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                <title>India Iran Relations - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <description>India Iran Relations RSS Feed</description>
                
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                <title>दिल्ली बनी दुनिया की कूटनीति का केंद्र: पुतिन-पेजेशकियन पहुंचे, 7 साल बाद आ रहे जिनपिंग; मोदी की 3 बड़ी बैठकों पर नजर</title>
                                    <description><![CDATA[BRICS सम्मेलन से पहले दिल्ली में दुनिया के बड़े नेताओं का जमावड़ा शुरू हो गया है। पीएम मोदी की पुतिन, पेजेशकियन और शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठकों में रक्षा, व्यापार, सीमा विवाद, ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया जैसे मुद्दे उठ सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/delhi/brics-summit-2026-live-modi-putin-xi-jinping-pezeshkian-delhibrics-summit-2026-live-modi-putin-xi-jinping-pezeshkian-delhi/article-1989"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/brics-summit-2026-modi-putin-xi-pezeshkian-delhi.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd"><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत की राजधानी नई दिल्ली इस समय दुनिया की कूटनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन दिल्ली पहुंच चुके हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी सात वर्षों बाद भारत आ रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी BRICS सम्मेलन से इतर पुतिन, पेजेशकियन और शी जिनपिंग के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठक करेंगे। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के कारण इन तीनों मुलाकातों पर पूरी दुनिया की नजर है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा, ऊर्जा और व्यापार; मोदी-पेजेशकियन वार्ता में पश्चिम एशिया, चाबहार एवं ऊर्जा सुरक्षा और मोदी-जिनपिंग मुलाकात में सीमा विवाद तथा दोनों देशों के संबंध प्रमुख मुद्दे रह सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इस सम्मेलन में सदस्य देशों के साथ साझेदार और आमंत्रित देशों के नेता तथा प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।</p>
<h2>दिल्ली पहुंचे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन</h2>
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नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ महत्वपूर्ण बातचीत प्रस्तावित है। फोटो: सोशल मीडिया
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नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ महत्वपूर्ण बातचीत प्रस्तावित है। फोटो: सोशल मीडिया



<p class="isSelectedEnd">रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे। एयरपोर्ट पर केंद्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया। पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ प्रधानमंत्री मोदी से द्विपक्षीय बातचीत करेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत और रूस के बीच रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, व्यापार और तकनीक सहित कई क्षेत्रों में पुरानी रणनीतिक साझेदारी है। दोनों देशों के संबंधों को “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” कहा जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुतिन की इस यात्रा को रूस पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव और वैश्विक तनाव के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत ने रूस के साथ अपने संबंध बनाए रखने के साथ यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><a href="https://www.aajtak.in/india/news/story/brics-summit-2026-live-updates-pm-modi-putin-xi-jinping-pezeshkian-bilateral-talks-delhi-ntc-agkp-2640522-2026-09-11">आजतक के लाइव अपडेट</a> के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम BRICS सम्मेलन से पहले और उसके दौरान कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकों से भरा हुआ है।</p>
<h2>मोदी-पुतिन बैठक में किन मुद्दों पर होगी बात?</h2>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की बैठक में दोनों देशों के आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों की समीक्षा होने की संभावना है। व्यापार, निवेश, तेल और गैस, परमाणु ऊर्जा, रक्षा तथा तकनीक प्रमुख विषय हो सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ा है, लेकिन व्यापारिक असंतुलन भारत के लिए चिंता का विषय रहा है। भारत रूस को अपने निर्यात में वृद्धि करना चाहता है। दवा, कृषि, मशीनरी और तकनीकी उत्पादों के कारोबार को बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">रक्षा सहयोग भी बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। कुछ मीडिया रिपोर्टों में पांचवीं पीढ़ी के Su-57 लड़ाकू विमान और रक्षा उपकरणों से जुड़ी संभावित बातचीत का उल्लेख किया गया है। हालांकि किसी सौदे की पुष्टि दोनों देशों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके अतिरिक्त यूक्रेन संघर्ष और दुनिया की बदलती सुरक्षा परिस्थितियों पर दोनों नेता अपने विचार साझा कर सकते हैं।</p>
