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                <title>सरकारी स्कूल - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <description>सरकारी स्कूल RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मंत्रियों के बंगलों पर 12 साल में ₹547.68 करोड़ खर्च: 2025-26 में रिकॉर्ड ₹92 करोड़, CJP बोली- ‘स्कूल ठीक करो’</title>
                                    <description><![CDATA[RTI के मुताबिक दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक आवासों की मरम्मत और नवीनीकरण पर 12 वर्षों में ₹547.68 करोड़ खर्च हुए। 2025-26 में खर्च रिकॉर्ड ₹92.35 करोड़ पहुंचा, जिस पर CJP ने सरकारी स्कूलों को लेकर सवाल उठाए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/union-ministers-bungalows-maintenance-547-crore-rti-cjp-school-thik-karo/article-1819"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-08/union-ministers-bungalows-547-crore-rti-cjp-school-thik-karo.jpg.png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली के लुटियंस इलाके में केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों की मरम्मत, नवीनीकरण और रखरखाव पर होने वाला खर्च राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। सूचना के अधिकार यानी RTI से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक <strong>2014-15 से 2025-26 के बीच 12 वित्तीय वर्षों में इन आवासों पर कुल ₹547.68 करोड़ खर्च किए गए।</strong> अकेले 2025-26 में यह खर्च रिकॉर्ड <strong>₹92.35 करोड़</strong> रहा।</p>
<p>इन आंकड़ों के सामने आने के बाद <strong>Cockroach Janta Party यानी CJP</strong> ने केंद्र सरकार की खर्च प्राथमिकताओं पर सवाल उठाया है। CJP ने अपने चल रहे ‘School Thik Karo’ अभियान से इस मुद्दे को जोड़ते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में पानी, बिजली, शौचालय और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच मंत्रियों के आवासों पर इतनी बड़ी रकम खर्च होना सवाल खड़े करता है।</p>
<h2>एक साल में ₹92.35 करोड़, 2014 से तीन गुना से ज्यादा</h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-08/union-ministers-bungalows-547-crore-rti-cjp-school-thik-karo.jpg.png" alt="union-ministers-bungalows-547-crore-rti-cjp-school-thik-karo.jpg" width="1457" height="1080"></img>
RTI के मुताबिक 2014-15 से 2025-26 के बीच केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों के repair, renovation और maintenance पर ₹547.68 करोड़ खर्च हुए हैं। CJP ने इसे सरकारी स्कूलों की जरूरतों से जोड़कर सवाल उठाया है।

<p>RTI से मिले आंकड़ों के मुताबिक वर्ष <strong>2014-15 में ₹27.47 करोड़</strong> सरकारी मंत्रियों के आवासों की मरम्मत और नवीनीकरण पर खर्च हुए थे।</p>
<p>2025-26 तक यह आंकड़ा बढ़कर <strong>₹92.35 करोड़</strong> हो गया। यानी nominal terms में वार्षिक खर्च 2014-15 के मुकाबले तीन गुना से भी ज्यादा हो चुका है।</p>
<p>बीच के वर्षों में भी खर्च में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 2020-21 में ₹53.87 करोड़, 2022-23 में ₹73.86 करोड़, 2024-25 में ₹71.98 करोड़ और 2025-26 में ₹92.35 करोड़ खर्च किए गए।</p>
<h3>12 साल का Year-Wise खर्च</h3>
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<div class="TyagGW_tableWrapper flex flex-col-reverse w-fit">
<table class="w-fit min-w-(--thread-content-width)">
<thead>
<tr>
<th class="last:pe-10">वित्त वर्ष</th>
<th class="last:pe-10">खर्च</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>2014-15</td>
<td>₹27.47 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td>2015-16</td>
<td>₹29.57 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td>2016-17</td>
<td>₹30.10 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td>2017-18</td>
<td>₹23.34 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td>2018-19</td>
