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                <title>अंतराष्ट्रीय - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <description>अंतराष्ट्रीय RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>5 दिन की राहत या तूफान से पहले की शांति? ट्रंप ने ईरान पर हमले रोके</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिका। मिडिल ईस्ट की लगातार बढ़ती जंग के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक ऐलान किया है कि अगले 5 दिनों तक ईरान के किसी भी पावर प्लांट और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई सैन्य हमला नहीं किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हालात तेजी से युद्ध की ओर बढ़ते दिख रहे थे और दुनिया भर में चिंता बढ़ गई थी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि हाल ही में हुई “बहुत अच्छी और प्रोडक्टिव बातचीत” के बाद उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को निर्देश दिया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/5-days-respite-or-calm-before-the-storm-trump-stops/article-1754"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-03/trump-image.jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिका। मिडिल ईस्ट की लगातार बढ़ती जंग के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक ऐलान किया है कि अगले 5 दिनों तक ईरान के किसी भी पावर प्लांट और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई सैन्य हमला नहीं किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हालात तेजी से युद्ध की ओर बढ़ते दिख रहे थे और दुनिया भर में चिंता बढ़ गई थी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि हाल ही में हुई “बहुत अच्छी और प्रोडक्टिव बातचीत” के बाद उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को निर्देश दिया है कि ईरान के पावर प्लांट्स और एनर्जी साइट्स पर हमले को 5 दिन के लिए टाल दिया जाए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बातचीत पूरे हफ्ते जारी रहेगी, यानी फिलहाल अमेरिका बातचीत के रास्ते को मौका देना चाहता है।दरअसल कुछ ही दिन पहले ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का सख्त अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी बाधा के पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के सबसे बड़े पावर प्लांट से शुरुआत करके पूरे एनर्जी सिस्टम को तबाह कर देगा। यह बयान अपने आप में बेहद आक्रामक था और इससे जंग का खतरा और बढ़ गया था।</p>
<p>होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत को समझना जरूरी है। यह वही रास्ता है, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। अगर यह रास्ता बाधित होता है, तो ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर सीधा असर पड़ता है और कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं। हाल ही में इसी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम तेजी से उछलते हुए देखे गए।लेकिन अब अमेरिका और ईरान के बीच वीकेंड पर हुई बातचीत ने हालात में थोड़ी नरमी लाई है। इसी बातचीत के बाद ट्रंप ने 5 दिन का यह “ब्रेक” देने का फैसला लिया है। इसे एक तरह से तनाव कम करने की कोशिश और बातचीत को आगे बढ़ाने का मौका माना जा रहा है।हालांकि इस फैसले के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। ईरान की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं, इजरायल और ईरान के बीच मिसाइल हमले और जवाबी कार्रवाई की खबरें अभी भी सामने आ रही हैं, जिससे यह साफ है कि जमीनी स्तर पर तनाव अभी भी बना हुआ है।</p>
<p>अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह 5 दिन का ब्रेक जंग खत्म होने की शुरुआत है, या फिर यह सिर्फ एक रणनीतिक विराम है जिसके बाद हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं। क्योंकि अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो वही पावर प्लांट पर हमले की योजना फिर से सक्रिय हो सकती है।इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक, हर चीज इस तनाव से प्रभावित हो रही है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र पर निर्भर करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 18:02:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>PM मोदी का बड़ा अलर्ट: कोरोना जैसा वक्त फिर आ सकता है! क्या है असली खतरा?” </title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली।  हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान “कोरोना काल” का उदाहरण देते हुए देश को आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार रहने की बात कही। इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं—कुछ लोगों ने इसे संभावित लॉकडाउन से जोड़ दिया, तो कुछ ने इसे किसी बड़े संकट का संकेत माना। लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है।प्रधानमंत्री का यह बयान किसी नए लॉकडाउन का संकेत नहीं है, बल्कि मौजूदा वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव और वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए एक चेतावनी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/draft-add%E2%80%9Cpm-modis-big-alert-times-like-corona-may-come/article-1752"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-03/ivk3kedg_pm-modi-new-parliament_625x300_28_may_23.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान “कोरोना काल” का उदाहरण देते हुए देश को आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार रहने की बात कही। इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं—कुछ लोगों ने इसे संभावित लॉकडाउन से जोड़ दिया, तो कुछ ने इसे किसी बड़े संकट का संकेत माना। लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है।प्रधानमंत्री का यह बयान किसी नए लॉकडाउन का संकेत नहीं है, बल्कि मौजूदा वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव और वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए एक चेतावनी और तैयारी का संदेश है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते टकराव, तेल-गैस सप्लाई पर खतरा और वैश्विक बाजार में अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने देशवासियों से कहा कि जिस तरह हमने कोरोना महामारी के दौरान धैर्य, संयम और एकजुटता के साथ मुश्किल समय का सामना किया था, उसी तरह अब भी हमें तैयार रहना होगा। उन्होंने साफ किया कि यह समय घबराने का नहीं, बल्कि सतर्क रहने का है। अगर वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था, ईंधन आपूर्ति और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है और उसका एक बड़ा भाग वेस्ट एशिया से आता है, इसलिए वहां की किसी भी अस्थिरता का सीधा असर देश के अंदर महसूस हो सकता है—चाहे वह पेट्रोल-डीजल की कीमतें हों, ट्रांसपोर्ट खर्च हो या रोजमर्रा की चीजों के दाम।