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                <title>Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <description>RSS Feed of Pratyakshdarshi Samachar</description>
                
                            <item>
                <title>पूर्ण राज्य के प्रस्ताव पर J&amp;K विधानसभा में बवाल, BJP विधायक को मार्शलों ने निकाला; उमर बोले- सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष और BJP आमने-सामने आ गए। भाजपा ने प्रस्ताव में वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव का जिक्र किए जाने का विरोध किया। हंगामा बढ़ने पर BJP विधायक विक्रम रंधावा को सदन से बाहर निकाला गया और कार्यवाही सोमवार तक स्थगित कर दी गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/ruckus-in-jk-assembly-over-the-proposal-of-full-statehood/article-2197"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/jk-assembly-statehood-omar-abdullah-bjp-vikram-randhawa-2026.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h2><span><strong>स्टेटहुड प्रस्ताव पर भिड़े सत्ता पक्ष और BJP, 2000 के जिक्र से बढ़ा विवाद </strong></span></h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/jk-assembly-statehood-omar-abdullah-bjp-vikram-randhawa-2026.jpg2.jpg" alt="jk-assembly-statehood-omar-abdullah-bjp-vikram-randhawa-2026.jpg2" width="1366" height="768"/>
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य बहाली के प्रस्ताव पर हुए हंगामे के बीच BJP विधायक विक्रम रंधावा को मार्शलों ने सदन से बाहर निकाला।

<p><span><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></span></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य दर्जा तत्काल बहाल करने का प्रस्ताव पेश किया</strong></li>
<li><strong>प्रस्ताव में 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 के पुराने प्रस्तावों का जिक्र</strong></li>
<li><strong>2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ पर BJP ने जताई आपत्ति</strong></li>
<li><strong>BJP विधायकों ने प्रस्ताव की प्रतियां फाड़ीं और सदन के वेल में पहुंचे</strong></li>
<li><strong>हंगामे के बीच BJP विधायक विक्रम रंधावा को बाहर निकाला गया</strong></li>
<li><strong>सदन की कार्यवाही सोमवार तक स्थगित</strong></li>
</ul>
<h6><strong>श्रीनगर।</strong> जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सदन में एक प्रस्ताव पेश कर केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की। प्रस्ताव सामने आते ही BJP विधायकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।</h6>
<h6>विवाद राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग से ज्यादा प्रस्ताव में शामिल एक पुराने संदर्भ को लेकर बढ़ा। प्रस्ताव में 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पारित प्रस्तावों का उल्लेख किया गया था। BJP ने खास तौर पर वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के जिक्र पर आपत्ति जताई।</h6>
<h2><span><strong>BJP ने प्रस्ताव का विरोध क्यों किया?</strong></span></h2>
<h6>वर्ष 2000 में तत्कालीन फारूक अब्दुल्ला सरकार के दौरान जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने अधिक स्वायत्तता की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था। शुक्रवार को उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश नए प्रस्ताव में उसी पुराने प्रस्ताव का उल्लेख किए जाने पर BJP विधायकों ने विरोध किया।</h6>
<h6>BJP विधायकों का कहना था कि वे सदन में स्वायत्तता के मुद्दे पर चर्चा नहीं होने देंगे। इसके बाद पार्टी के विधायक अपनी सीटों से उठकर नारेबाजी करने लगे और कुछ सदस्यों ने प्रस्ताव की प्रतियां भी फाड़ दीं।</h6>
<h6>यह भी महत्वपूर्ण है कि BJP का तत्काल विरोध प्रस्ताव में <strong>2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ</strong> को लेकर था; इसे केवल पूर्ण राज्य की मांग के विरोध के रूप में पेश करना पूरी तस्वीर नहीं होगी।</h6>
<h2><span><strong>हंगामे के बीच विक्रम रंधावा को सदन से बाहर निकाला</strong></span></h2>
<h6>विरोध बढ़ने के बाद BJP विधायक सदन के वेल में पहुंचे और नारेबाजी जारी रही। सत्ता पक्ष की ओर से भी जवाबी नारे लगाए गए, जिससे सदन का माहौल और गरमा गया।</h6>
<h6>हंगामे के दौरान BJP विधायक विक्रम रंधावा को मार्शलों ने सदन से बाहर निकाला। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक रंधावा आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद उन्हें बाहर ले जाया गया। लगातार हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।</h6>
<h2><span><strong>उमर अब्दुल्ला ने BJP को क्या जवाब दिया?</strong></span></h2>
<h6>विरोध के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी मांग उनकी पार्टी या सरकार के लिए नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की है। उन्होंने BJP नेताओं की ओर से लगाए गए राष्ट्र-विरोधी होने के आरोपों का भी जवाब दिया।</h6>
<h6>उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने देश के लिए कई बलिदान दिए हैं और उन्हें BJP से किसी तरह के “सर्टिफिकेट” की जरूरत नहीं है। यह प्रतिक्रिया BJP सदस्यों की ओर से नेशनल कॉन्फ्रेंस पर लगाए गए आरोपों के जवाब में आई।</h6>
<h2><span><strong>प्रस्ताव में आखिर लिखा क्या है?</strong></span></h2>
<h6>मुख्यमंत्री की ओर से पेश प्रस्ताव में कहा गया है कि 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को सदन द्वारा पारित प्रस्तावों के अतिरिक्त विधानसभा भारत सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग करती है और इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय करती है।</h6>
<h6>उमर अब्दुल्ला ने सदन में कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों से परिसीमन, चुनाव और उसके बाद राज्य का दर्जा बहाल करने की तीन चरणों वाली प्रक्रिया का वादा किया गया था। उन्होंने कहा कि परिसीमन और विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, इसलिए अब राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए। यह मुख्यमंत्री का पक्ष है।</h6>
<h2><span><strong>कांग्रेस, PDP और AAP का क्या रुख रहा?</strong></span></h2>
<h6>द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ कांग्रेस सदस्यों ने भी प्रस्ताव का स्वागत किया। PDP के सदस्यों और सदन में AAP के एकमात्र विधायक ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया।</h6>
<h6>दूसरी तरफ BJP ने स्पष्ट किया कि उसकी आपत्ति प्रस्ताव में 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव को शामिल किए जाने पर है। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नारेबाजी हुई।</h6>
<h2><span><strong>2000 और 2024 के प्रस्ताव क्यों बने विवाद का कारण?</strong></span></h2>
<h6>26 जून 2000 को फारूक अब्दुल्ला सरकार के समय जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने अधिक स्वायत्तता से जुड़ा प्रस्ताव पारित किया था। शुक्रवार के प्रस्ताव में इसका उल्लेख होने के कारण BJP ने इसे स्वीकार करने से इनकार किया।</h6>
<h6>वहीं 6 नवंबर 2024 के प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली से जुड़ी मांग की गई थी। शुक्रवार के नए प्रस्ताव में दोनों पुराने प्रस्तावों का संदर्भ शामिल किया गया।</h6>
<h2><span><strong>अब आगे क्या होगा?</strong></span></h2>
<h6>शुक्रवार को भारी हंगामे के कारण प्रस्ताव पर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार प्रस्ताव को सोमवार को मतदान के लिए रखे जाने की संभावना है। वहीं विधानसभा की कार्यवाही भी सोमवार तक स्थगित कर दी गई है।</h6>
<h6>ऐसे में अब नजर सोमवार की कार्यवाही पर रहेगी—क्या प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान हो पाएगा, और 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ को लेकर सत्ता पक्ष और BJP के बीच गतिरोध किस दिशा में जाता है।</h6>
<h6><strong>जम्मू-कश्मीर विधानसभा का विवाद केवल पूर्ण राज्य की मांग तक सीमित नहीं रहा। असली टकराव नए प्रस्ताव में वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव का संदर्भ जोड़ने पर हुआ। उमर अब्दुल्ला इसे जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकार से जोड़ रहे हैं, जबकि BJP उस पुराने स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ का विरोध कर रही है। अब सोमवार की कार्यवाही तय करेगी कि यह प्रस्ताव आगे किस रूप में बढ़ता है।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 18:47:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CEC के खिलाफ प्रदर्शन से पहले AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लेने का दावा, दिल्ली पुलिस पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का दावा सामने आया है। नेहा बोरा ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। हालांकि उनकी हिरासत और उसके कारण को लेकर दिल्ली पुलिस की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/neha-bora-detained-claim-delhi-police-gyanesh-kumar-jantar-mantar-protest/article-2196"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/neha-bora-delhi-police-jantar-mantar-protest-2026.jpg.jpg" alt=""></a><br /><h2><span><strong>जंतर-मंतर पर होना था प्रदर्शन, उससे पहले नेहा बोरा को ले जाने का दावा</strong></span></h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/neha-bora-delhi-police-jantar-mantar-protest-2026.jpg.jpg" alt="neha-bora-delhi-police-jantar-mantar-protest-2026.jpg" width="1366" height="768"/>
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का दावा सामने आया है।

<p><span><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></span></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस द्वारा ले जाए जाने का सोशल मीडिया पर दावा</strong></li>
<li><strong>CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का किया था ऐलान</strong></li>
<li><strong>CJP भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दे चुकी है</strong></li>
<li><strong>संगठन ने चेतावनी दी थी कि इस्तीफा नहीं हुआ तो ‘Jantar Mantar 2.0’ आंदोलन होगा</strong></li>
<li><strong>हिरासत की वजह और कानूनी आधार पर दिल्ली पुलिस का आधिकारिक बयान फिलहाल उपलब्ध नहीं</strong></li>
</ul>
<h6>नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बढ़ते विरोध के बीच AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का दावा सामने आया है। सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे पोस्ट में कहा गया है कि पुलिस ने उन्हें उनके घर से अपने साथ लिया।</h6>
<h6>यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब नेहा बोरा ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। <em>द टेलीग्राफ</em> ने भी 25 सितंबर को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में बताया कि AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने शुक्रवार के लिए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की घोषणा की थी।</h6>
<h6>हालांकि खबर लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस की ओर से इस कथित हिरासत के कारण, स्थान या कानूनी आधार को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं था। इसलिए इसे फिलहाल सोशल मीडिया पर सामने आए दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।</h6>
<h2><span><strong>नेहा बोरा ने क्यों किया था प्रदर्शन का ऐलान?</strong></span></h2>
<h6>चुनाव आयोग और SIR को लेकर जारी विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज हुई है।</h6>
<h6>इसी क्रम में नेहा बोरा ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। इससे पहले Cockroach Janta Party यानी CJP ने भी ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने की मांग करते हुए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी थी। CJP ने कहा था कि मांग पूरी नहीं होने पर ‘Jantar Mantar 2.0’ आयोजित किया जाएगा।</h6>
<h2><span><strong>हिरासत को लेकर सोशल मीडिया पर क्या दावा किया गया?</strong></span></h2>
<h6>सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस उनके घर से लेकर गई।</h6>
<h6>पोस्ट में इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे प्रस्तावित आंदोलन से भी जोड़ा गया है। हालांकि ऐसा कोई स्वतंत्र प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि अगर नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया, तो उसकी वजह ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन ही था।</h6>
<h6>यही वजह है कि पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।</h6>
<h2><span><strong>क्या इसे ‘अवैध हिरासत’ कहा जा सकता है?</strong></span></h2>
<h6>सोशल मीडिया पोस्ट में कार्रवाई को लेकर ‘अवैध हिरासत’ का सवाल उठाया गया है, लेकिन केवल पोस्ट के आधार पर ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।</h6>
<h6>यह जानना जरूरी है कि पुलिस ने नेहा बोरा को किस कानूनी प्रावधान के तहत रोका या हिरासत में लिया, क्या उन्हें कोई नोटिस दिया गया था और उन्हें कहां ले जाया गया।</h6>
<h6>इन तथ्यों के सामने आने के बाद ही हिरासत की वैधता पर कोई कानूनी निष्कर्ष निकाला जा सकता है।</h6>
<h2><span><strong>कौन हैं नेहा बोरा?</strong></span></h2>
<h6>नेहा बोरा All India Students’ Association यानी AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की शोधार्थी हैं। हाल के महीनों में वह छात्र आंदोलनों का एक प्रमुख चेहरा बनकर सामने आई हैं।</h6>
<h6>जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान उन्होंने करीब 23 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। बाद में भी वह परीक्षा, भर्ती और छात्र आंदोलनों से जुड़े कई प्रदर्शनों में सक्रिय रही हैं।</h6>
<h2><span><strong>CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्यों बढ़ा विरोध?</strong></span></h2>
<h6>विवाद उस रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के विभिन्न फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं।</h6>
<h6>CJP ने इसी विवाद के बीच ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच और कुछ अन्य मांगों को लेकर अभियान शुरू किया है। संगठन ने 48 घंटे में इस्तीफा नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।</h6>
<h6>चुनाव आयोग का पक्ष है कि किसी बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।</h6>
<h2><span><strong>अब दिल्ली पुलिस के जवाब का इंतजार</strong></span></h2>
<h6>फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि नेहा बोरा को वास्तव में हिरासत में लिया गया है या नहीं और अगर लिया गया है तो किस आधार पर।</h6>
<h6>जब तक दिल्ली पुलिस या AISA की ओर से हिरासत के समय, कारण और मौजूदा स्थिति की विस्तृत जानकारी नहीं आती, तब तक सोशल मीडिया पर किए जा रहे बड़े दावों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।</h6>
<h6><strong>CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से ठीक पहले नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने का दावा इस मामले को और संवेदनशील बनाता है। लेकिन सबसे जरूरी तथ्य अभी सामने आना बाकी है—दिल्ली पुलिस ने उन्हें किस आधार पर और किन परिस्थितियों में अपने साथ लिया। पुलिस की आधिकारिक जानकारी आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 18:31:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>SIR विवाद पर चिराग के बाद उपेंद्र कुशवाहा भी बोले- जनता में कंफ्यूजन है, चुनाव आयोग तुरंत सफाई दे</title>
                                    <description><![CDATA[SIR और चुनाव आयोग को लेकर जारी विवाद के बीच NDA के सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव आयोग से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है। उनका कहना है कि इस मुद्दे को लेकर जनता में कंफ्यूजन पैदा हुआ है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी कहा था कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में संदेह नहीं रहना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/bihar/upendra-kushwaha-sir-election-commission-clarification-chirag-paswan/article-2195"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/upendra-kushwaha-sir-election-commission-clarification-2026.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h1><span><strong>विपक्ष के बाद अब NDA सहयोगियों ने भी उठाए सवाल, EC से मांगी स्थिति साफ करने की मांग</strong></span></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/upendra-kushwaha-sir-election-commission-clarification-2026.jpg2.jpg" alt="upendra-kushwaha-sir-election-commission-clarification-2026.jpg2" width="1366" height="768"/>
SIR विवाद पर उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव आयोग से जनता के मन में बनी उलझन दूर करने के लिए स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

<p><span><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | बिहार डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></span></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li>
<h6><strong>SIR विवाद पर उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव आयोग से मांगा स्पष्टीकरण</strong></h6>
</li>
<li>
<h6><strong>कहा- जनता में इस मुद्दे को लेकर काफी कंफ्यूजन है</strong></h6>
</li>
<li>
<h6><strong>चिराग पासवान भी EC से जनता की शंकाएं दूर करने को कह चुके हैं</strong></h6>
</li>
<li>
<h6><strong>दोनों नेता NDA के सहयोगी हैं</strong></h6>
</li>
<li>
<h6><strong>चुनाव आयोग पहले कह चुका है कि अलग-अलग राय आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम फैसले सहमति से हुए</strong></h6>
</li>
</ul>
<h6><strong>पटना।</strong> Special Intensive Revision यानी SIR और चुनाव आयोग को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच अब उपेंद्र कुशवाहा ने भी चुनाव आयोग से खुलकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि पूरे मामले को लेकर जनता में काफी उलझन पैदा हो गई है और चुनाव आयोग को बिना देर किए सही स्थिति सामने रखनी चाहिए।</h6>
<h6>उपेंद्र कुशवाहा का बयान ऐसे समय आया है जब केंद्रीय मंत्री और NDA सहयोगी चिराग पासवान भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग से जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब देने की बात कह चुके हैं।</h6>
<h2><span><strong>उपेंद्र कुशवाहा ने क्या कहा?</strong></span></h2>
<h6>उपेंद्र कुशवाहा ने X पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि SIR से जुड़े विवाद के कारण जनता में काफी कंफ्यूजन पैदा हुआ है। उनके मुताबिक इस मुद्दे को स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।</h6>
<h6>उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि सही स्थिति पर तत्काल स्पष्टीकरण जारी किया जाए, ताकि लोगों के मन में बनी उलझन दूर हो सके।</h6>
<h6>कुशवाहा ने अपने बयान में किसी विपक्षी दल के आरोप को सही या गलत ठहराने के बजाय चुनाव आयोग से स्थिति साफ करने पर जोर दिया है।</h6>
<h2><span><strong>चिराग पासवान ने भी चुनाव आयोग से क्या कहा था?</strong></span></h2>
<h6>इससे पहले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी चुनाव आयोग से सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी।</h6>
<h6>चिराग ने कहा कि अगर चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था पर सवाल उठ रहे हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त को अपना पक्ष स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा होना चिंता की बात होगी।</h6>
<h6>चिराग पासवान ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को केवल विपक्षी नेताओं के आरोपों का जवाब देने के नजरिए से नहीं, बल्कि आम जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।</h6>
<h2><span><strong>दो NDA सहयोगियों के बयान क्यों अहम हैं?</strong></span></h2>
<h6>उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान दोनों NDA से जुड़े नेता हैं। ऐसे में चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगने वाले उनके बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बने हैं। हालांकि दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों को तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया है; उनका जोर जनता के बीच पैदा हुई शंकाओं को दूर करने पर है।</h6>
<h6>इसलिए उनके बयानों को चुनाव आयोग के खिलाफ निष्कर्ष के रूप में देखने के बजाय आयोग से अधिक स्पष्टता की मांग के रूप में देखना अधिक सटीक होगा।</h6>
<h2><span><strong>SIR को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?</strong></span></h2>
<h6>हालिया विवाद उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के विभिन्न फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। इन मुद्दों में SIR, मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची और Form-6 से जुड़े विषय भी शामिल थे।</h6>
<h6>इसके बाद राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए और आयोग से ज्यादा जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।</h6>
<h2><span><strong>चुनाव आयोग पहले क्या सफाई दे चुका है?</strong></span></h2>
<h6>चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद की धारणा को खारिज करते हुए कहा है कि लिखित टिप्पणियां, सवाल और अलग-अलग राय किसी बहु-सदस्यीय संस्था में सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा हैं।</h6>
<h6>आयोग का कहना है कि SIR समेत अंतिम फैसले सभी चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए और ड्राफ्ट स्तर पर उठाए गए सवालों को अंतिम असहमति नहीं माना जाना चाहिए।</h6>
<h6>Form-6 को लेकर भी आयोग ने स्पष्ट किया कि मूल Form-6 में बदलाव नहीं किया गया और SIR से जुड़ा हिस्सा अलग annexure के रूप में जोड़ा गया था।</h6>
<h2><span><strong>अब सवाल जनता के भरोसे का</strong></span></h2>
<h6>मौजूदा विवाद में राजनीतिक आरोप और चुनाव आयोग की सफाई दोनों सामने आ चुके हैं। उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान का जोर इस बात पर है कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर आम मतदाता के मन में किसी तरह की उलझन या अविश्वास नहीं रहना चाहिए।</h6>
<h6>अब यह देखना होगा कि चुनाव आयोग इन बयानों के बाद कोई नया या विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करता है या अपनी पहले दी गई सफाई पर ही कायम रहता है।</h6>
<h6><strong>SIR विवाद अब केवल विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच की बहस तक सीमित नहीं रहा है। NDA के सहयोगी चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा भी आयोग से जनता की शंकाएं दूर करने की बात कह रहे हैं। हालांकि दोनों नेताओं ने आरोपों पर अपना कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। ऐसे में अब पूरी नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग जनता के सामने इस विवाद को लेकर और कितनी स्पष्टता लाता है।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिहार</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/bihar/upendra-kushwaha-sir-election-commission-clarification-chirag-paswan/article-2195</link>
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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 17:33:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ओवैसी की यूपी एंट्री पर उलेमा से टकराव क्यों? फिरंगी महली के बयान के बाद AIMIM समर्थकों का पलटवार</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले AIMIM अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में है। इसी बीच मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व को लेकर पार्टी और कुछ प्रमुख उलेमा के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। कानपुर रैली के बाद मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/owaisi-aimim-firangi-mahali-ulama-muslim-leadership-up-election-2027/article-2194"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/owaisi-firangi-mahali-ulama-up-election-2027.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h1><span><strong>यूपी चुनाव से पहले मुस्लिम नेतृत्व पर नई बहस, सियासत और उलेमा आमने-सामने</strong></span></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/owaisi-firangi-mahali-ulama-up-election-2027.jpg2.jpg" alt="owaisi-firangi-mahali-ulama-up-election-2027.jpg2" width="1366" height="768"/>
यूपी चुनाव 2027 से पहले असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति और मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली के बयान ने मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

