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                <title>दिल्ली - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <description>दिल्ली RSS Feed</description>
                
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                <title>स्वतंत्र भारद्वाज को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी 3 हफ्ते की अंतरिम जमानत; CJP प्रदर्शन में मारपीट का है मामला</title>
                                    <description><![CDATA[स्वतंत्र भारद्वाज को जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान एक छात्र कार्यकर्ता के पिता से कथित मारपीट के मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत दी है। भारद्वाज की ओर से regular bail मांगी गई थी, जिस पर अदालत ने सोमवार को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। मामले की FIR में बाद में SC/ST एक्ट और आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराएं जोड़ी गई थीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/delhi/swatantra-bhardwaj-interim-bail-cjp-jantar-mantar-assault-case-2026/article-2040"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/swatantra-bhardwaj-interim-bail-cjp-case-2026.jpg-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 15 सितंबर 2026</strong></p>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/swatantra-bhardwaj-interim-bail-cjp-case-2026.jpg-(2).jpg" alt="swatantra-bhardwaj-interim-bail-cjp-case-2026.jpg (2)" width="1366" height="768"></img>
CJP प्रदर्शन से जुड़े कथित मारपीट मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट ने तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत दी।

<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>स्वतंत्र भारद्वाज को 3 हफ्ते की अंतरिम जमानत</strong></li>
<li><strong>पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को सुनाया फैसला</strong></li>
<li><strong>CJP कार्यकर्ता के पिता से कथित मारपीट का मामला</strong></li>
<li><strong>FIR में बाद में जोड़ा गया था SC/ST एक्ट</strong></li>
</ul>
<h6>जंतर-मंतर पर CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से जुड़े कथित मारपीट मामले में गिरफ्तार <strong>स्वतंत्र भारद्वाज</strong> को बड़ी कानूनी राहत मिली है।</h6>
<h6>दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार, 15 सितंबर को भारद्वाज को <strong>तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत</strong> दे दी।</h6>
<h6>इसका मतलब यह है कि अदालत ने फिलहाल उन्हें सीमित अवधि के लिए राहत दी है। इसे मामले से बरी होना या आरोप खत्म होना नहीं माना जा सकता।</h6>
<h2>Regular Bail मांगी थी, मिली Interim Bail</h2>
<h6>इस मामले में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।</h6>
<h6>स्वतंत्र भारद्वाज ने अदालत में <strong>regular bail</strong> के लिए आवेदन किया था।</h6>
<h6>लेकिन मंगलवार को सामने आए आदेश में अदालत ने उन्हें <strong>तीन सप्ताह की interim bail यानी अंतरिम जमानत</strong> दी है।</h6>
<h6>इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही <strong>“स्वतंत्र भारद्वाज को जमानत मिल गई, केस खत्म”</strong> जैसी व्याख्या सही नहीं होगी।</h6>
<h6>मामले की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।</h6>
<h2>आखिर किस मामले में गिरफ्तार हुए थे स्वतंत्र भारद्वाज?</h2>
<h6>मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई मारपीट से जुड़ा है।</h6>
<h6>आरोप है कि प्रदर्शन में शामिल छात्र कार्यकर्ता <strong>निशु आजाद के पिता</strong> के साथ मारपीट हुई थी।</h6>
<h6>मामले में स्वतंत्र भारद्वाज का नाम सामने आया और बाद में दिल्ली पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया।</h6>
<h6>भारद्वाज पर लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।</h6>
<h2>वायरल वीडियो के बाद बढ़ा था विवाद</h2>
<h6>मामले ने तब ज्यादा तूल पकड़ा जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो/पॉडकास्ट क्लिप सोशल मीडिया पर चर्चा में आया।</h6>
<h6>रिपोर्टों के मुताबिक इसमें उन्होंने प्रदर्शनकारी के पिता के साथ मारपीट को लेकर विवादित दावा किया था और राजनीतिक संपर्कों का भी जिक्र किया था।</h6>
<h6>इसके बाद CJP से जुड़े लोगों ने दिल्ली में प्रदर्शन कर उनकी गिरफ्तारी की मांग की थी।</h6>
<h2>FIR में बाद में जोड़ा गया SC/ST Act</h2>
<h6>इस केस में SC/ST एक्ट लगाए जाने को लेकर भी अदालत में महत्वपूर्ण बहस हुई।</h6>
<h6>14 सितंबर की सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि घटना के समय जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप था या नहीं।</h6>
<h6>दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि शुरुआती शिकायत में जातिसूचक शब्दों का उल्लेख नहीं था, लेकिन बाद में दर्ज कराए गए बयान में यह आरोप सामने आया, जिसके बाद <strong>SC/ST Act</strong> की धाराएं जोड़ी गईं।</h6>
<h6>यही पहलू जमानत की सुनवाई के दौरान भी चर्चा में रहा।</h6>
<h2>बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?</h2>
<h6>स्वतंत्र भारद्वाज की तरफ से अदालत में दावा किया गया कि उनके खिलाफ कार्रवाई हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों से प्रभावित थी।</h6>
<h6>बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि मारपीट की शुरुआत शिकायतकर्ता की तरफ से हुई थी और भारद्वाज पर हमला किया गया था।</h6>
<h6>उनकी ओर से वीडियो साक्ष्य होने की बात भी कही गई।</h6>
<h6>ये <strong>बचाव पक्ष की दलीलें हैं</strong>, अदालत द्वारा घटना के अंतिम तथ्य के रूप में स्थापित निष्कर्ष नहीं।</h6>
<h2>शिकायतकर्ता पक्ष का क्या आरोप?</h2>
<h6>दूसरी तरफ शिकायतकर्ता पक्ष स्वतंत्र भारद्वाज पर मारपीट और जातिसूचक टिप्पणी करने का आरोप लगाता रहा है।</h6>
<h6>इसी मामले में दिल्ली पुलिस ने बाद में SC/ST एक्ट और आपराधिक धमकी से संबंधित प्रावधान भी FIR में जोड़े थे।</h6>
<h6>इन आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की आगे की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।</h6>
<h2>पहले 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए थे</h2>
<h6>स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तारी के बाद अदालत में पेश किया गया था।</h6>
<h6>7 सितंबर को पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें <strong>14 दिनों की न्यायिक हिरासत</strong> में भेज दिया था और अगली पेशी 21 सितंबर निर्धारित की गई थी।</h6>
<h6>इसके बाद भारद्वाज ने regular bail के लिए अदालत का रुख किया।</h6>
<h2>दिल्ली हाईकोर्ट से पहले नहीं मिली थी राहत</h2>
<h6>स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में <strong>habeas corpus petition</strong> भी दाखिल की थी।</h6>
<h6>दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 सितंबर को वह याचिका खारिज कर दी थी।</h6>
<h6>इसके बाद उनकी जमानत की लड़ाई पटियाला हाउस कोर्ट में चली।</h6>
<h2>अब क्या जेल से बाहर आएंगे स्वतंत्र भारद्वाज?</h2>
<h6>तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत मिलने का मतलब है कि <strong>इस केस में अदालत ने उन्हें अस्थायी रूप से हिरासत से बाहर रहने की राहत दी है</strong>, बशर्ते आदेश में तय जमानत संबंधी औपचारिकताएं और शर्तें पूरी हों।</h6>
<h6>इसलिए headline में सीधे <strong>“जेल से रिहा हुए”</strong> लिखना तब तक उचित नहीं होगा जब तक वास्तविक release की पुष्टि न हो जाए।</h6>
<h6>फिलहाल पुष्ट खबर यह है कि <strong>पटियाला हाउस कोर्ट ने तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत मंजूर की है।</strong></h6>
<h2>तीन हफ्ते बाद क्या होगा?</h2>
<h6>अंतरिम जमानत स्थायी राहत नहीं होती।</h6>
<h6>इसका अर्थ है कि स्वतंत्र भारद्वाज को अदालत से एक सीमित अवधि की राहत मिली है। केस और संबंधित कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।</h6>
<h6>आगे regular bail और मामले के अन्य पहलुओं पर अदालत के आदेश महत्वपूर्ण होंगे।</h6>
<h6>फिलहाल स्वतंत्र भारद्वाज के लिए यह बड़ी राहत है, लेकिन <strong>इसे मामले में क्लीन चिट या बरी होना नहीं माना जा सकता।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/delhi/swatantra-bhardwaj-interim-bail-cjp-jantar-mantar-assault-case-2026/article-2040</link>
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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 16:27:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली बनी दुनिया की कूटनीति का केंद्र: पुतिन-पेजेशकियन पहुंचे, 7 साल बाद आ रहे जिनपिंग; मोदी की 3 बड़ी बैठकों पर नजर</title>
                                    <description><![CDATA[BRICS सम्मेलन से पहले दिल्ली में दुनिया के बड़े नेताओं का जमावड़ा शुरू हो गया है। पीएम मोदी की पुतिन, पेजेशकियन और शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठकों में रक्षा, व्यापार, सीमा विवाद, ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया जैसे मुद्दे उठ सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/delhi/brics-summit-2026-live-modi-putin-xi-jinping-pezeshkian-delhibrics-summit-2026-live-modi-putin-xi-jinping-pezeshkian-delhi/article-1989"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/brics-summit-2026-modi-putin-xi-pezeshkian-delhi.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd"><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत की राजधानी नई दिल्ली इस समय दुनिया की कूटनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन दिल्ली पहुंच चुके हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी सात वर्षों बाद भारत आ रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी BRICS सम्मेलन से इतर पुतिन, पेजेशकियन और शी जिनपिंग के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठक करेंगे। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के कारण इन तीनों मुलाकातों पर पूरी दुनिया की नजर है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा, ऊर्जा और व्यापार; मोदी-पेजेशकियन वार्ता में पश्चिम एशिया, चाबहार एवं ऊर्जा सुरक्षा और मोदी-जिनपिंग मुलाकात में सीमा विवाद तथा दोनों देशों के संबंध प्रमुख मुद्दे रह सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इस सम्मेलन में सदस्य देशों के साथ साझेदार और आमंत्रित देशों के नेता तथा प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।</p>
