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                <title>अंतराष्ट्रीय - Pratyakshdarshi Samachar</title>
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                <description>अंतराष्ट्रीय RSS Feed</description>
                
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                <title>BRICS के लिए भारत रवाना हुए ईरानी राष्ट्रपति, पेजेशकियन ने दुनिया को दिया बड़ा संदेश; PM मोदी से होगी अहम मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत रवाना होने से पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने समूह की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया। दिल्ली में उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/iran-president-masoud-pezeshkian-india-visit-brics-summit-modi-meeting/article-1987"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/iran-president-pezeshkian-india-brics-modi-meeting.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd"><strong>नई दिल्ली/तेहरान।</strong> ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत रवाना हुए। यात्रा से पहले उन्होंने BRICS की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया। ईरानी राष्ट्रपति ने इस समूह को दुनिया में बढ़ती एकतरफा नीतियों का मुकाबला करने और सदस्य देशों के बीच सहयोग मजबूत करने वाला प्रभावशाली मंच बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। पेजेशकियन इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात के कारण दोनों नेताओं की इस मुलाकात को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<h2>भारत रवाना होने से पहले क्या बोले पेजेशकियन?</h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/iran-president-pezeshkian-india-brics-modi-meeting.jpg.jpg" alt="iran-president-pezeshkian-india-brics-modi-meeting.jpg" width="1366" height="768"></img>
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत रवाना हुए। दिल्ली में उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। फोटो: सोशल मीडिया

<p class="isSelectedEnd"><a href="https://www.abplive.com/news/world/brics-summit-2026-president-of-iran-dr-pezeshkian-reaction-departs-for-india-3187358">एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट</a> के मुताबिक, भारत के लिए रवाना होने से पहले ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि BRICS दुनिया में एकतरफा नीतियों का सामना करने वाला प्रभावी मंच बन सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि BRICS सदस्य देशों के पास पर्याप्त आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक क्षमता है। यदि सदस्य देश आपसी सहयोग बढ़ाते हैं, तो यह समूह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पेजेशकियन का मानना है कि दुनिया के देशों के बीच संबंध केवल कुछ शक्तिशाली देशों के निर्णयों के आधार पर तय नहीं होने चाहिए। विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को भी अंतरराष्ट्रीय फैसलों में उचित भागीदारी मिलनी चाहिए।</p>
<h2>ईरानी राष्ट्रपति ने BRICS को क्यों बताया महत्वपूर्ण?</h2>
<p class="isSelectedEnd">ईरान लंबे समय से ऐसी बहुपक्षीय वैश्विक व्यवस्था का समर्थन करता रहा है, जिसमें किसी एक देश या समूह का प्रभाव न हो। ईरान BRICS को अपनी आर्थिक और कूटनीतिक साझेदारी बढ़ाने के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">BRICS देशों के बीच व्यापार बढ़ाने, स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल, वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर लगातार चर्चा हो रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ईरान का मानना है कि सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ने से एकतरफा प्रतिबंधों और बाहरी दबावों का प्रभाव कम किया जा सकता है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर सभी सदस्य देशों के बीच सहमति और व्यावहारिक व्यवस्था तैयार करना अभी एक बड़ी चुनौती है।</p>
<h2>PM मोदी से होगी अहम द्विपक्षीय बातचीत</h2>
<p class="isSelectedEnd">नई दिल्ली में राष्ट्रपति पेजेशकियन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच भारत-ईरान संबंधों के साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><a href="https://indianexpress.com/article/india/pezeshkian-arrives-today-will-meet-modi-ahead-of-summit-10872692/">इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट</a> के अनुसार, पेजेशकियन BRICS शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बैठक के आधिकारिक एजेंडे की विस्तृत जानकारी बातचीत के बाद सामने आएगी। इसके बावजूद भारत-ईरान व्यापार, चाबहार बंदरगाह, क्षेत्रीय संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया की स्थिति प्रमुख विषय रह सकते हैं।</p>
<h2>पश्चिम एशिया के तनाव पर रहेगी दुनिया की नजर</h2>
<p class="isSelectedEnd">ईरानी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया गंभीर तनाव से गुजर रहा है। क्षेत्र में किसी भी बड़े संघर्ष का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत ने लगातार बातचीत और कूटनीति के माध्यम से विवादों का समाधान निकालने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को सुरक्षित और खुला रखने की आवश्यकता भी दोहरा चुके हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">ऐसे में मोदी-पेजेशकियन बैठक के दौरान पश्चिम एशिया में शांति, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े विषय उठ सकते हैं। किसी संभावित साझा बयान की जानकारी बैठक पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।</p>
<h2>चाबहार बंदरगाह पर भी हो सकती है चर्चा</h2>
<p class="isSelectedEnd">भारत और ईरान के बीच रणनीतिक संबंधों में चाबहार बंदरगाह का विशेष महत्व है। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान से गुजरे बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने का वैकल्पिक मार्ग प्रदान करता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत ने चाबहार बंदरगाह के विकास और संचालन में निवेश किया है। यह परियोजना व्यापारिक होने के साथ भारत की क्षेत्रीय संपर्क नीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन की मुलाकात में चाबहार परियोजना की प्रगति और इसके माध्यम से व्यापार बढ़ाने के उपायों पर बातचीत संभव है। हालांकि, दोनों देशों ने इस बैठक के विस्तृत एजेंडे को लेकर अभी कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं की है।</p>
<h2>व्यापार बढ़ाना चाहते हैं दोनों देश</h2>
<p class="isSelectedEnd">भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं। फारसी भाषा और संस्कृति का भारत पर गहरा प्रभाव रहा है। वर्तमान समय में दोनों देशों के रिश्ते व्यापार, परिवहन, ऊर्जा, क्षेत्रीय संपर्क और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों तक फैले हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और बैंकिंग से संबंधित कठिनाइयों के कारण भारत-ईरान व्यापार अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाया है। दोनों देश व्यापार बढ़ाने के लिए वैकल्पिक और व्यावहारिक रास्तों पर बातचीत करते रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">BRICS का मंच भारत और ईरान को आर्थिक सहयोग बढ़ाने के नए विकल्पों पर चर्चा करने का अवसर दे सकता है।</p>
<h2>भारत के लिए ईरान क्यों महत्वपूर्ण है?</h2>
