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                <title>Sukhbir Singh Sandhu - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                            <item>
                <title>SIR पर 14 आपत्तियों के दावे के बाद EC की 8-Point सफाई—‘अलग राय सामान्य, सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से’</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग ने SIR पर कथित मतभेद की रिपोर्ट को अधूरी तस्वीर बताते हुए आठ बिंदुओं में सफाई दी है। आयोग के मुताबिक आंतरिक सवाल और सुझाव सामान्य प्रक्रिया हैं, जबकि सभी आधिकारिक फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी मिली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/election-commission-eight-point-clarification-sir-internal-dissent-gyanesh-kumar/article-2172"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/election-commission-eight-point-clarification-sir-row.jpg.png" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>SIR पर 14 आपत्तियों के दावे के बाद EC की 8-Point सफाई—‘अलग राय सामान्य, सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से’</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/election-commission-eight-point-clarification-sir-row.jpg.png" alt="election-commission-eight-point-clarification-sir-row.jpg" width="1366" height="768"></img>
SIR पर कथित मतभेद की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने आठ बिंदुओं में अपनी कार्यप्रणाली और फैसलों पर सफाई जारी की।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 23 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>कथित अंदरूनी मतभेद पर चुनाव आयोग की विस्तृत सफाई</strong></li>
<li><strong>आठ बिंदुओं में बताई आयोग की निर्णय प्रक्रिया</strong></li>
<li><strong>कहा—सुझाव और अलग-अलग राय सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा</strong></li>
<li><strong>SIR सहित सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लेने का दावा</strong></li>
</ul>
<h6>यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद की रिपोर्ट पर आयोग ने विस्तृत जवाब जारी किया है। चुनाव आयोग ने आठ बिंदुओं में अपनी कार्यप्रणाली स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी अंतिम निर्णय से पहले अलग-अलग राय, सवाल और सुझाव सामने आना सामान्य प्रक्रिया है।</h6>
<h6>आयोग ने दावा किया कि SIR सहित पिछले एक साल के सभी आधिकारिक फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू एवं विवेक जोशी की सहमति से लिए गए हैं।</h6>
<h3>14 बार आपत्ति दर्ज होने का दावा</h3>
<h6>इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के विभिन्न कदमों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।</h6>
<h6>रिपोर्ट में मतदाता सूची से नाम हटाने एवं जोड़ने, Form 6 में बदलाव, मतदाता डाटा के नियंत्रण और SIR के दौरान लिए गए कुछ फैसलों पर सवाल उठने का दावा किया गया। रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए।</h6>
<h6>अब चुनाव आयोग ने आठ बिंदुओं में इन सवालों का जवाब दिया है।</h6>
<h3>1. संवैधानिक नियमों के तहत काम करता है आयोग</h3>
<h6>चुनाव आयोग ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324, संबंधित कानूनों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के तहत काम करने वाली बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है।</h6>
<h6>आयोग में लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच की व्यवस्था सामान्य रूप से चलती रहती है। इसका उद्देश्य कानूनी नियमों का पालन, पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की मजबूती सुनिश्चित करना है।</h6>
<h3>2. सभी आधिकारिक फैसले कानूनी रूप से मान्य</h3>
<h6>आयोग के अनुसार, उसके सभी आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश कानूनी रूप से मान्य हैं। इन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 के तहत तय प्रक्रिया का पालन करते हुए जारी किया गया है।</h6>
<h6>आयोग ने उन आरोपों को खारिज किया जिनमें बिना आवश्यक मंजूरी के आधिकारिक फैसले जारी किए जाने की बात कही गई थी।</h6>
<h3>3. शुरुआती सवाल अंतिम असहमति नहीं</h3>
<h6>चुनाव आयोग ने कहा कि किसी फैसले के शुरुआती Draft पर आयुक्तों द्वारा सवाल उठाना या सुझाव देना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।</h6>
<h6>आयोग के मुताबिक इन सवालों और सुझावों का उद्देश्य मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना और चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाना होता है। शुरुआती टिप्पणी को अंतिम फैसले के खिलाफ औपचारिक असहमति नहीं माना जा सकता।</h6>