<h2>दिल्ली पहुंचे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन</h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/brics-summit-2026-modi-putin-xi-pezeshkian-delhi.jpg.jpg" alt="brics-summit-2026-modi-putin-xi-pezeshkian-delhi.jpg" width="1366" height="768"></img>
नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ महत्वपूर्ण बातचीत प्रस्तावित है। फोटो: सोशल मीडिया
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/brics-summit-2026-modi-putin-xi-pezeshkian-delhi.jpg.jpg" alt="brics-summit-2026-modi-putin-xi-pezeshkian-delhi.jpg" width="1366" height="768"></img>
नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ महत्वपूर्ण बातचीत प्रस्तावित है। फोटो: सोशल मीडिया



<p class="isSelectedEnd">रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे। एयरपोर्ट पर केंद्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया। पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ प्रधानमंत्री मोदी से द्विपक्षीय बातचीत करेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत और रूस के बीच रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, व्यापार और तकनीक सहित कई क्षेत्रों में पुरानी रणनीतिक साझेदारी है। दोनों देशों के संबंधों को “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” कहा जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुतिन की इस यात्रा को रूस पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव और वैश्विक तनाव के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत ने रूस के साथ अपने संबंध बनाए रखने के साथ यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><a href="https://www.aajtak.in/india/news/story/brics-summit-2026-live-updates-pm-modi-putin-xi-jinping-pezeshkian-bilateral-talks-delhi-ntc-agkp-2640522-2026-09-11">आजतक के लाइव अपडेट</a> के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम BRICS सम्मेलन से पहले और उसके दौरान कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकों से भरा हुआ है।</p>
<h2>मोदी-पुतिन बैठक में किन मुद्दों पर होगी बात?</h2>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की बैठक में दोनों देशों के आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों की समीक्षा होने की संभावना है। व्यापार, निवेश, तेल और गैस, परमाणु ऊर्जा, रक्षा तथा तकनीक प्रमुख विषय हो सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ा है, लेकिन व्यापारिक असंतुलन भारत के लिए चिंता का विषय रहा है। भारत रूस को अपने निर्यात में वृद्धि करना चाहता है। दवा, कृषि, मशीनरी और तकनीकी उत्पादों के कारोबार को बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">रक्षा सहयोग भी बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। कुछ मीडिया रिपोर्टों में पांचवीं पीढ़ी के Su-57 लड़ाकू विमान और रक्षा उपकरणों से जुड़ी संभावित बातचीत का उल्लेख किया गया है। हालांकि किसी सौदे की पुष्टि दोनों देशों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके अतिरिक्त यूक्रेन संघर्ष और दुनिया की बदलती सुरक्षा परिस्थितियों पर दोनों नेता अपने विचार साझा कर सकते हैं।</p>
<h2>ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन भी पहुंचे भारत</h2>
<p class="isSelectedEnd">ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भी BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। भारत आने से पहले उन्होंने BRICS को एकतरफा वैश्विक नीतियों का मुकाबला करने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनका कहना था कि विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय निर्णयों में अधिक प्रभावी भूमिका मिलनी चाहिए। ईरान BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने का समर्थन करता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री मोदी और पेजेशकियन के बीच होने वाली बैठक में भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंधों के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा होने की संभावना है।</p>
<h2>मोदी-पेजेशकियन बैठक क्यों महत्वपूर्ण?</h2>
<p class="isSelectedEnd">ईरानी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया गंभीर तनाव से गुजर रहा है। इस क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। इसलिए पश्चिम एशिया में शांति और होर्मुज जलडमरूमध्य सहित प्रमुख समुद्री मार्गों का सुरक्षित रहना भारत के लिए बेहद जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दोनों नेताओं की बैठक में क्षेत्रीय शांति, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे मुद्दे उठ सकते हैं। भारत विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने की बात करता रहा है।</p>
<h2>चाबहार बंदरगाह पर भी रहेगी नजर</h2>
<p class="isSelectedEnd">भारत और ईरान के संबंधों में चाबहार बंदरगाह का विशेष महत्व है। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान से होकर गुजरे बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने का वैकल्पिक मार्ग देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत ने चाबहार बंदरगाह के विकास और संचालन में निवेश किया है। मोदी-पेजेशकियन बैठक में इस परियोजना की प्रगति और इसके माध्यम से व्यापार बढ़ाने पर बातचीत हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि बैठक के विस्तृत एजेंडे और किसी संभावित समझौते की पुष्टि दोनों देशों के आधिकारिक बयान के बाद होगी।</p>
<h2>सात वर्षों बाद भारत आ रहे शी जिनपिंग</h2>
<p class="isSelectedEnd">BRICS सम्मेलन की सबसे अधिक चर्चित यात्राओं में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत दौरा शामिल है। वह सात वर्षों बाद भारत आ रहे हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी के बीच द्विपक्षीय बैठक की तैयारियों की पुष्टि की है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><a href="https://www.reuters.com/world/china/china-india-arranging-meeting-xi-modi-chinas-foreign-ministry-says-2026-09-11/">रॉयटर्स की रिपोर्ट</a> के मुताबिक, चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देश मोदी-जिनपिंग बैठक की व्यवस्था कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">चीन ने कहा है कि वह भारत के साथ संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखता है। बीजिंग ने बातचीत तथा सहयोग बढ़ाने के साथ मतभेदों को उचित तरीके से संभालने की बात कही है।</p>
<h2>मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर क्यों टिकी हैं दुनिया की निगाहें?</h2>
<p class="isSelectedEnd">भारत और चीन के संबंध साल 2020 में गलवान घाटी में हुए सैन्य संघर्ष के बाद गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd">अब मोदी-जिनपिंग बैठक में सीमा पर शांति, सैनिकों की स्थिति, व्यापारिक असंतुलन, सीधी उड़ान, वीजा और आर्थिक संबंधों जैसे विषय उठ सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि सीमा पर शांति के बिना द्विपक्षीय संबंध पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकते। ऐसे में बैठक के बाद जारी होने वाले आधिकारिक बयान से दोनों देशों के रिश्तों की भावी दिशा का संकेत मिलेगा।</p>
<h2>प्रधानमंत्री मोदी का व्यस्त कूटनीतिक कार्यक्रम</h2>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुक्रवार को राष्ट्रपति पुतिन, ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात प्रस्तावित है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके बाद वह चीन, इथियोपिया, मलेशिया, वियतनाम, संयुक्त अरब अमीरात और कई अन्य देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठक करेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">मोदी और शी जिनपिंग की बैठक शनिवार शाम प्रस्तावित बताई गई है। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री कजाकिस्तान, फिलीपींस, मिस्र, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया और युगांडा के नेताओं से भी बातचीत कर सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठकों का कार्यक्रम बदल सकता है, इसलिए किसी भी समझौते या परिणाम की पुष्टि आधिकारिक घोषणा के आधार पर ही की जाएगी।</p>
<h2>BRICS सम्मेलन का मुख्य एजेंडा क्या है?</h2>
<p class="isSelectedEnd">नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, व्यापार, निवेश, तकनीक, स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">BRICS देश अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं में सुधार भी समूह का प्रमुख विषय रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सदस्य देशों के बीच भुगतान को आसान बनाने वाली व्यवस्था पर भी बातचीत हो सकती है। इसका उद्देश्य अमेरिकी डॉलर को तुरंत हटाना नहीं, बल्कि व्यापार के लिए अधिक विकल्प तैयार करना है।</p>
<h2>BRICS में कितने सदस्य देश हैं?</h2>
<p class="isSelectedEnd">BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह के रूप में हुई थी। बाद में इसका विस्तार किया गया। वर्तमान में समूह में भारत सहित 11 पूर्ण सदस्य देश शामिल हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">पूर्ण सदस्यों के अलावा कई साझेदार देशों को भी सम्मेलन में बुलाया गया है। इस कारण दिल्ली में होने वाले आयोजन में 11 सदस्यों से अधिक देशों के प्रतिनिधि दिखाई देंगे। साझेदार देशों को पूर्ण सदस्य कहना सही नहीं होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">विस्तार के बाद BRICS दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।</p>
<h2>सम्मेलन के सामने बड़ी चुनौतियां</h2>
<p class="isSelectedEnd">BRICS का आकार बढ़ने के साथ उसकी ताकत बढ़ी है, लेकिन सदस्य देशों के हितों में अंतर भी सामने आया है। रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया के तनाव और अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता जैसे मुद्दों पर सभी देशों का रुख एक जैसा नहीं है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><a href="https://apnews.com/article/a79c5d6df774a9471743cef7d0080688">एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट</a> के मुताबिक, दिल्ली सम्मेलन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सदस्य देशों के अलग-अलग राजनीतिक और आर्थिक हितों के बीच सहमति बनाना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत की कोशिश BRICS को किसी पश्चिम-विरोधी सैन्य या राजनीतिक गठबंधन के बजाय ग्लोबल साउथ के आर्थिक और विकास संबंधी हितों का मंच बनाए रखने की होगी।</p>
