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                <title>Mosque Demolition - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <description>Mosque Demolition RSS Feed</description>
                
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                <title>सहारनपुर मस्जिद पर बुलडोजर के बाद अखिलेश यादव का ‘सनातनी’ वार, सरकार से पूछे तीखे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कार्रवाई के समय और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/akhilesh-yadav-reaction-saharanpur-mosque-bulldozer-action/article-1951"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/akhilesh-yadav-saharanpur-mosque-bulldozer-reaction.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को बुलडोजर से हटाए जाने का मामला अब राजनीतिक रूप ले चुका है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो लोग दूसरे धर्म और उसकी आस्था का सम्मान नहीं करते, वे सच्चे सनातनी नहीं हो सकते।</p>
<p>अखिलेश यादव ने मस्जिद हटाने की कार्रवाई के पीछे सरकार की मंशा पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित पक्ष को अदालत से राहत मांगने का पर्याप्त अवसर मिलने से पहले ही कार्रवाई कर दी गई। हालांकि, ये आरोप सपा अध्यक्ष के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और प्रशासन का पक्ष इससे अलग हो सकता है।</p>
<h3>सहारनपुर की कार्रवाई पर क्या बोले अखिलेश यादव?</h3>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/akhilesh-yadav-saharanpur-mosque-bulldozer-reaction.jpg2.jpg" alt="akhilesh-yadav-saharanpur-mosque-bulldozer-reaction.jpg" width="1366" height="768"></img>
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद हटाए जाने की कार्रवाई पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार को घेरा।

<p>अखिलेश यादव ने कहा कि सनातन धर्म सभी को साथ लेकर चलने और हर धर्म का सम्मान करने की सीख देता है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरी दुनिया को परिवार मानने की भावना ही वास्तविक सनातन परंपरा का आधार है।</p>
<p>सपा अध्यक्ष ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति दूसरे धर्म, उसकी आस्था या धार्मिक भावनाओं का सम्मान नहीं करता है तो उसे सच्चा सनातनी नहीं कहा जा सकता। उनके इस बयान के बाद मस्जिद पर हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।</p>
<h3>अदालत जाने का अवसर नहीं देने का लगाया आरोप</h3>
<p>अखिलेश यादव ने कार्रवाई के समय को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या प्रभावित पक्ष को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाकर राहत मांगने का अधिकार नहीं था? उनका आरोप है कि जिस समय आगे की कानूनी कार्रवाई करना मुश्किल हो, उसी समय मस्जिद को हटाया गया।</p>
<p>अखिलेश ने दावा किया कि कार्रवाई इतनी जल्दी की गई कि संबंधित पक्ष को उच्च अदालत में अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल सका। यह अखिलेश यादव का आरोप है। इस मामले में प्रशासन की आधिकारिक प्रक्रिया और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।</p>
<h3>क्या है सहारनपुर मस्जिद का पूरा मामला?</h3>
<p>मामला सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी एक मस्जिद से संबंधित है। प्रशासन की ओर से इस निर्माण को नियमों के विरुद्ध बताते हुए हटाने की कार्रवाई की गई। बुलडोजर से ढांचा गिराए जाने के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया।</p>
<p>कार्रवाई के दौरान मौके पर प्रशासनिक अधिकारी और सुरक्षा बल मौजूद रहे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी। प्रशासन का पक्ष है कि कार्रवाई नियमानुसार की गई, जबकि विपक्षी दल कार्रवाई के तरीके, समय और जल्दबाजी पर सवाल उठा रहे हैं।</p>
<h3>बुलडोजर कार्रवाई पर तेज हुई सियासत</h3>
<p>सहारनपुर में हुई कार्रवाई पर अखिलेश यादव से पहले बसपा प्रमुख मायावती और एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। विपक्षी नेताओं ने इसे धार्मिक अधिकारों और संविधान से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा है।</p>
<p>दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से निर्माण को अवैध बताए जाने और नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में यह मामला केवल स्थानीय प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है।</p>
<h3>राम मंदिर के चंदे का मुद्दा भी उठाया</h3>
<p>सरकार पर हमला करते हुए अखिलेश यादव ने राम मंदिर के लिए जुटाए गए चंदे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने चंदे के उपयोग को लेकर सवाल किए और कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है तथा संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।</p>
