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                <title>राष्ट्रीय - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <description>राष्ट्रीय RSS Feed</description>
                
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                <title>“तमिलनाडु में बड़ा सियासी धमाका! NDA का मास्टर प्लान—क्या गिरेगा DMK का किला?”</title>
                                    <description><![CDATA[<p>तमिलनाडु।तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले सियासत में जबरदस्त हलचल मच गई है। चेन्नई से आई खबर ने पूरे चुनावी खेल को गरमा दिया है—NDA ने सीट शेयरिंग का फॉर्मूला फाइनल कर दिया है, और ये डील सीधी-सीधी DMK सरकार को चुनौती दे रही है। AIADMK चीफ एडप्पादी के. पलानीस्वामी और BJP के दिग्गज नेता पीयूष गोयल के बीच हुई इस डील ने साफ कर दिया है कि इस बार मुकाबला बेहद टक्कर का होने वाला है।</p>
<p>सीट बंटवारे पर नजर डालें तो तस्वीर और भी दिलचस्प हो जाती है। कुल 234 सीटों में से AIADMK को 178 सीटें</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/election-blast-in-tamil-nadu-ndas-master-stroke-178/article-1758"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-03/piyuse-goyal.jpg" alt=""></a><br /><p>तमिलनाडु।तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले सियासत में जबरदस्त हलचल मच गई है। चेन्नई से आई खबर ने पूरे चुनावी खेल को गरमा दिया है—NDA ने सीट शेयरिंग का फॉर्मूला फाइनल कर दिया है, और ये डील सीधी-सीधी DMK सरकार को चुनौती दे रही है। AIADMK चीफ एडप्पादी के. पलानीस्वामी और BJP के दिग्गज नेता पीयूष गोयल के बीच हुई इस डील ने साफ कर दिया है कि इस बार मुकाबला बेहद टक्कर का होने वाला है।</p>
<p>सीट बंटवारे पर नजर डालें तो तस्वीर और भी दिलचस्प हो जाती है। कुल 234 सीटों में से AIADMK को 178 सीटें देकर ‘लायन शेयर’ दे दिया गया है—यानी NDA में असली कमान AIADMK के हाथ में। वहीं BJP को 27 सीटें मिली हैं, जो 2021 के मुकाबले 7 सीट ज्यादा हैं—इशारा साफ है, BJP अब तमिलनाडु में अपनी जमीन तेजी से मजबूत करना चाहती है। इसके अलावा PMK को 18 और AMMK को 11 सीटें देकर गठबंधन को पूरी तरह संतुलित किया गया है।</p>
<p>अब नेताओं के बयान भी चुनावी तापमान बढ़ा रहे हैं। पीयूष गोयल ने साफ कहा—“हम एक परिवार हैं… और जनता अब स्टालिन सरकार से तंग आ चुकी है।” वहीं पलानीस्वामी ने तो सीधा दावा ठोक दिया—“ये जीत का गठबंधन है… 210+ सीटें जीतकर सरकार बनाएंगे!” यानी NDA पूरी आक्रामकता के साथ मैदान में उतर चुका है।</p>
<p>राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि यह सिर्फ सीट शेयरिंग नहीं… बल्कि एक ‘मास्टर स्ट्रोक’ है। AIADMK को आगे रखकर NDA ने लोकल कनेक्ट मजबूत किया है, वहीं BJP अपनी सीटें बढ़ाकर साफ संकेत दे रही है कि वो अब तमिलनाडु में सिर्फ सहयोगी नहीं, बल्कि बड़ी ताकत बनना चाहती है। 2021 में जहां BJP सीमित दायरे में थी, वहीं अब 27 सीटों के साथ पार्टी ज्यादा आक्रामक नजर आ रही है।</p>
<p>लेकिन असली लड़ाई अब शुरू होती है। DMK, जो पिछले चुनाव में मजबूत जीत के साथ सत्ता में आई थी, क्या इस बार NDA के इस बड़े दांव से दबाव में आएगी? NDA का दावा है कि “संस्कृति, पहचान और शासन” के मुद्दों पर जनता बदलाव चाहती है… लेकिन जमीन पर वोटर क्या सोचता है, ये अभी भी सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।</p>
<p>आने वाले कुछ दिनों में जब सभी 234 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम सामने आएंगे, तब असली तस्वीर और साफ होगी। लेकिन फिलहाल इतना तय है कि तमिलनाडु का चुनाव अब सीधा और हाई-वोल्टेज मुकाबला बन चुका है—जहां हर सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 19:07:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>“असम से बंगाल तक सियासी संग्राम! महागठबंधन vs हिमंत—क्या बदलेगा खेल?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>असम। असम विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। शिवसागर और गुवाहाटी से आई खबरों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई ने 6 प्रमुख विपक्षी दलों के महागठबंधन का ऐलान कर दिया है। यह गठबंधन सीधे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और भाजपा सरकार को चुनौती दे रहा है। गोगोई ने साफ शब्दों में कहा कि इस बार भाजपा के खिलाफ वोटों का बंटवारा नहीं होगा और एकजुट विपक्ष सरकार को सत्ता से बाहर कर देगा।</p>
<p>का बयान चुनावी माहौल को और गर्म कर चुका है। उन्होंने कहा कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/%E2%80%9Cpolitical-battle-from-assam-to-bengal-grand-alliance-vs-himanta/article-1753"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-03/gaurav-gangoi..jpg" alt=""></a><br /><p>असम। असम विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। शिवसागर और गुवाहाटी से आई खबरों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई ने 6 प्रमुख विपक्षी दलों के महागठबंधन का ऐलान कर दिया है। यह गठबंधन सीधे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और भाजपा सरकार को चुनौती दे रहा है। गोगोई ने साफ शब्दों में कहा कि इस बार भाजपा के खिलाफ वोटों का बंटवारा नहीं होगा और एकजुट विपक्ष सरकार को सत्ता से बाहर कर देगा।</p>
<p>का बयान चुनावी माहौल को और गर्म कर चुका है। उन्होंने कहा कि छह दलों के इस गठबंधन से विपक्षी वोट एकजुट होंगे और जनता तक एक मजबूत संदेश जाएगा। उनका दावा है कि अगर वोट बंटे नहीं, तो भाजपा को हराना संभव है। यह बयान सिर्फ राजनीतिक रणनीति नहीं, बल्कि सीधी चुनौती है—“हम मिलकर हिमंत बिस्वा सरमा को सत्ता से बाहर करेंगे।”</p>
<p>इस महागठबंधन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ असम जातीय परिषद (AJP), रायजोर दल, CPI(M), CPI(ML) और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस (APHLC) शामिल हैं। कांग्रेस ने 126 में से 100 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जबकि बाकी सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ी गई हैं। इससे साफ है कि विपक्ष हर सीट पर एक मजबूत उम्मीदवार उतारकर भाजपा को सीधी टक्कर देना चाहता है।</p>