<h2>BRICS के रंग में सजी दिल्ली</h2>
<p class="isSelectedEnd">सम्मेलन का मुख्य आयोजन भारत मंडपम में किया जाएगा। विदेशी नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों के स्वागत के लिए दिल्ली के प्रमुख मार्गों, चौराहों और सरकारी क्षेत्रों को BRICS की थीम पर सजाया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">एयरपोर्ट से प्रमुख होटलों और भारत मंडपम को जोड़ने वाले मार्गों पर विशेष प्रकाश व्यवस्था, फूल और BRICS के संकेतक लगाए गए हैं। सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक इंतजाम किए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd"><a href="https://indianexpress.com/article/cities/delhi/delhi-gets-brics-makeover-as-india-hosts-putin-xi-pezeshkian-for-summit-10873180/">इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट</a> के अनुसार, दिल्ली के 17 प्रमुख चौराहों को सजाया गया और करीब 15 हजार पौधे लगाए गए हैं।</p>
<h2>इन तीन मुलाकातों से क्या निकलेगा?</h2>
<p class="isSelectedEnd">दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी की पुतिन, पेजेशकियन और शी जिनपिंग से होने वाली बातचीत BRICS सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में शामिल है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुतिन के साथ वार्ता से भारत-रूस रक्षा और ऊर्जा संबंधों, पेजेशकियन से मुलाकात से पश्चिम एशिया एवं चाबहार परियोजना और शी जिनपिंग के साथ बैठक से भारत-चीन संबंधों की दिशा स्पष्ट हो सकती है।</p>
<p>अब दुनिया की नजर केवल नेताओं की तस्वीरों पर नहीं, बल्कि बैठकों के बाद होने वाली घोषणाओं पर होगी। असली सवाल यह है कि क्या दिल्ली का यह बड़ा कूटनीतिक जमावड़ा व्यापार, क्षेत्रीय शांति और वैश्विक सहयोग को लेकर कोई ठोस रास्ता निकाल पाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 16:08:12 +0530</pubDate>
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                <title>स्वतंत्र भारद्वाज केस में बड़ा पलटवार: परशुराम दल पहुंचा थाने, निशु-संजय के खिलाफ दी शिकायत; जानिए क्या FIR हुई?</title>
                                    <description><![CDATA[परशुराम दल ने निशु आजाद और उनके पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का दावा किया, लेकिन दिल्ली पुलिस की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/delhi/parshuram-dal-complaint-against-nishu-sanjay-azad-swatantra-bhardwaj-case/article-1955"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/parshuram-dal-complaint-nishu-sanjay-azad-swatantra-bhardwaj-case.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>नई दिल्ली।</strong> निशु आजाद के पिता संजय कुमार से कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार किए गए स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में अब परशुराम दल खुलकर सामने आ गया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गंगाधर शर्मा सहित कई पदाधिकारी और समर्थक दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचे। संगठन ने निशु आजाद और उनके पिता के खिलाफ शिकायत देकर कानूनी कार्रवाई की मांग करने का दावा किया है।</p>
<p>परशुराम दल ने सोशल मीडिया मंच X पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा कि स्वतंत्र भारद्वाज मामले में निशु और संजय आजाद पर “FIR कराने” के बाद उसके पदाधिकारी थाने से बाहर आ रहे हैं। संगठन ने पोस्ट में राष्ट्रीय अध्यक्ष गंगाधर शर्मा के अलावा स्वतंत्र द्विवेदी, राहुल चौधरी, अभिषेक ठाकुर और इंद्रेश द्विवेदी सहित अन्य समर्थकों की मौजूदगी का उल्लेख किया है।</p>
<p>हालांकि, इस मामले में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है—पुलिस को शिकायत सौंपना और पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करना एक ही बात नहीं है। दिल्ली पुलिस की ओर से निशु आजाद या संजय कुमार के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज करने की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है।</p>
<h3>क्या निशु और संजय आजाद के खिलाफ FIR दर्ज हुई?</h3>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/parshuram-dal-complaint-nishu-sanjay-azad-swatantra-bhardwaj-case.jpg2.jpg" alt="parshuram-dal-complaint-nishu-sanjay-azad-swatantra-bhardwaj-case.jpg" width="1366" height="768"></img>
स्वतंत्र भारद्वाज मामले में परशुराम दल ने निशु आजाद और उनके पिता संजय कुमार के खिलाफ पुलिस को शिकायत देने का दावा किया है। एफआईआर दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

<p>परशुराम दल की पोस्ट में निशु आजाद और संजय आजाद के खिलाफ एफआईआर कराने का दावा किया गया है। लेकिन पोस्ट के साथ एफआईआर नंबर, दर्ज धाराएं, एफआईआर की प्रति अथवा दिल्ली पुलिस का कोई आधिकारिक बयान साझा नहीं किया गया।</p>
<p>संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गंगाधर शर्मा का एक अन्य बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने मुकदमा दर्ज होने का दावा किया। इसके बावजूद उपलब्ध विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों और पुलिस के सार्वजनिक बयान में निशु तथा उनके पिता के खिलाफ नई एफआईआर की पुष्टि नहीं मिली है।</p>
<p>इसलिए फिलहाल सही और सुरक्षित जानकारी यही है कि परशुराम दल ने पुलिस के पास शिकायत देने और मुकदमा दर्ज कराने की मांग करने का दावा किया है। एफआईआर वास्तव में दर्ज हुई है या केवल शिकायत स्वीकार की गई है, यह पुलिस के आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।</p>
<h3>संसद मार्ग थाने पहुंचे परशुराम दल के समर्थक</h3>
<p>स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थक संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर एकत्र हुए। सोशल मीडिया पर इसे कई जगह “जंतर-मंतर थाना” कहा जा रहा है, लेकिन संबंधित पुलिस स्टेशन संसद मार्ग पुलिस स्टेशन है, जो जंतर-मंतर क्षेत्र के पास स्थित है।</p>
<p>समर्थकों ने स्वतंत्र भारद्वाज के मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि जंतर-मंतर पर हुई पूरी घटना के वीडियो देखे जाने चाहिए और झड़प से पहले की परिस्थितियों को भी जांच में शामिल किया जाना चाहिए।</p>
<p>परशुराम दल और दूसरे समर्थक संगठनों का आरोप है कि मामले में केवल एक पक्ष की बात को प्रमुखता दी जा रही है। उन्होंने निशु आजाद और संजय कुमार के बयानों तथा सोशल मीडिया पर वायरल दूसरे वीडियो की जांच की भी मांग उठाई है। ये संगठन के आरोप हैं और इनकी सत्यता पुलिस जांच से ही तय होगी।</p>
<h3>स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद बदला घटनाक्रम</h3>
<p>अब तक निशु आजाद, CJP और कई राजनीतिक नेता स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे। स्वतंत्र की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थन में संगठनों के उतरने से मामला दो पक्षों के विरोध-प्रदर्शन में बदलता दिखाई दे रहा है।</p>
<p>एक तरफ निशु आजाद और उनके समर्थक पिता पर हुए कथित हमले के मामले में न्याय तथा परिवार की सुरक्षा मांग रहे हैं। दूसरी तरफ स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थक उनकी गिरफ्तारी को एकतरफा बताते हुए घटना की शुरुआत और दूसरे पक्ष की भूमिका की जांच की मांग कर रहे हैं।</p>
<p>किस पक्ष का दावा सही है, इसका फैसला सोशल मीडिया पोस्ट या विरोध-प्रदर्शन के आधार पर नहीं, बल्कि पुलिस जांच, मेडिकल दस्तावेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों के आधार पर होगा।</p>
<h3>क्या है पूरा मामला?</h3>
<p>विवाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर 23 जून को हुए CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार और स्वतंत्र भारद्वाज सहित कुछ लोगों के बीच झड़प हुई थी। इस घटना में संजय कुमार के सिर पर चोट आई थी।</p>
<p>मामला दोबारा उस समय चर्चा में आया, जब स्वतंत्र भारद्वाज के एक पॉडकास्ट की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। वीडियो में भारद्वाज कथित रूप से संजय कुमार के सिर पर चोट पहुंचाने और जेल नहीं जाने का दावा करते सुनाई दिए।</p>
<p>वीडियो सामने आने के बाद निशु आजाद ने अपने पिता के लिए न्याय की मांग की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सांसद चंद्रशेखर आजाद, सांसद पप्पू यादव और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान समेत कई नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं।</p>
<h3>स्वतंत्र भारद्वाज ने क्या सफाई दी?</h3>
<p>विवाद बढ़ने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने आत्मरक्षा में संजय कुमार पर हाथ चलाया था। उनका दावा था कि जंतर-मंतर पर उन्हें भीड़ ने घेर लिया था और उन्हें अपनी सुरक्षा का खतरा महसूस हुआ।</p>
<p>उन्होंने पॉडकास्ट में दिए गए कुछ बयानों को मजाक में कही गई बात भी बताया। इसके विपरीत निशु आजाद और उनके पिता का आरोप है कि संजय कुमार पर जानबूझकर हमला किया गया था।</p>
<p>इन परस्पर विरोधी दावों की जांच दिल्ली पुलिस कर रही है। अंतिम निष्कर्ष अदालत और जांच में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर निकलेगा।</p>
<h3>पुलिस ने गंभीर चोट के दावे पर क्या कहा?</h3>
<p>दिल्ली पुलिस ने पहले जारी बयान में राजनीतिक दबाव के कारण कार्रवाई नहीं करने के आरोपों को खारिज किया था। पुलिस ने कहा था कि घटना के बाद स्वतंत्र भारद्वाज सहित दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी।</p>
<p>पुलिस के अनुसार, संजय कुमार की मेडिकल रिपोर्ट में चोट को सामान्य श्रेणी का बताया गया था। पुलिस ने खोपड़ी में दरार और 60 टांके लगने जैसे सोशल मीडिया दावों को मेडिकल रिकॉर्ड से प्रमाणित नहीं बताया।</p>
<p>वहीं, निशु आजाद और CJP ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर सवाल उठाए और अधिक गंभीर धाराएं लगाने की मांग की थी।</p>
<h3>स्वतंत्र के खिलाफ FIR में जोड़ी गईं SC/ST Act की धाराएं</h3>
<p><a class="decorated-link" href="https://indianexpress.com/article/cities/delhi/cjp-protest-two-mps-congress-leader-fir-sc-st-act-pocso-10863953/?utm_source=chatgpt.com">CJP के प्रदर्शन के बाद</a> संजय कुमार पर कथित हमले से संबंधित मौजूदा एफआईआर में SC/ST Act की धाराएं जोड़ी गईं। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया।</p>