<h2>ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन भी पहुंचे भारत</h2>
<p class="isSelectedEnd">ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भी BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। भारत आने से पहले उन्होंने BRICS को एकतरफा वैश्विक नीतियों का मुकाबला करने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनका कहना था कि विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय निर्णयों में अधिक प्रभावी भूमिका मिलनी चाहिए। ईरान BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने का समर्थन करता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री मोदी और पेजेशकियन के बीच होने वाली बैठक में भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंधों के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा होने की संभावना है।</p>
<h2>मोदी-पेजेशकियन बैठक क्यों महत्वपूर्ण?</h2>
<p class="isSelectedEnd">ईरानी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया गंभीर तनाव से गुजर रहा है। इस क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। इसलिए पश्चिम एशिया में शांति और होर्मुज जलडमरूमध्य सहित प्रमुख समुद्री मार्गों का सुरक्षित रहना भारत के लिए बेहद जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दोनों नेताओं की बैठक में क्षेत्रीय शांति, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे मुद्दे उठ सकते हैं। भारत विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने की बात करता रहा है।</p>
<h2>चाबहार बंदरगाह पर भी रहेगी नजर</h2>
<p class="isSelectedEnd">भारत और ईरान के संबंधों में चाबहार बंदरगाह का विशेष महत्व है। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान से होकर गुजरे बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने का वैकल्पिक मार्ग देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत ने चाबहार बंदरगाह के विकास और संचालन में निवेश किया है। मोदी-पेजेशकियन बैठक में इस परियोजना की प्रगति और इसके माध्यम से व्यापार बढ़ाने पर बातचीत हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि बैठक के विस्तृत एजेंडे और किसी संभावित समझौते की पुष्टि दोनों देशों के आधिकारिक बयान के बाद होगी।</p>
<h2>सात वर्षों बाद भारत आ रहे शी जिनपिंग</h2>
<p class="isSelectedEnd">BRICS सम्मेलन की सबसे अधिक चर्चित यात्राओं में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत दौरा शामिल है। वह सात वर्षों बाद भारत आ रहे हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी के बीच द्विपक्षीय बैठक की तैयारियों की पुष्टि की है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><a href="https://www.reuters.com/world/china/china-india-arranging-meeting-xi-modi-chinas-foreign-ministry-says-2026-09-11/">रॉयटर्स की रिपोर्ट</a> के मुताबिक, चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देश मोदी-जिनपिंग बैठक की व्यवस्था कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">चीन ने कहा है कि वह भारत के साथ संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखता है। बीजिंग ने बातचीत तथा सहयोग बढ़ाने के साथ मतभेदों को उचित तरीके से संभालने की बात कही है।</p>
<h2>मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर क्यों टिकी हैं दुनिया की निगाहें?</h2>
<p class="isSelectedEnd">भारत और चीन के संबंध साल 2020 में गलवान घाटी में हुए सैन्य संघर्ष के बाद गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd">अब मोदी-जिनपिंग बैठक में सीमा पर शांति, सैनिकों की स्थिति, व्यापारिक असंतुलन, सीधी उड़ान, वीजा और आर्थिक संबंधों जैसे विषय उठ सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि सीमा पर शांति के बिना द्विपक्षीय संबंध पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकते। ऐसे में बैठक के बाद जारी होने वाले आधिकारिक बयान से दोनों देशों के रिश्तों की भावी दिशा का संकेत मिलेगा।</p>
<h2>प्रधानमंत्री मोदी का व्यस्त कूटनीतिक कार्यक्रम</h2>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुक्रवार को राष्ट्रपति पुतिन, ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात प्रस्तावित है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके बाद वह चीन, इथियोपिया, मलेशिया, वियतनाम, संयुक्त अरब अमीरात और कई अन्य देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठक करेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">मोदी और शी जिनपिंग की बैठक शनिवार शाम प्रस्तावित बताई गई है। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री कजाकिस्तान, फिलीपींस, मिस्र, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया और युगांडा के नेताओं से भी बातचीत कर सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठकों का कार्यक्रम बदल सकता है, इसलिए किसी भी समझौते या परिणाम की पुष्टि आधिकारिक घोषणा के आधार पर ही की जाएगी।</p>