<h3>4. अलग-अलग विचार होना सामान्य</h3>
<h6>आयोग ने कहा कि किसी भी बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग विचार सामने आना सामान्य बात है। अंतिम फैसला लेने से पहले होने वाली चर्चा निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।</h6>
<h6>केवल तीनों चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने के लिए अधिकृत है।</h6>
<h3>5. केवल 14 टिप्पणियों से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती</h3>
<h6>चुनाव आयोग ने कहा कि 10 महीनों में सामने आए कुछ चुनिंदा आंतरिक Notes और टिप्पणियों को दिखाकर बाकी फैसलों एवं मंजूरियों को नजरअंदाज करना पूरी तस्वीर पेश नहीं करता।</h6>
<h6>आयोग के अनुसार, पिछले एक साल में करीब 40 नई पहल शुरू की गई हैं। मतदाता सूची के पुनरीक्षण, SIR और दूसरे चुनाव सुधारों से जुड़े सभी अंतिम फैसले आयोग ने सर्वसम्मति से लिए हैं।</h6>
<h3>6. छह राज्यों में चुनाव कराने का दिया उदाहरण</h3>
<h6>आयोग ने बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में चुनाव सफलतापूर्वक कराने का भी उल्लेख किया।</h6>
<h6>चुनाव आयोग ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर चुनाव कराने के लिए व्यापक प्रशासनिक व्यवस्था, लगातार निगरानी और आयोग की कई मंजूरियों की जरूरत होती है। ये सभी काम पूरी चुनावी मशीनरी के तालमेल से किए गए।</h6>
<h3>7. ECINet की सुरक्षा पर दिया जवाब</h3>
<h6>आयोग ने अपने Digital Platform ECINet की सुरक्षा पर भी सफाई दी। आयोग के अनुसार, यह सिस्टम बिना अनुमति किसी बदलाव या छेड़छाड़ को रोकने वाले कड़े Data Security Protocol के तहत काम करता है।</h6>
<h6>IT Security Check और Audit Control राष्ट्रीय डाटाबेस पर लागू किए गए मानक Cyber Security उपायों का हिस्सा हैं। मतदाता का नाम जोड़ने या हटाने की कानूनी शक्ति Electoral Registration Officer और District Election Officer जैसे अधिकृत अधिकारियों के पास रहती है।</h6>
<h3>8. संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने का भरोसा</h3>
<h6>चुनाव आयोग ने आखिरी बिंदु में कहा कि वह अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।</h6>
<h6>आयोग ने कहा कि वह लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका और जिम्मेदारी को समझता है। चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं मतदाताओं का भरोसा बनाए रखने के लिए काम जारी रहेगा।</h6>
<h3>विपक्ष अभी भी मांग रहा पूरे दस्तावेज</h3>
<h6>चुनाव आयोग की सफाई के बावजूद विवाद समाप्त होता दिखाई नहीं दे रहा है। विपक्षी नेताओं की मांग है कि आयोग केवल अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति वाला न बताए, बल्कि दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा कथित रूप से उठाए गए सवालों और उन पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक करे।</h6>
<h6>दूसरी ओर आयोग का कहना है कि आंतरिक चर्चा को टकराव के रूप में दिखाना गलत है। उसके मुताबिक सवाल और सुझाव मिलने के बाद ही अंतिम फैसला सर्वसम्मति से लिया गया।</h6>
<h6><strong>चुनाव आयोग ने आठ बिंदुओं में अपनी कार्यप्रणाली और फैसलों का बचाव जरूर किया है, लेकिन कथित 14 आपत्तियों से जुड़े दस्तावेज अब भी पूरे विवाद के केंद्र में हैं। आयोग इन्हें सामान्य आंतरिक चर्चा बता रहा है, जबकि विपक्ष इन्हें गंभीर मतभेद मान रहा है। अब जनता की निगाह इस बात पर रहेगी कि आयोग इन आपत्तियों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करता है या राजनीतिक विवाद और तेज होता है।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/election-commission-eight-point-clarification-sir-internal-dissent-gyanesh-kumar/article-2172</link>
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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 19:07:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘14 बार असहमति तानाशाही नहीं, चेक-बैलेंस है’; राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोप पर संबित पात्रा का पलटवार</title>
                                    <description><![CDATA[संबित पात्रा ने कहा कि चुनाव आयुक्तों के बीच सवाल और असहमति लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे तानाशाही या वोट चोरी का प्रमाण बताना गलत है। राहुल गांधी ने इस मामले को संविधान पर हमला और देशद्रोह बताया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/sambit-patra-reply-rahul-gandhi-vote-chori-election-commission-sir-row/article-2169"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/sambit-patra-rahul-gandhi-vote-chori-eci-sir-row.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>14 बार असहमति तानाशाही नहीं, चेक-बैलेंस है’; राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोप पर संबित पात्रा का पलटवार </strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/sambit-patra-rahul-gandhi-vote-chori-eci-sir-row.jpg2.jpg" alt="sambit-patra-rahul-gandhi-vote-chori-eci-sir-row.jpg2" width="1366" height="768"></img>
