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                <title>Uttar Pradesh Politics - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <title>रविदास मेहरोत्रा कौन हैं? 174-लखनऊ मध्य से 3 बार विधायक, अखिलेश सरकार में रहे मंत्री; जानिए पूरा राजनीतिक सफर</title>
                                    <description><![CDATA[रविदास मेहरोत्रा समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और 174-लखनऊ मध्य विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। जानिए उनका जन्म, शिक्षा, छात्र राजनीति, विधानसभा चुनावों का इतिहास, मंत्री पद, 2024 लोकसभा चुनाव, संपत्ति और चुनावी शपथपत्र में घोषित मुकदमों की पूरी जानकारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/wravidas-mehrotra-biography-lucknow-central-mla-sp-political-career-election-profileho-is-ravidas-mehrotra-174-3-times-mla-from-lucknow/article-1860"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-08/ravidas-mehrotra-lucknow-central-mla-samajwadi-party-profile.jpg1.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">रविदास मेहरोत्रा कौन हैं?</h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-08/ravidas-mehrotra-lucknow-central-mla-samajwadi-party-profile.jpg1.jpg" alt="ravidas-mehrotra-lucknow-central-mla-samajwadi-party-profile.jpg" width="1366" height="768"></img>
रविदास मेहरोत्रा समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और 174-लखनऊ मध्य विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार विधायक हैं।

<p><strong>रविदास मेहरोत्रा</strong> समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और <strong>174–लखनऊ मध्य विधानसभा क्षेत्र से विधायक</strong> हैं। वह अब तक तीन बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हो चुके हैं। अखिलेश यादव की सरकार में वह <strong>परिवार कल्याण तथा मातृ एवं शिशु कल्याण विभाग के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार</strong> भी रह चुके हैं।</p>
<p>छात्र राजनीति और जन आंदोलनों से अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले रविदास मेहरोत्रा करीब पांच दशक से लखनऊ की राजनीति में सक्रिय हैं। उनकी पहचान सड़क से लेकर विधानसभा तक नागरिक समस्याओं को उठाने वाले नेताओं में होती है।</p>
<p>महंगाई, बेरोजगारी, व्यापारियों की समस्याएं, सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं, बिजली-पानी, सड़क और दूसरी स्थानीय नागरिक सुविधाएं उनके राजनीतिक आंदोलनों के प्रमुख विषय रहे हैं।</p>
<h1>जन्म और पारिवारिक परिचय</h1>
<p>रविदास मेहरोत्रा का जन्म <strong>21 अप्रैल 1955 को लखनऊ</strong> में हुआ था। उनके पिता का नाम स्वर्गीय <strong>वाई.एस. मेहरोत्रा</strong> था।</p>
<p>उनका विवाह वर्ष <strong>1981 में रश्मि मेहरोत्रा</strong> से हुआ था। उपलब्ध पारिवारिक विवरण के अनुसार उनकी एक पुत्री और एक पुत्र हैं।</p>
<p>वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में दाखिल उनके चुनावी शपथपत्र में उनकी पत्नी को दिवंगत बताया गया था।</p>
<h1>रविदास मेहरोत्रा की शिक्षा</h1>
<p>रविदास मेहरोत्रा ने अपनी उच्च शिक्षा लखनऊ से ही पूरी की।</p>
<p>चुनावी शपथपत्र के मुताबिक उन्होंने:</p>
<ul>
<li>वर्ष <strong>1975 में जयनारायण डिग्री कॉलेज से BSc</strong> की।</li>
<li>वर्ष <strong>1979 में लखनऊ विश्वविद्यालय से LLB</strong> की उपाधि प्राप्त की।</li>
</ul>
<p>इस तरह वह शिक्षा से विज्ञान स्नातक और विधि स्नातक हैं। हालांकि उनका अधिकांश सार्वजनिक जीवन राजनीति, सामाजिक सेवा और आंदोलनों में बीता है।</p>
<h1>छात्र राजनीति से हुई राजनीतिक जीवन की शुरुआत</h1>
<p>रविदास मेहरोत्रा का राजनीतिक सफर छात्र जीवन से शुरू हुआ।</p>
<p>वह <strong>जयनारायण महाविद्यालय छात्रसंघ के उपाध्यक्ष</strong> रहे। इसके बाद वह <strong>लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के महामंत्री</strong> भी चुने गए।</p>
<p>छात्र राजनीति के दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, विद्यार्थियों की समस्याओं और नागरिक मुद्दों को लेकर कई आंदोलनों में भाग लिया।</p>
<p>यही दौर था जिसने उन्हें लखनऊ की स्थानीय राजनीति में पहचान दिलाई।</p>
<h1>समाजवादी आंदोलन से जुड़ाव</h1>
<p>पढ़ाई पूरी करने के बाद रविदास मेहरोत्रा समाजवादी विचारधारा से जुड़े।</p>
<p>उन्होंने अलग-अलग समाजवादी संगठनों के साथ काम किया और बाद में समाजवादी पार्टी से अपनी राजनीतिक यात्रा आगे बढ़ाई।</p>
<p>पार्टी संगठन में भी उन्होंने प्रदेश स्तर पर जिम्मेदारियां संभालीं। अलग-अलग समय में वह समाजवादी पार्टी के <strong>प्रदेश महासचिव सहित कई संगठनात्मक पदों</strong> पर रहे।</p>
<p>रविदास मेहरोत्रा की राजनीतिक शैली का बड़ा हिस्सा <strong>धरना, प्रदर्शन और जन आंदोलन</strong> रहा है।</p>
<h1>1989 में पहली बार बने विधायक</h1>
<p>रविदास मेहरोत्रा पहली बार <strong>नवंबर 1989</strong> में उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य चुने गए।</p>
