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                <title>राजस्थान  - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <description>राजस्थान  RSS Feed</description>
                
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                <title>राजस्थान Mayor Election 2026: जयपुर, जोधपुर और कोटा में मेयर की जंग, आज ही आएंगे नतीजे</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम में मेयर पद के लिए मतदान हो रहा है। वोटिंग के बाद मतगणना शुरू होगी और आज ही तीनों शहरों को नया मेयर मिल जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/rajasthan-mayor-election-2026-mayors-battle-in-jaipur-jodhpur-and/article-2188"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/rajasthan-mayor-election-2026-jaipur-jodhpur-kota.webp.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>राजस्थान के तीन बड़े शहरों में मेयर की कुर्सी पर भाजपा-कांग्रेस का सीधा मुकाबला, जयपुर से जोधपुर तक क्रॉस वोटिंग पर टिकी सभी की नजर</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/rajasthan-mayor-election-2026-jaipur-jodhpur-kota.webp.jpg" alt="rajasthan-mayor-election-2026-jaipur-jodhpur-kota.webp" width="1366" height="768"></img>
जयपुर, जोधपुर और कोटा में मेयर चुनाव के लिए भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबला

<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राजस्थान डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>जयपुर, जोधपुर और कोटा में मेयर पद के लिए मतदान</strong></li>
<li><strong>सुबह 10 बजे शुरू हुई वोटिंग, दोपहर 2 बजे तक चलेगी</strong></li>
<li><strong>मतदान के बाद तुरंत शुरू होगी वोटों की गिनती</strong></li>
<li><strong>जयपुर और कोटा में भाजपा का संख्या बल मजबूत</strong></li>
<li><strong>जोधपुर में निर्दलीय पार्षद निभा सकते हैं निर्णायक भूमिका</strong></li>
</ul>
<h6>राजस्थान के तीन प्रमुख शहरों जयपुर, जोधपुर और कोटा में आज मेयर पद के लिए चुनाव हो रहा है। तीनों नगर निगमों में भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। पार्षद मतदान के जरिए अपने शहर का नया मेयर चुनेंगे और आज ही नतीजे घोषित होने की संभावना है।</h6>
<h3>जयपुर में सुनील कोठारी और सुनीता मावर का मुकाबला</h3>
<h6>जयपुर नगर निगम में भाजपा ने वार्ड संख्या 112 के पार्षद सुनील कोठारी को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने उनके सामने वार्ड संख्या 118 की पार्षद सुनीता मावर को मैदान में उतारा है।</h6>
<h6>जयपुर नगर निगम में भाजपा के पास कांग्रेस से अधिक पार्षद हैं, इसलिए उसका दावा मजबूत माना जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग की उम्मीद है। इसी कारण दोनों पार्टियां मतदान पूरा होने तक अपने पार्षदों को एकजुट रखने में जुटी हैं।</h6>
<h3>जोधपुर में निर्दलीयों के हाथ सत्ता की चाबी</h3>
<h6>जोधपुर नगर निगम में भाजपा के प्रसन्न चंद मेहता और कांग्रेस के राजेंद्र सिंह सोलंकी के बीच मुकाबला है। यहां दोनों प्रमुख पार्टियों की ताकत लगभग बराबर रही है, इसलिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है।</h6>
<h6>भाजपा ने सात निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिलने का दावा किया है। यदि मतदान के दौरान पार्टी के पक्ष में तय संख्या बनी रहती है तो भाजपा मेयर पद पर जीत हासिल कर सकती है। कांग्रेस भी अंतिम समय तक अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।</h6>
<h3>कोटा में दो महिला उम्मीदवार आमने-सामने</h3>
<h6>कोटा नगर निगम के मेयर पद के लिए भाजपा की अनुसुइया गोस्वामी और कांग्रेस की सुनीता सुमन के बीच मुकाबला है। नगर निगम में भाजपा के पार्षदों की संख्या अधिक होने के कारण उसका पलड़ा भारी माना जा रहा है।</h6>
<h6>इसके बावजूद दोनों पार्टियों की नजर क्रॉस वोटिंग पर है। किसी भी पार्षद का वोट बदलने से परिणाम का अंतर कम या ज्यादा हो सकता है। इसलिए मतदान के दौरान भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।</h6>
<h3>कब आएंगे चुनाव परिणाम?</h3>
<h6>मेयर चुनाव के लिए मतदान सुबह 10 बजे शुरू हुआ और दोपहर 2 बजे तक चलेगा। इसके बाद करीब 2:15 बजे वोटों की गिनती शुरू होगी। दोपहर 3 बजे तक परिणाम घोषित होने और नए मेयरों के शपथ लेने की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।</h6>
<h6>राजस्थान के सात नगर निगमों के मेयर चुनाव पहले ही पूरे हो चुके हैं। इनमें भाजपा ने छह नगर निगमों में जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस बीकानेर में अपना मेयर बनाने में सफल रही। अब जयपुर, जोधपुर और कोटा के नतीजे प्रदेश के शहरी राजनीतिक समीकरण की अंतिम तस्वीर साफ करेंगे।</h6>
<h1><strong>राजस्थान के सात नगर निगमों में छह मेयर पद जीत चुकी भाजपा की नजर अब जयपुर, जोधपुर और कोटा पर है। कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग और निर्दलीय पार्षदों से उम्मीद है, इसलिए अंतिम वोट की गिनती होने तक तीनों शहरों की मेयर लड़ाई पर पूरे प्रदेश की नजर बनी रहेगी।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान </category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/rajasthan-mayor-election-2026-mayors-battle-in-jaipur-jodhpur-and/article-2188</link>
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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 13:05:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान में BJP ने कांग्रेस से 566 वार्ड ज्यादा जीते, फिर भी वोटों का अंतर सिर्फ 0.94%; 2028 के लिए क्या है संकेत?</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान निकाय चुनाव में BJP 4,179 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी और कांग्रेस को 3,613 वार्ड मिले। लेकिन वोट शेयर में दोनों के बीच सिर्फ 0.94 प्रतिशत अंक का अंतर रहा। दूसरी तरफ 2,273 निर्दलीयों ने जीत दर्ज कर कई निकायों में अपना प्रभाव दिखाया। भरतपुर में निर्दलीयों का दबदबा, बारां में AAP और नोखा में CPM की जीत ने 2028 विधानसभा चुनाव से पहले BJP और कांग्रेस दोनों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/rajasthan-civic-polls-bjp-congress-vote-share-2028-election-warning/article-2036"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/rajasthan-civic-polls-bjp-congress-vote-share-2026.jpg-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | जयपुर | 15 सितंबर 2026</strong></p>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/rajasthan-civic-polls-bjp-congress-vote-share-2026.jpg-(2).jpg" alt="rajasthan-civic-polls-bjp-congress-vote-share-2026.jpg (2)" width="1366" height="768"></img>
राजस्थान निकाय चुनाव में BJP ने कांग्रेस से 566 ज्यादा वार्ड जीते, जबकि दोनों के वोट शेयर में सिर्फ 0.94 प्रतिशत अंक का अंतर रहा।