<p>यह गठबंधन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले चुनावों में विपक्षी वोटों के बंटवारे ने भाजपा को सीधा फायदा पहुंचाया था। कई सीटों पर विपक्ष के अलग-अलग उम्मीदवारों ने एक-दूसरे का वोट काटा, जिससे भाजपा को जीत आसान हुई। लेकिन इस बार विपक्ष उसी गलती को सुधारने की कोशिश कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह एकता जमीन पर दिखती है, तो भाजपा के लिए यह चुनाव अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।</p>
<p>लेकिन इस चुनाव में सिर्फ गठबंधन ही नहीं, बल्कि एक और बड़ा मुद्दा उभरकर सामने आया है—ध्रुवीकरण। असम की राजनीति अब धीरे-धीरे “पहचान और वोट बैंक” की लड़ाई में बदलती नजर आ रही है। एक तरफ “Indigenous vs Infiltrator” यानी असमिया अस्मिता का मुद्दा है, तो दूसरी तरफ “Hindu consolidation vs Minority unity” की बहस तेज हो गई है।</p>
<p>यही पैटर्न पश्चिम बंगाल में भी देखने को मिल रहा है। वहां टीएमसी पर मुस्लिम वोट बैंक को साधने और तुष्टिकरण के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि भाजपा हिंदू वोटों को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही है। टीएमसी नेता हुमायूं कबीर के “मुस्लिम मुख्यमंत्री” वाले बयान ने इस बहस को और भड़का दिया है। भाजपा ने इसे सीधा ध्रुवीकरण बताकर हमला बोला है।</p>
<p>असम में भी बयानबाजी तेज हो चुकी है। गौरव गोगोई ने हिमंत सरकार पर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ सख्त कार्रवाई और माहौल खराब करने के आरोप लगाए हैं। वहीं मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पलटवार करते हुए उन्हें “पाकिस्तानी एजेंट” तक कह दिया। इस तरह के तीखे बयान इस चुनाव को और ज्यादा संवेदनशील बना रहे हैं।</p>
<p>भाजपा की रणनीति भी बिल्कुल साफ दिख रही है। पार्टी ने अपनी उम्मीदवारों की सूची में एक भी मुस्लिम चेहरा शामिल नहीं किया है और “घुसपैठ”, “बांग्लादेशी” और eviction drive जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठा रही है। भाजपा इसे असमिया पहचान और सुरक्षा का सवाल बता रही है। Delimitation के बाद सीटों के समीकरण में हुए बदलाव ने भी इस रणनीति को मजबूती दी है।</p>
<p>वहीं विपक्ष अपनी छवि को “सेकुलर” बनाए रखने की कोशिश में लगा है। कांग्रेस ने AIUDF जैसे मुस्लिम-केंद्रित दल से दूरी बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि यह गठबंधन किसी एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरे असम के लिए है। लेकिन असली सवाल यही है—क्या यह संदेश जमीन तक पहुंचेगा?</p>
<p>अब असम की राजनीति एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। एक तरफ मजबूत संगठन और नेतृत्व के साथ भाजपा है, जो लगातार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ एकजुट विपक्ष है, जो बदलाव का नारा लेकर मैदान में उतरा है। यह मुकाबला सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि दो अलग-अलग राजनीतिक सोच का बन चुका है।</p>
<p>9 अप्रैल को होने वाला मतदान अब तय करेगा कि असम की जनता किस दिशा में जाना चाहती है। क्या लोग बदलाव के पक्ष में वोट देंगे या फिर हिमंत बिस्वा सरमा को एक और मौका देंगे? क्या महागठबंधन सच में वोटों को जोड़ पाएगा या फिर जमीनी हकीकत कुछ और ही होगी?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:47:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>J&amp;K Encounter: गणतंत्र दिवस से पहले सुरक्षाबलों की बड़ी स्ट्राइक</title>
                                    <description><![CDATA[26 जनवरी से पहले दहलाने की थी साजिश, बंधक संकट को टालकर JKP के जांबाजों ने घर में घुसकर आतंकी को मारा; दिल्ली-NCR समेत पूरे देश में 'हाई अलर्ट']]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/jk-encounter-big-strike-by-security-forces-before-republic-day/article-1751"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-01/gemini_generated_image_79b4pz79b4pz79b4.png" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-01/gemini_generated_image_79b4pz79b4pz79b4.png" alt="before_republic_day_encounter_in_j&amp;k" width="1344" height="768"></img>
गणतंत्र दिवस के पहले जम्मू एवं कश्मीर में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता

<p> </p>
<p><strong>जम्मू/कठुआ: गणतंत्र दिवस (Republic Day 2026) </strong>समारोह से ठीक दो दिन पहले भारतीय सुरक्षाबलों ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) को करारा झटका दिया है। शुक्रवार रात और शनिवार की सुबह तक चले एक सटीक 'क्लिनिकल ऑपरेशन' में सेना, सीआरपीएफ (CRPF) और जम्मू-कश्मीर पुलिस (JKP) की संयुक्त टीम ने जैश के खूंखार कमांडर उस्मान (Usman alias Abu Maviya) को मार गिराया।<br /><br /><strong>बंधक संकट और जांबाजी की कहानी</strong><br />मुठभेड़ की शुरुआत कठुआ के बिलावर (Billawar) तहसील के परहेतर (Parhetar) गांव में हुई। पुलिस को सूचना मिली थी कि एक विदेशी आतंकी भोजन की तलाश में गांव के एक घर में छिपा है और उसने वहां मौजूद नागरिकों को बंधक (Hostage) बना लिया है।<br /><br /><strong>रेस्क्यू ऑपरेशन: </strong>जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक छोटी टुकड़ी ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए पहले नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला।</p>
<p><strong>अचूक वार: </strong>इसके बाद पुलिस के जवानों ने सीधे घर के अंदर धावा बोलकर आतंकी से उसकी राइफल छीनी और उसे मार गिराया।</p>
<p><strong>रिकवरी:</strong> मारे गए आतंकी के पास से अमेरिका निर्मित M4 कार्बाइन (US-made M4 Rifle) और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद हुआ है।</p>