<p>उस समय उन्होंने <strong>लखनऊ पूर्व विधानसभा क्षेत्र</strong> से जनता दल के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था।</p>
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<table class="w-fit min-w-(--thread-content-width)">
<thead>
<tr>
<th class="last:pe-10">उम्मीदवार</th>
<th class="last:pe-10">पार्टी</th>
<th class="last:pe-10">प्राप्त वोट</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><strong>रविदास मेहरोत्रा</strong></td>
<td>जनता दल</td>
<td><strong>23,966</strong></td>
</tr>
<tr>
<td>स्वरूप कुमारी बख्शी</td>
<td>कांग्रेस</td>
<td>17,053</td>
</tr>
<tr>
<td>भगवती प्रसाद शुक्ल</td>
<td>भाजपा</td>
<td>10,764</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
</div>
<p>रविदास मेहरोत्रा ने कांग्रेस प्रत्याशी स्वरूप कुमारी बख्शी को <strong>6,913 मतों के अंतर</strong> से हराया।</p>
<p>यह उनका पहला विधानसभा कार्यकाल था।</p>
<h1>पहली जीत के बाद लंबा चुनावी संघर्ष</h1>
<p>1989 की जीत के बाद रविदास मेहरोत्रा ने लखनऊ की अलग-अलग सीटों से कई चुनाव लड़े।</p>
<p>इस दौरान उन्हें कई बार हार का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने स्थानीय राजनीति और समाजवादी आंदोलन में अपनी सक्रियता जारी रखी।</p>
<p>वर्ष <strong>2002</strong> के विधानसभा चुनाव में वह लखनऊ पूर्व सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार थे।</p>
<p>उस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी <strong>विद्यासागर गुप्ता ने उन्हें केवल 339 वोटों के मामूली अंतर</strong> से हराया था।</p>
<p>इतनी करीबी हार के बावजूद रविदास मेहरोत्रा लखनऊ में लगातार सक्रिय रहे।</p>
<h1>2012 में दूसरी बार विधानसभा पहुंचे</h1>
<p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2012 में समाजवादी पार्टी ने रविदास मेहरोत्रा को <strong>174–लखनऊ मध्य विधानसभा क्षेत्र</strong> से उम्मीदवार बनाया।</p>
<p>इस बार उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की।</p>
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<div class="TyagGW_tableWrapper flex flex-col-reverse w-fit">
<table class="w-fit min-w-(--thread-content-width)">
<thead>
<tr>
<th class="last:pe-10">उम्मीदवार</th>
<th class="last:pe-10">पार्टी</th>
<th class="last:pe-10">प्राप्त वोट</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><strong>रविदास मेहरोत्रा</strong></td>
<td>समाजवादी पार्टी</td>
<td><strong>62,622</strong></td>
</tr>
<tr>
<td>विद्यासागर गुप्ता</td>
<td>भाजपा</td>
<td>39,890</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
</div>
<p>रविदास मेहरोत्रा ने भाजपा प्रत्याशी विद्यासागर गुप्ता को <strong>22,732 वोटों के अंतर</strong> से हराया।</p>
<p>इस जीत के साथ वह दूसरी बार उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंचे।</p>
<p>2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने प्रदेश में सरकार बनाई और <strong>अखिलेश यादव मुख्यमंत्री</strong> बने।</p>
<h1>अखिलेश यादव सरकार में बने मंत्री</h1>
<p>अखिलेश यादव सरकार के अंतिम दौर में वर्ष <strong>2016</strong> में रविदास मेहरोत्रा को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।</p>
<p>उन्हें मुख्य रूप से:</p>
<ul>
<li>परिवार कल्याण</li>
<li>मातृ कल्याण</li>
<li>शिशु कल्याण</li>
</ul>
<p>से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी दी गई।</p>
<p>वह इन विभागों के <strong>राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार</strong> रहे।</p>
<p>उनके मंत्री कार्यकाल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, टीकाकरण और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से संबंधित प्रशासनिक जिम्मेदारियां उनके विभाग के दायरे में थीं।</p>
<p>उनका मंत्री कार्यकाल <strong>2016 से 2017</strong> तक रहा।</p>
<h1>2017 में ब्रजेश पाठक से हुआ मुकाबला</h1>
<p>2017 के विधानसभा चुनाव में रविदास मेहरोत्रा एक बार फिर लखनऊ मध्य सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार बने।</p>
<p>इस बार भाजपा ने उनके सामने <strong>ब्रजेश पाठक</strong> को उतारा।</p>
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<table class="w-fit min-w-(--thread-content-width)">
<thead>
<tr>
<th class="last:pe-10">उम्मीदवार</th>
<th class="last:pe-10">पार्टी</th>
<th class="last:pe-10">प्राप्त वोट</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>ब्रजेश पाठक</td>
<td>भाजपा</td>
<td><strong>78,400</strong></td>
</tr>
<tr>
<td>रविदास मेहरोत्रा</td>
<td>समाजवादी पार्टी</td>
<td><strong>73,306</strong></td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
</div>
<p>ब्रजेश पाठक ने उन्हें <strong>5,094 वोटों के अंतर</strong> से पराजित किया।</p>
<p>इस हार के बाद रविदास मेहरोत्रा वर्ष 2017 से 2022 तक विधानसभा से बाहर रहे।</p>
