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                <title>Ayodhya News - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <title>‘अतीत से सीखेंगे, उसे बोझ नहीं बनने देंगे’, दान चोरी विवाद पर राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO जितेंद्र मिश्रा का पहला जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने दान चोरी विवाद पर कहा कि पिछली घटनाओं से सबक लेना जरूरी है, लेकिन उन्हें बोझ बनाकर आगे नहीं बढ़ा जा सकता। उन्होंने अनुशासन, ईमानदारी और टीमवर्क को अपनी कार्यशैली का आधार बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/ram-mandir-ceo-jeetendra-mishra-interview-donation-theft-response/article-1910"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/ram-mandir-ceo-jeetendra-mishra-donation-theft-interview.jpg.jpg" alt=""></a><br /><h2 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">नियुक्ति के बाद जितेंद्र मिश्रा का पहला विस्तृत इंटरव्यू</h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/ram-mandir-ceo-jeetendra-mishra-donation-theft-interview.jpg.jpg" alt="ram-mandir-ceo-jeetendra-mishra-donation-theft-interview.jpg" width="1366" height="768"></img>
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि पिछली घटनाओं से सीखना जरूरी है, लेकिन अतीत को बोझ बनाकर आगे नहीं बढ़ा जा सकता।

<p><strong>अयोध्या:</strong> श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किए गए रिटायर्ड एयर मार्शल <strong>जितेंद्र मिश्रा</strong> ने अपनी नई जिम्मेदारी, ट्रस्ट के सामने मौजूद चुनौतियों और दान चोरी से जुड़े विवाद पर पहली बार विस्तार से बात की है।</p>
<p>जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि भारतीय वायुसेना और नेशनल डिफेंस अकादमी में बिताए कुल 43 वर्षों ने उन्हें अनुशासन, ईमानदारी, कड़ी मेहनत और टीमवर्क सिखाया। अब वह इन्हीं मूल्यों को राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन में लागू करने का प्रयास करेंगे।</p>
<p>दान चोरी से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि अतीत की घटनाओं से सीखना जरूरी है, लेकिन अतीत को अपने ऊपर बोझ बनाकर आगे नहीं बढ़ा जा सकता।</p>
<h2>दान चोरी विवाद पर क्या बोले नए CEO?</h2>
<p>राम मंदिर ट्रस्ट में कथित दान चोरी से जुड़े मामले पर जितेंद्र मिश्रा ने कहा, <strong>“हमें अतीत से सबक सीखने की जरूरत है, लेकिन अतीत को अपने ऊपर बोझ नहीं बनने देना चाहिए।”</strong></p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट अब तक संस्था का संचालन अच्छी तरह करता आया है। वह टीम का हिस्सा बनकर व्यवस्थाओं को और बेहतर करने में अपना योगदान देंगे।</p>
<p>उनके बयान से संकेत मिलता है कि वह पिछली घटनाओं की समीक्षा के साथ भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर अधिक ध्यान देना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने जांच, आरोपियों या किसी संभावित प्रशासनिक कार्रवाई के बारे में कोई विशेष घोषणा नहीं की।</p>
<p><a class="decorated-link" href="https://www.hindustantimes.com/india-news/ram-temple-ceo-jeetendra-mishra-donation-theft-case-iaf-experience-operation-sindoor-need-to-learn-from-past-101788396828222.html?utm_source=chatgpt.com">हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू</a> में उन्होंने अपनी भावी कार्यशैली और सैन्य अनुभव पर विस्तार से बात की।</p>
<h2>‘भगवान राम को नहीं, देश और लोगों को मेरी सेवा की जरूरत’</h2>