<p>सपा अध्यक्ष के बयान से स्पष्ट है कि पार्टी इस मामले को धार्मिक सद्भाव, संवैधानिक अधिकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।</p>
<h3>अब आगे क्या होगा?</h3>
<p>सहारनपुर की मस्जिद पर हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि प्रशासन अपनी कार्रवाई को नियमों के अनुसार बता रहा है।</p>
<p>अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि मस्जिद से संबंधित पक्ष इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती देता है या नहीं। साथ ही, राज्य सरकार अथवा जिला प्रशासन विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करता है या नहीं।</p>
<p>यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और संबंधित नेताओं के बयानों पर आधारित है। मामले से जुड़े दावों को उन्हीं पक्षों के आरोप या प्रतिक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 15:02:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सहारनपुर मस्जिद पर बुलडोजर से भड़के ओवैसी: पूछा—क्या मुसलमानों के संवैधानिक अधिकार नहीं बचे?</title>
                                    <description><![CDATA[सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को तड़के ध्वस्त किए जाने पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने योगी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता, 1911 के कथित रिकॉर्ड और सौ वर्षों से लगातार नमाज होने का हवाला दिया। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी थी और जिला अदालत से अपील खारिज होने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/asaduddin-owaisi-reaction-saharanpur-mosque-bulldozer-action/article-1949"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/owaisi-saharanpur-mosque-bulldozer-reaction.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>सहारनपुर।</strong> उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को भारी सुरक्षा के बीच ध्वस्त किए जाने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती के बाद अब AIMIM अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।</p>
<p>ओवैसी ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को घेरते हुए पूछा कि क्या मुसलमानों के लिए धार्मिक स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी समाप्त हो गई है? उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों को कमजोर आधार पर लगातार बुलडोजर से गिराया जा रहा है।</p>
<p>हालांकि, प्रशासन ने इन आरोपों से अलग पक्ष रखते हुए कहा कि कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद सरकारी जमीन पर अनधिकृत रूप से बनाई गई थी। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत के फैसले के खिलाफ मस्जिद समिति की अपील जिला अदालत से खारिज होने के बाद ही ध्वस्तीकरण किया गया।</p>
<h3>ओवैसी ने कार्रवाई पर क्या कहा?</h3>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/owaisi-saharanpur-mosque-bulldozer-reaction.jpg.jpg" alt="owaisi-saharanpur-mosque-bulldozer-reaction.jpg" width="1366" height="768"></img>
सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद ध्वस्त किए जाने पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने धार्मिक स्वतंत्रता और मुस्लिम समुदाय के संवैधानिक अधिकारों का सवाल उठाया।

<p>असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद को सुबह करीब पांच बजे ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि क्या संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी अब मुसलमानों पर लागू नहीं होती?</p>
<p>ओवैसी ने यह भी पूछा कि मुस्लिम समुदाय के धार्मिक स्थलों को लगातार कथित तौर पर कमजोर आधार पर क्यों गिराया जा रहा है। उनका कहना था कि किसी समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता सरकार या दूसरे लोगों की दया पर निर्भर नहीं हो सकती। <a class="decorated-link" href="https://x.com/asadowaisi/status/2096119527381823815?utm_source=chatgpt.com">स्रोत: असदुद्दीन ओवैसी की X पोस्ट</a></p>
<p>यह ओवैसी का राजनीतिक और कानूनी दावा है। जमीन के स्वामित्व तथा निर्माण की वैधता पर प्रशासन और मस्जिद समिति के पक्ष एक-दूसरे से अलग हैं।</p>
<h3>1911 के रिकॉर्ड का दिया हवाला</h3>
<p>ओवैसी ने दावा किया कि मस्जिद समिति ने धार्मिक स्थल के अस्तित्व को साबित करने के लिए वर्ष 1911 तक के पुराने रिकॉर्ड पेश किए थे। उन्होंने कहा कि इस स्थान पर एक सदी से अधिक समय से लगातार नमाज पढ़ी जाती रही है।</p>
