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                <title>Vote Chori - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <description>Vote Chori RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>‘राहुल गांधी ने बिल्कुल सही कहा’; चुनाव आयोग पर उमर अब्दुल्ला बोले—भरोसा उठ गया तो वोट कौन देगा?</title>
                                    <description><![CDATA[उमर अब्दुल्ला ने कहा कि किसी योग्य नागरिक को मतदान से रोकना लोकतंत्र पर हमला है। चुनाव प्रक्रिया से लोगों का भरोसा उठ गया तो वे मतदान में हिस्सा क्यों लेंगे? चुनाव आयोग ने मतभेद के दावों को खारिज किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/omar-abdullah-supports-rahul-gandhi-election-commission-sir-row/article-2171"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/omar-abdullah-rahul-gandhi-election-commission-sir-row.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>‘राहुल गांधी ने बिल्कुल सही कहा’; चुनाव आयोग पर उमर अब्दुल्ला बोले—भरोसा उठ गया तो वोट कौन देगा?</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/omar-abdullah-rahul-gandhi-election-commission-sir-row.jpg2.jpg" alt="omar-abdullah-rahul-gandhi-election-commission-sir-row.jpg2" width="1366" height="768"></img>
चुनाव आयोग और SIR विवाद पर राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 23 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>चुनाव आयोग के कामकाज पर उमर अब्दुल्ला ने उठाए सवाल</strong></li>
<li><strong>राहुल गांधी के बयान को बताया बिल्कुल सही</strong></li>
<li><strong>बोले—चुनाव से भरोसा उठा तो लोकतंत्र में क्या बचेगा</strong></li>
<li><strong>चुनाव आयोग ने कहा—SIR के सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए</strong></li>
</ul>
<h6>चुनाव आयोग और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी विवाद में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी उतर गए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि मतदान के अधिकार से किसी नागरिक को रोकना लोकतंत्र पर सीधा हमला है।</h6>
<h6>उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद चुनाव होते हैं। यदि लोगों का भरोसा चुनाव प्रक्रिया से ही उठ गया तो वे चुनाव में हिस्सा क्यों लेंगे? उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से इस विवाद पर गंभीरता से विचार करने और सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।</h6>
<h3>‘राहुल गांधी ने बिल्कुल सही कहा’</h3>
<h6>राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा, “अगर आप किसी को वोट देने से रोक रहे हैं, जबकि वोट देना उसका अधिकार है, तो यह लोकतंत्र पर हमला नहीं है तो और क्या है? राहुल गांधी ने जो कहा, बिल्कुल सही कहा है।”</h6>
<h6>उन्होंने आगे कहा कि अब यह देखना होगा कि सामने आए सवालों और आरोपों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। केवल सफाई जारी करने से लोगों के मन में पैदा हुई आशंकाएं खत्म नहीं होंगी। चुनावी व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता जरूरी है।</h6>
<h3>चुनाव आयोग की सफाई पर भी उठाए सवाल</h3>
<h6>उमर अब्दुल्ला ने कहा कि चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद से जुड़ी रिपोर्ट कई गंभीर सवाल खड़े करती है। उनके अनुसार, आयोग की ओर से यह कहना कि आंतरिक चर्चा में अलग-अलग विचार सामने आते रहते हैं, बताता है कि पूरे मामले पर अधिक स्पष्ट जानकारी देने की जरूरत है।</h6>
<h6>उन्होंने कहा कि आयोग को आरोपों का विस्तार से जवाब देना चाहिए, जिससे मतदाताओं के बीच कोई भ्रम न रहे। चुनाव की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।</h6>
<h3>जम्मू-कश्मीर के परिसीमन का किया जिक्र</h3>
<h6>उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में हुई परिसीमन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर में SIR का विवाद राष्ट्रीय स्तर पर सामने आने से पहले ही चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर शिकायतें मिल रही थीं।</h6>
<h6>उन्होंने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और उसमें कई कमियां थीं। उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि निर्वाचन क्षेत्रों में किए गए बदलावों से एक राजनीतिक दल और उसके सहयोगियों को फायदा पहुंचाने का प्रयास किया गया।</h6>