<p>जितेंद्र मिश्रा से पूछा गया कि हजारों उम्मीदवारों के बीच उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए आवेदन क्यों किया। इस पर उन्होंने कहा कि उन्होंने भी दूसरे आवेदकों की तरह देश की सेवा करने के उद्देश्य से आवेदन किया था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भगवान राम को उनकी सेवा की आवश्यकता नहीं है, बल्कि देश और लोगों को उनकी सेवा की जरूरत है। उनके मुताबिक वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के कुछ ही महीनों बाद राम मंदिर और रामभक्तों की सेवा का अवसर मिलना उनके लिए बहुत बड़ा सौभाग्य है।</p>
<h2>17 वर्ष की उम्र से शुरू हुआ सेवा का सफर</h2>
<p>जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि 17 साल की उम्र से लेकर 60 साल तक उन्हें वर्दी में देश की सेवा करने का अवसर मिला। इसमें नेशनल डिफेंस अकादमी में बिताया गया समय भी शामिल है। इस हिसाब से उनका वर्दी से जुड़ा सफर लगभग 43 वर्ष का रहा।</p>
<p>हालांकि उनकी नियमित भारतीय वायुसेना सेवा करीब 39 वर्ष की बताई गई है। दोनों आंकड़ों में अंतर इसलिए है क्योंकि 43 वर्षों की अवधि में NDA का प्रशिक्षण काल भी शामिल किया गया है।</p>
<p>वायुसेना से सेवानिवृत्ति के कुछ ही महीनों बाद उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला CEO चुना गया।</p>
<h2>अकेले रणनीति नहीं बनाएंगे जितेंद्र मिश्रा</h2>
<p>नई जिम्मेदारी के लिए उनकी रणनीति के सवाल पर जितेंद्र मिश्रा ने स्पष्ट किया कि वह अकेले बैठकर कोई योजना नहीं बनाएंगे। उनके मुताबिक ट्रस्ट के मार्गदर्शन और पूरी टीम को साथ लेकर ही प्रभावी रणनीति तैयार की जा सकती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यदि टीम को साथ नहीं लिया गया और ट्रस्ट का मार्गदर्शन नहीं मिला तो कोई भी रणनीति आगे नहीं बढ़ पाएगी। इससे स्पष्ट है कि नए CEO प्रशासन में सामूहिक निर्णय और टीमवर्क को प्राथमिकता देना चाहते हैं।</p>
<p>उनके अनुसार प्रबंधन की बुनियादी प्रक्रियाएं लगभग सभी संस्थानों में समान होती हैं, लेकिन उन्हें संबंधित संस्था और जिम्मेदारी की आवश्यकताओं के मुताबिक ढालना पड़ता है।</p>
<h2>वायुसेना का अनुभव किस तरह आएगा काम?</h2>
<p>जितेंद्र मिश्रा ने अपनी सैन्य पृष्ठभूमि को नई जिम्मेदारी से जोड़ते हुए अनुशासन, मेहनत, ईमानदारी और टीमवर्क को सबसे महत्वपूर्ण बताया।</p>
<p>भारतीय वायुसेना में उन्हें बड़े सैन्य प्रतिष्ठानों, संवेदनशील अभियानों, संसाधनों, सुरक्षा व्यवस्था और अलग-अलग इकाइयों के बीच समन्वय का अनुभव रहा है। राम मंदिर ट्रस्ट में भी प्रतिदिन बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं, कर्मचारियों, सुरक्षा एजेंसियों और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की जरूरत होगी।</p>
<p>उनका सैन्य अनुभव इन क्षेत्रों में उपयोगी हो सकता है:</p>
<ul>
<li>मंदिर की दैनिक प्रशासनिक व्यवस्था</li>
<li>श्रद्धालुओं के प्रवेश और दर्शन का प्रबंधन</li>
<li>बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण</li>
<li>विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय</li>
<li>ट्रस्ट के कर्मचारियों और विभागों की जवाबदेही</li>
<li>दान एवं वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता</li>
<li>आपातकालीन परिस्थितियों के लिए कार्ययोजना</li>
</ul>
<h2>ऑपरेशन सिंदूर पर बोले—सफलता पूरी टीम की थी</h2>
<p>ऑपरेशन सिंदूर में अपनी भूमिका के बारे में जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि वह खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं कि जब देश को उनकी जरूरत थी, तब वह जिम्मेदारी निभाने के लिए उपलब्ध थे।</p>
<p>उन्होंने सफलता का श्रेय अकेले लेने के बजाय पश्चिमी वायु कमान, भारतीय वायुसेना, अपनी टीम और देश के नागरिकों को दिया। उनके मुताबिक कोई भी बड़ा अभियान व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरी टीम का प्रयास होता है।</p>
