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                <title>EPF ESI - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <description>EPF ESI RSS Feed</description>
                
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                <title>यूपी के आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी राहत: ₹20 हजार न्यूनतम मानदेय, अब कंपनी नहीं काट सकेगी वेतन</title>
                                    <description><![CDATA[योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नई व्यवस्था लागू की है। कर्मचारियों को कम से कम ₹20 हजार मासिक मानदेय देने, वेतन सीधे बैंक खाते में भेजने और एजेंसियों की मनमानी कटौती रोकने की बात कही गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/up-outsourced-employees-salary-hike-upcos-yogi-adityanath/article-1904"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/up-outsourced-employees-salary-hike-cm-yogi-upcos.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h2 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">उत्तर प्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नई व्यवस्था</h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/up-outsourced-employees-salary-hike-cm-yogi-upcos.jpg2.jpg" alt="up-outsourced-employees-salary-hike-cm-yogi-upcos.jpg" width="1366" height="768"></img>
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का शुभारंभ करते हुए कर्मचारियों के मानदेय और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी नई व्यवस्था की जानकारी दी।

<p><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश के लाखों आउटसोर्स कर्मचारियों को योगी सरकार ने बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में <strong>उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम</strong> के पोर्टल और लोगो का शुभारंभ करते हुए कर्मचारियों के मानदेय, वेतन भुगतान और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी नई व्यवस्था की जानकारी दी।</p>
<p>नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य आउटसोर्सिंग कंपनियों और बिचौलियों की मनमानी रोकना है। सरकार का कहना है कि कर्मचारियों को उनकी मेहनत के अनुरूप पूरा मानदेय मिलेगा और एजेंसियां वेतन से मनमानी कटौती नहीं कर सकेंगी।</p>
<p>कर्मचारियों का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जाएगा। इसके साथ EPF, ESI और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ भी समय पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। <a class="decorated-link" href="https://www.jagran.com/uttar-pradesh/lucknow-city-cm-yogi-adityanath-doubled-the-honorarium-of-outsourced-employees-companies-will-not-be-able-to-deduct-their-wages-40359828.html?utm_source=chatgpt.com">दैनिक जागरण की रिपोर्ट</a></p>
<h2>न्यूनतम मानदेय ₹20 हजार करने की बात</h2>
<p>कार्यक्रम में बताया गया कि नई व्यवस्था के अंतर्गत आउटसोर्स कर्मचारियों को कम से कम <strong>₹20 हजार प्रतिमाह मानदेय</strong> मिलेगा। जिम्मेदारी, पद और कार्य की प्रकृति के अनुसार कुछ कर्मचारियों का मानदेय ₹40 हजार प्रतिमाह तक हो सकता है।</p>
<p>पहले कई कर्मचारियों को ₹7 हजार से ₹13 हजार तक भुगतान मिलने की शिकायतें सामने आती थीं। नई व्यवस्था में ₹20 हजार का न्यूनतम मानदेय मिलने पर ऐसे कर्मचारियों की आय में बड़ी वृद्धि होगी। इसी आधार पर इसे मानदेय में “करीब दोगुनी बढ़ोतरी” कहा जा रहा है।</p>
<p>हालांकि प्रत्येक कर्मचारी का पुराना वेतन अलग-अलग था। इसलिए सभी आउटसोर्स कर्मचारियों का मानदेय ठीक दोगुना हो जाएगा, ऐसा समझना सही नहीं होगा।</p>
<h2>कंपनियां नहीं कर सकेंगी मनमानी कटौती</h2>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले सरकार की तरफ से कर्मचारी के लिए एक निश्चित रकम भेजी जाती थी, लेकिन कई बार संबंधित आउटसोर्स कंपनी या एजेंसी कर्मचारी को पूरी रकम नहीं देती थी।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि किसी कर्मचारी का मानदेय कागजों में ₹9 हजार होता था, लेकिन उसे केवल ₹6 हजार मिलते थे। बाकी रकम कहां जाती थी, इसका स्पष्ट जवाब नहीं मिलता था।</p>
<p>नई व्यवस्था के तहत सरकार और कर्मचारी के बीच से इस तरह की मनमानी को हटाने का प्रयास किया गया है। कर्मचारी का निर्धारित मानदेय सीधे उसके बैंक खाते में भेजा जाएगा, जिससे सेवा प्रदाता कंपनी के लिए उसमें कटौती करना मुश्किल होगा।</p>
<h2>हर महीने समय पर मिलेगा वेतन</h2>
<p>उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के अंतर्गत कर्मचारियों को हर महीने की निर्धारित तारीख तक वेतन भुगतान सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।</p>