<p><a class="decorated-link" href="https://indianexpress.com/article/cities/delhi/jantar-mantar-assault-swatantra-bhardwaj-arrested-cjp-protest-10864404/?utm_source=chatgpt.com">द इंडियन एक्सप्रेस</a> के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद स्वतंत्र भारद्वाज को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया।</p>
<p>निशु आजाद ने यह भी आरोप लगाया था कि उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से आपत्तिजनक संदेश और धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने इस संबंध में अलग शिकायत पुलिस को सौंपी थी।</p>
<h3>निशु के पुराने वायरल वीडियो का भी उठा मुद्दा</h3>
<p>विवाद के बीच निशु आजाद का एक पुराना वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी एक आपत्तिजनक पंक्ति बोलती दिखाई दीं। निशु ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि वह सामने लगे बोर्ड पर लिखे शब्द पढ़ रही थीं और वह उनका व्यक्तिगत बयान नहीं था।</p>
<p>स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थक इसी सहित निशु के दूसरे वायरल वीडियो की जांच की मांग कर रहे हैं। किसी वीडियो के आधार पर अपराध बनता है या नहीं, यह उसके पूरे संदर्भ और कानूनी जांच के बाद ही निर्धारित किया जा सकता है।</p>
<h3>अब आगे क्या होगा?</h3>
<p>परशुराम दल द्वारा निशु और संजय आजाद के खिलाफ शिकायत दिए जाने के बाद पुलिस यह जांच करेगी कि उसमें लगाए गए आरोप संज्ञेय अपराध बनाते हैं या नहीं। शिकायत मिलने का अर्थ अपने आप एफआईआर दर्ज होना नहीं होता।</p>
<p>यदि पुलिस एफआईआर दर्ज करती है तो उसका नंबर, तारीख और कानूनी धाराएं आधिकारिक रिकॉर्ड में सामने आएंगी। फिलहाल ऐसे किसी दस्तावेज की सार्वजनिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।</p>
<p>मामले में दोनों पक्षों की ओर से गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में पुलिस के लिए घटना के सभी वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और सोशल मीडिया पोस्ट की निष्पक्ष जांच करना महत्वपूर्ण होगा।</p>
<p><strong>महत्वपूर्ण तथ्य-जांच:</strong> परशुराम दल ने अपनी पोस्ट में “FIR कराने” का दावा किया है, लेकिन दिल्ली पुलिस की पुष्टि और एफआईआर की प्रति सामने नहीं आई है। इसलिए प्रत्यक्षदर्शी समाचार इसे <strong>शिकायत देने और एफआईआर की मांग किए जाने</strong> के रूप में प्रकाशित करे—“FIR दर्ज” लिखना अभी जल्दबाजी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 17:37:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘72 घंटे में होगी स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी’, निशु आजाद ने बताया पुलिस से मिला आश्वासन</title>
                                    <description><![CDATA[निशु आजाद ने कहा है कि पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को 72 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया है। मामला जंतर-मंतर पर उनके पिता से कथित मारपीट का है। पढ़ें नया बयान, घटना की पृष्ठभूमि और पुलिस का पहले दिया गया जवाब।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/delhi/nishu-azad-swatantra-bhardwaj-72-hour-arrest-assurance/article-1937"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/nishu-azad-case-72-hour-arrest-assurance.jpg.jpg" alt=""></a><br /><h2>गिरफ्तारी के आश्वासन पर निशु आजाद का बयान</h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/nishu-azad-case-72-hour-arrest-assurance.jpg.jpg" alt="nishu-azad-case-72-hour-arrest-assurance.jpg" width="1366" height="768"></img>
Parliament Street police station, New Delhi. Nishu Azad has reported receiving an assurance of action in her father’s assault case.

<p class="isSelectedEnd"><strong>नई दिल्ली:</strong> जंतर-मंतर पर अपने पिता से कथित मारपीट के मामले में कार्रवाई मांग रहीं निशु आजाद का नया बयान सामने आया है। साझा सोशल मीडिया पोस्ट में उनके हवाले से कहा गया है कि पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को 72 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया है। यह जानकारी निशु के कथन पर आधारित है; उपलब्ध सामग्री में संबंधित पुलिस अधिकारी का सीधे दिया गया बयान नहीं है। <a href="https://x.com/AkshayPratap94/status/2095792321971532193">स्रोत: साझा पोस्ट</a></p>
<p class="isSelectedEnd">टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी शुक्रवार को निशु के हवाले से 72 घंटे में कार्रवाई का आश्वासन मिलने की खबर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, CJP सदस्य संसद मार्ग थाने के बाहर जुटे और उनके पिता से कथित मारपीट पर सख्त कार्रवाई की मांग की। <a href="https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/influencer-swatantra-bhardwaj-will-be-arrested-within-72-hours-cjp-activist-nishu-azad/articleshow/133756952.cms">स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया</a></p>
<h2>क्या है जंतर-मंतर पर मारपीट का पूरा मामला?</h2>
<p class="isSelectedEnd">आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, घटना 23 जून 2026 को CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई थी। निशु के पिता संजय कुमार अपनी बेटी और एक दोस्त के साथ वहां पहुंचे थे। शिकायत में कहा गया है कि मोबाइल से वीडियो बनाने पर आपत्ति के बाद विवाद शुरू हुआ। संजय का कहना था कि वह प्रदर्शन की रिकॉर्डिंग कर रहे थे।</p>
<p class="isSelectedEnd">आरोप है कि बहस बढ़ने पर कुछ लोगों ने उन्हें घेरकर पीटा और कड़े जैसी ठोस वस्तु से सिर पर वार किया। रिपोर्ट में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को आरोपी बताया गया है। स्वतंत्र भारद्वाज ने भी आजतक से बातचीत में विवाद की शुरुआत वीडियो बनाने को लेकर होने की बात कही। <a href="https://www.aajtak.in/amp/india/delhi/story/nishu-azad-father-assault-swatantra-bhardwaj-fir-details-jantar-mantar-ntc-apdy-rptc-2635860-2026-09-04">स्रोत: आजतक</a></p>
<h2>पॉडकास्ट की क्लिप से मामले पर दोबारा उठे सवाल</h2>
<p class="isSelectedEnd">इस मामले को लेकर नई चर्चा स्वतंत्र भारद्वाज की एक पॉडकास्ट क्लिप सामने आने के बाद हुई। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट में बताया गया कि क्लिप में घटना को लेकर किए गए उनके कथित दावों से विवाद बढ़ा। मारपीट के आरोपों से जुड़े इस बयान ने मामले को दोबारा सार्वजनिक चर्चा में ला दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">यहां वीडियो में किया गया दावा और जांच में प्रमाणित तथ्य अलग-अलग हैं। किसी क्लिप को उसके संदर्भ से अलग करके अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। संबंधित कथन की पूरी रिकॉर्डिंग और मामले के साक्ष्य महत्वपूर्ण हैं। <a href="https://www.livehindustan.com/videos/swatantra-bhardwaj-nishu-azad-cjp-protest-jantar-mantar-201788443156800.html">स्रोत: हिन्दुस्तान</a></p>
<h2>निशु ने पुलिस की कार्रवाई पर जताया था असंतोष</h2>
<p class="isSelectedEnd">नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, निशु ने पहले पुलिस की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए राहुल गांधी से मदद मांगी थी। उन्होंने आरोपी के सार्वजनिक बयानों को लेकर सवाल उठाए और कार्रवाई की मांग की। CJP से जुड़े लोग भी इस मुद्दे पर संसद मार्ग थाने पहुंचे थे।</p>
<p class="isSelectedEnd">अब आश्वासन मिलने का उनका बयान इसी घटनाक्रम में नया पहलू है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि गिरफ्तारी हो चुकी है या मामले की सभी मांगों पर पुलिस ने निर्णय ले लिया है। आगे हुई कार्रवाई की पुष्टि अलग से आवश्यक होगी।</p>
<h2>पुलिस ने पहले मेडिकल रिपोर्ट और पूछताछ का दिया था हवाला</h2>
<p class="isSelectedEnd">नवभारत टाइम्स ने डीसीपी सचिन शर्मा के हवाले से बताया था कि मेडिकल जांच में चोटें मामूली बताई गई थीं और सिर में क्रैक होने का दावा रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता। पुलिस ने कहा था कि दोनों आरोपियों को उस समय हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी तथा चार्जशीट दाखिल की जाएगी। अनुचित प्रभाव या हस्तक्षेप के आरोप भी पुलिस ने नकारे थे। <a href="https://navbharattimes.indiatimes.com/india/nishu-azad-father-beaten-alleged-swatantra-bhardwaj-video-uproar-cjp-protest-girl-appeal-rahul-gandhi-cockroach-janta-party-delhi-police/articleshow/133752926.cms">स्रोत: नवभारत टाइम्स</a></p>
<h2>72 घंटे की बात में क्या स्पष्ट होना बाकी है?</h2>
<p class="isSelectedEnd">निशु के कथन से आश्वासन मिलने की जानकारी सामने आती है, लेकिन उपलब्ध सामग्री में उसकी सटीक शुरुआत का समय या लिखित विवरण नहीं है। इसलिए गिरफ्तारी की निश्चित तारीख और घंटे की गणना करना उचित नहीं होगा।</p>
<p>फिलहाल खबर का मुख्य बिंदु निशु का नया बयान है। इसे किसी अदालत की समयसीमा, पुलिस की लिखित घोषणा या कार्रवाई पूरी होने के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। मामले में अगली महत्वपूर्ण जानकारी वास्तविक कार्रवाई और उसकी आधिकारिक पुष्टि होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 14:51:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>निशु आजाद मामले में चंद्रशेखर के समर्थन पर कल्पना श्रीवास्तव का सवाल, जानिए विवाद और पुलिस का पक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[निशु आजाद के पिता से मारपीट के मामले में चंद्रशेखर आजाद के समर्थन पर कल्पना श्रीवास्तव ने सवाल उठाए हैं। पढ़ें विवाद की पृष्ठभूमि, शिकायत में दर्ज आरोप और दिल्ली पुलिस का जवाब।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/delhi/nishu-azad-case-chandrashekhar-kalpana-srivastava-row/article-1933"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/nishu-case-chandrashekhar-kalpana-srivastava-row.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h2>निशु आजाद मामले में चंद्रशेखर के समर्थन पर सवाल</h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/nishu-case-chandrashekhar-kalpana-srivastava-row.jpg2.jpg" alt="nishu-case-chandrashekhar-kalpana-srivastava-row.jpg" width="1366" height="768"></img>
निशु के पिता से मारपीट के मामले में कार्रवाई को लेकर उठे सवाल।