<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>BJP को 4,179 और कांग्रेस को 3,613 वार्ड</strong></li>
<li><strong>वोट शेयर में सिर्फ 0.94 प्रतिशत अंक का अंतर</strong></li>
<li><strong>2,273 वार्डों में निर्दलीयों की जीत</strong></li>
<li><strong>2028 विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के लिए अहम संकेत</strong></li>
</ul>
<h6>राजस्थान के निकाय चुनाव में पहली नजर में तस्वीर साफ दिखाई देती है—<strong>BJP नंबर एक और कांग्रेस नंबर दो।</strong></h6>
<h6>लेकिन वोटों का हिसाब देखते ही कहानी कुछ बदल जाती है।</h6>
<h6>BJP ने कांग्रेस के मुकाबले <strong>566 ज्यादा वार्ड</strong> जीते, लेकिन दोनों पार्टियों को मिले कुल वोटों में अंतर सिर्फ <strong>0.94 प्रतिशत अंक</strong> का रहा।</h6>
<h6>BJP को 35.18 प्रतिशत और कांग्रेस को 34.24 प्रतिशत वोट मिले।</h6>
<h6>यानी वार्डों की संख्या में दिख रहा बड़ा अंतर वोट शेयर में उतना बड़ा नहीं है।</h6>
<h6>यही आंकड़ा 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले राजस्थान की राजनीति को दिलचस्प बना रहा है।</h6>
<h2>BJP जीती कितने वार्ड, कांग्रेस को कितने?</h2>
<h6>उपलब्ध अंतिम आंकड़ों के मुताबिक BJP ने <strong>4,179 वार्ड</strong> जीते।</h6>
<h6>कांग्रेस के खाते में <strong>3,613 वार्ड</strong> आए।</h6>
<h6>जबकि निर्दलीयों ने <strong>2,273 वार्डों</strong> पर जीत दर्ज की।</h6>
<h6>कुल वार्डों की हिस्सेदारी के हिसाब से BJP करीब 40.8 प्रतिशत और कांग्रेस करीब 35.3 प्रतिशत वार्ड जीतने में सफल रही।</h6>
<h6>यहां <strong>ward share और vote share को अलग-अलग समझना जरूरी है।</strong></h6>
<h6>35.18% BJP का वोट शेयर है, जबकि करीब 40.8% उसके जीते हुए वार्डों की हिस्सेदारी है।</h6>
<h2>566 वार्ड का अंतर, लेकिन वोट इतने करीब कैसे?</h2>
<h6>यही इस चुनाव का सबसे दिलचस्प गणित है।</h6>
<h6>किसी पार्टी का पूरे राज्य में कुल वोट शेयर और उसके जीते वार्डों की संख्या एक अनुपात में होना जरूरी नहीं है।</h6>
<h6>अगर किसी पार्टी के वोट अलग-अलग वार्डों में इस तरह फैले हों कि वह ज्यादा सीटों पर मामूली अंतर से जीत जाए, तो कम वोट-share advantage के बावजूद सीटों का अंतर बड़ा हो सकता है।</h6>
<h6>इसी तरह हारने वाली पार्टी कुछ वार्डों में बहुत बड़े अंतर से जीतकर भी कुल सीटों में पीछे रह सकती है।</h6>
<h6>राजस्थान में BJP और कांग्रेस के बीच कुल वोटों का अंतर करीब <strong>99,615 वोट</strong> बताया गया है, जबकि वार्डों में अंतर 566 का रहा।</h6>
<h2>क्या BJP के लिए नतीजे पूरी तरह शानदार हैं?</h2>
<h6>कुल परिणाम BJP के पक्ष में हैं।</h6>
<h6>वह सबसे बड़ी पार्टी बनी और कांग्रेस से ज्यादा वार्ड जीते।</h6>
<h6>लेकिन बड़े शहरों और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तस्वीर एक जैसी नहीं रही।</h6>
<h6>BJP ने जयपुर, भीलवाड़ा, कोटा और उदयपुर नगर निगम में बहुमत हासिल किया। दूसरी तरफ बीकानेर में कांग्रेस ने वापसी की और अजमेर में भी BJP को झटका लगा।</h6>
<h6>सबसे दिलचस्प परिणाम मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र <strong>भरतपुर</strong> में देखने को मिला।</h6>
<h6>यहां 65 में से <strong>36 वार्ड निर्दलीयों ने जीते</strong>, जबकि BJP को 20 और कांग्रेस को सात सीटें मिलीं।</h6>
<h6>इसलिए पूरे नतीजे को केवल “BJP sweep” कहना तस्वीर को अधूरा दिखाएगा।</h6>
<h2>कांग्रेस के लिए भी खतरे की घंटी क्यों?</h2>
<h6>कांग्रेस BJP के काफी करीब वोट शेयर हासिल करने में सफल रही।</h6>
<h6>लेकिन पार्टी के सामने दूसरा सवाल है—<strong>क्या वह BJP विरोधी वोट की अकेली स्वाभाविक पसंद बनी हुई है?</strong></h6>
<h6>बारां नगर परिषद में AAP ने <strong>60 में से 31 वार्ड</strong> जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया।</h6>
<h6>कांग्रेस को यहां 18 और BJP को सिर्फ नौ वार्ड मिले।</h6>
<h6>नोखा नगरपालिका में कहानी और चौंकाने वाली रही।</h6>
<h6>CPM ने <strong>45 में से 29 वार्ड</strong> जीत लिए, BJP को 13 मिले और कांग्रेस एक भी वार्ड नहीं जीत सकी।</h6>
<h6>यानी कुछ इलाकों में BJP के खिलाफ वोट सीधे कांग्रेस के पास जाने के बजाय तीसरे राजनीतिक विकल्प की तरफ भी गया।</h6>
<h2>2,273 निर्दलीय बने सबसे बड़ा X-Factor</h2>
<h6>इन चुनावों में BJP और कांग्रेस के बाद सबसे बड़ा आंकड़ा किसी तीसरी पार्टी का नहीं बल्कि <strong>निर्दलीय उम्मीदवारों का</strong> है।</h6>
<h6>निर्दलीयों ने 2,273 वार्ड जीते।</h6>
<h6>इससे कई निकायों में बोर्ड बनाने की राजनीति में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।</h6>
<h6>यह स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, स्थानीय मुद्दों और पार्टी से अलग क्षेत्रीय समीकरणों की ताकत भी दिखाता है।</h6>
<h2>कांग्रेस ने परिसीमन पर उठाए सवाल</h2>
<h6>कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने नतीजों के बाद परिसीमन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।</h6>
<h6>उनका तर्क है कि BJP और कांग्रेस के वोट शेयर में एक प्रतिशत से भी कम अंतर होने के बावजूद वार्डों की संख्या में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।</h6>
<h6>उन्होंने परिसीमन को अनुचित बताते हुए कांग्रेस के प्रदर्शन पर इसके असर का दावा किया है।</h6>
<h6>यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है; इसे स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।</h6>
<h2>क्या ये नतीजे 2028 का ट्रेलर हैं?</h2>
<h6>निकाय चुनाव और विधानसभा चुनाव का मतदाता व्यवहार एक जैसा होना जरूरी नहीं है।</h6>
<h6>स्थानीय चुनावों में उम्मीदवार, वार्ड स्तर के मुद्दे, स्थानीय नेटवर्क और नगर निकाय की समस्याएं ज्यादा प्रभाव डाल सकती हैं।</h6>
<h6>इसलिए इन नतीजों के आधार पर अभी से 2028 विधानसभा चुनाव का परिणाम तय करना गलत होगा।</h6>
<h6>फिर भी तीन संकेत महत्वपूर्ण हैं।</h6>
<h6><strong>पहला</strong>, BJP अभी राजस्थान के शहरी निकायों में सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनी हुई है।</h6>
<h6><strong>दूसरा</strong>, कांग्रेस का वोट शेयर BJP से सिर्फ 0.94 प्रतिशत अंक पीछे होना बताता है कि दोनों प्रमुख दलों के बीच प्रतिस्पर्धा काफी करीबी है।</h6>
<h6><strong>तीसरा</strong>, निर्दलीयों, AAP और CPM का कुछ क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन बताता है कि BJP और कांग्रेस के बाहर भी स्थानीय राजनीतिक जगह मौजूद है।</h6>
<h6>यही तीनों संकेत 2028 तक BJP और कांग्रेस की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।</h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 14:24:07 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान निकाय चुनाव में कहीं BJP का दबदबा, कहीं कांग्रेस की वापसी; बीकानेर में 10 साल बाद कांग्रेस, भीलवाड़ा-उदयपुर में खिला कमल</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के नतीजों में अलग-अलग शहरों में अलग राजनीतिक तस्वीर सामने आई है। बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने 79 में से 42 वार्ड जीतकर 10 साल बाद बहुमत हासिल किया। भीलवाड़ा में BJP ने 70 में से 45 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत लिया, जबकि उदयपुर में BJP 53 सीटों के साथ सातवीं बार बोर्ड बनाने की ओर है। भरतपुर में 36 निर्दलीय जीतकर सबसे बड़ी ताकत बने हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/rajasthan-nikay-chunav-result-2026-bikaner-bhilwara-udaipur-bharatpur/article-2025"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/rajasthan-nikay-chunav-result-2026-bjp-congress-bikaner-bhilwara.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | जयपुर | 14 सितंबर 2026</strong></p>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/rajasthan-nikay-chunav-result-2026-bjp-congress-bikaner-bhilwara.jpg2.jpg" alt="rajasthan-nikay-chunav-result-2026-bjp-congress-bikaner-bhilwara.jpg" width="1366" height="768"></img>
राजस्थान निकाय चुनाव में बीकानेर में कांग्रेस, भीलवाड़ा और उदयपुर में BJP जबकि भरतपुर में निर्दलीयों ने मजबूत प्रदर्शन किया।

<h1>खबर में खास</h1>
<ul>
<li><strong>बीकानेर में कांग्रेस ने 10 साल बाद हासिल किया बहुमत</strong></li>
<li><strong>भीलवाड़ा में BJP ने 70 में से 45 वार्ड जीते</strong></li>
<li><strong>उदयपुर में BJP 53 सीटों के साथ फिर मजबूत</strong></li>