<p class="isSelectedEnd">भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ईरान दुनिया के प्रमुख तेल और गैस उत्पादक देशों में शामिल है। इसलिए ईरान और उसके आसपास की स्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके अतिरिक्त ईरान की भौगोलिक स्थिति भारत को अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरेशिया से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकती है। चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे जैसी परियोजनाएं इसी रणनीति से जुड़ी हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और प्रतिबंधों के कारण दोनों देशों को आर्थिक सहयोग आगे बढ़ाने में कई व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।</p>
<h2>दिल्ली में दुनिया के बड़े नेताओं का जमावड़ा</h2>
<p class="isSelectedEnd">18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित कई वैश्विक नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी सात वर्षों बाद भारत आ रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री मोदी की पुतिन, शी जिनपिंग और पेजेशकियन के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठकों पर पूरी दुनिया की नजर है। इन बैठकों में द्विपक्षीय रिश्तों के साथ कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर चर्चा होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। सम्मेलन में सदस्य देशों के अतिरिक्त साझेदार देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं।</p>
<h2>BRICS सम्मेलन का प्रमुख एजेंडा क्या है?</h2>
<p class="isSelectedEnd">सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, वैश्विक संस्थाओं में सुधार, तकनीक, स्वास्थ्य, निवेश, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और सीमा पार भुगतान को आसान बनाने के उपाय भी प्रमुख विषय हो सकते हैं। सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की मांग करते रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">लेकिन विस्तारित BRICS में शामिल देशों के राजनीतिक और आर्थिक हित अलग-अलग हैं। इसलिए हर बड़े वैश्विक मुद्दे पर साझा सहमति बनाना आसान नहीं होगा।</p>
<h2>पेजेशकियन की यात्रा से क्या उम्मीद?</h2>
<p class="isSelectedEnd">राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की यात्रा से भारत और ईरान के संबंधों में नई गति आने की उम्मीद की जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी से उनकी बातचीत में व्यापार, संपर्क और क्षेत्रीय सुरक्षा पर आगे का रास्ता तय हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि दोनों देश चाबहार बंदरगाह और द्विपक्षीय व्यापार जैसे पुराने मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति कर पाते हैं या नहीं।</p>
<p>फिलहाल पेजेशकियन ने BRICS की ताकत और एकतरफा वैश्विक नीतियों के मुकाबले उसकी भूमिका को लेकर अपना संदेश दे दिया है। अब दुनिया की नजर दिल्ली में होने वाली उनकी बैठकों और BRICS सम्मेलन के संयुक्त घोषणा-पत्र पर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 15:05:15 +0530</pubDate>
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                <title>हिंदू प्रतिनिधिमंडल के दौरे पर महिला स्टाफ को हटाने का आरोप, हड़ताल से बंद हुआ Eiffel Tower; BAPS ने दी सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[पेरिस के एफिल टावर पर BAPS से जुड़े हिंदू प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को कथित रूप से कार्यस्थल से हटाने का मामला सामने आया है। विरोध में कर्मचारियों ने हड़ताल की, जिससे एफिल टावर पर्यटकों के लिए बंद रहा। BAPS ने जानबूझकर किसी को अलग करने से इनकार करते हुए खेद जताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/eiffel-tower-strike-baps-hindu-delegation-women-staff-controversy/article-1967"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/eiffel-tower-strike-baps-hindu-delegation-women-staff-row.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>पेरिस।</strong> फ्रांस की राजधानी पेरिस का विश्व प्रसिद्ध एफिल टावर एक धार्मिक प्रतिनिधिमंडल के निजी दौरे के बाद विवादों में आ गया। आरोप है कि हिंदू धार्मिक संस्था BAPS के प्रतिनिधियों के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थलों से हटाकर कुछ स्थानों पर पुरुष कर्मचारियों को तैनात किया गया।</p>
<p>इस घटना से नाराज एफिल टावर के कर्मचारियों ने सोमवार, 7 सितंबर को हड़ताल कर दी। इसके कारण एफिल टावर को पर्यटकों के लिए बंद रखना पड़ा। कर्मचारियों ने प्रबंधन से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि भविष्य में किसी भी प्रतिनिधिमंडल के लिए महिला कर्मचारियों के साथ ऐसा व्यवहार न किया जाए।</p>
<p>एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी SETE ने स्वीकार किया कि दौरे से जुड़ी कुछ शर्तों को मानना गलत था। वहीं BAPS ने जानबूझकर महिलाओं को अलग रखने की बात से इनकार किया और घटना से किसी को हुई परेशानी या दुख के लिए माफी मांगी है।</p>
<h2>कब और कैसे शुरू हुआ विवाद?</h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/eiffel-tower-strike-baps-hindu-delegation-women-staff-row.jpg.jpg" alt="eiffel-tower-strike-baps-hindu-delegation-women-staff-row.jpg" width="1366" height="768"></img>
BAPS प्रतिनिधिमंडल के निजी दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को कथित रूप से हटाने के विरोध में एफिल टावर के कर्मचारियों ने हड़ताल की।

<p>यह मामला शनिवार, 5 सितंबर 2026 को BAPS यानी बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था से जुड़े करीब 100 लोगों के निजी दौरे से जुड़ा है।</p>
<p>प्रतिनिधिमंडल के सदस्य पेरिस के पास बनाए गए एक नए हिंदू मंदिर के उद्घाटन से संबंधित धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए फ्रांस पहुंचे थे। बड़ी संख्या को देखते हुए प्रतिनिधिमंडल के लिए एफिल टावर के नियमित रूप से खुलने से पहले विशेष दौरे की व्यवस्था की गई थी।</p>
<p>कर्मचारी यूनियन के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल के गुजरने से पहले कुछ महिला कर्मचारियों को अपनी पोस्ट छोड़ने और दूसरे स्थान पर जाने के निर्देश दिए गए। कुछ स्थानों पर महिला कर्मचारियों की जगह पुरुषों को तैनात करने का आरोप भी लगाया गया है।</p>
<h2>महिला कर्मचारियों ने क्या आरोप लगाए?</h2>
<p>यूनियन प्रतिनिधि डायने डावोइन के मुताबिक, महिला कर्मचारियों को उन क्षेत्रों से हटाया गया, जहां से प्रतिनिधिमंडल को गुजरना था। कुछ महिला कर्मचारियों को कथित तौर पर दौरा समाप्त होने तक विशेष क्षेत्रों में प्रवेश नहीं करने के लिए कहा गया।</p>
<p>कर्मचारियों का कहना है कि केवल महिला होने के कारण उन्हें अलग करना अपमानजनक और लैंगिक समानता के सिद्धांत के खिलाफ था। घटना की जानकारी अन्य कर्मचारियों तक पहुंचने के बाद सामूहिक बैठक बुलाई गई और हड़ताल का फैसला किया गया।</p>
<p>हड़ताल के कारण सोमवार को एफिल टावर पर्यटकों के लिए बंद रहा। इससे वहां पहुंचे हजारों पर्यटकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। <a class="decorated-link" href="https://www.reuters.com/business/media-telecom/paris-investigates-claim-women-were-hidden-hindu-delegation-eiffel-tower-2026-09-07/?utm_source=chatgpt.com">रॉयटर्स की विस्तृत रिपोर्ट</a></p>
<h2>प्रबंधन ने स्वीकार की अपनी गलती</h2>
<p>एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी SETE ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल की ओर से महिलाओं के साथ बातचीत सीमित रखने से जुड़ा अनुरोध किया गया था।</p>
<p>कंपनी ने स्वीकार किया कि इस प्रकार की शर्त को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था। प्रबंधन ने इसे अपनी संस्था के मूल्यों और फ्रांस में महिला-पुरुष समानता के सिद्धांत के विपरीत बताया।</p>