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि सरकार पूरी तरह स्थिति पर नजर बनाए हुए है और हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। पेट्रोल-डीजल, LPG और बिजली की सप्लाई फिलहाल सामान्य है और किसी तरह की कमी की स्थिति नहीं है। साथ ही, विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार लगातार सक्रिय है और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित वापस लाने की पूरी तैयारी की गई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर हालात और गंभीर होते हैं, तो अफवाह फैलाने वालों और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो। यानी सरकार सिर्फ तैयारी की बात नहीं कर रही, बल्कि हर संभावित स्थिति से निपटने के लिए एक मजबूत व्यवस्था भी बना रही है।</p>
<p>इस पूरे बयान का निष्कर्ष यही है कि “कोरोना जैसी तैयारी” का मतलब लॉकडाउन नहीं, बल्कि सतर्कता, एकजुटता और जिम्मेदारी से हालात का सामना करना है। प्रधानमंत्री का यह संदेश एक तरह से देश को पहले से सचेत करने का प्रयास है, ताकि अगर भविष्य में कोई वैश्विक संकट आता है, तो भारत तैयार रहे और उसका असर कम से कम हो।अब सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक सावधानी भरा संदेश है या आने वाले समय में वाकई कोई बड़ा वैश्विक संकट खड़ा हो सकता है?<br />ईरान जंग पर अचानक ब्रेक! ट्रंप का चौंकाने वाला ऐलान – अगले 5 दिन तक पावर प्लांट पर कोई अटैक नहीं! दोस्तों, मिडिल ईस्ट की जंग में पहली बार राहत की सांस... अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद ऐलान कर दिया है कि ईरान के किसी भी पावर प्लांट और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर अगले 5 दिन तक कोई सैन्य हमला नहीं होगा! ट्रंप ने अपनी ट्रुथ सोशल पोस्ट में लिखा:<br /><strong>"बहुत अच्छी और प्रोडक्टिव बातचीत के आधार पर... मैंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को निर्देश दे दिया है कि ईरान के पावर प्लांट्स और एनर्जी साइट्स पर हमले को 5 दिन के लिए पोस्टपोन कर दिया जाए। ये बातचीत पूरे हफ्ते जारी रहेगी।"</strong></p>
<p>क्या है पूरा मामला?कुछ दिन पहले ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था – होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी धमकी के पूरी तरह खोलो, वरना अमेरिका ईरान के सबसे बड़े पावर प्लांट से शुरू करके सब(तबाह) कर देगा!  होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के 20% तेल का रास्ता है। इसके बंद होने से ग्लोबल ऑयल कीमतें आसमान छू रही थीं।  अब अमेरिका और ईरान के बीच विकेंड पर हुई बहुत अच्छी बातचीत  के बाद ट्रंप ने ये 5 दिन का ब्रेक दे दिया है। बातचीत जारी रहेगी – क्या ये जंग खत्म होने की शुरुआत है?ईरान की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन तनाव अभी भी बरकरार है। इजरायल-ईरान मिसाइल एक्सचेंज भी जारी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:36:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>परंपरागत युद्ध में भारत को नहीं हरा सकता पाकिस्तान</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> 12 जनवरी 2026</strong> पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर अक्सर दुनिया भर में बहस होती है, लेकिन अब पाकिस्तान के ही एक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक <strong>नजम सेठी</strong> ने इस पर से पर्दा उठा दिया है। सेठी ने साफ तौर पर स्वीकार किया है कि पाकिस्तान का परमाणु बम कोई 'इस्लामिक बम' नहीं है, बल्कि यह शुद्ध रूप से एक <strong>'एंटी-इंडिया बम'</strong> है।</p>
<p>पाकिस्तानी टीवी चैनल 'दुनिया न्यूज' से बातचीत करते हुए नजम सेठी ने पाकिस्तान की सैन्य कमजोरी को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान यह हकीकत जानता है कि वह परंपरागत युद्ध (Conventional War) में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong> 12 जनवरी 2026</strong> पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर अक्सर दुनिया भर में बहस होती है, लेकिन अब पाकिस्तान के ही एक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक <strong>नजम सेठी</strong> ने इस पर से पर्दा उठा दिया है। सेठी ने साफ तौर पर स्वीकार किया है कि पाकिस्तान का परमाणु बम कोई 'इस्लामिक बम' नहीं है, बल्कि यह शुद्ध रूप से एक <strong>'एंटी-इंडिया बम'</strong> है।</p>
<p>पाकिस्तानी टीवी चैनल 'दुनिया न्यूज' से बातचीत करते हुए नजम सेठी ने पाकिस्तान की सैन्य कमजोरी को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान यह हकीकत जानता है कि वह परंपरागत युद्ध (Conventional War) में भारत का मुकाबला नहीं कर सकता।</p>
<p>नजम सेठी के अनुसार, "हम पारंपारिक जंग में भारत को कभी नहीं रोक सकते। यही कारण है कि हमें कभी भी 'नो फर्स्ट यूज' (No First Use) पॉलिसी पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए।"</p>
<p>दुनिया के कई परमाणु शक्ति संपन्न देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं कि वे युद्ध की स्थिति में 'पहले' परमाणु हमला नहीं करेंगे। भारत भी इस नीति का पालन करता है। लेकिन पाकिस्तान इससे हमेशा बचता रहा है।</p>
<p>सेठी ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अपनी 'पहले परमाणु हमला करने' की धमकी को एक रक्षात्मक कवच की तरह इस्तेमाल करता है। अगर वह 'नो फर्स्ट यूज' पर हस्ताक्षर कर देता है, तो उसकी भारत को डराने की एकमात्र शक्ति खत्म हो जाएगी।</p>
<p>अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर चिंता जताई जाती है कि कहीं इनका इस्तेमाल इजरायल या पश्चिमी देशों के खिलाफ न हो जाए। इस पर सेठी ने कहा:</p>
<blockquote>
<p>"हम अपना बम इजरायल पर नहीं गिराएंगे और न ही अमेरिका पर। हमारा बम सिर्फ और सिर्फ भारत के खिलाफ है। यह एक रक्षात्मक लेकिन एंटी-इंडिया बम है।"</p>
</blockquote>
<p>नजम सेठी का यह बयान पाकिस्तान की उस कूटनीति की पुष्टि करता है जिसे <strong>'परमाणु ब्लैकमेलिंग'</strong> कहा जाता है। पाकिस्तान अपनी आर्थिक और सैन्य बदहाली को छिपाने के लिए अक्सर परमाणु हथियारों का डर दिखाता है। हालांकि, भारत ने हमेशा स्पष्ट किया है कि उसकी परमाणु नीति जिम्मेदारीपूर्ण है, लेकिन वह किसी भी दुस्साहस का जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है।</p>
<hr />
<p><strong>मुख्य बिंदु:</strong></p>