चुनाव आयोग और SIR विवाद पर राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते BJP सांसद संबित पात्रा।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 23 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद पर बढ़ा राजनीतिक विवाद</strong></li>
<li><strong>राहुल गांधी ने BJP और चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप</strong></li>
<li><strong>संबित पात्रा बोले—असहमति लोकतांत्रिक चेक-बैलेंस का हिस्सा</strong></li>
<li><strong>चुनाव आयोग ने कहा—SIR सहित सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए</strong></li>
</ul>
<p>चुनाव आयोग और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी विवाद में BJP नेता संबित पात्रा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर पलटवार किया है। पात्रा ने कहा कि चुनाव आयुक्तों के बीच सवाल, सुझाव या किसी मुद्दे पर असहमति होना लोकतांत्रिक व्यवस्था में चर्चा और आंतरिक चेक-बैलेंस की निशानी है। इसे तानाशाही या चुनाव आयोग की विफलता बताना गलत है।</p>
<p>संबित पात्रा का यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के विभिन्न फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।</p>
<h3>राहुल गांधी ने लगाया ‘वोट चोरी’ का आरोप</h3>
<p>इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग, BJP और RSS पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने कहा कि कथित ‘वोट चोरी’ देश के नागरिकों और संविधान पर सीधा हमला है।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि यदि चुनाव आयोग के भीतर दो आयुक्त लगातार फैसलों पर सवाल उठा रहे थे, तो यह मामला बेहद गंभीर है। राहुल गांधी ने इसे देशद्रोह तक बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।</p>
<p>हालांकि, ये सभी आरोप राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। चुनाव आयोग और BJP ने इन्हें खारिज करते हुए आयोग की चुनावी प्रक्रिया का बचाव किया है।</p>
<h3>संबित पात्रा ने कांग्रेस को घेरा</h3>
<h6>राहुल गांधी के बयान पर जवाब देते हुए संबित पात्रा ने कहा कि विपक्षी दल चुनाव में हार मिलने के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करने लगते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद लगातार कमजोर हो रहे विपक्ष ने अब चुनाव आयोग को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।</h6>
<h6>पात्रा ने कहा कि किसी संस्था के भीतर अधिकारियों द्वारा सवाल उठाना या सुझाव देना सामान्य प्रक्रिया है। तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच किसी विषय पर चर्चा या अलग राय को तानाशाही बताना गलत है। उनके अनुसार, आंतरिक बातचीत और मतभेद संस्थागत चेक-बैलेंस का प्रमाण हैं।</h6>
<h3>चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी?</h3>
<h6>मामला बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने कहा कि SIR सहित उसके सभी अंतिम फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे।</h6>
<h6>आयोग के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए अधिकारियों और आयुक्तों द्वारा सवाल एवं सुझाव दिए जाना सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा है। किसी फैसले से पहले हुई चर्चा को औपचारिक असहमति या अंतिम निर्णय का विरोध नहीं माना जाना चाहिए।</h6>
<h6>आयोग ने यह भी कहा कि उसके सभी आधिकारिक आदेश और प्रशासनिक निर्देश तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जारी किए गए हैं। आयोग ने अपने कामकाज और अंतिम फैसलों में मतभेद होने के दावों को खारिज किया है।</h6>
<h3>14 आपत्तियों के दावे पर विवाद</h3>
<h6>रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, Form 6 में बदलाव तथा चुनावी डाटा को नियंत्रित करने जैसे मामलों पर सवाल उठाए थे।</h6>
<h6>इसी दावे को आधार बनाकर विपक्ष चुनाव आयोग से विस्तृत जवाब और अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहा है। कांग्रेस का कहना है कि आयोग को केवल अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति वाला बताने के बजाय आयुक्तों द्वारा उठाए गए हर सवाल का जवाब देना चाहिए।</h6>
<h6>दूसरी तरफ BJP का तर्क है कि किसी फैसले से पहले अधिकारियों द्वारा सवाल उठाना संवैधानिक संस्था की सामान्य कार्यप्रणाली है और इसे चुनाव में गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।</h6>
