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                <title>Ganga Water Level - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <description>Ganga Water Level RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आंखों के सामने गंगा में समाया 150 साल पुराना शिव मंदिर, रोते रहे ग्रामीण; मालदा का भयावह Video वायरल</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में गंगा के भीषण कटाव की चपेट में आकर करीब 150 साल पुराना शिव मंदिर नदी में समा गया। मंदिर ढहने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। प्रभावित गांवों से लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/malda-150-year-old-shiv-temple-collapses-into-ganga-viral-video/article-1966"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/malda-150-year-old-shiva-temple-ganga-erosion-viral-video.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>मालदा।</strong> पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में उफनती गंगा ने एक ऐतिहासिक शिव मंदिर को अपनी चपेट में ले लिया। रतुआ इलाके में स्थित करीब 150 साल पुराना मंदिर नदी किनारे हो रहे भीषण कटाव के कारण देखते ही देखते गंगा में समा गया।</p>
<p>मंदिर के ढहने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में नदी किनारे खड़ा मंदिर धीरे-धीरे एक तरफ झुकता है और कुछ ही सेकेंड में पूरी इमारत गंगा की तेज धारा में गिर जाती है। वहां मौजूद ग्रामीण बेबस होकर इस पूरे घटनाक्रम को देखते रहे।</p>
<p>स्थानीय लोगों के लिए यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा था। मंदिर को आंखों के सामने गिरता देखकर कई ग्रामीण भावुक हो गए।</p>
<h2>पिछले साल से मंदिर पर मंडरा रहा था खतरा</h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/malda-150-year-old-shiva-temple-ganga-erosion-viral-video.jpg.jpg" alt="malda-150-year-old-shiva-temple-ganga-erosion-viral-video.jpg" width="1366" height="768"></img>
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में गंगा के भीषण कटाव की चपेट में आकर करीब 150 साल पुराना शिव मंदिर नदी में समा गया।

<p>मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नदी किनारे लगातार हो रहे कटाव के कारण पिछले साल से ही शिव मंदिर पर खतरा मंडरा रहा था। गंगा की धारा धीरे-धीरे मंदिर के पास की जमीन काट रही थी।</p>
<p>हाल के दिनों में नदी का जलस्तर और बहाव बढ़ने से कटाव अचानक तेज हो गया। मंदिर की नींव के नीचे की मिट्टी कमजोर होने के बाद पूरी इमारत गंगा में गिर गई।</p>
<p><a class="decorated-link" href="https://www.abplive.com/news/india/malda-150-year-old-shiv-temple-submerged-in-the-ganges-video-viral-3185923?utm_source=chatgpt.com">एबीपी न्यूज की रिपोर्ट</a> के मुताबिक, यह घटना मालदा के रतुआ क्षेत्र में हुई है और मंदिर के नदी में गिरने का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है।</p>
<h2>वीडियो देखकर भावुक हुए लोग</h2>
<p>वायरल वीडियो में मंदिर के आसपास कई ग्रामीण खड़े दिखाई देते हैं। जैसे ही मंदिर गंगा में गिरता है, मौके पर मौजूद लोगों के बीच चीख-पुकार मच जाती है।</p>
<p>कई ग्रामीण धार्मिक नारे लगाते हुए दिखाई देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी कई पीढ़ियां इस मंदिर में पूजा करती आई थीं। कटाव के कारण मंदिर को बचाने की कोशिशें सफल नहीं हो सकीं।</p>
<p>सोशल मीडिया पर वीडियो देखने के बाद लोग मंदिर के नष्ट होने पर दुख जता रहे हैं। कई यूजर्स ने नदी किनारे बने गांवों और ऐतिहासिक इमारतों को बचाने के लिए स्थायी कटावरोधी व्यवस्था की मांग की है।</p>
<h2>फरक्का बैराज से पानी छोड़े जाने का दावा</h2>
<p>रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फरक्का बैराज से करीब 12 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद गंगा का बहाव और जलस्तर बढ़ा। इसके कारण नदी किनारे हो रहा कटाव और गंभीर हो गया।</p>