<p>ऑपरेशन सिंदूर के समय जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे। इस दौरान उन्होंने विमानों और एयर डिफेंस संसाधनों की तैनाती से जुड़े महत्वपूर्ण सैन्य निर्णयों की निगरानी की थी। उनके योगदान के लिए उन्हें <strong>सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल</strong> से सम्मानित किया गया। <a class="decorated-link" href="https://timesofindia.indiatimes.com/india/operation-sindoor-commander-air-marshal-jeetendra-mishra-selected-as-ram-temple-trusts-first-ceo/articleshow/133708449.cms?utm_source=chatgpt.com">टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट</a> में उनके सैन्य करियर और चयन प्रक्रिया का विवरण दिया गया है।</p>
<h2>5,585 आवेदनों में से हुआ चयन</h2>
<p>राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO पद के लिए कुल <strong>5,585 आवेदन</strong> मिले थे। तकनीक आधारित जांच और सत्यापन के बाद 16 उम्मीदवारों का चयन किया गया। इनके ऑनलाइन मूल्यांकन के बाद अयोध्या में आमने-सामने साक्षात्कार लिए गए।</p>
<p>अंतिम चरण में चयन समिति ने तीन उम्मीदवारों का पैनल ट्रस्ट के सामने प्रस्तुत किया। इनमें से जितेंद्र मिश्रा को CEO चुना गया।</p>
<p>चयन समिति में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावरे शामिल थे।</p>
<h2>कौन हैं जितेंद्र मिश्रा?</h2>
<p>जितेंद्र मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा गांव से आते हैं। उन्होंने वर्ष 1983 में नेशनल डिफेंस अकादमी में प्रवेश लिया और दिसंबर 1986 में लड़ाकू पायलट के रूप में भारतीय वायुसेना में कमीशन प्राप्त किया।</p>
<p>वह फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे हैं। उनके पास तीन हजार घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव बताया गया है। वह भारतीय वायुसेना और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में चीफ टेस्ट पायलट की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।</p>
<p>अपने सैन्य करियर में उन्होंने लड़ाकू स्क्वाड्रन, फ्रंटलाइन एयरबेस और एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट सहित कई महत्वपूर्ण संस्थानों की कमान संभाली।</p>
<h2>मां का आशीर्वाद लेने की कही बात</h2>
<p>नियुक्ति के बाद जश्न मनाने से जुड़े सवाल पर जितेंद्र मिश्रा ने भावुक जवाब दिया। उन्होंने बताया कि लगातार फोन आने के कारण वह खाली नहीं हो पा रहे थे और उनकी मां पिछले दो घंटे से उनका इंतजार कर रही थीं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि फोन से समय मिलते ही वह सबसे पहले अपनी मां का आशीर्वाद लेंगे। इंटरव्यू का यह हिस्सा उनके प्रशासनिक और सैन्य परिचय से अलग एक भावनात्मक पक्ष भी सामने लाता है।</p>
<h2>ट्रस्ट के सामने सबसे बड़ी चुनौती</h2>
<p>जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब ट्रस्ट की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्थाएं सार्वजनिक चर्चा में हैं। कथित दान चोरी प्रकरण के बाद व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना बड़ी चुनौती है।</p>
<p><a class="decorated-link" href="https://indianexpress.com/article/cities/lucknow/ram-temple-trust-ceo-selection-shortlist-3-candidates-donation-row-ayodhya-10859652/?utm_source=chatgpt.com">इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट</a> के अनुसार प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को भी शामिल किया गया है और प्रमुख पदों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं।</p>
<p>अब नए CEO की शक्तियां, रिपोर्टिंग व्यवस्था, सेवा शर्तें और कामकाज की मानक प्रक्रिया तय की जानी है। इसके बाद उनका पद पूरी तरह से प्रशासनिक रूप में सक्रिय होगा।</p>