<p>पहले आउटसोर्स कर्मचारियों की एक बड़ी शिकायत यह भी थी कि कई एजेंसियां समय पर वेतन नहीं देती थीं। कुछ मामलों में कर्मचारियों का भुगतान कई महीनों तक लंबित रहने की शिकायत सामने आती थी।</p>
<p>नई व्यवस्था में कर्मचारी के बैंक खाते में सीधे भुगतान किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच कर्मचारियों का मानदेय उनके खाते में पहुंच जाए।</p>
<h2>EPF और ESI का लाभ भी मिलेगा</h2>
<p>आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय से संबंधित नई व्यवस्था केवल मासिक भुगतान तक सीमित नहीं है। कर्मचारियों को EPF और ESI सहित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाने की भी बात कही गई है।</p>
<p>कंपनियों को कर्मचारी का EPF अंशदान समय पर जमा करना होगा। स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा के लिए पात्र कर्मचारियों को ESI अथवा निर्धारित स्वास्थ्य योजना से जोड़ा जाएगा।</p>
<p>सरकार डिजिटल माध्यम से इसकी निगरानी करेगी, ताकि किसी कर्मचारी के नाम पर कटौती होने के बाद पैसा संबंधित खाते में जमा न करने जैसी अनियमितता रोकी जा सके।</p>
<h2>बिना कारण नौकरी से नहीं निकाल सकेगी एजेंसी</h2>
<p>नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी से हटाने की प्रक्रिया भी पहले से अधिक पारदर्शी बनाने की बात कही गई है।</p>
<p>अब कोई आउटसोर्स कंपनी किसी कर्मचारी को मनमाने तरीके से सेवा से बाहर नहीं कर सकेगी। कर्मचारी को हटाने से पहले उसके खिलाफ शिकायत या कार्य से संबंधित रिपोर्ट संबंधित विभाग और निगम को देनी होगी।</p>
<p>मामले की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकेगी। इससे कर्मचारियों पर नौकरी जाने का लगातार बना रहने वाला डर कम होने की उम्मीद है।</p>
<p>हालांकि आउटसोर्स कर्मचारी नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं माने जाएंगे। उन्हें मिलने वाली सेवा सुरक्षा और सुविधाएं निगम की नियमावली तथा अनुबंध की शर्तों के अनुसार निर्धारित होंगी।</p>
<h2>पहले से काम कर रहे कर्मचारियों का क्या होगा?</h2>
<p>सरकार ने संकेत दिया है कि विभिन्न विभागों में पहले से कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को केवल नई व्यवस्था लागू होने के कारण हटाया नहीं जाएगा।</p>
<p>उनकी सेवाओं को निर्धारित शर्तों के अनुसार उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम की व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। पुरानी एजेंसी का टेंडर समाप्त होने पर भी योग्य और कार्यरत कर्मचारी की सेवा जारी रखने को प्राथमिकता दी जा सकती है।</p>
<p>कर्मचारियों का रिकॉर्ड एक डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा। इसमें नियुक्ति, विभाग, कार्य अनुभव, मानदेय, EPF और प्रदर्शन से संबंधित जानकारी दर्ज की जा सकती है।</p>
<h2>भर्ती में आरक्षण और पारदर्शिता</h2>
<p>उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के माध्यम से होने वाली नई भर्तियों में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने का दावा किया गया है। सेवा प्रदाता एजेंसियों का चयन GeM पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा।</p>
<p>नई भर्तियों में आरक्षण के निर्धारित प्रावधान लागू किए जाने की भी बात कही गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को नियमानुसार अवसर दिया जाएगा।</p>
<p>उम्मीदवारों का चयन उनकी योग्यता, कौशल, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार जैसी निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से किया जा सकता है।</p>
<p>यदि कोई एजेंसी नौकरी दिलाने के नाम पर उम्मीदवारों से पैसे मांगती है या अवैध वसूली करती है तो उसे ब्लैकलिस्ट करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होगा।</p>
<h2>महिलाओं को मिलेंगी विशेष सुविधाएं</h2>
<p>नई व्यवस्था में महिला आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश और कार्यस्थल पर सुरक्षा जैसे प्रावधान शामिल किए जाने की बात कही गई है।</p>
<p>महिलाओं को उनके कार्यस्थल के नजदीक तैनाती देने और जरूरी स्थिति में अवकाश उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। आरक्षण के नियमों के अनुसार महिला उम्मीदवारों को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा।</p>
<p>सरकार का दावा है कि इससे महिलाओं को आउटसोर्स सेवाओं में सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण मिल सकेगा।</p>
<h2>हर पांच साल में मानदेय की समीक्षा</h2>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय की नियमित समीक्षा करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया।</p>