<ul>
<li>
<p>पाकिस्तान परंपरागत युद्ध में भारत से नहीं जीत सकता।</p>
</li>
<li>
<p>परमाणु बम का उद्देश्य केवल भारत को रोकना है।</p>
</li>
<li>
<p>पाकिस्तान 'No First Use' समझौते पर दस्तखत नहीं करेगा।</p>
</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 18:18:21 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खालिदा जिया का अंतिम संस्कार</title>
                                    <description><![CDATA[शेख हसीना के सत्ता छोड़ने के बाद विदेश मंत्री का पहला बांग्लादेश दौरा; पीएम मोदी का शोक संदेश लेकर पहुंचे जयशंकर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/role-act-like-senior-political-hindi-journalist-project-edit-above/article-1731"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/jaishankar-meets-tarique-rahman_jpg.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/jaishankar-meets-tarique-rahman_jpg.jpg" alt="Jaishankar-meets-Tarique-Rahman_jpg" width="770" height="431"></img>
विदेश मंत्री एस. जयशंकर तारिक़ रहमान को प्रधानमंत्री का शोक संदेश देते हुये

<p> </p>
<p><strong>ढाका</strong> | बांग्लादेश की राजनीति के एक युग का आज अंत हो गया। पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया को आज राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक और भावुक क्षण का गवाह बनने के लिए दुनिया भर के प्रतिनिधि ढाका पहुंचे हैं। भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने इस जनाजे में शामिल होकर नई दिल्ली की ओर से संवेदनाएं प्रकट कीं।</p>
<p><strong>पीएम मोदी का शोक पत्र और गर्मजोशी भरा 'हैंडशेक'</strong></p>
<p>विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ढाका पहुंचते ही खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान से मुलाकात की। इस दौरान जयशंकर ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष शोक पत्र सौंपा। मुलाकात की सबसे चर्चित तस्वीर जयशंकर और तारिक रहमान का हाथ मिलाना रही, जिसमें तारिक की बेटी जायमा रहमान भी मौजूद थीं। तनावपूर्ण संबंधों के बीच इस 'हैंडशेक' को भविष्य की नई कूटनीति की शुरुआत माना जा रहा है।</p>
<p><strong>रिश्तों की बर्फ पिघलने की उम्मीद: हसीना युग के बाद पहला दौरा</strong></p>
<p>अगस्त में शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद डॉ. जयशंकर का यह पहला बांग्लादेश दौरा है। भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह ने कहा, "विदेश मंत्री ने लोकतंत्र में बेगम जिया के योगदान को स्वीकार किया और भारत सरकार की ओर से एकजुटता प्रकट की।" विशेषज्ञों का मानना है कि यूनुस सरकार के दौरान बढ़ती भारत-विरोधी गतिविधियों और पाकिस्तान की सक्रियता के बीच, भारत ने मुख्य विपक्षी दल BNP के साथ संवाद का रास्ता खोलकर एक सधा हुआ कदम उठाया है।</p>
<p><strong>फरवरी चुनाव और तारिक रहमान की भूमिका</strong></p>
<p>17 साल के निर्वासन के बाद स्वदेश लौटे तारिक रहमान आगामी फरवरी 2026 में होने वाले चुनावों में प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार हैं। ऐसे में भारत का यह रुख स्पष्ट करता है कि नई दिल्ली अब बांग्लादेश की बदलती जमीनी हकीकत और नए नेतृत्व के साथ संबंध सुधारने की दिशा में आगे बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 17:28:09 +0530</pubDate>
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                <title>नेपाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर</title>
                                    <description><![CDATA[सात-सूत्रीय समझौते ने बदला हिमालयी देश का सियासी समीकरण; 5 मार्च के चुनावों में 'घंटी' के निशान पर उतरेंगे बालेन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/big-upheaval-in-nepals-politics/article-1730"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/belen_shah_pm_candidate_nepl.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/belen_shah_pm_candidate_nepl.jpg" alt="belen_shah_pm_candidate_nepl" width="720" height="405"></img>
नेपाल प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बालेंद्र शाह

<p> </p>
<p><strong>काठमांडू</strong>: नेपाल की राजनीति में रविवार को उस वक्त एक नया मोड़ आ गया जब काठमांडू के लोकप्रिय मेयर बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के साथ गठबंधन का औपचारिक ऐलान कर दिया। आधी रात तक चली लंबी मैराथन बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच एक 7-सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत 35 वर्षीय बालेन शाह आगामी 5 मार्च को होने वाले आम चुनावों में संसदीय दल के नेता और प्रधानमंत्री पद के भावी उम्मीदवार होंगे।</p>
<p><strong>RSP का नाम और सिंबल, बालेन का चेहरा</strong></p>
<p>समझौते की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि बालेन शाह और उनका संगठन अब राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के बैनर तले चुनाव लड़ेंगे। हालांकि बालेन की टीम का RSP में विलय हो गया है, लेकिन पार्टी का नाम, झंडा और चुनाव चिह्न (घंटी) पहले की तरह ही रहेगा। पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष की कमान रवि लामिछाने के हाथों में ही रहेगी।</p>
<p><strong>जेन-जी (Gen Z) आंदोलन का असर</strong></p>
<p>नेपाल में हाल ही में हुए युवा आंदोलन (Gen Z Movement) के बाद से ही बालेन शाह को राष्ट्रीय नेतृत्व संभालने के लिए जबरदस्त सोशल मीडिया समर्थन मिल रहा था। भ्रष्टाचार और पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतरे युवाओं ने बालेन को अपना अघोषित नायक मान लिया था। जानकारों का मानना है कि यह गठबंधन नेपाल की स्थापित पार्टियों—नेपाली कांग्रेस और के.पी. शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी (UML)—के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।</p>
<p>इंजीनियर से 'रैपर' और अब पीएम पद के दावेदार<br />बालेन शाह की राजनीतिक यात्रा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है:</p>
<p><strong>शिक्षा</strong>: व्हाइट हाउस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (काठमांडू) से सिविल इंजीनियरिंग और कर्नाटक (भारत) के विश्वेश्वरैया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर्स।</p>
<p><strong>पहचान:</strong> राजनीति में आने से पहले वह एक मशहूर रैपर और इंजीनियर के तौर पर विख्यात थे।</p>
<p><strong>चुनावी आगाज</strong>: 2022 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर काठमांडू के मेयर बने, जहाँ उन्होंने स्थापित दलों के दिग्गजों को भारी मतों से हराया।</p>
