नेपाल की तबाही पर राजनाथ सिंह बोले- ‘भारत चिंतित, लगातार भेज रहे मदद’; 626 मौतों के बीच Rescue जारी

लखनऊ में रक्षामंत्री ने कहा- प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल की हर जरूरत में भारत की मदद का भरोसा दिया; तीन उड़ानों से करीब 60 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी, हजारों लोगों की तलाश जारी

नेपाल की प्राकृतिक आपदा पर भारत की चिंता और लगातार सहायता को लेकर लखनऊ में बयान देते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और ग्लेशियर धंसने की आपदा पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत बेहद चिंतित है और नेपाल को लगातार सहायता भेजी जा रही है। ताजा रिपोर्टों में नेपाल में 626 मौतें और 2,400 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी है।

लखनऊ। नेपाल में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के बीच भारत ने एक बार फिर पड़ोसी देश के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को लखनऊ में कहा कि नेपाल में बनी संकट की स्थिति को लेकर भारत चिंतित है और पड़ोसी देश को लगातार सहायता भेजी जा रही है।

राजनाथ सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि नेपाल को जिस भी तरह की जरूरत होगी, भारत मदद उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि राहत सहायता लगातार नेपाल पहुंचाई जा रही है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे की धारा के बाद राहत एवं बचाव अभियान चौथे दिन भी जारी है।

नेपाल में 626 मौतें, 2400 से ज्यादा अब भी लापता

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में कहा कि नेपाल में आई आपदा से भारत चिंतित है और पड़ोसी देश को लगातार सहायता भेजी जा रही है।

आपदा का पैमाना लगातार बड़ा होता जा रहा है।

Reuters की 29 अगस्त की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल में कम से कम 626 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 2,426 लोग अभी भी लापता हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी कम से कम सात मौतें और 554 लोगों के लापता होने की जानकारी है।

नेपाल और तिब्बत को मिलाकर लगभग 3,000 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

लापता लोगों में कम से कम 540 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए भारतीय श्रद्धालु हैं।

इसलिए casualty figures आगे भी बदल सकते हैं।

आखिर नेपाल में हुआ क्या था?

26 अगस्त को हिमालयी क्षेत्र में एक बड़े glacier collapse के बाद चट्टानों, बर्फ, मिट्टी और मलबे का विशाल प्रवाह नदी घाटियों में नीचे की ओर आया।

इसने कुछ ही समय में बस्तियों, पुलों, सड़कों, बिजली परियोजनाओं और सीमा से जुड़े infrastructure को तबाह कर दिया। Reuters की मौजूदा reporting glacier collapse को disaster trigger बताती है, हालांकि glacier collapse क्यों हुआ—इसका exact कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

विशेषज्ञ earthquake और गर्म तापमान के कारण glacier instability जैसे factors की जांच कर रहे हैं।

इसलिए headline में अब भी:

“भूकंप से ही पूरी बाढ़ आई”

जैसा definitive claim न करें।

भारत ने अब तक कितनी मदद भेजी?

राजनाथ सिंह का “लगातार सहायता भेज रहे हैं” वाला बयान केवल राजनीतिक आश्वासन तक सीमित नहीं है।

Reuters के मुताबिक भारत अब तक तीन उड़ानों के जरिए करीब 60 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है। इसमें blankets, medicines, food और water-purification tablets जैसी जरूरी वस्तुएं शामिल हैं।

भारत ने इसके अलावा:

tunnel rescue team, medical team, disaster response force, prefabricated bridges और technical teams

की सहायता भी offer की है।

यानी राहत का अगला phase सिर्फ भोजन और दवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि destroyed connectivity और कठिन rescue operations में technical support भी महत्वपूर्ण होगा।