<li><strong>भरतपुर में 36 निर्दलीय बने सबसे बड़ी ताकत</strong></li>
</ul>
<h6>राजस्थान के निकाय चुनाव 2026 ने कई बड़े शहरों में अलग-अलग राजनीतिक संदेश दिए हैं।</h6>
<h6>कहीं BJP ने मजबूत पकड़ बनाए रखी, कहीं कांग्रेस ने वापसी की, तो कुछ शहरों में निर्दलीयों ने दोनों बड़े दलों की गणित ही बिगाड़ दी।</h6>
<h6>सबसे ज्यादा चर्चा बीकानेर, भीलवाड़ा, उदयपुर और भरतपुर के नतीजों की हो रही है।</h6>
<h2>बीकानेर में कांग्रेस की 10 साल बाद वापसी</h2>
<h6>बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया है।</h6>
<h6>79 वार्डों में कांग्रेस ने <strong>42 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत</strong> हासिल किया है।</h6>
<h6>BJP को 25 सीटों पर जीत मिली, जबकि 11 निर्दलीय और एक RLP प्रत्याशी विजयी रहा।</h6>
<h6>अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस की यह जीत इसलिए खास है क्योंकि पार्टी ने करीब 10 साल बाद बीकानेर नगर निगम में वापसी की है।</h6>
<h6>कांग्रेस के अनिल कल्ला ने BJP प्रदेश उपाध्यक्ष दीपक पारीक को हराया, जबकि पूर्व महापौर सुशीला कंवर राजपुरोहित को भी हार का सामना करना पड़ा।</h6>
<h2>भीलवाड़ा में BJP का स्पष्ट बहुमत</h2>
<h6>भीलवाड़ा में नगर निगम बनने के बाद हुए पहले चुनाव में BJP ने मजबूत प्रदर्शन किया।</h6>
<h6>70 वार्डों में BJP ने <strong>45 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत</strong> हासिल कर लिया।</h6>
<h6>कांग्रेस को 10 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 15 सीटें मिलीं।</h6>
<h6>इस नतीजे ने भीलवाड़ा में BJP के शहरी संगठन की ताकत को एक बार फिर सामने रखा है।</h6>
<h2>उदयपुर में सातवीं बार BJP बोर्ड की ओर</h2>
<h6>उदयपुर नगर निगम में भी BJP का प्रदर्शन मजबूत रहा।</h6>
<h6>80 वार्डों में BJP ने <strong>53 सीटों पर जीत दर्ज की</strong>, जबकि कांग्रेस को 23 सीटें मिलीं।</h6>
<h6>CPM को एक और निर्दलीयों को तीन सीटें मिलीं।</h6>
<h6>इन नतीजों के बाद BJP लगातार सातवीं बार उदयपुर नगर निगम में बोर्ड बनाने की स्थिति में दिखाई दे रही है।</h6>
<h2>भरतपुर में निर्दलीयों ने बिगाड़ा खेल</h2>
<h6>भरतपुर के नतीजे सबसे दिलचस्प रहे।</h6>
<h6>65 वार्डों में <strong>36 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की</strong>।</h6>
<h6>BJP को 20, कांग्रेस को 7, जबकि BSP और RLP को एक-एक सीट मिली।</h6>
<h6>इस आंकड़े के बाद भरतपुर में निर्दलीय ही सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बन गए हैं।</h6>
<h6>यानी यहां बोर्ड बनाने की पूरी राजनीति निर्दलीय पार्षदों के इर्द-गिर्द घूम सकती है।</h6>
<h2>जयपुर में पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल हारीं</h2>
<h6>जयपुर में BJP और कांग्रेस के बीच मुकाबले के बीच एक बड़ा व्यक्तिगत नतीजा भी सामने आया।</h6>
<h6>पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को कांग्रेस उम्मीदवार सुनीता मेठी ने हरा दिया।</h6>
<h6>रिपोर्ट के मुताबिक ज्योति खंडेलवाल किसी भी बूथ पर बढ़त नहीं बना सकीं।</h6>
<h6>वहीं जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में BJP का प्रदर्शन मजबूत रहा है। अलग-अलग अपडेटों में घोषित नतीजों की संख्या बदलती रही, इसलिए अंतिम आधिकारिक समेकित आंकड़े पर ही भरोसा करना बेहतर होगा।</h6>
<h2>जोधपुर में BJP-कांग्रेस की कांटे की टक्कर</h2>
<h6>जोधपुर के 100 वार्डों में भी BJP और कांग्रेस के बीच बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिला।</h6>
<h6>अमर उजाला के दोपहर तक के अपडेट में दोनों दल 44-44 सीटों पर थे, जबकि अन्य के खाते में 11 सीटें गई थीं।</h6>
<h6>इस तरह जोधपुर उन शहरों में रहा जहां किसी एक पार्टी को आसान बढ़त नहीं मिली।</h6>
<h2>नगर निकाय चुनाव क्यों हैं अहम?</h2>
<h6>राजस्थान में कुल <strong>309 शहरी स्थानीय निकायों</strong> के लिए मतदान हुआ।</h6>
<h6>इनमें 10 नगर निगमों के साथ नगर परिषद और नगर पालिकाएं भी शामिल हैं।</h6>
<h6>मतदान 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में हुआ था।</h6>
<h6>इन निकाय चुनावों को 2028 विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के शहरी राजनीतिक मूड का एक अहम संकेत माना जा रहा है।</h6>
<h2>BJP के लिए कहां राहत?</h2>
<h6>BJP के लिए भीलवाड़ा और उदयपुर जैसे बड़े शहरों में स्पष्ट बढ़त बड़ा राजनीतिक संदेश है।</h6>
<h6>इसके अलावा कई शहरी निकायों में पार्टी ने कांग्रेस पर बढ़त बनाई है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सोमवार दोपहर तक BJP अधिकांश शहरी निकायों में आगे चल रही थी।</h6>
<h6>यह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार और राज्य BJP संगठन के लिए राहत की खबर मानी जा सकती है।</h6>
<h2>कांग्रेस के लिए कहां अच्छी खबर?</h2>
<h6>कांग्रेस के लिए बीकानेर की जीत सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।</h6>
<h6>10 साल बाद नगर निगम में बहुमत हासिल करना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक वापसी है।</h6>
<h6>इसके अलावा कुछ नगर परिषदों और अन्य निकायों में भी कांग्रेस ने BJP को चुनौती दी है।</h6>
<h2>निर्दलीय क्यों बने सबसे बड़ा फैक्टर?</h2>
<h6>निकाय चुनावों में स्थानीय चेहरा, जातीय समीकरण और वार्ड स्तर की राजनीति अक्सर पार्टी लहर से ज्यादा प्रभावी हो जाती है।</h6>
<h6>भरतपुर में 36 निर्दलीयों की जीत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।</h6>
<h6>ऐसे नतीजों में मेयर और बोर्ड गठन के समय निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है।</h6>
<h2>अब नजर मेयर और चेयरमैन चुनाव पर</h2>
<h6>निकाय चुनाव के बाद अगला बड़ा चरण मेयर, चेयरमैन और अन्य पदों के चुनाव का होगा।</h6>
<h6>मेयर और चेयरपर्सन पदों के चुनाव 21 सितंबर को और डिप्टी मेयर व अन्य उपाध्यक्ष पदों के चुनाव 22 सितंबर को प्रस्तावित हैं।</h6>
<h6>इसलिए वार्ड परिणाम आने के बाद भी राजनीतिक जोड़-तोड़ का दौर खत्म नहीं होगा।</h6>
<h6>खासतौर पर उन शहरों में जहां किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, अगले कुछ दिन बेहद अहम रहेंगे।</h6>
<h2>राजस्थान ने दिया मिला-जुला संदेश</h2>
<h6>राजस्थान के निकाय चुनावों का अब तक का सबसे बड़ा संदेश यही है कि शहरी मतदाता ने एकतरफा फैसला नहीं दिया।</h6>
<h6>BJP ने कई बड़े शहरों में मजबूत प्रदर्शन किया, कांग्रेस ने बीकानेर जैसे अहम निगम में वापसी की और भरतपुर जैसे शहर में निर्दलीयों ने दोनों दलों को पीछे छोड़ दिया।</h6>
<h6>यानी ये नतीजे सिर्फ जीत-हार की कहानी नहीं, बल्कि 2028 से पहले राजस्थान की शहरी राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत भी हैं।</h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान </category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 17:42:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राजस्थान के शहरों में BJP का बड़ा दांव, 10 में से 6 नगर निगमों पर कब्जा; कांग्रेस को 3, भरतपुर में निर्दलीयों ने बिगाड़ा खेल</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में BJP ने शहरी सत्ता की लड़ाई में बड़ी बढ़त हासिल की है। ताजा नतीजों के मुताबिक राज्य के 10 प्रमुख नगर निगमों में से BJP ने 6 पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 3 नगर निगमों में सफलता मिली। भरतपुर में निर्दलीय और अन्य प्रत्याशियों ने दोनों प्रमुख दलों का गणित बिगाड़ दिया। जयपुर में BJP ने 150 में से 85 वार्ड सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 52 सीटें मिलीं। जोधपुर और पाली में कांग्रेस ने मजबूत प्रदर्शन किया। अब नजर 21 सितंबर को होने वाले मेयर, सभापति और चेयरमैन पदों के चुनाव पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/bjp-dominates-rajasthan-civic-elections-wins-1502-seats-congress-is/article-2015"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/rajasthan-nikay-chunav-result-2026-bjp-congress.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | जयपुर | 14 सितंबर 2026</strong></p>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/rajasthan-nikay-chunav-result-2026-bjp-congress.jpg.jpg" alt="rajasthan-nikay-chunav-result-2026-bjp-congress.jpg" width="1366" height="768"></img>
राजस्थान निकाय चुनाव में BJP ने 10 प्रमुख नगर निगमों में से 6 पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 3 नगर निगमों में सफलता मिली।