<p>उनके अनुसार, लंबे समय तक किसी संपत्ति का मस्जिद के रूप में सार्वजनिक और निरंतर उपयोग होना “वक्फ बाय यूजर” की परिभाषा में आता है। ओवैसी ने दावा किया कि इस प्रकार का वक्फ आज भी कानून के तहत संरक्षित है।</p>
<p>इससे पहले कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी वर्ष 1911 का बिजली बिल और जमीन से जुड़े पुराने दस्तावेज उपलब्ध होने का दावा किया था। हालांकि, पुराने बिजली बिल या लंबे समय तक धार्मिक इस्तेमाल से जमीन का मालिकाना हक अपने आप सिद्ध होता है या नहीं—यह कानूनी जांच और संबंधित अभिलेखों का विषय है।</p>
<h3>‘मस्जिद पहले बनी, कलेक्ट्रेट बाद में आया’</h3>
<p>AIMIM प्रमुख ने दावा किया कि मस्जिद का निर्माण कलेक्ट्रेट से पहले हुआ था। उन्होंने कहा कि सरकार यह दिखावा नहीं कर सकती कि जमीन पर कब्जा कल ही शुरू हुआ, क्योंकि वहां कथित रूप से सौ वर्ष से अधिक समय तक खुला, सार्वजनिक और निरंतर धार्मिक उपयोग होता रहा है।</p>
<p>ओवैसी ने ‘Adverse Possession’ यानी प्रतिकूल कब्जे के सिद्धांत और Limitation Act का भी उल्लेख किया। उनका तर्क था कि सरकार को अचल संपत्ति पर अधिकार जताने के लिए असीमित समय नहीं दिया जा सकता।</p>
<p>लेकिन इस कानूनी तर्क पर किसी उच्च न्यायालय का निर्णय फिलहाल सामने नहीं आया है। नगर मजिस्ट्रेट और जिला अदालत के स्तर पर आदेश प्रशासन के पक्ष में रहा है। इसलिए ओवैसी के तर्क को स्थापित न्यायिक निष्कर्ष के बजाय उनका कानूनी दावा माना जाना चाहिए।</p>
<h3>ओवैसी ने दिया तीखा बयान</h3>
<p>ओवैसी ने कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि यदि कुछ लोगों को मस्जिद देखकर परेशानी होती है तो यह उनकी समस्या है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि किसी की इच्छा या परेशानी के कारण मस्जिद को बुलडोजर से नहीं गिराया जा सकता।</p>
<p>उन्होंने कहा कि उनकी धार्मिक स्वतंत्रता किसी की कृपा पर निर्भर नहीं है। ओवैसी के इस बयान के बाद सहारनपुर मस्जिद विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है। <a class="decorated-link" href="https://www.deccanchronicle.com/southern-states/telangana/cannot-bulldoze-our-masjid-just-because-you-have-an-itch-owaisi-condemns-saharanpur-mosque-demolition-claims-records-dating-back-to-1911-establish-its-existence-1985026?utm_source=chatgpt.com">स्रोत: डेक्कन क्रॉनिकल</a></p>
<h3>आखिर क्यों गिराई गई मस्जिद?</h3>
<p>सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की खसरा संख्या 539 में बनी मस्जिद को लेकर वर्ष 2024 में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि लगभग 315 वर्गमीटर सरकारी जमीन पर कब्जा करके मस्जिद बनाई गई और परिसर के कुछ हिस्सों का व्यावसायिक उपयोग भी किया गया।</p>
<p>मामले की सुनवाई के बाद नगर मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने 17 जुलाई 2026 को मस्जिद को सरकारी जमीन पर अनधिकृत निर्माण माना। अदालत ने कब्जाधारियों को 30 दिन के अंदर जमीन खाली करने का आदेश दिया।</p>
<p>इसके साथ ही कथित रूप से करीब 70 वर्षों तक सरकारी जमीन का अनधिकृत इस्तेमाल करने के बदले 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति निर्धारित की गई थी।</p>
<h3>जिला अदालत ने खारिज कर दी थी अपील</h3>
<p>मस्जिद प्रबंधन समिति ने नगर मजिस्ट्रेट के आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी थी। जिला न्यायाधीश की अदालत ने 4 सितंबर को समिति की अपील खारिज करते हुए पहले दिए गए आदेश को बरकरार रखा।</p>
<p>इसके बाद 5 सितंबर की सुबह प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर मस्जिद के ढांचे को ध्वस्त कर दिया। संवेदनशीलता को देखते हुए मौके पर PAC, RAF और बड़ी संख्या में स्थानीय पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। <a class="decorated-link" href="https://indianexpress.com/article/cities/lucknow/uttar-pradesh-saharanpur-mosque-demolished-bulldozer-action-collectorate-10864121/?utm_source=chatgpt.com">स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस</a></p>
<h3>प्रशासन ने क्या पक्ष रखा?</h3>
<p>सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा कि नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध रूप से निर्मित पाया था। इसके खिलाफ मस्जिद समिति की अपील भी खारिज हो गई, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्माण हटाया गया।</p>
<p>प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी एहतियाती कदम उठाए गए थे। सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों की निगरानी भी की गई, ताकि क्षेत्र में किसी प्रकार का तनाव या हिंसा न हो।</p>
