<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/category-37" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Pratyakshdarshi Samachar RSS Feed Generator</generator>
                <title>राजनीति - Pratyakshdarshi Samachar</title>
                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/category/37/rss</link>
                <description>राजनीति RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सड़कों पर कांग्रेस, लखनऊ से कोलकाता तक प्रदर्शन; इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन कर उनके इस्तीफे, पद से हटाने और गिरफ्तारी की मांग उठाई है। यह विरोध राहुल गांधी की ओर से चुनाव प्रक्रिया और वोटर लिस्ट को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद तेज हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/congress-protest-cec-gyanesh-kumar-election-commission-rahul-gandhi/article-2190"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/congress-protest-cec-gyanesh-kumar-25-september-2026.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></p>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/congress-protest-cec-gyanesh-kumar-25-september-2026.jpg.jpg" alt="congress-protest-cec-gyanesh-kumar-25-september-2026.jpg" width="1366" height="768"></img>
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस का विरोध तेज, कई शहरों में सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता

<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कई राज्यों में कांग्रेस का प्रदर्शन</strong></li>
<li><strong>लखनऊ, कोलकाता, दिल्ली और चंडीगढ़ समेत कई शहरों में कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे</strong></li>
<li><strong>कांग्रेस ने CEC के इस्तीफे, हटाने और गिरफ्तारी की मांग की</strong></li>
<li><strong>राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया पर लगाए गंभीर आरोप</strong></li>
<li><strong>BJP ने कांग्रेस और राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया</strong></li>
</ul>
<h6><strong>नई दिल्ली।</strong> मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब सड़कों तक पहुंच गया है। कांग्रेस ने शुक्रवार, 25 सितंबर को कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश के लखनऊ से लेकर पश्चिम बंगाल के कोलकाता तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।</h6>
<h6>कोलकाता में पश्चिम बंगाल कांग्रेस के कार्यकर्ता मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर मार्च के लिए निकले। वहीं लखनऊ में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू, देहरादून और अन्य जगहों से भी प्रदर्शन की खबरें सामने आईं।</h6>
<h2>Why Is Congress Protesting?</h2>
<h6>कांग्रेस का यह विरोध चुनाव आयोग और मतदाता सूची के <strong>Special Intensive Revision (SIR)</strong> को लेकर उठे सवालों के बाद तेज हुआ है। <em>इंडियन एक्सप्रेस</em> की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के दो अन्य सदस्यों ने कुछ फैसलों और निर्देशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। इसके बाद विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर अपने हमले तेज कर दिए।</h6>
<h6>कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पार्टी की प्रदेश इकाइयों को 25 सितंबर को राज्य निर्वाचन कार्यालयों की ओर मार्च करने के निर्देश दिए थे। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, उनकी गिरफ्तारी और उनके कार्यकाल में मतदाता सूची से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है। ये कांग्रेस की मांगें और आरोप हैं; इनका कानूनी निष्कर्ष अभी स्थापित नहीं हुआ है।</h6>
<h2>Rahul Gandhi Raised Questions</h2>
<h6>लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग की थी। उन्होंने चुनावों और वोटर लिस्ट को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए और कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। राहुल गांधी के ये आरोप राजनीतिक दावे हैं, जिन्हें BJP ने खारिज किया है।</h6>
<h6>राहुल गांधी के बयान के बाद कांग्रेस ने विरोध को देशव्यापी रूप देने का फैसला किया। पार्टी की योजना के मुताबिक 25 सितंबर को प्रदेश स्तर पर प्रदर्शन के बाद 28 सितंबर को जिला कांग्रेस कमेटियां जिला कलेक्ट्रेट तक मार्च करेंगी।</h6>
<h2>Protest From Lucknow To Kolkata</h2>
<h6>उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। वहीं कोलकाता में कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़े। वहां सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस की तैनाती और बैरिकेडिंग भी की गई।</h6>
<h6>कांग्रेस का विरोध केवल इन दो शहरों तक सीमित नहीं रहा। जम्मू-कश्मीर, असम, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, मणिपुर और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में प्रदर्शन की खबरें सामने आईं।</h6>
<h2>BJP Rejects Allegations</h2>
<h6>दूसरी ओर BJP ने राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। BJP प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने पहले कहा था कि चुनाव आयोग के भीतर अलग-अलग राय लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और कांग्रेस के आरोपों को सही नहीं माना जा सकता।</h6>
<h6>इस तरह चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर सामने आई रिपोर्ट और विपक्ष के आरोपों ने CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।</h6>
<h2>What Happens Next?</h2>
<h6>मामला अब सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है। कांग्रेस सड़कों पर प्रदर्शन कर रही है और विपक्षी दल संसद में CEC को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी चर्चा कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस अन्य विपक्षी दलों से इस संबंध में संपर्क कर रही है।</h6>
<h1><strong>CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब चुनाव आयोग से निकलकर सड़क और संसद की राजनीति तक पहुंचता दिख रहा है। कांग्रेस जहां इस्तीफे और कार्रवाई की मांग पर अड़ी है, वहीं BJP इन आरोपों को राजनीतिक अभियान बता रही है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव आयोग इन सवालों और बढ़ते राजनीतिक दबाव पर आगे क्या रुख अपनाता है।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/congress-protest-cec-gyanesh-kumar-election-commission-rahul-gandhi/article-2190</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/congress-protest-cec-gyanesh-kumar-election-commission-rahul-gandhi/article-2190</guid>
                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 14:48:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/congress-protest-cec-gyanesh-kumar-25-september-2026.jpg.jpg"                         length="1413909"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>28 साल पुराना चुनाव चिन्ह फ्रीज, अब ‘फुटबॉलर’ के साथ मैदान में ममता; पार्टी ने जारी किया नया लोगो</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के गुट की पहचान फिलहाल बदल गई है। पुराने ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह की जगह Football Player मिला है और अब इसी चिन्ह के साथ नया लोगो भी सामने आ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/mamata-banerjee-new-logo-footballer-symbol-bengal-bypolls/article-2137"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/mamata-banerjee-new-logo-football-player-symbol-2026.jpg.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>बदल गई ममता की पार्टी की पहचान! फूल-घास की जगह ‘फुटबॉलर’, सामने आया नया लोगो</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/mamata-banerjee-new-logo-football-player-symbol-2026.jpg.jpg" alt="mamata-banerjee-new-logo-football-player-symbol-2026.jpg" width="1366" height="768"></img>
ममता बनर्जी के गुट के नए लोगो में Football Player चुनाव चिन्ह को प्रमुखता दी गई है।

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | कोलकाता | 21 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>ममता गुट ने जारी किया नया लोगो</strong></li>
<li><strong>बीच में Football Player का चुनाव चिन्ह</strong></li>
<li><strong>नया नाम ‘Mamata All India Trinamool Congress’</strong></li>
<li><strong>6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव</strong></li>
</ul>
<h6>पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की पहचान फिलहाल बदल गई है। पार्टी के वर्षों पुराने <strong>‘फूल और घास’</strong> चुनाव चिन्ह की जगह अब <strong>Football Player</strong> दिखाई दे रहा है और इसी नए चुनाव चिन्ह को केंद्र में रखकर नया लोगो भी जारी किया गया है।</h6>
<h6>नए लोगो में नीले रंग का बैकग्राउंड है। बीच में फुटबॉल खिलाड़ी का चिन्ह रखा गया है, जबकि <strong>“Mamata All India Trinamool Congress”</strong> नाम सफेद अक्षरों में दिखाई देता है। लोगो में केसरिया, सफेद और हरे रंग का भी इस्तेमाल किया गया है।</h6>
<h6>लेकिन ममता की पार्टी की पहचान अचानक क्यों बदली? इसकी कहानी केवल नए लोगो तक सीमित नहीं है।</h6>
<h2>क्यों बदलना पड़ा नाम और चुनाव चिन्ह?</h2>
<h6>तृणमूल कांग्रेस के भीतर पार्टी पर नियंत्रण को लेकर दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के दावों के बीच चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था की है।</h6>
<h6>आयोग ने दोनों गुटों को फिलहाल <strong>All India Trinamool Congress</strong> नाम और उसके आरक्षित <strong>Flowers and Grass</strong> चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया। इसके बाद दोनों गुटों को अलग-अलग अंतरिम नाम और चुनाव चिन्ह दिए गए।</h6>
<h6>ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को:</h6>
<h6><strong>नाम:</strong> Mamata All India Trinamool Congress<br /><strong>चुनाव चिन्ह:</strong> Football Player</h6>
<h6>जबकि प्रतिद्वंद्वी गुट को:</h6>
<h6><strong>नाम:</strong> Democratic Trinamool Congress<br /><strong>चुनाव चिन्ह:</strong> Envelope</h6>
<h6>दिया गया है।</h6>
<h2>नए लोगो में क्या-क्या बदला?</h2>
<h6>सबसे बड़ा बदलाव बीच में दिखाई देने वाला <strong>Football Player</strong> है।</h6>
<h6>ममता गुट के नए लोगो में यही नया चुनाव चिन्ह प्रमुखता से रखा गया है। इसके चारों तरफ पार्टी का नया नाम दिखाई देता है। नीले बैकग्राउंड के साथ केसरिया, सफेद और हरे रंग का भी इस्तेमाल किया गया है।</h6>
<h6>इसका मतलब यह है कि आने वाले उपचुनाव में मतदाताओं के सामने ममता गुट की पहचान पुराने फूल-घास वाले चिन्ह के बजाय फुटबॉल खिलाड़ी से होगी।</h6>
<h2>6 अक्टूबर को पहली बड़ी परीक्षा</h2>
<h6>नई पहचान ऐसे समय सामने आई है जब <strong>6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव</strong> होने हैं। दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट इन्हीं नई पहचान और चुनाव चिन्हों के साथ चुनावी मैदान में उतरने की स्थिति में हैं।</h6>