<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>राजस्थान के 10 नगर निगमों में से 6 पर BJP का कब्जा</strong></li>
<li><strong>कांग्रेस को 3 नगर निगमों में मिली सफलता</strong></li>
<li><strong>जयपुर में BJP ने 150 में से 85 वार्ड सीटें जीतीं</strong></li>
<li><strong>भरतपुर में निर्दलीयों ने BJP-कांग्रेस दोनों का बिगाड़ा गणित</strong></li>
</ul>
<h6>राजस्थान के शहरों की सत्ता के लिए हुए निकाय चुनाव में <strong>BJP ने बड़ा दांव मार दिया है।</strong> राज्य के 10 प्रमुख नगर निगमों में से 6 पर BJP ने जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस को 3 नगर निगमों में सफलता मिली है। एक नगर निगम में निर्दलीय प्रत्याशियों का दबदबा रहा।</h6>
<h6>सबसे ज्यादा नजर राजधानी जयपुर पर थी, जहां BJP ने 150 में से <strong>85 वार्ड सीटें जीतकर कांग्रेस पर बड़ी बढ़त बनाई।</strong> हालांकि राजस्थान के दूसरे हिस्सों में तस्वीर एक जैसी नहीं रही। जोधपुर और पाली में कांग्रेस ने BJP को पीछे छोड़ दिया, जबकि भरतपुर में निर्दलीयों ने दोनों बड़ी पार्टियों का पूरा चुनावी गणित बदल दिया।</h6>
<h6>यानी राजस्थान के निकाय चुनाव का संदेश सिर्फ यह नहीं है कि BJP आगे रही। इन नतीजों में <strong>कांग्रेस की कुछ शहरों में वापसी और निर्दलीयों की ताकत</strong> भी साफ दिखाई दी है।</h6>
<h2>जयपुर में BJP का बड़ा प्रदर्शन</h2>
<h6>राजस्थान की राजधानी जयपुर इस चुनाव की सबसे चर्चित लड़ाइयों में शामिल थी।</h6>
<h6>जयपुर नगर निगम की कुल 150 वार्ड सीटों में <strong>BJP ने 85 सीटें जीतीं</strong>, जबकि कांग्रेस को 52 सीटों पर सफलता मिली।</h6>
<h6>राजधानी में मिली यह बढ़त BJP के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जयपुर राजस्थान का सबसे प्रमुख शहरी केंद्र है और यहां के नतीजों पर पूरे राज्य की नजर थी।</h6>
<h2>अजमेर में मुकाबला रहा करीबी</h2>
<h6>अजमेर नगर निगम में BJP और कांग्रेस के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा।</h6>
<h6>80 वार्ड वाले अजमेर नगर निगम में BJP ने <strong>31 सीटें जीतीं</strong>, जबकि कांग्रेस को <strong>27 सीटों</strong> पर सफलता मिली।</h6>
<h6>यानी यहां BJP आगे जरूर रही, लेकिन कांग्रेस भी उसके काफी करीब रही।</h6>
<h2>उदयपुर में BJP ने बनाई बढ़त</h2>
<h6>उदयपुर नगर निगम की 80 वार्ड सीटों में BJP को 28 सीटें मिलीं।</h6>
<h6>कांग्रेस ने यहां 16 सीटों पर जीत दर्ज की।</h6>
<h6>उदयपुर में BJP का प्रदर्शन कांग्रेस के मुकाबले मजबूत रहा और पार्टी ने शहरी क्षेत्र में अपनी बढ़त कायम रखी।</h6>
<h2>कोटा में भी BJP आगे</h2>
<h6>कोटा नगर निगम में भी BJP ने कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया।</h6>
<h6>100 वार्ड वाले कोटा नगर निगम में BJP ने <strong>26 सीटें जीतीं</strong>, जबकि कांग्रेस के खाते में 18 सीटें गईं।</h6>
<h6>कोटा राजस्थान का बड़ा शहरी और शिक्षा केंद्र है, इसलिए यहां के नतीजे भी राजनीतिक रूप से अहम माने जा रहे हैं।</h6>
<h2>भीलवाड़ा में BJP ने कांग्रेस को काफी पीछे छोड़ा</h2>
<h6>भीलवाड़ा में दोनों पार्टियों के प्रदर्शन के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला।</h6>
<h6>70 वार्ड वाले भीलवाड़ा नगर निगम में BJP ने 16 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस सिर्फ 4 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी।</h6>
<h6>यह प्रमुख नगर निगमों में BJP और कांग्रेस के बीच दिखे सबसे बड़े अंतरों में से एक रहा।</h6>
<h2>अलवर और बीकानेर में भी BJP आगे</h2>
<h6>अलवर नगर निगम की 65 वार्ड सीटों में BJP को 15 और कांग्रेस को 13 सीटें मिलीं।</h6>
<h6>वहीं बीकानेर नगर निगम की 80 वार्ड सीटों में BJP ने 13 और कांग्रेस ने 11 सीटों पर जीत दर्ज की।</h6>
<h6>इन दोनों शहरों में BJP आगे जरूर रही, लेकिन BJP और कांग्रेस के बीच अंतर बहुत बड़ा नहीं रहा।</h6>
<h2>जोधपुर में कांग्रेस ने BJP को छोड़ा पीछे</h2>
<h6>BJP की बढ़त के बीच जोधपुर से कांग्रेस के लिए अच्छी खबर आई।</h6>
<h6>100 वार्ड वाले जोधपुर नगर निगम में कांग्रेस ने <strong>22 सीटें जीतीं</strong>, जबकि BJP को 16 सीटों पर सफलता मिली।</h6>
<h6>इस तरह जोधपुर में कांग्रेस BJP से आगे निकलने में सफल रही।</h6>
<h2>पाली में कांग्रेस का मजबूत प्रदर्शन</h2>
<h6>पाली में कांग्रेस का प्रदर्शन और भी मजबूत दिखाई दिया।</h6>
<h6>65 वार्ड वाले पाली नगर निगम में कांग्रेस ने <strong>29 सीटें जीतीं</strong>, जबकि BJP को 21 सीटें मिलीं।</h6>
<h6>पाली का परिणाम कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां पार्टी ने BJP पर स्पष्ट बढ़त बनाई।</h6>
<h2>भरतपुर में निर्दलीयों ने पलट दिया पूरा खेल</h2>
<h6>इस चुनाव का सबसे दिलचस्प परिणाम भरतपुर से सामने आया।</h6>
<h6>65 वार्ड वाले भरतपुर नगर निगम में <strong>निर्दलीय और अन्य प्रत्याशियों ने 33 सीटें जीत लीं।</strong></h6>
<h6>BJP को यहां 18 और कांग्रेस को सिर्फ 5 सीटें मिलीं।</h6>
<h6>इस तरह भरतपुर में BJP या Congress नहीं, बल्कि निर्दलीय और अन्य प्रत्याशी सबसे बड़ा समूह बनकर सामने आए।</h6>
<h6>यही परिणाम आगे बोर्ड गठन की राजनीति को भी दिलचस्प बना सकता है।</h6>
<h2>3657 नतीजों में BJP 1502, कांग्रेस 1397 पर</h2>
<h6>सुबह 10:17 बजे तक उपलब्ध व्यापक वार्ड परिणामों में कुल <strong>3657 सीटों के नतीजे घोषित</strong> हो चुके थे।</h6>
<h6>इनमें BJP ने <strong>1502 सीटें</strong>, कांग्रेस ने <strong>1397 सीटें</strong> और निर्दलीय उम्मीदवारों ने <strong>725 सीटें</strong> जीती थीं।</h6>
<h6>इन आंकड़ों से साफ था कि BJP कुल सीटों में आगे थी, लेकिन कांग्रेस भी बहुत ज्यादा पीछे नहीं थी।</h6>
<h2>बारां में AAP ने चौंकाया</h2>
<h6>राजस्थान के निकाय चुनाव में BJP और Congress की लड़ाई के बीच आम आदमी पार्टी ने भी एक जगह ध्यान खींचा।</h6>
<h6>बारां नगर परिषद के शुरुआती 11 वार्ड नतीजों में <strong>AAP ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की</strong>, जबकि BJP को 2 और कांग्रेस को एक सीट मिली।</h6>
<h6>यह नतीजा इसलिए दिलचस्प रहा क्योंकि राजस्थान की राजनीति मुख्य रूप से BJP और Congress के बीच केंद्रित रहती है।</h6>
<h2>नगर परिषदों में BJP-कांग्रेस की कांटे की टक्कर</h2>
<h6>नगर निगमों के बाहर नगर परिषदों में मुकाबला ज्यादा करीबी दिखाई दिया।</h6>
<h6>सुबह 11:06 बजे के अपडेट में झालावाड़, झुंझुनूं और सीकर नगर परिषद में कांग्रेस आगे थी।</h6>
<h6>सवाई माधोपुर और डूंगरपुर में BJP ने बढ़त बनाई थी, जबकि दौसा में दोनों दल बराबरी की स्थिति में थे।</h6>
<h6>इससे साफ है कि पूरे राजस्थान के स्थानीय निकायों में एक जैसी राजनीतिक तस्वीर नहीं बनी।</h6>
<h2>309 शहरी निकायों के लिए हुआ चुनाव</h2>
<h6>राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने कुल <strong>309 नगरीय निकायों</strong> के लिए चुनाव दो चरणों में कराए।</h6>
<h6>पहले चरण में 9 सितंबर को 162 निकायों में मतदान कराया गया।</h6>
<h6>दूसरे चरण में 11 सितंबर को 147 निकायों के लिए वोट डाले गए। इस चरण में जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर और बीकानेर जैसे प्रमुख शहर शामिल थे।</h6>
<h6>दोनों चरणों को मिलाकर कुल <strong>10,167 वार्डों</strong> के लिए मतदान कराया गया।</h6>
<h2>अभी बाकी है मेयर की असली लड़ाई</h2>
<h6>वार्डों का फैसला आने के बाद भी राजस्थान की शहरी सत्ता की लड़ाई पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।</h6>
<h6>चुनावी कार्यक्रम के मुताबिक <strong>21 सितंबर 2026 को महापौर यानी मेयर, नगर परिषद सभापति और नगरपालिका चेयरमैन पदों के लिए चुनाव प्रक्रिया आयोजित की जाएगी।</strong></h6>
<h6>जहां किसी एक दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है, वहां निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।</h6>
<h6>खास तौर पर भरतपुर जैसे नगर निगम में यह देखना दिलचस्प होगा कि बोर्ड गठन के समय निर्दलीय और अन्य प्रत्याशी किस तरफ जाते हैं।</h6>
<h6>राजस्थान निकाय चुनाव के अब तक के नतीजों ने BJP को शहरी राजनीति में बढ़त दी है, लेकिन <strong>जोधपुर और पाली में कांग्रेस का प्रदर्शन और भरतपुर में निर्दलीयों की ताकत</strong> यह भी बता रही है कि चुनावी तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं रही।</h6>
<h6>अब अगली नजर मेयर और दूसरे प्रमुख निकाय पदों पर होने वाली लड़ाई पर रहेगी।</h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान </category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 12:26:37 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पहले मुंह मीठा कराया, फिर पूर्व IPS से मारपीट! बीकानेर में टिकट बंटवारे पर कांग्रेस की कलह सड़क पर</title>
                                    <description><![CDATA[टिकट बंटवारे पर कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई खुलकर सामने आई