<p class="isSelectedEnd">निशु आजाद के पिता से मारपीट के मामले में कार्रवाई की मांग के बीच चंद्रशेखर आजाद के समर्थन को लेकर सोशल मीडिया पर एक टिप्पणी सामने आई है। ‘कल्पना श्रीवास्तव’ नाम वाले एक्स अकाउंट से साझा पोस्ट में चंद्रशेखर पर लड़की को अपनी राजनीति के लिए आगे करने का आरोप लगाया गया है। पोस्ट में उनके समर्थन की मंशा को जाति से जोड़कर भी सवाल उठाया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब निशु अपने पिता के साथ हुई मारपीट के मामले में न्याय मांग रही हैं। यहां दो अलग विषय हैं—एक मारपीट की शिकायत और उस पर पुलिस की कार्रवाई, दूसरा चंद्रशेखर के हस्तक्षेप पर की गई राजनीतिक टिप्पणी। सोशल मीडिया पर लगाया गया आरोप अपने आप में किसी की मंशा का प्रमाण नहीं है।</p>
<h2>कल्पना श्रीवास्तव ने पोस्ट में क्या कहा?</h2>
<p class="isSelectedEnd">साझा स्क्रीनशॉट में @Lawyer_Kalpana अकाउंट से चंद्रशेखर आजाद पर लड़की को “ढाल” बनाने का आरोप लगाया गया है। इसके साथ उनके निजी जीवन को लेकर एक अन्य महिला का उल्लेख करते हुए आरोप भी किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इन निजी आरोपों के समर्थन में उपलब्ध पोस्ट में कोई दस्तावेज या अन्य सत्यापन योग्य साक्ष्य दिखाई नहीं देता। इसलिए उन्हें प्रमाणित घटना के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। इसी तरह पोस्ट में किया गया जाति आधारित निष्कर्ष भी पोस्ट करने वाले का आरोप है, स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं। <a href="https://x.com/Lawyer_Kalpana/status/2095776118544691441">स्रोत: साझा एक्स पोस्ट</a></p>
<h2>क्या है निशु आजाद के पिता से मारपीट का मामला?</h2>
<p class="isSelectedEnd">आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, मामला 23 जून 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई मारपीट से जुड़ा है। निशु के पिता संजय कुमार वहां अपनी बेटी और एक दोस्त के साथ पहुंचे थे।</p>
<p class="isSelectedEnd">एफआईआर में दर्ज शिकायत के मुताबिक, वीडियो बनाने पर आपत्ति के बाद विवाद शुरू हुआ। संजय का कहना था कि वह प्रदर्शन की रिकॉर्डिंग कर रहे थे। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर उन्हें घेरकर पीटा गया और सिर पर कड़े जैसी ठोस वस्तु से वार किया गया। रिपोर्ट में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को आरोपी बताया गया है। स्वतंत्र भारद्वाज ने भी आजतक से बातचीत में विवाद की शुरुआत वीडियो बनाने को लेकर होने की बात कही। <a href="https://www.aajtak.in/amp/india/delhi/story/nishu-azad-father-assault-swatantra-bhardwaj-fir-details-jantar-mantar-ntc-apdy-rptc-2635860-2026-09-04">स्रोत: आजतक</a></p>
<h2>चंद्रशेखर आजाद ने क्या सवाल उठाए?</h2>
<p class="isSelectedEnd">नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चंद्रशेखर आजाद ने निशु के समर्थन में स्वतंत्र भारद्वाज के बयान और पुलिस रिकॉर्ड के बीच कथित अंतर पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आरोपी के कथन और पुलिस की जानकारी में अंतर क्यों है तथा मामले में जेल भेजने जैसी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनकी टिप्पणी का केंद्र पुलिस की कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग है। कल्पना श्रीवास्तव ने इसी समर्थन की मंशा पर सवाल उठाया है। हालांकि, उनकी पोस्ट पर चंद्रशेखर की कोई विशिष्ट प्रतिक्रिया उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिली है। <a href="https://navbharattimes.indiatimes.com/state/uttar-pradesh/bijnor/chandrashekhar-support-nishu-azad-discrepancy-swatantra-bhardwaj-statement-police/articleshow/133754100.cms">स्रोत: नवभारत टाइम्स</a></p>
<h2>निशु की शिकायत और पुलिस का जवाब</h2>
<p class="isSelectedEnd">निशु ने पुलिस की कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए राहुल गांधी से भी मदद मांगी थी। इस मामले में CJP से जुड़े लोग संसद मार्ग थाने पहुंचे और कार्रवाई की मांग की।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी ओर, नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट में नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा के हवाले से कहा गया है कि अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में चोटें मामूली बताई गई थीं। पुलिस ने सिर में क्रैक होने के दावे को मेडिकल रिकॉर्ड से मेल न खाने वाला बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों को उस समय हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी और अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। पुलिस ने किसी अनुचित प्रभाव या हस्तक्षेप के कारण कार्रवाई प्रभावित होने के आरोप को भी खारिज किया। यह पुलिस का पक्ष है; इसे मामले में अदालत का अंतिम निष्कर्ष नहीं समझा जाना चाहिए। <a href="https://navbharattimes.indiatimes.com/india/nishu-azad-father-beaten-alleged-swatantra-bhardwaj-video-uproar-cjp-protest-girl-appeal-rahul-gandhi-cockroach-janta-party-delhi-police/articleshow/133752926.cms">स्रोत: नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट</a></p>
<h2>विवाद में किन बातों का अंतर समझना जरूरी है?</h2>
<p class="isSelectedEnd">मारपीट की शिकायत, पुलिस का मेडिकल रिकॉर्ड पर आधारित जवाब और सोशल मीडिया पर नेताओं की मंशा को लेकर लगाए गए आरोप अलग-अलग बातें हैं। किसी आरोपी की जाति या किसी नेता पर व्यक्तिगत टिप्पणी से मारपीट के मामले के तथ्य तय नहीं होते।</p>
<p>इस मामले में शिकायतकर्ता के आरोपों और पुलिस के जवाब, दोनों को साथ पढ़ना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी में कल्पना श्रीवास्तव के निजी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, मारपीट के आरोपों पर अंतिम दोष निर्धारण अदालत की प्रक्रिया से होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/delhi/nishu-azad-case-chandrashekhar-kalpana-srivastava-row/article-1933</link>
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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 13:34:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वैश्विक संकट के बीच ट्रेड की जंग—भारत की डील पर सियासी टकराव तेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली।  दुनिया इस समय कई बड़े संघर्षों से गुजर रही है—यूक्रेन-रूस युद्ध, इजराइल-हमास टकराव और अब ईरान से बढ़ता तनाव। इन हालातों ने वैश्विक व्यापार को गहरे असर में डाल दिया है। रेड सी संकट, होर्मुज स्ट्रेट पर खतरा, शिपिंग रूट्स का बदलना और बढ़ती इंश्योरेंस लागत ने अंतरराष्ट्रीय ट्रेड को धीमा कर दिया है। WTO ने भी चेतावनी दी है कि 2026 में वैश्विक व्यापार वृद्धि बहुत सीमित रह सकती है।ऐसे समय में भारत की राजनीति में भी ट्रेड को लेकर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार India-US इंटरिम ट्रेड डील पर सवाल उठा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/delhi/trade-war-amid-global-crisis-%E2%80%93-political-conflict-intensifies-over/article-1756"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-03/rahulg.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  दुनिया इस समय कई बड़े संघर्षों से गुजर रही है—यूक्रेन-रूस युद्ध, इजराइल-हमास टकराव और अब ईरान से बढ़ता तनाव। इन हालातों ने वैश्विक व्यापार को गहरे असर में डाल दिया है। रेड सी संकट, होर्मुज स्ट्रेट पर खतरा, शिपिंग रूट्स का बदलना और बढ़ती इंश्योरेंस लागत ने अंतरराष्ट्रीय ट्रेड को धीमा कर दिया है। WTO ने भी चेतावनी दी है कि 2026 में वैश्विक व्यापार वृद्धि बहुत सीमित रह सकती है।ऐसे समय में भारत की राजनीति में भी ट्रेड को लेकर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार India-US इंटरिम ट्रेड डील पर सवाल उठा रहे हैं। संसद और अपनी रैलियों में उन्होंने इस समझौते को किसानों, उद्योग और डेटा सुरक्षा के लिए नुकसानदायक बताया है। उनका कहना है कि इस डील से भारत को बराबरी का फायदा नहीं मिलेगा और सरकार को इसे रद्द करने पर विचार करना चाहिए।</p>
<p>राहुल गांधी ने अपने बयानों में यह भी दावा किया कि इस समझौते में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जो भारतीय उद्योग और डेटा हितों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि जल्दबाजी में यह डील की गई और संसद में इस पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई।वहीं दूसरी तरफ सरकार और भाजपा इस आलोचना को खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक संकट के बीच यह ट्रेड डील भारत के लिए नए बाजारों तक पहुंच और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। सरकार का दावा है कि इससे खासकर टेक्सटाइल और अन्य निर्यात क्षेत्रों को फायदा मिल सकता है और भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत होगी।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में वैश्विक सप्लाई चेन पहले से ज्यादा अस्थिर हो गई है। रेड सी में हमलों के कारण जहाजों को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है, जिससे लागत बढ़ रही है। वहीं होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव ने ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में देशों के लिए वैकल्पिक व्यापार साझेदार और सुरक्षित रूट्स खोजना जरूरी हो गया है। इसी वजह से भारत के लिए भी यह जरूरी हो गया है कि वह अपने व्यापारिक विकल्पों को मजबूत करे और नए समझौतों के जरिए जोखिम कम करे। हालांकि इस पर राजनीतिक मतभेद साफ दिखाई दे रहे हैं—एक पक्ष इसे अवसर मान रहा है, तो दूसरा इसे संभावित खतरे के रूप में देख रहा है।पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल यही है कि जब दुनिया तेजी से बदल रही है और वैश्विक व्यापार नए समीकरणों की ओर बढ़ रहा है, तो क्या भारत को तेजी से निर्णय लेने चाहिए या ज्यादा सतर्क होकर हर पहलू पर विचार करना चाहिए?</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 18:42:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्रालयों के बीच तीखे प्रत्यारोप; बांग्लादेश ने भारत के बयान को 'गुमराह करने वाला' बताया, भारत ने अल्पसंख्यक हिंसा की 2,900 घटनाओं का जिक्र किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/tension-in-india-bangladesh-relations/article-1722"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/bangladesh-violence-killing-hindus.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/bangladesh-violence-killing-hindus.jpg" alt="bangladesh-violence-killing-hindus" width="800" height="557"></img>
उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में भड़की हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही

<p> </p>
