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                <title>Women Rights - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <title>Manusmriti Row: राहुल गांधी पर निशिकांत दुबे का पलटवार- ‘सिर्फ सनातन पर ही सवाल क्यों?’ इतिहास का भी दिया हवाला</title>
                                    <description><![CDATA[राहुल गांधी की Manusmriti और patriarchy पर टिप्पणी को लेकर सियासी विवाद तेज है। BJP सांसद निशिकांत दुबे ने ब्रिटिशकालीन Hindu law compilation का हवाला देते हुए कांग्रेस पर चुनिंदा धार्मिक आलोचना का आरोप लगाया। जानिए राहुल ने क्या कहा और इतिहास क्या बताता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/rahul-gandhi-manusmriti-row-nishikant-dubey-warren-hastings-women-patriarchy/article-1831"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-08/rahul-gandhi-nishikant-dubey-manusmriti-women-row.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>नई दिल्ली/रांची।</strong> कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष <strong>राहुल गांधी</strong> के Manusmriti और महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। BJP सांसद <strong>निशिकांत दुबे</strong> ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए पूछा है कि कांग्रेस सनातन धर्म से जुड़े ग्रंथों पर सवाल उठाती है तो यही नजरिया दूसरे धर्मों के धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं को लेकर क्यों नहीं अपनाती।</p>
<p>यह विवाद 22 अगस्त को पुणे में आयोजित कांग्रेस के <strong>‘छात्रों की गूंज’</strong> कार्यक्रम में राहुल गांधी के भाषण से शुरू हुआ था। वहां उन्होंने बड़ी संख्या में मौजूद युवतियों से कहा कि महिलाएं किसी की संपत्ति नहीं हैं और उन्हें अपने जीवन के फैसले स्वयं करने चाहिए। उन्होंने patriarchy यानी पितृसत्तात्मक सोच को तोड़ने की अपील भी की।</p>
<h2>राहुल गांधी ने Manusmriti को लेकर क्या कहा?</h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-08/rahul-gandhi-nishikant-dubey-manusmriti-women-row.jpg.jpg" alt="rahul-gandhi-nishikant-dubey-manusmriti-women-row.jpg" width="1366" height="768"></img>
राहुल गांधी की Manusmriti और patriarchy पर टिप्पणी के बाद BJP सांसद निशिकांत दुबे ने Warren Hastings के दौर के Hindu law compilation का हवाला देकर कांग्रेस पर सवाल उठाए।

<p>पुणे के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने Manusmriti से जुड़ी उस धारणा का उल्लेख किया जिसमें महिला को जीवन के अलग-अलग चरणों में पिता, पति और बेटे के संरक्षण या नियंत्रण में रहने की बात कही जाती है।</p>
<p>राहुल ने इसे महिलाओं की स्वतंत्रता के खिलाफ बताते हुए कहा कि <strong>महिला किसी और की नहीं बल्कि स्वयं की है।</strong> उन्होंने युवतियों से सामाजिक और पितृसत्तात्मक बंधनों को चुनौती देने की अपील की।</p>
<p>उनका व्यापक तर्क था कि समाज में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग standards नहीं होने चाहिए।</p>
<p>इसी भाषण के दौरान उन्होंने हाल के छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए PM नरेंद्र मोदी की उस प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाया जिसमें लड़कियों द्वारा आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर ‘cultural shock’ की बात हुई थी। राहुल का कहना था कि अगर लड़कों और लड़कियों दोनों ने ऐसी भाषा इस्तेमाल की, तो सिर्फ लड़कियों के मामले में सांस्कृतिक चिंता क्यों पैदा होती है।</p>
<h1>Nishikant Dubey ने क्या जवाब दिया?</h1>
<p>BJP सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के बयान के जवाब में ब्रिटिश शासन के दौर का उदाहरण दिया।</p>
<p>दुबे ने दावा किया कि Warren Hastings ने 18वीं सदी में 11 भारतीय पंडितों/विद्वानों की एक समिति बनवाई थी, जिसने भारतीय धार्मिक और कानूनी ग्रंथों का अध्ययन और अनुवाद किया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि तत्कालीन अध्ययन में Manusmriti के कुछ हिस्सों के प्रामाणिक होने और कुछ अंशों के बाद में जुड़ने की बात कही गई थी।</p>