<td>₹23.42 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td>2019-20</td>
<td>₹26.37 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td>2020-21</td>
<td>₹53.87 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td>2021-22</td>
<td>₹40.84 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td>2022-23</td>
<td>₹73.86 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td>2023-24</td>
<td>₹54.52 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td>2024-25</td>
<td>₹71.98 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td>2025-26</td>
<td>₹92.35 करोड़</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
</div>
<p>ये आंकड़े RTI response पर आधारित PTI रिपोर्ट में दिए गए हैं।</p>
<h2>खर्च किस चीज पर हुआ?</h2>
<p>इन सरकारी आवासों का रखरखाव <strong>Central Public Works Department यानी CPWD</strong> करता है। खर्च में repair, renovation और furnishing से जुड़े काम शामिल हैं।</p>
<p>रिपोर्टों के मुताबिक आवासों में अक्सर बिजली के उपकरण, पंखे, LED lights, plumbing और समय-समय पर floor tiles जैसी चीजों की मरम्मत या बदलाव की जरूरत पड़ती है। CPWD से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कई बंगले करीब <strong>80 से 100 साल पुराने</strong> हैं।</p>
<p>पुरानी इमारतों में सीलन, दीमक, पुरानी electrical wiring और plumbing से जुड़ी समस्याओं को भी बढ़ते खर्च की वजह बताया गया है। इसलिए पूरे ₹92.35 करोड़ को केवल सजावट का खर्च समझना सही नहीं होगा; इसमें maintenance और आवश्यक repair work भी शामिल है।</p>
<h2>CJP ने कहा- ‘बंगले नहीं, स्कूल ठीक करो’</h2>
<p>RTI के आंकड़ों के बाद CJP ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए इस खर्च की तुलना सरकारी स्कूलों की जरूरतों से की।</p>
<p>CJP ने कहा कि <strong>₹92 करोड़ से करीब 10 ‘world-class’ सरकारी स्कूल तैयार किए जा सकते हैं</strong> और सरकार को मंत्रियों के आवासों के बजाय स्कूलों की सुविधाएं सुधारने को प्राथमिकता देनी चाहिए।</p>
<p>यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि <strong>“₹92 करोड़ में 10 स्कूल” CJP का अपना अनुमान है</strong>, कोई आधिकारिक सरकारी project-cost assessment नहीं।</p>
<p>यानी इसे headline या article में CJP के दावे के रूप में ही लिखना चाहिए।</p>
<h2>‘School Thik Karo’ अभियान क्या है?</h2>
<p>CJP ने 15 अगस्त से ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर <strong>‘School Thik Karo’</strong> अभियान शुरू किया है। इसके तहत संगठन सरकारी स्कूलों में बिजली, पानी, शौचालय, Mid-Day Meal और दूसरी बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा उठा रहा है।</p>
<p>इसी अभियान के बीच मंत्रियों के सरकारी आवासों पर खर्च का RTI data सामने आया, जिसके बाद CJP ने दोनों को जोड़ते हुए सवाल किया कि सरकारी खर्च की प्राथमिकता स्कूलों और बच्चों की सुविधाओं की तरफ क्यों नहीं होनी चाहिए।</p>
<h2>BJP ने क्या जवाब दिया?</h2>
<p>CJP के broader campaign और PM CARES से जुड़े आरोपों पर BJP ने भी पलटवार किया है।</p>
<p>अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक BJP की गोवा इकाई ने CJP पर PM CARES को लेकर गलत framing करने का आरोप लगाया और संगठन को आम आदमी पार्टी का कथित ‘political project’ बताया। BJP ने अभिजीत दीपके को पंजाब जाकर वहां के सरकारी स्कूलों की स्थिति देखने की चुनौती भी दी।</p>
<p>हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण distinction है: <strong>RTI में सामने आए ₹547.68 करोड़ के खर्च को BJP ने गलत आंकड़ा नहीं बताया है।</strong> राजनीतिक जवाब मुख्य रूप से CJP की स्कूल और PM CARES से जुड़ी framing पर केंद्रित है।</p>
<p>इसलिए headline में <strong>“BJP ने ₹547 करोड़ के आंकड़े को झूठा बताया”</strong> नहीं लिखना चाहिए।</p>
<h2>क्या ₹547 करोड़ में सांसदों के बंगले भी शामिल हैं?</h2>
<p><strong>नहीं, उपलब्ध RTI जानकारी का scope सीमित है।</strong></p>