<p><strong>नई दिल्ली/ढाका</strong>: भारत और बांग्लादेश के बीच अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर कूटनीतिक तलवारें खिंच गई हैं। बीते सप्ताह भारतीय विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की बर्बर हत्या का जिक्र करते हुए गहरी नाराजगी जताई थी। इसके जवाब में बांग्लादेश ने भारत के बयान को 'लक्षित हमला' करार देते हुए खारिज कर दिया, साथ ही भारत में मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यक समुदायों पर बढ़ते हमलों ने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संगठनों का ध्यान भी खींचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता का प्रतिबिंब है, जहां सांप्रदायिक सद्भाव की लंबी परंपरा खतरे में पड़ रही है।<br /><br /><strong>भारत का सख्त रुख: अल्पसंख्यक हिंसा पर चिंता, 2,900 घटनाओं का हवाला</strong><br />26 दिसंबर को नई दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बांग्लादेश में व्याप्त अशांति पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश में हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्धों समेत अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा को गंभीरता से देख रहा है। जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "कानून-व्यवस्था बनाए रखना बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी है। हमने वहां के झूठे भारत-विरोधी प्रचार को सिरे से खारिज किया है।"<br /><br />उन्होंने मैमनसिंह के भालुका इलाके में 18 दिसंबर को हुई दीपू चंद्र दास की हत्या का विशेष उल्लेख किया, जहां 'धर्म का अपमान' के आरोप में उग्र भीड़ ने युवक को पीट-पीटकर मार डाला और उसके शव को पेड़ से बांधकर आग लगा दी। जायसवाल ने इस घटना की कड़ी निंदा की और उम्मीद जताई कि अपराधियों को जल्द न्याय के कठघरे में लाया जाएगा। प्रवक्ता ने खुलासा किया कि अंतरिम सरकार के सत्ता संभालने के बाद अल्पसंख्यकों पर हमलों की 2,900 से अधिक घटनाएं विभिन्न स्रोतों से दर्ज की गई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन्हें महज 'राजनीतिक हिंसा' या 'मीडिया की अतिशयोक्ति' बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।<br /><br /><strong>बांग्लादेश का पलटवार: 'अपराधी' था मृतक, भारत में हेट क्राइम पर सवाल</strong><br />रविवार को ढाका में बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एसएम महबूबुल आलम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर भारत के बयान का जवाब दिया। आलम ने इसे 'टारगेटेड' और 'गुमराह करने वाला' बताते हुए कहा, "भारत का बयान बांग्लादेश के वास्तविक हालातों को प्रतिबिंबित नहीं करता। हम किसी भी झूठी, अतिरंजित या जानबूझकर गढ़ी गई कहानी को खारिज करते हैं, जो हमारी सांप्रदायिक सद्भाव की परंपरा को धूमिल करने का प्रयास है।"<br /><br />मंत्रालय ने दीपू चंद्र दास को 'लिस्टेड अपराधी' करार देते हुए दावा किया कि उनकी मौत एक मुस्लिम साथी से पैसे वसूलने के दौरान हुई, जिसे बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। आलम ने कहा, "इस घटना को अल्पसंख्यक उत्पीड़न के रूप में पेश करना भ्रामक है।" बांग्लादेश ने भारत से अपील की कि वह अपने यहां अल्पसंख्यक मुद्दों पर गलत प्रचार से बचे।<br /><br />इसके साथ ही, बांग्लादेश ने भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर उंगली उठाई। आलम ने कहा, "भारत में मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ क्रूर हत्याएं, लिंचिंग, मनमानी गिरफ्तारियां और धार्मिक आयोजनों में बाधा जैसी घटनाएं चिंताजनक हैं।" उन्होंने विशेष रूप से पिछले सप्ताह क्रिसमस के दौरान पूरे भारत में ईसाइयों पर हुए सामूहिक हमलों का जिक्र किया, जिन्हें 'हेट क्राइम' और 'लक्षित हिंसा' बताया। बांग्लादेश ने भारत से इनकी निष्पक्ष जांच की उम्मीद जताई।<br /><br /><strong>उस्मान हादी हत्याकांड: अभियुक्तों के 'भारत भागने' के दावे का भारतीय खंडन</strong><br />विवाद को और हवा तब मिली जब बांग्लादेश ने 2024 के छात्र विद्रोह के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के अभियुक्तों के भारत भागने का दावा किया। ढाका मेट्रोपोलिटन पुलिस के अनुसार, अभियुक्त फैसल करीम मसूद और आलमगीर शेख ने मैमनसिंह की हलुआघाट सीमा पार कर मेघालय में शरण ली। लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया।<br /><br />समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से बीएसएफ महानिदेशक और मेघालय के इंस्पेक्टर जनरल ओपी उपाध्याय ने कहा, "ढाका पुलिस का यह दावा भ्रामक और गलत है।" यह घटना उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसक प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आई, जहां पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व करने वाले हादी की हत्या ने देशव्यापी आक्रोश पैदा कर दिया।<br /><br /><strong>मैमनसिंह हत्याकांड और अंतरिम सरकार का बयान</strong><br />मैमनसिंह की घटना ने बांग्लादेश में सांप्रदायिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। भालुका पुलिस स्टेशन के ड्यूटी अधिकारी रिपन मियां ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि 18 दिसंबर रात करीब 9 बजे उग्र भीड़ ने दीपू को पैगंबर का अपमान करने के आरोप में पकड़ लिया और क्रूरता से उनकी हत्या कर दी। हालांकि, बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने इसकी निंदा करते हुए फेसबुक पर बयान जारी किया: "नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा की कोई जगह नहीं। अपराधियों को सजा मिलेगी।"<br /><br />20 दिसंबर को नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर हुए कथित प्रदर्शन ने भी विवाद को भड़काया। भारत ने इसे 'भ्रामक प्रोपेगैंडा' बताया, जबकि बांग्लादेश ने इसका विरोध दर्ज कराया। यह घटनाक्रम भारत-बांग्लादेश संबंधों में विश्वास की कमी को उजागर करता है, जहां आर्थिक साझेदारी के बावजूद सांप्रदायिक मुद्दे कूटनीति को प्रभावित कर रहे हैं।<br /><br />अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकारों का कहना है कि यह विवाद दक्षिण एशिया में अल्पसंख्यक अधिकारों पर एक बड़ा परीक्षण है। यदि समय रहते दोनों देश संवाद बढ़ाएं, तो अपराध और हिंसा की यह चक्र टूट सकती है, वरना सीमा पर तनाव और गहरा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 15:54:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमित शाह का असम दौरा</title>
                                    <description><![CDATA[कोहरे से प्रभावित एकदिवसीय यात्रा में 227 करोड़ का शंकरदेव जन्मस्थल पुनर्विकास, 189 करोड़ का आईसीसीएस सेंटर और 291 करोड़ का सांस्कृतिक परिसर; राजनीतिक संदेश के साथ आर्थिक उछाल की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/delhi/amit-shahs-visit-to-assam/article-1720"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/amit-shah-visit-assam.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/amit-shah-visit-assam1.jpg" alt="amit-shah-visit-assam" width="600" height="450"></img>
गृहमंत्री अमित शाह का स्वागत करते असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिश्व शर्मा

<p> </p>
<p>अमित शाह का असम दौरा: विकास परियोजनाओं की सौगात, सांस्कृतिक पुनरुत्थान और सुरक्षा मजबूती पर जोर<br />कोहरे से प्रभावित एकदिवसीय यात्रा में 227 करोड़ का शंकरदेव जन्मस्थल पुनर्विकास, 189 करोड़ का आईसीसीएस सेंटर और 291 करोड़ का सांस्कृतिक परिसर; राजनीतिक संदेश के साथ आर्थिक उछाल की उम्मीद<br /><br /><strong>नई दिल्ली/गुवाहाटी</strong>: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को असम के एकदिवसीय दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने राज्य की विकास यात्रा को नई गति देने वाली करोड़ों रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया। कोहरे के कारण रविवार रात अहमदाबाद से गुवाहाटी की उड़ान रद्द होने के बावजूद, शाह ने सोमवार सुबह ही अपना कार्यक्रम शुरू कर दिया। यह दौरा न केवल असम के सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करने और सुरक्षा तंत्र को सशक्त बनाने पर केंद्रित है, बल्कि पूर्वोत्तर की आर्थिक प्रगति को गति देने का भी एक मजबूत राजनीतिक संदेश देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये परियोजनाएं स्थानीय रोजगार सृजन और पर्यटन को बढ़ावा देकर असम की जीडीपी में 1-2 प्रतिशत का इजाफा कर सकती हैं, खासकर जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर के लिए 2025-26 बजट में 20% अधिक आवंटन की घोषणा कर चुकी है।<br /><br /><strong>शहीदों को श्रद्धांजलि: असम आंदोलन की स्मृति</strong><br />असम पहुंचते ही गृह मंत्री अमित शाह ने गुवाहाटी के 'शहीद स्मारक क्षेत्र' में असम आंदोलन के शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। यह कदम राज्य की क्षेत्रीय अस्मिता और अवैध घुसपैठ के खिलाफ ऐतिहासिक संघर्ष को रेखांकित करता है। शाह ने कहा, "शहीदों का बलिदान हमें मजबूत भारत की नींव देता है। असम का विकास इसी नींव पर खड़ा होगा।" यह श्रद्धांजलि न केवल भावनात्मक जुड़ाव पैदा करती है, बल्कि भाजपा की पूर्वोत्तर रणनीति में स्थानीय भावनाओं को प्राथमिकता देने का संकेत भी देती है।<br /><br /><strong>वैष्णव संत शंकरदेव के जन्मस्थल पर 227 करोड़ का ऐतिहासिक पुनर्विकास</strong><br />दौरे की मुख्य आकर्षण रही नागांव जिले के बोरदुवा स्थित बटाद्रवा थान, जहां वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव का जन्म हुआ था। गृह मंत्री ने यहां 227 करोड़ रुपये की लागत से विकसित पुनर्विकास परियोजना का उद्घाटन किया, जो असम की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ती है। इस प्रोजेक्ट में मंदिर परिसर का विस्तार, डिजिटल प्रदर्शनी केंद्र और पर्यटक सुविधाएं शामिल हैं, जो सालाना 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को आकर्षित करने की क्षमता रखता है। उद्घाटन के ठीक बाद शाह ने बोरदुवा में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया, जहां उन्होंने कहा, "शंकरदेव की भक्ति और एकता की भावना आज भी असम को प्रेरित करती है। केंद्र सरकार इस धरोहर को संरक्षित कर आर्थिक विकास का माध्यम बनाएगी।" आर्थिक दृष्टि से, यह परियोजना पर्यटन क्षेत्र में 500 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करेगी और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देगी।