<p>इसी आधार पर उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस पर सवाल उठाया कि महिलाओं से संबंधित आलोचनात्मक दृष्टिकोण केवल सनातन धर्म से जुड़े ग्रंथों तक सीमित क्यों रखा जा रहा है।</p>
<p>दुबे ने कहा कि देश हिंदू, मुस्लिम और ईसाई सभी समुदायों का है और महिलाओं से संबंधित प्रश्नों को लेकर सभी धार्मिक परंपराओं को एक ही कसौटी पर देखना चाहिए।</p>
<h1>11 पंडितों और Warren Hastings वाली कहानी में कितना सच?</h1>
<p>यह इस खबर का सबसे दिलचस्प fact-check है।</p>
<p>ऐतिहासिक अभिलेख बताते हैं कि Warren Hastings के शासनकाल में <strong>11 पंडितों के समूह ने Vivādārṇavasetu नाम का Hindu law digest तैयार किया था।</strong></p>
<p>इसका बाद में Persian के रास्ते अंग्रेजी में अनुवाद हुआ और Nathaniel Brassey Halhed ने इसे <strong>1776 में ‘A Code of Gentoo Laws’</strong> नाम से प्रकाशित किया। Qatar National Library और Smithsonian के archival records भी इसमें उन्हीं 11 पंडितों के नाम दर्ज करते हैं।</p>
<p>लेकिन इतिहास का दूसरा हिस्सा महत्वपूर्ण है।</p>
<p>St Andrews Encyclopaedia of Theology के मुताबिक Hastings ने ऐसा legal digest तैयार कराने की प्रक्रिया <strong>1773 में शुरू की थी</strong>, और इसका संकलन 1773 से 1775 के बीच हुआ। इसका उद्देश्य East India Company के प्रशासन के लिए Hindu jurisprudence को व्यवस्थित रूप में समझना था।</p>
<p>इसलिए निशिकांत दुबे का <strong>“11 पंडित”</strong> वाला मूल संदर्भ ऐतिहासिक आधार रखता है, लेकिन उनके पूरे विवरण—जैसे एक विशेष तारीख पर समिति बनना और “सभी संस्कृत-पाली ग्रंथों” का अनुवाद उसका उद्देश्य होना—को independent historical fact की तरह लिखना उचित नहीं होगा।</p>
<h2>क्या उस किताब का मतलब Manusmriti ही था?</h2>
<p>यहां भी distinction जरूरी है।</p>
<p>1776 का <strong>Gentoo Code सीधे Manusmriti का साधारण translation नहीं था</strong>, बल्कि कई Hindu legal sources पर आधारित एक digest था जिसे 11 पंडितों ने तैयार किया था।</p>
<p>यानी headline में:</p>
<p><strong>“अंग्रेजों ने Manusmriti लिखी थी”</strong></p>
<p>या</p>
<p><strong>“Warren Hastings ने Manusmriti बनवाई थी”</strong></p>
<p>जैसी लाइन बिल्कुल नहीं लिखनी चाहिए।</p>
<p>ऐतिहासिक रिकॉर्ड ऐसी बात नहीं कहता।</p>
<h1>Manusmriti का text खुद कितना सरल है?</h1>
<p>आधुनिक scholarship Manusmriti को भी एक लंबे textual tradition के हिस्से के रूप में देखती है।</p>
<p>Cambridge University Press में प्रकाशित धर्मशास्त्र विशेषज्ञ Patrick Olivelle के शोध के मुताबिक Mānava Dharmaśāstra यानी Manusmriti के निर्माण में पहले से मौजूद Dharmasūtra और अन्य शास्त्रीय स्रोतों का प्रभाव दिखाई देता है। इसका textual history सरल, एक लेखक द्वारा एक समय में लिखी एक पुस्तक जैसी नहीं है।</p>
<p>इसलिए राजनीतिक बहस में किसी एक verse के origin, translation या interpretation पर विवाद होना नया नहीं है।</p>
<p>लेकिन इससे राहुल गांधी द्वारा उद्धृत विचार पर महिलाओं की समानता को लेकर बहस अपने आप खत्म नहीं हो जाती। वह अलग सामाजिक और राजनीतिक प्रश्न है।</p>
<h1>Nishikant Dubey इससे पहले भी राहुल पर बरसे थे</h1>
<p>यह निशिकांत दुबे की पहली प्रतिक्रिया नहीं थी।</p>
<p>राहुल गांधी के पुणे भाषण के तुरंत बाद दुबे ने Manusmriti की एक दूसरी प्रसिद्ध पंक्ति का हवाला देते हुए कहा था कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास माना जाता है।</p>
<p>उन्होंने राहुल पर आरोप लगाया कि वह ग्रंथ का पूरा संदर्भ पढ़े बिना एक हिस्सा चुनकर प्रस्तुत कर रहे हैं।</p>
<p>राहुल गांधी का पक्ष दूसरी तरफ यह है कि उन्होंने जिस विचार को उद्धृत किया, वह महिलाओं की स्वतंत्रता और patriarchal control को लेकर उनकी आलोचना का उदाहरण था।</p>
