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                <title>UCC News - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <title>UCC पर ओवैसी का अमित शाह पर बड़ा हमला, बोले- ‘ये बराबरी नहीं, मुसलमानों को निशाना बनाने की कोशिश’; फिर गरमाई सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर BJP और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर हमला बोला है। ओवैसी का कहना है कि ‘एकरूपता बराबरी नहीं होती’ और अलग-अलग धार्मिक व सामाजिक परंपराओं वाले देश में एक समुदाय के विवाह, उत्तराधिकार और तलाक संबंधी कानून दूसरे समुदाय पर नहीं थोपे जा सकते। BJP और सरकार UCC को समान नागरिक अधिकारों की दिशा में कदम बताती रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/asaduddin-owaisi-ucc-amit-shah-bjp-muslim-target-row-2026/article-2018"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/asaduddin-owaisi-ucc-amit-shah-statement-2026.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 14 सितंबर 2026</strong></p>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/asaduddin-owaisi-ucc-amit-shah-statement-2026.jpg.jpg" alt="asaduddin-owaisi-ucc-amit-shah-statement-2026.jpg" width="1366" height="768"></img>
असदुद्दीन ओवैसी ने UCC को लेकर BJP और अमित शाह पर निशाना साधते हुए एकरूपता और बराबरी के फर्क पर सवाल उठाया।

<h1>खबर में खास</h1>
<ul>
<li><strong>UCC को लेकर ओवैसी ने BJP पर साधा निशाना</strong></li>
<li><strong>बोले- एकरूपता और बराबरी एक ही बात नहीं</strong></li>
<li><strong>विवाह, तलाक और उत्तराधिकार कानूनों को लेकर उठाए सवाल</strong></li>
<li><strong>सरकार UCC को समान नागरिक अधिकारों की दिशा में बताती रही है कदम</strong></li>
</ul>
<h6>समान नागरिक संहिता यानी <strong>Uniform Civil Code (UCC)</strong> को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है। AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद <strong>असदुद्दीन ओवैसी ने UCC को लेकर BJP और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है।</strong></h6>
<h6>ओवैसी का आरोप है कि UCC का उद्देश्य समानता स्थापित करना नहीं, बल्कि खास तौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाना है। उनका कहना है कि भारत विविध धर्मों, परंपराओं और संस्कृतियों वाला देश है और यहां एकरूपता को बराबरी नहीं माना जा सकता।</h6>
<h6>हालांकि BJP और सरकार का पक्ष इससे अलग है। सरकार UCC को नागरिक मामलों में समान अधिकार देने और विशेष रूप से महिलाओं तथा बच्चों के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में कदम बताती रही है।</h6>
<h2>ओवैसी बोले- ‘Uniformity is not Equality’</h2>
<h6>ओवैसी ने UCC पर सबसे बड़ा सवाल ‘एकरूपता’ और ‘बराबरी’ को लेकर उठाया है।</h6>
<h6>उनका कहना है कि <strong>एकरूपता अपने आप में समानता नहीं होती।</strong></h6>
<h6>उन्होंने आरोप लगाया कि UCC के जरिए हिन्दू विवाह अधिनियम, हिन्दू उत्तराधिकार कानून और तलाक से जुड़ी व्यवस्थाओं के कुछ प्रावधान दूसरे समुदायों पर लागू करने की कोशिश की जा रही है।</h6>
<h6>ओवैसी ने सवाल उठाया कि जब भारत खुद को विविधता और बहुलता वाला देश मानता है तो विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े एक समुदाय के नियम दूसरे समुदाय पर कैसे लागू किए जा सकते हैं।</h6>
<h2>मुसलमानों को निशाना बनाने का लगाया आरोप</h2>
<h6>ओवैसी ने UCC को लेकर BJP की मंशा पर भी सवाल खड़े किए।</h6>
<h6>उनका आरोप है कि यह बहस सभी नागरिकों के बीच वास्तविक बराबरी स्थापित करने से ज्यादा मुस्लिम समुदाय को राजनीतिक और कानूनी रूप से निशाना बनाने की दिशा में बढ़ रही है।</h6>
<h6>यह <strong>ओवैसी का राजनीतिक आरोप</strong> है। सरकार और BJP लगातार इस दावे से असहमति जताती रही हैं और UCC को समान नागरिक अधिकारों से जोड़ती हैं।</h6>
<h2>अमित शाह पर भी साधा निशाना</h2>
<h6>ओवैसी इससे पहले भी UCC को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साध चुके हैं।</h6>