<p>यहां दोनों पक्षों का अंतर स्पष्ट है—ओवैसी और मस्जिद समिति पुराने रिकॉर्ड, धार्मिक इस्तेमाल तथा वक्फ होने का दावा कर रहे हैं, जबकि प्रशासन राजस्व अभिलेखों और अदालत के आदेश के आधार पर जमीन को सरकारी बता रहा है।</p>
<h3>क्या धार्मिक स्वतंत्रता अवैध निर्माण को संरक्षण देती है?</h3>
<p>भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 सभी नागरिकों को अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। हालांकि, यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता, स्वास्थ्य और दूसरे संवैधानिक प्रावधानों के अधीन है।</p>
<p>धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार किसी अवैध कब्जे या अनधिकृत निर्माण को अपने आप वैध नहीं बनाता। उसी प्रकार किसी धार्मिक स्थल को हटाने की कार्रवाई भी कानून, उचित नोटिस, सुनवाई और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए।</p>
<p>इस मामले में विवाद का केंद्रीय प्रश्न यह है कि संबंधित जमीन का वास्तविक स्वामित्व किसके पास था और मस्जिद समिति द्वारा बताए जा रहे पुराने दस्तावेजों का कानूनी प्रभाव क्या है। नगर मजिस्ट्रेट और जिला अदालत का फैसला अभी प्रशासन के पक्ष में है, लेकिन मस्जिद समिति के पास उच्च न्यायालय जाने का विकल्प हो सकता है।</p>
<h3>इकरा हसन ने लगाया हाउस अरेस्ट का आरोप</h3>
<p>कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि जब वह सहारनपुर जाने का प्रयास कर रही थीं तो उन्हें उनके आवास पर रोक दिया गया। उनके घर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।</p>
<p>प्रशासन ने इस कदम को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई एहतियाती कार्रवाई बताया। इकरा हसन ने आरोप लगाया कि मस्जिद पक्ष को उच्च न्यायालय जाने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।</p>
<h3>इमरान मसूद ने भी कार्रवाई पर उठाए सवाल</h3>
<p>सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मस्जिद गिराए जाने को जिले के लिए “काला दिन” बताया। उन्होंने दावा किया कि जमीन के पुराने अभिलेखों में वाहिद खान और याकूब खान का नाम मौजूद है तथा मस्जिद वक्फ बोर्ड में पंजीकृत थी।</p>
<p>मसूद ने आरोप लगाया कि संबंधित कार्यवाही में वक्फ बोर्ड को पक्षकार नहीं बनाया गया। प्रशासन की ओर से इन दावों पर विस्तृत जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है। मस्जिद पक्ष ने मामले को आगे कानूनी मंच पर उठाने की बात कही है।</p>
<h3>मायावती ने भी की कार्रवाई रोकने की मांग</h3>
<p>बसपा प्रमुख मायावती ने भी उत्तर प्रदेश में मस्जिदों को जल्दबाजी में अवैध बताकर ध्वस्त करने की कार्रवाइयों पर सवाल उठाया। उन्होंने सरकार से इस प्रकार की कार्रवाई रोकने और विवादों का अन्य समाधान तलाशने की मांग की।</p>
<p>मायावती ने कहा कि एक संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष सरकार की जिम्मेदारी सभी धर्मों तथा उनके धार्मिक स्थलों को समान सम्मान और सुरक्षा देना है।</p>
<h3>क्या 2027 के चुनाव में बनेगा बड़ा मुद्दा?</h3>
<p>सहारनपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं का महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रभाव है। ऐसे में मस्जिद ध्वस्तीकरण पर AIMIM, बसपा, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रियाओं को आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।</p>
<p>ओवैसी की AIMIM उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। संवैधानिक अधिकार और मुस्लिम धार्मिक स्थलों का मुद्दा उठाकर वह सपा, कांग्रेस तथा बसपा के मुस्लिम जनाधार में जगह बनाने का प्रयास कर सकती है। हालांकि, इसका चुनावी असर कितना होगा, यह भविष्य के राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।</p>
<p>फिलहाल प्रशासन कार्रवाई को अदालत के आदेश का पालन बता रहा है, जबकि विपक्ष और मुस्लिम पक्ष प्रक्रिया, पुराने रिकॉर्ड और धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठा रहे हैं। मस्जिद का ढांचा गिर चुका है, लेकिन इससे जुड़ी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई अभी समाप्त होती दिखाई नहीं दे रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 14:26:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सहारनपुर मस्जिद पर बुलडोजर से भड़कीं मायावती: योगी सरकार से तुरंत रोक की मांग, कोर्ट को भी दी यह सलाह</title>