<h1>2022 में तीसरी बार विधायक बने</h1>
<p>वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर रविदास मेहरोत्रा पर भरोसा जताया।</p>
<p>भाजपा ने इस बार लखनऊ मध्य से <strong>रजनीश कुमार गुप्ता</strong> को प्रत्याशी बनाया।</p>
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<table class="w-fit min-w-(--thread-content-width)">
<thead>
<tr>
<th class="last:pe-10">उम्मीदवार</th>
<th class="last:pe-10">पार्टी</th>
<th class="last:pe-10">प्राप्त वोट</th>
<th class="last:pe-10">मत प्रतिशत</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><strong>रविदास मेहरोत्रा</strong></td>
<td>समाजवादी पार्टी</td>
<td><strong>1,04,488</strong></td>
<td><strong>49.62%</strong></td>
</tr>
<tr>
<td>रजनीश कुमार गुप्ता</td>
<td>भाजपा</td>
<td>93,553</td>
<td>44.43%</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
</div>
<p>रविदास मेहरोत्रा ने भाजपा उम्मीदवार को <strong>10,935 वोटों के अंतर</strong> से हराया।</p>
<p>इस जीत के साथ उन्होंने पांच साल बाद लखनऊ मध्य सीट पर वापसी की और <strong>तीसरी बार विधायक</strong> बने।</p>
<h1>2024 में लखनऊ से लोकसभा चुनाव</h1>
<p>समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में रविदास मेहरोत्रा को <strong>लखनऊ संसदीय क्षेत्र</strong> से उम्मीदवार बनाया।</p>
<p>उनका मुकाबला भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय रक्षामंत्री <strong>राजनाथ सिंह</strong> से हुआ।</p>
<div class="group TyagGW_tableContainer">
<div class="TyagGW_tableWrapper flex flex-col-reverse w-fit">
<table class="w-fit min-w-(--thread-content-width)">
<thead>
<tr>
<th class="last:pe-10">उम्मीदवार</th>
<th class="last:pe-10">पार्टी</th>
<th class="last:pe-10">प्राप्त वोट</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>राजनाथ सिंह</td>
<td>भाजपा</td>
<td><strong>6,12,709</strong></td>
</tr>
<tr>
<td>रविदास मेहरोत्रा</td>
<td>समाजवादी पार्टी</td>
<td><strong>4,77,550</strong></td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
</div>
<p>रविदास मेहरोत्रा को <strong>4,77,550 वोट</strong> मिले।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने उन्हें <strong>1,35,159 मतों के अंतर</strong> से पराजित किया।</p>
<p>लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद रविदास मेहरोत्रा <strong>लखनऊ मध्य के विधायक बने रहे।</strong></p>
<h1>रविदास मेहरोत्रा का राजनीतिक सफर: Timeline</h1>
<div class="group TyagGW_tableContainer">
<div class="TyagGW_tableWrapper flex flex-col-reverse w-fit">
<table class="w-fit min-w-(--thread-content-width)">
<thead>
<tr>
<th class="last:pe-10">वर्ष</th>
<th class="last:pe-10">प्रमुख राजनीतिक घटनाक्रम</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><strong>छात्र जीवन</strong></td>
<td>जयनारायण महाविद्यालय छात्रसंघ के उपाध्यक्ष</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>छात्र जीवन</strong></td>
<td>लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के महामंत्री</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>1989</strong></td>
<td>जनता दल से लखनऊ पूर्व के विधायक निर्वाचित</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2002</strong></td>
<td>लखनऊ पूर्व से केवल 339 वोटों से चुनाव हारे</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2012</strong></td>
<td>समाजवादी पार्टी से लखनऊ मध्य के विधायक बने</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2016–2017</strong></td>
<td>परिवार कल्याण तथा मातृ-शिशु कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2017</strong></td>
<td>लखनऊ मध्य में ब्रजेश पाठक से चुनाव हारे</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2022</strong></td>
<td>लखनऊ मध्य से तीसरी बार विधायक बने</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2024</strong></td>
<td>लखनऊ लोकसभा सीट से SP उम्मीदवार, राजनाथ सिंह से पराजित</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>वर्तमान</strong></td>
<td>174–लखनऊ मध्य से समाजवादी पार्टी के विधायक</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
</div>
<h1>सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियां</h1>
<p>रविदास मेहरोत्रा का राजनीतिक जीवन केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं रहा है।</p>
<p>वह अलग-अलग सामाजिक, राजनीतिक और जन संगठनों से भी जुड़े रहे हैं।</p>
<p>उपलब्ध सार्वजनिक विवरणों में उनका नाम <strong>लोक सेनानी कल्याण से जुड़े संगठनों, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं</strong> के साथ भी जुड़ा मिलता है।</p>
<p>उनकी प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं:</p>
<ul>
<li>महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन</li>