<p><strong>समीकरणों में क्या बदलेगा?</strong><br />भंग हो चुकी संसद में चौथी सबसे बड़ी पार्टी रही RSP के साथ बालेन का आना नेपाल की पारंपरिक सत्ता संरचना को हिला सकता है। बालेन ने 2017 में ही संकेत दिया था कि वह देश संवारने के लिए किसी और पर निर्भर रहने के बजाय खुद जिम्मेदारी लेंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नेपाल के मतदाता इस नई और युवा जोड़ी पर कितना भरोसा जताते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 16:45:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर नहीं थम रहा अत्याचार</title>
                                    <description><![CDATA[यूनुस सरकार की नाक के नीचे बढ़ते हमले, फैक्ट्री सिक्योरिटी में तैनात हिंदू जवान पर साथी का अचानक हमला; पूर्व में दीपू चंद्र दास की जघन्य हत्या की यादें ताजा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/atrocities-on-hindu-minorities-are-not-stopping-in-bangladesh/article-1726"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/one_more_hindu-killed_in_bangladesh.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/one_more_hindu-killed_in_bangladesh.jpg" alt="one_more_hindu-killed_in_bangladesh" width="1280" height="720"></img>
बांग्लादेश में एक और हिंदू बृजेंद्र बिस्वास की हत्या

<p> </p>
<p><strong>मयमनसिंह (बांग्लादेश) :</strong> बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय पर हिंसक घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। हाल ही में मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिले में ग्रामीण अर्धसैनिक बल (अंसार) के एक हिंदू सदस्य बृजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई। यह घटना नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल में हुई, जिसने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।<br /><br /><strong>घटना का विवरण: फैक्ट्री परिसर में साथी का घातक हमला</strong><br />बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भालुका उपजिले के मेहराबारी इलाके में स्थित सुल्ताना स्वेटर्स लिमिटेड फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था के लिए 20 अंसार सदस्य तैनात थे। इनमें बृजेंद्र बिस्वास भी शामिल थे, जो फैक्ट्री की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। सोमवार शाम करीब 6:30 बजे, जब बृजेंद्र अपने सहयोगी नोमान मियां के साथ कमरे में बैठे थे, तभी नोमान ने अचानक अपनी शॉटगन निकाल ली।<br /><br />लबीब ग्रुप के अंसार प्रभारी एपीसी मोहम्मद अजहर अली ने बताया कि घटना के समय दोनों के बीच कोई विवाद या तकरार नहीं हुई थी। नोमान ने चिल्लाते हुए कहा, "गोली मार दूंगा," और फिर ट्रिगर दबा दिया। गोली बृजेंद्र की बाईं जांघ में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हमलावर नोमान मौके से फरार हो गया, लेकिन स्थानीय पुलिस ने उसे शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया। जांच जारी है, और प्रारंभिक पूछताछ में धार्मिक या व्यक्तिगत दुर्भावना का संकेत मिला है।<br /><br /><strong>अल्पसंख्यकों पर बढ़ते खतरे की कड़ी</strong><br />यह हत्या मयमनसिंह जिले में हिंदुओं के खिलाफ हाल की दूसरी बड़ी घटना है। कुछ दिन पूर्व ही दीपू चंद्र दास नामक एक हिंदू युवक को क्रूरता से पीट-पीटकर अधमरा किया गया था। उसके बाद अपराधियों ने उसे पेड़ से बांधकर जिंदा जला दिया था। ये घटनाएं बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की असुरक्षा को उजागर करती हैं, जहां धार्मिक तनाव और राजनीतिक अस्थिरता के बीच अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ रहे हैं।<br /><br />मानवाधिकार संगठनों और हिंदू समुदाय के नेताओं ने यूनुस प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। वे कहते हैं कि ऐसी घटनाएं न केवल व्यक्तिगत हत्याएं हैं, बल्कि समुदाय-विरोधी साजिश का हिस्सा लगती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत सहित कई देशों ने बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।<br /><br /><strong>आगे की चुनौतियां: सुरक्षा और न्याय की मांग</strong><br />इस घटना ने बांग्लादेश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, खासकर अर्धसैनिक बलों में। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक आधार पर हिंसा को रोकने के लिए कड़े कानून और निष्पक्ष जांच जरूरी हैं। बृजेंद्र बिस्वास के परिवार को न्याय मिलना चाहिए, ताकि अन्य अल्पसंख्यक सदस्यों में भय का माहौल न फैले।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 18:20:01 +0530</pubDate>
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                <title>खालिदा जिया का निधन: एक 'साधारण गृहिणी' के दक्षिण एशिया की ताकतवर राजनेता बनने तक का ऐतिहासिक सफर</title>
                                    <description><![CDATA[संघर्ष, सत्ता और विवादों से भरा रहा बेगम जिया का 80 साल का जीवन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/khaleda-zias-death-is-a-historic-journey-from-an-ordinary/article-1725"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/khalida_zia_died_bangladesh.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/khalida_zia_died_bangladesh.jpg" alt="khalida_zia_died_bangladesh" width="700" height="393"></img>
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया

<p> </p>
<p>बांग्लादेश की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया ने मंगलवार (30 दिसंबर) सुबह 80 वर्ष की आयु में ढाका के एवरकेयर अस्पताल में अंतिम सांस ली। लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहीं खालिदा जिया का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है—एक ऐसी महिला जो कभी राजनीति में नहीं आना चाहती थीं, लेकिन नियति ने उन्हें देश की बागडोर सौंप दी।<br /><br /><br /><strong>'पुतुल' से 'खालिदा जिया' तक: शुरुआती जीवन और निकाह</strong><br />1945 में अविभाजित भारत के जलपाईगुड़ी में जन्मीं खालिदा खानम (पुकार का नाम 'पुतुल') का परिवार विभाजन के बाद पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के दिनाजपुर में बस गया। 1960 में उनका निकाह पाकिस्तानी सेना के तत्कालीन कैप्टन जियाउर रहमान से हुआ। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान, जब उनके पति विद्रोह का नेतृत्व कर रहे थे, खालिदा को पाकिस्तानी सेना ने नजरबंद रखा था। आजादी के बाद जियाउर रहमान राजनीति के शीर्ष पर पहुंचे, लेकिन खालिदा ने खुद को घर की दहलीज और बच्चों की परवरिश तक ही सीमित रखा।