                                    <description><![CDATA[सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद गिराए जाने के बाद बसपी प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने मस्जिदों को अवैध बताकर ध्वस्त करने के कथित अभियान पर तत्काल रोक लगाने और विवादों का दूसरा समाधान तलाशने की मांग की। मायावती ने बुलडोजर कार्रवाई से प्रभावित परिवारों का मुद्दा उठाते हुए अदालतों से भी ध्यान देने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/mayawati-reaction-saharanpur-mosque-bulldozer-action-yogi-government/article-1947"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/mayawati-saharanpur-mosque-bulldozer-reaction.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को बुलडोजर से ध्वस्त किए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं के बाद अब बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है।</p>
<p>मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस प्रकार की कार्रवाइयों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मस्जिदों को जल्दबाजी में अवैध घोषित करके ध्वस्त करने का जो सरकारी अभियान चलाया जा रहा है, वह उचित नहीं है। सरकार को तनाव पैदा करने वाले हालात से बचते हुए ऐसे विवादों के समाधान के लिए दूसरे उपाय तलाशने चाहिए।</p>
<h3>मायावती ने सरकार से क्या कहा?</h3>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/mayawati-saharanpur-mosque-bulldozer-reaction.jpg.jpg" alt="mayawati-saharanpur-mosque-bulldozer-reaction.jpg" width="1366" height="768"></img>
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद ध्वस्त किए जाने पर बसपा प्रमुख मायावती ने नाराजगी जताते हुए सरकार से ऐसी कार्रवाइयों पर रोक लगाने की मांग की।

<p>बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए सहारनपुर की घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में आए दिन मस्जिदों को जल्दबाजी में अवैध बताकर ध्वस्त करने का सरकारी अभियान ठीक नहीं है।</p>
<p>मायावती ने सरकार से ऐसी कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को नकारात्मक परिस्थितियों से बचने के लिए विवादों के समाधान के दूसरे रास्ते तलाशने चाहिए। <a class="decorated-link" href="https://x.com/Mayawati/status/2096105110581772709?utm_source=chatgpt.com">स्रोत: मायावती की X पोस्ट</a></p>
<p>उनका बयान ऐसे समय सामने आया है, जब सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को जिला अदालत से अपील खारिज होने के बाद भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ध्वस्त किया गया है।</p>
<h3>सभी धर्मों का सम्मान सरकार की जिम्मेदारी—मायावती</h3>
<p>मायावती ने अपने बयान में संविधान और धर्मनिरपेक्ष शासन व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि एक संवैधानिक और सेक्युलर सरकार की जिम्मेदारी सभी धर्मों को समान सम्मान देना है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सभी धर्मों को मानने वाले लोगों, उनकी आस्था और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का उत्तरदायित्व है। मायावती के अनुसार, सरकार को किसी भी धार्मिक स्थल से जुड़े मामले में ऐसा रास्ता अपनाना चाहिए जिससे कानून का पालन भी हो और किसी समुदाय की धार्मिक भावनाएं भी आहत न हों।</p>
<p>मायावती ने मस्जिदों को इस्लाम में दैनिक इबादत और सामूहिक नमाज का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि भारतीय परंपरा और व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए इनका सम्मान किया जाना चाहिए। <a class="decorated-link" href="https://www.abplive.com/states/up-uk/bsp-chief-mayawati-reaction-on-saharanpur-illegal-mosque-bulldozer-action-3184632?utm_source=chatgpt.com">स्रोत: एबीपी न्यूज</a></p>
<h3>बुलडोजर कार्रवाई से प्रभावित परिवारों का भी उठाया मुद्दा</h3>
<p>मायावती ने अपने बयान को केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने आरोपियों के मकानों पर होने वाली बुलडोजर कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि किसी आरोपी का मकान बिना नियम-कानून का समुचित पालन किए गिराने से केवल वह व्यक्ति ही नहीं, बल्कि उसका पूरा परिवार प्रभावित होता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि किसी एक आरोपी के कारण उसके पूरे परिवार को बेघर कर देना सामूहिक सजा जैसा बन जाता है और ऐसी कार्रवाइयों से आम लोग विचलित हैं। मायावती ने अपनी सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए “कानून द्वारा कानून का राज” स्थापित करने की जरूरत बताई।</p>
<p>पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार के साथ न्यायालयों से भी इस विषय पर समुचित ध्यान देने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने सभी पक्षों से सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने की अपील भी की।</p>
<h3>आखिर सहारनपुर में क्या हुआ?</h3>