<h6>यही वजह है कि नया चुनाव चिन्ह केवल branding का मामला नहीं है। मतदान से पहले मतदाताओं तक नए नाम और चिन्ह को पहुंचाना भी एक महत्वपूर्ण व्यावहारिक चुनौती बन गया है।</h6>
<h2>रेजीनगर में दिख चुकी है नए चिन्ह की चुनौती</h2>
<h6>रेजीनगर में ममता गुट के उम्मीदवार <strong>रबीउल आलम चौधरी</strong> ने 19 सितंबर को पहले चुनाव मैदान से हटने की घोषणा कर दी थी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद अपना फैसला बदल दिया।</h6>
<h6>अपनी शुरुआती घोषणा के दौरान उन्होंने नए चुनाव चिन्ह को कम समय में मतदाताओं तक पहुंचाने में आने वाली कठिनाई का भी जिक्र किया था। बाद में ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व से बातचीत के बाद उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला बरकरार रखा।</h6>
<h6>यह पुराना घटनाक्रम अब नए लोगो की अहमियत को समझाता है—<strong>Football Player को बहुत कम समय में मतदाताओं के बीच पहचान दिलानी है।</strong></h6>
<h2>नंदीग्राम में अलग हुआ घटनाक्रम</h2>
<h6>नंदीग्राम में ममता गुट की उम्मीदवार <strong>संचिता प्रधान डे</strong> ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी। इसके बाद ममता बनर्जी ने वहां कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की।</h6>
<h6>इसलिए 6 अक्टूबर के दोनों उपचुनावों में ममता गुट की राजनीतिक स्थिति एक जैसी नहीं है।</h6>
<h2>मामला अब Supreme Court में</h2>
<h6>कहानी में एक और महत्वपूर्ण development आज सामने आया है।</h6>
<h6>ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा पार्टी का मूल नाम और <strong>‘Flowers and Grass’</strong> चुनाव चिन्ह फ्रीज करने के अंतरिम फैसले को Supreme Court में चुनौती दी है। अदालत ने मामले की जल्द सुनवाई का भरोसा दिया है।</h6>
<h6>इसका मतलब है कि <strong>Football Player वाला नया लोगो अभी राजनीतिक कहानी का अंतिम अध्याय नहीं है।</strong></h6>
<h6>अगर अदालत से चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले पर कोई नया आदेश आता है, तो पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह से जुड़ी स्थिति फिर बदल सकती है।</h6>
<h2>आगे क्या देखना होगा?</h2>
<h6>अब इस खबर में तीन developments महत्वपूर्ण होंगे—Supreme Court में सुनवाई का नतीजा, 6 अक्टूबर के उपचुनाव और नए Football Player चिन्ह को मतदाताओं तक पहुंचाने की ममता गुट की रणनीति।</h6>
<h6>इसलिए इस खबर को नया article publish करने के बाद Supreme Court का फैसला आते ही <strong>इसी URL पर UPDATE</strong> करना बेहतर रहेगा।</h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/mamata-banerjee-new-logo-footballer-symbol-bengal-bypolls/article-2137</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/mamata-banerjee-new-logo-footballer-symbol-bengal-bypolls/article-2137</guid>
                <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 18:44:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/mamata-banerjee-new-logo-football-player-symbol-2026.jpg.jpg"                         length="702648"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘मर्द की औलाद मानूंगा...’, पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग पर भड़के निशिकांत दुबे; बोले- अब जेल का रास्ता</title>
                                    <description><![CDATA[BJP सांसद निशिकांत दुबे और पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के बीच विवाद बढ़ गया है। गर्ग के पुराने कार्यालय में मुलाकात और पैरवी से जुड़े आरोपों को दुबे ने खारिज करते हुए आपराधिक मानहानि का केस दायर करने की बात कही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/nishikant-dubey-subhash-garg-defamation-case-row/article-2127"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/nishikant-dubey-subhash-garg-defamation-row-2026.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>सुभाष गर्ग के किस आरोप पर भड़के निशिकांत दुबे? मानहानि केस का दावा, बोले- माफी नहीं मांगी तो जेल जाएंगे</strong></h1>
<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 21 सितंबर 2026</strong></p>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/nishikant-dubey-subhash-garg-defamation-row-2026.jpg2.jpg" alt="nishikant-dubey-subhash-garg-defamation-row-2026.jpg2" width="1366" height="768"></img>
सुभाष चंद्र गर्ग के आरोपों को निशिकांत दुबे ने खारिज करते हुए मानहानि का मामला दायर करने की बात कही।

<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>सुभाष गर्ग और निशिकांत दुबे के बीच बढ़ा विवाद</strong></li>
<li><strong>पुराने कार्यालय में मुलाकात और पैरवी को लेकर गर्ग का दावा</strong></li>
<li><strong>दुबे ने आरोपों को पूरी तरह खारिज किया</strong></li>
<li><strong>आपराधिक मानहानि का केस दायर करने की कही बात</strong></li>
</ul>
<h6>BJP सांसद <strong>निशिकांत दुबे</strong> और पूर्व वित्त सचिव <strong>सुभाष चंद्र गर्ग</strong> के बीच विवाद अब कानूनी लड़ाई की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है। दुबे ने सोमवार को कहा कि उन्होंने गर्ग के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया है। उन्होंने गर्ग के उन आरोपों को खारिज किया जिनमें उनके वित्त मंत्रालय के कार्यकाल के दौरान दोनों की मुलाकात और कुछ कामों की पैरवी किए जाने की बात कही गई थी।</h6>
<h6>मामले को समझने के लिए केवल दुबे का तीखा बयान जानना काफी नहीं है। सवाल यह है कि <strong>सुभाष गर्ग ने आखिर ऐसा क्या कहा था जिससे विवाद यहां तक पहुंच गया?</strong></h6>
<h2>सुभाष गर्ग ने क्या आरोप लगाया?</h2>
<h6>पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने एक पॉडकास्ट बातचीत में निशिकांत दुबे को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।</h6>
<h6>गर्ग का दावा था कि वित्त मंत्रालय में उनके कार्यकाल के दौरान दुबे एक बार उनके कार्यालय पहुंचे थे और LIC से जुड़े एक काम को लेकर उनसे पैरवी की थी। गर्ग ने यह भी आरोप लगाया कि काम नहीं होने के बाद उनके खिलाफ शिकायत की गई।</h6>
<h6>ये <strong>सुभाष गर्ग के आरोप हैं</strong>। इन आरोपों को निशिकांत दुबे ने खारिज किया है।</h6>
<h2>निशिकांत दुबे ने कहा- उनके दफ्तर गया ही नहीं</h2>
<h6>गर्ग के दावों पर निशिकांत दुबे ने तीखा जवाब दिया।</h6>
<h6>दुबे का कहना है कि 2009 में सांसद बनने के बाद से वह भारत सरकार के किसी सचिव के कार्यालय में नहीं गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने किसी ट्रांसफर या पोस्टिंग के लिए पत्र नहीं लिखा।</h6>
<h6>इसके बाद उन्होंने गर्ग को चुनौती देते हुए बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया और कहा कि अगर उनकी ऐसी कोई चिट्ठी या कार्यालय में हुई बैठक की जानकारी सामने आ जाए तो वह गर्ग की बात स्वीकार करेंगे।</h6>
<h6>दुबे ने कहा कि उन्होंने गर्ग के खिलाफ <strong>आपराधिक मानहानि का केस</strong> दायर किया है और माफी नहीं मांगने पर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ने की बात कही।</h6>
<h2>‘मर्द की औलाद मानूंगा...’</h2>
<h6>इस विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा निशिकांत दुबे के उसी तीखे बयान की हो रही है।</h6>
<h6>दुबे ने गर्ग को चुनौती देते हुए कहा कि 2009 के बाद ट्रांसफर-पोस्टिंग से संबंधित उनकी कोई चिट्ठी या सरकारी कार्यालय में बैठक का प्रमाण सामने लाया जाए। इसी चुनौती के दौरान उन्होंने <strong>“मर्द की औलाद मानूंगा”</strong> जैसी भाषा का इस्तेमाल किया।</h6>
<h6>इसके बाद उन्होंने पूर्व वित्त सचिव पर देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए जेल जाने की बात कही।</h6>
<h6>यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने संबंधी बात <strong>निशिकांत दुबे का आरोप</strong> है, कोई स्थापित निष्कर्ष नहीं।</h6>
<h2>कहानी केवल एक मुलाकात के दावे की नहीं</h2>
<h6>दोनों के बीच मौजूदा विवाद की पृष्ठभूमि में GDP के आंकड़ों को लेकर चली बहस भी है।</h6>
<h6>सुभाष गर्ग ने हाल में GDP के आंकड़ों और पुराने अनुमान में हुए संशोधन पर सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि पिछले वर्ष की पहली तिमाही के मौजूदा कीमतों वाले GDP अनुमान में करीब 86 लाख करोड़ रुपये से 80 लाख करोड़ रुपये तक बदलाव हुआ और इससे growth comparison को अलग तरीके से देखने की जरूरत है। इस interpretation पर दूसरे अर्थशास्त्रियों और सरकार समर्थक पक्षों ने असहमति जताई है।</h6>
<h6>इसी बहस के बाद दुबे और गर्ग के बीच पुराने मतभेद भी सार्वजनिक चर्चा में आ गए।</h6>
<h2>2018 की चिट्ठी भी आई सामने</h2>
<h6>इस विवाद में एक पुराना दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हो गया है।</h6>
<h6>दुबे ने मार्च 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे अपने एक पुराने पत्र का हवाला दिया है। उस समय सुभाष चंद्र गर्ग आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव थे। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक गर्ग ने जुलाई 2017 में आर्थिक मामलों के सचिव का पद संभाला था।</h6>
<h6>बताया गया है कि पुराने पत्र में दुबे ने गर्ग के आर्थिक दृष्टिकोण और राजकोषीय नीति से जुड़े मुद्दों पर आपत्ति जताई थी।</h6>
<h6>यानी दोनों के बीच मौजूदा विवाद अचानक पैदा हुआ मामला भर नहीं है; इसके पीछे कई साल पुराने मतभेद भी सामने आ रहे हैं।</h6>
<h2>अब आगे क्या?</h2>
<h6>इस विवाद में अब सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा <strong>कानूनी कार्रवाई</strong> होगा।</h6>
<h6>निशिकांत दुबे ने आपराधिक मानहानि का मामला दायर करने की बात कही है। दूसरी तरफ सुभाष गर्ग के आरोप भी सार्वजनिक रूप से सामने हैं। आगे अदालत में मामला बढ़ता है, गर्ग कोई नया जवाब देते हैं या दुबे अपने दावे से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करते हैं, तो वही इस खबर का अगला महत्वपूर्ण अपडेट होगा।</h6>
<h6><strong>इसलिए आगे कोई नया बयान आते ही अलग duplicate story बनाने के बजाय इसी URL को अपडेट करना बेहतर रहेगा।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/nishikant-dubey-subhash-garg-defamation-case-row/article-2127</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/nishikant-dubey-subhash-garg-defamation-case-row/article-2127</guid>
                <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 14:21:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/nishikant-dubey-subhash-garg-defamation-row-2026.jpg2.jpg"                         length="854339"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>JDU की बैठक में क्यों नहीं पहुंचे ललन सिंह? उठे सवाल तो केंद्रीय मंत्री ने खुद बताई वजह</title>