बीकानेर: राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के लिए टिकट वितरण को लेकर राजनीतिक दलों में जारी असंतोष अब मारपीट तक पहुंच गया है। बीकानेर में कांग्रेस प्रत्याशी के चुनाव कार्यालय का उद्घाटन करने पहुंचे शहर कांग्रेस अध्यक्ष और रिटायर्ड IPS अधिकारी मदन गोपाल मेघवाल के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की एवं मारपीट की गई।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो के एक हिस्से में कुछ लोग मदन गोपाल मेघवाल को मिठाई खिलाते हुए नजर आते हैं। इसके कुछ देर बाद वहां माहौल बदल जाता है और धक्का-मुक्की तथा हाथापाई जैसी स्थिति दिखाई देती है।

घटना को कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर चल रही नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि विवाद की पूरी शुरुआत और उसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका पुलिस जांच तथा संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

नवरतन दत्ता के चुनाव कार्यालय पहुंचे थे मेघवाल

उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह घटनाक्रम बीकानेर के वार्ड नंबर-50 में हुआ। कांग्रेस ने यहां से नवरतन दत्ता को चुनाव मैदान में उतारा है। उनके चुनाव कार्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल भी पहुंचे थे।

कार्यक्रम में शुरुआत में माहौल सामान्य दिखाई दिया। स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया तथा मिठाई भी खिलाई। इसके बाद अचानक टिकट वितरण को लेकर कहासुनी शुरू हो गई।

देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि धक्का-मुक्की और कथित मारपीट होने लगी। मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव करते हुए मदन गोपाल मेघवाल को वहां से सुरक्षित निकालने की कोशिश की।

‘पहले मिठाई, फिर मारपीट’ वाला वीडियो वायरल

घटना का वीडियो इस कारण ज्यादा चर्चा में है क्योंकि उसमें कुछ ही समय के भीतर दो बिल्कुल अलग तस्वीरें दिखाई देती हैं। शुरुआत में मदन गोपाल मेघवाल का स्वागत करते हुए उन्हें मिठाई खिलाई जाती है, जबकि बाद में उसी कार्यक्रम में हंगामा और हाथापाई शुरू हो जाती है।

सोशल मीडिया पर इसे “पहले मुंह मीठा कराया, फिर मारपीट” लिखकर साझा किया जा रहा है। हालांकि वायरल वीडियो का केवल एक हिस्सा देखकर विवाद की पूरी वजह या किसी व्यक्ति का दोष तय नहीं किया जा सकता।

पत्रकार अरविंद छोटिया ने भी घटना का वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि टिकट वितरण से नाराज लोगों ने पूर्व IPS अधिकारी के साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट की। यहां मूल X पोस्ट देखी जा सकती है।

टिकट की दावेदारी करने वाले युवक पर आरोप

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मदन गोपाल मेघवाल ने वार्ड से कांग्रेस का टिकट मांग रहे एक युवक पर विवाद और मारपीट का आरोप लगाया है। बताया जा रहा है कि टिकट नहीं मिलने को लेकर कुछ कार्यकर्ताओं में पहले से नाराजगी थी।

यह स्पष्ट नहीं है कि वायरल वीडियो में मौजूद सभी लोग कांग्रेस कार्यकर्ता थे या उनमें प्रत्याशी के अन्य समर्थक भी शामिल थे। इसलिए किसी विशेष व्यक्ति या समूह को जिम्मेदार बताने से पहले पुलिस और कांग्रेस संगठन की आधिकारिक जांच का इंतजार जरूरी है।

चार वार्डों में डुप्लीकेट सिंबल का भी आरोप

बीकानेर कांग्रेस में केवल वार्ड नंबर-50 का विवाद ही चर्चा में नहीं है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार चार वार्डों में डुप्लीकेट चुनाव चिह्न जारी किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।

टिकट और चुनाव चिह्न को लेकर बनी कथित भ्रम की स्थिति से अलग-अलग उम्मीदवारों तथा उनके समर्थकों में नाराजगी बढ़ने की बात सामने आई है। कुछ कार्यकर्ता टिकट वितरण में पारदर्शिता नहीं होने का आरोप लगा रहे हैं।

हालांकि डुप्लीकेट सिंबल और टिकट वितरण में अनियमितता के ये दावे संबंधित पक्षों के आरोप हैं। निर्वाचन अधिकारियों या कांग्रेस की किसी अंतिम जांच से इनकी पुष्टि होना बाकी है।

कौन हैं मदन गोपाल मेघवाल?

मदन गोपाल मेघवाल एक रिटायर्ड IPS अधिकारी हैं और वर्तमान में बीकानेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं। पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।

वह बीकानेर लोकसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी भी रह चुके हैं। पुलिस प्रशासन में लंबे अनुभव के कारण बीकानेर कांग्रेस संगठन में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

नगर निकाय चुनाव में प्रत्याशियों के चयन, चुनाव प्रचार और स्थानीय संगठन के बीच समन्वय में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। इसी कारण टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों के निशाने पर भी वह आ गए।

कांग्रेस के लिए असहज करने वाली घटना

चुनाव के बीच पार्टी के शहर अध्यक्ष से कथित मारपीट कांग्रेस के लिए गंभीर संगठनात्मक चुनौती बन सकती है। विपक्ष इस घटना को कांग्रेस की अंदरूनी कलह और टिकट वितरण में अव्यवस्था के उदाहरण के रूप में पेश कर सकता है।

दूसरी ओर, कांग्रेस नेतृत्व के सामने नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने और आधिकारिक उम्मीदवारों के पक्ष में संगठन को एकजुट करने की चुनौती होगी। यदि टिकट से असंतुष्ट नेता निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरते हैं तो पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के वोटों का बंटवारा हो सकता है।

टिकट वितरण के समय क्यों बढ़ते हैं विवाद?