<li>बेरोजगारी के मुद्दे</li>
<li>व्यापारियों की समस्याएं</li>
<li>बिजली-पानी और सड़क के मुद्दे</li>
<li>सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था</li>
<li>स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े सवाल</li>
<li>गरीब एवं जरूरतमंदों की सहायता</li>
<li>दुर्घटना पीड़ितों की मदद</li>
<li>विधानसभा में लखनऊ की स्थानीय समस्याओं को उठाना</li>
</ul>
<p>संगठनों में उनके वर्तमान पद समय के साथ बदल सकते हैं, इसलिए किसी मौजूदा संगठनात्मक पद को प्रकाशित करते समय आधिकारिक पुष्टि करना उचित होगा।</p>
<h1>विधानसभा में रविदास मेहरोत्रा की सक्रियता</h1>
<p>विधायकों की गतिविधियों को track करने वाली संस्था PRS के उपलब्ध आंकड़ों में रविदास मेहरोत्रा की विधानसभा उपस्थिति लगभग <strong>98.4 प्रतिशत</strong> दर्ज की गई है।</p>
<p>इसी data period में प्रदेश के विधायकों की औसत उपस्थिति लगभग <strong>86.8 प्रतिशत</strong> बताई गई थी।</p>
<p>यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह संबंधित tracking period तक का आंकड़ा है, पूरे मौजूदा विधानसभा कार्यकाल का अंतिम attendance figure नहीं।</p>
<h1>2024 के शपथपत्र में कितनी संपत्ति घोषित की?</h1>
<p>रविदास मेहरोत्रा ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में नया चुनावी शपथपत्र दाखिल किया था।</p>
<p>यह वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में दाखिल affidavit से अधिक नया public declaration है।</p>
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<table class="w-fit min-w-(--thread-content-width)">
<thead>
<tr>
<th class="last:pe-10">विवरण</th>
<th class="last:pe-10">2024 में घोषित जानकारी</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><strong>कुल संपत्ति</strong></td>
<td><strong>₹1,18,50,112</strong></td>
</tr>
<tr>
<td><strong>कुल देनदारियां</strong></td>
<td><strong>₹88,480</strong></td>
</tr>
<tr>
<td><strong>पेशा</strong></td>
<td>विधानसभा सदस्य</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>शैक्षणिक योग्यता</strong></td>
<td>LLB</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>आयु</strong></td>
<td>69 वर्ष</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>घोषित लंबित आपराधिक मामले</strong></td>
<td><strong>18</strong></td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
</div>
<p>ये आंकड़े उम्मीदवार की ओर से चुनाव आयोग को दिए गए <strong>स्वघोषित चुनावी शपथपत्र</strong> पर आधारित हैं।</p>
<p>इसका अर्थ यह नहीं है कि वर्ष 2026 में भी उनकी वर्तमान संपत्ति बिल्कुल इतनी ही है।</p>
<p>इसलिए वेबसाइट पर इसे:</p>
<p><strong>“2024 के चुनावी शपथपत्र में घोषित संपत्ति”</strong></p>
<p>के रूप में ही लिखें।</p>
<h1>रविदास मेहरोत्रा पर कितने मुकदमे घोषित हैं?</h1>
<p>2024 के लोकसभा चुनाव के शपथपत्र में रविदास मेहरोत्रा ने <strong>18 लंबित आपराधिक मामलों</strong> की जानकारी दी थी।</p>
<p>इन मामलों में अलग-अलग समय के धरना-प्रदर्शन, निषेधाज्ञा उल्लंघन, रास्ता रोकने, सरकारी काम में बाधा, बलवा और दूसरी धाराओं से जुड़े मामलों का उल्लेख है।</p>
<p>कुछ मामलों में गंभीर धाराओं का भी विवरण दिया गया है।</p>
<p>लेकिन यहां कानूनी रूप से एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है:</p>
<p><strong>मुकदमा दर्ज होना, आरोप लगना और अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाना तीन अलग-अलग बातें हैं।</strong></p>
<p>इसलिए रविदास मेहरोत्रा को केवल इन pending cases के आधार पर <strong>“अपराधी” या “दोषी”</strong> नहीं कहा जा सकता।</p>
<p>सही wording होगी:</p>
<p><strong>“2024 के चुनावी शपथपत्र में उन्होंने 18 लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी घोषित की थी।”</strong></p>
<p>2022 के विधानसभा चुनावी affidavit में उनके खिलाफ <strong>22 मामले</strong> घोषित थे, जबकि 2024 के नवीनतम affidavit में संख्या <strong>18</strong> दर्ज है।</p>
<p>इसीलिए मौजूदा profile में newer 2024 declaration का इस्तेमाल करना ज्यादा उचित है।</p>
<h1>लखनऊ की राजनीति में रविदास मेहरोत्रा की पहचान</h1>
<p>रविदास मेहरोत्रा की राजनीतिक पहचान लखनऊ की <strong>जमीनी समाजवादी राजनीति</strong> से जुड़े पुराने नेता के रूप में रही है।</p>
<p>उनके करीब पांच दशक लंबे सार्वजनिक जीवन के कुछ प्रमुख पड़ाव हैं:</p>
<ul>
<li>छात्र राजनीति से शुरुआत</li>
<li>लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका</li>
<li>1989 में पहली बार विधायक</li>
<li>जनता दल से समाजवादी पार्टी तक का सफर</li>
<li>2012 में दूसरी विधानसभा जीत</li>
<li>अखिलेश यादव सरकार में मंत्री</li>
<li>2017 में हार</li>
<li>2022 में लखनऊ मध्य से वापसी</li>
<li>तीन बार विधानसभा सदस्य</li>
<li>2024 में लखनऊ से लोकसभा चुनाव</li>
<li>स्थानीय नागरिक मुद्दों पर लगातार आंदोलन</li>
</ul>
<p>लंबे राजनीतिक जीवन में उन्हें चुनावी जीत और हार दोनों का सामना करना पड़ा, लेकिन लखनऊ मध्य और आसपास के क्षेत्रों में उनकी राजनीतिक सक्रियता लगातार बनी रही।</p>