<p><strong>कौन था मारा गया आतंकी उस्मान?</strong><br />मारे गए आतंकी की पहचान पाकिस्तानी मूल के उस्मान के रूप में हुई है। वह 2024 से कठुआ-उधमपुर बेल्ट में सक्रिय था और सुरक्षाबलों पर हुए 6 बड़े आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड था। वह हाल ही में बसंतगढ़ में हुई मुठभेड़ के दौरान अपने समूह से अलग हो गया था और अकेले ही हमले की फिराक में था।<br /><br /><strong>'ऑपरेशन 26-26' और देशभर में हाई अलर्ट</strong><br />इंटेलिजेंस इनपुट्स के अनुसार, पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों ने गणतंत्र दिवस पर बड़े हमलों की साजिश रची है, जिसे कोडनेम "26-26" दिया गया था।</p>
<p><strong>दिल्ली-NCR: </strong>लाल किले और कर्तव्य पथ के आसपास सुरक्षा का 'सेवेन लेयर' घेरा बनाया गया है।<br />अयोध्या: राम मंदिर की सुरक्षा भी बढ़ाई गई है क्योंकि इसे भी संभावित टारगेट बताया गया था।<br />सर्च ऑपरेशन: पंजाब और जम्मू की सीमाओं पर पुलिस और सेना 'एंटी-टेरर' सर्च ऑपरेशन चला रही है ताकि किसी भी घुसपैठ को नाकाम किया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 19:24:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Defense Expo 2026: भारत बना हथियारों का बड़ा निर्यातक</title>
                                    <description><![CDATA[पूरी दुनिया में गूंजी 'मेक इन इंडिया' की धमक; 80 से ज्यादा देशों को हथियार बेच रहा है भारत, डिफेंस एक्सपो में दिखी स्वदेशी 'किलर ड्रोन' की ताकत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/defense-expo-2026-india-becomes-big-exporter-of-arms/article-1750"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-01/brahmhos_aur_tejas_ka_hoga_niryat.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-01/brahmhos_aur_tejas_ka_hoga_niryat.jpg" alt="brahmhos_aur_tejas_ka_hoga_niryat" width="1200" height="675"></img>
Defence Expo: 2026 भारत बना हथियारों का बड़ा निर्यातक

<p> </p>
<p><strong>नई दिल्ली/गांधीनगर:</strong> भारत के रक्षा मंत्रालय ने आज वित्तीय वर्ष 2025-26 के रक्षा निर्यात के आंकड़े जारी किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत भारत का रक्षा निर्यात अब ₹35,000 करोड़ के पार निकल गया है। यह 10 साल पहले के आंकड़ों की तुलना में लगभग 20 गुना ज्यादा है। भारत अब केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि दुनिया को 'अचूक' हथियार बेचने वाला देश बन गया है।<br /><br /><strong>दुनिया भर में 'ब्रह्मोस' और 'तेजस' का बोलबाला</strong><br />रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल की सफल डिलीवरी के बाद वियतनाम और कई खाड़ी देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई है। वहीं, स्वदेशी लड़ाकू विमान LCA तेजस और हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (LCH) प्रचंड के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीकी देशों से बड़े ऑर्डर मिलने की संभावना है।<br /><br /><strong>डिफेंस एक्सपो 2026: स्वदेशी 'किलर ड्रोन' ने खींचा ध्यान</strong><br />गुजरात में आयोजित हो रहे 'डिफेंस एक्सपो' में भारतीय स्टार्टअप्स ने अपनी तकनीक का लोहा मनवाया है।<br /><br /><strong>आत्मघाती ड्रोन (Kamikaze Drones): </strong>भारतीय कंपनियों ने ऐसे ड्रोन प्रदर्शित किए हैं जो दुश्मन के रडार की पकड़ में आए बिना हमला करने में सक्षम हैं।</p>
<p><strong>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI):</strong> इस बार एक्सपो की थीम 'AI इन डिफेंस' है, जिसमें रोबोटिक सोल्जर्स और स्वायत्त टैंकों का प्रदर्शन किया जा रहा है।</p>
<p><strong>वैश्विक समीकरणों में भारत का बढ़ता कद</strong><br />रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का लक्ष्य 2029 तक रक्षा निर्यात को ₹50,000 करोड़ तक ले जाना है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की हालिया रिपोर्ट भी तस्दीक करती है कि भारत अब दुनिया के टॉप 25 हथियार निर्यातक देशों की सूची में मजबूती से अपनी जगह बना चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 17:59:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Health Alert: देश के 50 शहरों में 'रेड जोन' में पहुंचा प्रदूषण</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत के कई शहरों में सांस लेना हुआ दूषित; स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह- बुजुर्ग और बच्चे घर से बाहर निकलने में बरतें सावधानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/health-alert-pollution-reaches-red-zone-in-50-cities-of/article-1749"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-01/most_polluted_cities_in_india.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-01/most_polluted_cities_in_india.jpg" alt="most_polluted_cities_in_india" width="800" height="435"></img>
देश के 50 शहरों में प्रदूषण रेड जोन तक

<p> </p>
<div><strong>नई दिल्ली:</strong> जनवरी के आखिरी हफ्ते में कड़ाके की ठंड के साथ-साथ प्रदूषण ने भी विकराल रूप धारण कर लिया है। आज जारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली, नोएडा, कानपुर, लखनऊ और पटना समेत 50 बड़े शहरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में दर्ज किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि कम हवा की गति और नमी के कारण प्रदूषक कण (PM 2.5) सतह के करीब जमा हो गए हैं।<br /><br /><strong>केंद्र सरकार की नई 'क्लीन एयर' नीति 2026</strong><br />बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए केंद्र सरकार ने आज 'नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) 2.0' की गाइडलाइंस जारी की हैं। इसके तहत:<br /><br /><strong>GRAP-4 लागू: </strong>दिल्ली-NCR में निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।<br />इलेक्ट्रिक मोबिलिटी: शहरों में सार्वजनिक परिवहन के लिए केवल ई-बसों और सीएनजी वाहनों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है।</div>