<p>सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को 5 सितंबर की सुबह भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर अनधिकृत रूप से बनाई गई थी और कार्रवाई पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई।</p>
<p>नगर मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने जुलाई 2026 में लगभग 315 वर्गमीटर सरकारी जमीन पर बने ढांचे को अनधिकृत कब्जा माना था। अदालत ने कब्जाधारियों को परिसर खाली करने के लिए 30 दिन का समय दिया था। इसके साथ ही कथित तौर पर लगभग 70 वर्षों तक सरकारी जमीन का इस्तेमाल करने के बदले 6 करोड़ 41 लाख रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति निर्धारित की गई थी।</p>
<p>मस्जिद प्रबंधन समिति ने नगर मजिस्ट्रेट के आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी, लेकिन 4 सितंबर को उसकी अपील खारिज हो गई। इसके बाद अगले दिन तड़के प्रशासन ने मस्जिद के ढांचे को ध्वस्त कर दिया। <a class="decorated-link" href="https://indianexpress.com/article/cities/lucknow/uttar-pradesh-saharanpur-mosque-demolished-bulldozer-action-collectorate-10864121/?utm_source=chatgpt.com">स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस</a></p>
<h3>प्रशासन ने कार्रवाई को बताया कानूनी</h3>
<p>सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा कि नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण माना था। इसके खिलाफ मस्जिद समिति की अपील भी खारिज हो गई, जिसके बाद ढांचे को हटाने की कार्रवाई की गई।</p>
<p>प्रशासन ने संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्ट्रेट और आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया था। अधिकारियों के अनुसार, किसी अप्रिय घटना को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए।</p>
<h3>मस्जिद पक्ष ने किया था पुराना धार्मिक स्थल होने का दावा</h3>
<p>मस्जिद प्रबंधन से जुड़े लोगों ने दावा किया था कि धार्मिक स्थल कई दशक पुराना है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में इसकी उम्र करीब 70 से 150 वर्ष तक बताई गई है। मस्जिद पक्ष ने जमीन पर अपना दावा साबित करने के लिए पुराने दस्तावेज और बिजली बिल होने की बात भी कही थी।</p>
<p>कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने दावा किया था कि उनके पास वर्ष 1911 का बिजली बिल और जमीन के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज हैं। हालांकि, नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने राजस्व अभिलेखों के आधार पर जमीन को सरकारी संपत्ति माना था। <a class="decorated-link" href="https://www.aajtak.in/uttar-pradesh/story/bulldozer-action-on-70-year-old-mosque-at-saharanpur-collectorate-imran-masood-angry-hate-mongering-lclam-strc-2603398-2026-07-17?utm_source=chatgpt.com">स्रोत: आजतक</a></p>
<h3>मायावती के बयान के क्या हैं सियासी मायने?</h3>
<p>उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित और मुस्लिमक वोटों के साथ मुस्लिम मतदाता भी सभीक भूमिका निभाते हैं। सहारनपुर में दलित और मुस्लिम आबादी का महत्वपूर्ण प्रभाव माना जाता है। ऐसे में मायावती का मस्जिद ध्वस्तीकरण पर तत्काल और स्पष्ट बयान राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।</p>
<p>मायावती ने अपने बयान में सरकारक सिर्फ सरकार को घेरा, बल्कि कानून के शासन की बात करते हुए अपनी पूर्ववर्ती बसपा सरकार के कार्यकाल का भी उल्लेख किया। इससे स्पष्ट है कि बसपा इस मामले में खुद को कानून-व्यवस्था और सभी धार्मिक समुदायों के सम्मान की पक्षधर पार्टी के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है।</p>
<p>हालांकि, इसे केवल राजनीतिक समीकरण तक सीमित करके देखना ठीक नहीं होगा। मायावती ने अपने बयान में सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों की समान सुरक्षा और समाज में शांति बनाए रखने की बात भी कही है।</p>
<h3>सरकार और मायावती के पक्ष में क्या अंतर है?</h3>
<p>प्रशासन का पक्ष है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी थी, नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने उसे अनधिकृत माना और जिला अदालत से अपील खारिज होने के बाद कानूनी कार्रवाई की गई।</p>
<p>दूसरी ओर, मायावती ने व्यापक स्तर पर ऐसी कार्रवाइयों के तरीके और जल्दबाजी पर सवाल उठाया है। उन्होंने यह दावा नहीं किया कि अदालत का फैसला मौजूद नहीं था, बल्कि सरकार से धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों का कोई दूसरा और सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने की मांग की है।</p>