<p>PTI की रिपोर्ट के अनुसार CPWD ने इस data में उन लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के आवासों का खर्च नहीं दिया जो केंद्रीय मंत्री नहीं हैं। इसमें केंद्रीय मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के <strong>कार्यालयों पर हुआ खर्च भी शामिल नहीं है।</strong></p>
<p>यानी ₹547.68 करोड़ का आंकड़ा मुख्य रूप से <strong>केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक residences</strong> के repair, renovation और maintenance से संबंधित है।</p>
<h2>लुटियंस दिल्ली में कितने सरकारी बंगले हैं?</h2>
<p>2023 में राज्यसभा में सरकार की ओर से दिए गए जवाब के मुताबिक लुटियंस दिल्ली में <strong>Type VII और Type VIII के कुल 520 सरकारी बंगले</strong> थे। इनमें अलग-अलग government, general और judicial pools के आवास शामिल हैं।</p>
<p>इसका मतलब यह नहीं है कि RTI वाला ₹547.68 करोड़ इन सभी 520 बंगलों पर खर्च हुआ। दोनों datasets का scope अलग है।</p>
<h2>क्या इतना खर्च पहली बार चर्चा में आया है?</h2>
<p>लुटियंस दिल्ली के सरकारी बंगलों के रखरखाव की ऊंची लागत कोई बिल्कुल नई समस्या नहीं है।</p>
<p>2004 में संसद में सरकार ने भी स्वीकार किया था कि लुटियंस बंगला क्षेत्र की कई इमारतें 70 वर्ष से अधिक पुरानी थीं और उनकी maintenance महंगी होती जा रही थी। कुछ इमारतों को structural safety के कारण हटाने तक की जरूरत पड़ी थी।</p>
<p>हालांकि मौजूदा बहस इसलिए तेज है क्योंकि 2025-26 का <strong>₹92.35 करोड़</strong> का सालाना खर्च पिछले 12 वर्षों का सबसे बड़ा आंकड़ा है।</p>
<h2>असली सवाल खर्च या प्राथमिकता?</h2>
<p>इस विवाद के दो पक्ष हैं।</p>
<p>CJP का तर्क है कि जब सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं, तब मंत्रियों के सरकारी आवासों पर होने वाले करोड़ों रुपये के खर्च की समीक्षा होनी चाहिए।</p>
<p>दूसरी तरफ सरकारी आवासों के रखरखाव से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इन ऐतिहासिक और बेहद पुरानी इमारतों को सुरक्षित और उपयोग योग्य बनाए रखने में लगातार खर्च होता है।</p>
<p>इसलिए बहस केवल यह नहीं है कि <strong>₹547.68 करोड़ खर्च हुए या नहीं</strong>—RTI data उस खर्च की पुष्टि करता है। बड़ा राजनीतिक सवाल यह है कि <strong>इतने खर्च की जरूरत कितनी थी, क्या maintenance अधिक cost-efficient हो सकती थी और सार्वजनिक धन की प्राथमिकताओं में शिक्षा कहां खड़ी है?</strong></p>
<p>यही सवाल आने वाले दिनों में CJP के ‘School Thik Karo’ अभियान और BJP के जवाब के बीच इस मुद्दे को और राजनीतिक बना सकता है।</p>
<p><strong>नोट:</strong> ₹92 करोड़ में 10 नए स्कूल बनने का आंकड़ा CJP का दावा/अनुमान है। RTI केवल केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक आवासों पर हुए maintenance, renovation और furnishing खर्च का डेटा देता है। दोनों को एक ही सरकारी आंकड़ा न माना जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 16:38:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UP के स्कूलों पर CM योगी का सख्त आदेश: भ्रामक वीडियो पर होगी FIR, CJP के ‘School Thik Karo’ अभियान के बीच बढ़ी सख्ती</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी स्कूलों की सुविधाओं और Mid-Day Meal की शिकायतों की मौके पर जांच के निर्देश; कई जिलों में बिना अनुमति YouTubers और बाहरी लोगों की एंट्री-वीडियोग्राफी पर भी सख्ती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/up-schools-yogi-adityanath-misleading-videos-fir-cjp-school-thik-karo-youtubers/article-1814"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-08/up-school-video-fir-yogi-adityanath-cjp-school-thik-karo.jpg.png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों की हालत और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि स्कूल और कॉलेजों को लेकर सोशल मीडिया पर सामने आने वाली शिकायतों और वीडियो की <strong>मौके पर जांच</strong> कराई जाए। जांच में जानकारी भ्रामक पाए जाने पर गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ FIR दर्ज कर कार्रवाई की जाए।</p>
