुंचने का विवरण अभियोजन पक्ष के आरोपों पर आधारित है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है।
19 साल का अलेक्जेंड्रोस पापोराकिस कौन है?
अमेरिकी पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी इलिनॉय के पैलेटाइन इलाके में रहता है और एक फास्ट-फूड रेस्तरां में कैशियर के रूप में काम करता था।
उसके सहकर्मियों ने जांच अधिकारियों को बताया कि वह कथित रूप से खुद को श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा का समर्थक बताता था।
उसके बातचीत करने के तरीके और संदेशों में भारतीय मूल के लोगों के प्रति हिंसक नफरत दिखाई देने का आरोप है।
पुलिस को उसके पास से एक कथित घोषणापत्र भी मिला है, जिसमें नस्ली श्रेष्ठता और हिंसक विचारों का उल्लेख किया गया था।
इस दस्तावेज में भारतीयों के अलावा यहूदी और अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय के खिलाफ भी हिंसक विचार होने की जानकारी अभियोजन पक्ष ने दी है।
अधिकारियों का कहना है कि इस सामग्री के आधार पर संभावित हमले के मकसद और उसकी तैयारी की जांच की जा रही है।
आरोपी के घर से क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने आरोपी के घर की तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण चीजें बरामद करने की जानकारी दी है।
इनमें एक AR-स्टाइल राइफल, लोडेड मैगजीन, सैकड़ों कारतूस और सुरक्षा उपकरण शामिल हैं।
जांच अधिकारियों को एक ऐसा टैक्टिकल वेस्ट भी मिला, जिस पर श्वेत वर्चस्ववादी उग्रवाद से जुड़ा प्रतीक लगा होने की जानकारी दी गई।
अमेरिकी रिपोर्टों के अनुसार, जांच में नाजी विचारधारा से संबंधित सामग्री भी सामने आई है।
बरामद सामग्री और आरोपी के डिजिटल संदेशों की जांच जारी है। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI भी स्थानीय पुलिस की सहायता कर रही है।
भारत ने क्या कहा? विदेश मंत्रालय का कड़ा बयान
भारत के विदेश मंत्रालय ने 15 अक्टूबर को इस घटना पर प्रतिक्रिया दी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इलिनॉय के ऑरोरा इलाके में एक हिंदू मंदिर पर सामूहिक गोलीबारी की कथित साजिश की खबर अत्यंत चिंताजनक है।
उन्होंने इस घटना के कथित हिंदू-विरोधी और नस्लवादी स्वरूप, विशेष रूप से भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ हिंसा के उल्लेख, पर गंभीर चिंता जताई।
विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की ओर से आरोपी को गिरफ्तार करने और उसके खिलाफ आरोप दर्ज करने की कार्रवाई का संज्ञान लिया है।
भारत का कहना है कि ऐसी घटनाएं अमेरिका में नस्ली शत्रुता और भारत-विरोधी नफरत को लेकर पहले से मौजूद चिंताओं को और बढ़ाती हैं।
विदेश मंत्रालय ने नफरत के आधार पर होने वाली हिंसा के प्रति कठोर रुख अपनाने और भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता बताई।
अमेरिकी सरकार से भारत ने क्या मांग की?
भारत ने अमेरिकी प्रशासन से इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने की अपेक्षा जताई है।
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जांच के बाद जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों को कानून के अनुसार न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए।
इसके अलावा ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की भी मांग की गई है।
इस प्रतिक्रिया का सीधा संबंध अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा से है।
हालांकि, भारत की ओर से व्यक्त बढ़ती नस्ली नफरत की चिंता को इस एक मामले से साबित हुआ व्यापक सांख्यिकीय निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
क्या सच में हिंदू मंदिर के अंदर गोलीबारी हुई?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है।
अभी तक उपलब्ध पुलिस रिपोर्टों से किसी हिंदू मंदिर के भीतर सामूहिक गोलीबारी होने या किसी श्रद्धालु की मौत होने की पुष्टि नहीं होती।
अमेरिकी पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित रूप से ऑरोरा क्षेत्र के किसी हिंदू पूजा स्थल को निशाना बना सकता था।
लेकिन जांच अधिकारी अभी संबंधित स्थान की निश्चित पहचान की पुष्टि नहीं कर पाए हैं।
इसलिए सोशल मीडिया पर किसी विशेष मंदिर की तस्वीर या नाम के साथ यह दावा करना कि वहीं गोलीबारी हुई थी, भ्रामक हो सकता है।
स्थानीय पुलिस ने ऑरोरा क्षेत्र के हिंदू पूजा स्थलों को संभावित खतरे के बारे में जानकारी दी है।
अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले से संबंधित जनता के लिए किसी ज्ञात जारी खतरे की पहचान नहीं हुई है।
मेरिकी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कौन-से आरोप लगाए?