<h1>एक नजर में रविदास मेहरोत्रा</h1>
<div class="group TyagGW_tableContainer">
<div class="TyagGW_tableWrapper flex flex-col-reverse w-fit">
<table class="w-fit min-w-(--thread-content-width)">
<thead>
<tr>
<th class="last:pe-10">जानकारी</th>
<th class="last:pe-10">विवरण</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><strong>पूरा नाम</strong></td>
<td>रविदास मेहरोत्रा</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>जन्म</strong></td>
<td>21 अप्रैल 1955</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>जन्मस्थान</strong></td>
<td>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>पिता</strong></td>
<td>स्वर्गीय वाई.एस. मेहरोत्रा</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>शिक्षा</strong></td>
<td>BSc, LLB</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>पार्टी</strong></td>
<td>समाजवादी पार्टी</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>विधानसभा क्षेत्र</strong></td>
<td>174–लखनऊ मध्य</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>पहली विधानसभा जीत</strong></td>
<td>1989, लखनऊ पूर्व</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>दूसरी जीत</strong></td>
<td>2012, लखनऊ मध्य</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>तीसरी जीत</strong></td>
<td>2022, लखनऊ मध्य</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>मंत्री पद</strong></td>
<td>राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार, परिवार कल्याण एवं मातृ-शिशु कल्याण</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2024 लोकसभा चुनाव</strong></td>
<td>लखनऊ से SP प्रत्याशी</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2024 लोकसभा वोट</strong></td>
<td>4,77,550</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2024 घोषित संपत्ति</strong></td>
<td>₹1.18 करोड़ से अधिक</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2024 घोषित लंबित मामले</strong></td>
<td>18</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
</div>
<h1>Website के लिए Short Biography</h1>
<p><strong>रविदास मेहरोत्रा समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और 174–लखनऊ मध्य विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार विधायक हैं। उनका जन्म 21 अप्रैल 1955 को लखनऊ में हुआ। उन्होंने वर्ष 1975 में जयनारायण डिग्री कॉलेज से BSc और वर्ष 1979 में लखनऊ विश्वविद्यालय से LLB की शिक्षा प्राप्त की। छात्र राजनीति में वह जयनारायण महाविद्यालय छात्रसंघ के उपाध्यक्ष और लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के महामंत्री रहे। वर्ष 1989 में वह जनता दल के टिकट पर लखनऊ पूर्व से पहली बार विधायक बने। 2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर लखनऊ मध्य से दूसरी जीत दर्ज की और वर्ष 2016 में अखिलेश यादव सरकार में परिवार कल्याण तथा मातृ एवं शिशु कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाए गए। 2017 में भाजपा के ब्रजेश पाठक से 5,094 वोटों से हारने के बाद उन्होंने 2022 में वापसी की और भाजपा प्रत्याशी रजनीश कुमार गुप्ता को 10,935 वोटों से हराकर तीसरी बार विधानसभा पहुंचे। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने लखनऊ सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में 4,77,550 वोट हासिल किए, लेकिन भाजपा के राजनाथ सिंह से हार गए।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/wravidas-mehrotra-biography-lucknow-central-mla-sp-political-career-election-profileho-is-ravidas-mehrotra-174-3-times-mla-from-lucknow/article-1860</link>
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                <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 14:32:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डॉ. नीरज बोरा कौन हैं? डॉक्टर से लगातार दो बार BJP विधायक बनने तक का पूरा सफर</title>
                                    <description><![CDATA[जानिए लखनऊ उत्तर से भाजपा विधायक डॉ. नीरज बोरा की उम्र, शिक्षा, परिवार, चिकित्सा एवं समाजसेवा का सफर, राजनीतिक करियर, चुनाव परिणाम और 2022 के शपथपत्र में घोषित संपत्ति की पूरी जानकारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/who-is-dr-neeraj-bora-his-entire-journey-from-being/article-1857"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-08/dr-neeraj-bora-biography-lucknow-north-mla.webp.jpg" alt=""></a><br /><h1>डॉ. नीरज बोरा कौन हैं? डॉक्टर से दो बार BJP विधायक बनने तक का सफर</h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-08/dr-neeraj-bora-biography-lucknow-north-mla.webp.jpg" alt="dr-neeraj-bora-biography-lucknow-north-mla.webp" width="1366" height="768"></img>