<h3>अब पारदर्शिता पर टिका पूरा विवाद</h3>
<h6>SIR और मतदाता सूची को लेकर पहले से जारी राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग के अंदर कथित आपत्तियों की रिपोर्ट ने मामले को और गरमा दिया है। विपक्ष इसे आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल बता रहा है, जबकि BJP इसे सामान्य चर्चा को राजनीतिक विवाद बनाने का प्रयास कह रही है।</h6>
<p><strong>राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ और देशद्रोह जैसे गंभीर आरोपों के बाद विवाद अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। चुनाव आयोग की सफाई और संबित पात्रा के पलटवार के बावजूद विपक्ष 14 कथित लिखित आपत्तियों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है। अब देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग इन सवालों पर कोई विस्तृत दस्तावेज जारी करता है या विवाद और तेज होता है।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/sambit-patra-reply-rahul-gandhi-vote-chori-election-commission-sir-row/article-2169</link>
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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 17:16:51 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चुनाव आयोग में 14 आपत्तियों का दावा; राहुल गांधी का बड़ा हमला, बोले- वोट चोरी राजद्रोह है</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े फैसलों पर मतभेद की रिपोर्ट ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। राहुल गांधी ने कहा कि वोट चोरी सिर्फ चुनावी गड़बड़ी नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र के साथ राजद्रोह है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/rahul-gandhi-election-commission-sir-14-objections/article-2161"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/rahul-gandhi-sir-election-commission-14-objections.webp2.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>हमला, बोले- वोट चोरी राजद्रोह है</strong></h1>
<h5><strong>चुनाव आयोग के भीतर SIR को लेकर मतभेद होने की रिपोर्ट सामने आने के बाद राहुल गांधी ने आयोग पर हमला बोला है।</strong></h5>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/rahul-gandhi-sir-election-commission-14-objections.webp2.jpg" alt="rahul-gandhi-sir-election-commission-14-objections.webp2" width="1366" height="768"></img>
SIR पर चुनाव आयोग में मतभेद की रिपोर्ट के बाद राहुल गांधी ने आयोग पर निशाना साधा।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 23 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार आपत्ति जताई: रिपोर्ट</strong></li>
<li><strong>फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची पर उठाए गए सवाल</strong></li>
<li><strong>राहुल गांधी बोले- वोट चोरी राजद्रोह है</strong></li>
<li><strong>विपक्ष ने कथित आपत्तियां सार्वजनिक करने की मांग उठाई</strong></li>
<li><strong>चुनाव आयोग ने कहा- सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए</strong></li>
</ul>
<h6>चुनाव आयोग के भीतर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर मतभेद होने की रिपोर्ट ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के अलग-अलग फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की।</h6>
<h6>ये कथित आपत्तियां मतदाता सूची से नाम हटाने, नए मतदाताओं के पंजीकरण, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनावी डाटाबेस के संचालन जैसे महत्वपूर्ण मामलों से जुड़ी बताई गई हैं।</h6>
<h6>रिपोर्ट सामने आने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि वोट चोरी केवल चुनावी गड़बड़ी नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ राजद्रोह है।</h6>
<h2>राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को घेरा</h2>
<h6>राहुल गांधी लंबे समय से मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। ताजा रिपोर्ट सामने आने के बाद उन्होंने अपने पुराने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि देश के नागरिकों का मतदान अधिकार प्रभावित करना बेहद गंभीर मामला है।</h6>
<h6>राहुल गांधी का आरोप है कि SIR के नाम पर पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। हालांकि चुनाव आयोग उनके वोट चोरी के आरोपों को पहले भी खारिज कर चुका है और प्रमाणित सबूत पेश करने की मांग करता रहा है।</h6>
<h6>इसलिए राहुल गांधी का बयान एक राजनीतिक आरोप है। चुनाव आयोग ने वोट चोरी या किसी राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने के आरोप को स्वीकार नहीं किया है।</h6>