<p>हालांकि, मंदिर गिरने के लिए बैराज से छोड़े गए पानी को सीधे जिम्मेदार ठहराने वाली कोई विस्तृत आधिकारिक तकनीकी रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। नदी का कटाव जलस्तर, मिट्टी की स्थिति, धारा की दिशा और लंबे समय से हो रहे भू-क्षरण जैसे कई कारणों से प्रभावित हो सकता है।</p>
<h2>100 से ज्यादा घर बहने की खबर</h2>
<p>मालदा के रतुआ इलाके में गंगा का कटाव केवल मंदिर तक सीमित नहीं है। श्रीकांतटोला, जित्तूटोला और मुनीरामटोला जैसे क्षेत्रों में 100 से अधिक घर नदी में बहने या बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने की खबर है।</p>
<p>कई परिवार समय रहते अपना सामान लेकर सुरक्षित स्थानों पर चले गए, जबकि कुछ लोगों को अपनी संपत्ति और घर छोड़ना पड़ा। नदी के किनारे बने अन्य मकानों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक संरचनाओं पर भी खतरा बना हुआ है।</p>
<p>स्थानीय लोगों को डर है कि गंगा का जलस्तर और बढ़ने पर कटाव आबादी वाले नए इलाकों तक पहुंच सकता है। प्रभावित गांवों के लोग प्रशासन से स्थायी तटबंध और पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं।</p>
<h2>1,725 लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया</h2>
<p>रिपोर्टों के अनुसार, रतुआ क्षेत्र के लगभग 1,725 प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में भेजा गया है। वहीं 63 परिवारों को खसकोल हाई स्कूल में बनाए गए अस्थायी आश्रय स्थल में ठहराया गया है।</p>
<p>प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीम स्थिति पर नजर रख रही हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने के साथ लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।</p>
<p>आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमों और केंद्रीय बलों को भी तैनात किए जाने की जानकारी सामने आई है। भूटनी द्वीप तक संपर्क बहाल करने के लिए अस्थायी रास्ता तैयार करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।</p>
<h2>तटबंध टूटने से बढ़ी ग्रामीणों की चिंता</h2>
<p>मालदा के भूटनी इलाके में गंगा का जलस्तर बढ़ने और रिंग बांध क्षतिग्रस्त होने से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कई क्षेत्रों में पानी प्रवेश करने के बाद लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है।</p>
<p>कुछ स्थानों पर तटबंध की मरम्मत और वैकल्पिक रास्ते बनाने का काम चल रहा है। लेकिन गंगा की तेज धारा और लगातार कटाव के कारण राहत कार्यों में परेशानी आ रही है।</p>
<p>प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।</p>
<h2>ऐतिहासिक मंदिर के साथ यादें भी बह गईं</h2>
<p>स्थानीय लोगों के अनुसार, यह शिव मंदिर करीब 150 साल पुराना था। कुछ मीडिया रिपोर्टों में इसकी आयु लगभग 175 साल भी बताई गई है। मंदिर की सही निर्माण तिथि से संबंधित कोई प्रमाणित ऐतिहासिक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया है।</p>
<p>इसके बावजूद मंदिर लंबे समय से स्थानीय लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र था। यहां धार्मिक अनुष्ठान और स्थानीय आयोजन होते थे। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर के साथ उनके परिवारों और गांव की कई पुरानी यादें भी गंगा में समा गईं।</p>
<h2>कटाव ने फिर खड़े किए बड़े सवाल</h2>
<p>मालदा में गंगा का कटाव नई समस्या नहीं है। प्रत्येक वर्ष बरसात और बाढ़ के दौरान नदी किनारे बसे गांवों में जमीन, मकान तथा खेती को नुकसान पहुंचता है।</p>
<p>ऐसे में सवाल उठ रहा है कि खतरे की जानकारी पहले से होने के बावजूद मंदिर और आसपास के घरों को सुरक्षित करने के लिए समय रहते पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए गए? स्थानीय लोगों की मांग है कि अस्थायी मरम्मत के बजाय वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर स्थायी कटावरोधी व्यवस्था बनाई जाए।</p>