नगर निकाय चुनाव में वार्ड स्तर के टिकट को लेकर मुकाबला कई बार विधानसभा या लोकसभा चुनाव से भी ज्यादा व्यक्तिगत हो जाता है। एक ही वार्ड से अनेक स्थानीय नेता दावेदारी करते हैं, लेकिन टिकट किसी एक व्यक्ति को मिलता है।

टिकट न मिलने के बाद नाराज नेता पार्टी प्रत्याशी का विरोध कर सकते हैं या निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला कर सकते हैं। बीकानेर की घटना भी इसी राजनीतिक असंतोष का परिणाम बताई जा रही है।

फिर भी किसी राजनीतिक फैसले से नाराजगी जताने का लोकतांत्रिक तरीका विरोध और संगठन के सामने शिकायत दर्ज कराना है। किसी व्यक्ति से मारपीट या सार्वजनिक हिंसा को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

पुलिस और कांग्रेस की कार्रवाई पर नजर

घटना का वीडियो सामने आने के बाद अब सवाल है कि मदन गोपाल मेघवाल की ओर से पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है या नहीं और कांग्रेस नेतृत्व इसमें क्या कार्रवाई करता है।

खबर लिखे जाने तक इस मामले में किसी गिरफ्तारी अथवा कांग्रेस की ओर से अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। आधिकारिक जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाना चाहिए।

चुनाव से पहले कांग्रेस को कितना नुकसान?

बीकानेर में हुए घटनाक्रम ने कांग्रेस के संगठनात्मक अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव प्रचार शुरू होने के समय यदि कार्यकर्ता आपस में भिड़ते हैं तो इसका सीधा फायदा प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों को मिल सकता है।

अब कांग्रेस नेतृत्व के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं—घटना की निष्पक्ष जांच, मारपीट में शामिल लोगों पर कार्रवाई और टिकट से नाराज कार्यकर्ताओं को मनाना। पार्टी कितनी जल्दी इस विवाद को शांत करती है, इसका असर स्थानीय चुनाव प्रचार पर पड़ सकता है।

तथ्य और दावे में अंतर
मदन गोपाल मेघवाल बीकानेर शहर कांग्रेस अध्यक्ष और रिटायर्ड IPS अधिकारी हैं।
वह वार्ड नंबर-50 के कांग्रेस प्रत्याशी नवरतन दत्ता के चुनाव कार्यालय पहुंचे थे।
कार्यक्रम में विवाद और धक्का-मुक्की का वीडियो सामने आया है।
टिकट वितरण से नाराज लोगों द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है।
चार वार्डों में डुप्लीकेट सिंबल का दावा मीडिया रिपोर्टों में सामने आया है।
पुलिस की अंतिम जांच से घटना में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट होना बाकी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/bikaner-congress-ticket-dispute-madan-gopal-meghwal-assault-viral-video/article-1909"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/bikaner-congress-madan-gopal-meghwal-assault-ticket-dispute.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h2 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">टिकट बंटवारे पर कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई खुलकर सामने आई</h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/bikaner-congress-madan-gopal-meghwal-assault-ticket-dispute.jpg2.jpg" alt="bikaner-congress-madan-gopal-meghwal-assault-ticket-dispute.jpg" width="1366" height="768"></img>
वार्ड नंबर-50 में कांग्रेस प्रत्याशी के कार्यालय उद्घाटन के दौरान शहर अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट का आरोप लगा है।

<p><strong>बीकानेर:</strong> राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के लिए टिकट वितरण को लेकर राजनीतिक दलों में जारी असंतोष अब मारपीट तक पहुंच गया है। बीकानेर में कांग्रेस प्रत्याशी के चुनाव कार्यालय का उद्घाटन करने पहुंचे शहर कांग्रेस अध्यक्ष और रिटायर्ड IPS अधिकारी <strong>मदन गोपाल मेघवाल</strong> के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की एवं मारपीट की गई।</p>
<p>घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो के एक हिस्से में कुछ लोग मदन गोपाल मेघवाल को मिठाई खिलाते हुए नजर आते हैं। इसके कुछ देर बाद वहां माहौल बदल जाता है और धक्का-मुक्की तथा हाथापाई जैसी स्थिति दिखाई देती है।</p>
<p>घटना को कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर चल रही नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि विवाद की पूरी शुरुआत और उसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका पुलिस जांच तथा संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।</p>
<h2>नवरतन दत्ता के चुनाव कार्यालय पहुंचे थे मेघवाल</h2>
<p>उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह घटनाक्रम बीकानेर के <strong>वार्ड नंबर-50</strong> में हुआ। कांग्रेस ने यहां से नवरतन दत्ता को चुनाव मैदान में उतारा है। उनके चुनाव कार्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल भी पहुंचे थे।</p>
<p>कार्यक्रम में शुरुआत में माहौल सामान्य दिखाई दिया। स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया तथा मिठाई भी खिलाई। इसके बाद अचानक टिकट वितरण को लेकर कहासुनी शुरू हो गई।</p>
<p>देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि धक्का-मुक्की और कथित मारपीट होने लगी। मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव करते हुए मदन गोपाल मेघवाल को वहां से सुरक्षित निकालने की कोशिश की।</p>
<h2>‘पहले मिठाई, फिर मारपीट’ वाला वीडियो वायरल</h2>
<p>घटना का वीडियो इस कारण ज्यादा चर्चा में है क्योंकि उसमें कुछ ही समय के भीतर दो बिल्कुल अलग तस्वीरें दिखाई देती हैं। शुरुआत में मदन गोपाल मेघवाल का स्वागत करते हुए उन्हें मिठाई खिलाई जाती है, जबकि बाद में उसी कार्यक्रम में हंगामा और हाथापाई शुरू हो जाती है।</p>
<p>सोशल मीडिया पर इसे <strong>“पहले मुंह मीठा कराया, फिर मारपीट”</strong> लिखकर साझा किया जा रहा है। हालांकि वायरल वीडियो का केवल एक हिस्सा देखकर विवाद की पूरी वजह या किसी व्यक्ति का दोष तय नहीं किया जा सकता।</p>
<p>पत्रकार अरविंद छोटिया ने भी घटना का वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि टिकट वितरण से नाराज लोगों ने पूर्व IPS अधिकारी के साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट की। <a class="decorated-link" href="https://x.com/arvindchotia/status/2095085354101686661?s=20">यहां मूल X पोस्ट देखी जा सकती है</a>।</p>
<h2>टिकट की दावेदारी करने वाले युवक पर आरोप</h2>
<p>स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मदन गोपाल मेघवाल ने वार्ड से कांग्रेस का टिकट मांग रहे एक युवक पर विवाद और मारपीट का आरोप लगाया है। बताया जा रहा है कि टिकट नहीं मिलने को लेकर कुछ कार्यकर्ताओं में पहले से नाराजगी थी।</p>
<p>यह स्पष्ट नहीं है कि वायरल वीडियो में मौजूद सभी लोग कांग्रेस कार्यकर्ता थे या उनमें प्रत्याशी के अन्य समर्थक भी शामिल थे। इसलिए किसी विशेष व्यक्ति या समूह को जिम्मेदार बताने से पहले पुलिस और कांग्रेस संगठन की आधिकारिक जांच का इंतजार जरूरी है।</p>
<h2>चार वार्डों में डुप्लीकेट सिंबल का भी आरोप</h2>
<p>बीकानेर कांग्रेस में केवल वार्ड नंबर-50 का विवाद ही चर्चा में नहीं है। <a class="decorated-link" href="https://navbharattimes.indiatimes.com/state/rajasthan/bikaner/bikaner-municipal-election-congress-ticket-dispute-city-incharge-ex-ips-madan-gopal-meghwal-assault/articleshow/133709096.cms?utm_source=chatgpt.com">नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट</a> के अनुसार चार वार्डों में डुप्लीकेट चुनाव चिह्न जारी किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।</p>
<p>टिकट और चुनाव चिह्न को लेकर बनी कथित भ्रम की स्थिति से अलग-अलग उम्मीदवारों तथा उनके समर्थकों में नाराजगी बढ़ने की बात सामने आई है। कुछ कार्यकर्ता टिकट वितरण में पारदर्शिता नहीं होने का आरोप लगा रहे हैं।</p>
<p>हालांकि डुप्लीकेट सिंबल और टिकट वितरण में अनियमितता के ये दावे संबंधित पक्षों के आरोप हैं। निर्वाचन अधिकारियों या कांग्रेस की किसी अंतिम जांच से इनकी पुष्टि होना बाकी है।</p>
<h2>कौन हैं मदन गोपाल मेघवाल?</h2>
<p>मदन गोपाल मेघवाल एक रिटायर्ड IPS अधिकारी हैं और वर्तमान में बीकानेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं। पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।</p>
<p>वह बीकानेर लोकसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी भी रह चुके हैं। पुलिस प्रशासन में लंबे अनुभव के कारण बीकानेर कांग्रेस संगठन में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।</p>
<p>नगर निकाय चुनाव में प्रत्याशियों के चयन, चुनाव प्रचार और स्थानीय संगठन के बीच समन्वय में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। इसी कारण टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों के निशाने पर भी वह आ गए।</p>
<h2>कांग्रेस के लिए असहज करने वाली घटना</h2>
<p>चुनाव के बीच पार्टी के शहर अध्यक्ष से कथित मारपीट कांग्रेस के लिए गंभीर संगठनात्मक चुनौती बन सकती है। विपक्ष इस घटना को कांग्रेस की अंदरूनी कलह और टिकट वितरण में अव्यवस्था के उदाहरण के रूप में पेश कर सकता है।</p>
<p>दूसरी ओर, कांग्रेस नेतृत्व के सामने नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने और आधिकारिक उम्मीदवारों के पक्ष में संगठन को एकजुट करने की चुनौती होगी। यदि टिकट से असंतुष्ट नेता निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरते हैं तो पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के वोटों का बंटवारा हो सकता है।</p>
<h2>टिकट वितरण के समय क्यों बढ़ते हैं विवाद?</h2>
<p>नगर निकाय चुनाव में वार्ड स्तर के टिकट को लेकर मुकाबला कई बार विधानसभा या लोकसभा चुनाव से भी ज्यादा व्यक्तिगत हो जाता है। एक ही वार्ड से अनेक स्थानीय नेता दावेदारी करते हैं, लेकिन टिकट किसी एक व्यक्ति को मिलता है।</p>
<p>टिकट न मिलने के बाद नाराज नेता पार्टी प्रत्याशी का विरोध कर सकते हैं या निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला कर सकते हैं। बीकानेर की घटना भी इसी राजनीतिक असंतोष का परिणाम बताई जा रही है।</p>
<p>फिर भी किसी राजनीतिक फैसले से नाराजगी जताने का लोकतांत्रिक तरीका विरोध और संगठन के सामने शिकायत दर्ज कराना है। किसी व्यक्ति से मारपीट या सार्वजनिक हिंसा को उचित नहीं ठहराया जा सकता।</p>
<h2>पुलिस और कांग्रेस की कार्रवाई पर नजर</h2>
<p>घटना का वीडियो सामने आने के बाद अब सवाल है कि मदन गोपाल मेघवाल की ओर से पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है या नहीं और कांग्रेस नेतृत्व इसमें क्या कार्रवाई करता है।</p>
<p>खबर लिखे जाने तक इस मामले में किसी गिरफ्तारी अथवा कांग्रेस की ओर से अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। आधिकारिक जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाना चाहिए।</p>
<h2>चुनाव से पहले कांग्रेस को कितना नुकसान?</h2>
<p>बीकानेर में हुए घटनाक्रम ने कांग्रेस के संगठनात्मक अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव प्रचार शुरू होने के समय यदि कार्यकर्ता आपस में भिड़ते हैं तो इसका सीधा फायदा प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों को मिल सकता है।</p>
<p>अब कांग्रेस नेतृत्व के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं—घटना की निष्पक्ष जांच, मारपीट में शामिल लोगों पर कार्रवाई और टिकट से नाराज कार्यकर्ताओं को मनाना। पार्टी कितनी जल्दी इस विवाद को शांत करती है, इसका असर स्थानीय चुनाव प्रचार पर पड़ सकता है।</p>
<hr />
<h2>तथ्य और दावे में अंतर</h2>
<ul>
<li>मदन गोपाल मेघवाल बीकानेर शहर कांग्रेस अध्यक्ष और रिटायर्ड IPS अधिकारी हैं।</li>
<li>वह वार्ड नंबर-50 के कांग्रेस प्रत्याशी नवरतन दत्ता के चुनाव कार्यालय पहुंचे थे।</li>
<li>कार्यक्रम में विवाद और धक्का-मुक्की का वीडियो सामने आया है।</li>
<li>टिकट वितरण से नाराज लोगों द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है।</li>
<li>चार वार्डों में डुप्लीकेट सिंबल का दावा मीडिया रिपोर्टों में सामने आया है।</li>
<li>पुलिस की अंतिम जांच से घटना में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट होना बाकी है।</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राजस्थान </category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 18:29:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>₹12,500 करोड़ से बदलेंगे राजस्थान के सरकारी स्कूल? CJP ने कहा- आंदोलन का असर, अब काम दिखाए सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों के कायाकल्प के लिए ₹12,500 करोड़ का तीन वर्षीय रोडमैप तैयार किया है। CJP के आशुतोष रांका ने इसे ‘School Thik Karo’ अभियान की बड़ी जीत बताते हुए पूछा कि अब तक कितने जर्जर स्कूल और क्लासरूम ठीक हुए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/rajasthan-schools-12500-crore-roadmap-cjp-school-thik-karo-ashutosh-ranka/article-1834"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-08/rajasthan-schools-12500-crore-roadmap-cjp-ashutosh-ranka.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>जयपुर।</strong> राजस्थान में सरकारी स्कूलों की हालत को लेकर चल रही बहस के बीच भजनलाल शर्मा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों के कायाकल्प के लिए <strong>₹12,500 करोड़ का तीन वर्षीय रोडमैप</strong> तैयार किया है, जो 2026-27 से 2028-29 तक लागू किए जाने की बात कही गई है। CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने इस घोषणा को अपने <strong>‘School Thik Karo’</strong> अभियान की बड़ी जीत बताया है, लेकिन साथ ही सरकार से पूछा है कि पिछले छह महीनों में जमीनी स्तर पर वास्तव में कितना काम हुआ।</p>
<h2>₹12,500 करोड़ में क्या होगा?</h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-08/rajasthan-schools-12500-crore-roadmap-cjp-ashutosh-ranka.jpg.jpg" alt="rajasthan-schools-12500-crore-roadmap-cjp-ashutosh-ranka.jpg" width="1366" height="768"></img>
राजस्थान सरकार ने 2026-27 से 2028-29 तक सरकारी स्कूलों के कायाकल्प के लिए ₹12,500 करोड़ का तीन वर्षीय roadmap तैयार किया है, जिसे CJP ने अपने School Thik Karo अभियान की बड़ी जीत बताया।