<br /><br /><strong>किचन से सत्ता के गलियारे तक: मजबूरी में उठाया राजनीतिक कदम</strong><br />खालिदा जिया की राजनीति में एंट्री किसी महत्वाकांक्षा का परिणाम नहीं, बल्कि एक त्रासदी की उपज थी। 1981 में राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या के बाद BNP बिखरने की कगार पर थी। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं के दबाव और विरासत को बचाने के लिए खालिदा ने घर के 'किचन' से बाहर निकलकर पार्टी की कमान संभाली। उन्होंने सैन्य तानाशाह जनरल इरशाद के खिलाफ करीब 9 साल तक सड़क पर संघर्ष किया, जिसने उन्हें एक जननेता के रूप में स्थापित कर दिया।<br /><br /><strong>दो बार प्रधानमंत्री और प्रशासन पर पकड़</strong><br />खालिदा जिया के नाम इतिहास में कई कीर्तिमान दर्ज हैं:<br /><br /><strong>ऐतिहासिक जीत: </strong>1991 के लोकतांत्रिक चुनाव में जीत हासिल कर वे बांग्लादेश की पहली और किसी मुस्लिम राष्ट्र की दूसरी महिला प्रधानमंत्री (बेनजीर भुट्टो के बाद) बनीं।<br />दो कार्यकाल: उन्होंने 1991-1996 और 2001-2006 तक दो पूर्ण कार्यकाल पूरे किए।<br />नीतिगत बदलाव: उनके दौर में निजीकरण और मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला, लेकिन साथ ही उन पर प्रशासन का 'इस्लामीकरण' करने के भी आरोप लगे।<br />भारत के साथ 'खट्टे-मीठे' संबंध और कट्टरपंथ का साया<br />खालिदा जिया का कार्यकाल भारत के साथ कूटनीतिक उतार-चढ़ाव वाला रहा। विशेष रूप से उनके दूसरे कार्यकाल (2001-2006) के दौरान, जब उनकी सरकार में 'जमात-ए-इस्लामी' शामिल थी, भारत के साथ संबंधों में भारी तनाव देखा गया। उस दौर में बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी उग्रवादी समूहों द्वारा किए जाने के गंभीर आरोप लगे, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में दूरियां बढ़ गईं।<br /><br /><strong>सत्ता से जेल और लंबी बीमारी तक का दंश</strong><br />2008 में आवामी लीग की शेख हसीना से मिली करारी हार के बाद खालिदा जिया का राजनीतिक ग्राफ गिरता गया। 2018 में उन्हें भ्रष्टाचार के मामलों में 17 साल की सजा सुनाई गई। जेल की सलाखों और नजरबंदी ने उनके स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित किया। हालांकि, अगस्त 2024 में शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद उन्हें सभी आरोपों से आधिकारिक तौर पर मुक्त कर दिया गया था, लेकिन तब तक उनका शरीर बीमारियों से काफी कमजोर हो चुका था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 17:40:44 +0530</pubDate>
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                <title>भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्रालयों के बीच तीखे प्रत्यारोप; बांग्लादेश ने भारत के बयान को 'गुमराह करने वाला' बताया, भारत ने अल्पसंख्यक हिंसा की 2,900 घटनाओं का जिक्र किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/tension-in-india-bangladesh-relations/article-1722"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/bangladesh-violence-killing-hindus.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/bangladesh-violence-killing-hindus.jpg" alt="bangladesh-violence-killing-hindus" width="800" height="557"></img>
उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में भड़की हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही

<p> </p>
<p><strong>नई दिल्ली/ढाका</strong>: भारत और बांग्लादेश के बीच अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर कूटनीतिक तलवारें खिंच गई हैं। बीते सप्ताह भारतीय विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की बर्बर हत्या का जिक्र करते हुए गहरी नाराजगी जताई थी। इसके जवाब में बांग्लादेश ने भारत के बयान को 'लक्षित हमला' करार देते हुए खारिज कर दिया, साथ ही भारत में मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यक समुदायों पर बढ़ते हमलों ने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संगठनों का ध्यान भी खींचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता का प्रतिबिंब है, जहां सांप्रदायिक सद्भाव की लंबी परंपरा खतरे में पड़ रही है।<br /><br /><strong>भारत का सख्त रुख: अल्पसंख्यक हिंसा पर चिंता, 2,900 घटनाओं का हवाला</strong><br />26 दिसंबर को नई दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बांग्लादेश में व्याप्त अशांति पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश में हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्धों समेत अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा को गंभीरता से देख रहा है। जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "कानून-व्यवस्था बनाए रखना बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी है। हमने वहां के झूठे भारत-विरोधी प्रचार को सिरे से खारिज किया है।"<br /><br />उन्होंने मैमनसिंह के भालुका इलाके में 18 दिसंबर को हुई दीपू चंद्र दास की हत्या का विशेष उल्लेख किया, जहां 'धर्म का अपमान' के आरोप में उग्र भीड़ ने युवक को पीट-पीटकर मार डाला और उसके शव को पेड़ से बांधकर आग लगा दी। जायसवाल ने इस घटना की कड़ी निंदा की और उम्मीद जताई कि अपराधियों को जल्द न्याय के कठघरे में लाया जाएगा। प्रवक्ता ने खुलासा किया कि अंतरिम सरकार के सत्ता संभालने के बाद अल्पसंख्यकों पर हमलों की 2,900 से अधिक घटनाएं विभिन्न स्रोतों से दर्ज की गई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन्हें महज 'राजनीतिक हिंसा' या 'मीडिया की अतिशयोक्ति' बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।<br /><br /><strong>बांग्लादेश का पलटवार: 'अपराधी' था मृतक, भारत में हेट क्राइम पर सवाल</strong><br />रविवार को ढाका में बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एसएम महबूबुल आलम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर भारत के बयान का जवाब दिया। आलम ने इसे 'टारगेटेड' और 'गुमराह करने वाला' बताते हुए कहा, "भारत का बयान बांग्लादेश के वास्तविक हालातों को प्रतिबिंबित नहीं करता। हम किसी भी झूठी, अतिरंजित या जानबूझकर गढ़ी गई कहानी को खारिज करते हैं, जो हमारी सांप्रदायिक सद्भाव की परंपरा को धूमिल करने का प्रयास है।"<br /><br />मंत्रालय ने दीपू चंद्र दास को 'लिस्टेड अपराधी' करार देते हुए दावा किया कि उनकी मौत एक मुस्लिम साथी से पैसे वसूलने के दौरान हुई, जिसे बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। आलम ने कहा, "इस घटना को अल्पसंख्यक उत्पीड़न के रूप में पेश करना भ्रामक है।" बांग्लादेश ने भारत से अपील की कि वह अपने यहां अल्पसंख्यक मुद्दों पर गलत प्रचार से बचे।