dr-neeraj-bora-biography-lucknow-north-mla.webp

<p class="isSelectedEnd"><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की राजनीति में डॉ. नीरज बोरा ऐसा नाम हैं, जिनकी पहचान केवल एक विधायक तक सीमित नहीं है। वह पेशे से चिकित्सक, चिकित्सा शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षाविद्, समाजसेवी और भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं। वर्तमान में वह 172–लखनऊ उत्तर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. नीरज बोरा ने 2012 में इसी क्षेत्र से विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन केवल 2,219 मतों से हार गए थे। पांच साल बाद उन्होंने भाजपा के टिकट पर न केवल चुनाव जीता, बल्कि 2022 में दोबारा जीत दर्ज करके लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचे।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनकी राजनीतिक यात्रा इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि वह बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस में रहने के बाद भाजपा से जुड़े। उनके पिता स्वर्गीय डी.पी. बोरा भी दो बार विधायक रहे थे। इस तरह राजनीति और समाजसेवा से उनका पारिवारिक संबंध काफी पुराना है।</p>
<h2> </h2>
<h2>जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि</h2>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. नीरज बोरा का जन्म 31 मार्च 1967 को हुआ था। उनके जन्मस्थान को लेकर ऑनलाइन स्रोतों में एकरूपता नहीं है। उनकी आधिकारिक वेबसाइट केवल जन्मतिथि की पुष्टि करती है, जबकि कुछ द्वितीयक स्रोत उनका जन्मस्थान उत्तर प्रदेश का शोहरतगढ़ बताते हैं। इसलिए किसी आधिकारिक दस्तावेज के बिना जन्मस्थान को निश्चित रूप से लिखना उचित नहीं होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनके पिता स्वर्गीय डी.पी. बोरा लखनऊ की राजनीति और छात्र आंदोलनों से जुड़े प्रमुख नाम थे। डॉ. बोरा की आधिकारिक जीवनी के अनुसार, डी.पी. बोरा 1967 में लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष बने थे। वह 1969 और 1977 में तत्कालीन लखनऊ पश्चिम क्षेत्र से विधायक भी निर्वाचित हुए।</p>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. नीरज बोरा की पत्नी का नाम बिंदू बोरा है। 2022 के चुनावी शपथपत्र में उनकी पत्नी का पेशा नर्सिंग कॉलेज की निदेशक और राधा मेडिकल्स से जुड़ा बताया गया है। परिवार में एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं।</p>
<h2>डॉ. नीरज बोरा की शिक्षा</h2>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. नीरज बोरा ने बेंगलुरु के डॉ. बी.आर. आंबेडकर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने मानव संसाधन यानी HR विषय में एमबीए किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनके 2022 के चुनावी शपथपत्र में एमबीए की डिग्री वर्ष 2009 में राजस्थान स्थित Institute of Advanced Studies in Education University से प्राप्त करना दर्ज है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ऑनलाइन कुछ परिचयों में उनके नाम के साथ PhD भी लिखी गई है, लेकिन उनकी आधिकारिक वेबसाइट और 2022 के चुनावी शपथपत्र में शैक्षणिक योग्यता के रूप में MBBS और MBA ही स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। इसलिए सत्यापित प्रोफाइल में इन्हीं दो योग्यताओं का उल्लेख करना सुरक्षित है।</p>
<h2>चिकित्सक और शिक्षाविद् के रूप में पहचान</h2>
<p class="isSelectedEnd">राजनीति में आने से पहले डॉ. नीरज बोरा ने चिकित्सा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। वह सेवा अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र तथा बोरा इंस्टीट्यूट ऑफ एलाइड हेल्थ साइंसेज से जुड़े हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनकी आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक वह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की लखनऊ शाखा के तीन बार अध्यक्ष रह चुके हैं। वह लायंस क्लब इंटरनेशनल में मंडलाध्यक्ष और काउंसिल चेयरपर्सन जैसी जिम्मेदारियां भी निभा चुके हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">आधिकारिक जीवनी में दावा किया गया है कि उनके मार्गदर्शन में 25 हजार से अधिक निःशुल्क नेत्र ऑपरेशन कराए गए और रक्तदान अभियानों के जरिए पांच हजार यूनिट से अधिक रक्त एकत्र कराया गया। इन आंकड़ों को डॉ. बोरा की अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित दावों के रूप में ही पढ़ा जाना चाहिए।</p>
<h2>समाजसेवा के प्रमुख क्षेत्र</h2>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. नीरज बोरा चिकित्सा और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से कई प्रकार के कार्यक्रमों से जुड़े रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:</p>
<ul>
<li>निःशुल्क स्वास्थ्य एवं नेत्र जांच शिविर</li>
<li>जरूरतमंद मरीजों के नेत्र ऑपरेशन में सहायता</li>
<li>रक्तदान शिविर और रक्तदान जागरूकता</li>
<li>दिव्यांगजनों के लिए कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण</li>
<li>महिलाओं के लिए सिलाई एवं स्वरोजगार प्रशिक्षण</li>
