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                <title>बारिश में बैरिकेडिंग पर चढ़े अजय राय, पुलिस ने हिरासत में लिया; CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ में तेज बारिश के बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय बैरिकेडिंग पर चढ़ गए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें नीचे उतारकर हिरासत में लिया। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए CEC के इस्तीफे की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/ajay-rai-congress-protest-lucknow-cec-gyanesh-kumar-barricade/article-2193"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/ajay-rai-congress-protest-lucknow-cec-gyanesh-kumar-barricade.jpg" alt=""></a><br /><h1><span><strong>बारिश नहीं रोक पाई प्रदर्शन, बैरिकेडिंग पर चढ़े अजय राय</strong></span></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/ajay-rai-congress-protest-lucknow-cec-gyanesh-kumar-barricade.jpg" alt="ajay-rai-congress-protest-lucknow-cec-gyanesh-kumar-barricade" width="1366" height="768"></img>
लखनऊ में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग पर चढ़े उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय।

<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>लखनऊ में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन</strong></li>
<li><strong>तेज बारिश के बावजूद निर्वाचन कार्यालय की ओर बढ़े कार्यकर्ता</strong></li>
<li><strong>सुन्नी वक्फ बोर्ड कार्यालय के पास पुलिस ने लगाई बैरिकेडिंग</strong></li>
<li><strong>बैरिकेडिंग पर चढ़े अजय राय, पुलिस ने नीचे उतारा</strong></li>
<li><strong>अजय राय समेत कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया</strong></li>
<li><strong>कांग्रेस ने CEC के इस्तीफे की मांग दोहराई</strong></li>
</ul>
<h6><strong>लखनऊ।</strong> मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस शुक्रवार को लखनऊ की सड़कों पर उतरी। तेज बारिश के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई।</h6>
<h6>कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे। सुन्नी वक्फ बोर्ड कार्यालय के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने इस दौरान हल्का बल प्रयोग भी किया।</h6>
<h2><span><strong>बैरिकेडिंग पर चढ़ गए अजय राय</strong></span></h2>
<h6>बारिश के बीच प्रदर्शन कर रहे अजय राय युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और दूसरी ओर जाने की कोशिश करने लगे।</h6>
<h6>पुलिसकर्मियों ने उन्हें बैरिकेडिंग से नीचे उतारा। इसके बाद अजय राय और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और उन्हें इको गार्डन ले जाया गया।</h6>
<h6>यही तस्वीरें इस प्रदर्शन का सबसे चर्चित हिस्सा बन गईं—एक तरफ तेज बारिश और दूसरी तरफ बैरिकेडिंग पर खड़े कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और कार्यकर्ता।</h6>
<h2><span><strong>अजय राय ने क्या कहा?</strong></span></h2>
<h6>प्रदर्शन के दौरान अजय राय ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।</h6>
<h6>अजय राय ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं और कांग्रेस इस मुद्दे पर सड़क से संसद तक अपनी लड़ाई जारी रखेगी। ये कांग्रेस और अजय राय के राजनीतिक आरोप हैं।</h6>
<h2><span><strong>सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं रहा विरोध</strong></span></h2>
<h6>CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। पार्टी ने शुक्रवार को दिल्ली, कोलकाता, लखनऊ, चंडीगढ़, जम्मू और देहरादून समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किए। कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और उन्हें पद से हटाने की मांग कर रही है।</h6>
<h6>देहरादून में भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सचिवालय की ओर मार्च किया, जहां पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।</h6>
<h2><span><strong>ज्ञानेश कुमार को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?</strong></span></h2>
<h6>मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर हालिया विवाद चुनाव आयोग के भीतर फैसलों पर कथित असहमति की रिपोर्ट सामने आने के बाद तेज हुआ है।</h6>
<h6>मीडिया रिपोर्टों के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते महीनों में SIR समेत आयोग के कई फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इन्हीं रिपोर्टों को आधार बनाकर CEC से जवाब और इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।</h6>