<br /><br />इसके साथ ही, बांग्लादेश ने भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर उंगली उठाई। आलम ने कहा, "भारत में मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ क्रूर हत्याएं, लिंचिंग, मनमानी गिरफ्तारियां और धार्मिक आयोजनों में बाधा जैसी घटनाएं चिंताजनक हैं।" उन्होंने विशेष रूप से पिछले सप्ताह क्रिसमस के दौरान पूरे भारत में ईसाइयों पर हुए सामूहिक हमलों का जिक्र किया, जिन्हें 'हेट क्राइम' और 'लक्षित हिंसा' बताया। बांग्लादेश ने भारत से इनकी निष्पक्ष जांच की उम्मीद जताई।<br /><br /><strong>उस्मान हादी हत्याकांड: अभियुक्तों के 'भारत भागने' के दावे का भारतीय खंडन</strong><br />विवाद को और हवा तब मिली जब बांग्लादेश ने 2024 के छात्र विद्रोह के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के अभियुक्तों के भारत भागने का दावा किया। ढाका मेट्रोपोलिटन पुलिस के अनुसार, अभियुक्त फैसल करीम मसूद और आलमगीर शेख ने मैमनसिंह की हलुआघाट सीमा पार कर मेघालय में शरण ली। लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया।<br /><br />समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से बीएसएफ महानिदेशक और मेघालय के इंस्पेक्टर जनरल ओपी उपाध्याय ने कहा, "ढाका पुलिस का यह दावा भ्रामक और गलत है।" यह घटना उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसक प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आई, जहां पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व करने वाले हादी की हत्या ने देशव्यापी आक्रोश पैदा कर दिया।<br /><br /><strong>मैमनसिंह हत्याकांड और अंतरिम सरकार का बयान</strong><br />मैमनसिंह की घटना ने बांग्लादेश में सांप्रदायिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। भालुका पुलिस स्टेशन के ड्यूटी अधिकारी रिपन मियां ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि 18 दिसंबर रात करीब 9 बजे उग्र भीड़ ने दीपू को पैगंबर का अपमान करने के आरोप में पकड़ लिया और क्रूरता से उनकी हत्या कर दी। हालांकि, बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने इसकी निंदा करते हुए फेसबुक पर बयान जारी किया: "नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा की कोई जगह नहीं। अपराधियों को सजा मिलेगी।"<br /><br />20 दिसंबर को नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर हुए कथित प्रदर्शन ने भी विवाद को भड़काया। भारत ने इसे 'भ्रामक प्रोपेगैंडा' बताया, जबकि बांग्लादेश ने इसका विरोध दर्ज कराया। यह घटनाक्रम भारत-बांग्लादेश संबंधों में विश्वास की कमी को उजागर करता है, जहां आर्थिक साझेदारी के बावजूद सांप्रदायिक मुद्दे कूटनीति को प्रभावित कर रहे हैं।<br /><br />अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकारों का कहना है कि यह विवाद दक्षिण एशिया में अल्पसंख्यक अधिकारों पर एक बड़ा परीक्षण है। यदि समय रहते दोनों देश संवाद बढ़ाएं, तो अपराध और हिंसा की यह चक्र टूट सकती है, वरना सीमा पर तनाव और गहरा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 15:54:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बांग्लादेश में गहराता संकट: उस्मान हादी की हत्या के बाद हिंसा और अल्पसंख्यकों पर प्रहार</title>
                                    <description><![CDATA[उग्र चरमपंथी भीड़ ने एक हिंदू युवक को मारने के बाद टांग कर जलाया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/crisis-deepening-in-bangladesh-after-the-assassination-of-osman-hadi/article-1705"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/bangladesh_hindu_dipu_chandra_da.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/bangladesh_hindu_dipu_chandra_da.jpg" alt="उग्र चरमपंथी दल ने एक हिंदू युवक को पेड़ से लटका कर जलाया" width="1199" height="900"></img>
उग्र चरमपंथी भीड़ ने एक हिंदू युवक को पेड़ से लटका कर जलाया

<p> </p>
<p>बांग्लादेश में गहराता संकट: उस्मान हादी की हत्या के बाद हिंसा और अल्पसंख्यकों पर प्रहार<br />बांग्लादेश इस समय गंभीर आंतरिक अशांति और हिंसा के दौर से गुजर रहा है। भारत विरोधी नेता उस्मान हादी की हत्या ने देश में एक ऐसी चिंगारी लगा दी है, जिसने न केवल कानून-व्यवस्था को चरमरा दिया है, बल्कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।<br />हिंसा की शुरुआत: उस्मान हादी की हत्या<br />हाल ही में शेख हसीना सरकार के धुर विरोधी और भारत विरोधी नेता उस्मान हादी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे बांग्लादेश में कट्टरपंथियों ने हिंसक प्रदर्शन शुरू कर दिए।<br />•    भारत पर निराधार आरोप: कट्टरपंथी समूहों का दावा है कि हत्यारे सीमा पार कर भारत में शरण लिए हुए हैं।<br />•    सरकार और भारत का रुख: बांग्लादेश की वर्तमान सरकार ने स्पष्ट किया है कि संदिग्धों के भारत भागने का कोई प्रमाण नहीं है। वहीं, भारत सरकार ने भी इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।<br />भारतीय दूतावास पर मंडराता खतरा<br />बढ़ती अराजकता का असर राजनयिक संबंधों पर भी पड़ा है। उस्मान हादी की मौत के बाद प्रदर्शनकारियों ने भारतीय मिशनों को निशाना बनाने की कोशिश की। सुरक्षा कारणों को देखते हुए भारत ने चटगांव (Chittagong) में अपने मिशन की सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।</p>
<p>अल्पसंख्यकों पर हमला और ईशनिंदा का विवाद<br />हिंसा की आड़ में बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।<br />•    मयमनसिंह की घटना: पिछले सप्ताह मयमनसिंह इलाके में एक हिंदू युवक पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। क्रूरता की हद पार करते हुए भीड़ ने शव को आग के हवाले कर दिया।<br />•    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: इस घटना के वीडियो वायरल होने के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) और भारत सरकार ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की है।<br />दबाव में मोहम्मद यूनुस सरकार<br />बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस इस समय दोतरफा दबाव में हैं।<br />1.    अमेरिका से मदद की गुहार: स्थिति को नियंत्रित करने के लिए यूनुस ने अमेरिकी विशेष दूत सर्जियो गोर से फोन पर लंबी चर्चा की।<br />2.    चुनावों पर संशय: देश में जारी अराजकता के कारण 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि, यूनुस ने भरोसा दिलाया है कि चुनाव समय पर ही होंगे।</p>