<hr />
<h2>महत्वपूर्ण तथ्य</h2>
<ul>
<li>जितेंद्र मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO हैं।</li>
<li>उन्होंने NDA सहित 43 वर्ष वर्दी में बिताने की बात कही है।</li>
<li>उनकी नियमित वायुसेना सेवा करीब 39 वर्ष रही।</li>
<li>उन्होंने दान चोरी पर पिछली घटनाओं से सबक लेने की बात कही।</li>
<li>किसी व्यक्ति या जांच पर उन्होंने कोई नया आरोप नहीं लगाया।</li>
<li>उन्होंने टीमवर्क, अनुशासन और ईमानदारी को प्राथमिकता बताया।</li>
<li>वह ऑपरेशन सिंदूर के समय पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे।</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 11:54:50 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कौन हैं जितेंद्र मिश्रा? ऑपरेशन सिंदूर में संभाली वायुसेना की कमान, अब बने राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला पूर्णकालिक CEO नियुक्त किया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान संभाल चुके मिश्रा अब राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था और भविष्य की परियोजनाओं की जिम्मेदारी देखेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/https---chatgpt-com-c-6a97e946-ed34-83e8-9268-22168a0eafc1----text-alias-slug--who-2dis-2djeetendra-2dmishra-2dram-2dmandir-2dtrust-2dfirst-2dceo--category/article-1907"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/who-is-jeetendra-mishra-ram-mandir-trust-first-ceo.jpg.jpg" alt=""></a><br /><h2 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने जितेंद्र मिश्रा</h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/who-is-jeetendra-mishra-ram-mandir-trust-first-ceo.jpg.jpg" alt="who-is-jeetendra-mishra-ram-mandir-trust-first-ceo.jpg" width="1366" height="768"></img>
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान संभाल चुके जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक CEO बनाया गया है।

<p><strong>अयोध्या:</strong> श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO का चयन कर लिया है। ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल <strong>जितेंद्र मिश्रा</strong> को इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी है। ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम को स्वीकृति मिलने के बाद नियुक्ति की घोषणा की गई।</p>
<p>जितेंद्र मिश्रा का नाम सामने आने के बाद लोगों के मन में सवाल है कि वह कौन हैं और उन्हें देश के सबसे प्रमुख धार्मिक ट्रस्टों में शामिल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों दी गई है।</p>
<p>दरअसल, जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं। उन्होंने अपने लंबे सैन्य करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और बड़े सैन्य अभियानों एवं रणनीतिक जिम्मेदारियों को संभाला। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका ने भी उन्हें विशेष पहचान दिलाई।</p>
<h2>कौन हैं जितेंद्र मिश्रा?</h2>
<p>जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड एयर मार्शल हैं। उन्होंने लगभग चार दशक तक वायुसेना में सेवा दी। अपने सैन्य करियर में वह विभिन्न परिचालन, प्रशासनिक और रणनीतिक पदों पर तैनात रहे।</p>
<p>वह भारतीय वायुसेना की <strong>पश्चिमी वायु कमान</strong> के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रहे। पश्चिमी वायु कमान को देश की पश्चिमी सीमा और उससे जुड़े संवेदनशील हवाई क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली प्रमुख कमानों में गिना जाता है।</p>