<h6>चुनाव आयोग का पक्ष रहा है कि अलग-अलग राय निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से किए गए। इसलिए विपक्ष के आरोप और आयोग की सफाई—दोनों इस राजनीतिक विवाद का हिस्सा हैं।</h6>
<h2><span><strong>CEC का यूपी दौरा भी हुआ स्थगित</strong></span></h2>
<h6>इसी विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मेरठ और वाराणसी में प्रस्तावित कार्यक्रम भी स्थगित हो चुके हैं।</h6>
<h6>मेरठ में 25 सितंबर को युवाओं के साथ संवाद और चुनाव से जुड़े कार्यक्रम का आयोजन प्रस्तावित था, जबकि वाराणसी में 28 सितंबर का कार्यक्रम था। चुनाव आयोग ने कार्यक्रम स्थगित किए जाने का कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है।</h6>
<h6>इसलिए कार्यक्रम स्थगित होने को सीधे मौजूदा राजनीतिक विवाद का परिणाम मानना अभी स्थापित तथ्य नहीं है।</h6>
<h2><span><strong>यूपी में चुनावी सियासत के बीच बढ़ी हलचल</strong></span></h2>
<h6>उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां पहले ही तेज हैं। ऐसे में चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस का यह प्रदर्शन भी राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।</h6>
<h6>अजय राय के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार संगठन और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी सक्रियता बढ़ाने की कोशिश कर रही है। शुक्रवार का प्रदर्शन मुख्य रूप से CEC और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर केंद्रित रहा।</h6>
<h6><strong>लखनऊ में तेज बारिश के बीच हुआ कांग्रेस का प्रदर्शन अब तस्वीरों और राजनीतिक संदेश—दोनों वजहों से चर्चा में है। कांग्रेस CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ी है, जबकि चुनाव आयोग अपने फैसलों की प्रक्रिया को लेकर सफाई दे चुका है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि आयोग की ओर से आगे कोई नया स्पष्टीकरण आता है या विपक्ष इस विरोध को और तेज करता है।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 16:31:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>14 आपत्तियां, फिर भी सर्वसम्मति से फैसले कैसे? चुनाव आयोग की सफाई के बाद उठे नए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग के भीतर दो आयुक्तों की कम से कम 14 लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद आयोग ने कहा कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। अब बहस इस बात पर है कि जिन मुद्दों पर शुरुआत में गंभीर सवाल उठे, उन पर आखिर सहमति कैसे बनी और क्या आयोग इससे जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions/article-2191"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions.jpg" alt=""></a><br /><h2><span><strong>आपत्तियां दर्ज हुईं, फिर सहमति कैसे बनी? अब इसी जवाब पर टिकी नजर</strong></span></h2>
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दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के सर्वसम्मति से फैसले वाले दावे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

<h6><span><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></span></h6>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की—रिपोर्ट</strong></li>
<li><strong>चुनाव आयोग का दावा—अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए</strong></li>
<li><strong>Form-6, ECINet और मतदाता सूची से जुड़े मामलों पर उठे थे सवाल</strong></li>
<li><strong>आयोग ने मतभेद को सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा बताया</strong></li>
<li><strong>अब सवाल—आपत्तियों से अंतिम सहमति तक की पूरी प्रक्रिया क्या थी?</strong></li>
</ul>
<h6><strong>नई दिल्ली।</strong> चुनाव आयोग के अंदरूनी कामकाज को लेकर सामने आई रिपोर्ट और उसके बाद आयोग की सफाई ने एक नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के विभिन्न कदमों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। इसके बाद चुनाव आयोग ने कहा कि अलग-अलग राय आंतरिक विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा है और पिछले एक साल के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।</h6>
<h6>लेकिन आयोग की इसी सफाई के बाद अब एक बड़ा सवाल सामने आया है—अगर कई मामलों पर दोनों आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी, तो अंतिम फैसला लेते समय वे उसी फैसले से सहमत कैसे हुए?</h6>
<h2><span><strong>किन मुद्दों पर आयुक्तों ने उठाए थे सवाल?</strong></span></h2>
<h6><em>इंडियन एक्सप्रेस</em> की जांच रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों पर थीं। इनमें नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में बदलाव, ECINet की व्यवस्था, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा कुछ प्रशासनिक फैसले शामिल थे।</h6>