<p>फिलहाल मस्जिद का ढांचा ध्वस्त किया जा चुका है, लेकिन कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है। अब यह देखना होगा कि मस्जिद प्रबंधन समिति किसी उच्च अदालत का दरवाजा खटखटाती है या नहीं और मायावती की मांग पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कोई जवाब आता है या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/mayawati-reaction-saharanpur-mosque-bulldozer-action-yogi-government/article-1947</link>
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                <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 13:47:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रातभर तनाव, सुबह 5 बजे चला बुलडोजर: सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद क्यों ढहाई गई? जानिए पूरा विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को शनिवार तड़के बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर बने इस ढांचे को हटाने की कार्रवाई अदालत के फैसले और कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई। वहीं, सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि एक दिन पहले अधिकारियों ने केवल परिसर सील करने का भरोसा दिया था। जानिए मस्जिद विवाद की पूरी कहानी और दोनों पक्षों का दावा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/saharanpur-collectorate-mosque-demolition-bulldozer-action-full-story/article-1945"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/saharanpur-collectorate-mosque-bulldozer-action.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>सहारनपुर।</strong> उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को शनिवार सुबह भारी पुलिस सुरक्षा के बीच बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। तड़के शुरू हुई इस कार्रवाई के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। सवाल उठ रहे हैं कि वर्षों से परिसर में मौजूद मस्जिद को हटाने की नौबत क्यों आई और प्रशासन ने सुबह-सुबह कार्रवाई क्यों की?</p>
<p>प्रशासन के मुताबिक, यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई। कलेक्ट्रेट परिसर की जमीन पर मस्जिद के कथित अवैध निर्माण और कब्जे को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने जुलाई 2026 में ढांचे को सरकारी जमीन पर अनधिकृत कब्जा मानते हुए उसे हटाने का आदेश दिया था।</p>
<h3>जिला अदालत से अपील खारिज होने के बाद हुई कार्रवाई</h3>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/saharanpur-collectorate-mosque-bulldozer-action.jpg.jpg" alt="saharanpur-collectorate-mosque-bulldozer-action.jpg" width="1366" height="768"></img>
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ढांचे को जिला अदालत से अपील खारिज होने के बाद भारी सुरक्षा के बीच ध्वस्त किया गया।

<p>मस्जिद प्रबंधन समिति ने नगर मजिस्ट्रेट के आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, 4 सितंबर को जिला अदालत ने समिति की अपील खारिज कर दी और पहले दिए गए आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद 5 सितंबर की सुबह प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर मस्जिद के ढांचे को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया।</p>
<p>सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा कि नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध रूप से निर्मित पाया था। उन्होंने बताया कि मस्जिद समिति की अपील भी खारिज हो गई, जिसके बाद कानून के अनुसार कार्रवाई की गई। क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहले से सुरक्षात्मक कदम उठाए गए थे। <a class="decorated-link" href="https://indianexpress.com/article/cities/lucknow/uttar-pradesh-saharanpur-mosque-demolished-bulldozer-action-collectorate-10864121/?utm_source=chatgpt.com">स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस</a></p>
<h3>कितनी जमीन पर बनी थी मस्जिद?</h3>
<p>नगर मजिस्ट्रेट की अदालत के जुलाई 2026 के आदेश के अनुसार, मस्जिद का निर्माण कलेक्ट्रेट परिसर की लगभग 315 वर्गमीटर सरकारी जमीन पर किया गया था। आदेश उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1972 के तहत जारी हुआ था।</p>
<p>तत्कालीन आदेश में कब्जाधारियों को परिसर खाली करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था। इसके साथ ही कथित रूप से करीब 70 वर्षों तक सरकारी जमीन का अनधिकृत इस्तेमाल करने के बदले लगभग 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति निर्धारित की गई थी। <a class="decorated-link" href="https://indianexpress.com/article/cities/lucknow/saharanpur-collectorate-mosque-eviction-order-fine-crores-government-land-10791314/?utm_source=chatgpt.com">स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस</a></p>