<p>यह निर्देश ऐसे समय सामने आया है जब सोशल मीडिया पर सरकारी स्कूलों में Mid-Day Meal, शौचालय, पीने के पानी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई वीडियो चर्चा में हैं। इसी दौरान <strong>CJP का ‘School Thik Karo’ अभियान</strong> भी सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सक्रिय है।</p>
<h3>सिर्फ FIR नहीं, स्कूलों की सुविधाएं जांचने का भी आदेश</h3>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-08/up-school-video-fir-yogi-adityanath-cjp-school-thik-karo.jpg.png" alt="up-school-video-fir-yogi-adityanath-cjp-school-thik-karo.jpg" width="1672" height="941"></img>
यूपी में सरकारी स्कूलों को लेकर भ्रामक वीडियो और गलत सूचना पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, जबकि वास्तविक शिकायतों की मौके पर जांच कराने को भी कहा गया है। प्रतीकात्मक तस्वीर।

<p>मुख्यमंत्री के निर्देशों का एक अहम हिस्सा सिर्फ वायरल वीडियो पर कार्रवाई नहीं बल्कि <strong>स्कूलों की वास्तविक स्थिति की जांच</strong> भी है।</p>
<p>अधिकारियों से कहा गया है कि Mid-Day Meal की गुणवत्ता और लड़के-लड़कियों के शौचालयों की स्थिति की मौके पर पड़ताल की जाए। जिलाधिकारियों को सरकारी स्कूलों का नियमित निरीक्षण करने तथा छात्रों के लिए बेहतर सुविधाएं और पढ़ाई का माहौल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p>यानी सरकारी आदेश के दो हिस्से हैं—एक तरफ अगर किसी स्कूल की वास्तविक समस्या सामने आती है तो उसे दूर किया जाए, और दूसरी तरफ यदि कोई वीडियो या दावा जांच में भ्रामक मिलता है तो उस पर कार्रवाई हो।</p>
<h3>CJP का ‘School Thik Karo’ अभियान क्यों चर्चा में?</h3>
<p>CJP यानी <strong>Cockroach Janta Party</strong> पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर <code>#SchoolThikKaro</code> अभियान चला रही है। अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की सुविधाओं और व्यवस्था को लेकर वीडियो तथा निरीक्षण सामने आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में भी अभियान की गतिविधियां ऐसे समय बढ़ी हैं जब अलग-अलग जिलों से छात्रों और स्कूल सुविधाओं से संबंधित वीडियो वायरल हुए।</p>
<p>इसी वजह से नए सरकारी निर्देशों को CJP अभियान से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री के निर्देश में कार्रवाई <strong>CJP के नाम से नहीं</strong>, बल्कि स्कूलों और कॉलेजों को लेकर <strong>भ्रामक जानकारी फैलाने वालों</strong> के संदर्भ में है। यह अंतर खबर में स्पष्ट रखना जरूरी है।</p>
<h3>YouTubers की एंट्री पर क्या है असली आदेश?</h3>
<p>इस मुद्दे पर सोशल मीडिया में यह धारणा बन सकती है कि मुख्यमंत्री योगी ने पूरे उत्तर प्रदेश के सभी स्कूलों में YouTubers पर एक साथ पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों से तस्वीर इससे थोड़ी अलग है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के <strong>कई जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों</strong> ने अलग-अलग आदेश जारी कर सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति बाहरी व्यक्तियों, YouTubers और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के प्रवेश तथा फोटो-वीडियोग्राफी पर रोक या प्रतिबंध लगाया है।</p>
<p>उदाहरण के तौर पर अयोध्या के BSA ने 19 अगस्त को आदेश जारी कर कहा कि सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना बाहरी व्यक्ति, YouTuber या सोशल मीडिया से जुड़ा व्यक्ति परिषदीय स्कूल में प्रवेश कर फोटो या वीडियो नहीं बना सकेगा।</p>
<p>बलरामपुर में भी 17 अगस्त के आदेश में बिना अनुमति बाहरी लोगों और YouTubers के स्कूल में प्रवेश तथा वीडियो बनाने पर रोक लगाई गई थी। आदेश में पठन-पाठन प्रभावित होने और शिक्षकों की गरिमा से जुड़े कारणों का उल्लेख किया गया।</p>
<p>बलिया और आजमगढ़ समेत अन्य जिलों से भी इसी तरह के निर्देश सामने आए हैं।</p>
<h3>Parents और School Management Committee पर क्या नियम?</h3>
<p>शुरुआती आदेशों को लेकर सवाल उठने के बाद यूपी के कई जिलों में संशोधित निर्देश भी जारी किए गए।</p>