<div> </div>
<div><strong>ग्रीन बेल्ट:</strong> नगर निगमों को शहरी क्षेत्रों में 'मियांवाकी' तकनीक से छोटे जंगल विकसित करने के लिए विशेष बजट आवंटित किया गया है।</div>
<div><br /><strong>डॉक्टरों की चेतावनी: बढ़ रहे हैं अस्थमा और हार्ट अटैक के मामले</strong><br />एम्स (AIIMS) दिल्ली के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खराब हवा के कारण अस्पतालों में सांस के मरीजों की संख्या में 30% की वृद्धि हुई है।<br /><br /><strong>मास्क का उपयोग:</strong> डॉक्टरों ने घर से बाहर निकलने पर N-95 मास्क पहनने की सलाह दी है।<br />डाइट टिप्स: प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए विटामिन-C युक्त फल और गुड़ का सेवन करने का सुझाव दिया गया है।</div>
<div> </div>
<div><strong>सुप्रीम कोर्ट सख्त: "सिर्फ कागजों पर न रहे एक्शन"</strong><br />प्रदूषण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने राज्यों को फटकार लगाते हुए कहा कि पराली जलाने और औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण के लिए जमीनी स्तर पर काम होना चाहिए, न कि केवल बैठकों में।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/health-alert-pollution-reaches-red-zone-in-50-cities-of/article-1749</link>
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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 17:38:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Budget 2026: बजट से पहले आम आदमी को राहत</title>
                                    <description><![CDATA[वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी मोदी सरकार 3.0 का तीसरा पूर्ण बजट; 'मिडिल क्लास' की उम्मीदों और '8% GDP ग्रोथ' के लक्ष्य पर टिकी दुनिया की नजर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/relief-to-the-common-man-before-budget-2026/article-1748"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-01/union-budget-2026-benefits.webp" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-01/union-budget-2026-benefits.webp" alt="union-budget-2026-benefits" width="1920" height="1200"></img>
नये बजट के पहले आम आदमी को राहत

<p> </p>
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत की खुदरा महंगाई दर (CPI) जनवरी 2026 में घटकर 3.9% पर आ गई है। यह पिछले 20 महीनों का सबसे निचला स्तर है। खाद्य वस्तुओं, विशेषकर खाद्य तेलों और दालों की कीमतों में स्थिरता ने सरकार और आम जनता दोनों को बड़ी राहत दी है।<br /><br /><strong>बजट 2026: क्या है पिटारे में?</strong><br />आगामी बजट सत्र को लेकर वित्त मंत्रालय में हलचल तेज है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार के बजट में 'विकसित भारत' के विजन को ध्यान में रखते हुए तीन मुख्य क्षेत्रों पर जोर दिया जाएगा:<br /><br /><strong>इनकम टैक्स में छूट: </strong>मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देते हुए 'Standard Deduction' की सीमा को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 किए जाने की संभावना है।<br />इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च: पीएम गति शक्ति योजना के तहत रेलवे और हाईवे के लिए फंड में 15-20% की बढ़ोतरी हो सकती है।</p>
<p><strong>एग्रीकल्चर स्टार्टअप्स:</strong> ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए खेती में AI और ड्रोन तकनीक के उपयोग के लिए विशेष पैकेज की घोषणा संभव है।</p>
<p><strong>GDP ग्रोथ: भारत बना 'ग्लोबल ग्रोथ इंजन'</strong><br />विश्व बैंक और IMF की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत साल 2026 में 8% की GDP विकास दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। विनिर्माण (Manufacturing) और सेवा क्षेत्र (Services) में आए उछाल ने भारत को '5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी' के लक्ष्य के और करीब पहुंचा दिया है।<br /><br /><strong>शेयर बाजार में उत्साह</strong><br />बजट और महंगाई के सकारात्मक आंकड़ों का असर दलाल स्ट्रीट पर भी दिख रहा है। सेंसेक्स (Sensex) ने आज 82,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया है, जबकि निफ्टी (Nifty) 25,000 के ऊपर कारोबार कर रहा है। विदेशी निवेशकों (FIIs) का भारतीय बाजार में भरोसा फिर से लौटा है।    </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 17:20:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Gaganyaan-1 Launch: अंतरिक्ष में भारत की ऐतिहासिक छलांग</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीहरिकोटा से लॉन्च होगा 'व्योममित्र' रोबोट; गगनयान मिशन के जरिए भारत बनेगा अंतरिक्ष में इंसान भेजने वाला चौथा देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/gaganyaan-1-launch-indias-historic-leap-into-space/article-1747"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-01/gaganyaan_indias_top_space_mission.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-01/gaganyaan_indias_top_space_mission.jpg" alt="gaganyaan_indias_top_space_mission" width="1200" height="900"></img>
गगनयान के जरिये भारत बनेगा विश्व का चौथा देश

<p> </p>
<p><strong>बेंगलुरु/श्रीहरिकोटा: </strong>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज घोषणा की है कि भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' के पहले चरण (Gaganyaan-1) की लॉन्चिंग प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसरो चीफ एस. सोमनाथ ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि फरवरी 2026 के पहले सप्ताह में यह मानवरहित मिशन अंतरिक्ष के लिए रवाना होगा।<br /><br /><strong>'व्योममित्र' बनेगी भारत की पहली अंतरिक्ष यात्री</strong><br />इस मिशन की सबसे खास बात इसमें जाने वाली 'व्योममित्र' (Vyommitra) है। यह एक महिला रोबोट (Humanoid) है, जिसे इसरो ने विशेष रूप से विकसित किया है।<br /><br /><strong>काम क्या होगा?</strong> यह रोबोट अंतरिक्ष यान के अंदर ठीक वैसे ही काम करेगा जैसे एक इंसान करता है। यह लाइफ सपोर्ट सिस्टम, पैनल ऑपरेशन्स और अंतरिक्ष के वातावरण का डेटा इकट्ठा करेगी।<br />सुरक्षा जांच: इस मिशन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि क्या हमारा 'क्रू मॉड्यूल' इंसानों के रहने के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।</p>