<p>प्रेस की आजादी पर हमला<br />कट्टरपंथी न केवल सड़कों पर हिंसा कर रहे हैं, बल्कि वे स्वतंत्र आवाजों को भी दबाने की कोशिश में हैं।<br />•    देश के प्रमुख मीडिया संस्थानों के दफ्तरों में आगजनी और तोड़फोड़ की गई है।<br />•    जानकारों का मानना है कि यह मीडिया को डराने और सच को सामने आने से रोकने की एक सोची-समझी साजिश है।<br />अल्पसंख्यकों का पलटवार: 'सुरक्षा नहीं तो शांति नहीं'<br />अब अल्पसंख्यक समुदाय और सामाजिक संगठन भी डर छोड़कर सड़कों पर उतर आए हैं। राजधानी ढाका में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का सीधा आरोप है कि मोहम्मद यूनुस सरकार हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करने में पूरी तरह विफल रही है।</p>
<p>बांग्लादेश में जारी यह हिंसा केवल एक नेता की हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वहां की लोकतांत्रिक संस्थाओं और सामाजिक ताने-बाने पर हमला है। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या अंतरिम सरकार 12 फरवरी तक शांति बहाल कर पाएगी?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 16:06:14 +0530</pubDate>
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                <title>पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को पत्नी समेत 17 साल की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री व क्रिकेटर इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/69468b533c602/article-1701"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/imran-khan-and-bushra-bibi.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/imran-khan-and-bushra-bibi.jpg" alt="पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री व क्रिकेटर साथ ही उनकी पत्नी बुशरा बीबी" width="870" height="489"></img>
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री व क्रिकेटर साथ ही उनकी पत्नी बुशरा बीबी

<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पाकिस्तान की एक अदालत ने शनिवार</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, 20</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">17</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> साल की कड़ी सजा सुनाई है। आपको बता दें तोशाखाना जांच से जुड़ा एक अन्य और मामला है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसमें उन पर देश को मिले तोहफ़े की खरीद में गड़बड़ी करने का आरोप लगा था।<span>  </span>अब इस फैसले का ऐलान अडियाला जेल</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रावलपिंडी की विशेष अदालत ने किया था।<span>  </span>इमरान खान फिलहाल इसी जेल में बंद हैं. बता दें </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">17-17</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> साल की जेल की सजा के अलावा इमरान खान और बुशरा बीबी पर </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">1.64</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> करोड़ पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आखिर मामला क्या है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">?</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पाकिस्तान में तोशाखाना प्रणाली के तहत</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विदेशों से मिलने वाले उपहार देश के ख़ज़ाने में जमा कराने या उसका उचित मूल्य पर खरीदने का नियम है। आरोप ये है कि इमरान खान और बुशरा बीबी ने </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2021</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> में सऊदी क्राउन प्रिंस (मोहम्मद बिन सलमान) से मिले बुलगारी आभूषण सेट को बेहद कम कीमत पर खरीदा. अभियोजकों के मुताबिक</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी ने करीब </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">3,80,000</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> यूरो मूल्य के सेट को मात्र लगभग </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">29</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> लाख पाकिस्तानी रूपए में हासिल कर लिया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों पाकिस्तानी रुपयों का नुकसान भी हुआ.. </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत-विरोध के मुद्दे पर लड़ा जाएगा बांग्लादेश चुनाव</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">?</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस केस का फैसला सुनाने वाले जज शाहरुख अर्जुमंद ने दोनों को विश्वासघात के जुर्म में </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">10-10</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> साल की कठोर कारावास की सजा और भ्रष्टाचार रोधी कानून के तहत </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">7-7</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> साल की सजा सुनाई है। इसके चलते बुशरा बीबी को महिला होने के आधार पर मामूली राहतें भी दी गई हैं।<span>  </span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इमरान खान और उनकी पत्नी (बुशरा बीबी) की तरफ से वकीलों ने तुरंत हाई कोर्ट में अपील की बात कही है। उनका कहना है कि यह मुकदमा "राजनीतिक रूप से प्रेरित” और "बिन आधार” वाली बाते हैं। पाकिस्तान के लिए क्रिकेट विश्वकप जीतने वाली टीम के कप्तान रहे इमरान खान </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2018</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> से </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2022</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> तक देश के प्रधानमंत्री रहे थे। राजनीति में उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इन्साफ (पीटीआई) ने बेहद लोकप्रियता बटोरी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन अप्रैल </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2022</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> में उन्हें एक ‘नो कॉन्फिडेंस‘ वोट ने सत्ता से बेदखल कर दिया था। तब से वे कई मामलों का सामना कर रहे हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसमें यह तोशाखाना मामला भी शामिल है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसके बाद इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने इस फैसले को राजनीतिक हमला बताया है और आरोप लगाया कि सेना और विपक्ष ने मिलकर उन्हें राजनीति से दूर करने की साजिश रची है। आदेश सुनाते हुए अदालत ने कहा है कि जुर्माना ना देने पर जेल की सजा बढ़ जाएगी। अभी फिलहाल पीटीआई के समर्थक पाकिस्तान में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 17:44:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांग्लादेश में हुई हिंसा की चपेट में मीडिया भी</title>