<h6>हालिया राजनीतिक बयान में उन्होंने कहा था कि गृह मंत्री को UCC से पहले बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर बात करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया था कि देश में बड़ी संख्या में लोग रोजगार की समस्या से जूझ रहे हैं।</h6>
<h6>यही वजह है कि UCC पर चल रही बहस अब सिर्फ कानून तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसमें रोजगार, अल्पसंख्यक अधिकार और संविधान जैसे मुद्दे भी जुड़ते जा रहे हैं।</h6>
<h2>उत्तराखंड UCC को बताया था ‘कट एंड पेस्ट’</h2>
<h6>कुछ दिन पहले जयपुर में भी ओवैसी ने उत्तराखंड में लागू UCC को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी थी।</h6>
<h6>उन्होंने इसे ‘कट एंड पेस्ट’ व्यवस्था बताते हुए दावा किया था कि इसमें हिन्दू पर्सनल लॉ के कई प्रावधान बरकरार हैं, जबकि जनजातीय समुदायों को इससे छूट दी गई है।</h6>
<h6>ओवैसी ने इसी आधार पर सवाल किया कि अगर कानून पूरी तरह समान है तो कुछ समुदायों को उससे बाहर क्यों रखा गया है।</h6>
<h2>सरकार का पक्ष क्या है?</h2>
<h6>UCC समर्थकों का कहना है कि अलग-अलग धर्मों में विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसी नागरिक प्रक्रियाओं के अलग नियम होने के बजाय सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा होना चाहिए।</h6>
<h6>उत्तराखंड सरकार ने भी अपने UCC को <strong>नागरिक अधिकारों में समानता, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाने</strong> की दिशा में कदम बताया है।</h6>
<h6>यानी इस पूरे विवाद में दोनों पक्ष ‘समानता’ की बात करते हैं, लेकिन समानता को लागू करने के तरीके पर उनकी व्याख्या बिल्कुल अलग है।</h6>
<h2>आदिवासियों की छूट पर भी ओवैसी का सवाल</h2>
<h6>UCC की बहस में आदिवासी समुदायों को मिली छूट भी लंबे समय से विवाद का विषय रही है।</h6>
<h6>ओवैसी का तर्क है कि अगर अलग परंपराओं और रीति-रिवाजों के कारण किसी एक समुदाय को छूट दी जा सकती है तो इसी सिद्धांत को दूसरे धार्मिक समुदायों पर लागू क्यों नहीं किया जाना चाहिए।</h6>
<h6>उनके अनुसार भारत की विविधता को देखते हुए ‘एक देश, एक व्यक्तिगत कानून’ की व्यवस्था संवैधानिक और सामाजिक सवाल खड़े करती है।</h6>
<h2>पहले भी UCC का विरोध करते रहे हैं ओवैसी</h2>
<h6>यह पहली बार नहीं है जब असदुद्दीन ओवैसी ने समान नागरिक संहिता का विरोध किया हो।</h6>
<h6>वे लंबे समय से यह तर्क देते रहे हैं कि भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को देखते हुए UCC लागू करना उचित नहीं होगा।</h6>
<h6>अप्रैल 2026 में भी उन्होंने UCC का विरोध करते हुए इसे असंवैधानिक बताया था और आरोप लगाया था कि इसके नाम पर ‘हिन्दू कोड’ लागू करने की कोशिश हो रही है।</h6>
<h2>आखिर UCC है क्या?</h2>
<h6>Uniform Civil Code का सामान्य अर्थ है कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक संपत्ति जैसे नागरिक मामलों के लिए धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान कानूनी व्यवस्था हो।</h6>
<h6>भारतीय संविधान का <strong>अनुच्छेद 44</strong> राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने की बात कहता है।</h6>
<h6>हालांकि UCC लागू करने के तरीके, धार्मिक स्वतंत्रता और विभिन्न समुदायों की परंपराओं को लेकर दशकों से राजनीतिक और संवैधानिक बहस होती रही है।</h6>
<h2>UCC पर आगे और तेज हो सकती है राजनीति</h2>
<h6>BJP लंबे समय से UCC को अपने प्रमुख राजनीतिक और वैचारिक मुद्दों में शामिल करती रही है।</h6>
<h6>वहीं AIMIM समेत कई विपक्षी और अल्पसंख्यक संगठन इसके स्वरूप को लेकर सवाल उठा रहे हैं।</h6>
<h6>ओवैसी के ताजा बयान से यह साफ है कि आने वाले दिनों में UCC पर राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है।</h6>
<h6>सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि <strong>क्या देशभर के लिए एक समान नागरिक कानून वास्तव में बराबरी का रास्ता बनेगा, या फिर अलग-अलग समुदायों की धार्मिक और सांस्कृतिक स्वायत्तता को लेकर विवाद और बढ़ेगा?</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 13:41:16 +0530</pubDate>
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