<p><span><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></span></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li>
<h6><strong>कानपुर में ओवैसी की रैली के बाद फिरंगी महली ने धार्मिक ध्रुवीकरण से बचने की अपील की</strong></h6>
</li>
<li>
<h6><strong>उन्होंने कहा—यूपी का मुस्लिम मतदाता विकास के मुद्दे पर फैसला करेगा</strong></h6>
</li>
<li>
<h6><strong>AIMIM नेताओं ने उनके बयान का विरोध किया</strong></h6>
</li>
<li>
<h6><strong>इससे पहले सज्जाद नोमानी और महमूद मदनी से भी AIMIM समर्थकों का विवाद हो चुका है</strong></h6>
</li>
<li>
<h6><strong>बहस के केंद्र में सवाल—मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व किसके हाथ में और किस रास्ते से आगे बढ़े?</strong></h6>
</li>
</ul>
<h6><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच मुस्लिम राजनीति में एक अलग बहस तेज होती दिख रही है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी प्रदेश में लगातार रैलियां कर रहे हैं और मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठा रहे हैं। इसी दौरान पार्टी के नेताओं और कुछ प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं के बीच सार्वजनिक मतभेद सामने आए हैं।</h6>
<h6>ताजा विवाद लखनऊ के ऐशबाग ईदगाह के इमाम और इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली के बयान के बाद शुरू हुआ है। फिरंगी महली ने ओवैसी की कानपुर रैली के बाद कहा था कि चुनावी राजनीति को धार्मिक आधार पर बांटने से बचना चाहिए।</h6>
<h2><span><strong>फिरंगी महली ने क्या कहा था?</strong></span></h2>
<h6>मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुसलमान राजनीतिक रूप से जागरूक हैं और प्रदेश में मुस्लिम सांसद और विधायक पहले से मौजूद हैं।</h6>
<h6>उन्होंने यह भी कहा कि मतदाताओं की धार्मिक भावनाओं को भड़काने के बजाय विकास के मुद्दों पर राजनीति होनी चाहिए। उनके मुताबिक यूपी का मुस्लिम मतदाता केवल भावनाओं के आधार पर नहीं बल्कि अपने मुद्दों को देखकर मतदान करेगा।</h6>
<h6>उनकी यह टिप्पणी ओवैसी की कानपुर रैली के बाद आई थी, जहां AIMIM प्रमुख ने मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व और प्रदेश की राजनीति में समुदाय की भूमिका का मुद्दा उठाया था।</h6>
<h2><span><strong>AIMIM नेताओं ने क्यों जताई नाराजगी?</strong></span></h2>
<h6>फिरंगी महली के बयान के बाद AIMIM से जुड़े नेताओं ने सार्वजनिक रूप से उनकी आलोचना की।</h6>
<h6>यूपी AIMIM नेता मुफ्ती मोहम्मद ओसामा नदवी ने आजतक से कहा कि उनकी पार्टी उलेमा का सम्मान करती है, लेकिन जो धर्मगुरु राजनीतिक टिप्पणी करेंगे, उनके बयानों की आलोचना भी की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ धार्मिक नेता स्वतंत्र मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व की कोशिशों का विरोध करते हैं। यह AIMIM नेता का राजनीतिक दावा है।</h6>
<h6>नदवी ने यह भी कहा कि AIMIM की कोशिश मुस्लिम समाज की स्वतंत्र राजनीतिक आवाज खड़ी करने की है। उनके अनुसार मुख्यधारा के दलों ने लंबे समय तक मुस्लिम मतदाताओं को वोट बैंक की तरह देखा है। यह AIMIM का राजनीतिक पक्ष है, जिसे अन्य दल और धार्मिक नेता अलग नजरिए से देखते हैं।</h6>
<h2><span><strong>सज्जाद नोमानी से भी क्यों हुआ था विवाद?</strong></span></h2>
<h6>मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली से पहले मौलाना सज्जाद नोमानी भी AIMIM नेताओं और समर्थकों की आलोचना का सामना कर चुके हैं।</h6>
<h6>आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान नोमानी ने महा विकास अघाड़ी के उम्मीदवारों के समर्थन में अपील की थी। AIMIM समर्थकों ने आरोप लगाया था कि इस राजनीतिक रुख से उनकी पार्टी को नुकसान हुआ। बाद में ओवैसी और AIMIM नेता इम्तियाज जलील ने भी नोमानी के राजनीतिक रुख की आलोचना की थी।</h6>
<h6>हालांकि किसी उम्मीदवार की हार को केवल एक अपील या किसी एक समुदाय के वोटों से जोड़ना सरल निष्कर्ष होगा; चुनाव परिणाम कई स्थानीय और राजनीतिक कारणों से प्रभावित होते हैं।</h6>
<h2><span><strong>महमूद मदनी और ओवैसी के बीच क्या विवाद रहा?</strong></span></h2>
<h6>जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महमूद मदनी भी ओवैसी की राजनीति की आलोचना करते रहे हैं।</h6>
<h6>रिपोर्ट के मुताबिक मदनी ने एक पॉडकास्ट में ओवैसी की राजनीतिक विचारधारा से असहमति जताई और कहा कि उनकी राजनीति से समाज में विभाजन बढ़ सकता है। उन्होंने ओवैसी की रैलियों में जुटने वाली भीड़ को लेकर भी तीखी टिप्पणी की थी। इसके बाद AIMIM समर्थकों ने मदनी की आलोचना की।</h6>
<h6>यहां दोनों पक्षों के राजनीतिक दृष्टिकोण अलग हैं—मदनी ओवैसी की शैली और राजनीति पर सवाल उठाते हैं, जबकि AIMIM का कहना है कि वह मुस्लिम समुदाय के स्वतंत्र राजनीतिक प्रतिनिधित्व की बात कर रही है।</h6>
<h2><span><strong>ओवैसी यूपी में किस रणनीति के साथ उतर रहे हैं?</strong></span></h2>
<h6>AIMIM ने उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाई हैं। ओवैसी ने कानपुर में सभा की और पार्टी की आगे श्रावस्ती तथा आजमगढ़ जैसे इलाकों में भी कार्यक्रम करने की योजना सामने आई है।</h6>
<h6>ओवैसी ने हाल में यह भी कहा है कि BJP को तीसरी बार सरकार बनाने से रोकने के लिए वह समान विचार रखने वाले दलों से गठबंधन की बातचीत के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने सपा समेत दूसरे विपक्षी दलों की राजनीति पर भी सवाल उठाए हैं।</h6>
<h6>यह गठबंधन होगा या नहीं और किन दलों के साथ होगा, इस पर अभी अंतिम स्थिति सामने नहीं आई है।</h6>
<h2><span><strong>असली विवाद मुस्लिम नेतृत्व को लेकर है?</strong></span></h2>
<h6>मौजूदा बहस केवल किसी एक बयान तक सीमित नहीं दिखती।</h6>
<h6>AIMIM का राजनीतिक तर्क है कि मुसलमानों को अपनी स्वतंत्र राजनीतिक ताकत और नेतृत्व विकसित करना चाहिए। दूसरी तरफ फिरंगी महली जैसे धर्मगुरु यह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व पहले से मौजूद है और चुनाव को धार्मिक आधार पर बांटने से बचना चाहिए।</h6>
<h6>यानी मतभेद दो सवालों पर केंद्रित है—मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व किस तरह होना चाहिए और धर्मगुरुओं की चुनावी राजनीति में कितनी भूमिका होनी चाहिए।</h6>
<h2><span><strong>यूपी चुनाव से पहले क्यों बढ़ी यह बहस?</strong></span></h2>
<h6>उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी सामाजिक और राजनीतिक रणनीति पर काम कर रहे हैं। AIMIM भी उन क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ा रही है जहां मुस्लिम आबादी महत्वपूर्ण है।</h6>
<h6>ऐसे में ओवैसी की राजनीति पर किसी प्रमुख धर्मगुरु की टिप्पणी और उस पर AIMIM नेताओं की प्रतिक्रिया केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं रह जाती, बल्कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व की बड़ी बहस का हिस्सा बन जाती है।</h6>
<h6>इसके बावजूद यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इस बहस का मतदाताओं के व्यवहार या चुनाव परिणाम पर क्या असर पड़ेगा।</h6>
<h6><strong>फिरंगी महली, सज्जाद नोमानी और महमूद मदनी से AIMIM समर्थकों के अलग-अलग विवादों के पीछे एक साझा सवाल दिखाई देता है—मुस्लिम समाज की राजनीतिक आवाज किस रूप में आगे बढ़े। AIMIM स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व की बात कर रही है, जबकि कई उलेमा धार्मिक पहचान के आधार पर चुनावी ध्रुवीकरण से बचने पर जोर दे रहे हैं। यूपी चुनाव करीब आने के साथ यह वैचारिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है, लेकिन मतदाता किस राजनीतिक रास्ते को चुनेंगे इसका फैसला आखिर चुनाव में ही होगा।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 16:52:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बारिश में बैरिकेडिंग पर चढ़े अजय राय, पुलिस ने हिरासत में लिया; CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ में तेज बारिश के बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय बैरिकेडिंग पर चढ़ गए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें नीचे उतारकर हिरासत में लिया। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए CEC के इस्तीफे की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/ajay-rai-congress-protest-lucknow-cec-gyanesh-kumar-barricade/article-2193"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/ajay-rai-congress-protest-lucknow-cec-gyanesh-kumar-barricade.jpg" alt=""></a><br /><h1><span><strong>बारिश नहीं रोक पाई प्रदर्शन, बैरिकेडिंग पर चढ़े अजय राय</strong></span></h1>
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लखनऊ में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग पर चढ़े उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय।

<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>लखनऊ में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन</strong></li>
<li><strong>तेज बारिश के बावजूद निर्वाचन कार्यालय की ओर बढ़े कार्यकर्ता</strong></li>
<li><strong>सुन्नी वक्फ बोर्ड कार्यालय के पास पुलिस ने लगाई बैरिकेडिंग</strong></li>
<li><strong>बैरिकेडिंग पर चढ़े अजय राय, पुलिस ने नीचे उतारा</strong></li>
<li><strong>अजय राय समेत कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया</strong></li>
<li><strong>कांग्रेस ने CEC के इस्तीफे की मांग दोहराई</strong></li>
</ul>
<h6><strong>लखनऊ।</strong> मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस शुक्रवार को लखनऊ की सड़कों पर उतरी। तेज बारिश के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई।</h6>
<h6>कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे। सुन्नी वक्फ बोर्ड कार्यालय के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने इस दौरान हल्का बल प्रयोग भी किया।</h6>
<h2><span><strong>बैरिकेडिंग पर चढ़ गए अजय राय</strong></span></h2>
<h6>बारिश के बीच प्रदर्शन कर रहे अजय राय युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और दूसरी ओर जाने की कोशिश करने लगे।</h6>
<h6>पुलिसकर्मियों ने उन्हें बैरिकेडिंग से नीचे उतारा। इसके बाद अजय राय और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और उन्हें इको गार्डन ले जाया गया।</h6>
<h6>यही तस्वीरें इस प्रदर्शन का सबसे चर्चित हिस्सा बन गईं—एक तरफ तेज बारिश और दूसरी तरफ बैरिकेडिंग पर खड़े कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और कार्यकर्ता।</h6>
<h2><span><strong>अजय राय ने क्या कहा?</strong></span></h2>
<h6>प्रदर्शन के दौरान अजय राय ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।</h6>
<h6>अजय राय ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं और कांग्रेस इस मुद्दे पर सड़क से संसद तक अपनी लड़ाई जारी रखेगी। ये कांग्रेस और अजय राय के राजनीतिक आरोप हैं।</h6>
<h2><span><strong>सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं रहा विरोध</strong></span></h2>
<h6>CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। पार्टी ने शुक्रवार को दिल्ली, कोलकाता, लखनऊ, चंडीगढ़, जम्मू और देहरादून समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किए। कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और उन्हें पद से हटाने की मांग कर रही है।</h6>
<h6>देहरादून में भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सचिवालय की ओर मार्च किया, जहां पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।</h6>
<h2><span><strong>ज्ञानेश कुमार को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?</strong></span></h2>
<h6>मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर हालिया विवाद चुनाव आयोग के भीतर फैसलों पर कथित असहमति की रिपोर्ट सामने आने के बाद तेज हुआ है।</h6>
<h6>मीडिया रिपोर्टों के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते महीनों में SIR समेत आयोग के कई फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इन्हीं रिपोर्टों को आधार बनाकर CEC से जवाब और इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।</h6>
<h6>चुनाव आयोग का पक्ष रहा है कि अलग-अलग राय निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से किए गए। इसलिए विपक्ष के आरोप और आयोग की सफाई—दोनों इस राजनीतिक विवाद का हिस्सा हैं।</h6>
<h2><span><strong>CEC का यूपी दौरा भी हुआ स्थगित</strong></span></h2>
<h6>इसी विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मेरठ और वाराणसी में प्रस्तावित कार्यक्रम भी स्थगित हो चुके हैं।</h6>
<h6>मेरठ में 25 सितंबर को युवाओं के साथ संवाद और चुनाव से जुड़े कार्यक्रम का आयोजन प्रस्तावित था, जबकि वाराणसी में 28 सितंबर का कार्यक्रम था। चुनाव आयोग ने कार्यक्रम स्थगित किए जाने का कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है।</h6>
<h6>इसलिए कार्यक्रम स्थगित होने को सीधे मौजूदा राजनीतिक विवाद का परिणाम मानना अभी स्थापित तथ्य नहीं है।</h6>
<h2><span><strong>यूपी में चुनावी सियासत के बीच बढ़ी हलचल</strong></span></h2>
<h6>उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां पहले ही तेज हैं। ऐसे में चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस का यह प्रदर्शन भी राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।</h6>
<h6>अजय राय के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार संगठन और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी सक्रियता बढ़ाने की कोशिश कर रही है। शुक्रवार का प्रदर्शन मुख्य रूप से CEC और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर केंद्रित रहा।</h6>
<h6><strong>लखनऊ में तेज बारिश के बीच हुआ कांग्रेस का प्रदर्शन अब तस्वीरों और राजनीतिक संदेश—दोनों वजहों से चर्चा में है। कांग्रेस CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ी है, जबकि चुनाव आयोग अपने फैसलों की प्रक्रिया को लेकर सफाई दे चुका है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि आयोग की ओर से आगे कोई नया स्पष्टीकरण आता है या विपक्ष इस विरोध को और तेज करता है।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/ajay-rai-congress-protest-lucknow-cec-gyanesh-kumar-barricade/article-2193</link>
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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 16:31:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>19 साल बिलासपुर में रहा बांग्लादेशी अतीक, पासपोर्ट से वोटर ID तक मिले कई भारतीय दस्तावेज; STF ने पकड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में STF और पुलिस ने 42 वर्षीय अतीक हुसैन को पकड़ा है। पुलिस के अनुसार वह बांग्लादेश का नागरिक है और करीब 19 साल से बिलासपुर में रह रहा था। उसके पास से भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर ID, ड्राइविंग लाइसेंस समेत कई दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/bangladeshi-atiq-lived-in-bilaspur-for-19-years-many-indian/article-2192"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/bangladeshi-atique-hussain-bilaspur-stf-arrest-2026.jpg.jpg" alt=""></a><br /><h2><span><strong>19 साल तक पहचान पर नहीं उठा सवाल, अब दस्तावेजों की पूरी चेन जांच के घेरे में</strong></span></h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/bangladeshi-atique-hussain-bilaspur-stf-arrest-2026.jpg.jpg" alt="bangladeshi-atique-hussain-bilaspur-stf-arrest-2026.jpg" width="1366" height="768"/>
बिलासपुर में STF की कार्रवाई में पकड़ा गया अतीक हुसैन, पुलिस के मुताबिक उसके पास कई भारतीय पहचान दस्तावेज मिले हैं।

<p><span><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></span></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>पुलिस के मुताबिक अतीक हुसैन बांग्लादेश के नारायणगंज का रहने वाला है</strong></li>
<li><strong>वर्ष 2005 में भारत आने और 2007 से बिलासपुर में रहने की जानकारी</strong></li>
<li><strong>NTPC सीपत में निजी कंपनी के जरिए करता था लिफ्ट मेंटेनेंस</strong></li>
<li><strong>पासपोर्ट, आधार, पैन, वोटर ID और ड्राइविंग लाइसेंस समेत कई दस्तावेज मिले</strong></li>
<li><strong>दस्तावेज बनवाने में किसने मदद की, इसकी जांच कर रही पुलिस</strong></li>
<li><strong>रायपुर के होल्डिंग सेंटर भेजा गया, डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू</strong></li>
</ul>
<h6><strong>बिलासपुर।</strong> छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पहचान दस्तावेजों की जांच और उन्हें जारी करने की प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। STF और जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 42 वर्षीय अतीक हुसैन को पकड़ा गया है। पुलिस का कहना है कि अतीक मूल रूप से बांग्लादेश का नागरिक है और वह कई वर्षों से भारत में रह रहा था।</h6>
<h6>पुलिस के मुताबिक अतीक वर्ष 2005 में बांग्लादेश से भारत आया था। इसके बाद करीब दो साल तमिलनाडु में रहने के बाद वह 2007 में बिलासपुर पहुंचा। यहां वह लंबे समय से रह रहा था।</h6>
<h2><span><strong>NTPC सीपत तक कैसे पहुंचा अतीक?</strong></span></h2>
<h6>जांच में सामने आया कि अतीक बिलासपुर के सीपत स्थित NTPC प्लांट में लिफ्ट मेंटेनेंस का काम करता था। वह सीधे NTPC का कर्मचारी नहीं था, बल्कि BECO Lifts Private Limited नाम की निजी एजेंसी के जरिए काम कर रहा था।</h6>
<h6>बिलासपुर के SSP रजनेश सिंह ने <em>The New Indian Express</em> को बताया कि लिफ्ट मेंटेनेंस के काम के कारण उसे प्लांट की प्रशासनिक और परिचालन इमारतों में आने-जाने का अवसर मिलता था। इसके बाद सुरक्षा जांच और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं।</h6>
<h2><span><strong>पासपोर्ट से वोटर ID तक, क्या-क्या मिला?</strong></span></h2>
<h6>पुलिस ने अतीक के किराये के मकान की तलाशी के दौरान कई भारतीय दस्तावेज बरामद करने का दावा किया है।</h6>
<h6>इनमें भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर ID, ड्राइविंग लाइसेंस, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और नौवीं कक्षा की मार्कशीट शामिल हैं।</h6>
<h6>पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान अतीक ने इन दस्तावेजों को गलत तरीके से बनवाने की बात स्वीकार की है। हालांकि अब जांच इस बात की भी हो रही है कि अलग-अलग सरकारी दस्तावेज उसे किस प्रक्रिया के जरिए मिले और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।</h6>
<h2><span><strong>भारतीय पासपोर्ट कैसे बना, अब यही बड़ा सवाल</strong></span></h2>
<h6>रिपोर्टों के मुताबिक अतीक के पास भारतीय पासपोर्ट भी मिला है। स्थानीय रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से कहा गया है कि पासपोर्ट वर्ष 2018 में बनवाया गया था। इसके बाद दूसरे पहचान दस्तावेज भी बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।</h6>
<h6>अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन दस्तावेजों के आवेदन में किन कागजों का इस्तेमाल हुआ, सत्यापन किस स्तर पर हुआ और क्या किसी व्यक्ति ने जानबूझकर उसकी मदद की।</h6>
<h2><span><strong>वोटर ID मिलने से भी उठे सवाल</strong></span></h2>
<h6>अतीक के पास वोटर ID मिलने की पुष्टि कई रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से की गई है। इससे यह सवाल भी उठा है कि विदेशी नागरिक के नाम पर मतदाता पहचान पत्र बनने तक मामला कैसे पहुंचा।</h6>
<h6>हालांकि किसी व्यक्ति के पास वोटर ID मिलने और उसके वास्तव में चुनाव में मतदान करने के बीच अंतर है। एक स्थानीय रिपोर्ट में मतदान करने का दावा भी किया गया है, लेकिन इस बिंदु की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए फिलहाल इतना ही स्थापित है कि उसके पास वोटर ID मिलने की बात पुलिस ने कही है।</h6>
<h2><span><strong>सोशल मीडिया पर SIR को लेकर भी छिड़ी बहस</strong></span></h2>
<h6>मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे मतदाता सूची की जांच और SIR से भी जोड़ा जा रहा है। पत्रकार शुभम शुक्ला ने X पर सवाल उठाया कि इतने भारतीय दस्तावेज और वोटर ID आखिर कैसे बन गए और ऐसे मामलों में मतदाता सूची की गहन जांच होनी चाहिए।</h6>
<h6>यह उनका विचार और राजनीतिक-प्रशासनिक मांग है। फिलहाल पुलिस की जांच अतीक की नागरिकता, उसके दस्तावेजों और उन्हें बनवाने की प्रक्रिया पर केंद्रित है। उपलब्ध पुलिस रिपोर्ट में इस गिरफ्तारी को किसी SIR कार्रवाई का नतीजा नहीं बताया गया है।</h6>
<h2><span><strong>अब पुलिस किन लोगों की तलाश कर रही है?</strong></span></h2>
<h6>पुलिस अब उन लोगों की भूमिका की जांच कर रही है जिन्होंने कथित तौर पर अतीक को दस्तावेज तैयार कराने में मदद की हो सकती है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इतने वर्षों तक उसकी पहचान और दस्तावेज सत्यापन में गड़बड़ी कहां हुई।</h6>
<h6>अतीक को रायपुर के होल्डिंग सेंटर भेजा गया है। पुलिस के मुताबिक उसके बांग्लादेश डिपोर्टेशन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है और संबंधित अधिकारियों तथा बांग्लादेशी मिशन को सूचना भेजी जा रही है।</h6>
<h2><span><strong>19 साल बाद खुली पहचान, जांच अब दस्तावेजों से आगे</strong></span></h2>
<h6>यह मामला केवल एक विदेशी नागरिक के पकड़े जाने तक सीमित नहीं है। जांच का अहम हिस्सा अब यह भी है कि अलग-अलग स्तरों पर भारतीय पहचान से जुड़े इतने दस्तावेज आखिर जारी कैसे हुए और सत्यापन प्रक्रिया में कहां चूक हुई।</h6>
<h6>इन सवालों के जवाब पुलिस जांच पूरी होने और संबंधित विभागों के रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।</h6>
<h6><strong>अतीक हुसैन की गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वह इतने साल भारत में कैसे रहा, बल्कि यह भी है कि पासपोर्ट से लेकर वोटर ID तक अलग-अलग भारतीय दस्तावेज उसके नाम पर कैसे बने। अब पुलिस की जांच यह तय करेगी कि यह केवल फर्जी कागजों का मामला था या इसके पीछे मदद करने वालों की कोई बड़ी चेन भी मौजूद थी।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/bangladeshi-atiq-lived-in-bilaspur-for-19-years-many-indian/article-2192</link>
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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 15:31:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>14 आपत्तियां, फिर भी सर्वसम्मति से फैसले कैसे? चुनाव आयोग की सफाई के बाद उठे नए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग के भीतर दो आयुक्तों की कम से कम 14 लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद आयोग ने कहा कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। अब बहस इस बात पर है कि जिन मुद्दों पर शुरुआत में गंभीर सवाल उठे, उन पर आखिर सहमति कैसे बनी और क्या आयोग इससे जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions/article-2191"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions.jpg" alt=""></a><br /><h2><span><strong>आपत्तियां दर्ज हुईं, फिर सहमति कैसे बनी? अब इसी जवाब पर टिकी नजर</strong></span></h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions.jpg" alt="gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions" width="1366" height="768"/>
दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के सर्वसम्मति से फैसले वाले दावे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