<p>फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आश्रय, भोजन और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के साथ खतरे वाले क्षेत्रों से लोगों को समय रहते निकालने की है। <a class="decorated-link" href="https://timesofindia.indiatimes.com/city/kolkata/175-yr-old-shiva-temple-collapses-into-ganga-as-malda-floods-worsen/articleshow/133888980.cms?utm_source=chatgpt.com">मालदा में बिगड़ती बाढ़ की स्थिति पर रिपोर्ट</a></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 13:58:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>UP Flood: मंदाकिनी ने तोड़ा 23 साल का रिकॉर्ड, गंगा-यमुना भी उफान पर; 31 जिलों में बाढ़ जैसे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश में मंदाकिनी, गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। चित्रकूट में रामघाट सहित कई इलाके जलमग्न हैं, जबकि प्रयागराज, वाराणसी, बलिया और गाजीपुर में नदी किनारे बसे गांवों एवं मोहल्लों में पानी घुस गया है। प्रदेश के 31 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बताए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/up-flood-2026-mandakini-ganga-yamuna-water-level-chitrakoot-prayagraj-varanasi/article-1911"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/up-flood-mandakini-ganga-yamuna-chitrakoot-prayagraj.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h2 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">उत्तर प्रदेश के 31 जिलों में बाढ़ का असर</h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/up-flood-mandakini-ganga-yamuna-chitrakoot-prayagraj.jpg2.jpg" alt="up-flood-mandakini-ganga-yamuna-chitrakoot-prayagraj.jpg" width="1366" height="768"></img>
चित्रकूट में मंदाकिनी के उफान और प्रयागराज एवं वाराणसी में गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ने से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं।

<p><strong>लखनऊ:</strong> लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। मंदाकिनी, गंगा और यमुना का पानी चित्रकूट, प्रयागराज और वाराणसी सहित कई जिलों के निचले इलाकों में प्रवेश कर गया है।</p>
<p>प्रदेश के कम से कम <strong>31 जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति</strong> बताई गई है, जबकि 22 जिले सीधे जलभराव और बाढ़ से जूझ रहे हैं। हजारों लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से निकालकर सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है।</p>
<p>सबसे गंभीर स्थिति चित्रकूट में दिखाई दे रही है, जहां मंदाकिनी नदी के अचानक उफान ने रामघाट, दुकानों, मंदिरों से जुड़े रास्तों और नदी किनारे की बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया।</p>
<h2>मंदाकिनी ने 23 साल बाद दिखाया विकराल रूप</h2>
<p>चित्रकूट की जीवनरेखा कही जाने वाली मंदाकिनी नदी ने करीब 23 वर्ष बाद इतना विकराल रूप दिखाया है। नदी का खतरे का निशान 126.5 मीटर बताया गया है। 29 अगस्त को इसका जलस्तर बढ़कर 135.20 मीटर तक पहुंच गया था, जो खतरे के निशान से लगभग 8.5 मीटर ऊपर था।</p>
<p>2 सितंबर को जलस्तर घटकर करीब 127.1 मीटर रिकॉर्ड किया गया, लेकिन कई निचले इलाकों में पानी भरा रहा और नुकसान बड़े पैमाने पर सामने आया।</p>
<p>स्थानीय लोगों के मुताबिक वर्ष 2003 में भी मंदाकिनी का ऐसा ही उफान देखने को मिला था। इसके बाद अब 2026 में नदी ने आसपास के क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है।</p>
<h2>चित्रकूट के 36 गांव और 14 हजार लोग प्रभावित</h2>
<p><a class="decorated-link" href="https://indianexpress.com/article/cities/lucknow/floods-hit-31-up-districts-14000-affected-in-chitrakoot-thousands-evacuated-10860963/?utm_source=chatgpt.com">इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट</a> के मुताबिक चित्रकूट के कम से कम 36 गांवों के लगभग <strong>14 हजार लोग</strong> बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।</p>
<p>इनमें:</p>
<ul>