<p><br /><strong>भारत रचेगा इतिहास: दुनिया की नजरें टिकीं</strong><br />अगर गगनयान के सभी चरण (G1, G2 और अंत में मानव मिशन) सफल रहते हैं, तो भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद अंतरिक्ष में इंसान भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।<br /><br /><strong>LVM3 रॉकेट का उपयोग: </strong>इस मिशन के लिए भारत के सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3 (Launch Vehicle Mark 3) का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे 'बाहुबली' रॉकेट भी कहा जाता है।<br />लैंडिंग: अंतरिक्ष में चक्कर लगाने के बाद यह मॉड्यूल बंगाल की खाड़ी में लैंड करेगा, जहां भारतीय नौसेना इसे रिकवर करेगी।</p>
<p><strong>पीएम मोदी का 'स्पेस विजन 2040'</strong><br />प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि "गगनयान सिर्फ एक मिशन नहीं है, यह 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं की उड़ान है।" भारत का लक्ष्य 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाना और 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय को उतारना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/gaganyaan-1-launch-indias-historic-leap-into-space/article-1747</link>
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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 16:58:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Republic Day 2026: कर्तव्य पथ पर दिखेगी 'वंदे मातरम' की 150 साल की यात्रा; पहली बार यूरोपीय संघ के प्रमुख होंगे मुख्य अतिथि</title>
                                    <description><![CDATA[भारत अपने 77वें गणतंत्र दिवस के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। इस साल का समारोह न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन होगा, बल्कि यह राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न भी मनाएगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस बार कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड की थीम सांस्कृतिक पुनरुत्थान और 'आत्मनिर्भर भारत' पर केंद्रित होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/republic-day-2026/article-1746"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-01/9d0mpmtg_republic-day-2024_625x3.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-01/9d0mpmtg_republic-day-2024_625x3.jpg" alt="9d0mpmtg_republic-day-2024_625x3" width="545" height="307"></img>
इस बार गणतंत्र दिवस पर दिखेंगे बेहद खास झलकियां

<p> </p>
<p><strong>नई दिल्ली: </strong>भारत अपने 77वें गणतंत्र दिवस के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। इस साल का समारोह न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन होगा, बल्कि यह राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न भी मनाएगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस बार कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड की थीम सांस्कृतिक पुनरुत्थान और 'आत्मनिर्भर भारत' पर केंद्रित होगी।</p>
<p><strong>मुख्य अतिथि: भारत-EU संबंधों का नया अध्याय</strong><br />इस साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह पहली बार है जब यूरोपीय संघ (EU) के दो शीर्ष नेता एक साथ परेड की शोभा बढ़ाएंगे। परेड के अगले दिन यानी 27 जनवरी को 16वां भारत-EU शिखर सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा।<br /><br /> <br /><strong>परेड की खास बातें: क्या होगा नया?</strong><br />वंदे मातरम थीम: परेड के दौरान 1923 में बनाए गए वंदे मातरम के दुर्लभ चित्रों और दृश्यों को प्रदर्शित किया जाएगा।<br /><br /> <br /><strong>सैन्य शक्ति: </strong>पहली बार भारतीय सेना 'फेज्ड बैटल एरे फॉर्मेशन' (Phased Battle Array Formation) का प्रदर्शन करेगी, जिसमें मैकेनाइज्ड और कैवलरी कॉलम शामिल होंगे।<br /><br /> <br /><strong>झांकियां:</strong> कुल 30 झांकियां निकलेंगी, जिनमें 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की और 13 मंत्रालयों की होंगी।<br /><br /> <br /><strong>विशेष अतिथि:</strong> समाज के विभिन्न वर्गों के 10,000 'विशिष्ट मेहमान' (इनोवेटर्स, किसान और वैज्ञानिक) इस बार वीआईपी गैलरी में बैठेंगे।<br /><br /> <br /><strong>सुरक्षा का कड़ा पहरा: चप्पे-चप्पे पर नजर</strong><br />गणतंत्र दिवस को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने सुरक्षा का घेरा सख्त कर दिया है।<br /><br /><strong>फेशियल रिकग्निशन:</strong> सुरक्षा के लिए आधुनिक फेशियल रिकग्निशन कैमरों और एंटी-ड्रोन यूनिट्स को तैनात किया गया है।<br />फुल ड्रेस रिहर्सल: आज (24 जनवरी) दिल्ली के कर्तव्य पथ और लखनऊ के विधानसभा मार्ग पर भव्य फुल ड्रेस रिहर्सल की गई, जिसमें मार्चिंग टुकड़ियों ने अपनी तैयारी को अंतिम रूप दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/republic-day-2026/article-1746</link>
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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 16:45:06 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव पर नया कानून लागू</title>