<p>SETE के अध्यक्ष एरियल वेइल ने कहा कि कर्मचारियों को ऐसी स्थिति में डालना स्वीकार्य नहीं है। प्रबंधन ने महिला कर्मचारियों और अन्य स्टाफ से माफी मांगते हुए भविष्य में इस प्रकार की घटना दोबारा नहीं होने देने का भरोसा दिया।</p>
<p><a class="decorated-link" href="https://indianexpress.com/article/world/eiffel-tower-closed-staff-strike-women-baps-hindu-group-visit-10867839/?utm_source=chatgpt.com">इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट</a> के मुताबिक, कर्मचारियों ने प्रबंधन से स्पष्ट नियम बनाने और किसी धार्मिक या निजी प्रतिनिधिमंडल के लिए लैंगिक आधार पर कर्मचारियों को अलग नहीं करने की मांग की है।</p>
<h2>BAPS ने क्या सफाई दी?</h2>
<p>विवाद बढ़ने के बाद BAPS ने बयान जारी कर कहा कि एफिल टावर के दौरे की व्यवस्था टावर प्रबंधन के सहयोग से नियमित समय से पहले की गई थी। इसका उद्देश्य बड़ी संख्या में आए प्रतिनिधियों के कारण दूसरे पर्यटकों को होने वाली असुविधा को कम करना था।</p>
<p>संस्था ने दावा किया कि उसकी जानकारी में किसी व्यक्ति को एफिल टावर में प्रवेश करने से नहीं रोका गया। BAPS ने महिलाओं को जानबूझकर कार्यस्थल से हटाने या उनके साथ भेदभाव करने की बात से इनकार किया।</p>
<p>हालांकि, संस्था ने कहा कि यदि इस व्यवस्था से किसी कर्मचारी को दुख, परेशानी या अपमान महसूस हुआ है तो वह उसके लिए ईमानदारी से माफी मांगती है। BAPS ने आपसी सम्मान, सेवा और सद्भाव के मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।</p>
<h2>फ्रांस सरकार के नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया</h2>
<p>इस घटना पर फ्रांस के कई राजनीतिक नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने कर्मचारियों की नाराजगी को उचित बताते हुए मामले की तत्काल जांच कराने की घोषणा की।</p>
<p>फ्रांस की लैंगिक समानता मंत्री ऑरोर बर्गे ने कहा कि फ्रांस में महिलाओं से पीछे हटने या सार्वजनिक स्थानों पर दिखाई न देने के लिए नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि कोई भी धार्मिक विश्वास या परंपरा फ्रांस के कानून और महिला-पुरुष समानता से ऊपर नहीं है।</p>
<p>फ्रांस की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष याएल ब्रॉन-पिवे और पूर्व प्रधानमंत्री गेब्रियल अटाल ने भी घटना की आलोचना की। नेताओं ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के साथ समान व्यवहार फ्रांस के गणतांत्रिक मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।</p>
<h2>क्या टावर दोबारा खोल दिया गया?</h2>
<p>कर्मचारियों की हड़ताल के कारण एफिल टावर सोमवार को बंद रहा। प्रबंधन से बातचीत और मामले की जांच के आश्वासन के बाद इसे मंगलवार, 8 सितंबर को पर्यटकों के लिए दोबारा खोलने की तैयारी की गई।</p>
<p>कर्मचारियों ने मांग की है कि भविष्य में निजी अथवा धार्मिक दौरों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था स्वीकार न की जाए, जिससे महिला कर्मचारियों को उनके पद से हटना पड़े या उनकी आवाजाही सीमित हो।</p>
<h2>जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?</h2>
<p>पेरिस प्रशासन की जांच में यह पता लगाया जाएगा कि महिला कर्मचारियों को हटाने का निर्देश किस स्तर पर दिया गया था। यह भी देखा जाएगा कि प्रतिनिधिमंडल की ओर से वास्तव में क्या अनुरोध किया गया और प्रबंधन ने उसे किस आधार पर स्वीकार किया।</p>
<p>जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि क्या संबंधित निर्देश एफिल टावर प्रबंधन ने अपनी तरफ से दिए थे या प्रतिनिधिमंडल की मांग पर दिए गए। फिलहाल कर्मचारियों के आरोप, SETE की स्वीकारोक्ति और BAPS की सफाई—तीनों पक्ष सामने हैं।</p>
<p><a class="decorated-link" href="https://www.bhaskar.com/g/international/news/eiffel-tower-paris-strike-hindu-group-visit-controversy-france-138966321.html">दैनिक भास्कर की रिपोर्ट</a> के अनुसार, पूरे विवाद ने फ्रांस में धार्मिक स्वतंत्रता और लैंगिक समानता के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 14:14:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
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                <title>बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना पर डबल अटैक, BLA का 25 जवान मारने का दावा; वीडियो भी किया जारी</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में बलूच लिबरेशन आर्मी ने दो अलग-अलग हमलों में पाकिस्तानी सेना के 25 जवानों को मारने का दावा किया है। संगठन ने हमलों से जुड़े कथित वीडियो भी जारी किए हैं। पाकिस्तान सरकार या सेना ने BLA के बताए हताहतों के आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/balochistan-bla-attacks-pakistan-army-25-soldiers-killed-claim/article-1958"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/balochistan-bla-double-attack-pakistan-army-25-soldiers-claim.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>क्वेटा/इस्लामाबाद।</strong> पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हिंसा का नया दौर शुरू हो गया है। प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी यानी BLA ने दो अलग-अलग हमलों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के 25 जवानों को मारने का दावा किया है।</p>
<p>BLA के अनुसार, पहला हमला जियारत क्रॉस इलाके में पाकिस्तानी सेना के एक काफिले पर किया गया, जबकि दूसरा हमला सुराब के हाजिका इलाके में रिमोट से नियंत्रित विस्फोटक उपकरण यानी IED के जरिए हुआ।</p>
<p>संगठन ने हमलों के कथित वीडियो भी जारी किए हैं। इनमें सैन्य वाहनों को नुकसान पहुंचने और हथियारों के साथ मौजूद लड़ाकों को दिखाया गया है। हालांकि, वीडियो कब और कहां रिकॉर्ड किए गए, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।</p>
<p>सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 25 सैनिकों की मौत का आंकड़ा BLA का दावा है। पाकिस्तान सरकार या सेना ने इस विशिष्ट दावे की पुष्टि नहीं की है।</p>
<h3>जियारत में सैन्य काफिले पर हमला</h3>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/balochistan-bla-double-attack-pakistan-army-25-soldiers-claim.jpg2.jpg" alt="balochistan-bla-double-attack-pakistan-army-25-soldiers-claim.jpg" width="1366" height="768"></img>
BLA ने बलूचिस्तान के जियारत और सुराब में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर हमले कर 25 जवानों को मारने का दावा किया है। आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

<p>BLA ने दावा किया कि उसकी ‘फतेह स्क्वॉड’ ने जियारत क्रॉस के पास पाकिस्तानी सेना के काफिले को घेरकर हमला किया। संगठन के अनुसार, हमले में सेना के दो वाहन नष्ट हो गए।</p>
<p>BLA ने इस हमले में 18 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने और पांच के घायल होने का दावा किया है। संगठन का कहना है कि कुछ घायल जवान घटनास्थल से निकलने में सफल रहे।</p>
<p>जियारत हमला किस तारीख और समय पर हुआ तथा काफिले में कुल कितने जवान मौजूद थे, इस पर पाकिस्तान की तरफ से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।</p>
<p>BLA द्वारा जारी किए गए वीडियो को संगठन अपने दावे के प्रमाण के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन स्वतंत्र मीडिया अथवा स्थानीय प्रशासन द्वारा वीडियो की पुष्टि नहीं की गई है।</p>
<h3>सुराब में रिमोट IED से हमला</h3>
<p>BLA ने दूसरे हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उसकी स्पेशल टैक्टिकल ऑपरेशंस स्क्वॉड ने सुराब के हाजिका इलाके में पाकिस्तानी सेना के वाहन को निशाना बनाया।</p>