                                    <description><![CDATA[JDU की बैठक में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की गैरमौजूदगी को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। ललन सिंह ने कहा कि उनका कार्यक्रम गुजरात में था और उन्हें बैठक की जानकारी भी नहीं थी। उन्होंने JDU में मतभेद की चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी एकजुट है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/lalan-singh-reaction-jdu-meeting-absence-bihar-2026/article-2110"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/lalan-singh-jdu-meeting-reaction-bihar-2026.jpg-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | पटना | 19 सितंबर 2026</strong></p>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/lalan-singh-jdu-meeting-reaction-bihar-2026.jpg-(2).jpg" alt="lalan-singh-jdu-meeting-reaction-bihar-2026.jpg (2)" width="1366" height="768"></img>
JDU की बैठक में गैरमौजूद रहने पर ललन सिंह ने कहा कि उनका कार्यक्रम गुजरात में था।

<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>JDU की बैठक पर ललन सिंह का पहला जवाब</strong></li>
<li><strong>बोले- मेरा कार्यक्रम गुजरात में था</strong></li>
<li><strong>बैठक की जानकारी नहीं होने की भी कही बात</strong></li>
<li><strong>पार्टी में मतभेद की चर्चाओं को किया खारिज</strong></li>
</ul>
<h6>बिहार की राजनीति में JDU की एक बैठक और उसमें केंद्रीय मंत्री <strong>ललन सिंह की गैरमौजूदगी</strong> को लेकर उठे सवालों पर अब खुद ललन सिंह ने जवाब दिया है।</h6>
<h6>शनिवार को पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में ललन सिंह ने कहा कि उनकी गैरमौजूदगी को बेवजह तूल दिया जा रहा है। उन्होंने JDU में किसी तरह के मतभेद से इनकार करते हुए कहा कि पार्टी एकजुट है।</h6>
<h2>ललन सिंह ने क्यों नहीं की बैठक में शिरकत?</h2>
<h6>ललन सिंह ने अपनी गैरमौजूदगी की वजह बताते हुए कहा कि उनका कार्यक्रम गुजरात में था।</h6>
<h6>उन्होंने कहा कि कई विधायकों ने उन्हें फोन भी किया था और उन्होंने उन्हें बताया था कि वह गुजरात में हैं।</h6>
<h6>ललन सिंह के मुताबिक उन्हें पार्टी की इस बैठक की जानकारी भी नहीं थी। उन्होंने बताया कि रात करीब 9 बजे स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का भी फोन आया था और इसके बाद उनकी संजय झा से बातचीत हुई।</h6>
<h2>‘पार्टी में कोई मतभेद नहीं’</h2>
<h6>ललन सिंह से JDU के भीतर मतभेद की चर्चाओं को लेकर भी सवाल किया गया।</h6>
<h6>इस पर उन्होंने इन अटकलों को खारिज किया। ललन सिंह ने कहा कि पार्टी में कोई मतभेद नहीं है और JDU एकजुट है।</h6>
<h6>उन्होंने 1994 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में समता पार्टी के गठन का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र और आपसी विचार-विमर्श की परंपरा रही है और वही आज भी जारी है।</h6>
<h2>आखिर किस बैठक में नहीं पहुंचे थे ललन सिंह?</h2>
<h6>JDU ने शुक्रवार, 18 सितंबर को पटना स्थित पार्टी कार्यालय में विधायकों और विधान पार्षदों के लिए एक orientation programme आयोजित किया था।</h6>
<h6>कार्यक्रम में विधायी जिम्मेदारियों, कानून बनाने की प्रक्रिया, बजट और सदन की कार्यप्रणाली जैसे विषयों पर जानकारी दी गई।</h6>
<h6>करीब 100 MLA और MLC कार्यक्रम में शामिल हुए, लेकिन ललन सिंह समेत कुछ वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया।</h6>
<h2>विधायकों ने भी उठाए थे सवाल</h2>
<h6>ललन सिंह और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर की गैरमौजूदगी को लेकर बैठक में कुछ विधायकों ने सवाल भी उठाए थे।</h6>
<h6>रिपोर्ट के मुताबिक छह विधायकों ने दोनों वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति पर सवाल किया। इसके बाद JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने स्थिति स्पष्ट की।</h6>
<h2>संजय झा ने क्या कहा था?</h2>
<h6>संजय झा ने कहा था कि यह कार्यक्रम JDU के <strong>विधायकों और विधान पार्षदों</strong> के लिए था और इसमें किसी सांसद को आमंत्रित नहीं किया गया था।</h6>
<h6>उन्होंने यह भी कहा कि उनकी ललन सिंह से लगातार बातचीत होती है और बैठक से एक दिन पहले भी दोनों की बात हुई थी।</h6>
<h6>यानी पार्टी की तरफ से पहले ही ललन सिंह की गैरमौजूदगी को किसी राजनीतिक मतभेद से जोड़ने से इनकार किया गया था और अब ललन सिंह ने भी ऐसी चर्चाओं को खारिज किया है।</h6>
<h2>निशांत कुमार के संबोधन की भी हुई चर्चा</h2>
<h6>इस orientation programme की एक और वजह से राजनीतिक चर्चा हुई।</h6>
<h6>स्वास्थ्य मंत्री <strong>निशांत कुमार</strong> ने पार्टी विधायकों को संबोधित किया। रिपोर्ट के मुताबिक यह पार्टी विधायकों के सामने उनका पहला औपचारिक संबोधन था। कार्यक्रम का घोषित उद्देश्य विधायकों को legislative processes की जानकारी देना था, लेकिन निशांत की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक चर्चा हुई।</h6>
<h2>अनंत सिंह-नीरज कुमार विवाद पर क्या बोले ललन?</h2>
<h6>इसी बीच JDU विधायक अनंत सिंह और पार्टी के MLC नीरज कुमार के बीच भी विवाद सामने आया है।</h6>
<h6>अनंत सिंह ने पटना स्नातक MLC चुनाव में नीरज कुमार का विरोध करने और उन्हें हराने की बात कही है। नीरज कुमार ने भी उनके आरोपों पर जवाब दिया है।</h6>
<h6>ललन सिंह से इस विवाद पर सवाल किया गया तो उन्होंने इसे दोनों नेताओं का मामला बताते हुए विस्तार से टिप्पणी करने से परहेज किया।</h6>
<h6>फिलहाल ललन सिंह और JDU नेतृत्व दोनों ने पार्टी में मतभेद की चर्चाओं को खारिज किया है। इसलिए उनकी बैठक से गैरमौजूदगी को किसी राजनीतिक नाराजगी या गुटबाजी का प्रमाण मानना सही नहीं होगा।</h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/lalan-singh-reaction-jdu-meeting-absence-bihar-2026/article-2110</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/lalan-singh-reaction-jdu-meeting-absence-bihar-2026/article-2110</guid>
                <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 17:23:59 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/lalan-singh-jdu-meeting-reaction-bihar-2026.jpg-%282%29.jpg"                         length="680455"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CM भगवंत मान के काफिले पर टमाटर फेंकने की कोशिश, BJP नेता रवनीत बिट्टू हिरासत में; जानिए पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब के लुधियाना में BJP नेता रवनीत सिंह बिट्टू को पुलिस ने हिरासत में लिया है। बिट्टू PAU गेट पर हाथ में टमाटर लेकर पहुंचे थे और मुख्यमंत्री भगवंत मान का काफिला गुजरने के दौरान टमाटर फेंकने की कोशिश की। यह घटनाक्रम एक दिन पहले बटाला के पास बिट्टू के काफिले पर अंडे और अन्य चीजें फेंके जाने के विवाद के बाद सामने आया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/ravneet-bittu-detained-bhagwant-mann-convoy-ludhiana-2026/article-2103"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/ravneet-bittu-detained-bhagwant-mann-convoy-ludhiana.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लुधियाना | 19 सितंबर 2026</strong></p>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/ravneet-bittu-detained-bhagwant-mann-convoy-ludhiana.jpg.jpg" alt="ravneet-bittu-detained-bhagwant-mann-convoy-ludhiana.jpg" width="1366" height="768"></img>
लुधियाना में मुख्यमंत्री भगवंत मान के काफिले के रास्ते पर पहुंचे रवनीत बिट्टू को पुलिस ने हिरासत में लिया।

<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>लुधियाना में रवनीत सिंह बिट्टू हिरासत में</strong></li>
<li><strong>PAU गेट पर हाथ में टमाटर लेकर पहुंचे थे BJP नेता</strong></li>
<li><strong>भगवंत मान का काफिला गुजरने के दौरान टमाटर फेंकने की कोशिश</strong></li>
<li><strong>एक दिन पहले बिट्टू के काफिले पर अंडे-टमाटर फेंके जाने का हुआ था विवाद</strong></li>
</ul>
<h6>पंजाब की राजनीति में लगातार दूसरे दिन BJP और आम आदमी पार्टी के बीच टकराव देखने को मिला। शनिवार दोपहर लुधियाना में <strong>BJP नेता और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को पंजाब पुलिस ने हिरासत में ले लिया।</strong></h6>
<h6>बिट्टू पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी यानी <strong>PAU के गेट पर हाथ में टमाटर लेकर पहुंचे थे।</strong> मुख्यमंत्री भगवंत मान का काफिला इसी रास्ते से गुजरने वाला था। पुलिस ने बिट्टू को आगे बढ़ने से रोका और बाद में उन्हें हिरासत में लेकर वहां से ले गई।</h6>
<h2>भगवंत मान के काफिले के पास क्या हुआ?</h2>
<h6>लुधियाना में आम आदमी पार्टी का कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान, मनीष सिसोदिया और पार्टी के दूसरे नेताओं के शामिल होने की जानकारी थी।</h6>
<h6>मुख्यमंत्री का काफिला PAU के बाहर से गुजरने वाला था। इसी दौरान रवनीत बिट्टू हाथ में टमाटर लेकर वहां पहुंच गए।</h6>
<h6>Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने बिट्टू को आगे बढ़ने से रोक दिया। मुख्यमंत्री का काफिला निकलने के दौरान बिट्टू ने टमाटर फेंकने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। रिपोर्ट के मुताबिक बिट्टू काफिले के बहुत करीब नहीं पहुंच पाए थे।</h6>
<h2>एक दिन पहले बिट्टू के काफिले के साथ क्या हुआ था?</h2>
<h6>इस पूरे घटनाक्रम का संबंध 18 सितंबर को बटाला के पास हुई एक घटना से है।</h6>
<h6>रवनीत बिट्टू अमृतसर से पठानकोट BJP की <strong>‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’</strong> में शामिल होने जा रहे थे। रास्ते में उनके काफिले पर अंडे और अन्य वस्तुएं फेंके जाने की घटना सामने आई थी। बिट्टू ने आरोप लगाया था कि उनके काफिले पर हमला किया गया और इसके पीछे AAP से जुड़े लोग थे।</h6>
<h6>बिट्टू ने यह भी दावा किया कि उनके escort vehicles के शीशे टूटे और jammer vehicle को नुकसान पहुंचा। हालांकि हमले में AAP की भूमिका और इसके पीछे साजिश होने की बातें <strong>बिट्टू और BJP के आरोप हैं</strong>, स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं।</h6>
<h2>AAP ने क्या कहा था?</h2>
<h6>आम आदमी पार्टी ने बिट्टू की ओर से लगाए गए आरोपों से इनकार किया था।<br />AAP नेता जोबन रंधावा ने कहा था कि पार्टी कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे और आरोप लगाया कि बिट्टू के समर्थकों ने ही उन्हें निशाना बनाया। इसलिए 18 सितंबर की घटना को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं।</h6>
<h2>अगले दिन टमाटर लेकर पहुंचे बिट्टू</h2>
<h6>एक दिन पहले हुई इसी घटना के बाद शनिवार को बिट्टू लुधियाना पहुंचे।</h6>
<h6>Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार बिट्टू का उद्देश्य भगवंत मान के काफिले की ओर टमाटर फेंककर पिछली घटना का विरोध दर्ज कराना था। हालांकि पुलिस ने उन्हें काफिले के करीब पहुंचने से पहले ही रोक दिया और बाद में हिरासत में ले लिया।</h6>
<h6>इस तरह दो दिनों में पंजाब में BJP और AAP से जुड़ा यह राजनीतिक टकराव दो अलग-अलग घटनाओं के जरिए सामने आया है।</h6>
<h2>पंजाब में नशे को लेकर भी चल रहा सियासी टकराव</h2>
<h6>इस विवाद की पृष्ठभूमि में BJP की <strong>‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’</strong> भी है।</h6>