<h6>यह उमर अब्दुल्ला का आरोप है। चुनाव आयोग पहले भी परिसीमन और चुनावी प्रक्रिया को नियमों के अनुसार एवं निष्पक्ष तरीके से पूरा किए जाने की बात कहता रहा है।</h6>
<h3>राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाया?</h3>
<h6>कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के दो आयुक्तों द्वारा कथित रूप से कई बार आपत्ति दर्ज कराने की रिपोर्ट सामने आने के बाद आयोग पर तीखा हमला किया था।</h6>
<h6>राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाना या योग्य नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करना संविधान पर हमला है। उन्होंने चुनाव आयोग के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि गलत काम करने वालों की भविष्य में जवाबदेही तय की जाएगी।</h6>
<h3>चुनाव आयोग ने क्या कहा?</h3>
<h6>चुनाव आयोग ने अंदरूनी मतभेद और फैसलों में टकराव के दावों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि SIR सहित सभी अंतिम फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए।</h6>
<h6>आयोग ने कहा कि किसी निर्णय से पहले सवाल, सुझाव और अलग विचार सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। इन्हें अंतिम फैसले के खिलाफ औपचारिक असहमति नहीं माना जा सकता। आयोग के अनुसार, उसके सभी आधिकारिक फैसले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।</h6>
<h3>चुनावी भरोसे पर छिड़ी बड़ी बहस</h3>
<h6>राहुल गांधी के आरोपों को उमर अब्दुल्ला का समर्थन मिलने के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। विपक्ष आयोग से कथित आपत्तियों और SIR से जुड़े फैसलों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है।</h6>
<h6><strong>उमर अब्दुल्ला का बयान इस विवाद को नया राजनीतिक मोड़ देता है। उनका सीधा सवाल है कि यदि जनता का चुनाव प्रक्रिया से भरोसा उठ गया तो लोकतंत्र की बुनियाद कैसे बचेगी। अब चुनाव आयोग के सामने केवल आरोपों को खारिज करने की नहीं, बल्कि मतदाताओं का भरोसा मजबूत करने की भी बड़ी चुनौती है।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/omar-abdullah-supports-rahul-gandhi-election-commission-sir-row/article-2171</link>
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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 18:42:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>‘14 बार असहमति तानाशाही नहीं, चेक-बैलेंस है’; राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोप पर संबित पात्रा का पलटवार</title>
                                    <description><![CDATA[संबित पात्रा ने कहा कि चुनाव आयुक्तों के बीच सवाल और असहमति लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे तानाशाही या वोट चोरी का प्रमाण बताना गलत है। राहुल गांधी ने इस मामले को संविधान पर हमला और देशद्रोह बताया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/sambit-patra-reply-rahul-gandhi-vote-chori-election-commission-sir-row/article-2169"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/sambit-patra-rahul-gandhi-vote-chori-eci-sir-row.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>14 बार असहमति तानाशाही नहीं, चेक-बैलेंस है’; राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोप पर संबित पात्रा का पलटवार </strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/sambit-patra-rahul-gandhi-vote-chori-eci-sir-row.jpg2.jpg" alt="sambit-patra-rahul-gandhi-vote-chori-eci-sir-row.jpg2" width="1366" height="768"></img>
चुनाव आयोग और SIR विवाद पर राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते BJP सांसद संबित पात्रा।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 23 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद पर बढ़ा राजनीतिक विवाद</strong></li>
<li><strong>राहुल गांधी ने BJP और चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप</strong></li>
<li><strong>संबित पात्रा बोले—असहमति लोकतांत्रिक चेक-बैलेंस का हिस्सा</strong></li>
<li><strong>चुनाव आयोग ने कहा—SIR सहित सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए</strong></li>
</ul>
<p>चुनाव आयोग और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी विवाद में BJP नेता संबित पात्रा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर पलटवार किया है। पात्रा ने कहा कि चुनाव आयुक्तों के बीच सवाल, सुझाव या किसी मुद्दे पर असहमति होना लोकतांत्रिक व्यवस्था में चर्चा और आंतरिक चेक-बैलेंस की निशानी है। इसे तानाशाही या चुनाव आयोग की विफलता बताना गलत है।</p>