<h2>BRICS सम्मेलन का मुख्य एजेंडा क्या है?</h2>
<p class="isSelectedEnd">नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, व्यापार, निवेश, तकनीक, स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">BRICS देश अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं में सुधार भी समूह का प्रमुख विषय रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सदस्य देशों के बीच भुगतान को आसान बनाने वाली व्यवस्था पर भी बातचीत हो सकती है। इसका उद्देश्य अमेरिकी डॉलर को तुरंत हटाना नहीं, बल्कि व्यापार के लिए अधिक विकल्प तैयार करना है।</p>
<h2>BRICS में कितने सदस्य देश हैं?</h2>
<p class="isSelectedEnd">BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह के रूप में हुई थी। बाद में इसका विस्तार किया गया। वर्तमान में समूह में भारत सहित 11 पूर्ण सदस्य देश शामिल हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">पूर्ण सदस्यों के अलावा कई साझेदार देशों को भी सम्मेलन में बुलाया गया है। इस कारण दिल्ली में होने वाले आयोजन में 11 सदस्यों से अधिक देशों के प्रतिनिधि दिखाई देंगे। साझेदार देशों को पूर्ण सदस्य कहना सही नहीं होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">विस्तार के बाद BRICS दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।</p>
<h2>सम्मेलन के सामने बड़ी चुनौतियां</h2>
<p class="isSelectedEnd">BRICS का आकार बढ़ने के साथ उसकी ताकत बढ़ी है, लेकिन सदस्य देशों के हितों में अंतर भी सामने आया है। रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया के तनाव और अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता जैसे मुद्दों पर सभी देशों का रुख एक जैसा नहीं है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><a href="https://apnews.com/article/a79c5d6df774a9471743cef7d0080688">एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट</a> के मुताबिक, दिल्ली सम्मेलन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सदस्य देशों के अलग-अलग राजनीतिक और आर्थिक हितों के बीच सहमति बनाना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत की कोशिश BRICS को किसी पश्चिम-विरोधी सैन्य या राजनीतिक गठबंधन के बजाय ग्लोबल साउथ के आर्थिक और विकास संबंधी हितों का मंच बनाए रखने की होगी।</p>
<h2>BRICS के रंग में सजी दिल्ली</h2>
<p class="isSelectedEnd">सम्मेलन का मुख्य आयोजन भारत मंडपम में किया जाएगा। विदेशी नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों के स्वागत के लिए दिल्ली के प्रमुख मार्गों, चौराहों और सरकारी क्षेत्रों को BRICS की थीम पर सजाया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">एयरपोर्ट से प्रमुख होटलों और भारत मंडपम को जोड़ने वाले मार्गों पर विशेष प्रकाश व्यवस्था, फूल और BRICS के संकेतक लगाए गए हैं। सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक इंतजाम किए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd"><a href="https://indianexpress.com/article/cities/delhi/delhi-gets-brics-makeover-as-india-hosts-putin-xi-pezeshkian-for-summit-10873180/">इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट</a> के अनुसार, दिल्ली के 17 प्रमुख चौराहों को सजाया गया और करीब 15 हजार पौधे लगाए गए हैं।</p>
<h2>इन तीन मुलाकातों से क्या निकलेगा?</h2>
<p class="isSelectedEnd">दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी की पुतिन, पेजेशकियन और शी जिनपिंग से होने वाली बातचीत BRICS सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में शामिल है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुतिन के साथ वार्ता से भारत-रूस रक्षा और ऊर्जा संबंधों, पेजेशकियन से मुलाकात से पश्चिम एशिया एवं चाबहार परियोजना और शी जिनपिंग के साथ बैठक से भारत-चीन संबंधों की दिशा स्पष्ट हो सकती है।</p>
<p>अब दुनिया की नजर केवल नेताओं की तस्वीरों पर नहीं, बल्कि बैठकों के बाद होने वाली घोषणाओं पर होगी। असली सवाल यह है कि क्या दिल्ली का यह बड़ा कूटनीतिक जमावड़ा व्यापार, क्षेत्रीय शांति और वैश्विक सहयोग को लेकर कोई ठोस रास्ता निकाल पाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 16:08:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>BRICS के लिए भारत रवाना हुए ईरानी राष्ट्रपति, पेजेशकियन ने दुनिया को दिया बड़ा संदेश; PM मोदी से होगी अहम मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत रवाना होने से पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने समूह की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया। दिल्ली में उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/iran-president-masoud-pezeshkian-india-visit-brics-summit-modi-meeting/article-1987"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/iran-president-pezeshkian-india-brics-modi-meeting.