<h6>बिट्टू 18 सितंबर को इसी यात्रा में शामिल होने पठानकोट जा रहे थे। घटना के बाद उन्होंने पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था को लेकर भगवंत मान सरकार पर कई आरोप लगाए। BJP के अन्य नेताओं ने भी राज्य सरकार को घेरा। ये राजनीतिक आरोप हैं और इन पर सत्तारूढ़ AAP का पक्ष अलग है।</h6>
<h6>फिलहाल शनिवार की घटना में बिट्टू को PAU गेट से हिरासत में लिए जाने की पुष्टि सामने आई है। आगे पुलिस की ओर से किसी कानूनी कार्रवाई या बिट्टू की रिहाई को लेकर नया अपडेट आता है तो खबर को उसी URL पर अपडेट करना बेहतर रहेगा</h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/ravneet-bittu-detained-bhagwant-mann-convoy-ludhiana-2026/article-2103</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/ravneet-bittu-detained-bhagwant-mann-convoy-ludhiana-2026/article-2103</guid>
                <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 14:39:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/ravneet-bittu-detained-bhagwant-mann-convoy-ludhiana.jpg.jpg"                         length="498545"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नंदीग्राम के बाद रेजीनगर में भी ममता गुट का उम्मीदवार मैदान से हटा, रबीउल आलम चौधरी ने वापस लिया नाम</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल के उपचुनाव से पहले राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे के हटने के बाद अब रेजीनगर से ममता बनर्जी खेमे के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने भी चुनावी मैदान से हटने का फैसला किया है। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है और 19 सितंबर नामांकन वापसी की आखिरी तारीख है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/after-nandigram-mamta-groups-candidate-removed-from-the-field-in/article-2097"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/mamata-banerjee-rejinagar-rabiul-alam-bypoll-2026.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | कोलकाता | 19 सितंबर 2026</strong></p>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/mamata-banerjee-rejinagar-rabiul-alam-bypoll-2026.jpg.jpg" alt="mamata-banerjee-rejinagar-rabiul-alam-bypoll-2026.jpg" width="1366" height="768"></img>
नंदीग्राम के बाद रेजीनगर से भी ममता बनर्जी खेमे का उम्मीदवार चुनावी मैदान से हट गया है।

<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी मैदान से हटे</strong></li>
<li><strong>एक दिन पहले नंदीग्राम की संचिता प्रधान डे ने नाम वापस लिया</strong></li>
<li><strong>19 सितंबर नामांकन वापसी की आखिरी तारीख</strong></li>
<li><strong>नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को मतदान</strong></li>
</ul>
<h6>पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा उपचुनाव से पहले ममता बनर्जी खेमे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। <strong>नंदीग्राम के बाद अब रेजीनगर से भी ममता खेमे के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने उपचुनाव से अपना नामांकन वापस लेने की बात कही है।</strong></h6>
<h6>यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि एक दिन पहले ही नंदीग्राम से ममता खेमे की उम्मीदवार <strong>संचिता प्रधान डे</strong> ने भी अपना नामांकन वापस ले लिया था।</h6>
<h2>रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी थे उम्मीदवार</h2>
<h6>ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे ने 13 सितंबर को नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किए थे। नंदीग्राम से स्कूल शिक्षिका संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से पूर्व विधायक <strong>रबीउल आलम चौधरी</strong> को मैदान में उतारा गया था।</h6>
<h6>अब रबीउल आलम चौधरी के मैदान से हटने के साथ ममता खेमे के दोनों घोषित उम्मीदवार चुनावी दौड़ से बाहर हो गए हैं।</h6>
<h2>क्यों हटे रबीउल आलम चौधरी?</h2>
<h6>मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रबीउल आलम चौधरी ने कहा कि नया चुनाव चिह्न मिलने के बाद बहुत कम समय में उसे मतदाताओं तक पहुंचाना मुश्किल था और संगठन को भी नए चिह्न के साथ चुनाव के लिए तैयार करने में समय की कमी थी। इसे उनके बताए कारण के रूप में ही देखा जाना चाहिए।</h6>
<h6>दरअसल चुनाव आयोग ने TMC के पुराने नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद के बीच ममता बनर्जी के खेमे को उपचुनाव के लिए <strong>‘फुटबॉल खिलाड़ी’</strong> चुनाव चिह्न दिया था, जबकि प्रतिद्वंद्वी खेमे को <strong>‘लिफाफा’</strong> चुनाव चिह्न आवंटित किया गया।</h6>
<h2>नंदीग्राम में एक दिन पहले बदला था समीकरण</h2>
<h6>इससे पहले शुक्रवार को नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस लिया था। नाम वापस लेने से कुछ घंटे पहले उन्होंने राज्य सचिवालय नबन्ना में मुख्यमंत्री और नंदीग्राम के मौजूदा विधायक सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। हालांकि इस मुलाकात और उनके नामांकन वापस लेने के बीच कारणात्मक संबंध स्थापित नहीं हुआ है।</h6>
<h6>संचिता के हटने के बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में अपना दूसरा उम्मीदवार उतारने के बजाय कांग्रेस उम्मीदवार <strong>मिलन प्रधान को समर्थन देने</strong> की घोषणा की थी।</h6>
<h2>रेजीनगर पर अब ममता बनर्जी क्या करेंगी?</h2>
<h6>नंदीग्राम पर कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा के समय ममता बनर्जी ने रेजीनगर को लेकर तत्काल वैसा ऐलान नहीं किया था और कहा था कि इस सीट पर फैसला बाद में किया जाएगा।</h6>
<h6>इसलिए रबीउल आलम चौधरी के हटने के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि ममता खेमा रेजीनगर में किसी दूसरे उम्मीदवार या किसी अन्य दल के प्रत्याशी को समर्थन देने के संबंध में क्या औपचारिक घोषणा करता है।</h6>
<h2>6 अक्टूबर को होगा मतदान</h2>
<h6>चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर <strong>6 अक्टूबर 2026 को मतदान</strong> होना है। उम्मीदवारों के नाम वापस लेने की अंतिम तारीख <strong>19 सितंबर</strong> रखी गई थी और पूरी चुनाव प्रक्रिया 11 अक्टूबर तक पूरी होनी है।</h6>
<h6>रेजीनगर का उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि 2026 विधानसभा चुनाव में Aam Janata Unnayan Party के प्रमुख हुमायूं कबीर ने रेजीनगर और नाओदा दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी।</h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/after-nandigram-mamta-groups-candidate-removed-from-the-field-in/article-2097</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/after-nandigram-mamta-groups-candidate-removed-from-the-field-in/article-2097</guid>
                <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 12:14:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/mamata-banerjee-rejinagar-rabiul-alam-bypoll-2026.jpg.jpg"                         length="339269"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सपा नेताओं और ABVP कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक का VIDEO वायरल, धक्का-मुक्की का दावा; आखिर क्या है मामला?</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश से जोड़कर सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में समाजवादी पार्टी से जुड़े बताए जा रहे लोगों और ABVP कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस और हंगामे जैसी स्थिति दिखाई देती है। वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि विवाद के दौरान एक ABVP कार्यकर्ता के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। हालांकि वीडियो के छोटे हिस्से से विवाद की शुरुआत और पूरा घटनाक्रम स्पष्ट नहीं होता और खबर लिखे जाने तक इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/sp-abvp-workers-clash-viral-video-up-2026/article-2075"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/sp-abvp-workers-clash-viral-video-up-2026.jpg.png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश | 17 सितंबर 2026</strong></p>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/sp-abvp-workers-clash-viral-video-up-2026.jpg.png" alt="sp-abvp-workers-clash-viral-video-up-2026.jpg" width="1366" height="768"></img>
वायरल वीडियो में सपा से जुड़े लोगों और ABVP कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस दिखाई दे रही है।

<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>सपा और ABVP से जोड़कर VIDEO वायरल</strong></li>
<li><strong>दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक दिखाई दी</strong></li>
<li><strong>सोशल मीडिया पोस्ट में धक्का-मुक्की का दावा</strong></li>
<li><strong>घटना की पूरी परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि बाकी</strong></li>
</ul>
<h6>उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में समाजवादी पार्टी से जुड़े बताए जा रहे लोगों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस होती दिखाई दे रही है।</h6>
<h6>वीडियो शेयर करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट ने दावा किया है कि विवाद के दौरान मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया।</h6>
<h6>हालांकि वायरल वीडियो घटना का केवल एक हिस्सा दिखाता है। <strong>विवाद की शुरुआत किस बात से हुई और किस पक्ष ने पहले शारीरिक टकराव किया, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।</strong></h6>
<h2>VIDEO में क्या दिखाई दे रहा है?</h2>
<h6>सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में एक स्थान पर कई लोग जमा दिखाई देते हैं। मौके पर पुलिसकर्मी भी मौजूद नजर आते हैं।</h6>
<h6>वीडियो में दोनों तरफ मौजूद लोगों के बीच बहस होती दिखाई देती है और माहौल काफी तनावपूर्ण नजर आता है।</h6>
<h6>वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि समाजवादी पार्टी से जुड़े नेताओं और ABVP कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हुआ और बात धक्का-मुक्की तक पहुंच गई।</h6>
<h6><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार वायरल पोस्ट में किए गए इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है।</strong></h6>
<h2>वायरल पोस्ट में क्या दावा किया गया?</h2>
<h6>वीडियो शेयर करने वाले अकाउंट ने दावा किया है कि समाजवादी पार्टी के एक जिलाध्यक्ष और एक अन्य सपा नेता का ABVP कार्यकर्ताओं के साथ विवाद हुआ।</h6>
<h6>पोस्ट में एक ABVP कार्यकर्ता के साथ धक्का-मुक्की किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।</h6>
<h6>लेकिन इन नामों, पदों और आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।</h6>
<h2>मौके पर पुलिस भी दिखाई दी</h2>
<h6>वीडियो की तस्वीरों में मौके पर पुलिसकर्मी मौजूद दिखाई देते हैं।</h6>
<h6>इससे इतना स्पष्ट है कि विवाद के दौरान वहां पुलिस मौजूद थी, लेकिन पुलिस ने इस घटना को लेकर क्या कार्रवाई की, किसी पक्ष की शिकायत दर्ज हुई या नहीं और विवाद की आधिकारिक वजह क्या बताई गई—इन बिंदुओं पर विश्वसनीय आधिकारिक जानकारी अभी सामने आना बाकी है।</h6>