<h6><span><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></span></h6>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की—रिपोर्ट</strong></li>
<li><strong>चुनाव आयोग का दावा—अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए</strong></li>
<li><strong>Form-6, ECINet और मतदाता सूची से जुड़े मामलों पर उठे थे सवाल</strong></li>
<li><strong>आयोग ने मतभेद को सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा बताया</strong></li>
<li><strong>अब सवाल—आपत्तियों से अंतिम सहमति तक की पूरी प्रक्रिया क्या थी?</strong></li>
</ul>
<h6><strong>नई दिल्ली।</strong> चुनाव आयोग के अंदरूनी कामकाज को लेकर सामने आई रिपोर्ट और उसके बाद आयोग की सफाई ने एक नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के विभिन्न कदमों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। इसके बाद चुनाव आयोग ने कहा कि अलग-अलग राय आंतरिक विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा है और पिछले एक साल के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।</h6>
<h6>लेकिन आयोग की इसी सफाई के बाद अब एक बड़ा सवाल सामने आया है—अगर कई मामलों पर दोनों आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी, तो अंतिम फैसला लेते समय वे उसी फैसले से सहमत कैसे हुए?</h6>
<h2><span><strong>किन मुद्दों पर आयुक्तों ने उठाए थे सवाल?</strong></span></h2>
<h6><em>इंडियन एक्सप्रेस</em> की जांच रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों पर थीं। इनमें नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में बदलाव, ECINet की व्यवस्था, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा कुछ प्रशासनिक फैसले शामिल थे।</h6>
<h6>रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ मामलों में आयुक्तों ने कड़ी भाषा में अपनी आपत्ति दर्ज कराई। Form-6 में बदलाव को लेकर भी दोनों आयुक्तों की ओर से सवाल उठाए जाने की बात सामने आई।</h6>
<h2><span><strong>चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी?</strong></span></h2>
<h6>चुनाव आयोग ने इस विवाद पर कहा कि किसी बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग विचार, सुझाव और टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के मुताबिक बीते 10 महीनों में 40 से ज्यादा पहल और कई चुनाव सुधार किए गए, जबकि पिछले एक साल के अंतिम फैसले सभी चुनाव आयुक्तों की भागीदारी और सहमति से लिए गए।</h6>
<h6>आयोग का पक्ष यह है कि ड्राफ्ट स्तर पर दी गई टिप्पणियों या आपत्तियों को अंतिम फैसले से अलग करके देखने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।</h6>
<h2><span><strong>सफाई के बाद नया सवाल क्यों उठा?</strong></span></h2>
<h6>यहीं से विवाद का दूसरा हिस्सा शुरू होता है। अगर शुरुआत में किसी प्रस्ताव या प्रक्रिया पर लिखित आपत्ति थी, लेकिन अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से हुआ, तो बीच में ऐसा क्या बदला कि सभी सदस्य सहमत हो गए?</h6>
<h6>AajTak के विश्लेषण में भी इसी सवाल को प्रमुखता से उठाया गया है। लेख में कहा गया है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि आपत्तियों के बाद क्या विस्तृत चर्चा हुई, क्या संबंधित प्रस्तावों में बदलाव किए गए या किसी कानूनी और तकनीकी स्पष्टीकरण के बाद आयुक्तों की चिंताएं दूर हुईं। हालांकि लेख में रखी गई ये संभावनाएं हैं, स्थापित तथ्य नहीं।</h6>
<h2><span><strong>क्या आपत्तियां चर्चा के बाद दूर हो गई थीं?</strong></span></h2>
<h6>एक संभावना यह हो सकती है कि शुरुआती मसौदे पर सवाल उठने के बाद आयोग के भीतर चर्चा हुई हो और बाद में संबंधित बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मिलने से सहमति बन गई हो।</h6>
<h6>दूसरी संभावना यह भी हो सकती है कि कुछ आपत्तियां केवल प्रक्रिया से जुड़ी रही हों और अंतिम फैसले तक पहुंचने से पहले उनमें बदलाव किया गया हो।</h6>
<h6>लेकिन फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी से यह साफ नहीं है कि प्रत्येक आपत्ति पर अलग-अलग क्या समाधान निकला। इसलिए इस पर निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। AajTak के विश्लेषण ने भी इन कारणों को संभावनाओं के रूप में ही रखा है।</h6>
<h2><span><strong>क्या फैसलों की कॉपी सामने आएगी?</strong></span></h2>
<h6>ऐसा होने पर यह समझने में मदद मिल सकती है कि आयुक्तों ने किस बिंदु पर आपत्ति जताई थी और अंतिम फैसले में क्या बदलाव या स्पष्टीकरण आया। हालांकि चुनाव आयोग ने ऐसी प्रतियां जारी करने की कोई घोषणा की है, इसका सार्वजनिक प्रमाण फिलहाल सामने नहीं है।</h6>
<h2><span><strong>Form-6 को लेकर क्या था विवाद?</strong></span></h2>
<h6>नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में SIR से संबंधित अतिरिक्त सवाल जोड़े जाने को लेकर भी विवाद सामने आया था। <em>इंडियन एक्सप्रेस</em> की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों आयुक्तों ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी और इसके कानूनी आधार को लेकर सवाल किए थे।</h6>
<h6>यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि Form-6 नए मतदाता के रूप में पंजीकरण की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।</h6>
<h2><span><strong>अब असली सवाल पारदर्शिता का</strong></span></h2>
<h6>इस पूरे मामले में फिलहाल दो बातें साथ-साथ सामने हैं। पहली, दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कई मुद्दों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की रिपोर्ट। दूसरी, चुनाव आयोग का यह कहना कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।</h6>
<h6>इन दोनों बातों में अपने-आप विरोधाभास होना जरूरी नहीं है, क्योंकि विचार-विमर्श के दौरान मतभेद के बाद सहमति बन सकती है। लेकिन सार्वजनिक बहस का केंद्र अब यह है कि इस खास मामले में सहमति बनने की प्रक्रिया क्या थी।</h6>
<h6><strong>चुनाव आयोग के भीतर मतभेद होना अपने-आप में असामान्य नहीं है, लेकिन 14 लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद सवाल केवल मतभेद का नहीं बल्कि उसके समाधान का है। आयोग ने अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति वाला बताया है। अब यदि आपत्तियों से सहमति तक पहुंचने की प्रक्रिया और स्पष्ट होती है, तो इस विवाद से जुड़े कई सवालों के जवाब भी सामने आ सकते हैं।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions/article-2191</link>
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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 15:10:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सड़कों पर कांग्रेस, लखनऊ से कोलकाता तक प्रदर्शन; इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन कर उनके इस्तीफे, पद से हटाने और गिरफ्तारी की मांग उठाई है। यह विरोध राहुल गांधी की ओर से चुनाव प्रक्रिया और वोटर लिस्ट को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद तेज हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/congress-protest-cec-gyanesh-kumar-election-commission-rahul-gandhi/article-2190"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/congress-protest-cec-gyanesh-kumar-25-september-2026.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></p>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/congress-protest-cec-gyanesh-kumar-25-september-2026.jpg.jpg" alt="congress-protest-cec-gyanesh-kumar-25-september-2026.jpg" width="1366" height="768"/>
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस का विरोध तेज, कई शहरों में सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता

<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कई राज्यों में कांग्रेस का प्रदर्शन</strong></li>
<li><strong>लखनऊ, कोलकाता, दिल्ली और चंडीगढ़ समेत कई शहरों में कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे</strong></li>
<li><strong>कांग्रेस ने CEC के इस्तीफे, हटाने और गिरफ्तारी की मांग की</strong></li>
<li><strong>राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया पर लगाए गंभीर आरोप</strong></li>
<li><strong>BJP ने कांग्रेस और राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया</strong></li>
</ul>
<h6><strong>नई दिल्ली।</strong> मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब सड़कों तक पहुंच गया है। कांग्रेस ने शुक्रवार, 25 सितंबर को कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश के लखनऊ से लेकर पश्चिम बंगाल के कोलकाता तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।</h6>
<h6>कोलकाता में पश्चिम बंगाल कांग्रेस के कार्यकर्ता मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर मार्च के लिए निकले। वहीं लखनऊ में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू, देहरादून और अन्य जगहों से भी प्रदर्शन की खबरें सामने आईं।</h6>
<h2>Why Is Congress Protesting?</h2>
<h6>कांग्रेस का यह विरोध चुनाव आयोग और मतदाता सूची के <strong>Special Intensive Revision (SIR)</strong> को लेकर उठे सवालों के बाद तेज हुआ है। <em>इंडियन एक्सप्रेस</em> की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के दो अन्य सदस्यों ने कुछ फैसलों और निर्देशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। इसके बाद विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर अपने हमले तेज कर दिए।</h6>
<h6>कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पार्टी की प्रदेश इकाइयों को 25 सितंबर को राज्य निर्वाचन कार्यालयों की ओर मार्च करने के निर्देश दिए थे। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, उनकी गिरफ्तारी और उनके कार्यकाल में मतदाता सूची से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है। ये कांग्रेस की मांगें और आरोप हैं; इनका कानूनी निष्कर्ष अभी स्थापित नहीं हुआ है।</h6>
<h2>Rahul Gandhi Raised Questions</h2>
<h6>लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग की थी। उन्होंने चुनावों और वोटर लिस्ट को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए और कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। राहुल गांधी के ये आरोप राजनीतिक दावे हैं, जिन्हें BJP ने खारिज किया है।</h6>
<h6>राहुल गांधी के बयान के बाद कांग्रेस ने विरोध को देशव्यापी रूप देने का फैसला किया। पार्टी की योजना के मुताबिक 25 सितंबर को प्रदेश स्तर पर प्रदर्शन के बाद 28 सितंबर को जिला कांग्रेस कमेटियां जिला कलेक्ट्रेट तक मार्च करेंगी।</h6>
<h2>Protest From Lucknow To Kolkata</h2>
<h6>उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। वहीं कोलकाता में कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़े। वहां सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस की तैनाती और बैरिकेडिंग भी की गई।</h6>
<h6>कांग्रेस का विरोध केवल इन दो शहरों तक सीमित नहीं रहा। जम्मू-कश्मीर, असम, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, मणिपुर और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में प्रदर्शन की खबरें सामने आईं।</h6>
<h2>BJP Rejects Allegations</h2>
<h6>दूसरी ओर BJP ने राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। BJP प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने पहले कहा था कि चुनाव आयोग के भीतर अलग-अलग राय लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और कांग्रेस के आरोपों को सही नहीं माना जा सकता।</h6>
<h6>इस तरह चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर सामने आई रिपोर्ट और विपक्ष के आरोपों ने CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।</h6>
<h2>What Happens Next?</h2>
<h6>मामला अब सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है। कांग्रेस सड़कों पर प्रदर्शन कर रही है और विपक्षी दल संसद में CEC को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी चर्चा कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस अन्य विपक्षी दलों से इस संबंध में संपर्क कर रही है।</h6>
<h1><strong>CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब चुनाव आयोग से निकलकर सड़क और संसद की राजनीति तक पहुंचता दिख रहा है। कांग्रेस जहां इस्तीफे और कार्रवाई की मांग पर अड़ी है, वहीं BJP इन आरोपों को राजनीतिक अभियान बता रही है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव आयोग इन सवालों और बढ़ते राजनीतिक दबाव पर आगे क्या रुख अपनाता है।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/congress-protest-cec-gyanesh-kumar-election-commission-rahul-gandhi/article-2190</link>
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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 14:48:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमीर आलम को कांग्रेस में लाकर इमरान मसूद ने बढ़ाया दबाव, क्या इकरा हसन की हो रही सियासी घेराबंदी?</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे नवाजिश आलम के कांग्रेस में आने से पश्चिमी यूपी की राजनीति बदलती दिखाई दे रही है। इमरान मसूद की इस रणनीति को इकरा हसन और सपा पर दबाव बनाने से जोड़कर देखा जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%87%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%A6-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B5--%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%87%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%B8%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%98%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80/article-2189"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/imran-masood-amir-alam-iqra-hasan-western-2up.webp.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>पश्चिमी यूपी में इमरान मसूद और अमीर आलम की नई जोड़ी ने बदला सियासी खेल, क्या इकरा हसन के बढ़ते प्रभाव को रोकने की तैयारी कर रही कांग्रेस?</strong></h1>
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इमरान मसूद और अमीर आलम की नई राजनीतिक जोड़ी से पश्चिमी यूपी में बदले समीकरण

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>पूर्व सांसद अमीर आलम और बेटे नवाजिश आलम कांग्रेस में शामिल</strong></li>
<li><strong>दोनों नेताओं को कांग्रेस में लाने में इमरान मसूद की अहम भूमिका</strong></li>
<li><strong>पश्चिमी यूपी में मजबूत मुस्लिम चेहरा बनकर उभरी हैं इकरा हसन</strong></li>
<li><strong>सीट बंटवारे को लेकर सपा-कांग्रेस में पहले से चल रही बयानबाजी</strong></li>
<li><strong>थानाभवन और मुजफ्फरनगर की सीटों पर बढ़ सकती है दावेदारी</strong></li>
</ul>
<h6>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पश्चिमी यूपी में नए राजनीतिक समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश आलम ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। दोनों नेताओं को कांग्रेस में लाने में सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है।</h6>
<h6>अमीर आलम परिवार के कांग्रेस में शामिल होने के बाद राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है कि क्या इमरान मसूद पश्चिमी यूपी में कांग्रेस की ताकत बढ़ाने के साथ सपा सांसद इकरा हसन के बढ़ते प्रभाव को भी चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।</h6>
<h3>अमीर आलम से कांग्रेस को क्या फायदा होगा?</h3>
<h6>अमीर आलम पश्चिमी यूपी के पुराने और प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं में शामिल हैं। वह कई बार विधायक रहने के साथ कैराना से लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। उनके बेटे नवाजिश आलम वर्ष 2012 में सपा के टिकट पर बुढ़ाना से विधायक चुने गए थे।</h6>
<h6>अमीर आलम और नवाजिश आलम ने हाल ही में चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी छोड़ दी थी। अब उनके कांग्रेस में आने से शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में पार्टी अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश करेगी।</h6>
<h3>इकरा हसन के प्रभाव से जुड़ी चर्चा क्यों?</h3>
<h6>कैराना से सपा सांसद इकरा हसन पश्चिमी यूपी में एक मजबूत युवा मुस्लिम नेता के रूप में उभरी हैं। उनके परिवार का कैराना, शामली और मुजफ्फरनगर की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रहा है। उनके भाई नाहिद हसन भी कैराना से सपा विधायक हैं।</h6>
<h6>वहीं, अमीर आलम और इकरा हसन के परिवारों की राजनीतिक जमीन लगभग एक ही क्षेत्र में रही है। इसी कारण इमरान मसूद और अमीर आलम की नई राजनीतिक साझेदारी को कुछ जानकार इकरा हसन के प्रभाव की घेराबंदी के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक दावा नहीं किया गया है।</h6>
<h3>सीट बंटवारे पर बढ़ सकता है दबाव</h3>
<h6>सपा और कांग्रेस के बीच 2027 का विधानसभा चुनाव गठबंधन में लड़ने की संभावना है, लेकिन सीटों के बंटवारे पर दोनों पार्टियों में दबाव की राजनीति शुरू हो चुकी है। इमरान मसूद पश्चिमी यूपी में कांग्रेस के लिए अधिक सीटों की मांग करते रहे हैं।</h6>
<h6>अमीर आलम परिवार के कांग्रेस में आने के बाद थानाभवन, मुजफ्फरनगर सदर और आसपास की दूसरी विधानसभा सीटों पर कांग्रेस की दावेदारी मजबूत हो सकती है। चर्चा है कि नवाजिश आलम थानाभवन सीट से कांग्रेस का टिकट मांग सकते हैं। ऐसी स्थिति में सपा और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर खींचतान बढ़ सकती है।</h6>
<h3>इमरान और इकरा के बीच पहले भी हुई बयानबाजी</h3>
<h6>इकरा हसन ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराने की ताकत समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के पास है। इसके जवाब में इमरान मसूद ने गठबंधन की जरूरत बताते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति एक जैसी नहीं है।</h6>
<h6>दोनों सांसदों की बयानबाजी के बाद यह सवाल उठने लगा कि पश्चिमी यूपी में सपा और कांग्रेस के बीच सीटों का बंटवारा आसानी से हो पाएगा या दोनों दलों के क्षेत्रीय नेताओं की दावेदारी गठबंधन की मुश्किल बढ़ाएगी।</h6>
<h1><strong>अमीर आलम और नवाजिश आलम के कांग्रेस में आने से पश्चिमी यूपी में इमरान मसूद की ताकत बढ़ी है, लेकिन असली परीक्षा 2027 के सीट बंटवारे में होगी। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस की बढ़ती दावेदारी सपा पर दबाव बनाएगी या इकरा हसन का राजनीतिक प्रभाव गठबंधन में समाजवादी पार्टी की पकड़ मजबूत करेगा।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 13:38:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान Mayor Election 2026: जयपुर, जोधपुर और कोटा में मेयर की जंग, आज ही आएंगे नतीजे</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम में मेयर पद के लिए मतदान हो रहा है। वोटिंग के बाद मतगणना शुरू होगी और आज ही तीनों शहरों को नया मेयर मिल जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/rajasthan-mayor-election-2026-mayors-battle-in-jaipur-jodhpur-and/article-2188"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/rajasthan-mayor-election-2026-jaipur-jodhpur-kota.webp.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>राजस्थान के तीन बड़े शहरों में मेयर की कुर्सी पर भाजपा-कांग्रेस का सीधा मुकाबला, जयपुर से जोधपुर तक क्रॉस वोटिंग पर टिकी सभी की नजर</strong></h1>
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जयपुर, जोधपुर और कोटा में मेयर चुनाव के लिए भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबला

<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राजस्थान डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>जयपुर, जोधपुर और कोटा में मेयर पद के लिए मतदान</strong></li>
<li><strong>सुबह 10 बजे शुरू हुई वोटिंग, दोपहर 2 बजे तक चलेगी</strong></li>
<li><strong>मतदान के बाद तुरंत शुरू होगी वोटों की गिनती</strong></li>
<li><strong>जयपुर और कोटा में भाजपा का संख्या बल मजबूत</strong></li>
<li><strong>जोधपुर में निर्दलीय पार्षद निभा सकते हैं निर्णायक भूमिका</strong></li>
</ul>
<h6>राजस्थान के तीन प्रमुख शहरों जयपुर, जोधपुर और कोटा में आज मेयर पद के लिए चुनाव हो रहा है। तीनों नगर निगमों में भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। पार्षद मतदान के जरिए अपने शहर का नया मेयर चुनेंगे और आज ही नतीजे घोषित होने की संभावना है।</h6>
<h3>जयपुर में सुनील कोठारी और सुनीता मावर का मुकाबला</h3>
<h6>जयपुर नगर निगम में भाजपा ने वार्ड संख्या 112 के पार्षद सुनील कोठारी को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने उनके सामने वार्ड संख्या 118 की पार्षद सुनीता मावर को मैदान में उतारा है।</h6>
<h6>जयपुर नगर निगम में भाजपा के पास कांग्रेस से अधिक पार्षद हैं, इसलिए उसका दावा मजबूत माना जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग की उम्मीद है। इसी कारण दोनों पार्टियां मतदान पूरा होने तक अपने पार्षदों को एकजुट रखने में जुटी हैं।</h6>
<h3>जोधपुर में निर्दलीयों के हाथ सत्ता की चाबी</h3>
<h6>जोधपुर नगर निगम में भाजपा के प्रसन्न चंद मेहता और कांग्रेस के राजेंद्र सिंह सोलंकी के बीच मुकाबला है। यहां दोनों प्रमुख पार्टियों की ताकत लगभग बराबर रही है, इसलिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है।</h6>
<h6>भाजपा ने सात निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिलने का दावा किया है। यदि मतदान के दौरान पार्टी के पक्ष में तय संख्या बनी रहती है तो भाजपा मेयर पद पर जीत हासिल कर सकती है। कांग्रेस भी अंतिम समय तक अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।</h6>
<h3>कोटा में दो महिला उम्मीदवार आमने-सामने</h3>
<h6>कोटा नगर निगम के मेयर पद के लिए भाजपा की अनुसुइया गोस्वामी और कांग्रेस की सुनीता सुमन के बीच मुकाबला है। नगर निगम में भाजपा के पार्षदों की संख्या अधिक होने के कारण उसका पलड़ा भारी माना जा रहा है।</h6>
<h6>इसके बावजूद दोनों पार्टियों की नजर क्रॉस वोटिंग पर है। किसी भी पार्षद का वोट बदलने से परिणाम का अंतर कम या ज्यादा हो सकता है। इसलिए मतदान के दौरान भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।</h6>
<h3>कब आएंगे चुनाव परिणाम?</h3>
<h6>मेयर चुनाव के लिए मतदान सुबह 10 बजे शुरू हुआ और दोपहर 2 बजे तक चलेगा। इसके बाद करीब 2:15 बजे वोटों की गिनती शुरू होगी। दोपहर 3 बजे तक परिणाम घोषित होने और नए मेयरों के शपथ लेने की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।</h6>
<h6>राजस्थान के सात नगर निगमों के मेयर चुनाव पहले ही पूरे हो चुके हैं। इनमें भाजपा ने छह नगर निगमों में जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस बीकानेर में अपना मेयर बनाने में सफल रही। अब जयपुर, जोधपुर और कोटा के नतीजे प्रदेश के शहरी राजनीतिक समीकरण की अंतिम तस्वीर साफ करेंगे।</h6>
<h1><strong>राजस्थान के सात नगर निगमों में छह मेयर पद जीत चुकी भाजपा की नजर अब जयपुर, जोधपुर और कोटा पर है। कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग और निर्दलीय पार्षदों से उम्मीद है, इसलिए अंतिम वोट की गिनती होने तक तीनों शहरों की मेयर लड़ाई पर पूरे प्रदेश की नजर बनी रहेगी।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान </category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/rajasthan-mayor-election-2026-mayors-battle-in-jaipur-jodhpur-and/article-2188</link>
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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 13:05:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>20 करोड़ का रथ? अखिलेश यादव बोले—दो-चार करोड़ कम भी दे दें, घर के बाहर खड़ा कर देंगे</title>
                                    <description><![CDATA[PDA रथ को 20 करोड़ की वैनिटी वैन बताए जाने पर अखिलेश यादव ने कहा कि दो-चार करोड़ कम भी दे दें तो वह रथ बेचने के लिए तैयार हैं और उसे खरीदार के घर पहुंचा देंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/akhilesh-yadav-reply-pda-rath-20-crore-vanity-van-raebareli/article-2187"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/akhilesh-yadav-pda-rath-20-crore-reply.webp-(2).jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>20 करोड़ के PDA रथ पर अखिलेश यादव का सीधा जवाब—कीमत सही है तो पैसे दे दीजिए, रथ आपके घर पहुंचा देंगे</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/akhilesh-yadav-pda-rath-20-crore-reply.webp-(2).jpg" alt="akhilesh-yadav-pda-rath-20-crore-reply.webp (2)" width="1366" height="768"/>
20 करोड़ के PDA रथ वाले सवाल पर अखिलेश यादव ने भाजपा को दिया सीधा जवाब