<li>कर्वी तहसील के 19 गांव</li>
<li>मानिकपुर तहसील के 10 गांव</li>
<li>राजापुर तहसील के सात गांव शामिल हैं।</li>
</ul>
<p>कई गांवों में पानी घरों और दुकानों तक पहुंच गया है। सड़कों के जलमग्न होने के कारण वाहनों का आवागमन बाधित है। राहत सामग्री पहुंचाने और फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए नावों एवं मोटरबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है।</p>
<h2>रामघाट और कामदगिरि मार्ग तक पहुंचा पानी</h2>
<p>चित्रकूट के प्रमुख धार्मिक स्थल रामघाट पर बाढ़ का गंभीर असर पड़ा है। मंदाकिनी का पानी रामघाट की दुकानों, टेंपो स्टैंड, पुरानी लंका, कामदगिरि मार्ग और नदी किनारे की बस्तियों में घुस गया।</p>
<p>मठों, मंदिरों, होटलों और गेस्ट हाउसों की ओर जाने वाले रास्तों पर मिट्टी एवं गाद जमा है। बाढ़ के कारण चित्रकूट आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी प्रभावित हुई है।</p>
<p>रामघाट और तरौंहा क्षेत्र से 60 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। रामघाट और निर्मोही अखाड़ा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से निगरानी की जा रही है।</p>
<h2>400 कच्चे मकान क्षतिग्रस्त, 30 से ज्यादा धराशायी</h2>
<p>बाढ़ से चित्रकूट में सैकड़ों कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा है। रिपोर्टों के अनुसार लगभग 400 कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और 30 से अधिक मकान गिर गए।</p>
<p>प्रशासन के अलग-अलग अपडेट में मकानों की क्षति के आंकड़ों में थोड़ा अंतर है, क्योंकि सर्वेक्षण और ऑनलाइन फीडिंग का काम लगातार जारी है। जिन परिवारों के मकान पूरी तरह नष्ट हुए हैं, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराने की बात कही गई है।</p>
<p>आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वेक्षण कर पात्र लोगों के बैंक खातों में सहायता राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है।</p>
<h2>प्रयागराज में गंगा-यमुना का पानी घरों तक पहुंचा</h2>
<p>प्रयागराज में गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर ने नदी किनारे के मोहल्लों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। दारागंज, गंगा नगर, ओम नगर, शांतिपुरम और उचवा गढ़ी सहित कई निचले क्षेत्रों में पानी प्रवेश कर गया है।</p>
<p>3 सितंबर की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार दोनों नदियां खतरे के निशान 84.73 मीटर से करीब दो मीटर नीचे थीं, लेकिन अलग-अलग निगरानी केंद्रों पर जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी था।</p>
<p>सुबह आठ बजे दर्ज आंकड़ों के अनुसार:</p>
<ul>
<li>फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 82.86 मीटर</li>
<li>छतनाग में गंगा का जलस्तर 81.87 मीटर</li>
<li>नैनी में यमुना का जलस्तर 82.20 मीटर था।</li>
</ul>
<p>दोपहर तक नैनी में यमुना करीब 14 सेंटीमीटर बढ़कर 82.34 मीटर पर पहुंच गई। ये आंकड़े लगातार बदल सकते हैं, इसलिए नदी किनारे रहने वाले लोगों को प्रशासन के ताजा निर्देशों का पालन करना चाहिए।</p>
<h2>बांधों से छोड़े गए पानी ने बढ़ाई चिंता</h2>
<p>मध्य प्रदेश के बांधों से यमुना में छोड़े गए पानी के कारण प्रयागराज में जलस्तर और बढ़ने की आशंका जताई गई। इसके अलावा ऊपरी क्षेत्रों में लगातार बारिश होने से गंगा और मंदाकिनी में भी पानी की आवक बढ़ी।</p>
<p>प्रशासन ने प्रयागराज में 88 बाढ़ राहत चौकियां सक्रिय कर दी हैं। संवेदनशील क्षेत्रों और घाटों के आसपास NDRF, PAC एवं जल पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं।</p>
<h2>वाराणसी में चेतावनी स्तर पार कर गई गंगा</h2>
<p>वाराणसी में गंगा चेतावनी स्तर के ऊपर बह रही है। 2 सितंबर को केंद्रीय जल आयोग ने गंगा का जलस्तर 70.29 मीटर रिकॉर्ड किया था, जबकि चेतावनी स्तर 70.26 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर है।</p>