<p>संगठन के अनुसार, सड़क पर लगाए गए विस्फोटक को रिमोट कंट्रोल से उड़ाया गया। इस हमले में सात पाकिस्तानी जवानों के मारे जाने का दावा किया गया है।</p>
<p>दोनों हमलों को जोड़कर BLA ने कुल 25 सुरक्षाकर्मियों की मौत का दावा किया। हमले में इस्तेमाल किए गए विस्फोटक, वाहन और घटनास्थल से संबंधित विस्तृत जानकारी आधिकारिक जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।</p>
<h3>पाकिस्तान ने नहीं की 25 मौतों की पुष्टि</h3>
<p>खबर लिखे जाने तक पाकिस्तान की सेना या सरकार ने BLA के दो हमलों में 25 जवान मारे जाने के दावे पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की थी।</p>
<p>इसलिए हताहतों की संख्या को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। संघर्ष वाले क्षेत्रों में सरकार और सशस्त्र संगठनों की ओर से अलग-अलग आंकड़े जारी किए जाना सामान्य है। कई बार दोनों पक्ष अपने नुकसान को कम और विरोधी पक्ष के नुकसान को अधिक बताते हैं।</p>
<p>पाकिस्तान की तरफ से आधिकारिक बयान अथवा स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि होने के बाद ही वास्तविक संख्या स्पष्ट हो सकेगी।</p>
<h3>पाकिस्तानी सेना का 48 उग्रवादियों को मारने का दावा</h3>
<p>BLA के दावे के बीच पाकिस्तान की सेना ने बलूचिस्तान में अलग-अलग सैन्य अभियानों में 48 कथित उग्रवादियों को मारने का दावा किया है।</p>
<p><a class="decorated-link" href="https://apnews.com/article/339bdaaaca592d2d9f19a9509708aa0a?utm_source=chatgpt.com">एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट</a> के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने कहा कि पिछले 72 घंटों के दौरान मस्तुंग, सिबी, क्वेटा और कलात जिलों में खुफिया जानकारी के आधार पर अभियान चलाए गए।</p>
<p>सेना के मुताबिक, इन अभियानों में हथियार भी बरामद किए गए। पाकिस्तानी सेना ने मारे गए लोगों को प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ा बताया है। सेना के इन आंकड़ों का भी स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है।</p>
<p>BLA के दो हमलों और पाकिस्तानी सेना के अभियानों का सीधा संबंध है या नहीं, यह आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है।</p>
<h3>पाकिस्तानी सेना के हथियार ले जाने का भी दावा</h3>
<p>BLA ने जियारत हमले के बाद पाकिस्तानी सैनिकों के कथित हथियार अपने कब्जे में लेने का दावा किया है। जारी वीडियो में लड़ाकों को हथियारों और क्षतिग्रस्त वाहनों के पास दिखाया गया है।</p>
<p>संगठन ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तानी सेना मृत जवानों के शवों को सार्वजनिक जानकारी दिए बिना उनके परिवारों तक पहुंचा रही है। इस दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है।</p>
<p>किसी सशस्त्र संगठन द्वारा जारी वीडियो प्रचार सामग्री भी हो सकते हैं। इसलिए उनकी जगह, समय और घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी होती है।</p>
<h3>क्या है बलूच लिबरेशन आर्मी?</h3>
<p>बलूच लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान में प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन है। यह बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करने की मांग करता है और कई वर्षों से पाकिस्तानी सेना, पुलिस, सरकारी प्रतिष्ठानों तथा चीन से जुड़ी परियोजनाओं पर हमले करता रहा है।</p>
<p>पाकिस्तान के साथ अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देशों ने BLA को आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है। संगठन का दावा है कि वह बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों और लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रहा है।</p>
<p>पाकिस्तान सरकार का कहना है कि BLA हिंसा के जरिए आम नागरिकों, सुरक्षाबलों और विकास परियोजनाओं को निशाना बनाता है।</p>
<h3>क्यों अशांत है बलूचिस्तान?</h3>
<p>बलूचिस्तान क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन इसकी आबादी अपेक्षाकृत कम है। यह प्राकृतिक गैस, कोयला, तांबा और सोने जैसे संसाधनों से समृद्ध माना जाता है।</p>
<p>बलूच अलगाववादी संगठनों का आरोप है कि प्रांत के प्राकृतिक संसाधनों का लाभ स्थानीय आबादी तक नहीं पहुंचता और केंद्र सरकार राजनीतिक तथा आर्थिक अधिकारों को दबाती है।</p>
<p>पाकिस्तान सरकार इन आरोपों को खारिज करती है। उसका कहना है कि क्षेत्र में विकास परियोजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन हिंसक संगठन काम में बाधा डालते हैं।</p>
<p>लंबे समय से चले आ रहे इस संघर्ष के कारण बलूचिस्तान में सेना, अलगाववादी संगठन और स्थानीय आबादी लगातार असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।</p>
<h3>चीन की परियोजनाओं पर भी खतरा</h3>
<p>बलूचिस्तान चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी CPEC के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ग्वादर बंदरगाह सहित चीन के सहयोग से बनाई जा रही कई परियोजनाएं इसी प्रांत में स्थित हैं।</p>
<p>BLA चीनी नागरिकों और चीन से संबंधित परियोजनाओं पर भी हमले कर चुका है। संगठन का आरोप है कि इन परियोजनाओं से बलूच लोगों को पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा।</p>
<p>पाकिस्तान और चीन इन परियोजनाओं को क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए जरूरी बताते हैं। बढ़ती हिंसा दोनों देशों के निवेश और सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।</p>
<h3>पाकिस्तान लगाता रहा है भारत पर आरोप</h3>
<p>पाकिस्तान अक्सर बलूच अलगाववादी संगठनों को भारत से समर्थन मिलने का आरोप लगाता है। हालिया अभियानों के बाद भी पाकिस्तानी सेना ने मारे गए कथित उग्रवादियों को “भारत समर्थित” बताया है।</p>
<p>हालांकि, पाकिस्तान ने इस आरोप के समर्थन में सार्वजनिक रूप से ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए। भारत पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है और बलूचिस्तान की हिंसा को पाकिस्तान का आंतरिक मामला बताता रहा है।</p>
<h3>बलूचिस्तान में लगातार बढ़ रही हिंसा</h3>
<p>साल 2026 के दौरान बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, पुलिस चौकियों और सरकारी प्रतिष्ठानों पर कई बड़े हमले हो चुके हैं। इसके जवाब में पाकिस्तानी सेना ने भी बड़े पैमाने पर अभियान चलाए हैं।</p>
<p>दोनों पक्षों के हमलों और सैन्य अभियानों में सुरक्षाकर्मियों, सशस्त्र लड़ाकों और आम नागरिकों की मौत हुई है। क्षेत्र में स्वतंत्र मीडिया की सीमित पहुंच के कारण घटनाओं और हताहतों के आंकड़ों की पुष्टि करना कठिन रहता है।</p>
<p>BLA के ताजा दावों और पाकिस्तानी सेना के जवाबी अभियानों ने एक बार फिर संकेत दिया है कि बलूचिस्तान में सुरक्षा संकट गंभीर होता जा रहा है।</p>
<p>अब नजर पाकिस्तान की सेना के आधिकारिक बयान पर रहेगी। उसी से स्पष्ट हो सकेगा कि जियारत और सुराब में हमला हुआ या नहीं तथा BLA द्वारा दावा किए गए 25 सैनिकों की मौत का वास्तविक आंकड़ा क्या है।</p>
<p><strong>महत्वपूर्ण नोट:</strong> इस खबर में 25 पाकिस्तानी जवानों की मौत का आंकड़ा BLA द्वारा जारी किया गया दावा है। इसकी पाकिस्तानी सेना या किसी स्वतंत्र संस्था ने पुष्टि नहीं की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 18:39:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप के चेहरे वाला 1 डॉलर का सिक्का जारी, 25 सिक्कों के रोल के लिए चुकाने होंगे 61 डॉलर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी टकसाल ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर वाला विशेष 1 डॉलर का सिक्का जारी किया है। 25 सिक्कों का रोल 61 डॉलर में बेचा जा रहा है, यानी एक सिक्के की खरीद कीमत 2.44 डॉलर पड़ती है। यह कानूनी मुद्रा है, लेकिन इसे मुख्य रूप से संग्रहकर्ताओं के लिए पेश किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/donald-trump-face-one-dollar-coin-us-250th-anniversary/article-1921"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/donald-trump-face-one-dollar-coin-us-mint-2026.jpg.jpg" alt=""></a><br /><h2>ट्रंप के चेहरे वाला सिक्का बना चर्चा का विषय</h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/donald-trump-face-one-dollar-coin-us-mint-2026.jpg.jpg" alt="donald-trump-face-one-dollar-coin-us-mint-2026.jpg" width="1366" height="768"></img>