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>PDA रथ को 20 करोड़ की वैनिटी वैन बताने पर अखिलेश का जवाब</strong></li>
<li><strong>बोले—दो-चार करोड़ कम भी दे दें तो रथ बेच देंगे</strong></li>
<li><strong>भाजपा ने पोस्टर के जरिए रथ और सड़क को लेकर पूछा था सवाल</strong></li>
<li><strong>रायबरेली से शुरू हुई सपा की PDA रथ यात्रा</strong></li>
<li><strong>अखिलेश ने 2027 में गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने का किया ऐलान</strong></li>
</ul>
<h6>उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की PDA रथ यात्रा के बीच रथ की कीमत को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा की ओर से इसे 20 करोड़ रुपये की वैनिटी वैन बताए जाने पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया है।</h6>
<h3>कीमत सही है तो रथ खरीद लें—अखिलेश</h3>
<h6>रायबरेली में PDA रथ यात्रा के बाद मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग उनके रथ की कीमत 20 करोड़ रुपये बता रहे हैं, वे कुछ रकम कम करके उन्हें पैसे दे दें। वह अपना रथ बेचने के लिए तैयार हैं और उसे खरीदार के घर के बाहर खड़ा करवा देंगे।</h6>
<h6>अखिलेश यादव ने पहले 15 लाख रुपये कम देने की बात कही और फिर कहा कि दो से चार करोड़ रुपये कम भी दिए जाएं, तब भी वह रथ दे देंगे। उनके इस जवाब को भाजपा के आरोपों पर पलटवार के रूप में देखा जा रहा है।</h6>
<h3>भाजपा के पोस्टर से शुरू हुआ विवाद</h3>
<h6>रायबरेली में अखिलेश यादव की यात्रा से पहले भाजपा की ओर से एक पोस्टर जारी किया गया था। इसमें PDA रथ को 20 करोड़ रुपये की वैनिटी वैन बताते हुए सवाल किया गया कि जिस सड़क पर यह रथ चल रहा है, उसे किसने बनवाया है।</h6>
<h6>इसके जवाब में अखिलेश यादव ने रथ की कथित कीमत को ही मुद्दा बनाते हुए भाजपा को इसे खरीदने की चुनौती दे दी। उनके बयान के बाद रथ की कीमत को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है।</h6>
<h3>रथ को भारतीय संस्कृति से जोड़ा</h3>
<h6>अखिलेश यादव ने PDA रथ को भारतीय संस्कृति और महाभारत के कुरुक्षेत्र से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में रथ का विशेष महत्व है और इससे सीख मिलती है। समाजवादी पार्टी ने 24 सितंबर को रायबरेली से PDA रथ यात्रा की शुरुआत की है।</h6>
<h6>इस यात्रा को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा के बड़े चुनावी अभियान के रूप में देखा जा रहा है। रायबरेली में अखिलेश यादव का स्वागत फूलों की बारिश और बड़ी संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं के साथ किया गया।</h6>
<h3>गठबंधन के साथ चुनाव लड़ेगी सपा</h3>
<h6>अखिलेश यादव ने साफ किया कि समाजवादी पार्टी 2027 का विधानसभा चुनाव अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर लड़ेगी। उन्होंने कहा कि गठबंधन में सीटों की संख्या से अधिक जीतने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। जो दल जिस सीट पर जीत सकता है, उसे वही सीट मिलनी चाहिए।</h6>
<h6>उन्होंने भाजपा पर चुनावी व्यवस्था का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और दावा किया कि इस बार जनता अपने वोट से जवाब देगी। अखिलेश ने यह भी कहा कि PDA आंदोलन को रोकने की कोशिश सफल नहीं होगी।</h6>
<h1><strong>PDA रथ की कीमत पर उठे सवाल को अखिलेश यादव ने भाजपा के लिए खुली चुनौती में बदल दिया है। अब 20 करोड़ के कथित रथ से शुरू हुई यह राजनीतिक बहस 2027 के चुनाव में सपा और भाजपा के बीच नए सियासी टकराव का मुद्दा बन सकती है।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/akhilesh-yadav-reply-pda-rath-20-crore-vanity-van-raebareli/article-2187</link>
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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 12:27:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अखिलेश की रायबरेली यात्रा पर अजय राय का बड़ा बयान, बोले—वह यहां आए हैं तो हम इटावा-सैफई भी जा सकते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[अखिलेश यादव की रायबरेली PDA रथ यात्रा पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि चुनाव में कोई भी नेता कहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता भी कन्नौज, इटावा और सैफई जा सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/ajay-rai-reaction-akhilesh-yadav-raebareli-pda-yatra-etawah-saifai/article-2186"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/ajay-rai-akhilesh-yadav-raebareli-pda-yatra.webp2.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>कांग्रेस के गढ़ रायबरेली में अखिलेश यादव के शक्ति प्रदर्शन के बाद अजय राय के ‘इटावा-सैफई जाने’ वाले बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल, क्या UP Election 2027 से पहले बदलेंगे सपा-कांग्रेस गठबंधन के समीकरण?</strong></h1>
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रायबरेली PDA रथ यात्रा पर अखिलेश यादव को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने दिया बड़ा बयान

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>अखिलेश यादव की रायबरेली PDA रथ यात्रा पर अजय राय का बयान</strong></li>
<li><strong>बोले—चुनाव में कोई भी नेता कहीं भी जा सकता है</strong></li>
<li><strong>कांग्रेस नेताओं के इटावा, सैफई और कन्नौज जाने की कही बात</strong></li>
<li><strong>राहुल गांधी को बताया जनता के मुद्दों की मजबूत आवाज</strong></li>
<li><strong>2027 से पहले सपा-कांग्रेस के बीच शक्ति प्रदर्शन की चर्चा तेज</strong></li>
</ul>
<h6>उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की रायबरेली में निकाली गई PDA रथ यात्रा पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की प्रतिक्रिया सामने आई है। अजय राय ने कहा कि चुनाव के समय कोई भी नेता किसी भी क्षेत्र में जाकर प्रचार कर सकता है।</h6>
<h3>अखिलेश की यात्रा पर क्या बोले अजय राय?</h3>
<h6>अजय राय ने कहा कि अखिलेश यादव रायबरेली और अमेठी जा सकते हैं तो कांग्रेस के नेता भी कन्नौज, इटावा और सैफई जा सकते हैं। उन्होंने इसे चुनावी राजनीति का सामान्य हिस्सा बताते हुए कहा कि सभी दलों और नेताओं को किसी भी क्षेत्र में जनता के बीच जाने का अधिकार है।</h6>
<h6>अजय राय का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अखिलेश यादव ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से अपनी PDA रथ यात्रा के जरिए बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया है। इस यात्रा को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा की रणनीति और गठबंधन में अपनी मजबूत भूमिका दिखाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।</h6>
<h3>राहुल गांधी को लेकर किया बड़ा दावा</h3>
<h6>अजय राय ने कहा कि आज देश राहुल गांधी की तरफ देख रहा है। उनके मुताबिक राहुल गांधी आम जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठा रहे हैं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी लगातार सवाल कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस कार्यकर्ता अन्याय के खिलाफ जनता के बीच सक्रिय हैं।</h6>
<h3>क्या गठबंधन में बढ़ रही सियासी खींचतान?</h3>
<h6>समाजवादी पार्टी और कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सहयोगी दल हैं, लेकिन 2027 के चुनाव से पहले दोनों पार्टियां अपने-अपने संगठन और राजनीतिक प्रभाव को मजबूत करने में जुटी हैं। अखिलेश यादव का रायबरेली से अभियान शुरू करना और उसके बाद अजय राय का इटावा-सैफई वाला बयान गठबंधन के भीतर बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।</h6>
<h6>हालांकि, अजय राय ने अखिलेश यादव की यात्रा का सीधा विरोध नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चुनाव में सभी नेताओं को कहीं भी जाकर प्रचार करने की स्वतंत्रता है। इसके बावजूद उनके बयान से आगामी विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे और गठबंधन के भीतर नेतृत्व की भूमिका को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।</h6>
<h3>2027 के चुनाव पर टिकी नजर</h3>
<h6>रायबरेली को कांग्रेस का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है, जबकि इटावा और सैफई समाजवादी पार्टी के प्रमुख गढ़ हैं। ऐसे में दोनों दलों के नेताओं का एक-दूसरे के प्रभाव वाले क्षेत्रों में सक्रिय होना आने वाले समय में राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन को और तेज कर सकता है।</h6>
<h1><strong>रायबरेली में अखिलेश यादव की PDA रथ यात्रा और अजय राय के इटावा-सैफई वाले जवाब ने साफ कर दिया है कि 2027 से पहले सहयोगी सपा और कांग्रेस भी अपनी-अपनी ताकत दिखाने में पीछे नहीं रहेंगी। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह सियासी प्रतिस्पर्धा गठबंधन को मजबूत करेगी या सीट बंटवारे के समय नई खींचतान की वजह बनेगी।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/ajay-rai-reaction-akhilesh-yadav-raebareli-pda-yatra-etawah-saifai/article-2186</link>
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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 12:11:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>SIR के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में दो याचिकाएं, ज्ञानेश कुमार के 14 आदेश रद्द करने और हटाए गए वोटरों के नाम लौटाने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र में SIR के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट और उसकी कोल्हापुर सर्किट बेंच में दो याचिकाएं दाखिल हुई हैं। इनमें CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े 14 प्रशासनिक आदेशों को रद्द करने और हटाए गए मतदाताओं के नाम सूची में बहाल करने की मांग की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/bombay-high-court--maharashtra-sir--gyanesh-kumar--election-commission--deleted-voters--electoral-rolls--voter-list/article-2185"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/bombay-high-court-maharashtra-sir-voter-deletion-petitions.jpg.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/bombay-high-court-maharashtra-sir-voter-deletion-petitions.jpg.jpg" alt="bombay-high-court-maharashtra-sir-voter-deletion-petitions.jpg" width="1366" height="768"/>
महाराष्ट्र की SIR प्रक्रिया के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल कर हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की गई है।