<h2>सपा और ABVP के पक्ष का इंतजार</h2>
<h6>इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण दोनों पक्षों का आधिकारिक पक्ष है।</h6>
<h6>समाजवादी पार्टी या संबंधित स्थानीय पदाधिकारियों और ABVP की ओर से अगर घटना पर आधिकारिक बयान सामने आता है तो उससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद किस मुद्दे पर शुरू हुआ और वायरल वीडियो से पहले क्या हुआ था।</h6>
<h6>सोशल मीडिया पर वायरल छोटे वीडियो अक्सर पूरे घटनाक्रम का केवल एक हिस्सा दिखाते हैं। इसलिए किसी एक पक्ष को जिम्मेदार ठहराने से पहले पूरे वीडियो, पुलिस के बयान और दोनों पक्षों का पक्ष सामने आना जरूरी है।</h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/sp-abvp-workers-clash-viral-video-up-2026/article-2075</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/sp-abvp-workers-clash-viral-video-up-2026/article-2075</guid>
                <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 17:51:59 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/sp-abvp-workers-clash-viral-video-up-2026.jpg.png"                         length="2474606"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राघव चड्ढा के BJP में जाने पर पहली बार खुलकर बोले केजरीवाल- ‘अब राज्यसभा भेजने से पहले 100 बार ठोक-बजाकर देखेंगे’</title>
                                    <description><![CDATA[AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने राघव चड्ढा, संदीप पाठक समेत पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के BJP में जाने पर पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी है। केजरीवाल ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और पार्टी के साथ धोखा बताते हुए कहा कि इन नेताओं को जनता ने नहीं, AAP ने राज्यसभा भेजा था। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से पार्टी ने सबक लिया है और भविष्य में किसी को राज्यसभा भेजने से पहले उसकी विश्वसनीयता की ‘100 बार’ जांच की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/arvind-kejriwal-raghav-chadha-rajya-sabha-aap-bjp-2026/article-2023"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/arvind-kejriwal-raghav-chadha-rajya-sabha-aap-bjp.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 14 सितंबर 2026</strong></p>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/arvind-kejriwal-raghav-chadha-rajya-sabha-aap-bjp.jpg2.jpg" alt="arvind-kejriwal-raghav-chadha-rajya-sabha-aap-bjp.jpg2" width="1366" height="768"></img>
राघव चड्ढा समेत सात सांसदों के BJP में जाने पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आगे राज्यसभा उम्मीदवारों की कड़ी जांच की जाएगी।

<h1>खबर में खास</h1>
<ul>
<li><strong>राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों के जाने पर बोले अरविंद केजरीवाल</strong></li>
<li><strong>कहा- पार्टी के साथ हुआ धोखा, लेकिन इससे हमने सीख ली</strong></li>
<li><strong>अब राज्यसभा उम्मीदवार की विश्वसनीयता की होगी कड़ी जांच</strong></li>
<li><strong>अप्रैल में AAP के 7 राज्यसभा सांसद BJP में हुए थे शामिल</strong></li>
</ul>
<h6>आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के एक साथ BJP में जाने के करीब पांच महीने बाद पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने इस पूरे घटनाक्रम पर खुलकर बात की है।</h6>
<h6>राघव चड्ढा, संदीप पाठक समेत सात सांसदों के पार्टी छोड़ने को केजरीवाल ने <strong>दुर्भाग्यपूर्ण और AAP के साथ धोखा</strong> बताया।</h6>
<h6>साथ ही उन्होंने माना कि इस पूरे घटनाक्रम ने पार्टी को एक बड़ी राजनीतिक सीख दी है।</h6>
<h6>केजरीवाल ने कहा कि भविष्य में किसी को भी राज्यसभा भेजने से पहले पार्टी उसकी विश्वसनीयता को <strong>“100 बार ठोक-बजाकर”</strong> देखेगी कि व्यक्ति सही है या नहीं।</h6>
<h2>‘उन्हें जनता ने नहीं, पार्टी ने राज्यसभा भेजा था’</h2>
<h6>अरविंद केजरीवाल ने पार्टी छोड़कर BJP में गए सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें जनता ने राज्यसभा नहीं भेजा था, बल्कि आम आदमी पार्टी ने भेजा था।</h6>
<h6>केजरीवाल ने इसे पार्टी के साथ विश्वासघात बताते हुए कहा कि AAP ने उनके साथ धोखा नहीं किया, बल्कि उन्होंने पार्टी को धोखा दिया।</h6>
<h2>‘अब 100 बार ठोक-बजाकर देखेंगे’</h2>
<h6>केजरीवाल के बयान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भविष्य में राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन को लेकर है।</h6>
<h6>उन्होंने माना कि पार्टी को इस घटनाक्रम से सीख मिली है।</h6>
<h6>केजरीवाल ने कहा कि आगे किसी व्यक्ति को राज्यसभा भेजने से पहले पार्टी <strong>“100 बार ठोक-बजाकर”</strong> देखेगी कि वह व्यक्ति विश्वसनीय है या नहीं।</h6>
<h6>इस बयान से संकेत मिलता है कि AAP आने वाले समय में राज्यसभा टिकट देने की अपनी प्रक्रिया को ज्यादा सख्त कर सकती है।</h6>
<h2>अप्रैल में AAP को लगा था बड़ा झटका</h2>
<h6>24 अप्रैल 2026 को AAP के लिए बड़ा राजनीतिक झटका उस समय आया था जब उसके 10 राज्यसभा सांसदों में से सात ने पार्टी छोड़कर BJP का दामन थाम लिया।</h6>
<h6>इनमें <strong>राघव चड्ढा, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता</strong> शामिल थे।</h6>
<h6>बाद में राज्यसभा सभापति ने इन सात सांसदों के BJP में शामिल होने को मंजूरी दी और राज्यसभा की BJP सांसदों की सूची में उनके नाम शामिल किए गए।</h6>
<h2>राघव चड्ढा कभी थे AAP के प्रमुख चेहरों में शामिल</h2>
<h6>राघव चड्ढा का पार्टी छोड़ना इसलिए भी ज्यादा चर्चा में रहा क्योंकि वह लंबे समय तक अरविंद केजरीवाल के भरोसेमंद और AAP के प्रमुख युवा चेहरों में गिने जाते थे।</h6>
<h6>वह दिल्ली में विधायक रहने के साथ पंजाब में AAP की चुनावी रणनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके थे और बाद में पंजाब से राज्यसभा भेजे गए थे।</h6>
<h6>लेकिन अप्रैल 2026 में उन्होंने छह अन्य सांसदों के साथ AAP छोड़कर BJP में जाने की घोषणा कर दी।</h6>
<h2>AAP पर राघव चड्ढा ने क्या लगाए थे आरोप?</h2>
<h6>BJP में शामिल होते समय राघव चड्ढा ने अपनी पुरानी पार्टी पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए थे।</h6>
<h6>उन्होंने दावा किया था कि AAP अपने शुरुआती सिद्धांतों और ईमानदार राजनीति के रास्ते से भटक चुकी है।</h6>
<h6>AAP ने इन आरोपों को स्वीकार करने के बजाय सात सांसदों के कदम को पार्टी के साथ विश्वासघात बताया था।</h6>
<h6>अब केजरीवाल ने एक बार फिर इसी घटनाक्रम को ‘धोखा’ बताते हुए भविष्य के लिए सबक लेने की बात कही है।</h6>
<h2>अब AAP के कितने राज्यसभा सांसद?</h2>
<h6>सात सांसदों के BJP में जाने से राज्यसभा में AAP की ताकत में बड़ी कमी आई।</h6>
<h6>इस घटनाक्रम के बाद AAP के पास राज्यसभा में <strong>तीन सांसद—संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल</strong> रह गए।</h6>
<h6>यही वजह है कि यह मामला सिर्फ नेताओं के पार्टी बदलने तक सीमित नहीं था, बल्कि इससे संसद के उच्च सदन में AAP की संख्या पर भी सीधा असर पड़ा।</h6>
<h2>केजरीवाल ने विधायकों का भी किया जिक्र</h2>
<h6>केजरीवाल ने दावा किया कि राज्यसभा सांसदों के मामले के उलट अलग-अलग राज्यों में पार्टी के निर्वाचित विधायकों ने दबाव और दल-बदल की कोशिशों के बावजूद AAP का साथ नहीं छोड़ा।</h6>
<h6>उन्होंने दिल्ली, गोवा, जम्मू-कश्मीर और गुजरात का उदाहरण देते हुए पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों की निष्ठा का जिक्र किया।</h6>
<h6>यह केजरीवाल का राजनीतिक दावा है और इसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए।</h6>
<h2>गोवा में दिया केजरीवाल ने बयान</h2>
<h6>अरविंद केजरीवाल ने ये बातें गोवा में कहीं, जहां AAP ने <strong>Goa Forward Party (GFP)</strong> के साथ 2027 विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन की घोषणा की है।</h6>
<h6>इसी दौरान उनसे AAP के सात राज्यसभा सांसदों के BJP में चले जाने को लेकर सवाल किया गया था।</h6>
<h6>जवाब में केजरीवाल ने माना कि राज्यसभा के मामले में जो हुआ, वह पार्टी के लिए एक सीख है।</h6>
<h2>आगे किसे राज्यसभा भेजेगी AAP?</h2>
<h6>केजरीवाल के बयान के बाद अब एक स्वाभाविक सवाल यह भी उठता है कि भविष्य में AAP अपने राज्यसभा उम्मीदवारों का चयन किस आधार पर करेगी।</h6>
<h6>उन्होंने फिलहाल किसी नए नाम की घोषणा नहीं की है।</h6>
<h6>लेकिन <strong>“100 बार ठोक-बजाकर”</strong> उम्मीदवार चुनने वाला बयान यह साफ करता है कि पार्टी भविष्य के राज्यसभा टिकटों को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क रहने का संदेश दे रही है।</h6>
<h6>राघव चड्ढा जैसे कभी बेहद भरोसेमंद माने जाने वाले चेहरे के पार्टी छोड़ने के बाद AAP के सामने अब चुनौती सिर्फ नए नेताओं को चुनने की नहीं, बल्कि उनकी दीर्घकालिक राजनीतिक निष्ठा परखने की भी है।</h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/arvind-kejriwal-raghav-chadha-rajya-sabha-aap-bjp-2026/article-2023</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/arvind-kejriwal-raghav-chadha-rajya-sabha-aap-bjp-2026/article-2023</guid>
                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 16:31:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/arvind-kejriwal-raghav-chadha-rajya-sabha-aap-bjp.jpg2.jpg"                         length="1127536"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UP चुनाव से पहले BSP के वोट बैंक पर आठवले की नजर, आकाश आनंद को RPI में आने का न्योता; बोले- ‘बसपा से अपना हक वापस लेना है’</title>
                                    <description><![CDATA[मुरादाबाद में केंद्रीय मंत्री और RPI प्रमुख रामदास आठवले ने BSP के दलित वोट बैंक पर खुलकर दांव खेला। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि यूपी में BSP से “अपना हक वापस लेना है” और संगठन को गांव-बूथ तक मजबूत करना होगा। साथ ही उन्होंने मायावती से अलग हुए आकाश आनंद को RPI में आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि अगर वे बाबा साहेब के मिशन को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो उनकी पार्टी में काम करें। यह बयान 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दलित राजनीति में नए समीकरण की ओर इशारा करता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/ramdas-athawale-invites-akash-anand-rpi-bsp-vote-bank-up-2027/article-2020"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/ramdas-athawale-akash-anand-rpi-bsp-up-2027.jpg-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | मुरादाबाद | 14 सितंबर 2026</strong></p>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/ramdas-athawale-akash-anand-rpi-bsp-up-2027.jpg-(2).jpg" alt="ramdas-athawale-akash-anand-rpi-bsp-up-2027.jpg (2)" width="1366" height="768"></img>
मुरादाबाद में रामदास आठवले ने आकाश आनंद को RPI में आने का न्योता देते हुए BSP के वोट बैंक पर भी दावा ठोका।

<h1>खबर में खास</h1>