अमेरिकी टकसाल ने देश की आजादी के 250 वर्ष पूरे होने पर डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर वाला विशेष एक डॉलर का सिक्का जारी किया है।

<p class="isSelectedEnd"><strong>वॉशिंगटन:</strong> अमेरिका की आजादी के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अमेरिकी टकसाल यानी US Mint ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर वाला विशेष 1 डॉलर का सिक्का जारी किया है। किसी जीवित और पद पर मौजूद अमेरिकी राष्ट्रपति की तस्वीर मुद्रा पर दिखाई देने के कारण यह सिक्का अमेरिका सहित पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह सिक्का केवल स्मृति-चिह्न नहीं, बल्कि अमेरिका की कानूनी मुद्रा है। हालांकि इसे दुकानों में सामान्य लेनदेन के बजाय मुख्य रूप से संग्रहकर्ताओं के लिए रोल और बैग के रूप में बेचा जा रहा है।</p>
<h2>1 डॉलर का सिक्का, खरीद मूल्य 2.44 डॉलर</h2>
<p class="isSelectedEnd">इस सिक्के की अंकित कीमत एक डॉलर है, लेकिन अमेरिकी टकसाल ने 25 सिक्कों का एक रोल 61 डॉलर में बिक्री के लिए रखा है। इस हिसाब से रोल खरीदने पर एक सिक्के की कीमत लगभग 2.44 डॉलर पड़ती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वहीं, 100 सिक्कों का एक बैग 154.50 डॉलर में उपलब्ध कराया गया है। इस पैक में एक सिक्के की औसत कीमत करीब 1.55 डॉलर पड़ती है। इसलिए यह कहना अधिक सही होगा कि 2.44 डॉलर इसकी तय अंकित कीमत नहीं, बल्कि 25 सिक्कों वाला रोल खरीदने पर पड़ने वाली औसत कीमत है।</p>
<h2>सिक्के पर क्या-क्या लिखा है?</h2>
<p class="isSelectedEnd">सिक्के के सामने वाले हिस्से पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर बनाई गई है। तस्वीर के साथ अंग्रेजी में ‘LIBERTY’ और ‘IN GOD WE TRUST’ लिखा गया है। इसके नीचे अमेरिका की आजादी के 250 वर्षों को दर्शाने के लिए ‘1776–2026’ अंकित है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सिक्के के पिछले हिस्से पर अमेरिका का आधिकारिक चिह्न और बाज की आकृति बनाई गई है। इसके साथ 250वीं वर्षगांठ को दर्शाने वाला विशेष निशान भी शामिल किया गया है।</p>
<h2>सोने का नहीं है ट्रंप वाला सिक्का</h2>
<p class="isSelectedEnd">सिक्के का रंग सोने जैसा दिखाई देता है, लेकिन यह शुद्ध सोने से नहीं बनाया गया है। इसमें तांबा, जस्ता, मैंगनीज और निकल जैसी धातुओं का इस्तेमाल किया गया है। सोने जैसी चमक के कारण पहली नजर में इसे गोल्ड कॉइन समझा जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अमेरिकी टकसाल ने इसे सामान्य प्रचलन वाली गुणवत्ता में बनाया है, लेकिन इसकी विशेष डिजाइन और सीमित वर्ष की वजह से संग्रहकर्ताओं के बीच इसकी मांग बढ़ने की संभावना है।</p>
<h2>अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए विशेष सिक्का</h2>
<p class="isSelectedEnd">अमेरिका ने 4 जुलाई 1776 को ब्रिटेन से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की थी। वर्ष 2026 में इस ऐतिहासिक घटना के 250 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसी अवसर पर अमेरिका में कई विशेष सिक्के जारी किए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">ट्रंप की तस्वीर वाला यह सिक्का भी इसी ‘Semiquincentennial Coin Program’ का हिस्सा है। इसकी डिजाइन US Mint के मुख्य नक्काश जोसेफ मेन्ना ने तैयार की है। ट्रंप की तस्वीर व्हाइट हाउस के फोटोग्राफर डेनियल टोरोक द्वारा खींची गई तस्वीर पर आधारित बताई गई है।</p>
<h2>जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर पर क्यों उठा विवाद?</h2>
<p class="isSelectedEnd">अमेरिका में लंबे समय से किसी जीवित व्यक्ति, विशेषकर मौजूदा राष्ट्रपति की तस्वीर मुद्रा पर इस्तेमाल नहीं करने की परंपरा रही है। इसी वजह से डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर वाले इस सिक्के को लेकर कानूनी और राजनीतिक सवाल भी उठाए गए।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि 2020 के एक कानून के अंतर्गत देश की 250वीं वर्षगांठ के लिए विशेष एक डॉलर का सिक्का जारी करने का अधिकार दिया गया था। इससे पहले 1926 में तत्कालीन राष्ट्रपति कैल्विन कूलिज की तस्वीर भी उनके जीवनकाल में एक विशेष अमेरिकी सिक्के पर छापी गई थी।</p>
<h2>क्या बाजार में इस सिक्के से खरीदारी हो सकेगी?</h2>
<p class="isSelectedEnd">US Mint के अनुसार, ट्रंप की तस्वीर वाला यह सिक्का कानूनी मुद्रा है। इसका मतलब है कि इसकी वास्तविक अंकित कीमत एक डॉलर ही रहेगी और तकनीकी रूप से इसका उपयोग भुगतान के लिए किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">फिर भी, अधिक कीमत देकर खरीदे जाने और विशेष डिजाइन के कारण ज्यादातर लोग इसे खर्च करने के बजाय संग्रह में रखना पसंद कर सकते हैं। आम बाजार में इसकी उपलब्धता भी सामान्य एक डॉलर के सिक्कों जैसी नहीं होगी।</p>
<h2>खास सिक्कों पर मिलेगा ‘4 जुलाई’ का निशान</h2>
<p class="isSelectedEnd">अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस पर तैयार किए गए कुछ विशेष सिक्कों पर ‘4 जुलाई’ से जुड़ा अलग निशान भी लगाया गया है। ऐसे सिक्कों को बिक्री के लिए उपलब्ध रोल और बैग में बिना किसी निश्चित क्रम के शामिल किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस कारण खरीदारों के बीच उन विशेष सिक्कों को हासिल करने की उत्सुकता बढ़ सकती है। भविष्य में संग्रहकर्ताओं के बाजार में इनकी कीमत सामान्य सिक्कों की तुलना में अधिक होने की संभावना भी जताई जा रही है।</p>
<h2>ट्रंप समर्थकों और संग्रहकर्ताओं में बढ़ी मांग</h2>
<p class="isSelectedEnd">डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों और दुर्लभ सिक्के इकट्ठा करने वाले लोगों के बीच इस सिक्के को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। ज्यादा मांग के कारण अमेरिकी टकसाल ने खरीद की सीमा भी निर्धारित की है।</p>
<p>यह सिक्का जहां अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ का प्रतीक है, वहीं मौजूदा राष्ट्रपति की तस्वीर होने के कारण राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बन गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:11:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
