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                <title>Vote Theft - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <title>चुनाव आयोग में 14 आपत्तियों का दावा; राहुल गांधी का बड़ा हमला, बोले- वोट चोरी राजद्रोह है</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े फैसलों पर मतभेद की रिपोर्ट ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। राहुल गांधी ने कहा कि वोट चोरी सिर्फ चुनावी गड़बड़ी नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र के साथ राजद्रोह है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/rahul-gandhi-election-commission-sir-14-objections/article-2161"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/rahul-gandhi-sir-election-commission-14-objections.webp2.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>हमला, बोले- वोट चोरी राजद्रोह है</strong></h1>
<h5><strong>चुनाव आयोग के भीतर SIR को लेकर मतभेद होने की रिपोर्ट सामने आने के बाद राहुल गांधी ने आयोग पर हमला बोला है।</strong></h5>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/rahul-gandhi-sir-election-commission-14-objections.webp2.jpg" alt="rahul-gandhi-sir-election-commission-14-objections.webp2" width="1366" height="768"></img>
SIR पर चुनाव आयोग में मतभेद की रिपोर्ट के बाद राहुल गांधी ने आयोग पर निशाना साधा।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 23 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार आपत्ति जताई: रिपोर्ट</strong></li>
<li><strong>फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची पर उठाए गए सवाल</strong></li>
<li><strong>राहुल गांधी बोले- वोट चोरी राजद्रोह है</strong></li>
<li><strong>विपक्ष ने कथित आपत्तियां सार्वजनिक करने की मांग उठाई</strong></li>
<li><strong>चुनाव आयोग ने कहा- सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए</strong></li>
</ul>
<h6>चुनाव आयोग के भीतर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर मतभेद होने की रिपोर्ट ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के अलग-अलग फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की।</h6>
<h6>ये कथित आपत्तियां मतदाता सूची से नाम हटाने, नए मतदाताओं के पंजीकरण, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनावी डाटाबेस के संचालन जैसे महत्वपूर्ण मामलों से जुड़ी बताई गई हैं।</h6>
<h6>रिपोर्ट सामने आने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि वोट चोरी केवल चुनावी गड़बड़ी नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ राजद्रोह है।</h6>
<h2>राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को घेरा</h2>
<h6>राहुल गांधी लंबे समय से मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। ताजा रिपोर्ट सामने आने के बाद उन्होंने अपने पुराने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि देश के नागरिकों का मतदान अधिकार प्रभावित करना बेहद गंभीर मामला है।</h6>
<h6>राहुल गांधी का आरोप है कि SIR के नाम पर पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। हालांकि चुनाव आयोग उनके वोट चोरी के आरोपों को पहले भी खारिज कर चुका है और प्रमाणित सबूत पेश करने की मांग करता रहा है।</h6>
<h6>इसलिए राहुल गांधी का बयान एक राजनीतिक आरोप है। चुनाव आयोग ने वोट चोरी या किसी राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने के आरोप को स्वीकार नहीं किया है।</h6>
<h2>आखिर क्या है 14 आपत्तियों का मामला?</h2>
<h6>इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के फैसलों पर 10 महीने में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की।</h6>
<h6>रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर सवाल उठाया कि आयोग के नाम से कुछ निर्देश उनकी जानकारी और मंजूरी के बिना कैसे जारी हुए।</h6>
<h6>आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और शामिल करने की प्रक्रिया तथा चुनावी डाटाबेस तक अधिकारियों की पहुंच जैसे मामले शामिल बताए गए हैं।</h6>
<h2>फॉर्म-6 में बदलाव पर क्यों उठे सवाल?</h2>
<h6>फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए किया जाता है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस फॉर्म में SIR से जुड़ा एक नया सवाल शामिल कर दिया गया था।</h6>
<h6>आवेदकों से पूछा गया कि उनका या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में मौजूद है या नहीं।</h6>
<h6>दावा है कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने इस बदलाव पर पहले ही सवाल उठाए थे। बाद में सुखबीर सिंह संधू ने भी कथित तौर पर इसे अनधिकृत और गैरकानूनी बताते हुए हटाने की मांग की।</h6>
<h2>मतदाता डाटाबेस के नियंत्रण पर भी आपत्ति</h2>
<h6>रिपोर्ट में मतदाता सूची के डिजिटल डाटाबेस के कथित केंद्रीकरण पर भी चिंता जताने का दावा किया गया है।</h6>
<h6>सामान्य रूप से विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी की निगरानी में तैयार और अपडेट की जाती है। कथित आपत्ति में कहा गया कि स्थानीय और राज्य स्तरीय अधिकारियों को डाटाबेस तक पूरी पहुंच मिलनी चाहिए।</h6>
<h6>सवाल यह उठाया गया कि यदि डाटाबेस का नियंत्रण केंद्रीय स्तर पर सीमित हो जाएगा, तो स्थानीय अधिकारियों की कानूनी भूमिका और जवाबदेही कैसे बनी रहेगी।</h6>
<h2>चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी?</h2>
<h6>चुनाव आयोग के सूत्रों ने औपचारिक मतभेद के दावे से इनकार किया है। सूत्रों का कहना है कि SIR समेत आयोग के सभी महत्वपूर्ण फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए।</h6>
<h6>आयोग के मुताबिक, बैठक के दौरान सवाल पूछना, टिप्पणी करना या सुझाव देना सामान्य प्रक्रिया है। इसे अंतिम फैसले के खिलाफ औपचारिक असहमति नहीं माना जा सकता।</h6>
<h6>सूत्रों ने दावा किया कि चर्चा के बाद आयोग के सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और उन पर तीनों सदस्यों की मंजूरी थी।</h6>
<h2>विपक्ष ने उठाई दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग</h2>
<h6>कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की सफाई के बाद कथित लिखित आपत्तियों को सार्वजनिक करने की मांग उठाई है।</h6>
<h6>विपक्ष का कहना है कि यदि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे, तो आयोग को इससे जुड़े दस्तावेज और बैठकों का आधिकारिक रिकॉर्ड सामने रखना चाहिए।</h6>
<h6>वहीं, आयोग का पक्ष है कि आंतरिक चर्चा में अलग-अलग सुझाव आना सामान्य बात है और इससे यह साबित नहीं होता कि अंतिम फैसलों पर सदस्यों के बीच मतभेद था।</h6>
<h2>अब सबसे बड़ा सवाल- आपत्ति या सामान्य सुझाव?</h2>
<h6>फिलहाल इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज की गई बातें औपचारिक आपत्तियां थीं या फैसला लेने से पहले दिए गए सामान्य सुझाव।</h6>
<h6>एक तरफ रिपोर्ट में 14 लिखित आपत्तियों और कुछ फैसलों को अनधिकृत बताए जाने का दावा किया गया है। दूसरी तरफ आयोग के सूत्र सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कह रहे हैं।</h6>
<h6>अब स्थिति तभी पूरी तरह साफ हो सकेगी, जब चुनाव आयोग कथित आपत्तियों और उनसे जुड़े फैसलों का आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करेगा।</h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 13:18:06 +0530</pubDate>
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