<br /><br /><strong>गुवाहाटी में सुरक्षा कवच: 189 करोड़ का आईसीसीएस सेंटर और पुलिस भवन</strong><br />गुवाहाटी लौटने पर अमित शाह ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने वाली दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई। पहली, 111 करोड़ रुपये की नई गुवाहाटी पुलिस कमिश्नरेट भवन, जो आधुनिक फोरेंसिक लैब और प्रशिक्षण केंद्र से लैस है। दूसरी, 189 करोड़ रुपये का इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (ICCS), जो 2,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से रीयल-टाइम निगरानी सुनिश्चित करेगा। यह सिस्टम आपातकालीन प्रतिक्रिया को 30% तेज करने के साथ-साथ अपराध दर में कमी लाने में सहायक होगा। शाह ने जोर देकर कहा, "सुरक्षा ही विकास की कुंजी है। असम में शांति और समृद्धि एक साथ फलेंगी।" आर्थिक नजरिए से, ICCS जैसी तकनीकी परियोजनाएं डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर निवेशकों का विश्वास बढ़ाएंगी, जो पूर्वोत्तर के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए वरदान साबित होंगी।<br /><br /><strong>सांस्कृतिक उत्सव का नया केंद्र: 291 करोड़ का ज्योति बिष्णु परिसर</strong><br />दिन के अंत में, गृह मंत्री ने गुवाहाटी में 291 करोड़ रुपये के ज्योति बिष्णु सांस्कृतिक परिसर का उद्घाटन किया। यह 5,000 सीटों वाला आधुनिक ऑडिटोरियम असम की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करने का वैश्विक मंच बनेगा, जिसमें थिएटर, संगीत और कला प्रदर्शनियों के लिए सुविधाएं होंगी। शाह ने इसे "असम की सॉफ्ट पावर" का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह युवाओं को रचनात्मकता के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान करेगा। कुल मिलाकर, आज के उद्घाटनों से असम को 800 करोड़ से अधिक की विकास सौगात मिली, जो राज्य की 2025-26 की विकास दर को 8% तक पहुंचाने में सहायक होगी।<br /><br />अमित शाह का यह दौरा भाजपा की पूर्वोत्तर नीति का आईना है, जहां सांस्कृतिक संरक्षण, सुरक्षा और आर्थिक विकास का त्रिवेणी संगम हो रहा है। लेकिन चुनौतियां बरकरार हैं—अवैध घुसपैठ और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए और अधिक निवेश की दरकार है। शाम को दिल्ली रवाना होने से पहले शाह ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से भेंट भी की, जहां दोनों ने आगामी योजनाओं पर चर्चा की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 14:24:35 +0530</pubDate>
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                <title>उन्नाव दुष्कर्म कांड: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की सजा पर हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[शीर्ष अदालत ने भाजपा के पूर्व विधायक की उम्रकैद पर दिल्ली हाईकोर्ट के निलंबन आदेश को स्थगित किया; पीड़िता पक्ष को मिली राहत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/delhi/unnao-rape-case-supreme-court-stays-high-courts-decision-on/article-1719"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/supreme-court-on-kuldeep_singh_sengar.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/supreme-court-on-kuldeep_singh_sengar.jpg" alt="supreme-court-on-kuldeep_singh_sengar" width="1280" height="720"></img>
उन्नाव रेप केस में दिल्ली हाईकोर्ट के फैंसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

<p> </p>
<p>नई दिल्ली: उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस विवादास्पद फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर जमानत दे दी गई थी। यह फैसला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिससे पीड़िता पक्ष में न्याय की नई उम्मीद जगी है। शीर्ष अदालत ने सेंगर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, जबकि मामले की अगली सुनवाई का इंतजार बाकी है।<br /><br /><strong>सीबीआई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख</strong><br />गौरतलब है कि चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने आज सीबीआई की उस विशेष अपील पर विचार किया, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के 23 दिसंबर के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने सेंगर की उम्रकैद की सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करते हुए उन्हें जमानत प्रदान की थी, जो इस संवेदनशील मामले में व्यापक आलोचना का विषय बना। सीबीआई ने तर्क दिया कि यह फैसला पीड़िता के न्याय के अधिकारों का हनन करता है और अपराध की गंभीरता को कमतर आंकता है।<br /><br />सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट कहा, "दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगाई जाती है।" अदालत ने मामले की गहराई से जांच का आश्वासन दिया और विस्तृत फैसले की प्रतीक्षा का संकेत दिया। इसके अलावा, पीड़िता की ओर से अधिवक्ता अंजलि पटेल और पूजा शिल्पकार द्वारा दायर याचिकाओं पर भी विचार किया जाएगा। उन्नाव दुष्कर्म कांड, जो 2017 से देश की न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता रहा है, अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केंद्रित हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय न केवल सेंगर के मामले को प्रभावित करेगा, बल्कि यौन अपराधों में न्याय की प्रक्रिया को मजबूत बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।<br /><br /><strong>पीड़िता पक्ष का दर्दभरा बयान: सुप्रीम कोर्ट पर अटूट विश्वास</strong><br />इससे पहले, रविवार को जंतर-मंतर पर उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता और उनकी मां ने सेंगर को मिली जमानत के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों समर्थक बैनर और तख्तियों के साथ सड़कों पर उतरे, जहां नारों से न्याय की मांग गूंजी। पीड़िता की मां ने भावुक होकर कहा, "हमें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है। हमें यकीन है कि वहां से हमें सच्चा न्याय मिलेगा।" उन्होंने खुलासा किया कि उन पर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन वे बिना किसी भय के अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी।<br /><br />पीड़िता ने सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की, "मुझे ऐसी सुरक्षा प्रदान की जाए, जिससे मैं निडर होकर अपनी लड़ाई लड़ सकूं।" यह बयान न केवल व्यक्तिगत पीड़ा को उजागर करता है, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल भी खड़े करता है। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती रही, लेकिन पीड़िता पक्ष ने अपनी आवाज बुलंद रखी।<br /><br />उन्नाव मामला, जिसमें सेंगर को पीड़िता के साथ दुष्कर्म और उसके पिता की हत्या के प्रयास के लिए दोषी ठहराया गया था, भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक काला अध्याय रहा है। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम पीड़िताओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकता है, लेकिन अंतिम फैसले का इंतजार ही पूरी कहानी का आधार बनेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/delhi/unnao-rape-case-supreme-court-stays-high-courts-decision-on/article-1719</link>
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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 13:50:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>'न्याय' की राहत या 'अपराध' की आहट?</title>
                                    <description><![CDATA[सजा निलंबित, पर अभी रिहाई दूर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/delhi/relief-of-justice-or-whiff-of-guilt/article-1717"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/kuldeep_singh_sngar_out_from_jail.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/kuldeep_singh_sngar_out_from_jail.jpg" alt="kuldeep_singh_sngar_out_from_jail" width="640" height="480"></img>
उन्नाव रेप केस में आरोपी भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर

<p> </p>
<div>उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित और रूह कंपा देने वाले 'माखी दुष्कर्म कांड' में एक नया मोड़ आ गया है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा मुख्य आरोपी और पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित किए जाने के बाद, न्याय की उम्मीद लगाए बैठी पीड़िता का दर्द एक बार फिर छलक पड़ा है। पीड़िता ने भावुक होते हुए कहा कि इस निर्णय ने उसकी रातों की नींद उड़ा दी है और उसके परिवार पर खतरे के बादल फिर से मंडराने लगे हैं।<br /><br /><strong>दहशत के साये में पीड़ित परिवार</strong><br />पीड़िता का आरोप है कि कुलदीप सिंह सेंगर एक रसूखदार बाहुबली हैं और उनके बाहर आने की सुगबुगाहट मात्र से उनके समर्थकों ने धमकियां देना शुरू कर दिया है। पीड़िता ने बताया, "जो लोग मेरे पिता की हत्या के मामले में जेल से छूटकर आए हैं, वे अब खुलेआम कह रहे हैं कि उनके 'कुलदीप भैया' वापस आ रहे हैं और अब एक-एक से हिसाब चुकता किया जाएगा।" गौरतलब है कि दुष्कर्म मामले में सजा निलंबित होने के बावजूद, सेंगर को अभी जेल में ही रहना होगा क्योंकि पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में उनकी अपील अभी लंबित है।<br /><br /><strong>माखी कांड: सत्ता के नशे और जुल्म की पूरी कहानी</strong><br />यह मामला 4 जून 2017 को शुरू हुआ था, जब नौकरी दिलाने के बहाने 17 वर्षीय किशोरी को विधायक के आवास पर बुलाया गया और उसके साथ दुष्कर्म किया गया। रसूख का आलम यह था कि जून 2017 से मार्च 2018 तक पीड़िता दर-दर भटकी, लेकिन पुलिस ने विधायक के प्रभाव में आकर मुकदमा तक दर्ज नहीं किया।<br /><br />पिता की मौत और सिस्टम के खिलाफ जंग 3 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता के साथ मारपीट की गई और उल्टा उन्हें ही जेल भेज दिया गया। न्याय न मिलता देख 8 अप्रैल 2018 को पीड़िता ने लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास किया। इसके अगले ही दिन जेल में उसके पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया, जिसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंपी गई और 13 अप्रैल 2018 को सेंगर की गिरफ्तारी हुई।<br /><br /><strong>सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और सुरक्षा का सवाल</strong><br />मामले ने तब और तूल पकड़ा जब 28 जुलाई 2019 को रायबरेली में पीड़िता की कार को एक ट्रक ने टक्कर मार दी। इस हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई, जबकि पीड़िता और उसके वकील महीनों तक जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया और मामले को उत्तर प्रदेश से दिल्ली की तीस हजारी अदालत में स्थानांतरित कर दिया। साथ ही, परिवार को सीआरपीएफ (CRPF) की सुरक्षा प्रदान की गई। हालांकि, 3 अप्रैल 2025 को सीआरपीएफ की सुरक्षा हटा दी गई, जिससे परिवार अब खुद को पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रहा है।<br /><br /><strong>अदालती फैसले और सजा का इतिहास</strong><br />20 दिसंबर 2019 को दिल्ली की अदालत ने सेंगर को नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद मार्च 2020 में पिता की हत्या के मामले में भी उसे 10 साल की सजा मिली। इस मामले में पुलिस प्रशासन की संलिप्तता भी उजागर हुई थी, जिसमें तत्कालीन थानाध्यक्ष अशोक भदौरिया और दरोगा केपी सिंह को भी सजा का सामना करना पड़ा।<br /><br /><strong>पक्ष-विपक्ष: न्यायपालिका पर विश्वास</strong><br />जहाँ एक ओर पीड़िता दहशत में है, वहीं सेंगर का परिवार इसे सत्य की जीत मान रहा है। सेंगर की पत्नी संगीता सेंगर ने कहा, "हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और जल्द ही पूर्ण न्याय मिलेगा।" वहीं उनकी मौसी सरोज सिंह ने इसे एक राजनीतिक साजिश करार देते हुए अपने भतीजे को निर्दोष बताया है।<br /><br />वर्तमान स्थिति ने एक बार फिर बाहुबल और न्याय के बीच के संघर्ष को चौराहे पर ला खड़ा किया है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के अगले रुख पर टिकी हैं।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/delhi/relief-of-justice-or-whiff-of-guilt/article-1717</link>