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                <title>5 दिन की राहत या तूफान से पहले की शांति? ट्रंप ने ईरान पर हमले रोके</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिका। मिडिल ईस्ट की लगातार बढ़ती जंग के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक ऐलान किया है कि अगले 5 दिनों तक ईरान के किसी भी पावर प्लांट और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई सैन्य हमला नहीं किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हालात तेजी से युद्ध की ओर बढ़ते दिख रहे थे और दुनिया भर में चिंता बढ़ गई थी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि हाल ही में हुई “बहुत अच्छी और प्रोडक्टिव बातचीत” के बाद उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को निर्देश दिया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/5-days-respite-or-calm-before-the-storm-trump-stops/article-1754"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-03/trump-image.jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिका। मिडिल ईस्ट की लगातार बढ़ती जंग के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक ऐलान किया है कि अगले 5 दिनों तक ईरान के किसी भी पावर प्लांट और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई सैन्य हमला नहीं किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हालात तेजी से युद्ध की ओर बढ़ते दिख रहे थे और दुनिया भर में चिंता बढ़ गई थी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि हाल ही में हुई “बहुत अच्छी और प्रोडक्टिव बातचीत” के बाद उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को निर्देश दिया है कि ईरान के पावर प्लांट्स और एनर्जी साइट्स पर हमले को 5 दिन के लिए टाल दिया जाए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बातचीत पूरे हफ्ते जारी रहेगी, यानी फिलहाल अमेरिका बातचीत के रास्ते को मौका देना चाहता है।दरअसल कुछ ही दिन पहले ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का सख्त अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी बाधा के पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के सबसे बड़े पावर प्लांट से शुरुआत करके पूरे एनर्जी सिस्टम को तबाह कर देगा। यह बयान अपने आप में बेहद आक्रामक था और इससे जंग का खतरा और बढ़ गया था।</p>
<p>होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत को समझना जरूरी है। यह वही रास्ता है, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। अगर यह रास्ता बाधित होता है, तो ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर सीधा असर पड़ता है और कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं। हाल ही में इसी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम तेजी से उछलते हुए देखे गए।लेकिन अब अमेरिका और ईरान के बीच वीकेंड पर हुई बातचीत ने हालात में थोड़ी नरमी लाई है। इसी बातचीत के बाद ट्रंप ने 5 दिन का यह “ब्रेक” देने का फैसला लिया है। इसे एक तरह से तनाव कम करने की कोशिश और बातचीत को आगे बढ़ाने का मौका माना जा रहा है।हालांकि इस फैसले के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। ईरान की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं, इजरायल और ईरान के बीच मिसाइल हमले और जवाबी कार्रवाई की खबरें अभी भी सामने आ रही हैं, जिससे यह साफ है कि जमीनी स्तर पर तनाव अभी भी बना हुआ है।</p>
<p>अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह 5 दिन का ब्रेक जंग खत्म होने की शुरुआत है, या फिर यह सिर्फ एक रणनीतिक विराम है जिसके बाद हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं। क्योंकि अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो वही पावर प्लांट पर हमले की योजना फिर से सक्रिय हो सकती है।इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक, हर चीज इस तनाव से प्रभावित हो रही है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र पर निर्भर करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 18:02:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>PM मोदी का बड़ा अलर्ट: कोरोना जैसा वक्त फिर आ सकता है! क्या है असली खतरा?” </title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली।  हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान “कोरोना काल” का उदाहरण देते हुए देश को आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार रहने की बात कही। इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं—कुछ लोगों ने इसे संभावित लॉकडाउन से जोड़ दिया, तो कुछ ने इसे किसी बड़े संकट का संकेत माना। लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है।प्रधानमंत्री का यह बयान किसी नए लॉकडाउन का संकेत नहीं है, बल्कि मौजूदा वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव और वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए एक चेतावनी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/draft-add%E2%80%9Cpm-modis-big-alert-times-like-corona-may-come/article-1752"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-03/ivk3kedg_pm-modi-new-parliament_625x300_28_may_23.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान “कोरोना काल” का उदाहरण देते हुए देश को आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार रहने की बात कही। इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं—कुछ लोगों ने इसे संभावित लॉकडाउन से जोड़ दिया, तो कुछ ने इसे किसी बड़े संकट का संकेत माना। लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है।प्रधानमंत्री का यह बयान किसी नए लॉकडाउन का संकेत नहीं है, बल्कि मौजूदा वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव और वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए एक चेतावनी और तैयारी का संदेश है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते टकराव, तेल-गैस सप्लाई पर खतरा और वैश्विक बाजार में अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने देशवासियों से कहा कि जिस तरह हमने कोरोना महामारी के दौरान धैर्य, संयम और एकजुटता के साथ मुश्किल समय का सामना किया था, उसी तरह अब भी हमें तैयार रहना होगा। उन्होंने साफ किया कि यह समय घबराने का नहीं, बल्कि सतर्क रहने का है। अगर वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था, ईंधन आपूर्ति और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है और उसका एक बड़ा भाग वेस्ट एशिया से आता है, इसलिए वहां की किसी भी अस्थिरता का सीधा असर देश के अंदर महसूस हो सकता है—चाहे वह पेट्रोल-डीजल की कीमतें हों, ट्रांसपोर्ट खर्च हो या रोजमर्रा की चीजों के दाम।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि सरकार पूरी तरह स्थिति पर नजर बनाए हुए है और हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। पेट्रोल-डीजल, LPG और बिजली की सप्लाई फिलहाल सामान्य है और किसी तरह की कमी की स्थिति नहीं है। साथ ही, विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार लगातार सक्रिय है और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित वापस लाने की पूरी तैयारी की गई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर हालात और गंभीर होते हैं, तो अफवाह फैलाने वालों और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो। यानी सरकार सिर्फ तैयारी की बात नहीं कर रही, बल्कि हर संभावित स्थिति से निपटने के लिए एक मजबूत व्यवस्था भी बना रही है।</p>
<p>इस पूरे बयान का निष्कर्ष यही है कि “कोरोना जैसी तैयारी” का मतलब लॉकडाउन नहीं, बल्कि सतर्कता, एकजुटता और जिम्मेदारी से हालात का सामना करना है। प्रधानमंत्री का यह संदेश एक तरह से देश को पहले से सचेत करने का प्रयास है, ताकि अगर भविष्य में कोई वैश्विक संकट आता है, तो भारत तैयार रहे और उसका असर कम से कम हो।अब सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक सावधानी भरा संदेश है या आने वाले समय में वाकई कोई बड़ा वैश्विक संकट खड़ा हो सकता है?<br />ईरान जंग पर अचानक ब्रेक! ट्रंप का चौंकाने वाला ऐलान – अगले 5 दिन तक पावर प्लांट पर कोई अटैक नहीं! दोस्तों, मिडिल ईस्ट की जंग में पहली बार राहत की सांस... अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद ऐलान कर दिया है कि ईरान के किसी भी पावर प्लांट और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर अगले 5 दिन तक कोई सैन्य हमला नहीं होगा! ट्रंप ने अपनी ट्रुथ सोशल पोस्ट में लिखा:<br /><strong>"बहुत अच्छी और प्रोडक्टिव बातचीत के आधार पर... मैंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को निर्देश दे दिया है कि ईरान के पावर प्लांट्स और एनर्जी साइट्स पर हमले को 5 दिन के लिए पोस्टपोन कर दिया जाए। ये बातचीत पूरे हफ्ते जारी रहेगी।"</strong></p>