<p>अपनी सेवा के दौरान जितेंद्र मिश्रा ने सुरक्षा प्रबंधन, रणनीतिक योजना, संसाधनों के संचालन और बड़े संगठनों के नेतृत्व का व्यापक अनुभव हासिल किया। यही अनुभव राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के चयन में उनकी बड़ी ताकत माना गया।</p>
<h2>ऑपरेशन सिंदूर से क्या रहा संबंध?</h2>
<p>रिपोर्टों के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व कर रहे थे। संवेदनशील सैन्य अभियान में पश्चिमी सीमा से जुड़े हवाई क्षेत्र की सुरक्षा और वायुसेना के संचालन में इस कमान की अहम भूमिका रही।</p>
<p>ऑपरेशन सिंदूर जैसे महत्वपूर्ण अभियान के दौरान बड़ी जिम्मेदारी संभालने के कारण जितेंद्र मिश्रा की पहचान एक अनुशासित और रणनीतिक सैन्य अधिकारी के रूप में बनी। माना जा रहा है कि ट्रस्ट ने उनकी नेतृत्व क्षमता, प्रशासनिक अनुभव और बड़े अभियानों के संचालन की योग्यता को देखते हुए उन्हें CEO पद के लिए चुना है।</p>
<h2>5,585 लोगों ने किया था आवेदन</h2>
<p>राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO पद के लिए देशभर से कुल <strong>5,585 आवेदन</strong> प्राप्त हुए थे। आवेदनों की प्रारंभिक जांच के बाद योग्य उम्मीदवारों को अलग-अलग चरणों में परखा गया।</p>
<p>इस पूरी प्रक्रिया के बाद केवल 16 उम्मीदवारों को विस्तृत संवाद और साक्षात्कार के लिए चुना गया। चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों की नेतृत्व क्षमता, प्रशासनिक अनुभव, ईमानदारी, संस्थागत प्रबंधन और भविष्य की कार्ययोजना को परखा गया।</p>
<p>इन 16 उम्मीदवारों के साथ पहले ऑनलाइन बातचीत की गई और बाद में अयोध्या में आमने-सामने साक्षात्कार आयोजित हुए। विस्तृत मूल्यांकन के बाद चयन समिति ने तीन नामों का अंतिम पैनल ट्रस्ट को सौंपा। इसके बाद ट्रस्ट ने जितेंद्र मिश्रा के नाम को मंजूरी दी।</p>
<p><a class="decorated-link" href="https://indianexpress.com/article/cities/lucknow/ram-temple-trust-ceo-selection-shortlist-3-candidates-donation-row-ayodhya-10859652/?utm_source=chatgpt.com">इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट</a> के अनुसार ट्रस्ट ने जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला CEO नियुक्त किया है।</p>
<h2>किस समिति ने किया चयन?</h2>
<p>CEO के चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश <strong>जस्टिस प्रमोद कोहली</strong>, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल <strong>विष्णुकांत चतुर्वेदी</strong> और परमाणु वैज्ञानिक एवं शिरडी साईंबाबा संस्थान के पूर्व अध्यक्ष <strong>सुरेश हावरे</strong> शामिल थे।</p>
<p>समिति ने आवेदकों के अनुभव और योग्यता के आधार पर विस्तृत मूल्यांकन किया। ट्रस्ट के मुताबिक चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने का प्रयास किया गया।</p>
<h2>राजेश पांडेय के नाम की क्यों हुई थी चर्चा?</h2>
<p>राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए उत्तर प्रदेश के पूर्व IPS अधिकारी <strong>राजेश पांडेय</strong> का नाम भी प्रमुख दावेदारों में शामिल था। उनके लंबे पुलिस और प्रशासनिक अनुभव के कारण अंतिम घोषणा से पहले कई रिपोर्टों में उनके नाम की चर्चा हुई।</p>
<p>राजेश पांडेय उत्तर प्रदेश पुलिस में कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवा दे चुके हैं। वह यूपी STF और ATS से भी जुड़े रहे तथा उन्हें संगठित अपराध और आतंकवाद के खिलाफ अभियानों में काम करने के लिए जाना जाता है।</p>
<p>उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही थी, लेकिन अंतिम निर्णय में ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को चुना। इसलिए राजेश पांडेय को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO बताने वाली जानकारी सही नहीं है।</p>