                                    <description><![CDATA[अराजक तत्वों ने ढ़ाका के दो बड़े अखबारों के दफ्तरों को आग के हवाले कर दिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/media-also-in-the-grip-of-violence-in-bangladesh/article-1697"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/bangladesh-violence-ap.webp" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/bangladesh-violence-ap.webp" alt="ढ़ाका के दो अखबारों के दफ्तर को आग के हवाले किया गया" width="1200" height="675"></img>
ढ़ाका के दो अखबारों के दफ्तर को आग के हवाले किया गया

<p> </p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बांग्लादेश में हाल ही में हुई हिंसा और तनाव की घटनाओं ने वहां के मीडिया और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दिया है। आखिर हिंसा की वजह क्या है? </span></p>
<p class="MsoNormal"> </p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पिछले साल शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए आंदोलन के प्रमुख छात्र नेता उस्मान हादी की मौत के बाद ढाका में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। उस्मान को पिछले हफ्ते गोली लगी थी</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसके बाद गुरुवार को उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना ने जनता के गुस्से को भड़का दिया</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसका असर सड़कों पर दिखाई दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हमले और तोड़फोड़</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आक्रोशित भीड़ ने न केवल सरकारी और सांस्कृतिक केंद्रों को निशाना बनाया</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि मीडिया और राजनयिक क्षेत्रों पर भी हमले किए:</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मीडिया पर हमला: ढाका के दो बड़े अखबारों</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रथम आलो और डेली स्टार के दफ्तरों में आगजनी और तोड़फोड़ की गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऐतिहासिक स्थल: शेख मुजीब-उर-रहमान के घर और </span>'<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छायानौत</span>' <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सांस्कृतिक केंद्र को फिर से निशाना बनाया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>भारतीय दूतावास</strong>: ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर भी प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हिंदू युवक की हत्या और जमात-ए-इस्लामी का रुख</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मैमनसिंह इलाके में ईशनिंदा के आरोप में दीपू चंद्र दास नामक एक हिंदू युवक की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जमात-ए-इस्लामी की प्रतिक्रिया: संगठन के महासचिव ने इस </span>'<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मॉब लिंचिंग</span>' <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">की कड़ी निंदा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम ऐसी गैर-कानूनी हत्याओं की इजाजत नहीं देता और किसी भी आरोप का फैसला अदालत में होना चाहिए। उन्होंने सरकार से दोषियों को सजा देने की मांग की है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बांग्लादेशी मीडिया की आलोचना</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहां के स्थानीय मीडिया ने कानून-व्यवस्था को लेकर अंतरिम सरकार को आड़े हाथों लिया है:</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">न्यू एज अखबार ने इसे सरकार की "चिंताजनक विफलता" बताया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संपादकीय में कहा गया कि ऐसी घटनाओं (जैसे सूफी व्यक्ति को जलाना या हिंदू युवक की हत्या) में किसी की गिरफ्तारी न होना यह दर्शाता है कि प्रशासन पूरी तरह नाकाम है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मीडिया ने चेतावनी दी है कि बढ़ती धार्मिक कट्टरता देश में भारी अव्यवस्था पैदा कर रही है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 15:41:37 +0530</pubDate>
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                <title>इंसानी शरीर में सुअर का अंग </title>
                                    <description><![CDATA[<p>क्या इंसानी शरीर में सुअर का अंग काम कर सकता है? चीन में हुआ चौंकाने वाला मेडिकल एक्सपेरिमेंट! चीन के डॉक्टरों ने पहली बार एक ब्रेन डेड व्यक्ति में आनुवंशिक रूप से मॉडिफाई किए गए सुअर का लीवर ट्रांसप्लांट किया, जो 10 दिनों तक सफलतापूर्वक काम करता रहा। शीआन के झिजिंग अस्पताल में हुए इस ऑपरेशन का नेतृत्व प्रोफेसर लिन वांग ने किया, जिन्होंने इसे चिकित्सा जगत में एक ऐतिहासिक कदम बताया। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो भविष्य में इंसानी अंगों की कमी को पूरा करने के लिए सुअर के अंगों का उपयोग एक नई मेडिकल क्रांति साबित हो</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/human-body/article-1487"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-03/jsjjs.webp" alt=""></a><br /><p>क्या इंसानी शरीर में सुअर का अंग काम कर सकता है? चीन में हुआ चौंकाने वाला मेडिकल एक्सपेरिमेंट! चीन के डॉक्टरों ने पहली बार एक ब्रेन डेड व्यक्ति में आनुवंशिक रूप से मॉडिफाई किए गए सुअर का लीवर ट्रांसप्लांट किया, जो 10 दिनों तक सफलतापूर्वक काम करता रहा। शीआन के झिजिंग अस्पताल में हुए इस ऑपरेशन का नेतृत्व प्रोफेसर लिन वांग ने किया, जिन्होंने इसे चिकित्सा जगत में एक ऐतिहासिक कदम बताया। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो भविष्य में इंसानी अंगों की कमी को पूरा करने के लिए सुअर के अंगों का उपयोग एक नई मेडिकल क्रांति साबित हो सकता है। अमेरिका और चीन में पहले भी सुअर के दिल, किडनी और थाइमस ग्रंथि के ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं, लेकिन सभी मरीज जीवित नहीं रह सके। हालांकि, कुछ पूरी तरह ठीक होकर घर भी लौटे। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह प्रयोग इंसानी जिंदगी बचाने का नया रास्ता खोलेगा, या फिर यह सिर्फ एक अस्थायी सफलता बनकर रह जाएगा?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Mar 2025 16:50:36 +0530</pubDate>
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