<h2>आखिर क्या है 14 आपत्तियों का मामला?</h2>
<h6>इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के फैसलों पर 10 महीने में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की।</h6>
<h6>रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर सवाल उठाया कि आयोग के नाम से कुछ निर्देश उनकी जानकारी और मंजूरी के बिना कैसे जारी हुए।</h6>
<h6>आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और शामिल करने की प्रक्रिया तथा चुनावी डाटाबेस तक अधिकारियों की पहुंच जैसे मामले शामिल बताए गए हैं।</h6>
<h2>फॉर्म-6 में बदलाव पर क्यों उठे सवाल?</h2>
<h6>फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए किया जाता है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस फॉर्म में SIR से जुड़ा एक नया सवाल शामिल कर दिया गया था।</h6>
<h6>आवेदकों से पूछा गया कि उनका या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में मौजूद है या नहीं।</h6>
<h6>दावा है कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने इस बदलाव पर पहले ही सवाल उठाए थे। बाद में सुखबीर सिंह संधू ने भी कथित तौर पर इसे अनधिकृत और गैरकानूनी बताते हुए हटाने की मांग की।</h6>
<h2>मतदाता डाटाबेस के नियंत्रण पर भी आपत्ति</h2>
<h6>रिपोर्ट में मतदाता सूची के डिजिटल डाटाबेस के कथित केंद्रीकरण पर भी चिंता जताने का दावा किया गया है।</h6>
<h6>सामान्य रूप से विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी की निगरानी में तैयार और अपडेट की जाती है। कथित आपत्ति में कहा गया कि स्थानीय और राज्य स्तरीय अधिकारियों को डाटाबेस तक पूरी पहुंच मिलनी चाहिए।</h6>
<h6>सवाल यह उठाया गया कि यदि डाटाबेस का नियंत्रण केंद्रीय स्तर पर सीमित हो जाएगा, तो स्थानीय अधिकारियों की कानूनी भूमिका और जवाबदेही कैसे बनी रहेगी।</h6>
<h2>चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी?</h2>
<h6>चुनाव आयोग के सूत्रों ने औपचारिक मतभेद के दावे से इनकार किया है। सूत्रों का कहना है कि SIR समेत आयोग के सभी महत्वपूर्ण फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए।</h6>
<h6>आयोग के मुताबिक, बैठक के दौरान सवाल पूछना, टिप्पणी करना या सुझाव देना सामान्य प्रक्रिया है। इसे अंतिम फैसले के खिलाफ औपचारिक असहमति नहीं माना जा सकता।</h6>
<h6>सूत्रों ने दावा किया कि चर्चा के बाद आयोग के सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और उन पर तीनों सदस्यों की मंजूरी थी।</h6>
<h2>विपक्ष ने उठाई दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग</h2>
<h6>कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की सफाई के बाद कथित लिखित आपत्तियों को सार्वजनिक करने की मांग उठाई है।</h6>
<h6>विपक्ष का कहना है कि यदि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे, तो आयोग को इससे जुड़े दस्तावेज और बैठकों का आधिकारिक रिकॉर्ड सामने रखना चाहिए।</h6>
<h6>वहीं, आयोग का पक्ष है कि आंतरिक चर्चा में अलग-अलग सुझाव आना सामान्य बात है और इससे यह साबित नहीं होता कि अंतिम फैसलों पर सदस्यों के बीच मतभेद था।</h6>
<h2>अब सबसे बड़ा सवाल- आपत्ति या सामान्य सुझाव?</h2>
<h6>फिलहाल इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज की गई बातें औपचारिक आपत्तियां थीं या फैसला लेने से पहले दिए गए सामान्य सुझाव।</h6>
<h6>एक तरफ रिपोर्ट में 14 लिखित आपत्तियों और कुछ फैसलों को अनधिकृत बताए जाने का दावा किया गया है। दूसरी तरफ आयोग के सूत्र सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कह रहे हैं।</h6>
<h6>अब स्थिति तभी पूरी तरह साफ हो सकेगी, जब चुनाव आयोग कथित आपत्तियों और उनसे जुड़े फैसलों का आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करेगा।</h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 13:18:06 +0530</pubDate>
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                <title>SIR पर चुनाव आयोग में मतभेद? 14 आपत्तियों की रिपोर्ट पर EC ने कहा- कोई औपचारिक असहमति नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद की खबरों पर सफाई सामने आई है। सूत्रों ने कहा कि चर्चा के दौरान टिप्पणियां और सुझाव दिए गए, लेकिन सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/sir-election-commission-no-formal-dissent-clarification-in-election-commission-on-sir-on-report-of-14/article-2160"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/election-commission-sir-dispute-clarification-2026.webp2.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>पूरी खबर SIR पर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग की सफाई ने विवाद को दिया नया मोड़, अब पारदर्शिता और कथित लिखित आपत्तियों की सच्चाई पर टिकी देशभर की निगाहें</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/election-commission-sir-dispute-clarification-2026.webp2.jpg" alt="election-commission-sir-dispute-clarification-2026.webp2" width="1366" height="768"></img>