<h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>चुनाव आयोग पर जारी विवाद अब अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। महाराष्ट्र में SIR रोकने, हटाए गए मतदाताओं के नाम वापस जोड़ने और CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े 14 आदेशों को रद्द करने की मांग वाली दो याचिकाएं बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल हुई हैं।</strong></h1>
<p> </p>
<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>SIR के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में दो याचिकाएं</strong></li>
<li><strong>CEC से जुड़े 14 प्रशासनिक आदेशों को चुनौती</strong></li>
<li><strong>हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग</strong></li>
<li><strong>बिना सुनवाई नाम काटने का लगाया गया आरोप</strong></li>
<li><strong>महाराष्ट्र में SIR रोकने की भी मांग</strong></li>
</ul>
<h6>मुंबई। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR का विवाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। SIR की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट और उसकी कोल्हापुर सर्किट बेंच में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं।</h6>
<h6>याचिकाओं में मतदाता सूची से मनमाने तरीके से नाम हटाने, प्रभावित मतदाताओं को सुनवाई का उचित अवसर नहीं देने और चुनाव आयोग की प्रक्रिया में गड़बड़ी होने के आरोप लगाए गए हैं।</h6>
<h2>Challenge To 14 Administrative Orders</h2>
<h6>कोल्हापुर सर्किट बेंच में महाराष्ट्र के तीन निवासियों की ओर से वकील असीम सरोदे ने एक याचिका दाखिल की है। इसमें पिछले लगभग 10 महीनों के दौरान चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े 14 प्रशासनिक आदेशों एवं कार्रवाइयों को रद्द करने की मांग की गई है।</h6>
<h6>याचिकाकर्ताओं ने उस रिपोर्ट का भी उल्लेख किया है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने तथा Electoral Roll Database से जुड़े फैसलों पर सवाल या आपत्तियां उठाई थीं।</h6>
<h6>हालांकि चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसके अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए और किसी आयुक्त ने औपचारिक असहमति दर्ज नहीं कराई।</h6>
<h2>Demand To Stop SIR In Maharashtra</h2>
<h6>याचिका में अदालत से महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग से संबंधित 2023 के कानून के Section 18 के तहत अपनी जिम्मेदारी का सही तरीके से पालन नहीं किया।</h6>
<h6>यह याचिकाकर्ताओं का कानूनी दावा है, जिस पर चुनाव आयोग का जवाब और अदालत का फैसला आना बाकी है।</h6>
<h2>Deleted Names Should Be Restored</h2>
<h6>याचिका में मांग की गई है कि महाराष्ट्र में SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए सभी लोगों के नाम दोबारा शामिल किए जाएं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि किसी योग्य नागरिक को उचित जांच और सुनवाई के बिना मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।</h6>
<h6>दूसरी याचिका में Booth Level Officers और संबंधित अधिकारियों पर मनमाने तरीके से काम करने का आरोप लगाया गया है। दावा है कि कई मतदाताओं के नाम सूची से हटाने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर नहीं मिला।</h6>
<h2>What Is The Election Commission’s Stand?</h2>
<h6>चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची से मृत, स्थानांतरित, दोहरे पंजीकरण और अपात्र नाम हटाकर सूची को सही बनाना है। आयोग के अनुसार, योग्य मतदाताओं को नाम जोड़ने और नाम हटाए जाने के खिलाफ आपत्ति एवं अपील करने की सुविधा उपलब्ध है।</h6>
<h6>आयोग विपक्ष के उन आरोपों को भी खारिज करता रहा है, जिनमें SIR के जरिए किसी खास राजनीतिक दल या मतदाता वर्ग को निशाना बनाने का दावा किया गया है।</h6>
<h2>High Court Has Not Passed Any Order Yet</h2>
<h6>दोनों याचिकाएं अदालत में दाखिल हो गई हैं, लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभी महाराष्ट्र की SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने या हटाए गए सभी मतदाताओं के नाम बहाल करने का कोई आदेश नहीं दिया है।</h6>
<h6>मामले पर 28 सितंबर के आसपास सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है। सुनवाई के दौरान अदालत चुनाव आयोग से जवाब मांग सकती है और याचिकाओं में लगाए गए आरोपों एवं उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच करेगी।</h6>
<h1><strong>बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल दोनों याचिकाओं ने महाराष्ट्र की SIR प्रक्रिया को बड़ी कानूनी चुनौती दे दी है। अब अदालत के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही होगा कि मतदाता सूची की सफाई और योग्य नागरिकों के मतदान अधिकार के बीच संतुलन बना या बिना पर्याप्त सुनवाई बड़ी संख्या में नाम हटा दिए गए।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/bombay-high-court--maharashtra-sir--gyanesh-kumar--election-commission--deleted-voters--electoral-rolls--voter-list/article-2185</link>
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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 11:52:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘सिर्फ मेरे बेटे को ही गोली क्यों मारी?’ जमुई कांड के आरोपी नंदन यादव की मां ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[जमुई में नाबालिग छात्रा से बदसलूकी के मामले में आरोपी नंदन यादव की मां ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पूछा कि घटना में कई आरोपी थे तो केवल उनके बेटे को गोली क्यों लगी?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/bihar/nandan-yadav-mother-police-bias-allegation-jamui-case/article-2183"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/yagyhhahbalt,y-p-rr-;-ltttpot-k-t-kkkkgggsglkevg-ee-lalrto-kboak]kkjjgmkff-kifr-fr-frr-(7).jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>नाबालिग छात्रा से बदसलूकी के बाद पुलिस कार्रवाई से सुर्खियों में आए जमुई कांड ने अब नया मोड़ ले लिया है। आरोपी नंदन यादव की मां ने पुलिस पर एकतरफा और जाति आधारित कार्रवाई का आरोप लगाया है। अब निष्पक्ष जांच के साथ इन आरोपों की सच्चाई सामने लाना भी पुलिस की जिम्मेदारी है।</strong></h1><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/yagyhhahbalt,y-p-rr-;-ltttpot-k-t-kkkkgggsglkevg-ee-lalrto-kboak%5Dkkjjgmkff-kifr-fr-frr-(7).jpg" alt="yagyhhahbalt,y p rr ; ltttpot k t kkkkgggsglkevg ee lalrto kboak]kkjjgmkff kifr fr frr (7)" width="1366" height="768"/>जमुई कांड के आरोपी नंदन यादव की मां ने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए पूछा कि कई आरोपियों में केवल उनके बेटे को गोली क्यों लगी।<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | बिहार डेस्क | 24 सितंबर 2026</strong></p><h1><strong>खबर में खास</strong></h1><ul><li><h6><strong>आरोपी नंदन यादव की मां ने पुलिस पर लगाए आरोप</strong></h6></li><li><h6><strong>पूछा—कई आरोपी थे तो सिर्फ मेरे बेटे को गोली क्यों लगी?</strong></h6></li><li><h6><strong>पुलिस पर एक ही जाति के लोगों को निशाना बनाने का दावा</strong></h6></li><li><h6><strong>पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान नंदन के घायल होने की बात कही</strong></h6></li><li><h6><strong>मामले की जांच के लिए गठित की गई है SIT</strong></h6></li></ul><h6>जमुई। बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा और उसके साथी से बदसलूकी के मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद अब नया विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस मुठभेड़ में घायल आरोपी नंदन यादव की मां ने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई और जाति के आधार पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है।</h6><h6>नंदन की मां ने सवाल उठाया कि घटना में कई लोग शामिल थे तो केवल उनके बेटे को ही गोली क्यों मारी गई? उनका आरोप है कि पुलिस एक ही जाति से जुड़े आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है, जबकि दूसरे लोगों को बचाया जा रहा है।</h6><h2>Mother Questions Police Action</h2><h6>नंदन यादव की मां ने कहा कि उनके बेटे को जीवित रहना चाहिए और मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि नंदन ने अपराध किया है तो उसे अदालत से सजा मिले, लेकिन पुलिस को उसकी जान नहीं लेनी चाहिए।</h6><h6>उन्होंने दावा किया कि घटना में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ समान कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि परिवार के इन आरोपों की किसी स्वतंत्र जांच में अभी पुष्टि नहीं हुई है।</h6><h2>What Is The Police Version?</h2><h6>पुलिस के अनुसार, नंदन यादव जमुई की घटना का प्रमुख आरोपी है। उसे पकड़ने के लिए चलाए गए अभियान के दौरान पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हुई थी। इसी कार्रवाई में नंदन के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।</h6><h6>पुलिस ने बताया था कि नंदन के साथ मौजूद दूसरे आरोपी हरेराम यादव ने भी भागने का प्रयास किया, जिसमें उसके पैर में चोट लगी। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका और उपलब्ध सबूतों की जांच की जा रही है।</h6><h2>What Happened In Jamui?</h2><h6>मामला 19 सितंबर की शाम का है। आरोप है कि सुनसान इलाके में कुछ युवकों ने एक नाबालिग छात्रा और उसके साथी को रोक लिया। छात्र के साथ मारपीट की गई और छात्रा से बदसलूकी की गई।</h6><h6>आरोपियों ने घटना का वीडियो भी बनाया, जो बाद में सोशल मीडिया पर प्रसारित हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पूरे देश में नाराजगी फैली और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठने लगी।</h6><h6>पीड़ित नाबालिगों की पहचान और वायरल वीडियो साझा करना कानूनन गलत है। महिला आयोग ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वीडियो हटाने और पीड़िता की पहचान सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।</h6><h2>SIT Is Investigating The Case</h2><h6>मामले की गंभीरता को देखते हुए जमुई के SDPO के नेतृत्व में SIT गठित की गई है। पुलिस कई आरोपियों को हिरासत में लेकर उनकी भूमिका की जांच कर रही है और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।</h6><h6>मामले में POCSO Act और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए बिहार पुलिस से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।</h6><h2>Allegations Need Investigation</h2><h6>आरोपी के परिवार को पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन इससे नंदन यादव पर लगे आरोप समाप्त नहीं हो जाते। इसी तरह परिवार द्वारा लगाए गए जातिगत भेदभाव के आरोपों को भी बिना जांच के सच नहीं माना जा सकता।</h6><h6>अब पुलिस को मामले की जांच में उपलब्ध सबूत, गिरफ्तारियों और मुठभेड़ से संबंधित पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से सामने रखनी होगी। इससे पीड़ितों को न्याय मिलने के साथ पुलिस कार्रवाई पर उठ रहे सवालों का भी जवाब मिल सकेगा।</h6><h1><strong>जमुई कांड में पहली प्राथमिकता नाबालिग पीड़ितों को न्याय दिलाना है, लेकिन पुलिस कार्रवाई भी कानून और समानता के दायरे में होनी चाहिए। नंदन यादव की मां के आरोपों के बाद अब SIT की निष्पक्ष जांच ही तय करेगी कि कार्रवाई सबूतों के आधार पर हुई या इसमें किसी स्तर पर भेदभाव किया गया।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिहार </category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 16:44:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टीमेटम, CJP ने मांगा इस्तीफा; देशभर में आंदोलन की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[SIR और चुनाव आयोग के भीतर मतभेद के दावों के बीच CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे में इस्तीफा मांगा है। मांग पूरी नहीं होने पर देशभर में आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/cjp-gyanesh-kumar-resignation-48-hour-ultimatum/article-2182"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/cjp-gyanesh-kumar-resignation-48-hour-ultimatum-sir-2026.jpg.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>SIR पर चुनाव आयोग पहले ही विपक्ष और पूर्व अधिकारियों के सवालों से घिरा हुआ है। अब CJP के 48 घंटे वाले अल्टीमेटम ने विवाद को सड़क तक ले जाने की चेतावनी दे दी है। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि उसके सभी महत्वपूर्ण फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/cjp-gyanesh-kumar-resignation-48-hour-ultimatum-sir-2026.jpg.jpg" alt="cjp-gyanesh-kumar-resignation-48-hour-ultimatum-sir-2026.jpg" width="1366" height="768"/>
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे में इस्तीफा देने की मांग करते हुए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 24 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे में इस्तीफे की मांग</strong></li>
<li><strong>CJP ने देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी</strong></li>
<li><strong>SIR से जुड़े फैसलों पर उठाए गंभीर सवाल</strong></li>
<li><strong>दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों के बाद बढ़ा विवाद</strong></li>
<li><strong>चुनाव आयोग ने मतभेद के दावों को किया खारिज</strong></li>
</ul>
<h6>नई दिल्ली। Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। CJP ने ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे के भीतर पद से इस्तीफा देने की मांग की है।</h6>
<h6>संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त तय समय के भीतर इस्तीफा नहीं देते हैं तो चुनाव आयोग के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। CJP ने ज्ञानेश कुमार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को प्रभावित करने के आरोप लगाए हैं।</h6>
<h2>CJP’s 48-Hour Ultimatum</h2>
<h6>CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली में आयोजित Press Conference के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि SIR से जुड़े फैसलों और मतदाता सूची की प्रक्रिया ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।</h6>
<h6>दीपके ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर संगठन देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन और आंदोलन करेगा।</h6>
<h6>CJP ने SIR की प्रक्रिया रोकने, चुनाव आयोग के कामकाज की निष्पक्ष जांच कराने और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है।</h6>
<h2>Why The Controversy Increased</h2>
<h6>यह विवाद एक रिपोर्ट सामने आने के बाद तेज हुआ, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले लगभग 10 महीनों में चुनाव आयोग के अलग-अलग फैसलों पर करीब 14 बार सवाल या आपत्तियां उठाई थीं।</h6>
<h6>इन आपत्तियों को मतदाता सूची में नाम जोड़ने, नाम हटाने, नाम दोबारा शामिल करने, Form-6 में बदलाव और SIR के दौरान अपनाई गई तकनीकी प्रक्रिया से जुड़ा बताया गया।</h6>
<h6>रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधना शुरू कर दिया। कई नेताओं ने SIR रोकने, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने और ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग उठाई है।</h6>
<h2>Election Commission’s Response</h2>
<h6>चुनाव आयोग ने अपने भीतर औपचारिक मतभेद होने के दावों को खारिज किया है। आयोग के अनुसार, बैठकों के दौरान अधिकारियों और चुनाव आयुक्तों की तरफ से सवाल एवं सुझाव आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।</h6>
<h6>आयोग ने कहा है कि SIR सहित उसके सभी महत्वपूर्ण फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं। किसी भी चुनाव आयुक्त ने अंतिम फैसले के खिलाफ औपचारिक असहमति दर्ज नहीं कराई।</h6>
<h6>इसलिए CJP की ओर से लगाए गए आरोप फिलहाल राजनीतिक दावे हैं। आरोपों की किसी स्वतंत्र या न्यायिक जांच में पुष्टि नहीं हुई है।</h6>
<h2>Questions Over Voter Rights</h2>
<h6>SIR के विरोध में सबसे बड़ा सवाल मतदाताओं के नाम को लेकर उठाया जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि तकनीकी Mapping और दस्तावेजों की प्रक्रिया के कारण योग्य मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो सकते हैं।</h6>
<h6>चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को साफ और सही बनाना है। योग्य मतदाताओं को नाम जोड़ने, Notice का जवाब देने और नाम हटने पर Appeal करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।</h6>
<h6>इसके बावजूद Form-6, माता-पिता की जानकारी, Logical Discrepancy और पुराने रिकॉर्ड से Mapping जैसे विषयों पर आयोग से अधिक पारदर्शिता की मांग की जा रही है।</h6>
<h2>Pressure Rising On Election Commission</h2>
<h6>CJP के अल्टीमेटम से पहले विपक्षी दल और पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा भी SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठा चुके हैं। अब आंदोलन की चेतावनी के कारण यह विवाद चुनावी और कानूनी बहस से आगे बढ़कर सड़कों तक पहुंच सकता है।</h6>
<h6>फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयोग की तरफ से CJP के 48 घंटे वाले अल्टीमेटम पर कोई अलग औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आयोग इन आरोपों का जवाब देता है या CJP देशव्यापी आंदोलन की घोषणा करती है।</h6>
<h1><strong>CJP के 48 घंटे वाले अल्टीमेटम ने SIR विवाद को नया और गंभीर मोड़ दे दिया है। अब सवाल सिर्फ चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद का नहीं, बल्कि देश की चुनावी व्यवस्था पर जनता के भरोसे का है। आयोग की अगली सफाई और CJP का आंदोलन इस विवाद की आगे की दिशा तय करेगा।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/cjp-gyanesh-kumar-resignation-48-hour-ultimatum/article-2182</link>
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                <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 16:18:41 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>‘SIR का कोई मतलब नहीं, चुनाव आयोग की छवि हो रही खराब’, पूर्व आयुक्त अशोक लवासा के बयान से मचा सियासी घमासान</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने SIR को उद्देश्यहीन बताते हुए इसकी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी प्रतिष्ठित संस्था की छवि खराब होते देख उन्हें दुख हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/sir-has-no-meaning-the-image-of-the-election-commission/article-2181"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/yagyhhahbalt,y-p-rr-;-ltttpot-k-t-kkkkgggsglkevg-ee-lalrto-kboak]kkjjgmkff-kifr-fr-frr-(4).jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>SIR को लेकर चुनाव आयोग पहले ही विपक्ष के सवालों से घिरा है। अब पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने इसकी प्रक्रिया को उद्देश्यहीन बताते हुए पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके बयान के बाद चुनाव आयोग को लेकर जारी विवाद और तेज हो सकता है।</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/yagyhhahbalt,y-p-rr-;-ltttpot-k-t-kkkkgggsglkevg-ee-lalrto-kboak%5Dkkjjgmkff-kifr-fr-frr-(4).jpg" alt="yagyhhahbalt,y p rr ; ltttpot k t kkkkgggsglkevg ee lalrto kboak]kkjjgmkff kifr fr frr (4)" width="1366" height="768"/>
पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने SIR की प्रक्रिया को उद्देश्यहीन बताते हुए चुनाव आयोग की छवि और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 24 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>अशोक लवासा ने SIR प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल</strong></li>
<li><strong>कहा—चुनाव आयोग की छवि खराब होने का दुख</strong></li>
<li><strong>SIR की मौजूदा प्रक्रिया को बताया उद्देश्यहीन</strong></li>
<li><strong>Form-6 में माता-पिता से जुड़े सवाल पर भी आपत्ति</strong></li>
<li><strong>तकनीक और कानून को लेकर चुनाव आयोग को दी नसीहत</strong></li>
</ul>
<h6>नई दिल्ली। मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने SIR की मौजूदा प्रक्रिया और चुनाव आयोग के काम करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं।</h6>
<h6>एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में अशोक लवासा ने कहा कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि चुनाव आयोग जैसी प्रतिष्ठित संस्था की छवि खराब हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि SIR के कारण मतदाताओं को हो रही परेशानी को लेकर चुनाव आयुक्त भी चिंतित दिखाई दिए।</h6>
<h2>Questions Raised On SIR Process</h2>
<h6>अशोक लवासा ने कहा कि जिस तरीके से SIR की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, उसमें सभी चीजें उचित तरीके से होती हुई दिखाई नहीं दे रही हैं। उन्होंने दावा किया कि इस बार SIR के लिए अपनाई गई प्रक्रिया का पहले कभी इस्तेमाल नहीं किया गया।</h6>
<h6>लवासा ने कहा कि चुनाव आयोग जब भी कोई नई व्यवस्था लागू करता है तो उसकी पूरी Guidelines जारी करता है। लोगों को स्पष्ट रूप से बताया जाता है कि प्रक्रिया कैसे पूरी होगी और उसे लागू करने का उद्देश्य क्या है।</h6>
<h6>उनका कहना है कि इस बार Logical Discrepancy और Voter Mapping जैसे शब्दों के स्पष्ट मायने और मापदंड मतदाताओं के सामने नहीं रखे गए।</h6>
<h2>Technology Cannot Replace Law</h2>
<h6>अशोक लवासा ने तकनीक और कानून के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि तकनीक का इस्तेमाल कानूनी प्रक्रिया को सहयोग देने के लिए किया जाना चाहिए। तकनीक ऐसी नहीं होनी चाहिए, जिससे कानून के तहत मिलने वाले अधिकारों में बाधा पैदा हो।</h6>
<h6>उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई नागरिक पिछले 20 या 25 वर्षों से मतदाता सूची में शामिल है और तकनीकी व्यवस्था उसे किसी पुराने रिकॉर्ड से जोड़ नहीं पा रही, तो इसका असर उसके मतदान के अधिकार पर क्यों पड़ना चाहिए?</h6>
<h2>Question Over Form-6</h2>
<h6>मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले Form-6 में माता-पिता से जुड़ा सवाल शामिल करने पर भी अशोक लवासा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह सवाल चुनाव आयोग से पूछा जाना चाहिए कि इसे फॉर्म में शामिल करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।</h6>
<h6>लवासा के अनुसार, SIR के माध्यम से जो लक्ष्य हासिल करने का दावा किया जा रहा है, उसे किसी आसान और कम परेशानी वाली प्रक्रिया से भी पूरा किया जा सकता था। इसी आधार पर उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को उद्देश्यहीन बताया।</h6>
<h2>Election Commission Already Facing Questions</h2>
<h6>SIR को लेकर पिछले कुछ दिनों से चुनाव आयोग के भीतर मतभेद होने के दावे भी सामने आए हैं। हालांकि आयोग ने साफ किया है कि बैठकों में अधिकारियों ने सवाल और सुझाव जरूर दिए थे, लेकिन किसी आयुक्त ने अंतिम निर्णय के खिलाफ औपचारिक असहमति दर्ज नहीं कराई।</h6>
<h6>विपक्ष लगातार SIR की प्रक्रिया, मतदाताओं के नाम हटने और Form-6 में हुए बदलाव को लेकर चुनाव आयोग से जवाब मांग रहा है। अब पूर्व चुनाव आयुक्त का बयान आने के बाद आयोग पर अपनी प्रक्रिया और उसके मापदंडों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने का दबाव बढ़ सकता है।</h6>
<h2>Why The Statement Matters</h2>
<h6>अशोक लवासा पहले चुनाव आयोग के भीतर काम कर चुके हैं। इसलिए SIR की प्रक्रिया, पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर उनके सवाल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।</h6>
<h6>हालांकि, उनके विचार व्यक्तिगत हैं और चुनाव आयोग का पक्ष इससे अलग हो सकता है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि आयोग लवासा के सवालों का कोई जवाब देता है या अपनी पिछली सफाई पर कायम रहता है।</h6>
<h1><strong>SIR पर विपक्ष के आरोपों के बीच पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के सवालों ने विवाद को नया मोड़ दे दिया है। अब मामला केवल मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चुनाव आयोग की पारदर्शिता, उसकी कार्यप्रणाली और मतदाताओं के अधिकारों पर आकर टिक गया है।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/sir-has-no-meaning-the-image-of-the-election-commission/article-2181</link>
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                <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 15:11:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अखिलेश यादव का बड़ा मुस्लिम दांव! जासमीर अंसारी को नेता प्रतिपक्ष बनाने का फैसला, ओवैसी-मायावती की रणनीति पर पड़ेगा असर?</title>
                                    <description><![CDATA[अखिलेश यादव ने लाल बिहारी यादव की जगह मोहम्मद जासमीर अंसारी को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनाने का फैसला किया है। चुनाव से पहले इस कदम को PDA और मुस्लिम-यादव समीकरण मजबूत करने की कोशिश माना जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/akhilesh-yadav-jasmir-ansari-muslim-vote-up-election-2027/article-2180"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/yagyhhahbalt,y-p-rr-;-ltttpot-k-t-kkkkgggsglkevg-ee-lalrto-kboak]kkjjgmkff-kifr-fr-frr-(2).jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>UP Election 2027 से पहले अखिलेश यादव ने मोहम्मद जासमीर अंसारी को बड़ी जिम्मेदारी देकर मुस्लिम मतदाताओं के लिए सीधा राजनीतिक संदेश भेजा है। सपा के इस फैसले से ओवैसी, मायावती और कांग्रेस की मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने की रणनीति को नई चुनौती मिल सकती है।</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/yagyhhahbalt,y-p-rr-;-ltttpot-k-t-kkkkgggsglkevg-ee-lalrto-kboak%5Dkkjjgmkff-kifr-fr-frr-(2).jpg" alt="yagyhhahbalt,y p rr ; ltttpot k t kkkkgggsglkevg ee lalrto kboak]kkjjgmkff kifr fr frr (2)" width="1366" height="768"/>
UP Election 2027 से पहले अखिलेश यादव ने मोहम्मद जासमीर अंसारी को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनाने का फैसला किया है।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 24 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>जासमीर अंसारी को नेता प्रतिपक्ष बनाने का फैसला</strong></li>
<li><strong>अखिलेश यादव ने विधान परिषद के सभापति को भेजा पत्र</strong></li>
<li><strong>लाल बिहारी यादव की जगह जासमीर को मिलेगी जिम्मेदारी</strong></li>
<li><strong>मुस्लिम मतदाताओं के बीच पकड़ मजबूत करने की कोशिश</strong></li>
<li><strong>AIMIM, बसपा और कांग्रेस की रणनीति पर पड़ सकता है असर</strong></li>
</ul>
<h6>लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ा राजनीतिक फैसला लिया है। अखिलेश ने मोहम्मद जासमीर अंसारी को उत्तर प्रदेश विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनाने का निर्णय किया है। इस संबंध में विधान परिषद के सभापति को पत्र भी भेजा गया है।</h6>
<h6>जासमीर अंसारी अभी विधान परिषद में उप नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सपा ने अब उन्हें लाल बिहारी यादव की जगह नेता प्रतिपक्ष बनाने का फैसला किया है। चुनाव से पहले हुए इस बदलाव को मुस्लिम मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने की कोशिश माना जा रहा है।</h6>
<h2>Akhilesh’s Muslim Strategy</h2>
<h6>अखिलेश यादव लगातार पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी PDA की राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं। जासमीर अंसारी को बड़ी जिम्मेदारी देकर उन्होंने PDA के साथ सपा के पुराने मुस्लिम-यादव समीकरण को भी मजबूत करने का प्रयास किया है।</h6>
<h6>उत्तर प्रदेश की कई विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता चुनाव परिणाम तय करने की स्थिति में हैं। प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में लगभग 143 सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव माना जाता है। इनमें करीब 70 सीटें ऐसी हैं, जहां मुस्लिम आबादी 20 से 30 प्रतिशत के बीच बताई जाती है।</h6>
<h2>Challenge For AIMIM And BSP</h2>
<h6>AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी लगातार समाजवादी पार्टी पर मुस्लिम नेताओं को पर्याप्त राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं देने का आरोप लगाते रहे हैं। AIMIM ने सपा के सामने गठबंधन का प्रस्ताव भी रखा था, लेकिन अखिलेश यादव ने पुराने गठबंधन को ही जारी रखने की बात कही थी।</h6>
<h6>बसपा प्रमुख मायावती, आजाद समाज पार्टी और कांग्रेस की नजर भी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम मतदाताओं पर है। ऐसे में जासमीर अंसारी को नेता प्रतिपक्ष बनाने का फैसला इन दलों की रणनीति के जवाब के रूप में भी देखा जा रहा है।</h6>
<h2>Who Is Jasmir Ansari?</h2>
<h6>मोहम्मद जासमीर अंसारी सीतापुर जिले से आते हैं। वह लहरपुर विधानसभा सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं। उनकी पत्नी कैसर जहां सीतापुर लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी हैं।</h6>
<h6>जासमीर अंसारी का राजनीतिक सफर बसपा से शुरू हुआ। इसके बाद वह कांग्रेस में गए और फिर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। वर्तमान में वह विधान परिषद के सदस्य और उप नेता प्रतिपक्ष हैं।</h6>
<h2>Message Before UP Election 2027</h2>
<h6>सपा के इस फैसले का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पिछले कुछ समय से मुस्लिम मतदाताओं की नाराजगी और राजनीतिक हिस्सेदारी का सवाल उठता रहा है। विरोधी दल लगातार दावा कर रहे हैं कि सपा मुस्लिम वोट तो लेती है, लेकिन नेतृत्व में पर्याप्त हिस्सेदारी नहीं देती।</h6>
<h6>जासमीर अंसारी को नेता प्रतिपक्ष बनाने का फैसला करके अखिलेश यादव इस आरोप का जवाब देने और मुस्लिम समाज को भरोसे का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इसका चुनावी असर कितना होगा, यह उम्मीदवारों के चयन और संगठन में मिलने वाली हिस्सेदारी से तय होगा।</h6>
<h1><strong>जासमीर अंसारी को नेता प्रतिपक्ष बनाने का फैसला केवल एक पद का बदलाव नहीं, बल्कि UP Election 2027 से पहले अखिलेश यादव का बड़ा राजनीतिक संदेश है। अब असली सवाल यह है कि क्या इस फैसले से सपा मुस्लिम मतदाताओं का भरोसा मजबूत कर पाएगी या ओवैसी, मायावती और कांग्रेस उसके परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाने में सफल होंगे?</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/akhilesh-yadav-jasmir-ansari-muslim-vote-up-election-2027/article-2180</link>
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                <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 14:38:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस के गढ़ में अखिलेश यादव का शक्ति प्रदर्शन, PDA रथ पर फूलों की बारिश की तैयारी; रायबरेली में जुटे सपा कार्यकर्ता</title>
                                    <description><![CDATA[सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव PDA रथ के साथ आज रायबरेली पहुंच रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने उनके भव्य स्वागत और फूलों की बारिश की तैयारी की है। इस दौरे को UP Election 2027 से पहले सपा के बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/akhilesh-yadav-pda-rath-grand-welcome-raebareli/article-2179"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/yagyhhahbalt,y-p-rr-;-ltttpot-k-t-kkkkgggsglkevg-ee-lalrto-kboak]kkjjgmkff-kifr-fr-frr.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>कांग्रेस के सबसे मजबूत गढ़ रायबरेली में अखिलेश यादव की PDA रथ यात्रा ने उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा दी है। फूलों की बारिश और भव्य स्वागत की तैयारियों के बीच सपा इस दौरे से कार्यकर्ताओं में जोश भरने के साथ 2027 के लिए अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने जा रही है।</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/yagyhhahbalt,y-p-rr-;-ltttpot-k-t-kkkkgggsglkevg-ee-lalrto-kboak%5Dkkjjgmkff-kifr-fr-frr.jpg" alt="yagyhhahbalt,y p rr ; ltttpot k t kkkkgggsglkevg ee lalrto kboak]kkjjgmkff kifr fr frr" width="1366" height="768"/>
रायबरेली में PDA रथ के साथ पहुंच रहे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के भव्य स्वागत और फूलों की बारिश की तैयारी की गई है।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 24 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>PDA रथ के साथ रायबरेली पहुंच रहे अखिलेश यादव</strong></li>
<li><strong>फूलों की बारिश और भव्य स्वागत की तैयारी</strong></li>
<li><strong>हरचंदपुर विधायक राहुल लोधी के घर जाएंगे सपा अध्यक्ष</strong></li>
<li><strong>छात्रसभा कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात का कार्यक्रम</strong></li>
<li><strong>UP Election 2027 से पहले सपा का बड़ा शक्ति प्रदर्शन</strong></li>
</ul>
<h6>रायबरेली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के रायबरेली दौरे को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह दिखाई दे रहा है। PDA रथ के साथ रायबरेली पहुंच रहे अखिलेश यादव के स्वागत के लिए सपा ने बड़े स्तर पर तैयारियां की हैं। निर्धारित रास्ते पर जगह-जगह कार्यकर्ता उनका स्वागत करेंगे और रथ पर फूलों की बारिश की जाएगी।</h6>
<h6>अखिलेश यादव लखनऊ से सड़क मार्ग के जरिए रायबरेली पहुंचेंगे। उनके स्वागत के लिए अलग-अलग स्थानों पर सपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी का प्रयास इस दौरे को भव्य राजनीतिक कार्यक्रम में बदलने का है।</h6>
<h2>Rahul Lodhi’s House Visit</h2>
<h6>रायबरेली दौरे के दौरान अखिलेश यादव हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी के घर भी जाएंगे। वहां वह विधायक और समाजवादी छात्रसभा के उन कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे, जिनका पिछले दिनों एक विवाद के दौरान पुलिस से टकराव हुआ था।</h6>
<h6>सपा ने विधायक के साथ कथित बदसलूकी को PDA समाज पर हमला बताया था। हालांकि पुलिस प्रशासन ने मारपीट और बदसलूकी के आरोपों को गलत बताते हुए खारिज किया था। अब अखिलेश यादव स्वयं रायबरेली पहुंचकर विधायक और कार्यकर्ताओं से पूरे मामले की जानकारी लेंगे।</h6>
<h2>Workers Ready For Grand Welcome</h2>
<h6>अखिलेश यादव के दौरे को लेकर रायबरेली की सड़कों और प्रमुख चौराहों पर पोस्टर एवं होर्डिंग लगाए गए हैं। कार्यकर्ताओं ने स्वागत द्वार बनाए हैं और बड़ी संख्या में समर्थकों को जुटाने की तैयारी की गई है।</h6>
<h6>PDA रथ के रायबरेली में प्रवेश करने से लेकर कार्यक्रम स्थल तक कई स्थानों पर फूल बरसाने की योजना है। सपा नेता इस कार्यक्रम को कार्यकर्ताओं का अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रति उत्साह और समर्थन बता रहे हैं।</h6>
<h2>Political Message From Congress Stronghold</h2>
<h6>रायबरेली को लंबे समय से कांग्रेस का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता है। ऐसे में अखिलेश यादव का PDA रथ लेकर यहां पहुंचना केवल कार्यकर्ताओं से मिलने वाला सामान्य दौरा नहीं माना जा रहा है। इसके पीछे 2027 के विधानसभा चुनाव से जुड़े राजनीतिक समीकरण भी देखे जा रहे हैं।</h6>
<h6>सपा रायबरेली में अपनी संगठनात्मक ताकत दिखाकर यह संदेश देना चाहती है कि उत्तर प्रदेश में वह विपक्ष की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति है। इसका असर भविष्य में कांग्रेस के साथ होने वाली सीटों की बातचीत पर भी पड़ सकता है।</h6>
<h2>Focus On PDA Strategy</h2>
<h6>समाजवादी पार्टी पिछले कुछ वर्षों से पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी PDA समीकरण को अपनी चुनावी रणनीति के केंद्र में रख रही है। अखिलेश यादव लगातार सामाजिक न्याय और PDA वर्ग के अधिकारों का मुद्दा उठा रहे हैं।</h6>
<h6>रायबरेली दौरे के दौरान कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं से उनकी मुलाकात को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सपा इस यात्रा के माध्यम से अपने समर्थकों को एकजुट करने और जमीनी संगठन को सक्रिय करने का प्रयास करेगी।</h6>
<h2>Eyes On UP Election 2027</h2>
<h6>रायबरेली में अखिलेश यादव के PDA रथ और स्वागत की तैयारियों ने जिले का राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। भाजपा सहित सपा के राजनीतिक विरोधियों की भी इस दौरे पर नजर है।</h6>
<h6>यह कार्यक्रम ऐसे समय हो रहा है, जब सभी प्रमुख दल UP Election 2027 की तैयारियों में जुट गए हैं। ऐसे में रायबरेली में होने वाला यह शक्ति प्रदर्शन सपा के आगामी चुनावी अभियान की दिशा का बड़ा संकेत माना जा रहा है।</h6>
<h1><strong>अखिलेश यादव का रायबरेली दौरा केवल फूलों की बारिश और भव्य स्वागत तक सीमित नहीं है। कांग्रेस के गढ़ से PDA की ताकत दिखाकर सपा 2027 से पहले अपने कार्यकर्ताओं, सहयोगी दलों और विरोधियों—तीनों को बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में है।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/akhilesh-yadav-pda-rath-grand-welcome-raebareli/article-2179</link>
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                <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 14:04:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC के नाम-सिंबल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से पूछा—आखिर कब तक लेंगे अंतिम फैसला?</title>
                                    <description><![CDATA[TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर छिड़ी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा है कि इस विवाद पर अंतिम फैसला लेने में कितना समय लगेगा। ममता बनर्जी ने आयोग के अंतरिम आदेश को चुनौती दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/mamata-banerjee-supreme-court-tmc-symbol-dispute/article-2178"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/mamata-banerjee-supreme-court-tmc-symbol-dispute-2026.jpg.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><span style="font-weight:bolder;">TMC की असली पहचान को लेकर छिड़ी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट के सवाल के बाद चुनाव आयोग पर विवाद का जल्द निपटारा करने का दबाव बढ़ गया है। अब आयोग की समयसीमा और अगले अदालती आदेश पर पूरे बंगाल की नजर टिकी है।</span></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/mamata-banerjee-supreme-court-tmc-symbol-dispute-2026.jpg.jpg" alt="mamata-banerjee-supreme-court-tmc-symbol-dispute-2026.jpg" width="1366" height="768"/>
TMC के नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर ममता बनर्जी की याचिका सुनते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अंतिम फैसले की समयसीमा मांगी।