<p>संबित पात्रा का यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के विभिन्न फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।</p>
<h3>राहुल गांधी ने लगाया ‘वोट चोरी’ का आरोप</h3>
<p>इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग, BJP और RSS पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने कहा कि कथित ‘वोट चोरी’ देश के नागरिकों और संविधान पर सीधा हमला है।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि यदि चुनाव आयोग के भीतर दो आयुक्त लगातार फैसलों पर सवाल उठा रहे थे, तो यह मामला बेहद गंभीर है। राहुल गांधी ने इसे देशद्रोह तक बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।</p>
<p>हालांकि, ये सभी आरोप राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। चुनाव आयोग और BJP ने इन्हें खारिज करते हुए आयोग की चुनावी प्रक्रिया का बचाव किया है।</p>
<h3>संबित पात्रा ने कांग्रेस को घेरा</h3>
<h6>राहुल गांधी के बयान पर जवाब देते हुए संबित पात्रा ने कहा कि विपक्षी दल चुनाव में हार मिलने के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करने लगते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद लगातार कमजोर हो रहे विपक्ष ने अब चुनाव आयोग को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।</h6>
<h6>पात्रा ने कहा कि किसी संस्था के भीतर अधिकारियों द्वारा सवाल उठाना या सुझाव देना सामान्य प्रक्रिया है। तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच किसी विषय पर चर्चा या अलग राय को तानाशाही बताना गलत है। उनके अनुसार, आंतरिक बातचीत और मतभेद संस्थागत चेक-बैलेंस का प्रमाण हैं।</h6>
<h3>चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी?</h3>
<h6>मामला बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने कहा कि SIR सहित उसके सभी अंतिम फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे।</h6>
<h6>आयोग के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए अधिकारियों और आयुक्तों द्वारा सवाल एवं सुझाव दिए जाना सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा है। किसी फैसले से पहले हुई चर्चा को औपचारिक असहमति या अंतिम निर्णय का विरोध नहीं माना जाना चाहिए।</h6>
<h6>आयोग ने यह भी कहा कि उसके सभी आधिकारिक आदेश और प्रशासनिक निर्देश तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जारी किए गए हैं। आयोग ने अपने कामकाज और अंतिम फैसलों में मतभेद होने के दावों को खारिज किया है।</h6>
<h3>14 आपत्तियों के दावे पर विवाद</h3>
<h6>रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, Form 6 में बदलाव तथा चुनावी डाटा को नियंत्रित करने जैसे मामलों पर सवाल उठाए थे।</h6>
<h6>इसी दावे को आधार बनाकर विपक्ष चुनाव आयोग से विस्तृत जवाब और अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहा है। कांग्रेस का कहना है कि आयोग को केवल अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति वाला बताने के बजाय आयुक्तों द्वारा उठाए गए हर सवाल का जवाब देना चाहिए।</h6>
<h6>दूसरी तरफ BJP का तर्क है कि किसी फैसले से पहले अधिकारियों द्वारा सवाल उठाना संवैधानिक संस्था की सामान्य कार्यप्रणाली है और इसे चुनाव में गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।</h6>
<h3>अब पारदर्शिता पर टिका पूरा विवाद</h3>
<h6>SIR और मतदाता सूची को लेकर पहले से जारी राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग के अंदर कथित आपत्तियों की रिपोर्ट ने मामले को और गरमा दिया है। विपक्ष इसे आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल बता रहा है, जबकि BJP इसे सामान्य चर्चा को राजनीतिक विवाद बनाने का प्रयास कह रही है।</h6>
<p><strong>राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ और देशद्रोह जैसे गंभीर आरोपों के बाद विवाद अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। चुनाव आयोग की सफाई और संबित पात्रा के पलटवार के बावजूद विपक्ष 14 कथित लिखित आपत्तियों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है। अब देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग इन सवालों पर कोई विस्तृत दस्तावेज जारी करता है या विवाद और तेज होता है।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 17:16:51 +0530</pubDate>
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