                                    <description><![CDATA[अब SC-ST के साथ OBC को भी मिला सुरक्षा कवच, देशभर के विश्वविद्यालयों में 'समानता समिति' का गठन अनिवार्य; सवर्ण संगठनों ने जताया दुरुपयोग का डर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/new-law-on-caste-discrimination-implemented-in-higher-educational-institutions/article-1742"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-01/ugc-controversy_for_new_rule.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-01/ugc-controversy_for_new_rule.jpg" alt="UGC-controversy_for_new_rule" width="440" height="248"></img>
यूजीसी के नये नियमों ने शिक्षण संस्थानों के साथ राजनीतिक गलियारे में माहौल गरमा दिया है।

<p> </p>
<p>विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 15 जनवरी 2026 से लागू किए गए 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026' ने देश की राजनीति और शैक्षणिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। उत्तर प्रदेश में इस कानून को लेकर विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। गाजियाबाद के डासना देवी पीठ के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि को पुलिस ने उस समय नजरबंद कर दिया, जब वे इस एक्ट के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन करने जा रहे थे। उन्होंने योगी सरकार पर सवर्ण समाज की आवाज दबाने का आरोप लगाया है।<br /><br /><strong>क्या है UGC का नया 'समानता नियम 2026'?</strong><br />यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को जड़ से खत्म करने के लिए यह कड़ा कदम उठाया है। इस कानून की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी जातिगत भेदभाव की परिभाषा में कानूनी तौर पर शामिल किया गया है।<br /><br /><strong>नए नियमों की मुख्य बातें:</strong><br />शिकायत का अधिकार: अब OBC छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भी भेदभाव की स्थिति में सक्षम प्राधिकारी के पास शिकायत दर्ज करा सकेंगे।</p>
<p><strong>समान अवसर प्रकोष्ठ: </strong>हर संस्थान में SC, ST और OBC के लिए अलग से 'इक्वल अपॉर्चुनिटी सेल' बनाना अनिवार्य होगा।<br />समानता समिति: यूनिवर्सिटी स्तर पर एक समिति बनेगी जिसमें OBC, महिला, SC-ST और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधि शामिल होंगे।</p>
<p><strong>छमाही रिपोर्ट:</strong> हर 6 महीने में संस्थानों को अपनी रिपोर्ट यूजीसी को भेजनी होगी।</p>
<p><br /><strong>क्यों हो रहा है विरोध?</strong> 'S-4' का गठन और दुरुपयोग की आशंका<br />जहाँ एक तरफ इसे सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं सवर्ण समाज के संगठनों ने इसे लेकर मोर्चा खोल दिया है। जयपुर में करणी सेना, ब्राह्मण महासभा और वैश्य संगठनों ने मिलकर 'सवर्ण समाज समन्वय समिति (S-4)' बनाई है।<br /><br /><strong>विरोधियों का तर्क है:</strong><br />इस कानून का राजनीतिक दुरुपयोग हो सकता है।<br />अगड़ी जातियों के छात्रों और फैकल्टी को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है।<br />सोशल मीडिया पर स्वामी आनंद स्वरूप जैसे प्रभावशाली लोग इसे सवर्णों के खिलाफ एक साजिश करार दे रहे हैं।</p>
<p>आंकड़े दे रहे हैं गवाही: क्यों पड़ी इस कानून की जरूरत?<br />विरोध के बीच यूजीसी के आंकड़े इस कानून की आवश्यकता को सही ठहराते हैं। सुप्रीम कोर्ट और संसदीय समिति को दी</p>
<p><strong> गई रिपोर्ट के अनुसार:</strong><br />पिछले 5 वर्षों में जातिगत भेदभाव की शिकायतों में 118.4% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।<br />वर्ष 2019-20 में जहां 173 शिकायतें थीं, वहीं 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 378 हो गई।<br />हैरानी की बात यह है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी उच्च शिक्षा में वंचित वर्गों की भागीदारी 15% से अधिक नहीं हो सकी है।</p>
<p><br /><strong>यूपी चुनाव 2027 और राजनीतिक मायने</strong><br />उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस कानून का आना राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। सवर्णों की नाराजगी और पिछड़ों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 14:56:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
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                <title>गणतंत्र दिवस 2026: कर्तव्य पथ पर दिखेगी सेना की 'शक्तिशाली' विरासत</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय सेना का 'एनिमल स्क्वाड' रचेगा इतिहास; आर्मी डॉग्स, बैक्ट्रियन ऊंट और शिकारी पक्षियों के साथ सैन्य शौर्य का अद्भुत संगम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/republic-day-2026-armys-powerful-legacy-will-be-visible-on/article-1732"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/republic_day_2026_security_tight.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/republic_day_2026_security_tight.jpg" alt="republic_day_2026_security_tight" width="400" height="225"></img>
इस गणतंत्र दिवस पर दिखेगा शौर्य शक्ति के साथ पशुबल भी

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<p>नई दिल्ली | साल 2026 के स्वागत के साथ ही देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय पर्व 'गणतंत्र दिवस' की तैयारियां परवान चढ़ने लगी हैं। इस बार 26 जनवरी की परेड में भारतीय सेना का एक ऐसा रूप नजर आएगा जो न केवल दुर्लभ है, बल्कि भारत की रणनीतिक विविधता का प्रतीक भी है। इस साल कर्तव्य पथ पर सेना के अत्याधुनिक हथियारों के साथ-साथ एक विशेष 'पशु दल' (Animal Contingent) कदमताल करता नजर आएगा।</p>
<p><strong>इतिहास में पहली बार: शिकारी पक्षी और जांस्करी टट्टू का जलवा</strong></p>
<p>भारतीय सेना इस साल अपने पशुबल की अद्वितीय क्षमता का प्रदर्शन करने जा रही है। परेड के मुख्य आकर्षणों में शामिल होंगे:दो कूबड़ वाले (बैक्ट्रियन) ऊंट: जो लद्दाख जैसे ऊंचे और बर्फीले इलाकों में सेना की रसद का सहारा बनते हैं।</p>
<p>चार जांस्कर टट्टू: दुर्गम पहाड़ी रास्तों के ये 'मौन योद्धा' पहली बार राष्ट्रीय गौरव का हिस्सा बनेंगे। शिकारी पक्षी (बर्ड्स ऑफ प्रे): सर्विलांस और ड्रोन-विरोधी ऑपरेशंस में सेना की आंख बनने वाले चार शिकारी पक्षियों को भी परेड में शामिल किया गया है। शिकारी पक्षी (बर्ड्स ऑफ प्रे): सर्विलांस और ड्रोन-विरोधी ऑपरेशंस में सेना की आंख बनने वाले चार शिकारी पक्षियों को भी परेड में शामिल किया गया है।</p>