<p>क्या है पूरा मामला?कुछ दिन पहले ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था – होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी धमकी के पूरी तरह खोलो, वरना अमेरिका ईरान के सबसे बड़े पावर प्लांट से शुरू करके सब(तबाह) कर देगा!  होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के 20% तेल का रास्ता है। इसके बंद होने से ग्लोबल ऑयल कीमतें आसमान छू रही थीं।  अब अमेरिका और ईरान के बीच विकेंड पर हुई बहुत अच्छी बातचीत  के बाद ट्रंप ने ये 5 दिन का ब्रेक दे दिया है। बातचीत जारी रहेगी – क्या ये जंग खत्म होने की शुरुआत है?ईरान की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन तनाव अभी भी बरकरार है। इजरायल-ईरान मिसाइल एक्सचेंज भी जारी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:36:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>परंपरागत युद्ध में भारत को नहीं हरा सकता पाकिस्तान</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> 12 जनवरी 2026</strong> पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर अक्सर दुनिया भर में बहस होती है, लेकिन अब पाकिस्तान के ही एक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक <strong>नजम सेठी</strong> ने इस पर से पर्दा उठा दिया है। सेठी ने साफ तौर पर स्वीकार किया है कि पाकिस्तान का परमाणु बम कोई 'इस्लामिक बम' नहीं है, बल्कि यह शुद्ध रूप से एक <strong>'एंटी-इंडिया बम'</strong> है।</p>
<p>पाकिस्तानी टीवी चैनल 'दुनिया न्यूज' से बातचीत करते हुए नजम सेठी ने पाकिस्तान की सैन्य कमजोरी को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान यह हकीकत जानता है कि वह परंपरागत युद्ध (Conventional War) में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong> 12 जनवरी 2026</strong> पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर अक्सर दुनिया भर में बहस होती है, लेकिन अब पाकिस्तान के ही एक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक <strong>नजम सेठी</strong> ने इस पर से पर्दा उठा दिया है। सेठी ने साफ तौर पर स्वीकार किया है कि पाकिस्तान का परमाणु बम कोई 'इस्लामिक बम' नहीं है, बल्कि यह शुद्ध रूप से एक <strong>'एंटी-इंडिया बम'</strong> है।</p>
<p>पाकिस्तानी टीवी चैनल 'दुनिया न्यूज' से बातचीत करते हुए नजम सेठी ने पाकिस्तान की सैन्य कमजोरी को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान यह हकीकत जानता है कि वह परंपरागत युद्ध (Conventional War) में भारत का मुकाबला नहीं कर सकता।</p>
<p>नजम सेठी के अनुसार, "हम पारंपारिक जंग में भारत को कभी नहीं रोक सकते। यही कारण है कि हमें कभी भी 'नो फर्स्ट यूज' (No First Use) पॉलिसी पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए।"</p>
<p>दुनिया के कई परमाणु शक्ति संपन्न देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं कि वे युद्ध की स्थिति में 'पहले' परमाणु हमला नहीं करेंगे। भारत भी इस नीति का पालन करता है। लेकिन पाकिस्तान इससे हमेशा बचता रहा है।</p>
<p>सेठी ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अपनी 'पहले परमाणु हमला करने' की धमकी को एक रक्षात्मक कवच की तरह इस्तेमाल करता है। अगर वह 'नो फर्स्ट यूज' पर हस्ताक्षर कर देता है, तो उसकी भारत को डराने की एकमात्र शक्ति खत्म हो जाएगी।</p>
<p>अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर चिंता जताई जाती है कि कहीं इनका इस्तेमाल इजरायल या पश्चिमी देशों के खिलाफ न हो जाए। इस पर सेठी ने कहा:</p>
<blockquote>
<p>"हम अपना बम इजरायल पर नहीं गिराएंगे और न ही अमेरिका पर। हमारा बम सिर्फ और सिर्फ भारत के खिलाफ है। यह एक रक्षात्मक लेकिन एंटी-इंडिया बम है।"</p>
</blockquote>
<p>नजम सेठी का यह बयान पाकिस्तान की उस कूटनीति की पुष्टि करता है जिसे <strong>'परमाणु ब्लैकमेलिंग'</strong> कहा जाता है। पाकिस्तान अपनी आर्थिक और सैन्य बदहाली को छिपाने के लिए अक्सर परमाणु हथियारों का डर दिखाता है। हालांकि, भारत ने हमेशा स्पष्ट किया है कि उसकी परमाणु नीति जिम्मेदारीपूर्ण है, लेकिन वह किसी भी दुस्साहस का जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है।</p>
<hr />
<p><strong>मुख्य बिंदु:</strong></p>
<ul>
<li>
<p>पाकिस्तान परंपरागत युद्ध में भारत से नहीं जीत सकता।</p>
</li>
<li>
<p>परमाणु बम का उद्देश्य केवल भारत को रोकना है।</p>
</li>
<li>
<p>पाकिस्तान 'No First Use' समझौते पर दस्तखत नहीं करेगा।</p>
</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 18:18:21 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खालिदा जिया का अंतिम संस्कार</title>
                                    <description><![CDATA[शेख हसीना के सत्ता छोड़ने के बाद विदेश मंत्री का पहला बांग्लादेश दौरा; पीएम मोदी का शोक संदेश लेकर पहुंचे जयशंकर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/role-act-like-senior-political-hindi-journalist-project-edit-above/article-1731"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/jaishankar-meets-tarique-rahman_jpg.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/jaishankar-meets-tarique-rahman_jpg.jpg" alt="Jaishankar-meets-Tarique-Rahman_jpg" width="770" height="431"></img>
विदेश मंत्री एस. जयशंकर तारिक़ रहमान को प्रधानमंत्री का शोक संदेश देते हुये

<p> </p>
<p><strong>ढाका</strong> | बांग्लादेश की राजनीति के एक युग का आज अंत हो गया। पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया को आज राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक और भावुक क्षण का गवाह बनने के लिए दुनिया भर के प्रतिनिधि ढाका पहुंचे हैं। भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने इस जनाजे में शामिल होकर नई दिल्ली की ओर से संवेदनाएं प्रकट कीं।</p>
<p><strong>पीएम मोदी का शोक पत्र और गर्मजोशी भरा 'हैंडशेक'</strong></p>
<p>विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ढाका पहुंचते ही खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान से मुलाकात की। इस दौरान जयशंकर ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष शोक पत्र सौंपा। मुलाकात की सबसे चर्चित तस्वीर जयशंकर और तारिक रहमान का हाथ मिलाना रही, जिसमें तारिक की बेटी जायमा रहमान भी मौजूद थीं। तनावपूर्ण संबंधों के बीच इस 'हैंडशेक' को भविष्य की नई कूटनीति की शुरुआत माना जा रहा है।</p>
<p><strong>रिश्तों की बर्फ पिघलने की उम्मीद: हसीना युग के बाद पहला दौरा</strong></p>
<p>अगस्त में शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद डॉ. जयशंकर का यह पहला बांग्लादेश दौरा है। भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह ने कहा, "विदेश मंत्री ने लोकतंत्र में बेगम जिया के योगदान को स्वीकार किया और भारत सरकार की ओर से एकजुटता प्रकट की।" विशेषज्ञों का मानना है कि यूनुस सरकार के दौरान बढ़ती भारत-विरोधी गतिविधियों और पाकिस्तान की सक्रियता के बीच, भारत ने मुख्य विपक्षी दल BNP के साथ संवाद का रास्ता खोलकर एक सधा हुआ कदम उठाया है।</p>
<p><strong>फरवरी चुनाव और तारिक रहमान की भूमिका</strong></p>
<p>17 साल के निर्वासन के बाद स्वदेश लौटे तारिक रहमान आगामी फरवरी 2026 में होने वाले चुनावों में प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार हैं। ऐसे में भारत का यह रुख स्पष्ट करता है कि नई दिल्ली अब बांग्लादेश की बदलती जमीनी हकीकत और नए नेतृत्व के साथ संबंध सुधारने की दिशा में आगे बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 17:28:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नेपाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर</title>