<ul>
<li><strong>रामदास आठवले ने आकाश आनंद को RPI में आने का न्योता दिया</strong></li>
<li><strong>कहा- यूपी में BSP से अपना हक वापस लेना है</strong></li>
<li><strong>गांव से बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने का आह्वान</strong></li>
<li><strong>2027 से पहले दलित वोट बैंक पर तेज हुई सियासी लड़ाई</strong></li>
</ul>
<h6>उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नई हलचल दिखाई देने लगी है। बहुजन समाज पार्टी के अंदर आकाश आनंद को लेकर मचे घमासान के बीच अब केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (Athawale) के प्रमुख <strong>रामदास आठवले ने सीधे BSP के वोट बैंक पर नजरें जमा दी हैं।</strong></h6>
<h6>मुरादाबाद पहुंचे आठवले ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि उत्तर प्रदेश में पार्टी को फिर से मजबूत करना होगा और <strong>“BSP से अपना हक वापस लेना है।”</strong> उन्होंने संगठन को जिला, गांव और बूथ स्तर तक खड़ा करने की बात कही।</h6>
<h6>सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस बयान की हो रही है जिसमें उन्होंने मायावती के भतीजे <strong>आकाश आनंद को RPI में आने का खुला न्योता</strong> दे दिया।</h6>
<h2>आकाश आनंद को खुला ऑफर</h2>
<h6>रैली के बाद मीडिया से बातचीत में रामदास आठवले ने कहा कि अगर आकाश आनंद बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के मिशन को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें RPI में आकर काम करना चाहिए।</h6>
<h6>आठवले ने यह भी कहा कि आकाश आनंद के आने से उत्तर प्रदेश में RPI को मजबूती मिलेगी।</h6>
<h6>यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आकाश आनंद को हाल ही में BSP से अलग कर दिया गया है और पार्टी में उनकी भूमिका को लेकर लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।</h6>
<h2>‘BSP से अपना हक वापस लेना है’</h2>
<h6>रामदास आठवले ने कार्यकर्ताओं से संगठनात्मक विस्तार पर भी जोर दिया।</h6>
<h6>उन्होंने कहा कि पार्टी को मुरादाबाद से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में गांव और बूथ स्तर तक अपना नेटवर्क खड़ा करना होगा।</h6>
<h6>आठवले ने दावा किया कि 1970 के दशक में RPI का जो राजनीतिक आधार और पहचान थी, उसका बड़ा हिस्सा बाद में BSP के पास चला गया। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि अब पार्टी को अपना हक वापस लेना है।</h6>
<h2>BSP के वोटरों पर सीधी नजर</h2>
<h6>आठवले के बयान का सबसे बड़ा राजनीतिक संकेत BSP के पारंपरिक वोट बैंक को लेकर है।</h6>
<h6>उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक BSP की ताकत दलित वोटों के बड़े हिस्से पर उसकी पकड़ रही है। अब RPI जैसे दल भी इस सामाजिक आधार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।</h6>
<h6>आठवले की पार्टी खुद को डॉ. भीमराव आंबेडकर की राजनीतिक विरासत से जोड़ती है और दलित प्रतिनिधित्व को अपनी राजनीति का प्रमुख आधार बताती है।</h6>
<h6>ऐसे में उनका यह बयान महज आकाश आनंद को न्योता नहीं, बल्कि BSP के सामाजिक आधार में राजनीतिक सेंध लगाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।</h6>
<h2>BSP में क्यों मची है उथल-पुथल?</h2>
<h6>आकाश आनंद को लेकर BSP में पिछले कुछ दिनों से लगातार घटनाक्रम बदलते रहे हैं।</h6>
<h6>Mayawati ने पहले उन्हें पार्टी की जिम्मेदारियों से हटाया और बाद में पूरी तरह पार्टी से अलग कर दिया। इससे पहले भी आकाश आनंद को कई बार जिम्मेदारी देकर फिर हटाया जा चुका है।</h6>
<h6>इस पूरे घटनाक्रम ने BSP के अंदर नेतृत्व और उत्तराधिकार को लेकर सवाल खड़े किए हैं।</h6>
<h6>Mayawati ने बाद में यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनके परिवार के सदस्यों को राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।</h6>
<h2>आकाश आनंद को लेकर सहानुभूति का दावा</h2>
<h6>समर्थकों का एक वर्ग चाहता है कि Mayawati उन्हें फिर से पार्टी में वापस लें और बड़ी जिम्मेदारी दें।</h6>
<h6>यही स्थिति दूसरे दलों के लिए अवसर पैदा कर रही है।</h6>
<h6>रामदास आठवले का आकाश आनंद को RPI में आने का न्योता इसी राजनीतिक खाली जगह को भरने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।</h6>
<h2>संविधान सम्मान महारैली से दिया संदेश</h2>
<h6>मुरादाबाद में आयोजित <strong>संविधान सम्मान महारैली</strong> को संबोधित करते हुए आठवले ने संविधान की रक्षा, सामाजिक समरसता और संगठन के विस्तार की बात की।</h6>
<h6>उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि देश में कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन जनता के समर्थन से उनकी राजनीतिक भूमिका बनी रही।</h6>
<h6>उनका जोर इस बात पर था कि RPI को उत्तर प्रदेश में सिर्फ प्रतीकात्मक उपस्थिति से आगे बढ़कर मजबूत संगठन खड़ा करना होगा।</h6>
<h2>2027 से पहले क्यों अहम है बयान?</h2>
<h6>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी धीरे-धीरे तेज हो रही है।</h6>
<h6>BSP इस समय अपने संगठन और नेतृत्व को लेकर अंदरूनी बदलावों से गुजर रही है। वहीं BJP, SP और दूसरे छोटे दल भी सामाजिक समीकरणों को नए सिरे से साधने में लगे हैं।</h6>
<h6>ऐसे में RPI का BSP के पारंपरिक वोटरों को सीधे संदेश देना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।</h6>
<h6>अगर आकाश आनंद जैसे युवा चेहरे किसी दूसरे दल के साथ जाते हैं, तो इसका असर सिर्फ संगठन पर नहीं बल्कि BSP के युवा और दलित समर्थकों के मनोबल पर भी पड़ सकता है।</h6>
<h2>क्या आकाश आनंद RPI में जाएंगे?</h2>
<h6>फिलहाल आकाश आनंद की ओर से रामदास आठवले के इस न्योते पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</h6>
<h6>इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि वे RPI में शामिल होंगे या नहीं।</h6>
<h6>लेकिन इतना साफ है कि आठवले ने उन्हें खुला राजनीतिक मंच ऑफर कर दिया है और इस बहाने BSP के वोट बैंक को लेकर भी अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है।</h6>
<h2>दलित राजनीति में नई जंग के संकेत</h2>
<h6>UP की राजनीति में दलित वोट हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं।</h6>
<h6>BSP की कमजोरी या आंतरिक संकट की स्थिति में RPI, आजाद समाज पार्टी और दूसरे दल इस वोट बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं।</h6>
<h6>रामदास आठवले का बयान इसी बड़े राजनीतिक मुकाबले का हिस्सा माना जा सकता है।</h6>
<h6>अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आकाश आनंद इस न्योते पर कोई कदम उठाते हैं और क्या RPI सच में UP में BSP के वोट बैंक में सेंध लगा पाती है।</h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/ramdas-athawale-invites-akash-anand-rpi-bsp-vote-bank-up-2027/article-2020</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/ramdas-athawale-invites-akash-anand-rpi-bsp-vote-bank-up-2027/article-2020</guid>
                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 14:30:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/ramdas-athawale-akash-anand-rpi-bsp-up-2027.jpg-%282%29.jpg"                         length="957843"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करीबी पर ED की बड़ी कार्रवाई के बाद हरीश रावत ने छोड़े कांग्रेस के पद, ₹32 लाख कैश और सोना मिलने का दावा; 2027 से पहले गरमाई सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तराखंड की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने का फैसला किया है। इससे एक दिन पहले ED ने उनके पूर्व OSD और मौजूदा निजी सहयोगी चंदन सिंह जीना के आवास पर कार्रवाई करते हुए करीब ₹1.28 करोड़ की संपत्ति जब्त या फ्रीज करने का दावा किया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/harish-rawat-left-congress-post-after-eds-big-action-against/article-2000"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/harish-rawat-resignation-ed-action-uttarakhand-2026.jpg.jpg" alt=""></a><br /><h2 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>देहरादून:</strong> उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने हलचल बढ़ा दी है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता <strong>हरीश रावत ने पार्टी में अपने दो अहम संगठनात्मक पद छोड़ने का फैसला किया है।</strong> यह फैसला उनके लंबे समय से सहयोगी रहे चंदन सिंह जीना के घर प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की कार्रवाई के बाद आया है। हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि रावत ने कांग्रेस की सदस्यता नहीं छोड़ी है। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी में स्थायी आमंत्रित सदस्य का पद छोड़ा है। कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर भी हरीश रावत CWC के permanent invitee के रूप में सूचीबद्ध रहे हैं।</h2>
<h1>आखिर चंदन सिंह जीना के घर ED को क्या मिला?</h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/harish-rawat-resignation-ed-action-uttarakhand-2026.jpg.jpg" alt="harish-rawat-resignation-ed-action-uttarakhand-2026.jpg" width="1366" height="768"></img>
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने करीबी चंदन सिंह जीना के ठिकाने पर ED की कार्रवाई के बाद कांग्रेस के दो संगठनात्मक पद छोड़ने का फैसला किया है। इस घटनाक्रम से 2027 विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है।

<p>प्रवर्तन निदेशालय ने 10 सितंबर को देहरादून में कई जगह तलाशी अभियान चलाया था। यह कार्रवाई उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यानी UKSSSC की <strong>2016 ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं</strong> से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई।</p>
<p>इसी कार्रवाई के दौरान हरीश रावत के पूर्व OSD चंदन सिंह जीना के आवास की भी तलाशी ली गई। ED के अनुसार जीना हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहने के दौरान OSD रहे थे और वर्तमान में भी उनके निजी सहयोगी के तौर पर काम कर रहे थे।</p>
<p>जांच एजेंसी का दावा है कि जीना के आवास से <strong>₹32 लाख की बेहिसाब नकदी, करीब 200.5 ग्राम वजन के सोने के सिक्के और चेन तथा 12 लग्जरी कलाई घड़ियां</strong> मिलीं। एजेंसी के मुताबिक यहां से जब्त और फ्रीज की गई संपत्तियों का कुल मूल्य करीब <strong>₹1.28 करोड़</strong> है। ये अभी जांच एजेंसी के दावे हैं और मामले की जांच जारी है।</p>
<h3>किस भर्ती परीक्षा से जुड़ा है मामला?</h3>
<p>ED की जांच का संबंध वर्ष 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा से है। एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा की कुछ OMR sheets को सुरक्षित कस्टडी से कथित तौर पर बाहर निकाला गया और अधूरी भरी OMR sheets को एक निजी कंप्यूटर एजेंसी तक पहुंचाया गया।</p>
<p>आरोप है कि बाद में इन OMR sheets में बदलाव और उन्हें भरने की प्रक्रिया हुई और इसके बदले बिचौलियों के जरिए अवैध भुगतान किया गया। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।</p>