<p><strong>सेना के 'बेस्ट फ्रेंड्स' भी दिखाएंगे दम</strong><br />इस गणतंत्र दिवस पर 10 भारतीय नस्ल के आर्मी डॉग्स और 6 पारंपरिक सैन्य कुत्तों का दस्ता कर्तव्य पथ की शोभा बढ़ाएगा। यह पहली बार होगा जब सैन्य कुत्ते औपचारिक रूप से परेड के मुख्य आकर्षण के रूप में नजर आएंगे। हाल ही में सेना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें ये पशुबल कर्तव्य पथ पर कड़ा अभ्यास करते दिख रहे हैं।</p>
<p><strong>स्वदेशी क्षमता और बलिदान का प्रतीक</strong><br />सेना के इस कदम के पीछे का उद्देश्य भारत की उस स्वदेशी ताकत को दुनिया के सामने लाना है, जो आधुनिक तकनीक के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सीमाओं की रक्षा करती है। चाहे वो बर्फीले रेगिस्तान हों या ऊंचे पहाड़, ये जीव भारतीय सैनिकों के साथ हर मुश्किल परिस्थिति में 'साइलेंट वारियर्स' की तरह खड़े रहते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 18:21:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
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                <title>अरावली संकट: सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही फैंसले पर लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[पर्यावरण संरक्षण बनाम खनन हितों का टकराव: सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने 5 सवाल फ्रेम किए, हाई-पावर्ड कमेटी गठन का प्रस्ताव; जयराम रमेश समेत विपक्ष ने जताई चिंता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/aravali-crisis-supreme-court-put-a-stay-on-its-own/article-1721"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/aravali-conflict-supreme-court-hearing.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/aravali-conflict-supreme-court-hearing.jpg" alt="aravali-conflict-supreme-court-hearing" width="1280" height="720"></img>
अरावली विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई

<p> </p>
<p><strong>अरावली संकट</strong>: सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही फैंसले पर लगाई रोक, 21 जनवरी 2026 को नई सुनवाई; संरक्षण की राह में नया मोड़<br />पर्यावरण संरक्षण बनाम खनन हितों का टकराव: सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने 5 सवाल फ्रेम किए, हाई-पावर्ड कमेटी गठन का प्रस्ताव; जयराम रमेश समेत विपक्ष ने जताई चिंता<br /><br /><strong>नई दिल्ली</strong>: दुनिया की प्राचीनतम पर्वत श्रृंखलाओं में शुमार अरावली की रक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ऐतिहासिक कदम उठाया। शीर्ष अदालत ने 20 नवंबर 2025 के अपने ही फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी, जिसमें अरावली हिल्स रेंज की वैज्ञानिक परिभाषा को मंजूरी दी गई थी। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस विवादास्पद मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया और पांच महत्वपूर्ण सवाल फ्रेम करते हुए मामले को 21 जनवरी 2026 के लिए स्थगित कर दिया। यह फैसला न केवल अरावली के पारिस्थितिक संतुलन को बचाने की दिशा में राहत है, बल्कि खनन लॉबी के दबाव के बीच न्यायपालिका की संवेदनशीलता को भी रेखांकित करता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैली इस हरी पट्टी को अवैध खनन से बचाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।<br /><br /><strong>लंबे समय से उलझा विवाद: टीएन गोदावर्मन मामले से जुड़ा अरावली संरक्षण</strong><br />अरावली विवाद की जड़ें 1995 के टीएन गोदावर्मन थिरुमुलपद मामले में हैं, जो वनों और पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित है। 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&amp;CC) की समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए अरावली की परिभाषा तय की थी। समिति के अनुसार, जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली कोई भी भू-आकृति (लैंडफॉर्म) को अरावली पहाड़ी माना जाएगा। वहीं, 500 मीटर के दायरे में दो या अधिक ऐसी पहाड़ियों को जोड़कर अरावली रेंज का दर्जा दिया जाएगा। इसमें पहाड़ियों की सहायक ढलानें, आसपास की भूमि और दो पहाड़ियों के बीच का क्षेत्र भी शामिल होगा, भले ही ढलान का एंगल कम हो।<br /><br />फैसले में कोर और अछूते (इनवायोलेट) क्षेत्रों में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन सतत खनन (सस्टेनेबल माइनिंग) के कुछ अपवादों को मंजूरी दी गई। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रतिबंधित और सीमित खनन वाले इलाकों की पहचान करें। हालांकि, इस परिभाषा पर खनन हितों ने सवाल उठाए, दावा किया कि इससे गैर-अरावली क्षेत्र बढ़ जाएंगे, जिससे नियंत्रित खनन आसान हो जाएगा।<br /><br /><strong>सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: 5 सवालों से खुला पिटारा, हाई-पावर्ड कमेटी का प्रस्ताव</strong><br />सोमवार की सुनवाई में सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने मामले को गहराई से जांचा। पीठ ने 29 पन्नों का विस्तृत आदेश जारी करते हुए पांच सवाल फ्रेम किए, जो अरावली संरक्षण की चुनौतियों को उजागर करते हैं:<br /><br /><strong>परिभाषा की सीमा पर सवाल</strong>: क्या अरावली को केवल 500 मीटर के दायरे तक सीमित करना संरचनात्मक विरोधाभास पैदा करता है, जिससे संरक्षण का दायरा संकुचित हो जाता है?<br />गैर-अरावली क्षेत्रों का विस्तार: क्या इससे गैर-अरावली इलाकों का दायरा बढ़ गया है, जहां नियंत्रित खनन की अनुमति आसानी से मिल सकती है?<br />अंतराल क्षेत्रों पर स्पष्टता: यदि दो अरावली क्षेत्र 100 मीटर या अधिक ऊंचाई के हों और उनके बीच 700 मीटर का गैप हो, तो क्या उस गैप में नियंत्रित खनन की अनुमति दी जानी चाहिए?<br />पारिस्थितिक निरंतरता की रक्षा: पर्यावरणीय निरंतरता (इकोलॉजिकल कंटिन्यूटी) को कैसे सुरक्षित रखा जाए?