चीनी महंगी, E20 पेट्रोल पर घमासान: हरदोई में संजय सिंह बोले- ‘जनता पर दोहरी मार’; जानिए सरकार का जवाब

AAP सांसद ने चीनी के दाम और एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर केंद्र पर साधा निशाना; सरकार भी मानती है कि चीनी महंगी हुई, लेकिन कीमत बढ़ने के लिए एथेनॉल को जिम्मेदार मानने से किया इनकार

चीनी महंगी क्यों हुई और क्या E20 से गाड़ियों को नुकसान होता है? संजय सिंह के आरोप बनाम सरकार के आधिकारिक आंकड़े।

हरदोई पहुंचे AAP सांसद संजय सिंह ने चीनी की बढ़ती कीमतों और E20 पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने इसे जनता पर ‘दोहरी मार’ बताया। हालांकि केंद्र सरकार ने चीनी महंगाई और E20 को लेकर अलग तथ्य और आंकड़े पेश किए हैं।

हरदोई। देश में बढ़ती चीनी की कीमतों और E20 यानी 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने हरदोई पहुंचकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि आम जनता महंगाई की “दोहरी मार” झेल रही है।

रविवार शाम हरदोई पहुंचे संजय सिंह ने चीनी के बढ़ते दाम और पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण का मुद्दा उठाया। आपके साझा किए गए वीडियो में वह कहते हैं कि एक तरफ लोगों को महंगी चीनी का सामना करना पड़ रहा है, दूसरी तरफ पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर उपभोक्ताओं की चिंताएं हैं।

संजय सिंह बोले- जनता पर पड़ रही दो तरह की मार

संजय सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “जनता पर दो तरह की मार पड़ रही है।” उन्होंने चीनी की कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने का दावा किया और आरोप लगाया कि चीनी बनाने में इस्तेमाल हो सकने वाले गन्ने का बड़ा हिस्सा एथेनॉल उत्पादन की ओर चला गया।

संजय सिंह ने दावा किया कि करीब 25 लाख टन चीनी बनाने योग्य गन्ने/चीनी संसाधन का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में किया गया। उनका तर्क है कि इससे चीनी की उपलब्धता पर दबाव पड़ा और कीमतों में तेजी आई।

हालांकि इस दावे पर केंद्र सरकार का पक्ष अलग है।

चीनी सच में कितनी महंगी हुई? सरकार का आंकड़ा  

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हरदोई में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने चीनी की बढ़ती कीमतों और E20 पेट्रोल नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

केंद्र सरकार ने 21 अगस्त को जारी आधिकारिक आंकड़ों में स्वीकार किया कि हाल के हफ्तों में देश में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं।

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के मुताबिक 20 जुलाई 2026 को चीनी का औसत खुदरा भाव ₹48.18 प्रति किलो था, जो 20 अगस्त तक बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो हो गया। यानी एक महीने में औसत कीमत करीब ₹7.5 प्रति किलो बढ़ी।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि संजय सिंह ने करीब ₹65 प्रति किलो का आंकड़ा बताया है, जबकि केंद्र का आंकड़ा पूरे देश का औसत खुदरा मूल्य ₹55.70 बताता है। स्थानीय बाजारों में कीमतें राष्ट्रीय औसत से अधिक या कम हो सकती हैं।

सरकार बोली- एथेनॉल से नहीं महंगी हुई चीनी

संजय सिंह और विपक्षी दल जहां चीनी की महंगाई को एथेनॉल नीति से जोड़ रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार ने इस संबंध को सीधे खारिज किया है।

सरकार के मुताबिक 2022-23 में चीनी का करीब 12 फीसदी हिस्सा एथेनॉल उत्पादन की ओर जाता था, जबकि 2025-26 में यह हिस्सेदारी घटकर करीब 9 फीसदी रह गई। सरकार का यह भी कहना है कि देश में उत्पादित एथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का जैसे स्रोतों से आता है।

सरकार ने चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे दूसरे कारण बताए हैं—उम्मीद से कम उत्पादन, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, फसल पर मौसम और बीमारियों का असर, वैश्विक बाजार में कम आपूर्ति तथा कुछ कारोबारियों की जमाखोरी और सट्टेबाजी।

चीनी उत्पादन का अनुमान भी घटा

सरकार के मुताबिक मौजूदा सीजन में देश का चीनी उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। शुरुआती अनुमान करीब 343 लाख मीट्रिक टन था।

गन्ने में Red Rot और Top Borer जैसी बीमारियों और ज्यादा बारिश के कारण जलभराव को उत्पादन कम रहने की वजहों में गिना गया है।

इसी बीच सरकार ने बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने का भी फैसला किया है। चीनी कारोबारियों पर स्टॉक लिमिट लगाई गई है और जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक की जांच की जा रही है।

यहां राजनीतिक सवाल और दिलचस्प हो जाता है—अगर पर्याप्त स्टॉक है तो आयात की जरूरत क्यों पड़ी? वहीं सरकार का कहना है कि आयात एहतियाती कदम है ताकि त्योहारी सीजन में उपलब्धता और कीमत नियंत्रित रखी जा सके।

E20 पेट्रोल को लेकर क्या बोले संजय सिंह?

