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                <title>Doxxing - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <title>घर की जानकारी सार्वजनिक करने का आरोप: CJP के सौरव दास पहुंचे दिल्ली हाई कोर्ट, ₹2 करोड़ का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। उनका आरोप है कि उनके घर और निजी जानकारी को ऑनलाइन सार्वजनिक किया गया, जिससे उनकी सुरक्षा और निजता को खतरा पैदा हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/cjp-saurav-das-delhi-high-court-abhijit-iyer-mitra-privacy-case/article-1804"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-08/cjp-saurav-das-delhi-high-court-privacy-case.jpg.png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>नई दिल्ली।</strong> कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता और एक्टिविस्ट <strong>सौरव दास</strong> ने कथित तौर पर अपनी निजी और आवासीय जानकारी सार्वजनिक किए जाने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। मुकदमे में राजनीतिक टिप्पणीकार <strong>अभिजीत अय्यर-मित्रा</strong> समेत कई मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म को पक्षकार बनाया गया है। दास ने आरोप लगाया है कि उनकी निजी जानकारी ऑनलाइन साझा किए जाने से उनकी निजता, सुरक्षा और गरिमा प्रभावित हुई है।</p>
<h3>₹2 करोड़ हर्जाने का दावा</h3>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-08/cjp-saurav-das-delhi-high-court-privacy-case.jpg.png" alt="cjp-saurav-das-delhi-high-court-privacy-case.jpg" width="1667" height="943"></img>
CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कथित निजी जानकारी सार्वजनिक किए जाने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है।

<p>जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक सौरव दास ने करीब <strong>₹2 करोड़ के हर्जाने</strong> की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने अदालत से स्थायी और अनिवार्य निषेधाज्ञा की मांग की है, ताकि उनकी आवासीय जानकारी को आगे प्रकाशित या प्रसारित न किया जाए।</p>
<p>अदालत से X और Google जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को भी कथित निजी जानकारी वाले पोस्ट, वीडियो या दूसरे कंटेंट को हटाने के निर्देश देने की मांग की गई है। TOI के मुताबिक याचिका अभी सुनवाई के लिए ली जानी बाकी थी।</p>
<h3>किन-किन को बनाया गया पक्षकार?</h3>
<p>अदालत से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक मुकदमे में अभिजीत अय्यर-मित्रा के अलावा <strong>The Pamphlet, Law Beat, The Jaipur Dialogues और The Sunday Guardian</strong> जैसे प्लेटफॉर्म का नाम शामिल है। Google LLC और X Corp को भी कंटेंट हटाने से जुड़ी राहत के लिए पक्षकार बनाया गया है।</p>
<p>यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मुकदमा दायर होना अपने आप में आरोपों को साबित नहीं करता। मामले में अदालत की सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।</p>
<h3>घर की रिकॉर्डिंग और वीडियो वायरल होने का आरोप</h3>
<p>सौरव दास का कहना है कि वह 2025 की शुरुआत से दक्षिण दिल्ली में किराए के मकान में रह रहे हैं। उनका आरोप है कि एक मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़े लोग आवासीय परिसर में पहुंचे, वहां रिकॉर्डिंग की और बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर प्रकाशित कर दिया। जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार संबंधित वीडियो को <strong>21 लाख से ज्यादा बार देखा गया</strong> और बाद में उसे फिर से साझा किया गया।</p>
<p>दास ने यह भी आरोप लगाया कि इसके बाद उनकी आवासीय जानकारी अलग-अलग सोशल मीडिया पोस्ट और कार्यक्रमों में दोबारा प्रसारित की गई।</p>
<h3>अभिजीत अय्यर-मित्रा पर क्या आरोप?</h3>
<p>मुकदमे में दास ने आरोप लगाया है कि अभिजीत अय्यर-मित्रा ने एक मीडिया कार्यक्रम और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उनके घर से जुड़ी जानकारी को दोहराया। उन्होंने घर के किराए से संबंधित कथित गलत जानकारी प्रसारित किए जाने का आरोप भी लगाया है।</p>
<p>इन आरोपों पर अदालत की ओर से फिलहाल कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।</p>
<h3>सुरक्षा को लेकर जताई चिंता</h3>
<p>सौरव दास का कहना है कि उन्हें पहले भी धमकियों और ऑनलाइन hostility का सामना करना पड़ा है। उनका तर्क है कि उनके आवास की जानकारी बार-बार सार्वजनिक किए जाने से उनके और वहां रहने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।</p>
<p>इस महीने की शुरुआत में कथित privacy breach की शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने उनके आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी की थी।</p>
<h3>मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, ऑनलाइन Privacy का भी</h3>
<p>यह विवाद ऑनलाइन दुनिया में <strong>doxxing और right to privacy</strong> को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है। किसी सार्वजनिक या राजनीतिक व्यक्ति की आलोचना और उसकी निजी आवासीय जानकारी सार्वजनिक करने के बीच कानूनी सीमा क्या है—दिल्ली हाई कोर्ट में यह मामला इसी बहस को भी सामने ला सकता है।</p>
<p>अब नजर इस बात पर रहेगी कि अदालत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करती है या नहीं और कथित निजी जानकारी हटाने तथा हर्जाने की मांग पर क्या रुख अपनाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/cjp-saurav-das-delhi-high-court-abhijit-iyer-mitra-privacy-case/article-1804</link>
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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 17:36:13 +0530</pubDate>
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