<li>बाढ़ और अग्निकांड पीड़ित परिवारों की सहायता</li>
<li>गरीब एवं कमजोर वर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं</li>
<li>सामाजिक समरसता और नागरिक जागरूकता कार्यक्रम</li>
</ul>
<p class="isSelectedEnd">ये विवरण मुख्यतः उनकी आधिकारिक जीवनी और उनसे जुड़े संस्थानों की सार्वजनिक जानकारी पर आधारित हैं।</p>
<h2>राजनीति में कैसे आए नीरज बोरा?</h2>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. नीरज बोरा का राजनीतिक सफर एक ही पार्टी तक सीमित नहीं रहा। शुरुआती दौर में वह बहुजन समाज पार्टी से जुड़े और 2007 का विधानसभा चुनाव बसपा उम्मीदवार के रूप में लखनऊ पश्चिम सीट से लड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके बाद वह उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम में उपाध्यक्ष एवं निदेशक रहे। इस पद को राज्य सरकार में राज्यमंत्री स्तर का दर्जा प्राप्त बताया गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">बाद में वह कांग्रेस से जुड़े। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लखनऊ नगर निगम के महापौर का चुनाव भी लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके। वह लखनऊ शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">कांग्रेस छोड़ने के बाद वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। भाजपा ने उन्हें 2017 में लखनऊ उत्तर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया।</p>
<h2>2012 में केवल 2,219 वोट से हारे</h2>
<p class="isSelectedEnd">वर्ष 2012 का विधानसभा चुनाव डॉ. नीरज बोरा के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ था। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लखनऊ उत्तर सीट से चुनाव लड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के अभिषेक मिश्रा को 47,580 वोट मिले, जबकि डॉ. नीरज बोरा ने 45,361 वोट हासिल किए। वह केवल 2,219 मतों से हार गए।</p>
<table>
<tbody>
<tr>
<td>उम्मीदवार</td>
<td>पार्टी</td>
<td>वोट</td>
</tr>
<tr>
<td>अभिषेक मिश्रा</td>
<td>समाजवादी पार्टी</td>
<td>47,580</td>
</tr>
<tr>
<td>डॉ. नीरज बोरा</td>
<td>कांग्रेस</td>
<td>45,361</td>
</tr>
<tr>
<td>आशुतोष टंडन</td>
<td>भाजपा</td>
<td>45,245</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p class="isSelectedEnd">इस चुनाव में भाजपा उम्मीदवार आशुतोष टंडन भी नीरज बोरा से केवल 116 वोट पीछे रहे थे। यानी लखनऊ उत्तर पर मुकाबला बेहद करीबी और त्रिकोणीय था।</p>
<h2>2017 में पहली बार बने विधायक</h2>
<p class="isSelectedEnd">भाजपा में शामिल होने के बाद डॉ. नीरज बोरा को 2017 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ उत्तर से टिकट मिला। इस बार उन्होंने 1,09,315 वोट हासिल किए।</p>
<p class="isSelectedEnd">समाजवादी पार्टी के अभिषेक मिश्रा को 82,039 वोट मिले। डॉ. बोरा ने उन्हें 27,276 मतों के अंतर से पराजित किया और पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंचे।</p>
<table>
<tbody>
<tr>
<td>उम्मीदवार</td>
<td>पार्टी</td>
<td>वोट</td>
</tr>
<tr>
<td>डॉ. नीरज बोरा</td>
<td>भाजपा</td>
<td>1,09,315</td>
</tr>
<tr>
<td>अभिषेक मिश्रा</td>
<td>समाजवादी पार्टी</td>
<td>82,039</td>
</tr>
<tr>
<td>अजय कुमार श्रीवास्तव</td>
<td>बसपा</td>
<td>29,955</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h2>2022 में दूसरी बार जीत</h2>
<p class="isSelectedEnd">वर्ष 2022 में भाजपा ने डॉ. नीरज बोरा पर दोबारा भरोसा जताया। इस चुनाव में उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी की पूजा शुक्ला से हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. बोरा ने 1,39,159 वोट प्राप्त किए, जबकि पूजा शुक्ला को 1,05,206 वोट मिले। जीत का अंतर 33,953 मत रहा।</p>
<table>
<tbody>
<tr>
<td>उम्मीदवार</td>
<td>पार्टी</td>
<td>वोट</td>
<td>मत प्रतिशत</td>
</tr>
<tr>
<td>डॉ. नीरज बोरा</td>
<td>भाजपा</td>
<td>1,39,159</td>
<td>53.30%</td>
</tr>
<tr>
<td>पूजा शुक्ला</td>
<td>समाजवादी पार्टी</td>
<td>1,05,206</td>
<td>40.29%</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p class="isSelectedEnd">इस जीत के साथ वह लगातार दूसरी बार लखनऊ उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक बने।</p>
<h2>विधानसभा और संगठन में जिम्मेदारियां</h2>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. नीरज बोरा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वह विधानसभा, भाजपा विधानमंडल दल और विभिन्न सरकारी एवं सामाजिक संस्थाओं में कई जिम्मेदारियों से जुड़े रहे हैं। इनमें शामिल हैं:</p>
<ul>
<li>भाजपा विधानमंडल दल के सचेतक</li>
<li>भाजपा विधानमंडल दल के सचिव एवं कोषाध्यक्ष</li>
<li>सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संयुक्त समिति के सदस्य</li>
<li>एसजीपीजीआई लखनऊ में शासन द्वारा नामित सदस्य</li>
<li>दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्य</li>