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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 18:33:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारत-बांग्लादेश संबंधों में अचानक खटास: दो दिनों में मित्रता से तनाव तक का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांगलादेश में भड़की हिंसा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/delhi/694548d90d564/article-1695"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/a54d06f0-b2b8-11ef-a3a7-6b7265261.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="margin-left:0.5in;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में महज </span><span>48 </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घंटों में नाटकीय बदलाव देखने को मिला है। जहां मंगलवार को विजय दिवस के मौके पर दोनों देशों की ऐतिहासिक मित्रता का जश्न मनाया गया</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं बुधवार से तनावपूर्ण बयानबाजी और राजनयिक तलब की घटनाओं ने रिश्तों को तनावग्रस्त बना दिया है। इस बदलाव की मुख्य वजह बांग्लादेश में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा और कुछ बांग्लादेशी नेताओं के भारत विरोधी बयान हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-left:0.5in;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बांग्लादेश के इंकलाब मंच के प्रमुख नेता और कट्टर भारत विरोधी माने जाने वाले शरीफ उस्मान हादी की सिंगापुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। वे पिछले हफ्ते ढाका में गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनकी मौत की खबर फैलते ही ढाका सहित कई शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने दो प्रमुख अखबारों के दफ्तरों पर हमला किया</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तोड़फोड़ की और आग लगाई। चटगांव में भारतीय सहायक उच्चायोग पर पत्थरबाजी हुई</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जबकि ढाका में भारतीय उच्चायोग की ओर मार्च की कोशिश की गई। कई जगहों पर भारत विरोधी नारे लगे और प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि हादी के हमलावर भारत भाग गए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-left:0.5in;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के दक्षिणी क्षेत्र के प्रमुख आयोजक हसनत अब्दुल्लाह ने विवादित बयान दिया कि यदि बांग्लादेश को अस्थिर करने की कोशिश की गई तो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों </span><span>'</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सेवन सिस्टर्स</span><span>' </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">को अलग-थलग कर दिया जाएगा और अलगाववादी ताकतों को शरण दी जाएगी। इस बयान की भारत ने कड़ी निंदा की और बांग्लादेशी उच्चायुक्त को तलब कर भारतीय मिशनों की सुरक्षा पर चिंता जताई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-left:0.5in;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने भी भारत पर </span><span>1971 </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के मुक्ति संग्राम में बांग्लादेश के योगदान को कम आंकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी स्वतंत्रता सेनानियों के बिना जीत संभव नहीं थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-left:0.5in;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी ओर</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंगलवार को दिल्ली के चाणक्यपुरी में बांग्लादेश उच्चायोग में विजय दिवस समारोह आयोजित किया गया था</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसमें भारतीय सेना के अधिकारी</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पूर्व राजनयिक</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">थिंक टैंक विशेषज्ञ और पत्रकार शामिल हुए। बांग्लादेशी उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह ने भारत के साथ संबंधों को </span><span>'</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गहरा और बहुआयामी</span><span>' </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया और </span><span>1971 </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। लेकिन अगले ही दिन भारतीय विदेश मंत्रालय ने उन्हें तलब कर बांग्लादेश में बढ़ते चरमपंथ और भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-left:0.5in;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पिछले डेढ़ साल में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के बीच उच्चायुक्तों को बार-बार तलब करने और आरोप-प्रत्यारोप की घटनाएं बढ़ी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश में बढ़ता कट्टरपंथ और भारत विरोधी भावना दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए चुनौती बन रही है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Dec 2025 18:28:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
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                <title>Waqf Act 2025 पर 'Supreme Court' में सुनवाई हुई पूरी, जानिए किसने क्या कहा!</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वक्फ संशोधन कानून </strong>2025 को लेकर पूरे देश में सियासी पारा गर्म है। इस बीच, आज गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में चीफ न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने 'वक्फ कानून' पर मामले की सुनवाई की। इस दौरान दोनों पक्षों ने कोर्ट में अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। जिन्हें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसजी तुषार मेहता पहले ही पिछली सुनवाई में आश्वस्त कर चुके हैं कि 'वक्फ एक्ट' के कुछ प्रावधान लागू नहीं होंगे! और इस पर यदि पालन नहीं होता तो कोर्ट देखेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले की सुनवाई के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/delhi/today-breaking-news/article-1574"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-05/2025_4image_17_27_485424208tyt.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वक्फ संशोधन कानून </strong>2025 को लेकर पूरे देश में सियासी पारा गर्म है। इस बीच, आज गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में चीफ न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने 'वक्फ कानून' पर मामले की सुनवाई की। इस दौरान दोनों पक्षों ने कोर्ट में अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। जिन्हें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसजी तुषार मेहता पहले ही पिछली सुनवाई में आश्वस्त कर चुके हैं कि 'वक्फ एक्ट' के कुछ प्रावधान लागू नहीं होंगे! और इस पर यदि पालन नहीं होता तो कोर्ट देखेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 20 मई को तारीख तय की है। चीफ जस्टिस बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑग्स्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच के सामने सरकार के तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा।</p>
<p>इस दौरान तुषार मेहता ने कहा कि हमने अपना जवाब कोर्ट में दाखिल कर दिया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुआई वाली बेंच ने पूछा कि क्या इस मामले में भी अंतरिम राहत के लिए सुनवाई हो रही है? इस सवाल का जवाब देते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अगर कोर्ट अंतरिम आदेश पर विचार करे, तो उसमें अधिक समय नहीं लगेगा! उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं की तरह वो भी शॉर्ट नोट्स दाखिल करेंगे। तो वहीं, वक्फ कानून के खिलाफ याचिका दायर करने वाले याचिकार्ताओं की ओर से देश के सीनियर वकील कपिल सिब्बल पेश हुए थे और कोर्ट के सामने याचिकार्ताओं का पक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमने एक शॉर्ट नोट तैयार कर लिया है, जिसे हम सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से शेयर कर सकते हैं।</p>
<p>इस पर तुषार मेहता ने कपिल सिब्बल का जवाब देते हुए कहा कि इस मामले में बड़ी संख्या में हस्तक्षेप आवेदन फाइल हुए हैं। ये कोर्ट पर निर्भर करता है कि वो सुने या नहीं! लेकिन मेरी राय में वो नहीं सुनी जानी चाहिए, यानी मुख्य याचिकाओं पर सुनवाई हो। वहीं सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने अपनी दलील रखते हुए कहा कि हमने अपनी याचिका में जिक्र किया है कि 'वक्फ एक्ट' में बदलाव के बावजूद इसके कुछ मनमाने प्रावधान बने हुए हैं! हमने पहले भी इन्हें रद्द करने की मांग की थी!</p>
<p>कोर्ट को हमारी मांग पर विचार करना चाहिए! इस पर कोर्ट ने कहा कि एसजी तुषार मेहता पिछली सुनवाई में ही आश्वासन दे चुके हैं कि 'वक्फ एक्ट' के कुछ प्रावधान लागू नहीं होंगे! यह व्यवस्था अभी लागू रहेगी! अगर इसका पालन नहीं होता है तो कोर्ट इस पर विचार करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आश्वासन दिया कि सरकार कोर्ट को दिए गए अपने अंडरटेकिंग पर कायम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ब्रेकिंगन्यूज़</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 May 2025 16:47:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Vishwakarma]]></dc:creator>
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