<p><span style="font-weight:bolder;"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 24 सितंबर 2026</strong></span></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई</strong></li>
<li><strong>चुनाव आयोग से मांगी गई अंतिम फैसले की समयसीमा</strong></li>
<li><strong>TMC का नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न फिलहाल फ्रीज</strong></li>
<li><strong>दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को मिले अलग नाम और चुनाव चिह्न</strong></li>
<li><strong>बंगाल के आगामी उपचुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल</strong></li>
</ul>
<h6><strong>नई दिल्ली।</strong> तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न को लेकर जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा कि इस मामले में अंतिम फैसला लेने में उसे कितना समय लगेगा।</h6>
<h6>सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से विवाद के निपटारे के लिए एक संभावित और उचित समयसीमा बताने को कहा है। हालांकि, अदालत ने अभी TMC का मूल नाम या ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न ममता बनर्जी के गुट को वापस देने का कोई आदेश नहीं दिया है।</h6>
<h2>ममता बनर्जी ने क्यों दायर की याचिका?</h2>
<h6>चुनाव आयोग ने TMC के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच पार्टी पर अधिकार को लेकर विवाद सामने आने के बाद ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को अंतरिम रूप से फ्रीज कर दिया था।</h6>
<h6>आयोग के इसी फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने चुनाव आयोग के आदेश को चुनौती देते हुए पार्टी का मूल नाम और चुनाव चिह्न वापस दिए जाने की मांग की है।</h6>
<h2>कपिल सिब्बल ने उठाए फैसले पर सवाल</h2>
<h6>ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने चुनाव आयोग के फैसले और उसके समय पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि पश्चिम बंगाल में उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के बाद पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज करने का आदेश दिया गया।</h6>
<h6>सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी कारण अदालत ने तत्काल चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के स्थान पर चुनाव आयोग से मुख्य विवाद पर अंतिम फैसला लेने की समयसीमा मांगी है।</h6>
<h2>दोनों गुटों को मिले नए नाम और सिंबल</h2>
<h6>चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया है।</h6>
<h6>वहीं, विरोधी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। यह केवल अस्थायी व्यवस्था है। मूल पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर किस गुट का अधिकार होगा, इसका अंतिम फैसला चुनाव आयोग करेगा।</h6>
<h2>बंगाल की राजनीति पर पड़ेगा बड़ा असर</h2>
<h6>‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न लंबे समय से ममता बनर्जी और TMC की राजनीतिक पहचान रहा है। ऐसे में इस चिह्न का फ्रीज होना केवल कानूनी विवाद नहीं है। इसका सीधा असर पार्टी कार्यकर्ताओं, मतदाताओं और आगामी चुनावों की रणनीति पर पड़ सकता है।</h6>
<h6>अब चुनाव आयोग को दोनों गुटों के संगठनात्मक समर्थन, दस्तावेजों और पार्टी पर अधिकार से जुड़े दावों की जांच करनी होगी। आयोग की ओर से दी जाने वाली समयसीमा के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई कर सकता है।</h6>
<h1><strong>सुप्रीम कोर्ट के सीधे सवाल ने TMC के नाम और चुनाव चिह्न की लड़ाई को निर्णायक मोड़ पर पहुंचा दिया है। अब चुनाव आयोग का जवाब तय करेगा कि यह विवाद जल्द सुलझेगा या कानूनी लड़ाई और लंबी चलेगी। अंतिम फैसले का असर केवल ममता बनर्जी के गुट पर नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की पूरी राजनीति पर दिखाई दे सकता है।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/mamata-banerjee-supreme-court-tmc-symbol-dispute/article-2178</link>
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                <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 13:41:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जमशेदपुर में खड़े ट्रेलर से टकराई तेज रफ्तार कार, मंत्री दीपिका पांडेय की बेटी तृषा समेत चार की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[जमशेदपुर के मरीन ड्राइव पर तेज रफ्तार कार सड़क पर खड़े ब्रेकडाउन ट्रेलर से टकरा गई। हादसे में झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी तृषा सिंह समेत चार लोगों की मौत हो गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/jamshedpur-accident-deepika-pandey-daughter-trisha-four-dead/article-2177"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/jamshedpur-road-accident-minister-deepika-pandey-daughter-trisha.jpg.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>जमशेदपुर के मरीन ड्राइव पर तड़के तीन बजे हुए भीषण हादसे में कार सवार चार लोगों की जान चली गई; मृतकों में झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी तृषा सिंह भी शामिल</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/jamshedpur-road-accident-minister-deepika-pandey-daughter-trisha.jpg.jpg" alt="jamshedpur-road-accident-minister-deepika-pandey-daughter-trisha.jpg" width="1366" height="768"/>
जमशेदपुर मरीन ड्राइव पर हुए सड़क हादसे में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी तृषा सिंह समेत चार लोगों की मौत हो गई।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 24 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>सोनारी मरीन ड्राइव पर तड़के करीब तीन बजे हुआ हादसा</strong></li>
<li><strong>सड़क पर खड़े ब्रेकडाउन ट्रेलर से टकराई कार</strong></li>
<li><strong>मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी समेत चार की मौत</strong></li>
<li><strong>मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जताया गहरा दुख</strong></li>
</ul>
<h6>झारखंड के जमशेदपुर में गुरुवार तड़के एक भीषण सड़क हादसे में चार लोगों की मौत हो गई। मृतकों में राज्य की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी तृषा सिंह भी शामिल हैं।</h6>
<h6>हादसा सोनारी थाना क्षेत्र के मरीन ड्राइव पर तड़के करीब तीन बजे हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार तेज रफ्तार कार सड़क पर खड़े एक ब्रेकडाउन ट्रेलर के पिछले हिस्से से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार लोग अंदर फंस गए।</h6>
<h2>कार में फंसे लोगों को निकाला गया</h2>
<h6>हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों की सहायता से कार में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया और एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने चारों को मृत घोषित कर दिया।</h6>
<h6>पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर हादसे की जांच शुरू कर दी है। दुर्घटना के समय कार की रफ्तार कितनी थी, ट्रेलर सड़क पर किस कारण खड़ा था और वहां सुरक्षा संकेत लगाए गए थे या नहीं—इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है।</h6>
<h2>मंत्री की बेटी तृषा सिंह भी हादसे का शिकार</h2>
<h6>हादसे में जान गंवाने वालों में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की छोटी बेटी तृषा सिंह भी शामिल हैं। घटना की जानकारी मिलते ही मंत्री और उनके परिजन जमशेदपुर के लिए रवाना हुए।</h6>
<h6>तृषा सिंह के निधन की खबर सामने आने के बाद झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर है। कई नेताओं ने मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और हादसे में जान गंवाने वाले दूसरे लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।</h6>
<h2>हेमंत सोरेन ने जताया दुख</h2>
<h6>झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हादसे को बेहद दुखद और हृदयविदारक बताया। उन्होंने कहा कि अपनी संतान को खोने का दुख किसी भी माता-पिता और परिवार के लिए असहनीय होता है।</h6>
<h6>मुख्यमंत्री ने मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और दुर्घटना में जान गंवाने वाले अन्य लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना की।</h6>
<h2><strong>जमशेदपुर का यह हादसा एक बार फिर सड़कों पर खड़े खराब भारी वाहनों और तेज रफ्तार के घातक खतरे को सामने लाता है। पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि ट्रेलर को सड़क पर सुरक्षा संकेतों के साथ खड़ा किया गया था या नहीं और दुर्घटना के लिए किसकी लापरवाही जिम्मेदार थी।</strong></h2>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/jamshedpur-accident-deepika-pandey-daughter-trisha-four-dead/article-2177</link>
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                <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 13:22:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UP Election 2027 से पहले 21 सीटों का सेमीफाइनल, राज्यसभा की 10वीं सीट पर BJP-SP में फंसा मुकाबला</title>
                                    <description><![CDATA[UP Election 2027 से पहले राज्यसभा और विधान परिषद की 21 सीटों पर राजनीतिक मुकाबला होने जा रहा है। नौ राज्यसभा सीटों का गणित लगभग साफ है, लेकिन 10वीं सीट BJP और सपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/up-2027-rajya-sabha-mlc-election-bjp-sp-semifinal/article-2176"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/untitled-design-(2).jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में BJP और सपा की पहली बड़ी परीक्षा होने जा रही है; राज्यसभा की 10वीं सीट पर विधायकों का गणित टकराएगा तो 11 MLC सीटों पर शिक्षक और स्नातक मतदाता तय करेंगे सियासी बढ़त</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/untitled-design-(2).jpg" alt="Untitled design (2)" width="1366" height="768"/>
UP Election 2027 से पहले राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों में BJP तथा समाजवादी पार्टी की राजनीतिक ताकत की परीक्षा होगी।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 24 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>UP में राज्यसभा की 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को मतदान</strong></li>
<li><strong>नौ सीटों का गणित लगभग साफ, 10वीं पर मुकाबले के आसार</strong></li>
<li><strong>11 शिक्षक-स्नातक MLC सीटों के लिए 23 अक्टूबर को वोटिंग</strong></li>
<li><strong>दोनों चुनावों को माना जा रहा UP Election 2027 का सेमीफाइनल</strong></li>
</ul>
<h6>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले BJP और समाजवादी पार्टी एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा की तैयारी में जुट गई हैं। प्रदेश में राज्यसभा की 10 और विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव होने हैं। इन 21 सीटों के नतीजे सरकार नहीं बदलेंगे, लेकिन राजनीतिक दलों की एकजुटता, संगठन और चुनावी तैयारी की तस्वीर जरूर सामने रखेंगे।</h6>
<h6>राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा। विधान परिषद की पांच स्नातक और छह शिक्षक कोटे की सीटों पर 23 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।</h6>
<h2>राज्यसभा की 10वीं सीट पर फंसा गणित</h2>
<h6>उत्तर प्रदेश विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के आधार पर BJP अपने सात और समाजवादी पार्टी अपने दो उम्मीदवारों को आसानी से राज्यसभा पहुंचाने की स्थिति में दिखाई देती है। असली मुकाबला 10वीं सीट को लेकर हो सकता है।</h6>
<h6>एक उम्मीदवार को जीतने के लिए करीब 37 विधायकों के वोट की जरूरत पड़ सकती है। BJP अपने सहयोगी दलों के समर्थन से आठवीं सीट जीतने की कोशिश करेगी। वहीं सपा भी अतिरिक्त और वरीयता वाले वोटों के सहारे मुकाबला रोचक बनाने की रणनीति तैयार कर सकती है।</h6>
<h6>ऐसी स्थिति में सहयोगी दलों, निर्दलीय विधायकों और संभावित क्रॉस वोटिंग की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। दोनों पक्ष अपने विधायकों को एकजुट रखकर चुनाव से पहले राजनीतिक संदेश देने की कोशिश करेंगे।</h6>
<h2>BSP का प्रतिनिधित्व समाप्त होने का खतरा</h2>
<h6>राज्यसभा की जिन सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें BSP सांसद रामजी गौतम की सीट भी शामिल है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में फिलहाल BSP का कोई विधायक नहीं है। ऐसे में पार्टी के लिए अपना उम्मीदवार राज्यसभा भेजना लगभग असंभव दिखाई देता है।</h6>
<h6>यदि BSP का कोई उम्मीदवार नहीं जीतता है तो उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व समाप्त हो सकता है। यह स्थिति प्रदेश की बदलती राजनीतिक ताकत का बड़ा संकेत मानी जाएगी।</h6>
<h2>MLC चुनाव क्यों हैं महत्वपूर्ण?</h2>
<h6>उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाला चुनाव राज्यसभा से अलग है। इन सीटों पर शिक्षक और स्नातक मतदाता वोट करेंगे। इसलिए नतीजों से पता चलेगा कि पढ़े-लिखे और नौकरीपेशा मतदाताओं के बीच किस पार्टी का संगठन अधिक मजबूत है।</h6>
<h6>पिछले चुनाव में BJP ने इन 11 सीटों में से छह पर जीत हासिल की थी। इस बार पार्टी अधिक सीटें जीतकर 2027 से पहले मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की कोशिश करेगी। दूसरी तरफ सपा भी शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने में जुटी है।</h6>
<h2>टिकट वितरण से साधे जाएंगे जातीय समीकरण</h2>
<h6>राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में BJP और सपा जातीय, क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखेंगी। टिकट वितरण के जरिए दोनों पार्टियां उन वर्गों को संदेश देने की कोशिश कर सकती हैं, जिनकी 2027 के विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका रहने वाली है।</h6>
<h6>BJP की कोर कमेटी में संभावित उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा होने की संभावना है। सपा भी ऐसे चेहरों पर दांव लगा सकती है जो PDA समीकरण के साथ पार्टी के राजनीतिक संदेश को मजबूत कर सकें।</h6>
<h2><strong>राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव सरकार बनाने का फैसला नहीं करेंगे, लेकिन इनके नतीजे यह जरूर बताएंगे कि 2027 से पहले किस पार्टी का संगठन, सामाजिक समीकरण और विधायकों पर नियंत्रण ज्यादा मजबूत है। खास नजर राज्यसभा की 10वीं सीट पर रहेगी, जहां जीत से ज्यादा बड़ा सवाल राजनीतिक संदेश और पार्टी की एकजुटता का होगा।</strong></h2>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/up-2027-rajya-sabha-mlc-election-bjp-sp-semifinal/article-2176</link>
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                <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 13:10:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जमुई के बाद समस्तीपुर में युवती से सरेराह बदसलूकी, वायरल वीडियो के बाद चार आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[समस्तीपुर के कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र में एक युवती से सरेराह बदसलूकी का वीडियो सामने आया है। जमुई की घटना के बाद सामने आए इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/bihar/samastipur-girl-harassment-viral-video-four-arrested/article-2175"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/samastipur-girl-harassment-viral-video-four-arrested-2026.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>जमुई की घटना पर मचा हंगामा अभी शांत भी नहीं हुआ था कि समस्तीपुर में युवती को सड़क पर घेरकर बदसलूकी का मामला सामने आ गया; वायरल वीडियो के बाद पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/samastipur-girl-harassment-viral-video-four-arrested-2026.jpg2.jpg" alt="samastipur-girl-harassment-viral-video-four-arrested-2026.jpg2" width="1366" height="768"/>
समस्तीपुर में युवती से कथित बदसलूकी का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | बिहार डेस्क | 24 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>समस्तीपुर में युवती से सरेराह बदसलूकी का आरोप</strong></li>
<li><strong>बांध बाइपास रोड पर फोटो लेने के लिए रुकी थी युवती</strong></li>
<li><strong>घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ वायरल</strong></li>
<li><strong>पुलिस ने FIR दर्ज कर चार आरोपियों को किया गिरफ्तार</strong></li>
</ul>
<h6>बिहार के जमुई में लड़का और लड़की के साथ हुई बदसलूकी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब समस्तीपुर से ऐसी ही परेशान करने वाली घटना सामने आई है। एक युवती को सड़क पर घेरकर उसके साथ कथित रूप से गाली-गलौज और गलत व्यवहार किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।</h6>
<h6>मामला समस्तीपुर के कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र के जगतसिंहपुर गांव स्थित बांध बाइपास रोड का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार युवती एक युवक के साथ सड़क से गुजर रही थी। दोनों सड़क किनारे रुककर फोटो ले रहे थे, तभी कुछ युवक वहां पहुंच गए।</h6>
<h2>युवती को घेरकर की गई बदसलूकी</h2>
<h6>आरोप है कि युवकों ने दोनों को घेर लिया और उनसे नाम-पता पूछना शुरू कर दिया। इसके बाद युवती के साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया गया। वायरल वीडियो में कुछ लोग युवती को गलत तरीके से छूते और सड़क पर खींचते हुए दिखाई दे रहे हैं।</h6>
<h6>घटना के दौरान वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने वीडियो बना लिया। बुधवार रात वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला पुलिस के संज्ञान में पहुंचा।</h6>
<h2>चार आरोपियों की गिरफ्तारी</h2>
<h6>समस्तीपुर पुलिस ने वायरल वीडियो की जांच करते हुए संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की है। पुलिस ने घटना में शामिल चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ शुरू कर दी है।</h6>
<h6>पुलिस अन्य लोगों की भूमिका और वीडियो में दिखाई देने वाले सभी आरोपियों की पहचान की जांच भी कर रही है। समस्तीपुर के पुलिस अधीक्षक अरविंद प्रताप सिंह ने मामले में तेजी से कार्रवाई करने और घटना की पूरी सच्चाई सामने लाने के निर्देश दिए हैं।</h6>
<h2>जमुई में भी सामने आया था ऐसा मामला</h2>
<h6>इससे पहले जमुई में कोचिंग से लौट रहे एक नाबालिग लड़के और लड़की को कुछ लोगों ने रास्ते में रोक लिया था। आरोपियों ने दोनों के साथ मारपीट और बदसलूकी की थी। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने POCSO Act सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया था।</h6>
<h2><strong>जमुई के बाद समस्तीपुर में हुई इस घटना ने बिहार में लड़कियों की सुरक्षा और भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर दिया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि सार्वजनिक स्थान पर किसी युवती को घेरकर उससे बदसलूकी करने का साहस लोगों में आखिर आता कहां से है?</strong></h2>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                            <category>बिहार</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/bihar/samastipur-girl-harassment-viral-video-four-arrested/article-2175</link>
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                <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 12:45:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्रेटर नोएडा में चलती स्लीपर बस बनी आग का गोला, 9 यात्रियों की मौत; PM मोदी ने ₹2 लाख मुआवजे का किया ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में भीषण आग लगने से नौ यात्रियों की मौत हो गई। प्रधानमंत्री मोदी ने मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50 हजार देने की घोषणा की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/greater-noida-yamuna-expressway-sleeper-bus-fire-9-dead/article-2174"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/greater-noida-yamuna-expressway-sleeper-bus-fire-2026.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h1><strong>यमुना एक्सप्रेसवे पर चलते-चलते आग का गोला बनी स्लीपर बस, नौ यात्रियों की मौत के बाद PM मोदी ने किया मुआवजे का ऐलान; हादसे ने खड़े किए यात्री सुरक्षा पर गंभीर सवाल</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/greater-noida-yamuna-expressway-sleeper-bus-fire-2026.jpg2.jpg" alt="greater-noida-yamuna-expressway-sleeper-bus-fire-2026.jpg2" width="1366" height="768"/>
ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर आग लगने के बाद पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुई स्लीपर बस।