<li>स्थानीय निकायों के लेखा परीक्षण से संबंधित समिति के पूर्व सदस्य</li>
<li>MSME मंत्रालय के अधीन आगरा स्थित Process and Product Development Centre की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य</li>
<li>उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम के पूर्व उपाध्यक्ष एवं निदेशक</li>
</ul>
<p class="isSelectedEnd">चूंकि संगठनात्मक और समिति संबंधी जिम्मेदारियां समय-समय पर बदल सकती हैं, इसलिए इन पदों को उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित विवरण के संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए।</p>
<h2>वैश्य समाज और सामाजिक संगठनों में भूमिका</h2>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. नीरज बोरा वैश्य समाज से जुड़े संगठनों में भी सक्रिय रहे हैं। उनकी वेबसाइट के अनुसार वह इंटरनेशनल वैश्य फेडरेशन के संस्थापक पदाधिकारियों में शामिल थे और संगठन में राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर की जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने उत्तर प्रदेश के विधानसभा क्षेत्रों में सामाजिक सम्मेलन और संपर्क कार्यक्रमों से जुड़े अभियान चलाए। वह ‘वैश्य स्वाभिमान’ नामक समाचारपत्र का संपादन भी कर चुके हैं।</p>
<h2>कितनी संपत्ति के मालिक हैं डॉ. नीरज बोरा?</h2>
<p class="isSelectedEnd">Association for Democratic Reforms के MyNeta पोर्टल पर उपलब्ध 2022 के चुनावी शपथपत्र के अनुसार डॉ. नीरज बोरा ने कुल ₹9,87,65,324 की संपत्ति घोषित की थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनकी कुल देनदारी ₹1,19,09,517 दर्ज थी। इस आधार पर घोषित संपत्ति और देनदारी का अंतर लगभग ₹8.68 करोड़ बनता है।</p>
<table>
<tbody>
<tr>
<td>विवरण</td>
<td>2022 में घोषित आंकड़ा</td>
</tr>
<tr>
<td>कुल संपत्ति</td>
<td>₹9,87,65,324</td>
</tr>
<tr>
<td>कुल देनदारी</td>
<td>₹1,19,09,517</td>
</tr>
<tr>
<td>संपत्ति-देनदारी का अंतर</td>
<td>लगभग ₹8.68 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td>स्वयं का पेशा</td>
<td>डॉक्टर एवं प्रोफेसर</td>
</tr>
<tr>
<td>पत्नी का पेशा</td>
<td>नर्सिंग कॉलेज निदेशक एवं मेडिकल व्यवसाय</td>
</tr>
<tr>
<td>घोषित आपराधिक मामले</td>
<td>शून्य</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p class="isSelectedEnd">ये सभी आंकड़े उम्मीदवार द्वारा 2022 के चुनाव के समय दाखिल स्वघोषित शपथपत्र पर आधारित हैं। इन्हें अगस्त 2026 की वर्तमान संपत्ति या बाजार मूल्य नहीं माना जाना चाहिए।</p>
<h2>क्या डॉ. नीरज बोरा पर कोई आपराधिक मामला है?</h2>
<p class="isSelectedEnd">2022 के नवीनतम उपलब्ध विधानसभा चुनावी शपथपत्र में डॉ. नीरज बोरा ने कोई लंबित आपराधिक मामला घोषित नहीं किया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि 2012 के पुराने शपथपत्र में दो और 2007 के शपथपत्र में एक मामला दर्ज होने का उल्लेख मिलता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि वे मामले 2026 में भी लंबित हैं। नवीनतम उपलब्ध 2022 शपथपत्र में घोषित मामलों की संख्या शून्य है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसलिए सबसे सटीक वाक्य होगा:</p>
<p class="isSelectedEnd">“डॉ. नीरज बोरा ने 2022 के विधानसभा चुनावी शपथपत्र में कोई लंबित आपराधिक मामला घोषित नहीं किया था।”</p>
<h2>डॉ. नीरज बोरा की राजनीतिक पहचान</h2>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. नीरज बोरा की राजनीतिक पहचान मुख्य रूप से तीन आधारों पर बनी है—चिकित्सा और समाजसेवा की पृष्ठभूमि, परिवार की पुरानी राजनीतिक विरासत और लखनऊ उत्तर में लगातार दो चुनावी जीत।</p>
<p class="isSelectedEnd">2012 में केवल 2,219 वोटों से हारने के बाद उन्होंने 2017 में 27,276 और 2022 में 33,953 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। यह चुनावी यात्रा लखनऊ उत्तर क्षेत्र में उनके बढ़ते राजनीतिक आधार को दिखाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">फिर भी उनके सामाजिक कार्यों, संस्थागत पदों और विकास संबंधी उपलब्धियों के कई विवरण उनकी अपनी आधिकारिक वेबसाइट से आते हैं। निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए ऐसे दावों को संबंधित सरकारी रिकॉर्ड या स्वतंत्र रिपोर्टिंग से अलग पहचान के साथ प्रकाशित करना आवश्यक है।</p>
<h2>निष्कर्ष</h2>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. नीरज बोरा डॉक्टर, शिक्षाविद्, समाजसेवी और राजनेता की कई भूमिकाओं में सक्रिय रहे हैं। पिता से मिली राजनीतिक विरासत के बावजूद उनका चुनावी सफर सीधी जीत से शुरू नहीं हुआ। बसपा और कांग्रेस के दौर से गुजरते हुए उन्होंने 2012 की मामूली हार देखी और इसके बाद भाजपा के टिकट पर लगातार दो चुनाव जीते।</p>
<p>फिलहाल वह लखनऊ उत्तर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक हैं। 2022 में मिला 53.30 प्रतिशत मत और 33,953 वोटों की जीत उनके राजनीतिक आधार का सबसे प्रमुख चुनावी संकेत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 13:29:52 +0530</pubDate>
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