PM Modi ने भी Nepal PM से की थी बात

26 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बात की थी।

प्रधानमंत्री ने मौतों पर संवेदना जताते हुए कहा था कि इस मुश्किल समय में भारत के लोग नेपाल के भाई-बहनों के साथ खड़े हैं और भारत हरसंभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। भारतीय टीमें नेपाली अधिकारियों के साथ rescue और relief में coordination कर रही हैं।

अब 29 अगस्त को राजनाथ सिंह ने इसी commitment को दोहराते हुए कहा है कि मदद लगातार भेजी जा रही है।

यही आपकी story का fresh political-diplomatic angle है।

खराब मौसम से Rescue Operation भी रुका

नेपाल में राहत अभियान के सामने मौसम एक नई चुनौती बन गया है।

Reuters के मुताबिक शनिवार को भारी बारिश और fog के कारण कुछ क्षेत्रों में search and rescue operations को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। कई सड़कें और पुल नष्ट हो चुके हैं, इसलिए rescued pilgrims और दूसरे लोगों को Kathmandu तक पहुंचाना भी चुनौती बन रहा है।

कई शव decomposition की स्थिति में मिले हैं और उनकी पहचान मुश्किल हो गई है।

Authorities ऐसे मामलों में DNA samples लेने के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शवों के अंतिम संस्कार/दफन की तैयारी कर रही हैं।

नेपाल ने भारत समेत दुनिया से किस मदद की मांग की?

नेपाल ने साफ किया है कि वह सामान्य search-and-rescue operation बड़े स्तर पर खुद संभाल रहा है, लेकिन कुछ technical areas में international assistance की जरूरत है।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक देश को खास तौर पर:

  • सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने,
  • टूटे bridges के कारण transport connectivity बहाल करने,
  • communication networks ठीक करने,
  • शवों की पहचान,
  • DNA testing,
  • और bodies को सुरक्षित रखने

जैसी specialized technical capabilities की आवश्यकता है।

यही वजह है कि भारत की tunnel-rescue, medical और engineering teams की पेशकश महत्वपूर्ण हो जाती है।

पुनर्निर्माण में लग सकते हैं 4-5 अरब डॉलर

इस आपदा ने नेपाल को केवल मानवीय नुकसान नहीं पहुंचाया है।

नेपाल के Finance Minister Swarnim Wagle ने Reuters को बताया कि शुरुआती अनुमान के मुताबिक rebuilding में लगभग 4 से 5 अरब डॉलर की जरूरत पड़ सकती है। नुकसान का विस्तृत assessment अभी जारी है।

इसलिए आने वाले महीनों में India-Nepal cooperation सिर्फ immediate relief तक सीमित नहीं रहेगा।

Bridges, roads, communication network और hydropower infrastructure के reconstruction में भी international assistance बड़ा मुद्दा बन सकती है।

क्या दूसरी बाढ़ का खतरा टल गया?

पूरी तरह नहीं।

China-Nepal border के पास glacier collapse के बाद बनी एक temporary lake का आकार शनिवार तक कम हुआ है, जिससे immediate burst risk घटा है। लेकिन authorities एक दूसरी, और बड़ी water body पर भी नजर रख रही हैं।

Reuters के मुताबिक flood risk तब तक पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता जब तक upstream में बनी दोनों lakes सुरक्षित तरीके से drain नहीं हो जातीं।

इसलिए राहत अभियान के साथ secondary disaster risk भी monitoring का बड़ा हिस्सा बना हुआ है।

राजनाथ सिंह का बयान क्यों महत्वपूर्ण?

राजनाथ सिंह ने यह बयान लखनऊ में दिया है, इसलिए आपकी UP audience के लिए इसमें local political relevance भी है।

उनका statement तीन बातें साफ करता है:

भारत नेपाल की आपदा को गंभीरता से देख रहा है, राहत सामग्री पहले से भेजी जा रही है और आवश्यकता के मुताबिक आगे भी सहायता जारी रहेगी।

इससे story केवल Nepal flood update नहीं रहती, बल्कि India-Nepal humanitarian diplomacy + Lucknow political statement वाली नई story बन जाती है।

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