<h6>रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ मामलों में आयुक्तों ने कड़ी भाषा में अपनी आपत्ति दर्ज कराई। Form-6 में बदलाव को लेकर भी दोनों आयुक्तों की ओर से सवाल उठाए जाने की बात सामने आई।</h6>
<h2><span><strong>चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी?</strong></span></h2>
<h6>चुनाव आयोग ने इस विवाद पर कहा कि किसी बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग विचार, सुझाव और टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के मुताबिक बीते 10 महीनों में 40 से ज्यादा पहल और कई चुनाव सुधार किए गए, जबकि पिछले एक साल के अंतिम फैसले सभी चुनाव आयुक्तों की भागीदारी और सहमति से लिए गए।</h6>
<h6>आयोग का पक्ष यह है कि ड्राफ्ट स्तर पर दी गई टिप्पणियों या आपत्तियों को अंतिम फैसले से अलग करके देखने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।</h6>
<h2><span><strong>सफाई के बाद नया सवाल क्यों उठा?</strong></span></h2>
<h6>यहीं से विवाद का दूसरा हिस्सा शुरू होता है। अगर शुरुआत में किसी प्रस्ताव या प्रक्रिया पर लिखित आपत्ति थी, लेकिन अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से हुआ, तो बीच में ऐसा क्या बदला कि सभी सदस्य सहमत हो गए?</h6>
<h6>AajTak के विश्लेषण में भी इसी सवाल को प्रमुखता से उठाया गया है। लेख में कहा गया है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि आपत्तियों के बाद क्या विस्तृत चर्चा हुई, क्या संबंधित प्रस्तावों में बदलाव किए गए या किसी कानूनी और तकनीकी स्पष्टीकरण के बाद आयुक्तों की चिंताएं दूर हुईं। हालांकि लेख में रखी गई ये संभावनाएं हैं, स्थापित तथ्य नहीं।</h6>
<h2><span><strong>क्या आपत्तियां चर्चा के बाद दूर हो गई थीं?</strong></span></h2>
<h6>एक संभावना यह हो सकती है कि शुरुआती मसौदे पर सवाल उठने के बाद आयोग के भीतर चर्चा हुई हो और बाद में संबंधित बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मिलने से सहमति बन गई हो।</h6>
<h6>दूसरी संभावना यह भी हो सकती है कि कुछ आपत्तियां केवल प्रक्रिया से जुड़ी रही हों और अंतिम फैसले तक पहुंचने से पहले उनमें बदलाव किया गया हो।</h6>
<h6>लेकिन फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी से यह साफ नहीं है कि प्रत्येक आपत्ति पर अलग-अलग क्या समाधान निकला। इसलिए इस पर निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। AajTak के विश्लेषण ने भी इन कारणों को संभावनाओं के रूप में ही रखा है।</h6>
<h2><span><strong>क्या फैसलों की कॉपी सामने आएगी?</strong></span></h2>
<h6>ऐसा होने पर यह समझने में मदद मिल सकती है कि आयुक्तों ने किस बिंदु पर आपत्ति जताई थी और अंतिम फैसले में क्या बदलाव या स्पष्टीकरण आया। हालांकि चुनाव आयोग ने ऐसी प्रतियां जारी करने की कोई घोषणा की है, इसका सार्वजनिक प्रमाण फिलहाल सामने नहीं है।</h6>
<h2><span><strong>Form-6 को लेकर क्या था विवाद?</strong></span></h2>
<h6>नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में SIR से संबंधित अतिरिक्त सवाल जोड़े जाने को लेकर भी विवाद सामने आया था। <em>इंडियन एक्सप्रेस</em> की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों आयुक्तों ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी और इसके कानूनी आधार को लेकर सवाल किए थे।</h6>
<h6>यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि Form-6 नए मतदाता के रूप में पंजीकरण की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।</h6>
<h2><span><strong>अब असली सवाल पारदर्शिता का</strong></span></h2>
<h6>इस पूरे मामले में फिलहाल दो बातें साथ-साथ सामने हैं। पहली, दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कई मुद्दों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की रिपोर्ट। दूसरी, चुनाव आयोग का यह कहना कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।</h6>
<h6>इन दोनों बातों में अपने-आप विरोधाभास होना जरूरी नहीं है, क्योंकि विचार-विमर्श के दौरान मतभेद के बाद सहमति बन सकती है। लेकिन सार्वजनिक बहस का केंद्र अब यह है कि इस खास मामले में सहमति बनने की प्रक्रिया क्या थी।</h6>
<h6><strong>चुनाव आयोग के भीतर मतभेद होना अपने-आप में असामान्य नहीं है, लेकिन 14 लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद सवाल केवल मतभेद का नहीं बल्कि उसके समाधान का है। आयोग ने अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति वाला बताया है। अब यदि आपत्तियों से सहमति तक पहुंचने की प्रक्रिया और स्पष्ट होती है, तो इस विवाद से जुड़े कई सवालों के जवाब भी सामने आ सकते हैं।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 15:10:51 +0530</pubDate>
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