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd"><strong>नई दिल्ली/तेहरान।</strong> ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत रवाना हुए। यात्रा से पहले उन्होंने BRICS की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया। ईरानी राष्ट्रपति ने इस समूह को दुनिया में बढ़ती एकतरफा नीतियों का मुकाबला करने और सदस्य देशों के बीच सहयोग मजबूत करने वाला प्रभावशाली मंच बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। पेजेशकियन इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात के कारण दोनों नेताओं की इस मुलाकात को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<h2>भारत रवाना होने से पहले क्या बोले पेजेशकियन?</h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/iran-president-pezeshkian-india-brics-modi-meeting.jpg.jpg" alt="iran-president-pezeshkian-india-brics-modi-meeting.jpg" width="1366" height="768"></img>
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत रवाना हुए। दिल्ली में उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। फोटो: सोशल मीडिया

<p class="isSelectedEnd"><a href="https://www.abplive.com/news/world/brics-summit-2026-president-of-iran-dr-pezeshkian-reaction-departs-for-india-3187358">एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट</a> के मुताबिक, भारत के लिए रवाना होने से पहले ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि BRICS दुनिया में एकतरफा नीतियों का सामना करने वाला प्रभावी मंच बन सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि BRICS सदस्य देशों के पास पर्याप्त आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक क्षमता है। यदि सदस्य देश आपसी सहयोग बढ़ाते हैं, तो यह समूह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पेजेशकियन का मानना है कि दुनिया के देशों के बीच संबंध केवल कुछ शक्तिशाली देशों के निर्णयों के आधार पर तय नहीं होने चाहिए। विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को भी अंतरराष्ट्रीय फैसलों में उचित भागीदारी मिलनी चाहिए।</p>
<h2>ईरानी राष्ट्रपति ने BRICS को क्यों बताया महत्वपूर्ण?</h2>
<p class="isSelectedEnd">ईरान लंबे समय से ऐसी बहुपक्षीय वैश्विक व्यवस्था का समर्थन करता रहा है, जिसमें किसी एक देश या समूह का प्रभाव न हो। ईरान BRICS को अपनी आर्थिक और कूटनीतिक साझेदारी बढ़ाने के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">BRICS देशों के बीच व्यापार बढ़ाने, स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल, वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर लगातार चर्चा हो रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ईरान का मानना है कि सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ने से एकतरफा प्रतिबंधों और बाहरी दबावों का प्रभाव कम किया जा सकता है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर सभी सदस्य देशों के बीच सहमति और व्यावहारिक व्यवस्था तैयार करना अभी एक बड़ी चुनौती है।</p>
<h2>PM मोदी से होगी अहम द्विपक्षीय बातचीत</h2>
<p class="isSelectedEnd">नई दिल्ली में राष्ट्रपति पेजेशकियन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच भारत-ईरान संबंधों के साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><a href="https://indianexpress.com/article/india/pezeshkian-arrives-today-will-meet-modi-ahead-of-summit-10872692/">इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट</a> के अनुसार, पेजेशकियन BRICS शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बैठक के आधिकारिक एजेंडे की विस्तृत जानकारी बातचीत के बाद सामने आएगी। इसके बावजूद भारत-ईरान व्यापार, चाबहार बंदरगाह, क्षेत्रीय संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया की स्थिति प्रमुख विषय रह सकते हैं।</p>
<h2>पश्चिम एशिया के तनाव पर रहेगी दुनिया की नजर</h2>
<p class="isSelectedEnd">ईरानी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया गंभीर तनाव से गुजर रहा है। क्षेत्र में किसी भी बड़े संघर्ष का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत ने लगातार बातचीत और कूटनीति के माध्यम से विवादों का समाधान निकालने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को सुरक्षित और खुला रखने की आवश्यकता भी दोहरा चुके हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">ऐसे में मोदी-पेजेशकियन बैठक के दौरान पश्चिम एशिया में शांति, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े विषय उठ सकते हैं। किसी संभावित साझा बयान की जानकारी बैठक पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।</p>