<p>सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने गंगा में नावों का संचालन बंद कर दिया है और श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों को तेज बहाव वाले क्षेत्रों तथा घाटों से दूर रहने की सलाह दी है।</p>
<p><a class="decorated-link" href="https://timesofindia.indiatimes.com/city/varanasi/ganga-crosses-warning-level-boat-services-suspended-in-varanasi/articleshow/133699589.cms?utm_source=chatgpt.com">टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट</a> के मुताबिक गंगा और वरुणा नदी से करीब 11 इलाके एवं वार्ड आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं।</p>
<p>वरुणा की बाढ़ से 328 परिवारों के 1,388 लोग प्रभावित बताए गए। राहत शिविरों में 219 परिवारों के 935 लोगों को ठहराया गया है।</p>
<h2>बलिया और गाजीपुर में खतरे के निशान से ऊपर गंगा</h2>
<p>पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया और गाजीपुर में गंगा खतरे के निशान को पार कर गई। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार:</p>
<ul>
<li>बलिया में गंगा 59.41 मीटर पर थी, जबकि खतरे का निशान 57.61 मीटर है।</li>
<li>गाजीपुर में जलस्तर 63.35 मीटर था, जबकि खतरे का निशान 63.10 मीटर है।</li>
<li>वाराणसी में गंगा 70.38 मीटर तक पहुंचने की रिपोर्ट है, जो चेतावनी स्तर से ऊपर है।</li>
</ul>
<p>जलस्तर समय के साथ बदलता रहता है। इसलिए इन आंकड़ों को 2–3 सितंबर की स्थिति के रूप में ही पढ़ा जाना चाहिए।</p>
<h2>1,528 लोगों को सुरक्षित निकाला गया</h2>
<p>प्रदेशभर के प्रभावित इलाकों से कम से कम <strong>1,528 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया</strong> है। राहत और बचाव के लिए बड़े स्तर पर संसाधन तैनात किए गए हैं।</p>
<p>प्रशासन के मुताबिक:</p>
<ul>
<li>742 बाढ़ राहत चौकियां स्थापित की गई हैं।</li>
<li>452 नावें और मोटरबोट लगाई गई हैं।</li>
<li>225 मेडिकल टीमें काम कर रही हैं।</li>
<li>105 राहत शिविर सक्रिय किए गए हैं।</li>
<li>शिविरों में करीब 2,460 लोगों के रहने की व्यवस्था है।</li>
<li>प्रभावित पशुओं के लिए लगभग 310 क्विंटल चारा भेजा गया है।</li>
</ul>
<p>NDRF, SDRF, PAC, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें लोगों को सुरक्षित निकालने तथा भोजन, पानी एवं दवाएं पहुंचाने में जुटी हैं।</p>
<h2>इन जिलों में बाढ़ जैसे हालात</h2>
<p>प्रभावित जिलों में अयोध्या, आजमगढ़, बलिया, बाराबंकी, बदायूं, चंदौली, चित्रकूट, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोरखपुर, हापुड़, हरदोई, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, सीतापुर, उन्नाव और वाराणसी सहित कई जिले शामिल हैं।</p>
<p>निचले इलाकों, नदी किनारे की बस्तियों और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<h2>अभी टला नहीं है खतरा</h2>
<p>चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर अपने उच्चतम स्तर से नीचे आया है, लेकिन बाढ़ से हुए नुकसान और जलभराव का असर अभी बना हुआ है। दूसरी तरफ गंगा और यमुना के जलस्तर में अलग-अलग स्थानों पर बढ़ने और घटने का सिलसिला जारी है।</p>
<p>दक्षिणी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की आशंका के कारण स्थिति फिर बदल सकती है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।</p>
<hr />
<h2>बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सावधानियां</h2>
<ul>
<li>नदी, नाले, घाट और क्षतिग्रस्त पुलों के पास न जाएं।</li>
<li>प्रशासन खाली करने को कहे तो तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाएं।</li>
<li>पानी से ढकी सड़क पर वाहन चलाने का जोखिम न लें।</li>
<li>बिजली के तार, खंभे और जलमग्न ट्रांसफॉर्मर से दूर रहें।</li>
<li>पीने के लिए उबला या सुरक्षित पैकेज्ड पानी इस्तेमाल करें।</li>
<li>बच्चों और बुजुर्गों को अकेला न छोड़ें।</li>
<li>आपात स्थिति में 112 या स्थानीय जिला प्रशासन से संपर्क करें।</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 12:03:45 +0530</pubDate>
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