संजय सिंह ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि E20 पेट्रोल के कारण कई वाहन मालिक माइलेज कम होने और इंजन से जुड़ी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं।

इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी पहले भी केंद्र सरकार के खिलाफ अभियान चला चुकी है और उपभोक्ताओं को सामान्य पेट्रोल तथा E20 में विकल्प देने की मांग करती रही है।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है।

E20 क्या है?

E20 का मतलब पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और करीब 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण है। यह कोई अवैध मिलावट नहीं बल्कि भारत सरकार की Ethanol Blended Petrol Programme के तहत लागू किया गया मानक fuel blend है। सरकार ने 2025-26 तक 20% blending का लक्ष्य निर्धारित किया था।

इसलिए राजनीतिक भाषण में इसे “मिलावटी पेट्रोल” कहा जाना एक आलोचनात्मक राजनीतिक शब्दावली है; तकनीकी तौर पर E20 और अवैध fuel adulteration एक ही चीज नहीं हैं।

क्या E20 से इंजन खराब हो रहे हैं?

केंद्र सरकार ने ऐसे दावों का भी खंडन किया है।

30 जुलाई को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि ARAI, SIAM, IOCL, Indian Institute of Petroleum और वाहन कंपनियों के परीक्षणों में तय मानकों के तहत E20 से बड़े पैमाने पर engine failure या abnormal wear का प्रमाण नहीं मिला।

सरकार का दावा है कि देश में 20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चली हैं और व्यापक स्तर पर E20 से जुड़ी engine failure की पुष्टि नहीं हुई।

Oil Marketing Companies ने अगस्त में E20 में moisture और chloride contamination की शिकायतों पर भी अतिरिक्त जांच की और कहा कि परीक्षण में fuel निर्धारित specifications के भीतर पाया गया।

लेकिन माइलेज को लेकर सरकार क्या कहती है?

सरकार और वाहन निर्माताओं ने यह जरूर माना है कि कुछ पुराने, मूल रूप से E10 के लिए डिजाइन किए गए वाहनों में fuel economy पर सीमित असर पड़ सकता है।

पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार ऐसे कुछ पुराने वाहनों में mileage में लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक कमी संभव है। साथ ही mileage पर driving style, traffic, tyre pressure, maintenance और AC के इस्तेमाल जैसे दूसरे factors का भी असर पड़ता है।

इसलिए यह कहना कि E20 से हर वाहन का इंजन खराब हो रहा है, उपलब्ध आधिकारिक evidence से साबित नहीं होता; लेकिन fuel efficiency को लेकर कुछ उपभोक्ता चिंताओं का आधार पूरी तरह काल्पनिक भी नहीं है।

हरदोई से संजय सिंह ने और किन मुद्दों पर सरकार को घेरा?

हरदोई की प्रेस वार्ता में संजय सिंह ने केवल चीनी और एथेनॉल का मुद्दा नहीं उठाया। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बेरोजगारी, पेपर लीक, मतदाता सूची से जुड़े SIR विवाद और छात्रों से जुड़े मामलों को लेकर भी केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल खड़े किए।

लेकिन मौजूदा समय में उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे बड़ा राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा चीनी की कीमत और E20 पेट्रोल बन गया है, क्योंकि दोनों विषय सीधे आम लोगों की जेब से जुड़े हैं।

आखिर सच क्या है?

इस विवाद में दो बातें एक साथ सही हो सकती हैं।

पहली, चीनी की कीमतें वास्तव में तेजी से बढ़ी हैं। सरकार के अपने आंकड़े एक महीने में औसत खुदरा भाव ₹48.18 से ₹55.70 प्रति किलो पहुंचने की पुष्टि करते हैं।

दूसरी, चीनी के दाम बढ़ने के लिए सिर्फ एथेनॉल को जिम्मेदार ठहराना अभी स्थापित तथ्य नहीं है। केंद्र ने इस संबंध को खारिज करते हुए कम उत्पादन, मौसम, वैश्विक आपूर्ति और जमाखोरी जैसे दूसरे कारण बताए हैं।

E20 को लेकर भी तस्वीर ऐसी ही है। विपक्ष इसे उपभोक्ताओं की जेब और वाहनों के लिए समस्या बता रहा है, जबकि सरकार इसे वैज्ञानिक परीक्षणों से सुरक्षित और ऊर्जा आयात घटाने वाली नीति बताती है।

यानी आने वाले दिनों में महंगी चीनी और E20 पेट्रोल का मुद्दा सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने के पूरे संकेत दे रहा है।

नोट: इस खबर में संजय सिंह के चीनी की कीमत, एथेनॉल और वाहन नुकसान से जुड़े बयानों को राजनीतिक दावे के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जहां उपलब्ध था, वहां केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़े और जवाब भी शामिल किए गए हैं। 

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