<p>सरकार के अनुसार हर पांच वर्ष में कर्मचारियों के मानदेय का पुनरीक्षण किया जाएगा। इससे महंगाई और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार वेतन में बदलाव का रास्ता खुला रहेगा।</p>
<p>हालांकि समीक्षा का अर्थ हर पांच वर्ष में अपने आप निश्चित बढ़ोतरी होना नहीं है। नई दरों का निर्धारण उस समय की सरकारी नीति और निगम के नियमों के अनुसार किया जाएगा।</p>
<h2>कितने कर्मचारियों को मिलेगा लाभ?</h2>
<p>प्रदेश सरकार के अलग-अलग विभागों और संस्थाओं में लाखों कर्मचारी आउटसोर्स व्यवस्था के अंतर्गत काम कर रहे हैं। प्रारंभिक तौर पर करीब <strong>3.5 लाख कर्मचारियों</strong> को नई व्यवस्था से जोड़ने की बात सामने आई है।</p>
<p>अन्य रिपोर्टों में आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या इससे अधिक भी बताई गई है। यह अंतर इसलिए हो सकता है क्योंकि कुछ आंकड़ों में केवल सरकारी विभागों के मौजूदा आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं, जबकि अन्य में निकायों, निगमों और दूसरे संस्थानों में तैनात कर्मचारी भी जोड़े गए हैं।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारी के साथ उसके परिवार को मिलाकर इस व्यवस्था से लगभग 20 लाख लोगों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलने का लक्ष्य है।</p>
<h2>नियमित कर्मचारी नहीं होंगे आउटसोर्स कर्मी</h2>
<p>नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी आउटसोर्स कर्मचारी स्थायी अथवा नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं बनेंगे। उनकी नियुक्ति अनुबंध के आधार पर ही रहेगी।</p>
<p>उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का उद्देश्य भर्ती, भुगतान और कर्मचारी कल्याण की प्रक्रिया को नियंत्रित और पारदर्शी बनाना है। इसका अर्थ सरकारी सेवा में नियमितीकरण या स्थायी नियुक्ति नहीं है।</p>
<p>इस अंतर को समझना जरूरी है, क्योंकि सोशल मीडिया पर नई व्यवस्था को कभी-कभी आउटसोर्स कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी बनाए जाने के रूप में भी प्रस्तुत किया जा सकता है।</p>
<h2>आउटसोर्स सेवा निगम की जरूरत क्यों पड़ी?</h2>
<p>उत्तर प्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारी लंबे समय से कम मानदेय, देरी से वेतन, EPF जमा नहीं होने, एजेंसियों की कटौती और बिना कारण नौकरी से हटाए जाने जैसी शिकायतें करते रहे हैं।</p>
<p>विभागों द्वारा अलग-अलग एजेंसियों का चयन करने के कारण पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था नहीं थी। एक ही तरह का काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं में भी अंतर देखने को मिलता था।</p>
<p>इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम की स्थापना की। निगम सरकारी विभागों, सेवा प्रदाता एजेंसियों और कर्मचारियों को एक केंद्रीय डिजिटल व्यवस्था से जोड़ेगा।</p>
<h2>कर्मचारियों को क्या-क्या लाभ मिल सकता है?</h2>
<p>नई व्यवस्था के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:</p>
<ul>
<li>कम से कम ₹20 हजार मासिक मानदेय देने की व्यवस्था।</li>
<li>पद और जिम्मेदारी के अनुसार ₹40 हजार तक मानदेय।</li>
<li>वेतन का सीधे बैंक खाते में भुगतान।</li>
<li>एजेंसी द्वारा मनमानी कटौती पर रोक।</li>
<li>समय पर EPF और ESI जमा कराने की व्यवस्था।</li>
<li>बिना जांच कर्मचारी को नौकरी से हटाने पर रोक।</li>
<li>पारदर्शी और आरक्षण आधारित भर्ती प्रक्रिया।</li>
<li>महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश।</li>
<li>कर्मचारियों के कौशल विकास और प्रशिक्षण की व्यवस्था।</li>
<li>हर पांच वर्ष में मानदेय की समीक्षा।</li>
</ul>
<h2>क्या बदल जाएगी आउटसोर्स कर्मचारियों की स्थिति?</h2>
<p>उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषित नियमों को जमीन पर कितनी सख्ती से लागू किया जाता है।</p>
<p>यदि वेतन सीधे खाते में समय पर पहुंचता है, EPF-ESI नियमित जमा होता है और एजेंसियों की कटौती रुकती है तो यह प्रदेश के लाखों आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।</p>
<p>लेकिन सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नई व्यवस्था के नाम पर पहले से काम कर रहे कर्मचारियों की छंटनी न हो और सेवा प्रदाता कंपनियां नियमों को दरकिनार न कर सकें।</p>
<p>अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई व्यवस्था की घोषणा के बाद कर्मचारियों को बढ़ा हुआ मानदेय वास्तव में किस तारीख से मिलना शुरू होगा और इसके दायरे में कौन-कौन से विभाग आएंगे।</p>
<p><strong>क्या सरकार की यह व्यवस्था आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण रोक पाएगी? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 16:50:29 +0530</pubDate>
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