<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 24 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>दिल्ली से महोबा जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग</strong></li>
<li><strong>हादसे में नौ यात्रियों की मौत, कई लोगों को बचाया गया</strong></li>
<li><strong>PMNRF से मृतकों के परिजनों को मिलेंगे ₹2 लाख</strong></li>
<li><strong>राष्ट्रपति मुर्मु और मुख्यमंत्री योगी ने जताया दुख</strong></li>
</ul>
<h6>ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात एक दर्दनाक हादसा हो गया। दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही डबल डेकर स्लीपर बस में अचानक आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि बस में सो रहे कई यात्रियों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। हादसे में नौ यात्रियों की मौत हो गई, जबकि कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।</h6>
<h6>यह हादसा जेवर थाना क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे के करीब 33 किलोमीटर माइलस्टोन के पास हुआ। बस में लगभग 35 यात्री सवार बताए जा रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। बस के शीशे तोड़कर और गैस कटर की सहायता से अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला गया।</h6>
<h2>आग लगने के कारणों की जांच शुरू</h2>
<h6>बस में आग लगने का सही कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। शुरुआती जानकारी में AC सिस्टम में शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी की आशंका जताई गई है, लेकिन अधिकारियों की जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारण सामने आएगा।</h6>
<h6>पुलिस मृतकों की पहचान कर उनके परिवारों से संपर्क करने का प्रयास कर रही है। हादसे में घायल हुए यात्रियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।</h6>
<h2>PM मोदी ने किया आर्थिक सहायता का ऐलान</h2>
<h6>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।</h6>
<h6>प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष यानी PMNRF से प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को ₹2 लाख और प्रत्येक घायल को ₹50 हजार की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।</h6>
<h2>राष्ट्रपति मुर्मु और CM योगी ने जताया दुख</h2>
<h6>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हादसे को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना भी की।</h6>
<h6>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को घायलों के उचित इलाज और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50 हजार की सहायता देने की घोषणा की है।</h6>
<h2><strong>यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में लगी आग ने यात्री सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नौ लोगों की मौत के बाद अब जांच का केंद्र यह होगा कि आग तकनीकी खराबी से लगी या बस के सुरक्षा मानकों में लापरवाही हुई। इस हादसे की पूरी सच्चाई सामने आना और जिम्मेदारी तय होना बेहद जरूरी है।</strong></h2>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/greater-noida-yamuna-expressway-sleeper-bus-fire-9-dead/article-2174</link>
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                <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 12:22:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायबरेली में अखिलेश की PDA रथ यात्रा से पहले पोस्टर वॉर, कहीं ‘श्रीकृष्ण’ तो कहीं लिखा ‘गिरगिटेश’</title>
                                    <description><![CDATA[अखिलेश यादव की PDA रथ यात्रा से पहले रायबरेली पोस्टर वॉर का अखाड़ा बन गया। समर्थकों ने उन्हें श्रीकृष्ण के रूप में दिखाया, जबकि विरोध में लगे पोस्टरों पर तीखे सवाल उठाते हुए ‘गिरगिटेश’ लिखा गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/akhilesh-yadav-pda-rath-yatra-raebareli-poster-war-2026/article-2173"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/akhilesh-yadav-pda-rath-yatra-raebareli-poster-war-2026.jpg.jpg" alt=""></a><br /><h2 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>अखिलेश की PDA रथ यात्रा से पहले रायबरेली बना सियासी पोस्टरों का अखाड़ा, समर्थकों ने ‘श्रीकृष्ण’ बताया तो विरोधियों ने तीखे सवालों के साथ लिखा ‘गिरगिटेश’</strong></h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/akhilesh-yadav-pda-rath-yatra-raebareli-poster-war-2026.jpg.jpg" alt="akhilesh-yadav-pda-rath-yatra-raebareli-poster-war-2026.jpg" width="1366" height="768"/>
रायबरेली में PDA रथ यात्रा से पहले अखिलेश यादव के समर्थन और विरोध में लगे पोस्टर।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 24 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>रायबरेली से शुरू होगी अखिलेश यादव की PDA रथ यात्रा</strong></li>
<li><strong>समर्थकों ने श्रीकृष्ण के रूप में लगाए अखिलेश के पोस्टर</strong></li>
<li><strong>विरोधी पोस्टरों में उठाए गए कई राजनीतिक सवाल</strong></li>
<li><strong>UP Election 2027 से पहले तेज हुआ सियासी पोस्टर वॉर</strong> 
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"> </p>
<h6 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव गुरुवार को रायबरेली से PDA रथ यात्रा शुरू करने जा रहे हैं, लेकिन यात्रा निकलने से पहले ही शहर की सड़कों पर पोस्टर वॉर शुरू हो गया है।</h6>
<h6>अखिलेश यादव के स्वागत में सपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने रायबरेली में जगह-जगह पोस्टर लगाए हैं। एक पोस्टर में अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण के रूप में दिखाते हुए लिखा गया है—“मेरे माधव, सुदामा की धरती पर आपका स्वागत है।” इन पोस्टरों के जरिए समर्थक यात्रा को बड़ा राजनीतिक और सामाजिक अभियान बताने की कोशिश कर रहे हैं।</h6>
<h2>विरोधी पोस्टरों में अखिलेश से पूछे सवाल</h2>
<h6>दूसरी ओर लखनऊ-रायबरेली हाईवे सहित कई स्थानों पर अखिलेश यादव के विरोध में भी पोस्टर दिखाई दिए। एक पोस्टर में उनसे पूछा गया—“कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि कब देंगे?” वहीं दूसरे पोस्टर में कथित तौर पर महंगी वैनिटी वैन और सड़क निर्माण को लेकर सवाल उठाए गए हैं।</h6>
<h6>कुछ पोस्टरों में अखिलेश यादव के लिए आपत्तिजनक शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इन विरोधी पोस्टरों को किस व्यक्ति या संगठन ने लगवाया है, इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।</h6>
<h2>रायबरेली से यात्रा शुरू करने के सियासी मायने</h2>
<h6>अखिलेश यादव की इस यात्रा का नाम PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक रथ यात्रा रखा गया है। समाजवादी पार्टी लंबे समय से इसी सामाजिक समीकरण के सहारे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है।</h6>
<h6>रायबरेली कांग्रेस नेता राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है। ऐसे में यहां से यात्रा की शुरुआत को विपक्षी गठबंधन और आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। यात्रा के दौरान अखिलेश यादव के स्थानीय पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और विभिन्न वर्गों के लोगों से मिलने का कार्यक्रम है।</h6>
<h2>पोस्टरों से शुरू हुई 2027 की राजनीतिक लड़ाई</h2>
<h6>रथ यात्रा शुरू होने से पहले समर्थन और विरोध में लगे पोस्टरों ने साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में 2027 की चुनावी लड़ाई अब सड़कों पर दिखाई देने लगी है। सपा इस यात्रा के जरिए PDA मतदाताओं को जोड़ने का प्रयास करेगी, जबकि उसके विरोधी पोस्टरों के माध्यम से अखिलेश सरकार के पुराने कार्यकाल और राजनीतिक फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं।</h6>
<h1><strong>अखिलेश यादव की PDA रथ यात्रा शुरू होने से पहले रायबरेली में छिड़े पोस्टर वॉर ने UP Election 2027 की सियासी गर्मी बढ़ा दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह यात्रा सपा के PDA समीकरण को कितनी मजबूती देती है और कांग्रेस के गढ़ से शुरू हुआ यह अभियान प्रदेश की राजनीति पर कितना असर डालता है।</strong></h1>
</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/akhilesh-yadav-pda-rath-yatra-raebareli-poster-war-2026/article-2173</link>
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                <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 11:50:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>SIR पर 14 आपत्तियों के दावे के बाद EC की 8-Point सफाई—‘अलग राय सामान्य, सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से’</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग ने SIR पर कथित मतभेद की रिपोर्ट को अधूरी तस्वीर बताते हुए आठ बिंदुओं में सफाई दी है। आयोग के मुताबिक आंतरिक सवाल और सुझाव सामान्य प्रक्रिया हैं, जबकि सभी आधिकारिक फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी मिली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/election-commission-eight-point-clarification-sir-internal-dissent-gyanesh-kumar/article-2172"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/election-commission-eight-point-clarification-sir-row.jpg.png" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>SIR पर 14 आपत्तियों के दावे के बाद EC की 8-Point सफाई—‘अलग राय सामान्य, सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से’</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/election-commission-eight-point-clarification-sir-row.jpg.png" alt="election-commission-eight-point-clarification-sir-row.jpg" width="1366" height="768"/>
SIR पर कथित मतभेद की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने आठ बिंदुओं में अपनी कार्यप्रणाली और फैसलों पर सफाई जारी की।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 23 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>कथित अंदरूनी मतभेद पर चुनाव आयोग की विस्तृत सफाई</strong></li>
<li><strong>आठ बिंदुओं में बताई आयोग की निर्णय प्रक्रिया</strong></li>
<li><strong>कहा—सुझाव और अलग-अलग राय सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा</strong></li>
<li><strong>SIR सहित सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लेने का दावा</strong></li>
</ul>
<h6>यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद की रिपोर्ट पर आयोग ने विस्तृत जवाब जारी किया है। चुनाव आयोग ने आठ बिंदुओं में अपनी कार्यप्रणाली स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी अंतिम निर्णय से पहले अलग-अलग राय, सवाल और सुझाव सामने आना सामान्य प्रक्रिया है।</h6>
<h6>आयोग ने दावा किया कि SIR सहित पिछले एक साल के सभी आधिकारिक फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू एवं विवेक जोशी की सहमति से लिए गए हैं।</h6>
<h3>14 बार आपत्ति दर्ज होने का दावा</h3>
<h6>इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के विभिन्न कदमों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।</h6>
<h6>रिपोर्ट में मतदाता सूची से नाम हटाने एवं जोड़ने, Form 6 में बदलाव, मतदाता डाटा के नियंत्रण और SIR के दौरान लिए गए कुछ फैसलों पर सवाल उठने का दावा किया गया। रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए।</h6>
<h6>अब चुनाव आयोग ने आठ बिंदुओं में इन सवालों का जवाब दिया है।</h6>
<h3>1. संवैधानिक नियमों के तहत काम करता है आयोग</h3>
<h6>चुनाव आयोग ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324, संबंधित कानूनों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के तहत काम करने वाली बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है।</h6>
<h6>आयोग में लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच की व्यवस्था सामान्य रूप से चलती रहती है। इसका उद्देश्य कानूनी नियमों का पालन, पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की मजबूती सुनिश्चित करना है।</h6>
<h3>2. सभी आधिकारिक फैसले कानूनी रूप से मान्य</h3>
<h6>आयोग के अनुसार, उसके सभी आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश कानूनी रूप से मान्य हैं। इन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 के तहत तय प्रक्रिया का पालन करते हुए जारी किया गया है।</h6>
<h6>आयोग ने उन आरोपों को खारिज किया जिनमें बिना आवश्यक मंजूरी के आधिकारिक फैसले जारी किए जाने की बात कही गई थी।</h6>
<h3>3. शुरुआती सवाल अंतिम असहमति नहीं</h3>
<h6>चुनाव आयोग ने कहा कि किसी फैसले के शुरुआती Draft पर आयुक्तों द्वारा सवाल उठाना या सुझाव देना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।</h6>
<h6>आयोग के मुताबिक इन सवालों और सुझावों का उद्देश्य मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना और चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाना होता है। शुरुआती टिप्पणी को अंतिम फैसले के खिलाफ औपचारिक असहमति नहीं माना जा सकता।</h6>
<h3>4. अलग-अलग विचार होना सामान्य</h3>
<h6>आयोग ने कहा कि किसी भी बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग विचार सामने आना सामान्य बात है। अंतिम फैसला लेने से पहले होने वाली चर्चा निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।</h6>
<h6>केवल तीनों चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने के लिए अधिकृत है।</h6>
<h3>5. केवल 14 टिप्पणियों से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती</h3>
<h6>चुनाव आयोग ने कहा कि 10 महीनों में सामने आए कुछ चुनिंदा आंतरिक Notes और टिप्पणियों को दिखाकर बाकी फैसलों एवं मंजूरियों को नजरअंदाज करना पूरी तस्वीर पेश नहीं करता।</h6>
<h6>आयोग के अनुसार, पिछले एक साल में करीब 40 नई पहल शुरू की गई हैं। मतदाता सूची के पुनरीक्षण, SIR और दूसरे चुनाव सुधारों से जुड़े सभी अंतिम फैसले आयोग ने सर्वसम्मति से लिए हैं।</h6>
<h3>6. छह राज्यों में चुनाव कराने का दिया उदाहरण</h3>
<h6>आयोग ने बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में चुनाव सफलतापूर्वक कराने का भी उल्लेख किया।</h6>
<h6>चुनाव आयोग ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर चुनाव कराने के लिए व्यापक प्रशासनिक व्यवस्था, लगातार निगरानी और आयोग की कई मंजूरियों की जरूरत होती है। ये सभी काम पूरी चुनावी मशीनरी के तालमेल से किए गए।</h6>
<h3>7. ECINet की सुरक्षा पर दिया जवाब</h3>
<h6>आयोग ने अपने Digital Platform ECINet की सुरक्षा पर भी सफाई दी। आयोग के अनुसार, यह सिस्टम बिना अनुमति किसी बदलाव या छेड़छाड़ को रोकने वाले कड़े Data Security Protocol के तहत काम करता है।</h6>
<h6>IT Security Check और Audit Control राष्ट्रीय डाटाबेस पर लागू किए गए मानक Cyber Security उपायों का हिस्सा हैं। मतदाता का नाम जोड़ने या हटाने की कानूनी शक्ति Electoral Registration Officer और District Election Officer जैसे अधिकृत अधिकारियों के पास रहती है।</h6>
<h3>8. संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने का भरोसा</h3>
<h6>चुनाव आयोग ने आखिरी बिंदु में कहा कि वह अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।</h6>
<h6>आयोग ने कहा कि वह लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका और जिम्मेदारी को समझता है। चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं मतदाताओं का भरोसा बनाए रखने के लिए काम जारी रहेगा।</h6>
<h3>विपक्ष अभी भी मांग रहा पूरे दस्तावेज</h3>
<h6>चुनाव आयोग की सफाई के बावजूद विवाद समाप्त होता दिखाई नहीं दे रहा है। विपक्षी नेताओं की मांग है कि आयोग केवल अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति वाला न बताए, बल्कि दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा कथित रूप से उठाए गए सवालों और उन पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक करे।</h6>
<h6>दूसरी ओर आयोग का कहना है कि आंतरिक चर्चा को टकराव के रूप में दिखाना गलत है। उसके मुताबिक सवाल और सुझाव मिलने के बाद ही अंतिम फैसला सर्वसम्मति से लिया गया।</h6>
<h6><strong>चुनाव आयोग ने आठ बिंदुओं में अपनी कार्यप्रणाली और फैसलों का बचाव जरूर किया है, लेकिन कथित 14 आपत्तियों से जुड़े दस्तावेज अब भी पूरे विवाद के केंद्र में हैं। आयोग इन्हें सामान्य आंतरिक चर्चा बता रहा है, जबकि विपक्ष इन्हें गंभीर मतभेद मान रहा है। अब जनता की निगाह इस बात पर रहेगी कि आयोग इन आपत्तियों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करता है या राजनीतिक विवाद और तेज होता है।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/election-commission-eight-point-clarification-sir-internal-dissent-gyanesh-kumar/article-2172</link>
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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 19:07:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘राहुल गांधी ने बिल्कुल सही कहा’; चुनाव आयोग पर उमर अब्दुल्ला बोले—भरोसा उठ गया तो वोट कौन देगा?</title>
                                    <description><![CDATA[उमर अब्दुल्ला ने कहा कि किसी योग्य नागरिक को मतदान से रोकना लोकतंत्र पर हमला है। चुनाव प्रक्रिया से लोगों का भरोसा उठ गया तो वे मतदान में हिस्सा क्यों लेंगे? चुनाव आयोग ने मतभेद के दावों को खारिज किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/omar-abdullah-supports-rahul-gandhi-election-commission-sir-row/article-2171"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/omar-abdullah-rahul-gandhi-election-commission-sir-row.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>‘राहुल गांधी ने बिल्कुल सही कहा’; चुनाव आयोग पर उमर अब्दुल्ला बोले—भरोसा उठ गया तो वोट कौन देगा?</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/omar-abdullah-rahul-gandhi-election-commission-sir-row.jpg2.jpg" alt="omar-abdullah-rahul-gandhi-election-commission-sir-row.jpg2" width="1366" height="768"/>
चुनाव आयोग और SIR विवाद पर राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 23 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>चुनाव आयोग के कामकाज पर उमर अब्दुल्ला ने उठाए सवाल</strong></li>
<li><strong>राहुल गांधी के बयान को बताया बिल्कुल सही</strong></li>
<li><strong>बोले—चुनाव से भरोसा उठा तो लोकतंत्र में क्या बचेगा</strong></li>
<li><strong>चुनाव आयोग ने कहा—SIR के सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए</strong></li>
</ul>
<h6>चुनाव आयोग और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी विवाद में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी उतर गए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि मतदान के अधिकार से किसी नागरिक को रोकना लोकतंत्र पर सीधा हमला है।</h6>
<h6>उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद चुनाव होते हैं। यदि लोगों का भरोसा चुनाव प्रक्रिया से ही उठ गया तो वे चुनाव में हिस्सा क्यों लेंगे? उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से इस विवाद पर गंभीरता से विचार करने और सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।</h6>
<h3>‘राहुल गांधी ने बिल्कुल सही कहा’</h3>
<h6>राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा, “अगर आप किसी को वोट देने से रोक रहे हैं, जबकि वोट देना उसका अधिकार है, तो यह लोकतंत्र पर हमला नहीं है तो और क्या है? राहुल गांधी ने जो कहा, बिल्कुल सही कहा है।”</h6>
<h6>उन्होंने आगे कहा कि अब यह देखना होगा कि सामने आए सवालों और आरोपों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। केवल सफाई जारी करने से लोगों के मन में पैदा हुई आशंकाएं खत्म नहीं होंगी। चुनावी व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता जरूरी है।</h6>
<h3>चुनाव आयोग की सफाई पर भी उठाए सवाल</h3>
<h6>उमर अब्दुल्ला ने कहा कि चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद से जुड़ी रिपोर्ट कई गंभीर सवाल खड़े करती है। उनके अनुसार, आयोग की ओर से यह कहना कि आंतरिक चर्चा में अलग-अलग विचार सामने आते रहते हैं, बताता है कि पूरे मामले पर अधिक स्पष्ट जानकारी देने की जरूरत है।</h6>
<h6>उन्होंने कहा कि आयोग को आरोपों का विस्तार से जवाब देना चाहिए, जिससे मतदाताओं के बीच कोई भ्रम न रहे। चुनाव की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।</h6>
<h3>जम्मू-कश्मीर के परिसीमन का किया जिक्र</h3>
<h6>उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में हुई परिसीमन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर में SIR का विवाद राष्ट्रीय स्तर पर सामने आने से पहले ही चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर शिकायतें मिल रही थीं।</h6>
<h6>उन्होंने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और उसमें कई कमियां थीं। उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि निर्वाचन क्षेत्रों में किए गए बदलावों से एक राजनीतिक दल और उसके सहयोगियों को फायदा पहुंचाने का प्रयास किया गया।</h6>
<h6>यह उमर अब्दुल्ला का आरोप है। चुनाव आयोग पहले भी परिसीमन और चुनावी प्रक्रिया को नियमों के अनुसार एवं निष्पक्ष तरीके से पूरा किए जाने की बात कहता रहा है।</h6>
<h3>राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाया?</h3>
<h6>कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के दो आयुक्तों द्वारा कथित रूप से कई बार आपत्ति दर्ज कराने की रिपोर्ट सामने आने के बाद आयोग पर तीखा हमला किया था।</h6>
<h6>राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाना या योग्य नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करना संविधान पर हमला है। उन्होंने चुनाव आयोग के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि गलत काम करने वालों की भविष्य में जवाबदेही तय की जाएगी।</h6>
<h3>चुनाव आयोग ने क्या कहा?</h3>
<h6>चुनाव आयोग ने अंदरूनी मतभेद और फैसलों में टकराव के दावों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि SIR सहित सभी अंतिम फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए।</h6>
<h6>आयोग ने कहा कि किसी निर्णय से पहले सवाल, सुझाव और अलग विचार सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। इन्हें अंतिम फैसले के खिलाफ औपचारिक असहमति नहीं माना जा सकता। आयोग के अनुसार, उसके सभी आधिकारिक फैसले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।</h6>
<h3>चुनावी भरोसे पर छिड़ी बड़ी बहस</h3>
<h6>राहुल गांधी के आरोपों को उमर अब्दुल्ला का समर्थन मिलने के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। विपक्ष आयोग से कथित आपत्तियों और SIR से जुड़े फैसलों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है।</h6>
<h6><strong>उमर अब्दुल्ला का बयान इस विवाद को नया राजनीतिक मोड़ देता है। उनका सीधा सवाल है कि यदि जनता का चुनाव प्रक्रिया से भरोसा उठ गया तो लोकतंत्र की बुनियाद कैसे बचेगी। अब चुनाव आयोग के सामने केवल आरोपों को खारिज करने की नहीं, बल्कि मतदाताओं का भरोसा मजबूत करने की भी बड़ी चुनौती है।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/omar-abdullah-supports-rahul-gandhi-election-commission-sir-row/article-2171</link>
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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 18:42:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘सलवार उतारना रेप की कोशिश नहीं’ वाली टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पटना HC के फैसले का स्वतः लिया संज्ञान</title>
                                    <description><![CDATA[पटना हाईकोर्ट के विवादित फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने महिला की सलवार उतारने और छाती दबाने को रेप की कोशिश न मानने वाली टिप्पणी पर गंभीर चिंता जताई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/bihar/supreme-court-suo-motu-patna-high-court-attempt-to-rape-verdict/article-2170"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/supreme-court-patna-high-court-attempt-to-rape-verdict.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>‘सलवार उतारना रेप की कोशिश नहीं’ वाली टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पटना HC के फैसले का स्वतः लिया संज्ञान</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/supreme-court-patna-high-court-attempt-to-rape-verdict.jpg2.jpg" alt="supreme-court-patna-high-court-attempt-to-rape-verdict.jpg2" width="1366" height="768"/>