<p>इनमें स्पष्ट किया गया कि <strong>अभिभावक और School Management Committee के सदस्य</strong> स्कूल में जाकर संस्थान और अपने बच्चों की पढ़ाई-प्रगति के संबंध में जानकारी ले सकते हैं। यानी बिना अनुमति वीडियो बनाने वाले बाहरी व्यक्तियों पर लगाई जा रही रोक को अभिभावकों की सामान्य स्कूल पहुंच पर पूर्ण प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।</p>
<h3>मुख्य सचिव ने स्कूलों के लिए क्या-क्या सुधार मांगे?</h3>
<p>उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव <strong>एसपी गोयल</strong> ने मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को सरकारी स्कूलों में infrastructure, साफ-सफाई और शिक्षण व्यवस्था बेहतर करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p>अधिकारियों से खास तौर पर इन सुविधाओं पर ध्यान देने को कहा गया है:</p>
<ul>
<li>साफ पीने का पानी</li>
<li>लड़कों और लड़कियों के अलग शौचालय</li>
<li>हाथ धोने की सुविधा</li>
<li>बिजली कनेक्शन और काम करने वाले electrical equipment</li>
<li>Kitchen shed</li>
<li>Boundary wall</li>
<li>Mid-Day Meal kitchen</li>
<li>बारिश के दौरान जलभराव और साफ-सफाई</li>
<li>स्कूल तक सुरक्षित सड़क और drainage व्यवस्था</li>
</ul>
<p>PM Poshan योजना के तहत बच्चों को नियमित रूप से अच्छी गुणवत्ता का भोजन दिए जाने की निगरानी के भी निर्देश हैं।</p>
<h3>सोशल मीडिया शिकायत मिले तो पहले जांच</h3>
<p>सरकार के निर्देश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सोशल मीडिया पर स्कूल से संबंधित कोई शिकायत आती है तो प्रशासन को उसे केवल नजरअंदाज नहीं करना है।</p>
<p>अधिकारियों को ऐसी शिकायत की <strong>तुरंत सत्यता जांचने</strong> को कहा गया है। यदि शिकायत सही है तो संबंधित समस्या पर कार्रवाई की जानी है, जबकि अगर सोशल मीडिया अकाउंट भ्रामक जानकारी फैला रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।</p>
<p>इसलिए इसे केवल <strong>“वीडियो बनाने वालों पर सरकार का एक्शन”</strong> कहना अधूरी तस्वीर होगी। सरकारी निर्देश में स्कूलों की खराब व्यवस्था दुरुस्त करने और गलत दावों पर कार्रवाई—दोनों बातें शामिल हैं।</p>
<h3>खराब Mid-Day Meal के वायरल वीडियो के बाद बढ़ा विवाद</h3>
<p>इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में कुछ सरकारी स्कूलों से आए <strong>खराब गुणवत्ता के Mid-Day Meal</strong> के वायरल वीडियो भी हैं। इन वीडियो के बाद विभिन्न जिलों में बाहरी लोगों और YouTubers के प्रवेश को लेकर निर्देश जारी होने लगे।</p>
<p>इसी समय CJP का School Thik Karo अभियान और छात्रों की ओर से बुनियादी सुविधाओं को लेकर अलग-अलग जगहों पर हो रहे प्रदर्शन भी चर्चा में आए। इस कारण स्कूलों की स्थिति, सोशल मीडिया की भूमिका और सरकारी नियंत्रण—तीनों विषय एक ही राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गए हैं।</p>
<h3>अब असली सवाल- पारदर्शिता और गलत सूचना के बीच सीमा कहां?</h3>
<p>सरकार का तर्क है कि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, स्कूल परिसर में अनधिकृत लोगों की आवाजाही नियंत्रित रहे और भ्रामक वीडियो के जरिए गलत सूचना न फैले।</p>
<p>दूसरी तरफ स्कूलों की वास्तविक कमियों की तस्वीर या वीडियो सार्वजनिक होने को <strong>जवाबदेही और पारदर्शिता</strong> से भी जोड़कर देखा जा रहा है।</p>
<p>इसलिए आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि प्रशासन <strong>वास्तविक शिकायत और भ्रामक सामग्री के बीच फर्क किस प्रक्रिया से करता है</strong> और यह सुनिश्चित कैसे किया जाता है कि सही समस्या उठाने वाले छात्र, अभिभावक या नागरिक कार्रवाई के डर से शिकायत करना बंद न करें।</p>
<p>फिलहाल मुख्यमंत्री के निर्देश का स्पष्ट संदेश है—<strong>शिकायत सामने आए तो उसकी मौके पर जांच हो, स्कूल की कमी हो तो उसे सुधारा जाए और जानबूझकर गलत सूचना फैलाई गई हो तो कानूनी कार्रवाई की जाए।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 13:46:39 +0530</pubDate>
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