<p>UKSSSC से जुड़े परीक्षा घोटालों की जांच पहले से चलती रही है। ED ने दिसंबर 2024 में भी बताया था कि विभिन्न UKSSSC परीक्षाओं के paper leak मामलों में जांच के दौरान उम्मीदवारों से कथित तौर पर लाखों रुपये लेने के आरोप सामने आए थे।</p>
<h3>हरीश रावत ने क्या कहा?</h3>
<p>अपने सहयोगी के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद हरीश रावत ने सोशल मीडिया के जरिए अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्वीकार किया कि चंदन सिंह जीना उनके OSD रह चुके हैं और लंबे समय से विभिन्न जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं।</p>
<p>रावत ने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में OMR sheets से छेड़छाड़ में उनके सहयोगी की भूमिका के प्रमाण सामने आते हैं तो यह उनके लिए शर्मिंदगी की बात होगी। हालांकि उन्होंने साथ ही साफ किया कि मौजूदा आरोपों पर उन्हें विश्वास नहीं है।</p>
<h3>फिर पद छोड़ने का फैसला क्यों किया?</h3>
<p>हरीश रावत ने अपने फैसले को कांग्रेस की राजनीतिक लड़ाई से जोड़ा है। उनका कहना है कि इस समय कांग्रेस भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेर रही है और वह नहीं चाहते कि उनके या उनके किसी सहयोगी से जुड़े विवाद के कारण पार्टी की इस लड़ाई पर सवाल खड़े हों।</p>
<p>इसी आधार पर उन्होंने <strong>उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी की सदस्यता और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने की इच्छा जताई।</strong></p>
<h3>ED की कार्रवाई को बताया 'नरेटिव बनाने की कोशिश'</h3>
<p>रावत ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक नजरिए से भी देखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले उनके सहयोगी के यहां हुई कार्रवाई के जरिए उनके खिलाफ एक राजनीतिक धारणा बनाने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>उनका कहना है कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में दांव बड़ा है और ऐसी स्थिति में वह पार्टी को किसी तरह की राजनीतिक असहजता नहीं देना चाहते।</p>
<p>दूसरी ओर, जांच एजेंसी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। ऐसे में रावत का राजनीतिक आरोप और ED की जांच—दोनों अलग-अलग पक्ष हैं।</p>
<h3>42 हजार भर्तियों का भी किया जिक्र</h3>
<p>हरीश रावत ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उनके करीब तीन वर्ष के शासन के दौरान <strong>42 हजार से अधिक सरकारी भर्तियां</strong> हुई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उस भर्ती प्रक्रिया में सरकार के स्तर पर निर्णय संबंधी कोई गलती हुई हो तो वह उत्तराखंड की जनता से उसके लिए क्षमा चाहते हैं।</p>
<h3>2027 से पहले कांग्रेस के लिए क्यों अहम है मामला?</h3>
<p>इस पूरे घटनाक्रम की टाइमिंग सबसे महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस पहले से राज्य में BJP सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार, रोजगार और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे उठा रही है।</p>
<p>ऐसे समय में पार्टी के सबसे बड़े और अनुभवी चेहरों में शामिल हरीश रावत के करीबी पर जांच एजेंसी की कार्रवाई कांग्रेस के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकती है।</p>
<p>हरीश रावत पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वह 2027 का विधानसभा चुनाव खुद नहीं लड़ना चाहते, लेकिन पार्टी के उम्मीदवारों और चुनावी अभियान के लिए काम करेंगे। अगस्त 2026 में भी उन्होंने स्पष्ट किया था कि राजनीति से संन्यास लेने की उनकी कोई योजना नहीं है।</p>
<p>यही कारण है कि संगठनात्मक पद छोड़ने का उनका फैसला राजनीतिक रूप से अहम है, लेकिन इसे <strong>कांग्रेस छोड़ने या सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने</strong> के रूप में देखना सही नहीं होगा।</p>
<p>अब नजर दो बातों पर रहेगी—पहली, कांग्रेस नेतृत्व हरीश रावत के इस्तीफे पर क्या फैसला करता है और दूसरी, चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले में ED की जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है।</p>
<p><strong>2027 के चुनाव से पहले उत्तराखंड में यह मामला अब केवल जांच एजेंसी की कार्रवाई तक सीमित रहेगा या BJP-कांग्रेस के बीच बड़ा चुनावी मुद्दा बनेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/harish-rawat-left-congress-post-after-eds-big-action-against/article-2000</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/harish-rawat-left-congress-post-after-eds-big-action-against/article-2000</guid>
                <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 12:13:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/harish-rawat-resignation-ed-action-uttarakhand-2026.jpg.jpg"                         length="789199"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> दिल्ली में दुनिया के दिग्गज, आज मोदी-शी होंगे आमने-सामने; गलवान के बाद क्यों अहम है ये मुलाकात?</title>
                                    <description><![CDATA[BRICS Summit 2026 के लिए दिल्ली में दुनिया के कई बड़े नेता जुटे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज कई द्विपक्षीय बैठकें करेंगे, लेकिन सबसे ज्यादा नजर शाम को होने वाली मोदी-शी मुलाकात पर है। गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आए बदलाव के बीच यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/today-modi-xi-will-be-face-to-face-with-world-leaders/article-1999"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/modi-xi-brics-summit-2026.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>नई दिल्ली:</strong> आज दिल्ली सिर्फ भारत की राजधानी नहीं, बल्कि दुनिया की कूटनीति का बड़ा केंद्र बनी हुई है। भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को आयोजित हो रहे 18वें BRICS Summit के लिए रूस, ईरान, दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों के बड़े नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं। लेकिन पूरे सम्मेलन के बीच जिस मुलाकात पर सबसे ज्यादा नजर है, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की है।</p>
<p>चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बीजिंग से भारत के लिए रवाना हो चुके हैं। करीब <strong>सात साल में यह उनकी पहली भारत यात्रा</strong> है। पीएम मोदी और जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक शाम करीब <strong>5:45 बजे भारत मंडपम में प्रस्तावित</strong> है।</p>
<h3>गलवान के बाद क्यों बड़ी है मोदी-शी मुलाकात?</h3>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/modi-xi-brics-summit-2026.jpg.jpg" alt="modi-xi-brics-summit-2026.jpg" width="1366" height="768"></img>
BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजर।

<p>इस बैठक की अहमियत सिर्फ BRICS तक सीमित नहीं है। भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में बड़े तनाव से गुजरे हैं।</p>
<p>2020 में गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था, जिसमें 20 भारतीय सैनिक और कम से कम चार चीनी सैनिक मारे गए थे। इसके बाद सीमा विवाद के साथ-साथ निवेश, ऐप्स, वीजा और व्यापार से जुड़े कई क्षेत्रों में भी तनाव बढ़ गया था।</p>
<p>अक्टूबर 2024 में कुछ विवादित इलाकों से सैनिकों को पीछे हटाने को लेकर समझौता होने के बाद रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार शुरू हुआ। इसके बावजूद LAC और दोनों देशों के बीच आपसी भरोसा अब भी बड़े मुद्दे हैं।</p>
<p>ऐसे में मोदी और जिनपिंग की मुलाकात में <strong>सीमा विवाद, LAC पर स्थिरता, व्यापारिक असंतुलन और द्विपक्षीय संबंधों</strong> जैसे मुद्दों के केंद्र में रहने की उम्मीद है। चीन ने भी भारत के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने तथा मतभेदों को संभालने की बात कही है।</p>
<h3>मोदी का आज व्यस्त डिप्लोमैटिक कार्यक्रम</h3>
<p>BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें प्रस्तावित हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वह इथियोपिया, मलेशिया और वियतनाम के प्रधानमंत्रियों के अलावा अबू धाबी के क्राउन प्रिंस से भी मुलाकात करेंगे। कुल मिलाकर पीएम मोदी की कम से कम 15 द्विपक्षीय बैठकों की योजना बताई गई है।</p>
<p>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। मोदी और पुतिन की मुलाकात में दोनों देशों ने आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।</p>
<h3>भारत मंडपम की सुरक्षा बेहद कड़ी</h3>
<p>इतने बड़े वैश्विक सम्मेलन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी की गई है। भारत मंडपम और आसपास के इलाकों में दिल्ली पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बल और NSG समेत करीब <strong>25 हजार सुरक्षाकर्मियों</strong> की तैनाती की गई है। कई प्रमुख रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन भी लागू किया गया है।</p>
<h3>BRICS से भारत क्या संदेश देना चाहता है?</h3>
<p>इस बार भारत की BRICS अध्यक्षता का फोकस सहयोग, नवाचार, स्थिरता और विकास पर है। सदस्य देश वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, वित्तीय संस्थानों में सुधार और आपसी भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा कर रहे हैं। BRICS वित्त प्रमुखों ने IMF और World Bank जैसी वैश्विक संस्थाओं में उभरती अर्थव्यवस्थाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की मांग भी की है।</p>
<p>लेकिन आज की सबसे ज्यादा राजनीतिक दिलचस्पी मोदी-जिनपिंग बैठक में रहेगी।</p>
<p><strong>सवाल यह है कि सात साल बाद जिनपिंग की भारत वापसी केवल कूटनीतिक तस्वीरों तक सीमित रहेगी, या गलवान के बाद भारत-चीन रिश्तों में किसी नए अध्याय की शुरुआत भी होगी?</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/today-modi-xi-will-be-face-to-face-with-world-leaders/article-1999</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/today-modi-xi-will-be-face-to-face-with-world-leaders/article-1999</guid>
                <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 11:57:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/modi-xi-brics-summit-2026.jpg.jpg"                         length="917981"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पॉडकास्ट में डींगे, बुलंदशहर से गिरफ्तारी और अब पुलिस कस्टडी: जानिए स्वतंत्र भारद्वाज पर कैसे कसता गया शिकंजा</title>
                                    <description><![CDATA[निशु आजाद के पिता संजय कुमार से कथित मारपीट के मामले में दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है। बुलंदशहर से हिरासत में लिए जाने के बाद उसे पटियाला हाउस कोर्ट के जज के सामने पेश किया गया, जहां से एक दिन की पुलिस कस्टडी मिली। पुलिस अब वायरल पॉडकास्ट, मारपीट, कथित राजनीतिक संपर्कों और निशु को मिली धमकियों के संबंध में पूछताछ करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/swatantra-bhardwaj-arrested-one-day-police-custody-patiala-house-court/article-1950"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/swatantra-bhardwaj-arrest-police-custody.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>नई दिल्ली।</strong> जंतर-मंतर पर छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ हुई कथित मारपीट का कैमरे पर जिक्र करने के बाद विवादों में आए स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस ने औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उसे पटियाला हाउस कोर्ट के जज के सामने पेश किया गया, जहां से अदालत ने भारद्वाज को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।</p>