<p>ABP/PTI की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए तीन साल का रोडमैप तैयार किया गया है। इसके साथ ही दिसंबर 2026 तक <strong>₹1,087 करोड़ की लागत से 9,000 स्मार्ट क्लासरूम, 80,000 टैबलेट और 7,000 ICT लैब</strong> स्थापित करने की योजना भी बताई गई है।</p>
<p>यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—<strong>₹12,500 करोड़ को एकमुश्त जारी रकम बताना सही नहीं होगा।</strong> उपलब्ध रिपोर्ट इसे तीन साल के infrastructure roadmap के रूप में पेश करती हैं।</p>
<h2>CJP ने इसे अपनी जीत क्यों बताया?</h2>
<p>आशुतोष रांका ने कहा कि रामपुरा की घटना और ‘School Thik Karo’ आंदोलन के बाद सरकार पर सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने का दबाव बढ़ा। उन्होंने इसे <strong>“Cockroach is Back” आंदोलन की बड़ी जीत</strong> बताया।</p>
<p>रांका का कहना है कि अगर स्कूलों की हालत पर लगातार सवाल नहीं उठते तो सरकार पर इतनी तेजी से स्पष्ट roadmap देने का दबाव नहीं बनता।</p>
<p>यह <strong>CJP का राजनीतिक/अभियान संबंधी दावा</strong> है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा कि ₹12,500 करोड़ का roadmap केवल CJP के आंदोलन की वजह से बनाया गया।</p>
<h2>रामपुरा में क्या हुआ था?</h2>
<p>कुछ दिन पहले जयपुर के पास <strong>रामपुरा-कंवरपुरा</strong> गांव के एक सरकारी स्कूल को लेकर विवाद हुआ था। CJP कार्यकर्ता स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। रिपोर्टों के मुताबिक वहां स्थिति तनावपूर्ण हो गई और CJP कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की तथा वाहनों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे। जिस स्कूल को लेकर विवाद हुआ, उसकी इमारत को असुरक्षित बताया गया था और बच्चों की कक्षाएं अस्थायी स्थान पर चलाए जाने की खबरें सामने आई थीं।</p>
<p>इसी घटना के बाद सरकारी स्कूलों की हालत और outsiders की school entry को लेकर राजस्थान में बहस तेज हो गई।</p>
<h2>सरकार ने स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री पर भी लगाई थी सख्ती</h2>
<p>रामपुरा विवाद के बाद राजस्थान सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में unauthorized entry को लेकर निर्देश जारी किए गए थे। CJP ने इन प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया था कि सरकार स्कूलों की कमियां छिपाना चाहती है।</p>
<p>सरकार का तर्क था कि स्कूलों में सुरक्षा, बच्चों की privacy और पढ़ाई के माहौल को ध्यान में रखते हुए प्रवेश व्यवस्था नियंत्रित करना जरूरी है।</p>
<p>इसलिए इस पूरे विवाद को <strong>“सरकार स्कूल दिखाना नहीं चाहती”</strong> या <strong>“CJP को पूरी तरह रोक दिया गया”</strong> जैसी absolute framing में नहीं लिखना चाहिए।</p>
<h1>रांका ने सरकार से कौन से सवाल पूछे?</h1>
<p>आशुतोष रांका ने सरकार के ₹12,500 करोड़ roadmap का स्वागत किया, लेकिन साथ में कई सवाल भी उठाए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार ने मार्च 2026 में हाईकोर्ट में पहले भी स्कूल infrastructure सुधार का roadmap होने की बात कही थी। उनके मुताबिक तब सरकार ने <strong>पांच साल</strong> का समय मांगा था, जबकि अब इसे <strong>तीन साल</strong> में पूरा करने की बात कही जा रही है।</p>
<p>रांका ने पूछा:</p>
<p><strong>पिछले छह महीने में कितने जर्जर स्कूल भवन ठीक किए गए?</strong><br /><strong>कितने नए classrooms बने?</strong><br /><strong>कितनी unsafe buildings की मरम्मत हुई?</strong></p>
<p>उनका कहना है कि roadmap की घोषणा से ज्यादा जरूरी उसकी ground-level progress है।</p>
<h2>‘एक दिन में जर्जर स्कूलों की रिपोर्ट कैसे?’</h2>
<p>रांका ने एक और आदेश पर सवाल उठाया जिसमें शिक्षा अधिकारियों से जर्जर स्कूल भवनों की रिपोर्ट जल्दी भेजने को कहा गया।</p>
<p>उनका तर्क है कि स्कूल भवन की structural safety का assessment technically qualified engineers से कराया जाना चाहिए, सिर्फ शिक्षकों से नहीं। उन्होंने सवाल किया कि क्या एक दिन में सभी स्कूलों का सही infrastructure assessment संभव है।</p>
<p>यह रांका का सवाल है; इसे तकनीकी निष्कर्ष की तरह नहीं लिखा जाना चाहिए।</p>
<h1>क्या राजस्थान में Digital Education पर पहले से काम चल रहा था?</h1>
<p>हाँ। राजस्थान सरकार के 2026-27 के budget outcome documents से पता चलता है कि ICT और digital initiatives पहले से school education policy का हिस्सा हैं। Budget documents में हजारों schools को ICT और smart classroom initiatives से जोड़ने की योजनाओं का उल्लेख है।</p>
<p>इसलिए यह कहना कि <strong>₹12,500 करोड़ का पूरा school-modernisation विचार CJP आंदोलन के बाद पहली बार पैदा हुआ</strong>, उपलब्ध official planning documents से मेल नहीं खाएगा।</p>
<p>ज्यादा सटीक framing होगी:</p>
<p><strong>CJP का दावा है कि उसके आंदोलन ने सरकार पर implementation तेज करने और roadmap को सार्वजनिक रूप से सामने लाने का दबाव बढ़ाया।</strong></p>
<h1>स्कूल सुधार की जरूरत क्यों?</h1>
<p>राजस्थान में सरकारी स्कूलों की इमारतों और सुरक्षा को लेकर सरकार खुद भी पिछले महीनों में निर्देश जारी कर चुकी है। जुलाई में शिक्षा विभाग ने जर्जर school buildings को तत्काल चिन्हित करने, unsafe structures को हटाने और damaged buildings की मरम्मत कराने के निर्देश दिए थे।</p>
<p>इससे साफ है कि infrastructure safety पहले से सरकारी agenda में थी, लेकिन CJP विवाद ने इस मुद्दे को राजनीतिक और public visibility ज्यादा दे दी।</p>
<h2>9,000 Smart Classrooms और 7,000 ICT Labs</h2>
<p>सरकार के ताजा roadmap में infrastructure repair के साथ digital education को भी अहम हिस्सा बनाया गया है।</p>
<p>ABP की रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2026 तक:</p>
<p><strong>9,000 Smart Classrooms</strong><br /><strong>80,000 Tablets</strong><br /><strong>7,000 ICT Labs</strong></p>
<p>स्थापित किए जाने की योजना है और इस हिस्से पर करीब <strong>₹1,087 करोड़</strong> खर्च बताया गया है।</p>
<p>लेकिन इस योजना की असली परीक्षा procurement announcements से नहीं, बल्कि यह देखने से होगी कि कितने schools में equipment वास्तव में install हुआ और कितने उपयोग में आए।</p>
<h1>क्या CJP का आंदोलन अब खत्म होगा?</h1>
<p>आशुतोष रांका ने साफ कहा है कि नहीं।</p>
<p>उन्होंने सरकार के कदम का स्वागत किया, लेकिन कहा कि जब तक ground पर school infrastructure में वास्तविक बदलाव दिखाई नहीं देता, <strong>‘School Thik Karo’ अभियान जारी रहेगा।</strong></p>
<p>यानी अब CJP की strategy केवल खराब स्कूलों की तस्वीरें दिखाने तक सीमित नहीं रहेगी; वह ₹12,500 करोड़ roadmap के implementation को भी मुद्दा बना सकती है।</p>
<h1>अब सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा क्या?</h1>
<p>इस घोषणा के बाद सरकार पर तीन बड़े सवाल रहेंगे:</p>
<p><strong>पहला:</strong> ₹12,500 करोड़ का year-wise और district-wise allocation क्या होगा?</p>
<p><strong>दूसरा:</strong> कितने जर्जर स्कूल पहले चरण में repair या rebuild होंगे?</p>
<p><strong>तीसरा:</strong> तीन साल के roadmap की progress public dashboard या नियमित reports के जरिए सामने आएगी या नहीं?</p>
<p>अगर सरकार इन सवालों का स्पष्ट data देती है तो यह सिर्फ राजनीतिक विवाद का जवाब नहीं, बल्कि education governance में transparency की दिशा में भी बड़ा कदम हो सकता है।</p>
<p>फिलहाल इतना स्पष्ट है कि सरकारी स्कूलों की हालत अब राजस्थान की politics में एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है और ₹12,500 करोड़ का roadmap इस बहस को और बड़ा करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 16:13:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान बीजेपी मुख्यालय बना रण क्षेत्र! आपस में भिड़े बीजेपी नेता...</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>जयपुर:</strong> भाजपा के प्रदेश कार्यालय में गुरुवार 27 फरवरी को एक हैरान करने वाली घटना हुई। पार्टी कार्यालय में अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारियों की बैठक होने वाली थी। बैठक शुरू होने से पहले ही मंच पर लगी कुर्सियों पर बैठने को लेकर पदाधिकारी आपस में भिड़ गए। मोर्चा के दो पदाधिकारियों में आपस में लात घूंसे चले। कुछ पदाधिकारियों ने छुड़ाने का प्रयास किया लेकिन दोनों कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे के कॉलर पकड़ रखे थे। ऐसे में दोनों अलग अलग करने में काफी जोर आजमाइश करनी पड़ी।</p>
<p><strong>मदन राठौड़ देखते रहे और लात घूंसे चलते रहे</strong><br />गुरुवार को भाजपा अल्पसंख्यक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/congress-leader-dr-ajay-kumar-attacked-modi-government-fiercely/article-1450"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-02/hghjg.webp" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर:</strong> भाजपा के प्रदेश कार्यालय में गुरुवार 27 फरवरी को एक हैरान करने वाली घटना हुई। पार्टी कार्यालय में अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारियों की बैठक होने वाली थी। बैठक शुरू होने से पहले ही मंच पर लगी कुर्सियों पर बैठने को लेकर पदाधिकारी आपस में भिड़ गए। मोर्चा के दो पदाधिकारियों में आपस में लात घूंसे चले। कुछ पदाधिकारियों ने छुड़ाने का प्रयास किया लेकिन दोनों कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे के कॉलर पकड़ रखे थे। ऐसे में दोनों अलग अलग करने में काफी जोर आजमाइश करनी पड़ी।</p>
<p><strong>मदन राठौड़ देखते रहे और लात घूंसे चलते रहे</strong><br />गुरुवार को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की बैठक थी। बैठक की अध्यक्षता अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष हमीद खान मेवाती ने की। इस बैठक में मोर्चा के प्रदेश संगठन के सभी पदाधिकारी मौजूद थे। जिला अध्यक्षों और जिला महामंत्रियों को भी बैठक में बुलाया गया। बैठक में पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के फिर से निर्वाचित होने पर सम्मान किया जाना था। जब बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ अल्पसंख्यक मोर्चा की बैठक में पहुंचे तो पदाधिकारी उन्हें मंच तक लेकर आए। राठौड़ को मंच तक लाने वाले पदाधिकारी मंच पर लगी कुर्सी पर बैठने लगे तो पंगा शुरू हो गया। मंच पर पहले से मौजूद पदाधिकारियों ने राठौड़ के साथ आए पदाधिकारी को कुर्सी से उठाया और नीचे की ओर धक्का दिया। इसी दरमियान दो पदाधिकारियों में लात घूंसे चलने लगे।</p>
<p><strong>एक दूसरे की कॉलर पकड़ कर हुए गुत्थमगुत्था</strong><br />मंच पर प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ बैठे थे और बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारी आपस में लड़ते रहे। मंच से ही दोनों ने एक एक हाथ से दूसरी की कॉलर कसकर पकड़ रखी थी। दूसरे हाथ से मुक्के बरसाते रहे। अचानक हुए इस घटनाक्रम से सब चकित रह गए। कुछ पदाधिकारी दोनों को अलग अलग करने की कोशिश में जुटे लेकिन दोनों ने एक दूसरे को कसकर पकड़ रखा था। ऐसे में उन्हें अलग अलग करना आसान नहीं था। जब अन्य कार्यकर्ताओं ने दोनों के हाथ पकड़े तो वे सिर भिड़ाकर लड़ने पर उतारू हो रहे थे। आखिर में बड़ी मुश्किल से दोनों पदाधिकारियों को अलग अलग किया और दोनों को मंच से नीचे लाया गया।</p>
<p><strong>राठौड़ ने दोनों की हिदायत</strong></p>
<p>पार्टी के दो पदाधिकारियों द्वारा आपस में भिड़ने के दौरान बीजेपी मुख्यालय में मीडियाकर्मी मौजूद थे। बैठक को कवरेज करने के लिए मीडियाकर्मियों को पहले से आमंत्रण भेजा हुआ था। मारपीट और लात घूंसे चलने का पूरा घटनाक्रम कैमरों और मोबाइल में कैद हो गया और कुछ ही मिनट बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पूरे घटनाक्रम के बाद बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष हमीद खान मेवाती से रिपोर्ट मांगी है। साथ ही दोनों पदाधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई। मदन राठौड़ ने कहा कि पार्टी कार्यालय में इस तरह की हरकत से संगठन की छवि खराब होती है। उन्होंने मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई करने की बात भी कही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान </category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Feb 2025 17:31:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>   सूर्या रेजिडेंसी के निवेशकों को जमा राशि लौटाने का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जयपुर। राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RAJ-RERA) ने सूर्या रेजिडेंसी प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले शिकायतकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए डेवलपर रवि सूर्या अफोर्डेबल होम्स प्राइवेट लिमिटेड को जमा की गई राशि लौटाने का निर्देश दिया है। यह आदेश रेरा अथॉरिटी की अध्यक्ष वीणु गुप्ता ने 17 फरवरी 2025 को सुनाया।</p>
<p>शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने प्रति फ्लैट 12,92,000 रुपए की कुल बिक्री राशि में से <br />1,35,000 रुपए का भुगतान किया था। लेकिन डेवलपर ने न तो उन्हें फ्लैट का कब्जा दिया और न ही उनके साथ कोई बिक्री अनुबंध (Agreement to Sale) किया।<br />वहीं, डेवलपर रवि सूर्या</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/order-to-return-the-deposit-amount-to-the-investors-of/article-1439"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-02/project-photo-19-surya-residency-jaipur-5103547_600_800_310_462.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RAJ-RERA) ने सूर्या रेजिडेंसी प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले शिकायतकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए डेवलपर रवि सूर्या अफोर्डेबल होम्स प्राइवेट लिमिटेड को जमा की गई राशि लौटाने का निर्देश दिया है। यह आदेश रेरा अथॉरिटी की अध्यक्ष वीणु गुप्ता ने 17 फरवरी 2025 को सुनाया।</p>
<p>शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने प्रति फ्लैट 12,92,000 रुपए की कुल बिक्री राशि में से <br />1,35,000 रुपए का भुगतान किया था। लेकिन डेवलपर ने न तो उन्हें फ्लैट का कब्जा दिया और न ही उनके साथ कोई बिक्री अनुबंध (Agreement to Sale) किया।<br />वहीं, डेवलपर रवि सूर्या अफोर्डेबल होम्स प्रा. लि. की ओर से पेश हुए वकील ने बचाव में कहाकि शिकायतकर्ता किसी भी तरह से आवंटी (Allottee) नहीं हैं क्योंकि उनके नाम कोई फ्लैट आवंटित नहीं किया गया है और न ही उनके साथ कोई बिक्री अनुबंध किया गया है। चूंकि उन्होंने कुल मूल्य का बहुत कम हिस्सा ही जमा किया था, इसलिए उन्हें कब्जा देने का सवाल ही नहीं उठता।</p>
