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                <title>अभिषेक मनु सिंघवी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <description>अभिषेक मनु सिंघवी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार RSS Feed</description>
                
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                <title>‘EC को हाईजैक कर लोकतंत्र पर चलाया बुलडोजर’, सिंघवी का ज्ञानेश कुमार पर हमला; दिल्ली-हरियाणा चुनाव रद्द करने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[SIR विवाद पर अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को हाईजैक करके दूसरे आयुक्तों को फैसलों से दूर रखा गया। उन्होंने विवादित आदेश रद्द करने और दिल्ली-हरियाणा के चुनाव दोबारा कराने की मांग उठाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/abhishek-manu-singhvi-gyanesh-kumar-sir-ec-row/article-2166"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/abhishek-manu-singhvi-gyanesh-kumar-sir-ec-row.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>‘EC को हाईजैक कर लोकतंत्र पर चलाया बुलडोजर’, सिंघवी का ज्ञानेश कुमार पर हमला; दिल्ली-हरियाणा चुनाव रद्द करने की मांग</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/abhishek-manu-singhvi-gyanesh-kumar-sir-ec-row.jpg2.jpg" alt="abhishek-manu-singhvi-gyanesh-kumar-sir-ec-row.jpg2" width="1366" height="768"></img>
SIR विवाद पर कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 23 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>ज्ञानेश कुमार पर चुनाव आयोग को हाईजैक करने का आरोप</strong></li>
<li><strong>दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों का दावा</strong></li>
<li><strong>दिल्ली और हरियाणा के चुनाव रद्द करने की मांग</strong></li>
<li><strong>EC ने कहा—सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए</strong></li>
</ul>
<h6>यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर विपक्ष के हमले लगातार तेज होते जा रहे हैं। कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग को कथित रूप से हाईजैक करके चलाया गया।</h6>
<h6>सिंघवी ने दावा किया कि आयोग के दो सदस्यों की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए कई फैसले लिए गए। उन्होंने इसे चुनाव आयोग के अंदर चलाया गया ‘आंतरिक बुलडोजर’ बताया और कहा कि इससे संस्था की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।</h6>
<h3>10 महीनों में 14 आपत्तियों का दावा</h3>
<h6>यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद बढ़ा है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में आयोग के अलग-अलग फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति जताई थी।</h6>
<h6>इन आपत्तियों को नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6, मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने तथा Voter Database के नियंत्रण जैसे मामलों से जुड़ा बताया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि कुछ आदेश दोनों चुनाव आयुक्तों की जानकारी या सहमति के बिना जारी किए गए।</h6>
<h3>‘चुनाव आयोग को हाईजैक किया गया’</h3>
<h6>अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने ही साथी चुनाव आयुक्तों को फैसलों से दूर रखकर आयोग की व्यवस्था पर नियंत्रण कर लिया। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर मामला बताया।</h6>
<h6>सिंघवी ने कहा कि चुनाव आयोग तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था है और इसके फैसले किसी एक व्यक्ति की इच्छा से नहीं होने चाहिए। आयोग के सदस्यों की राय और असहमति को आधिकारिक रिकॉर्ड में जगह मिलनी चाहिए।</h6>
<h3>दिल्ली-हरियाणा चुनाव पर उठाए सवाल</h3>
<h6>सिंघवी ने SIR और मतदाता सूची में बदलावों का मुद्दा उठाते हुए दिल्ली और हरियाणा के विधानसभा चुनावों की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने मांग की कि इन चुनावों से जुड़े रिकॉर्ड और मतदाता सूचियों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।</h6>
<h6>उन्होंने दिल्ली और हरियाणा के चुनाव रद्द करके दोबारा मतदान कराने की मांग भी उठाई। हालांकि चुनाव में गड़बड़ी और परिणाम प्रभावित होने के उनके आरोपों की किसी अदालत या आधिकारिक जांच में पुष्टि नहीं हुई है।</h6>
<h3>13 करोड़ नाम हटाने का दावा</h3>
<h6>कांग्रेस नेता ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान देशभर की मतदाता सूचियों से करीब 13 करोड़ नाम हटाए गए। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने पर पूरी प्रक्रिया की जांच और सार्वजनिक जवाब जरूरी है।</h6>
<h6>मतदाता सूची से नाम हटाने की वास्तविक संख्या और उसके कारण अलग-अलग राज्यों में अलग हैं। चुनाव आयोग का कहना रहा है कि मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित और Duplicate मतदाताओं की पहचान के लिए पुनरीक्षण किया जाता है। पात्र मतदाताओं को दस्तावेज देकर अपना नाम जुड़वाने का अवसर भी मिलता है।</h6>
<h3>चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया?</h3>
<h6>चुनाव आयोग ने अंदरूनी मतभेद और एकतरफा फैसलों के आरोपों को नकारा है। आयोग का कहना है कि अधिकारियों और चुनाव आयुक्तों को सुझाव तथा अपनी राय देने की पूरी स्वतंत्रता है।</h6>
<h6>आयोग के अनुसार, किसी विषय पर अलग-अलग सुझाव आना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन SIR सहित सभी अंतिम फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग ने कहा कि किसी सदस्य ने अंतिम फैसलों के खिलाफ औपचारिक असहमति दर्ज नहीं कराई।</h6>
<h3>आरोप बड़े, अब प्रमाण और जांच पर टिकी निगाहें</h3>
<p><strong>अभिषेक मनु सिंघवी के आरोपों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में हुए बदलावों पर नई बहस शुरू कर दी है। चुनाव आयोग ने सभी फैसलों को सर्वसम्मति से लिया हुआ बताया है, जबकि कांग्रेस स्वतंत्र जांच की मांग कर रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कथित लिखित आपत्तियों और चुनाव परिणामों के बीच कोई संबंध साबित होगा या मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाएगा।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 15:25:26 +0530</pubDate>
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