<p>इससे पहले दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया था। उसे दिल्ली लाने और शुरुआती पूछताछ के बाद गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी की गई। अब पुलिस उससे जंतर-मंतर की घटना, वायरल पॉडकास्ट में किए गए दावों और कथित राजनीतिक संपर्कों को लेकर पूछताछ कर सकती है।</p>
<h3>गिरफ्तारी के बाद एक दिन की पुलिस कस्टडी</h3>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/swatantra-bhardwaj-arrest-police-custody.jpg2.jpg" alt="swatantra-bhardwaj-arrest-police-custody.jpg" width="1366" height="768"></img>
निशु आजाद के पिता से कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार स्वतंत्र भारद्वाज को अदालत ने एक दिन की दिल्ली पुलिस हिरासत में भेज दिया।

<p>एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद स्वतंत्र भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट के संबंधित जज के आवास पर पेश किया। अदालत ने उसे एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।</p>
<p>पुलिस कस्टडी के दौरान जांच अधिकारी कथित मारपीट की पूरी घटना, उसमें शामिल दूसरे लोगों, वायरल इंटरव्यू और उसके मोबाइल तथा सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर पूछताछ कर सकते हैं। हालांकि, पुलिस ने पूछताछ के सभी बिंदुओं का आधिकारिक विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया है। <a class="decorated-link" href="https://www.abplive.com/states/delhi-ncr/delhi-police-arrested-swatantra-bhardwaj-produced-in-patiala-house-court-soon-3184731?utm_source=chatgpt.com">स्रोत: एबीपी न्यूज</a></p>
<h3>बुलंदशहर से लिया गया था हिरासत में</h3>
<p>स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन पहले दिल्ली पुलिस की टीम ने बुलंदशहर से हिरासत में लिया था। पुलिस को उसके बुलंदशहर में मौजूद होने की जानकारी मिली थी, जिसके बाद उसकी तलाश में कई टीमों को लगाया गया।</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि भारद्वाज मोटरसाइकिल से खुर्जा की तरफ निकल गया था। पुलिस टीम ने उसका पीछा करके उसे पकड़ लिया। इसके बाद उसे दिल्ली लाया गया और पूछताछ के बाद औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।</p>
<p>इससे पहले तक विश्वसनीय रिपोर्टों में पुलिस कार्रवाई के लिए “हिरासत” शब्द इस्तेमाल किया जा रहा था। अदालत में पेशी और पुलिस रिमांड के बाद अब उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि हो गई है।</p>
<h3>वायरल पॉडकास्ट से दोबारा खुला मामला</h3>
<p>पूरा विवाद स्वतंत्र भारद्वाज के एक पॉडकास्ट की क्लिप वायरल होने के बाद तेज हुआ। क्लिप में वह कथित तौर पर निशु आजाद के पिता संजय कुमार के सिर पर कड़े से हमला करने, उन्हें कई टांके लगने और राजनीतिक संपर्कों के कारण जेल नहीं जाने जैसी बातें कहता दिखाई दिया।</p>
<p>भारद्वाज ने कथित रूप से कहा था कि उसके खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला बनना चाहिए था, लेकिन फिर भी उसे जेल नहीं जाना पड़ा। इन दावों का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।</p>
<p>यह ध्यान रखना जरूरी है कि पॉडकास्ट में भारद्वाज द्वारा चोट और टांकों के बारे में किए गए दावे पुलिस की मेडिकल जानकारी से मेल नहीं खाते। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, RML अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में संजय कुमार की चोट को सामान्य प्रकृति यानी “Simple Injury” बताया गया था।</p>
<h3>जंतर-मंतर पर क्या हुआ था?</h3>
<p>यह मामला जून-जुलाई 2026 में जंतर-मंतर पर CJP के आंदोलन के दौरान हुई घटना से जुड़ा है। संजय कुमार अपनी नाबालिग बेटी निशु आजाद के साथ प्रदर्शन में मौजूद थे और मोबाइल से वीडियो बना रहे थे।</p>
<p>इसी दौरान विवाद शुरू हुआ और मामला कथित मारपीट तक पहुंच गया। संजय कुमार ने आरोप लगाया था कि कुछ लोगों ने उन्हें घेरकर पीटा और उनके सिर पर कड़े जैसी ठोस चीज से वार किया। मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार का नाम सामने आया था।</p>
<p>घटना के बाद मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन निशु और CJP से जुड़े लोगों का आरोप था कि पुलिस ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया और पर्याप्त धाराएं नहीं लगाईं। दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक दबाव में काम करने के आरोपों से इनकार किया है।</p>
<h3>CJP के प्रदर्शन के बाद तेज हुई कार्रवाई</h3>
<p>वायरल पॉडकास्ट सामने आने के बाद CJP के नेताओं और समर्थकों ने दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में निशु आजाद, उनके पिता संजय कुमार, CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल हुए।</p>
<p>आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद, पूर्णिया सांसद पप्पू यादव और दिल्ली प्रदेश यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा भी प्रदर्शन में पहुंचे थे।</p>
<p>प्रदर्शनकारी स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी, पुराने मामले में SC/ST एक्ट और हत्या के प्रयास से संबंधित कानूनी प्रावधान जोड़ने की मांग कर रहे थे। कई घंटे की बातचीत के बाद दिल्ली पुलिस ने FIR में SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़ने की पुष्टि की। उसी दिन शाम को भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया। <a class="decorated-link" href="https://indianexpress.com/article/cities/delhi/cjp-protest-two-mps-congress-leader-fir-sc-st-act-pocso-10863953/?utm_source=chatgpt.com">स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस</a></p>
<h3>SC/ST एक्ट और POCSO मामला क्या है?</h3>
<p>दिल्ली पुलिस ने संजय कुमार से कथित मारपीट के पुराने मुकदमे में SC/ST एक्ट के प्रावधान जोड़े हैं। जांच में पुलिस को यह निर्धारित करना होगा कि कथित हमला जातीय पहचान के आधार पर किया गया था या नहीं।</p>
<p>इसके अलावा नाबालिग निशु ने आरोप लगाया कि मामला उठाने के बाद उसे सोशल मीडिया पर दुष्कर्म की धमकियां, आपत्तिजनक टिप्पणियां और अश्लील सामग्री भेजी गई। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने POCSO एक्ट और आपराधिक धमकी से संबंधित प्रावधानों में अलग FIR दर्ज की है।</p>
<p>पुलिस को अब धमकी देने वाले सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान करनी होगी। यह भी जांच का विषय है कि उन अकाउंट का स्वतंत्र भारद्वाज या किसी अन्य व्यक्ति से क्या संबंध है। केवल FIR दर्ज होने से आरोप न्यायालय में सिद्ध नहीं हो जाते।</p>
<h3>राजनीतिक संपर्कों के दावे पर होगी पूछताछ?</h3>
<p>वायरल पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज ने दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान सहित कुछ राजनीतिक नेताओं के नाम लिए थे। उसने कथित तौर पर इन नेताओं से नजदीकी होने का दावा किया था।</p>
<p>चिराग पासवान ने स्वतंत्र भारद्वाज से व्यक्तिगत संबंध होने से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं के साथ कई लोग तस्वीर खिंचवाते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि नेता उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते हैं।</p>
<p>लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की लीगल टीम ने भी दिल्ली पुलिस को शिकायत देकर कहा कि भारद्वाज का पार्टी या चिराग पासवान से कोई संबंध नहीं है। पार्टी ने आरोप लगाया कि उसने राजनीतिक नामों का गलत इस्तेमाल किया।</p>
<p>अब पुलिस पूछताछ में यह पता लगाया जा सकता है कि पॉडकास्ट में किए गए राजनीतिक संरक्षण के दावों का कोई तथ्यात्मक आधार था या वे केवल प्रभाव दिखाने के लिए कही गई बातें थीं।</p>
<h3>भारद्वाज ने आत्मरक्षा का किया था दावा</h3>
<p>मामला बढ़ने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि जंतर-मंतर पर उसे कई लोगों ने घेर लिया था और उसने आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दी। उसका दावा था कि यदि वह अपना बचाव नहीं करता तो उसके साथ गंभीर घटना हो सकती थी।</p>
<p>पुलिस अब मौके के वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और दूसरे उपलब्ध सबूतों के आधार पर इस दावे की जांच करेगी। भारद्वाज के आत्मरक्षा के दावे को भी अभी स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।</p>
<h3>राहुल गांधी ने निशु को दिया था समर्थन</h3>
<p>निशु आजाद ने वीडियो जारी करके लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मदद मांगी थी। इसके बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि निशु को घबराने की जरूरत नहीं है और वह उसके साथ हैं।</p>
<p>राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस तथा केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए परिवार को न्याय मिलने तक साथ देने की बात कही थी। उनके बयान के बाद मामला राष्ट्रीय राजनीतिक बहस में आ गया और पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा।</p>
<h3>अब पुलिस किन सवालों के जवाब तलाशेगी?</h3>
<p>एक दिन की पुलिस हिरासत के दौरान जांच का केंद्र कई महत्वपूर्ण सवाल हो सकते हैं—</p>
<ul>
<li>जंतर-मंतर पर विवाद की शुरुआत किसने की?</li>
<li>संजय कुमार पर हमला किस वस्तु से किया गया?</li>
<li>घटना में स्वतंत्र भारद्वाज के साथ और कौन लोग शामिल थे?</li>
<li>पॉडकास्ट में चोट और टांकों को लेकर किए गए दावे कितने सही हैं?</li>
<li>राजनीतिक संरक्षण की बात किस आधार पर कही गई?</li>
<li>निशु को ऑनलाइन धमकियां देने वाले अकाउंट किसके हैं?</li>
<li>वायरल वीडियो और मौके के दूसरे फुटेज में क्या समानता है?</li>
</ul>
<p>पुलिस रिमांड समाप्त होने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज को दोबारा अदालत में पेश किया जा सकता है। अदालत आगे की जांच और पुलिस की मांग के आधार पर न्यायिक हिरासत, अतिरिक्त पुलिस रिमांड या अन्य कानूनी राहत पर फैसला करेगी।</p>
<p>फिलहाल स्वतंत्र भारद्वाज आरोपी है और मामले की जांच जारी है। उसके खिलाफ लगे आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायालय में साक्ष्यों के आधार पर होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/swatantra-bhardwaj-arrested-one-day-police-custody-patiala-house-court/article-1950</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/swatantra-bhardwaj-arrested-one-day-police-custody-patiala-house-court/article-1950</guid>
                <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 14:51:36 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/swatantra-bhardwaj-arrest-police-custody.jpg2.jpg"                         length="715570"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        