<p>इसलिए राजनीतिक लड़ाई अब <strong>“Manusmriti में क्या लिखा है?”</strong> से आगे बढ़कर <strong>“धार्मिक परंपरा और महिलाओं की स्वतंत्रता को आज किस नजर से देखा जाए?”</strong> के सवाल तक पहुंच चुकी है।</p>
<h1>अब Yogi, Himanta और Rijiju भी विवाद में</h1>
<p>24 और 25 अगस्त को विवाद और बड़ा हो गया।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री <strong>योगी आदित्यनाथ</strong> ने राहुल गांधी पर देश की परंपराओं और विरासत को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। योगी ने कहा कि राहुल को Manusmriti की पर्याप्त समझ नहीं है और उन्हें गलत तथ्यों के आधार पर देश की विरासत पर हमला नहीं करना चाहिए।</p>
<p>असम के मुख्यमंत्री <strong>हिमंत बिस्वा सरमा</strong> ने सवाल किया कि अगर महिलाओं की समानता ही मुद्दा है तो राहुल गांधी दूसरे धार्मिक समुदायों में मौजूद patriarchal practices पर उसी तीखेपन से क्यों नहीं बोलते। उन्होंने Uniform Civil Code का समर्थन करने की चुनौती भी दी।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री <strong>किरेन रिजिजू</strong> ने भी इसी तरह सवाल किया कि महिलाओं के अधिकार की बात करते समय केवल Hindu traditions को ही निशाना क्यों बनाया जाए। उन्होंने Triple Talaq जैसे मुद्दों का उल्लेख किया।</p>
<p>यानी Nishikant Dubey की प्रतिक्रिया अब BJP की एक व्यापक political counter-attack का हिस्सा बन चुकी है।</p>
<h1>Congress का मूल तर्क क्या है?</h1>
<p>राहुल गांधी के भाषण का मुख्य विषय धर्मग्रंथों पर अकादमिक बहस नहीं बल्कि <strong>महिलाओं की autonomy</strong> था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि किसी महिला को उसकी पहचान सिर्फ पिता, पति या बेटे के संबंध से नहीं मिलनी चाहिए। महिला अपनी अलग पहचान और जीवन के फैसले रखने वाली स्वतंत्र व्यक्ति है।</p>
<p>राहुल ने BJP और RSS पर आरोप लगाया कि उनका सामाजिक दृष्टिकोण महिलाओं को नियंत्रित और सीमित रखने वाला है।</p>
<p>यह <strong>राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप</strong> है। BJP इस आरोप को खारिज कर रही है और उल्टा कांग्रेस पर महिलाओं के मुद्दे पर selective politics करने का आरोप लगा रही है।</p>
<h1>विवाद का असली सवाल क्या है?</h1>
<p>इस पूरे विवाद में कम से कम तीन अलग-अलग debates चल रही हैं।</p>
<p><strong>पहली — महिलाओं की स्वतंत्रता:</strong><br />क्या सामाजिक और धार्मिक परंपराओं की ऐसी व्याख्याओं को आज चुनौती दी जानी चाहिए जो महिलाओं की autonomy सीमित करती दिखाई दें?</p>
<p><strong>दूसरी — Manusmriti की interpretation:</strong><br />क्या राहुल गांधी ने जिस passage का जिक्र किया, उसे पर्याप्त ऐतिहासिक और textual context के साथ पेश किया?</p>
<p><strong>तीसरी — BJP का selective criticism वाला सवाल:</strong><br />अगर gender equality universal principle है, तो क्या सभी धार्मिक समुदायों की patriarchal practices पर एक ही standard लागू होना चाहिए?</p>
<p>इन्हीं तीन सवालों के कारण यह विवाद सिर्फ BJP vs Congress बयानबाजी से आगे बढ़कर एक बड़ी ideological debate बन रहा है।</p>
<h2>आखिर Fact क्या है?</h2>
<p><strong>राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्रता के पक्ष में बोलते हुए Manusmriti से जुड़ी एक patriarchal धारणा की आलोचना की।</strong></p>
<p><strong>निशिकांत दुबे ने उनके interpretation को चुनौती दी और Warren Hastings के दौर के 11 पंडितों वाले legal compilation का हवाला दिया।</strong></p>
<p><strong>ऐतिहासिक रिकॉर्ड सचमुच 11 पंडितों द्वारा Hastings के लिए Hindu law digest तैयार किए जाने की पुष्टि करता है, जिसे 1776 में अंग्रेजी में प्रकाशित किया गया था।</strong></p>
<p>लेकिन इस historical episode को सीधे यह साबित करने वाला तथ्य नहीं माना जा सकता कि Manusmriti का कोई विवादित verse निश्चित रूप से असली या बाद में जोड़ा गया है। वह ज्यादा जटिल textual-scholarship का विषय है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 14:19:30 +0530</pubDate>
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