पटना हाईकोर्ट की विवादित टिप्पणी पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसले की समीक्षा शुरू की।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 23 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>पटना हाईकोर्ट की विवादित टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त</strong></li>
<li><strong>महिला के कपड़े उतारने की कोशिश से जुड़ा है मामला</strong></li>
<li><strong>हाईकोर्ट ने इसे रेप की कोशिश मानने से किया था इनकार</strong></li>
<li><strong>सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की समीक्षा</strong></li>
</ul>
<h6>पटना हाईकोर्ट के एक विवादित फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने एक मामले में महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसकी छाती दबाने के कृत्य को रेप की कोशिश मानने से इनकार कर दिया था। देश की सर्वोच्च अदालत ने फैसले में की गई कुछ टिप्पणियों को आपत्तिजनक बताते हुए इस पर गंभीर चिंता जताई है।</h6>
<h6>भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पटना हाईकोर्ट के फैसले और उसमें दर्ज टिप्पणियों की विस्तार से समीक्षा की जानी जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट अब यह देखेगा कि मामले के तथ्यों और आरोपी के कथित कृत्यों को देखते हुए हाईकोर्ट द्वारा निकाला गया कानूनी निष्कर्ष सही था या नहीं।</h6>
<h3>क्या था पटना हाईकोर्ट का फैसला?</h3>
<h6>यह मामला पटना हाईकोर्ट के 9 जुलाई 2026 के फैसले से जुड़ा है। आरोप था कि आरोपी ने महिला को कमरे में बंद किया, उसकी सलवार उतारने की कोशिश की और उसकी छाती दबाई।</h6>
<h6>पटना हाईकोर्ट ने माना था कि आरोपी का कथित व्यवहार महिला की गरिमा भंग करने और उसके साथ आपराधिक बल प्रयोग से जुड़ा है। हालांकि, अदालत ने कहा था कि उपलब्ध परिस्थितियां आरोपी को रेप की कोशिश के अपराध में दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।</h6>
<h6>इसी आधार पर आरोपी को रेप की कोशिश के गंभीर आरोप से राहत दी गई थी। हाईकोर्ट की इस कानूनी व्याख्या और फैसले में इस्तेमाल भाषा को लेकर महिला अधिकारों से जुड़े संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने सवाल उठाए थे।</h6>
<h3>सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी</h3>
<h6>मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आने पर CJI सूर्यकांत ने हाईकोर्ट की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। शीर्ष अदालत ने सवाल उठाया कि महिला के कपड़े उतारने की कोशिश और उसके शरीर को जबरन छूने जैसे कथित कृत्यों की कानूनी गंभीरता का आकलन किस आधार पर किया गया।</h6>
<h6>सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों में फैसले लिखते समय अदालतों को अधिक संवेदनशील और सावधान रहना चाहिए। न्यायिक आदेश में इस्तेमाल शब्द पीड़िता की गरिमा और पूरे मामले की गंभीरता के अनुरूप होने चाहिए।</h6>
<h3>अभी रद्द नहीं हुआ हाईकोर्ट का फैसला</h3>
<h6>यह समझना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने का अर्थ यह नहीं है कि पटना हाईकोर्ट का फैसला तुरंत रद्द कर दिया गया है। शीर्ष अदालत ने फिलहाल मामले की समीक्षा शुरू की है।</h6>
<h6>आगे की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट केस के तथ्य, आरोपी के कथित कृत्य, हाईकोर्ट की कानूनी व्याख्या और संबंधित आपराधिक धाराओं को देखेगा। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रहेगा, उसमें बदलाव होगा या उसे रद्द किया जाएगा।</h6>
<h3>रेप की कोशिश कैसे तय होती है?</h3>
<h6>किसी मामले में रेप की कोशिश का अपराध तय करने के लिए अदालत आरोपी की मंशा और उसके द्वारा उठाए गए वास्तविक कदमों का परीक्षण करती है। केवल तैयारी और अपराध को अंजाम देने की स्पष्ट कोशिश के बीच कानूनी अंतर देखा जाता है।</h6>
<h6>हालांकि, ऐसे मामलों में हर घटना के तथ्य अलग होते हैं। किसी महिला के कपड़े उतारने, उसे बंद करने या जबरन छूने जैसी घटनाओं को सामान्य या मामूली मानकर नहीं देखा जा सकता। इसी कारण सुप्रीम कोर्ट अब हाईकोर्ट के फैसले की कानूनी समीक्षा करेगा।</h6>
<h3>न्यायिक संवेदनशीलता पर फिर उठे सवाल</h3>
<h6>इस मामले ने एक बार फिर अदालतों के फैसलों में महिलाओं और यौन हिंसा से जुड़े मामलों में संवेदनशील भाषा के इस्तेमाल की जरूरत को चर्चा में ला दिया है। सुप्रीम कोर्ट पहले भी निर्देश दे चुका है कि न्यायिक आदेश रूढ़िवादी सोच या पीड़िता के प्रति असंवेदनशील धारणाओं पर आधारित नहीं होने चाहिए।</h6>
<h6><strong>पटना हाईकोर्ट की विवादित टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट का स्वतः संज्ञान महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में बड़ा न्यायिक हस्तक्षेप माना जा रहा है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि शीर्ष अदालत रेप की कोशिश की कानूनी सीमा को किस तरह स्पष्ट करती है। आने वाला फैसला न केवल इस मामले, बल्कि यौन अपराधों से जुड़े दूसरे मुकदमों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिहार </category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 17:58:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘14 बार असहमति तानाशाही नहीं, चेक-बैलेंस है’; राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोप पर संबित पात्रा का पलटवार</title>
                                    <description><![CDATA[संबित पात्रा ने कहा कि चुनाव आयुक्तों के बीच सवाल और असहमति लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे तानाशाही या वोट चोरी का प्रमाण बताना गलत है। राहुल गांधी ने इस मामले को संविधान पर हमला और देशद्रोह बताया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/sambit-patra-reply-rahul-gandhi-vote-chori-election-commission-sir-row/article-2169"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/sambit-patra-rahul-gandhi-vote-chori-eci-sir-row.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>14 बार असहमति तानाशाही नहीं, चेक-बैलेंस है’; राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोप पर संबित पात्रा का पलटवार </strong></h1>
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चुनाव आयोग और SIR विवाद पर राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते BJP सांसद संबित पात्रा।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 23 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद पर बढ़ा राजनीतिक विवाद</strong></li>
<li><strong>राहुल गांधी ने BJP और चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप</strong></li>
<li><strong>संबित पात्रा बोले—असहमति लोकतांत्रिक चेक-बैलेंस का हिस्सा</strong></li>
<li><strong>चुनाव आयोग ने कहा—SIR सहित सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए</strong></li>
</ul>
<p>चुनाव आयोग और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी विवाद में BJP नेता संबित पात्रा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर पलटवार किया है। पात्रा ने कहा कि चुनाव आयुक्तों के बीच सवाल, सुझाव या किसी मुद्दे पर असहमति होना लोकतांत्रिक व्यवस्था में चर्चा और आंतरिक चेक-बैलेंस की निशानी है। इसे तानाशाही या चुनाव आयोग की विफलता बताना गलत है।</p>
<p>संबित पात्रा का यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के विभिन्न फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।</p>
<h3>राहुल गांधी ने लगाया ‘वोट चोरी’ का आरोप</h3>
<p>इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग, BJP और RSS पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने कहा कि कथित ‘वोट चोरी’ देश के नागरिकों और संविधान पर सीधा हमला है।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि यदि चुनाव आयोग के भीतर दो आयुक्त लगातार फैसलों पर सवाल उठा रहे थे, तो यह मामला बेहद गंभीर है। राहुल गांधी ने इसे देशद्रोह तक बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।</p>
<p>हालांकि, ये सभी आरोप राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। चुनाव आयोग और BJP ने इन्हें खारिज करते हुए आयोग की चुनावी प्रक्रिया का बचाव किया है।</p>
<h3>संबित पात्रा ने कांग्रेस को घेरा</h3>
<h6>राहुल गांधी के बयान पर जवाब देते हुए संबित पात्रा ने कहा कि विपक्षी दल चुनाव में हार मिलने के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करने लगते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद लगातार कमजोर हो रहे विपक्ष ने अब चुनाव आयोग को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।</h6>
<h6>पात्रा ने कहा कि किसी संस्था के भीतर अधिकारियों द्वारा सवाल उठाना या सुझाव देना सामान्य प्रक्रिया है। तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच किसी विषय पर चर्चा या अलग राय को तानाशाही बताना गलत है। उनके अनुसार, आंतरिक बातचीत और मतभेद संस्थागत चेक-बैलेंस का प्रमाण हैं।</h6>
<h3>चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी?</h3>
<h6>मामला बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने कहा कि SIR सहित उसके सभी अंतिम फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे।</h6>
<h6>आयोग के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए अधिकारियों और आयुक्तों द्वारा सवाल एवं सुझाव दिए जाना सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा है। किसी फैसले से पहले हुई चर्चा को औपचारिक असहमति या अंतिम निर्णय का विरोध नहीं माना जाना चाहिए।</h6>
<h6>आयोग ने यह भी कहा कि उसके सभी आधिकारिक आदेश और प्रशासनिक निर्देश तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जारी किए गए हैं। आयोग ने अपने कामकाज और अंतिम फैसलों में मतभेद होने के दावों को खारिज किया है।</h6>
<h3>14 आपत्तियों के दावे पर विवाद</h3>
<h6>रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, Form 6 में बदलाव तथा चुनावी डाटा को नियंत्रित करने जैसे मामलों पर सवाल उठाए थे।</h6>
<h6>इसी दावे को आधार बनाकर विपक्ष चुनाव आयोग से विस्तृत जवाब और अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहा है। कांग्रेस का कहना है कि आयोग को केवल अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति वाला बताने के बजाय आयुक्तों द्वारा उठाए गए हर सवाल का जवाब देना चाहिए।</h6>
<h6>दूसरी तरफ BJP का तर्क है कि किसी फैसले से पहले अधिकारियों द्वारा सवाल उठाना संवैधानिक संस्था की सामान्य कार्यप्रणाली है और इसे चुनाव में गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।</h6>
<h3>अब पारदर्शिता पर टिका पूरा विवाद</h3>
<h6>SIR और मतदाता सूची को लेकर पहले से जारी राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग के अंदर कथित आपत्तियों की रिपोर्ट ने मामले को और गरमा दिया है। विपक्ष इसे आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल बता रहा है, जबकि BJP इसे सामान्य चर्चा को राजनीतिक विवाद बनाने का प्रयास कह रही है।</h6>
<p><strong>राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ और देशद्रोह जैसे गंभीर आरोपों के बाद विवाद अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। चुनाव आयोग की सफाई और संबित पात्रा के पलटवार के बावजूद विपक्ष 14 कथित लिखित आपत्तियों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है। अब देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग इन सवालों पर कोई विस्तृत दस्तावेज जारी करता है या विवाद और तेज होता है।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/sambit-patra-reply-rahul-gandhi-vote-chori-election-commission-sir-row/article-2169</link>
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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 17:16:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिशन 2027 के लिए BJP ने बढ़ाई विनोद तावड़े की ताकत, यूपी में चार सह-प्रभारी तैनात</title>
                                    <description><![CDATA[BJP ने उत्तर प्रदेश में विनोद तावड़े के साथ जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को सह-प्रभारी बनाया है। इन नियुक्तियों को मिशन 2027 की चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/bjp-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%A6-%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%B6-%E0%A4%AA%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%B2--%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%A7%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A5%80--%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%AA-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%93%E0%A4%9D%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%B9-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A5%A4-%E0%A4%87%E0%A4%A8-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A4%A8-2027-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%96%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A5%A4/article-2168"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/vinod-tawde-bjp-up-four-co-incharge-election-2027.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>मिशन 2027 के लिए BJP ने बढ़ाई विनोद तावड़े की ताकत, यूपी में चार सह-प्रभारी तैनात</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/vinod-tawde-bjp-up-four-co-incharge-election-2027.jpg2.jpg" alt="vinod-tawde-bjp-up-four-co-incharge-election-2027.jpg2" width="1366" height="768"/>
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच BJP प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े के साथ चार सह-प्रभारियों को जिम्मेदारी दी गई।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 23 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>विनोद तावड़े बने रहेंगे उत्तर प्रदेश BJP के प्रभारी</strong></li>
<li><strong>उनकी सहायता के लिए चार सह-प्रभारी नियुक्त</strong></li>
<li><strong>जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को जिम्मेदारी</strong></li>
<li><strong>मिशन 2027 से पहले संगठन मजबूत करने की तैयारी</strong></li>
</ul>
<h6>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाए रखते हुए उनके साथ चार सह-प्रभारियों की नियुक्ति की है।</h6>
<h6>जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को उत्तर प्रदेश BJP का सह-प्रभारी बनाया गया है। इन नेताओं पर विनोद तावड़े के साथ मिलकर प्रदेश संगठन, चुनावी रणनीति और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल मजबूत करने की जिम्मेदारी रहेगी।</h6>
<h3>चार नेताओं को मिली बड़ी जिम्मेदारी</h3>
<h6>नई टीम में जगदीश पटेल पहले से उत्तर प्रदेश के सह-प्रभारी के रूप में काम कर रहे थे। अब मेधा कुलकर्णी, प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को भी उनके साथ जिम्मेदारी दी गई है। चार सह-प्रभारियों की नियुक्ति से साफ है कि BJP उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में चुनावी तैयारी को अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक समीकरणों के आधार पर आगे बढ़ाना चाहती है।</h6>
<h6>पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से जारी नियुक्तियों में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नए प्रभारी एवं सह-प्रभारी बनाए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा राजनीतिक ध्यान उत्तर प्रदेश की टीम पर है, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।</h6>
<h3>विनोद तावड़े के हाथ में रहेगी मुख्य कमान</h3>
<h6>उत्तर प्रदेश में BJP के संगठन और चुनावी तैयारियों की मुख्य कमान विनोद तावड़े के पास रहेगी। तावड़े पिछले कुछ समय से लगातार उत्तर प्रदेश का दौरा कर पार्टी पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से बातचीत कर रहे हैं।</h6>
<h6>उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद बढ़ाने और स्थानीय समस्याओं की जानकारी नेतृत्व तक पहुंचाने पर जोर दिया है। अब चार सह-प्रभारी मिलने के बाद अलग-अलग क्षेत्रों में संगठन की समीक्षा और चुनावी योजनाओं को तेजी से लागू किया जा सकेगा।</h6>
<h3>मिशन 2027 पर BJP का फोकस</h3>
<h6>BJP उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। इसके लिए पार्टी बूथ समितियों को सक्रिय करने, सामाजिक समीकरण साधने और कमजोर विधानसभा क्षेत्रों की पहचान करने में जुटी है।</h6>
<h6>पार्टी उन सीटों पर विशेष ध्यान दे रही है, जहां पिछले चुनावों में उसका प्रदर्शन कमजोर रहा या जीत का अंतर कम था। नई प्रभारी टीम को संगठन के भीतर तालमेल बनाने के साथ जमीनी स्तर से मिलने वाली रिपोर्ट का विश्लेषण करने की जिम्मेदारी भी मिल सकती है।</h6>
<h3>विपक्ष की रणनीति पर भी रहेगी नजर</h3>
<h6>उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के संभावित गठबंधन के साथ BSP समेत दूसरे दल भी अपनी तैयारियां तेज कर रहे हैं। ऐसे में BJP के सामने अपने मौजूदा जनसमर्थन को बनाए रखने और नाराज मतदाताओं को दोबारा जोड़ने की चुनौती होगी।</h6>
<h6>नई टीम स्थानीय नेताओं, विधायकों और कार्यकर्ताओं से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर चुनावी रणनीति तैयार करेगी। उम्मीदवारों के चयन, क्षेत्रीय समीकरण और संगठन की कमजोरियों को दूर करने में भी प्रभारी टीम की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है।</h6>
<h3>चुनाव से पहले संगठन की बड़ी घेराबंदी</h3>
<h6>चार सह-प्रभारियों की नियुक्ति बताती है कि BJP उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। पार्टी प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी बांटकर चुनावी तैयारियों की निगरानी और संगठन के फैसलों को तेजी से जमीन पर उतारने की रणनीति अपना सकती है।</h6>
<h6>विनोद तावड़े के साथ चार सह-प्रभारियों की तैनाती केवल संगठनात्मक नियुक्ति नहीं, बल्कि मिशन 2027 के लिए BJP की बड़ी चुनावी तैयारी का संकेत है। नई टीम के सामने बूथ मजबूत करने, कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने और कमजोर सीटों पर पार्टी की स्थिति सुधारने की चुनौती होगी। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पांच नेताओं की यह टीम उत्तर प्रदेश के चुनावी समीकरणों को BJP के पक्ष में कितना बदल पाती है।</h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 16:25:37 +0530</pubDate>
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                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/vinod-tawde-bjp-up-four-co-incharge-election-2027.jpg2.jpg"                         length="1006896"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीन दल हों या चार, 2027 में BSP की सरकार बनानी है; मायावती ने कार्यकर्ताओं को दिया सत्ता में वापसी का बड़ा मंत्र</title>
                                    <description><![CDATA[BSP प्रमुख मायावती ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए सत्ता में वापसी का लक्ष्य दिया है। उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और पूरे समर्पण से चुनावी तैयारियों में जुटने का निर्देश दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/mayawati-bsp-up-election-2027-three-four-cornered-contest/article-2167"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/mayawati-bsp-up-election-2027-strategy.jpg.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>तीन दल हों या चार, 2027 में BSP की सरकार बनानी है; मायावती ने कार्यकर्ताओं को दिया सत्ता में वापसी का बड़ा मंत्र</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/mayawati-bsp-up-election-2027-strategy.jpg.jpg" alt="mayawati-bsp-up-election-2027-strategy.jpg" width="1366" height="768"/>
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करतीं BSP प्रमुख मायावती।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 23 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>मायावती ने कार्यकर्ताओं को दिया मिशन 2027 का लक्ष्य</strong></li>
<li><strong>त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबले से नहीं घबराने का संदेश</strong></li>
<li><strong>उत्तर प्रदेश में BSP की सरकार बनाने का किया आह्वान</strong></li>
<li><strong>संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर दिया जोर</strong></li>
</ul>
<h6>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी बहुजन समाज पार्टी ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। BSP प्रमुख मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए साफ कहा कि चुनावी मुकाबला चाहे त्रिकोणीय हो या चतुष्कोणीय, पार्टी का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनाना होना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से सभी राजनीतिक समीकरणों की चिंता छोड़कर संगठन को मजबूत करने में जुटने का आह्वान किया।</h6>
<h3>कार्यकर्ताओं को दिया सत्ता में वापसी का लक्ष्य</h3>
<h6>लखनऊ में आयोजित पार्टी की अहम बैठक में मायावती ने कहा कि BSP कार्यकर्ताओं को विरोधी दलों के गठबंधन और चुनावी दावों से घबराने की जरूरत नहीं है। पार्टी को अपने जनाधार, संगठन और बहुजन समाज की ताकत पर भरोसा रखते हुए चुनाव मैदान में उतरना होगा।</h6>
<h6>मायावती ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे गांव, मोहल्ले और बूथ स्तर पर लोगों से संपर्क बढ़ाएं। पार्टी की नीतियों और BSP सरकार के दौरान किए गए कार्यों की जानकारी जनता तक पहुंचाई जाए। उन्होंने अनुशासन, निष्ठा और सक्रियता को चुनावी सफलता के लिए सबसे जरूरी बताया।</h6>
<h3>चुनावी समीकरणों पर मायावती का बड़ा संदेश</h3>
<h6>उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और BSP के बीच कड़े मुकाबले में बदल सकता है। इसी संभावित राजनीतिक तस्वीर को लेकर मायावती ने कहा कि मैदान में तीन दल हों या चार, BSP कार्यकर्ताओं का ध्यान केवल पार्टी को जीत दिलाने पर रहना चाहिए।</h6>
<h6>उन्होंने पार्टी नेताओं को आपसी मतभेदों से दूर रहने और संगठन के फैसलों का पालन करने का निर्देश दिया। मायावती का संदेश साफ है कि BSP किसी दूसरे दल के चुनावी समीकरण के भरोसे रहने के बजाय अपनी स्वतंत्र राजनीतिक ताकत को दोबारा खड़ा करना चाहती है।</h6>
<h3>संगठन मजबूत करने पर जोर</h3>
<h6>बैठक में पार्टी संगठन की स्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। मायावती ने जिम्मेदार पदाधिकारियों से अपने क्षेत्रों में नियमित बैठकें करने और निष्क्रिय कार्यकर्ताओं की जगह सक्रिय लोगों को आगे लाने को कहा।</h6>
<h6>युवाओं, महिलाओं, दलितों, पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और अन्य सामाजिक वर्गों के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। BSP की रणनीति अपने पारंपरिक मतदाताओं को दोबारा जोड़ने के साथ नए सामाजिक वर्गों में पकड़ मजबूत करने की है।</h6>
<h3>BSP के सामने वापसी की बड़ी चुनौती</h3>
<h6>पिछले कुछ चुनावों में BSP का प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा है। ऐसे में 2027 का विधानसभा चुनाव पार्टी और मायावती दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी को अपने पुराने जनाधार को वापस लाने के साथ मतदाताओं को यह भरोसा भी दिलाना होगा कि वह उत्तर प्रदेश की सत्ता की मजबूत दावेदार है।</h6>
<h6>मायावती ने कार्यकर्ताओं को निराशा छोड़कर पूरी ताकत से मैदान में उतरने का संदेश दिया है। उनका मानना है कि यदि संगठन बूथ स्तर तक सक्रिय होकर काम करता है और पार्टी का वोट एकजुट रहता है, तो BSP उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ी वापसी कर सकती है।</h6>
<h3>मायावती के संदेश से गरमाई UP की राजनीति</h3>
<h6>मायावती के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में BSP की आगामी रणनीति को लेकर चर्चा तेज होना तय है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पार्टी जमीन पर संगठन को कितना मजबूत कर पाती है और 2027 के चुनाव से पहले किन चेहरों को आगे लाती है।</h6>
<h6><strong>मायावती का यह संदेश केवल कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश की सत्ता के लिए BSP की खुली दावेदारी भी है। त्रिकोणीय हो या चतुष्कोणीय मुकाबला—पार्टी ने अपना लक्ष्य साफ कर दिया है। अब BSP की असली परीक्षा इस चुनावी दावे को मजबूत जमीनी संगठन और मतदाताओं के समर्थन में बदलने की होगी।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 16:11:02 +0530</pubDate>
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