<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/election-commissioner/tag-2142" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Pratyakshdarshi Samachar RSS Feed Generator</generator>
                <title>election commissioner - Pratyakshdarshi Samachar</title>
                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/tag/2142/rss</link>
                <description>election commissioner RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>14 आपत्तियां, फिर भी सर्वसम्मति से फैसले कैसे? चुनाव आयोग की सफाई के बाद उठे नए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग के भीतर दो आयुक्तों की कम से कम 14 लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद आयोग ने कहा कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। अब बहस इस बात पर है कि जिन मुद्दों पर शुरुआत में गंभीर सवाल उठे, उन पर आखिर सहमति कैसे बनी और क्या आयोग इससे जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions/article-2191"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions.jpg" alt=""></a><br /><h2><span><strong>आपत्तियां दर्ज हुईं, फिर सहमति कैसे बनी? अब इसी जवाब पर टिकी नजर</strong></span></h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions.jpg" alt="gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions" width="1366" height="768"></img>
दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के सर्वसम्मति से फैसले वाले दावे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

<h6><span><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></span></h6>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की—रिपोर्ट</strong></li>
<li><strong>चुनाव आयोग का दावा—अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए</strong></li>
<li><strong>Form-6, ECINet और मतदाता सूची से जुड़े मामलों पर उठे थे सवाल</strong></li>
<li><strong>आयोग ने मतभेद को सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा बताया</strong></li>
<li><strong>अब सवाल—आपत्तियों से अंतिम सहमति तक की पूरी प्रक्रिया क्या थी?</strong></li>
</ul>
<h6><strong>नई दिल्ली।</strong> चुनाव आयोग के अंदरूनी कामकाज को लेकर सामने आई रिपोर्ट और उसके बाद आयोग की सफाई ने एक नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के विभिन्न कदमों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। इसके बाद चुनाव आयोग ने कहा कि अलग-अलग राय आंतरिक विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा है और पिछले एक साल के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।</h6>
<h6>लेकिन आयोग की इसी सफाई के बाद अब एक बड़ा सवाल सामने आया है—अगर कई मामलों पर दोनों आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी, तो अंतिम फैसला लेते समय वे उसी फैसले से सहमत कैसे हुए?</h6>
<h2><span><strong>किन मुद्दों पर आयुक्तों ने उठाए थे सवाल?</strong></span></h2>
<h6><em>इंडियन एक्सप्रेस</em> की जांच रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों पर थीं। इनमें नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में बदलाव, ECINet की व्यवस्था, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा कुछ प्रशासनिक फैसले शामिल थे।</h6>
<h6>रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ मामलों में आयुक्तों ने कड़ी भाषा में अपनी आपत्ति दर्ज कराई। Form-6 में बदलाव को लेकर भी दोनों आयुक्तों की ओर से सवाल उठाए जाने की बात सामने आई।</h6>
<h2><span><strong>चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी?</strong></span></h2>
<h6>चुनाव आयोग ने इस विवाद पर कहा कि किसी बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग विचार, सुझाव और टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के मुताबिक बीते 10 महीनों में 40 से ज्यादा पहल और कई चुनाव सुधार किए गए, जबकि पिछले एक साल के अंतिम फैसले सभी चुनाव आयुक्तों की भागीदारी और सहमति से लिए गए।</h6>
<h6>आयोग का पक्ष यह है कि ड्राफ्ट स्तर पर दी गई टिप्पणियों या आपत्तियों को अंतिम फैसले से अलग करके देखने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।</h6>
<h2><span><strong>सफाई के बाद नया सवाल क्यों उठा?</strong></span></h2>
<h6>यहीं से विवाद का दूसरा हिस्सा शुरू होता है। अगर शुरुआत में किसी प्रस्ताव या प्रक्रिया पर लिखित आपत्ति थी, लेकिन अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से हुआ, तो बीच में ऐसा क्या बदला कि सभी सदस्य सहमत हो गए?</h6>
<h6>AajTak के विश्लेषण में भी इसी सवाल को प्रमुखता से उठाया गया है। लेख में कहा गया है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि आपत्तियों के बाद क्या विस्तृत चर्चा हुई, क्या संबंधित प्रस्तावों में बदलाव किए गए या किसी कानूनी और तकनीकी स्पष्टीकरण के बाद आयुक्तों की चिंताएं दूर हुईं। हालांकि लेख में रखी गई ये संभावनाएं हैं, स्थापित तथ्य नहीं।</h6>
<h2><span><strong>क्या आपत्तियां चर्चा के बाद दूर हो गई थीं?</strong></span></h2>
<h6>एक संभावना यह हो सकती है कि शुरुआती मसौदे पर सवाल उठने के बाद आयोग के भीतर चर्चा हुई हो और बाद में संबंधित बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मिलने से सहमति बन गई हो।</h6>
<h6>दूसरी संभावना यह भी हो सकती है कि कुछ आपत्तियां केवल प्रक्रिया से जुड़ी रही हों और अंतिम फैसले तक पहुंचने से पहले उनमें बदलाव किया गया हो।</h6>
<h6>लेकिन फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी से यह साफ नहीं है कि प्रत्येक आपत्ति पर अलग-अलग क्या समाधान निकला। इसलिए इस पर निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। AajTak के विश्लेषण ने भी इन कारणों को संभावनाओं के रूप में ही रखा है।</h6>
<h2><span><strong>क्या फैसलों की कॉपी सामने आएगी?</strong></span></h2>
<h6>ऐसा होने पर यह समझने में मदद मिल सकती है कि आयुक्तों ने किस बिंदु पर आपत्ति जताई थी और अंतिम फैसले में क्या बदलाव या स्पष्टीकरण आया। हालांकि चुनाव आयोग ने ऐसी प्रतियां जारी करने की कोई घोषणा की है, इसका सार्वजनिक प्रमाण फिलहाल सामने नहीं है।</h6>
<h2><span><strong>Form-6 को लेकर क्या था विवाद?</strong></span></h2>
<h6>नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में SIR से संबंधित अतिरिक्त सवाल जोड़े जाने को लेकर भी विवाद सामने आया था। <em>इंडियन एक्सप्रेस</em> की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों आयुक्तों ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी और इसके कानूनी आधार को लेकर सवाल किए थे।</h6>
<h6>यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि Form-6 नए मतदाता के रूप में पंजीकरण की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।</h6>
<h2><span><strong>अब असली सवाल पारदर्शिता का</strong></span></h2>
<h6>इस पूरे मामले में फिलहाल दो बातें साथ-साथ सामने हैं। पहली, दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कई मुद्दों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की रिपोर्ट। दूसरी, चुनाव आयोग का यह कहना कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।</h6>
<h6>इन दोनों बातों में अपने-आप विरोधाभास होना जरूरी नहीं है, क्योंकि विचार-विमर्श के दौरान मतभेद के बाद सहमति बन सकती है। लेकिन सार्वजनिक बहस का केंद्र अब यह है कि इस खास मामले में सहमति बनने की प्रक्रिया क्या थी।</h6>
<h6><strong>चुनाव आयोग के भीतर मतभेद होना अपने-आप में असामान्य नहीं है, लेकिन 14 लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद सवाल केवल मतभेद का नहीं बल्कि उसके समाधान का है। आयोग ने अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति वाला बताया है। अब यदि आपत्तियों से सहमति तक पहुंचने की प्रक्रिया और स्पष्ट होती है, तो इस विवाद से जुड़े कई सवालों के जवाब भी सामने आ सकते हैं।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions/article-2191</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions/article-2191</guid>
                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 15:10:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions.jpg"                         length="447458"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        