<h2>चाबहार बंदरगाह पर भी हो सकती है चर्चा</h2>
<p class="isSelectedEnd">भारत और ईरान के बीच रणनीतिक संबंधों में चाबहार बंदरगाह का विशेष महत्व है। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान से गुजरे बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने का वैकल्पिक मार्ग प्रदान करता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत ने चाबहार बंदरगाह के विकास और संचालन में निवेश किया है। यह परियोजना व्यापारिक होने के साथ भारत की क्षेत्रीय संपर्क नीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन की मुलाकात में चाबहार परियोजना की प्रगति और इसके माध्यम से व्यापार बढ़ाने के उपायों पर बातचीत संभव है। हालांकि, दोनों देशों ने इस बैठक के विस्तृत एजेंडे को लेकर अभी कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं की है।</p>
<h2>व्यापार बढ़ाना चाहते हैं दोनों देश</h2>
<p class="isSelectedEnd">भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं। फारसी भाषा और संस्कृति का भारत पर गहरा प्रभाव रहा है। वर्तमान समय में दोनों देशों के रिश्ते व्यापार, परिवहन, ऊर्जा, क्षेत्रीय संपर्क और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों तक फैले हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और बैंकिंग से संबंधित कठिनाइयों के कारण भारत-ईरान व्यापार अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाया है। दोनों देश व्यापार बढ़ाने के लिए वैकल्पिक और व्यावहारिक रास्तों पर बातचीत करते रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">BRICS का मंच भारत और ईरान को आर्थिक सहयोग बढ़ाने के नए विकल्पों पर चर्चा करने का अवसर दे सकता है।</p>
<h2>भारत के लिए ईरान क्यों महत्वपूर्ण है?</h2>
<p class="isSelectedEnd">भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ईरान दुनिया के प्रमुख तेल और गैस उत्पादक देशों में शामिल है। इसलिए ईरान और उसके आसपास की स्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके अतिरिक्त ईरान की भौगोलिक स्थिति भारत को अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरेशिया से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकती है। चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे जैसी परियोजनाएं इसी रणनीति से जुड़ी हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और प्रतिबंधों के कारण दोनों देशों को आर्थिक सहयोग आगे बढ़ाने में कई व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।</p>
<h2>दिल्ली में दुनिया के बड़े नेताओं का जमावड़ा</h2>
<p class="isSelectedEnd">18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित कई वैश्विक नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी सात वर्षों बाद भारत आ रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री मोदी की पुतिन, शी जिनपिंग और पेजेशकियन के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठकों पर पूरी दुनिया की नजर है। इन बैठकों में द्विपक्षीय रिश्तों के साथ कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर चर्चा होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। सम्मेलन में सदस्य देशों के अतिरिक्त साझेदार देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं।</p>
<h2>BRICS सम्मेलन का प्रमुख एजेंडा क्या है?</h2>
<p class="isSelectedEnd">सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, वैश्विक संस्थाओं में सुधार, तकनीक, स्वास्थ्य, निवेश, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और सीमा पार भुगतान को आसान बनाने के उपाय भी प्रमुख विषय हो सकते हैं। सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की मांग करते रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">लेकिन विस्तारित BRICS में शामिल देशों के राजनीतिक और आर्थिक हित अलग-अलग हैं। इसलिए हर बड़े वैश्विक मुद्दे पर साझा सहमति बनाना आसान नहीं होगा।</p>
<h2>पेजेशकियन की यात्रा से क्या उम्मीद?</h2>
<p class="isSelectedEnd">राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की यात्रा से भारत और ईरान के संबंधों में नई गति आने की उम्मीद की जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी से उनकी बातचीत में व्यापार, संपर्क और क्षेत्रीय सुरक्षा पर आगे का रास्ता तय हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि दोनों देश चाबहार बंदरगाह और द्विपक्षीय व्यापार जैसे पुराने मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति कर पाते हैं या नहीं।</p>
<p>फिलहाल पेजेशकियन ने BRICS की ताकत और एकतरफा वैश्विक नीतियों के मुकाबले उसकी भूमिका को लेकर अपना संदेश दे दिया है। अब दुनिया की नजर दिल्ली में होने वाली उनकी बैठकों और BRICS सम्मेलन के संयुक्त घोषणा-पत्र पर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 15:05:15 +0530</pubDate>
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