<p>शिकायतकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है और डेवलपर ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए समय पर फ्लैट नहीं सौंपे। उन्होंने यह भी बताया कि डेवलपर ने न तो निर्माण कार्य पूरा किया और न ही ग्राहकों से संपर्क कर अगली किस्तों के भुगतान के लिए कोई नोटिस जारी किया। इस कारण निवेशकों का पैसा फंसा हुआ है और वे इसे ब्याज सहित वापस मांग रहे हैं।</p>
<p>RAJ-RERA की चेयरपर्सन वीनू गुप्ता ने सभी दलीलों को सुनने के बाद पाया कि प्रोजेक्ट सूर्या रेजिडेंसी को 30 नवंबर 2024 तक विस्तार मिल चुका है और इसमें शिकायतकर्ताओं द्वारा भुगतान की गई राशि को स्वीकार किया गया था। लेकिन, डेवलपर यह साबित करने में असफल रहा कि उसने निवेशकों से शेष राशि मांगने के लिए कोई आधिकारिक नोटिस भेजा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान </category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/order-to-return-the-deposit-amount-to-the-investors-of/article-1439</link>
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                <pubDate>Tue, 18 Feb 2025 17:11:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[pratyakshdarshi samachar desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> बीजेपी जयपुर जिलाध्यक्ष पद पर अमित गोयल की ताजपोशी :</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>जयपुर</strong>। जयपुर शहर में बीजेपी ने जिला अध्यक्ष पद पर अमित गोयल की नियुक्ति कर दी है। यह निर्णय सिर्फ एक राजनीतिक पद पर नियुक्ति भर नहीं, बल्कि संगठन की गहरी रणनीति का हिस्सा है।</p>
<p>जयपुर शहर में ब्राह्मण और वैश्य समुदाय बीजेपी के पारंपरिक वोटर माने जाते हैं। लोकसभा में ब्राह्मण सांसद (रामचरण बोहरा) होने के बाद संगठन पहले से ही संकेत दे चुका था कि शहर अध्यक्ष पद पर वैश्य समाज से किसी को बिठाया जाएगा। यह रणनीति केवल जातिगत गणित तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर गुटबाजी को भी साधने का प्रयास है।</p>
<p>इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/bjps-coronation-of-amit-goyal-on-the-post-of-bjp/article-1438"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-02/iyxtwxgb_400x400.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। जयपुर शहर में बीजेपी ने जिला अध्यक्ष पद पर अमित गोयल की नियुक्ति कर दी है। यह निर्णय सिर्फ एक राजनीतिक पद पर नियुक्ति भर नहीं, बल्कि संगठन की गहरी रणनीति का हिस्सा है।</p>
<p>जयपुर शहर में ब्राह्मण और वैश्य समुदाय बीजेपी के पारंपरिक वोटर माने जाते हैं। लोकसभा में ब्राह्मण सांसद (रामचरण बोहरा) होने के बाद संगठन पहले से ही संकेत दे चुका था कि शहर अध्यक्ष पद पर वैश्य समाज से किसी को बिठाया जाएगा। यह रणनीति केवल जातिगत गणित तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर गुटबाजी को भी साधने का प्रयास है।</p>
<p>इस पद के लिए कई मजबूत दावेदार थे, लेकिन गुटबाजी के चलते किसी एक नाम पर सहमति बनाना मुश्किल था। डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावट, जो मजबूत दावेदार थे, को कई विधायकों का विरोध झेलना पड़ा। वहीं, राजेश तांबी का भी अंदरूनी विरोध था। ऐसे में बीजेपी ने गुटनिरपेक्ष नेता को आगे बढ़ाकर यह संदेश देने की कोशिश की कि संगठन में सबकी सुनवाई होती है और विवादित नामों से बचकर सर्वसम्मति से फैसला किया गया।</p>
<p>अमित गोयल का प्रदेश प्रवक्ता होना और संगठन के विभिन्न पदों पर काम करने का अनुभव उनके पक्ष में गया। पार्टी ने एक संतुलित उम्मीदवार को चुना, जो किसी भी गुट से सीधे तौर पर नहीं जुड़ा है। इससे साफ है कि प्रदेश नेतृत्व ने स्थानीय स्तर की गुटबाजी को तवज्जो देने के बजाय, एक अपेक्षाकृत 'न्यूट्रल' चेहरे पर दांव खेला।<br />बाकी जिलों में क्या होगा?</p>
<p>बीजेपी अब भी 4 जिलाध्यक्षों की घोषणा नहीं कर पाई है। खासतौर पर दौसा में जिलाध्यक्ष का नाम तय नहीं हो सका, क्योंकि गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म और प्रदेश नेतृत्व के बीच समन्वय नहीं बन सका। इससे यह संकेत भी मिलता है कि संगठन में अब भी कुछ जगहों पर अंदरूनी खींचतान बनी हुई है।</p>
<p>अमित गोयल की नियुक्ति से पार्टी को क्या फायदा होगा, यह आगामी निकाय चुनावों में स्पष्ट होगा। लेकिन इतना तय है कि बीजेपी ने जयपुर शहर में जातिगत समीकरण और गुटबाजी के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान </category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/bjps-coronation-of-amit-goyal-on-the-post-of-bjp/article-1438</link>
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                <pubDate>Tue, 18 Feb 2025 17:03:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[pratyakshdarshi samachar desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>   डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने दिया बजट को अंतिम रुप</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  जयपुर,। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी 19 फरवरी (बुधवार) को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट पेश करेंगी। उप मुख्यमंत्री ने मंगलवार को राज्य के वर्ष 2025-26 के बजट को अंतिम रूप दिया। इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) अखिल अरोड़ा, प्रमुख शासन सचिव (बजट) देबाशीष पृष्टी, शासन सचिव (व्यय) नवीन जैन, शासन सचिव (राजस्व) कुमारपाल गौतम, निदेशक (बजट) बृजेश किशोर शर्मा उपस्थित रहे।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/deputy-cm-diya-kumari-finals-the-budget/article-1437"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-02/i6djpam_rajasthan-budget-2025-date_625x300_24_january_25.webp" alt=""></a><br /><p> जयपुर,। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी 19 फरवरी (बुधवार) को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट पेश करेंगी। उप मुख्यमंत्री ने मंगलवार को राज्य के वर्ष 2025-26 के बजट को अंतिम रूप दिया। इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) अखिल अरोड़ा, प्रमुख शासन सचिव (बजट) देबाशीष पृष्टी, शासन सचिव (व्यय) नवीन जैन, शासन सचिव (राजस्व) कुमारपाल गौतम, निदेशक (बजट) बृजेश किशोर शर्मा उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान </category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/deputy-cm-diya-kumari-finals-the-budget/article-1437</link>
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                <pubDate>Tue, 18 Feb 2025 16:59:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[pratyakshdarshi samachar desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>   रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध - सीएम भजनलाल शर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>दयपुर</strong>। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को पानी के क्षेत्र में पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए एक वर्ष के कार्यकाल में हमने प्रदेश में जल उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने के साथ अभूतपूर्व कार्य किए हैं।</p>
<p>शर्मा सोमवार रात्रि को उदयपुर स्थित एक निजी होटल में जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास में पानी एक मूलभूत आवश्यकता है। प्रदेश की 8 करोड़ जनता को पर्याप्त मात्रा में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/committed-to-make-form-self-sufficient-cm-bhajan-lal/article-1436"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-02/2025_2$largeimg18_feb_2025_101700630.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>दयपुर</strong>। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को पानी के क्षेत्र में पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए एक वर्ष के कार्यकाल में हमने प्रदेश में जल उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने के साथ अभूतपूर्व कार्य किए हैं।</p>
<p>शर्मा सोमवार रात्रि को उदयपुर स्थित एक निजी होटल में जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास में पानी एक मूलभूत आवश्यकता है। प्रदेश की 8 करोड़ जनता को पर्याप्त मात्रा में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने जल स्रोतों का विकास कर उनकी जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने सहित कई कदम उठाए हैैैं।</p>
<p>राम जलसेतु लिंक परियोजना पर तेजी से किया जा रहा काम</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 40 प्रतिशत आबादी की जल आवश्यकता की पूर्ति हेतु राम जलसेतु लिंक परियोजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। साथ ही, शेखावाटी क्षेत्र में यमुना जल लाने के लिए एमओयू किया गया है। उदयपुर में देवास योजना के माध्यम से जल उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। माही बांध से बांसवाड़ा-डूंगरपुर को पेयजल एवं सिंचाई के लिए योजना प्रारंभ की गई है।</p>
<p>शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्षाकाल में घग्गर नदी में पानी की अधिक आवक होने पर पानी बहकर नहीं जाए इसके लिए एक प्रभावी योजना बनाई जाए। उन्हांेने कहा कि नदी में जब भी पानी की अधिक आवक हो उसका उपयोग पेयजल और सिंचाई के लिए किया जाए। मुख्यमंत्री ने पंजाब सीमा क्षेत्र में इंदिरा गांधी नहर के पक्कीकरण के शेष कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने जंवाई डेम, माही डेम, देवास परियोजना, यमुना जल समझौते आदि के कार्यों की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश प्रदान किए। इस दौरान अधिकारियों ने नक्शे के माध्यम से मुख्यमंत्री को घग्गर नदी के प्रवाह मार्ग के बारे में विस्तृत जानकारी दी।</p>
<p>श्रीगंगानगर में किसानों का धरना और चक्का जाम समाप्त</p>
<p>बैठक में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना के प्रथम चरण के कास्तकारों द्वारा सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी सहित अन्य मांगों को लेकर श्रीगंगानगर जिले के घड़‌साना उपखण्ड कार्यालय के समक्ष संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से जारी धरना और टोल नाका 13 एमडी पर जारी चक्का जाम जिला प्रशासन और किसानों के बीच वार्ता में समझौता होने के बाद समाप्त हो गया है।</p>
<p>बैठक में बताया गया कि इस वर्ष हिमाचल प्रदेश में वर्षा की कमी के कारण पोंग बांध में जल संग्रहण कम होने तथा रणजीत सागर बांध में नगण्य आवक के कारण इंदिरा गांधी नहर परियोजना से पानी लेने वाले किसानों को गत वर्षों की भांति सिंचाई जल उपलब्ध कराया जाना संभव नहीं था। फिर भी राज्य सरकार के प्रयासों से राजस्थान के हिस्से के 20 मई तक निर्धारित पानी को जनवरी माह के अंत तक प्राप्त कर किसानों को सिंचाई हेतु उपलब्ध करवाया गया। जिला प्रशासन की ओर से संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया गया कि पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Feb 2025 16:57:16 +0530</pubDate>
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                <title> मुंबई के बाद जयपुर में दर्ज हुई रणवीर इलाहाबादिया,</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>जयपुर </strong>। ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ में अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर फंसे यूट्यूबर-पॉडकास्टर रणवीर इलाहाबादिया, समय रैना समेत अन्य लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अश्लील जोक्स मामले में रणवीर इलाहाबादिया, समय रैना, आशीष चंचलानी, अपूर्वा मखीजा समेत अन्य के खिलाफ जयपुर में भी केस दर्ज किया गया है।</p>
<p>जय राजपूताना संघ' की शिकायत पर जयपुर के साइबर पुलिस स्टेशन में रणवीर इलाहाबादिया, समय रैना, आशीष चंचलानी, अपूर्वा मखीजा और अन्य के खिलाफ बीएनएस एक्ट, आईटी एक्ट और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।</p>
<p>इस बीच, महाराष्ट्र साइबर सेल समय रैना को दो बार समन भेज</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/ranveer-allahabadia-recorded-in-jaipur-after-mumbai/article-1435"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-02/67b327d595136-indias-got-latent-row-maharashtra-govt-orders-inquiry-171259766-16x9.webp" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर </strong>। ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ में अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर फंसे यूट्यूबर-पॉडकास्टर रणवीर इलाहाबादिया, समय रैना समेत अन्य लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अश्लील जोक्स मामले में रणवीर इलाहाबादिया, समय रैना, आशीष चंचलानी, अपूर्वा मखीजा समेत अन्य के खिलाफ जयपुर में भी केस दर्ज किया गया है।</p>
<p>जय राजपूताना संघ' की शिकायत पर जयपुर के साइबर पुलिस स्टेशन में रणवीर इलाहाबादिया, समय रैना, आशीष चंचलानी, अपूर्वा मखीजा और अन्य के खिलाफ बीएनएस एक्ट, आईटी एक्ट और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।</p>
<p>इस बीच, महाराष्ट्र साइबर सेल समय रैना को दो बार समन भेज चुकी है। सेल ने समय रैना को 17 फरवरी को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था।</p>
<p>समय रैना के वकील ने साइबर सेल को बताया था कि समय रैना अमेरिका में हैं और वह 17 मार्च को देश लौटेंगे। वहीं, साइबर सेल ने समन भेजकर रैना को 17 फरवरी को पेश होने का निर्देश दिया था, जिसे बढ़ाकर सेल ने 18 फरवरी कर दिया गया है।</p>
<p>इससे पहले साइबर सेल पुलिस ने शो में शामिल 40 लोगों की पहचान करने का दावा किया था।</p>
<p>महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने सिद्धार्थ तेवतिया (बप्पा) को भी तलब किया और अपना बयान दर्ज कराने को कहा है। तेवतिया शो में बतौर जज शामिल थे।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि 11 फरवरी को सभी आरोपियों के खिलाफ बांद्रा मजिस्ट्रेट कोर्ट में केस दर्ज किया गया था। शिकायत बांद्रा स्थित सामाजिक कार्यकर्ता निखिल रूपारेल, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रतिनिधि (एनएसयूआई) मुंबई ने दर्ज करवाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Feb 2025 16:53:30 +0530</pubDate>
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