<h2>CEO को कौन-कौन सी जिम्मेदारियां मिलेंगी?</h2>
<p>राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO के रूप में जितेंद्र मिश्रा के सामने कई बड़ी जिम्मेदारियां होंगी। उनका कार्य केवल मंदिर की दैनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा।</p>
<p>उन्हें ट्रस्ट के अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बैठाने के साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं, वित्तीय व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन और भविष्य की परियोजनाओं की निगरानी भी करनी होगी।</p>
<p>उनकी प्रमुख जिम्मेदारियां इस प्रकार हो सकती हैं:</p>
<ul>
<li>राम मंदिर और ट्रस्ट का पेशेवर प्रशासन</li>
<li>श्रद्धालुओं की सुविधाओं की निगरानी</li>
<li>भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा एजेंसियों से समन्वय</li>
<li>दान एवं चढ़ावे की व्यवस्था में पारदर्शिता</li>
<li>मंदिर परिसर की विकास परियोजनाओं की निगरानी</li>
<li>कर्मचारियों और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल</li>
<li>बड़े धार्मिक आयोजनों की कार्ययोजना तैयार करना</li>
<li>आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की व्यवस्था</li>
<li>धार्मिक परंपराओं और आधुनिक प्रबंधन के बीच संतुलन</li>
</ul>
<h2>नियुक्ति क्यों मानी जा रही महत्वपूर्ण?</h2>
<p>राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं। विशेष पर्वों और धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में मंदिर की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, दर्शन व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का प्रबंधन बड़ी चुनौती बन गया है।</p>
<p>राम मंदिर से जुड़ी निर्माण एवं विकास परियोजनाएं भी आगे बढ़ रही हैं। इन सभी कार्यों की निगरानी के लिए एक ऐसे पूर्णकालिक अधिकारी की जरूरत महसूस की जा रही थी, जिसके पास बड़े संस्थान और संवेदनशील व्यवस्थाएं संभालने का अनुभव हो।</p>
<p>माना जा रहा है कि एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का सैन्य अनुशासन, रणनीतिक सोच और प्रशासनिक अनुभव राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद करेगा।</p>
<h2>ट्रस्ट में तीन नए सदस्य भी शामिल</h2>
<p>CEO की नियुक्ति के साथ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को शामिल करने की खबर भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक अधिवक्ता <strong>मदन मोहन पांडेय</strong>, सामाजिक कार्यों से जुड़े <strong>महेश भगचंदका</strong> और <strong>निर्मल यादव</strong> को ट्रस्ट में स्थान दिया गया है।</p>
<p>मदन मोहन पांडेय राम जन्मभूमि से जुड़े कानूनी मामलों में सक्रिय रहे हैं। वहीं महेश भगचंदका का नाम धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा बताया गया है।</p>
<h2>सैन्य कमान के बाद धार्मिक संस्था की जिम्मेदारी</h2>
<p>भारतीय वायुसेना में बड़े सैन्य अभियानों और संवेदनशील कमान को संभालने के बाद जितेंद्र मिश्रा अब एक प्रमुख धार्मिक संस्था के प्रशासन का नेतृत्व करेंगे।</p>
<p>सैन्य संगठन और धार्मिक ट्रस्ट की कार्यप्रणाली अलग-अलग होती है। इसलिए उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने प्रशासनिक अनुभव को मंदिर की धार्मिक परंपराओं, श्रद्धालुओं की भावनाओं और ट्रस्ट की व्यवस्था के अनुरूप लागू करने की होगी।</p>
<p>उनकी नियुक्ति के साथ राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि वह मंदिर प्रबंधन, सुरक्षा, वित्तीय पारदर्शिता और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में क्या बदलाव करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 17:49:59 +0530</pubDate>
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