<h3>शिकायत के बाद शुरू हुआ था मामला</h3>
<p>मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में वर्ष 2024 में बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने शिकायत की थी। शिकायत में कलेक्ट्रेट परिसर की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके मस्जिद बनाए जाने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद प्रशासनिक जांच और कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ी।</p>
<p>मस्जिद पक्ष ने दावा किया था कि यह धार्मिक स्थल बहुत पुराना है और लंबे समय से कलेक्ट्रेट कर्मचारियों तथा स्थानीय लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है। अलग-अलग रिपोर्टों में मस्जिद की उम्र करीब 70 से 150 वर्ष तक बताई गई है। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध राजस्व अभिलेखों और दस्तावेजों के आधार पर जमीन को सरकारी संपत्ति माना। <a class="decorated-link" href="https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/saharanpur/saharanpur-collectorate-mosque-declared-illegal-court-orders-removal-within-30-days-2026-07-17?utm_source=chatgpt.com">स्रोत: अमर उजाला</a></p>
<h3>वायरल पोस्ट में DM पर क्या आरोप लगाया गया?</h3>
<p>सोशल मीडिया पर पत्रकार अंजार अफाक की पोस्ट में दावा किया गया कि कार्रवाई से पहले लोगों ने मस्जिद की जमीन से संबंधित कागजात अधिकारियों को दिखाए थे। पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि रात में अधिकारियों ने केवल मस्जिद को सील करने की बात कही, लेकिन सुबह ढांचा ध्वस्त कर दिया गया।</p>
<p>हालांकि, उपलब्ध विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों या प्रशासन के आधिकारिक बयान में इस कथित आश्वासन की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे स्थापित तथ्य के बजाय सोशल मीडिया पर किया गया दावा मानना उचित होगा। प्रशासन का दर्ज पक्ष यही है कि जिला अदालत से अपील खारिज होने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई। <a class="decorated-link" href="https://x.com/AnzarAfaque/status/2096103316975649238?s=20">वायरल पोस्ट देखें</a></p>
<h3>तड़के कार्रवाई और भारी पुलिस बल की तैनाती</h3>
<p>संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। कार्रवाई सुबह करीब पांच बजे किए जाने की बात सामने आई है। बुलडोजर से ढांचा हटाने के दौरान लोगों को कलेक्ट्रेट परिसर की ओर जाने से रोका गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग की गई।</p>
<p>कार्रवाई से पहले शुक्रवार रात इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं और अफवाहें फैलने लगी थीं। प्रशासन ने संभावित विरोध को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरती। फिलहाल प्रशासन की ओर से क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में होने की बात कही गई है।</p>
<h3>इकरा हसन ने लगाया हाउस अरेस्ट का आरोप</h3>
<p>कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए उनके आवास पर पुलिस तैनात करके नजरबंद किया गया। प्रशासन की ओर से इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया एहतियाती कदम बताया गया है।</p>
<p>मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज होने की संभावना है। एक तरफ प्रशासन इसे सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने की कानूनी कार्रवाई बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ मस्जिद पक्ष और कुछ राजनीतिक नेता कार्रवाई के तरीके तथा समय पर सवाल उठा रहे हैं।</p>
<h3>पुराने धार्मिक स्थल और सरकारी जमीन—अब आगे क्या?</h3>
<p>इस मामले में तीन बातें स्पष्ट हैं—नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को सरकारी जमीन पर अनधिकृत निर्माण माना था, समिति की अपील जिला अदालत से खारिज हुई और उसके बाद प्रशासन ने ढांचा हटाया। वहीं, अधिकारियों द्वारा मस्जिद नहीं तोड़ने का आश्वासन दिए जाने का दावा अभी स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हुआ है।</p>
<p>अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मस्जिद प्रबंधन समिति इस कार्रवाई के विरुद्ध किसी उच्च न्यायालय का रुख करती है या नहीं। फिलहाल ध्वस्तीकरण पूरा हो चुका है, लेकिन इससे जुड़ी कानूनी और राजनीतिक बहस समाप्त होती दिखाई नहीं दे रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/saharanpur-collectorate-mosque-demolition-bulldozer-action-full-story/article-1945</link>
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                <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 12:32:05 +0530</pubDate>
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