<br />नियमों में खालीपन: यदि नियमों में कोई बड़ा कानूनी या नियामक खालीपन सामने आता है, तो क्या अरावली पर्वतमाला की संरचनात्मक मजबूती के लिए विस्तृत आकलन जरूरी होगा?<br />सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, "रिपोर्ट या निर्देश लागू करने से पहले निष्पक्ष और स्वतंत्र विशेषज्ञों की राय लेनी चाहिए। यह तय करना जरूरी है कि क्या परिभाषा से गैर-अरावली इलाकों का दायरा उल्टा बढ़ गया है, जिससे बिना रोक-टोक के माइनिंग जारी रहे।" अदालत ने पूर्व रिपोर्ट की दोबारा समीक्षा के लिए हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी गठन का प्रस्ताव रखा। केंद्र सरकार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात सहित संबंधित राज्यों और एमिकस क्यूरी को नोटिस जारी किए गए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अटॉर्नी जनरल को सहायता के लिए कहा गया।<br /><br /><strong>विपक्ष और कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया: जयराम रमेश का पत्र, हितेंद्र गांधी की अपील</strong><br />इस फैसले का स्वागत करते हुए पूर्व पर्यावरण मंत्री और कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रविवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर नई परिभाषा पर चिंता जताई। उन्होंने 'एक्स' पर कहा, "अरावली की विनाशकारी नई परिभाषा पर चार सवाल उठाए हैं—यह 100 मीटर ऊंचाई तक सीमित होकर संरक्षण को कमजोर करती है।" पर्यावरण कार्यकर्ता हितेंद्र गांधी ने सीजेआई को पत्र लिखा (राष्ट्रपति को कॉपी भेजी), जिसमें 100 मीटर नियम की समीक्षा की मांग की। उनका तर्क है कि ऊंचाई-आधारित नियम कई पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों को बाहर कर सकता है।<br /><br />राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रतिक्रिया में कहा, "जो गाड़ी पटरी से उतर गई थी, वो अब लाइन पर आएगी। इस मुहिम में जुड़े सभी को बधाई।" MoEF&amp;CC ने भी नई खनन लीज पर पूर्ण रोक लगाई है और इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन को प्रतिबंधित जोन की पहचान का निर्देश दिया।<br /><br />अरावली, जो दिल्ली की हवा साफ करने से लेकर जल संरक्षण तक की कुंजी है, अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है। विशेषज्ञ चेताते हैं कि बिना मजबूत संरक्षण के, यह श्रृंखला जलवायु परिवर्तन का शिकार हो सकती है। अगली सुनवाई तक सभी पक्षों की नजरें शीर्ष अदालत पर हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 15:10:22 +0530</pubDate>
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                <title>भारतीय सेना के सोशल मीडिया नियमों में बड़ा बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[जानें नई गाइडलाइंस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/big-change-in-social-media-rules-of-indian-army/article-1714"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/no-post-no-comment-on-social-media.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>नई दिल्ली</strong>: भारतीय सेना ने अपने जवानों और अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर नई और सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं। सुरक्षा कारणों और अनुशासन को ध्यान में रखते हुए सेना ने अपनी पुरानी नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।<br /><br /><strong>केवल देखने की अनुमति, पोस्ट करने पर पाबंदी</strong><br />नई गाइडलाइंस के मुताबिक, अब सेना के जवान और अधिकारी इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल केवल जानकारी लेने या पोस्ट देखने (Surveillance) के लिए कर सकेंगे। नए नियमों के तहत अब कोई भी जवान किसी पोस्ट को 'लाइक' नहीं कर पाएगा और न ही अपनी ओर से कोई फोटो, वीडियो या टेक्स्ट 'अपलोड' कर सकेगा। डिजिटल गतिविधियों को लेकर बाकी पुराने नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे।<br /><br /><strong>क्यों पड़ी इन नए नियमों की जरूरत?</strong><br />सूत्रों का कहना है कि इन नियमों का मुख्य उद्देश्य जवानों को सोशल मीडिया पर फैल रही फर्जी खबरों (Fake News) और भ्रामक जानकारियों से सावधान करना है। सेना चाहती है कि जवान सोशल मीडिया का इस्तेमाल केवल सूचनाएं जुटाने के लिए करें, ताकि वे गलत कंटेंट की पहचान कर सकें और समय रहते अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दे सकें। इससे सेना की आंतरिक सुरक्षा और गोपनीयता बनी रहेगी।<br /><br /><strong>जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने क्या कहा?</strong><br />हाल ही में 'चाणक्य डिफेंस डायलॉग' के दौरान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इस विषय पर विस्तार से बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि आज की पीढ़ी (Gen Z) के लिए स्मार्टफोन से दूर रहना एक बड़ी चुनौती है। जनरल द्विवेदी ने बताया कि जब युवा कैडेट्स ट्रेनिंग के लिए आते हैं, तो उन्हें यह समझाने में कई महीने लग जाते हैं कि फोन के बिना भी एक जीवन है।<br /><br /><strong>स्मार्टफोन: पाबंदी और जरूरत के बीच संतुलन</strong><br />सेना प्रमुख ने स्मार्टफोन को आज की एक बड़ी जरूरत बताया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "मैं सैनिकों को फोन के लिए कभी मना नहीं करता क्योंकि हम अक्सर फील्ड में तैनात रहते हैं। आज का सैनिक दूर रहकर अपने बच्चे की किलकारी सुनना चाहता है या परिवार का हालचाल लेना चाहता है। बैंकिंग से लेकर पढ़ाई तक, सब कुछ फोन पर निर्भर है।"<br /><br />उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनौती फोन के इस्तेमाल में नहीं, बल्कि इस बात में है कि क्या पोस्ट करना है और क्या नहीं। इसी अनुशासन को बनाए रखने के लिए सेना ने 'देखने' की अनुमति तो दी है, लेकिन 'इंटरैक्शन' (लाइक और पोस्ट) पर रोक लगा दी है।</div>
<div> </div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 14:33:16 +0530</pubDate>
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