SIR के फैसलों पर चुनाव आयोग में मतभेद के दावों के बीच सामने आई सफाई

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | बिजनेस डेस्क | 23 सितंबर 2026</strong></p>
<h2 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>खबर में खास</strong></h2>
<ul>
<li><strong>SIR के फैसलों पर मतभेद की रिपोर्ट के बाद आयोग की सफाई</strong></li>
<li><strong>दो चुनाव आयुक्तों द्वारा 14 आपत्तियां दर्ज कराने का दावा</strong></li>
<li><strong>आयोग के सूत्रों ने औपचारिक असहमति से किया इनकार</strong></li>
<li><strong>अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही</strong></li>
<li><strong>विपक्ष ने चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर उठाए सवाल</strong></li>
</ul>
<h2>चर्चा हुई, लेकिन फैसला सर्वसम्मति से लिया गया</h2>
<h6>चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, किसी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के दौरान आयोग के सदस्यों का सवाल पूछना या सुझाव देना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। SIR से जुड़े मामलों पर भी चुनाव आयुक्तों ने अपनी टिप्पणियां रखीं और कुछ विषयों पर स्पष्टीकरण मांगा।</h6>
<h6>सूत्रों का कहना है कि चर्चा पूरी होने के बाद आयोग द्वारा लिए गए अंतिम फैसलों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति थी। इसलिए बैठकों में उठाए गए सवालों और सुझावों को औपचारिक असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।</h6>
<h2>रिपोर्ट में 14 आपत्तियों का किया गया दावा</h2>
<h6>मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते 10 महीनों में आयोग के कई कदमों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इनमें मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची से नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनावी डाटाबेस के कथित केंद्रीकरण से जुड़े विषय शामिल थे।</h6>
<h6>रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कुछ निर्देश चुनाव आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना जारी किए गए थे। हालांकि आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन दावों को औपचारिक मतभेद मानने से इनकार किया है।</h6>
<h2>फॉर्म-6 और मतदाता डाटाबेस पर उठे सवाल</h2>
<h6>रिपोर्ट के अनुसार, नए मतदाताओं के पंजीकरण वाले फॉर्म-6 में SIR से जुड़ा एक नया प्रश्न शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई गई थी। कथित तौर पर यह सवाल किया गया था कि नियमों में औपचारिक बदलाव किए बिना आवेदन पत्र में नया प्रावधान कैसे जोड़ा गया।</h6>
<h6>इसके अलावा मतदाता सूची के डिजिटल डाटाबेस तक राज्य और स्थानीय स्तर के निर्वाचन अधिकारियों की पहुंच को लेकर भी चिंता जताए जाने का दावा किया गया। आपत्ति में कथित तौर पर कहा गया कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें बदलाव करने का अधिकार संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के पास रहना चाहिए।</h6>
<h2>विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त को घेरा</h2>
<h6>मामला सामने आने के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। विपक्ष का कहना है कि यदि आयोग के सदस्यों ने वास्तव में लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं, तो उनकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।</h6>
<h6>विपक्षी नेताओं ने SIR के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटने का मुद्दा भी उठाया और आयोग से पूरी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता बरतने की मांग की।</h6>
<h2>क्या कहता है चुनाव आयोग से जुड़ा कानून?</h2>
<h6>चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दो अन्य चुनाव आयुक्त होते हैं। तीनों सदस्यों का दर्जा समान माना जाता है और आयोग के कामकाज से जुड़े फैसले यथासंभव सर्वसम्मति से लिए जाने का प्रावधान है।</h6>
<h6>यदि किसी मामले पर सदस्यों के बीच अलग-अलग राय होती है, तो फैसला बहुमत के आधार पर लिया जा सकता है। मौजूदा विवाद में आयोग से जुड़े सूत्रों का दावा है कि अंतिम निर्णयों के खिलाफ किसी सदस्य ने औपचारिक असहमति दर्ज नहीं की और फैसले सर्वसम्मति से हुए।</h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 12:59:39 +0530</pubDate>
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