                                    <description><![CDATA[सात-सूत्रीय समझौते ने बदला हिमालयी देश का सियासी समीकरण; 5 मार्च के चुनावों में 'घंटी' के निशान पर उतरेंगे बालेन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/big-upheaval-in-nepals-politics/article-1730"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/belen_shah_pm_candidate_nepl.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/belen_shah_pm_candidate_nepl.jpg" alt="belen_shah_pm_candidate_nepl" width="720" height="405"></img>
नेपाल प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बालेंद्र शाह

<p> </p>
<p><strong>काठमांडू</strong>: नेपाल की राजनीति में रविवार को उस वक्त एक नया मोड़ आ गया जब काठमांडू के लोकप्रिय मेयर बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के साथ गठबंधन का औपचारिक ऐलान कर दिया। आधी रात तक चली लंबी मैराथन बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच एक 7-सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत 35 वर्षीय बालेन शाह आगामी 5 मार्च को होने वाले आम चुनावों में संसदीय दल के नेता और प्रधानमंत्री पद के भावी उम्मीदवार होंगे।</p>
<p><strong>RSP का नाम और सिंबल, बालेन का चेहरा</strong></p>
<p>समझौते की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि बालेन शाह और उनका संगठन अब राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के बैनर तले चुनाव लड़ेंगे। हालांकि बालेन की टीम का RSP में विलय हो गया है, लेकिन पार्टी का नाम, झंडा और चुनाव चिह्न (घंटी) पहले की तरह ही रहेगा। पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष की कमान रवि लामिछाने के हाथों में ही रहेगी।</p>
<p><strong>जेन-जी (Gen Z) आंदोलन का असर</strong></p>
<p>नेपाल में हाल ही में हुए युवा आंदोलन (Gen Z Movement) के बाद से ही बालेन शाह को राष्ट्रीय नेतृत्व संभालने के लिए जबरदस्त सोशल मीडिया समर्थन मिल रहा था। भ्रष्टाचार और पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतरे युवाओं ने बालेन को अपना अघोषित नायक मान लिया था। जानकारों का मानना है कि यह गठबंधन नेपाल की स्थापित पार्टियों—नेपाली कांग्रेस और के.पी. शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी (UML)—के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।</p>
<p>इंजीनियर से 'रैपर' और अब पीएम पद के दावेदार<br />बालेन शाह की राजनीतिक यात्रा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है:</p>
<p><strong>शिक्षा</strong>: व्हाइट हाउस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (काठमांडू) से सिविल इंजीनियरिंग और कर्नाटक (भारत) के विश्वेश्वरैया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर्स।</p>
<p><strong>पहचान:</strong> राजनीति में आने से पहले वह एक मशहूर रैपर और इंजीनियर के तौर पर विख्यात थे।</p>
<p><strong>चुनावी आगाज</strong>: 2022 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर काठमांडू के मेयर बने, जहाँ उन्होंने स्थापित दलों के दिग्गजों को भारी मतों से हराया।</p>
<p><strong>समीकरणों में क्या बदलेगा?</strong><br />भंग हो चुकी संसद में चौथी सबसे बड़ी पार्टी रही RSP के साथ बालेन का आना नेपाल की पारंपरिक सत्ता संरचना को हिला सकता है। बालेन ने 2017 में ही संकेत दिया था कि वह देश संवारने के लिए किसी और पर निर्भर रहने के बजाय खुद जिम्मेदारी लेंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नेपाल के मतदाता इस नई और युवा जोड़ी पर कितना भरोसा जताते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 16:45:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर नहीं थम रहा अत्याचार</title>
                                    <description><![CDATA[यूनुस सरकार की नाक के नीचे बढ़ते हमले, फैक्ट्री सिक्योरिटी में तैनात हिंदू जवान पर साथी का अचानक हमला; पूर्व में दीपू चंद्र दास की जघन्य हत्या की यादें ताजा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/atrocities-on-hindu-minorities-are-not-stopping-in-bangladesh/article-1726"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/one_more_hindu-killed_in_bangladesh.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/one_more_hindu-killed_in_bangladesh.jpg" alt="one_more_hindu-killed_in_bangladesh" width="1280" height="720"></img>
बांग्लादेश में एक और हिंदू बृजेंद्र बिस्वास की हत्या

<p> </p>
<p><strong>मयमनसिंह (बांग्लादेश) :</strong> बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय पर हिंसक घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। हाल ही में मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिले में ग्रामीण अर्धसैनिक बल (अंसार) के एक हिंदू सदस्य बृजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई। यह घटना नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल में हुई, जिसने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।<br /><br /><strong>घटना का विवरण: फैक्ट्री परिसर में साथी का घातक हमला</strong><br />बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भालुका उपजिले के मेहराबारी इलाके में स्थित सुल्ताना स्वेटर्स लिमिटेड फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था के लिए 20 अंसार सदस्य तैनात थे। इनमें बृजेंद्र बिस्वास भी शामिल थे, जो फैक्ट्री की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। सोमवार शाम करीब 6:30 बजे, जब बृजेंद्र अपने सहयोगी नोमान मियां के साथ कमरे में बैठे थे, तभी नोमान ने अचानक अपनी शॉटगन निकाल ली।<br /><br />लबीब ग्रुप के अंसार प्रभारी एपीसी मोहम्मद अजहर अली ने बताया कि घटना के समय दोनों के बीच कोई विवाद या तकरार नहीं हुई थी। नोमान ने चिल्लाते हुए कहा, "गोली मार दूंगा," और फिर ट्रिगर दबा दिया। गोली बृजेंद्र की बाईं जांघ में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हमलावर नोमान मौके से फरार हो गया, लेकिन स्थानीय पुलिस ने उसे शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया। जांच जारी है, और प्रारंभिक पूछताछ में धार्मिक या व्यक्तिगत दुर्भावना का संकेत मिला है।<br /><br /><strong>अल्पसंख्यकों पर बढ़ते खतरे की कड़ी</strong><br />यह हत्या मयमनसिंह जिले में हिंदुओं के खिलाफ हाल की दूसरी बड़ी घटना है। कुछ दिन पूर्व ही दीपू चंद्र दास नामक एक हिंदू युवक को क्रूरता से पीट-पीटकर अधमरा किया गया था। उसके बाद अपराधियों ने उसे पेड़ से बांधकर जिंदा जला दिया था। ये घटनाएं बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की असुरक्षा को उजागर करती हैं, जहां धार्मिक तनाव और राजनीतिक अस्थिरता के बीच अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ रहे हैं।<br /><br />मानवाधिकार संगठनों और हिंदू समुदाय के नेताओं ने यूनुस प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। वे कहते हैं कि ऐसी घटनाएं न केवल व्यक्तिगत हत्याएं हैं, बल्कि समुदाय-विरोधी साजिश का हिस्सा लगती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत सहित कई देशों ने बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।<br /><br /><strong>आगे की चुनौतियां: सुरक्षा और न्याय की मांग</strong><br />इस घटना ने बांग्लादेश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, खासकर अर्धसैनिक बलों में। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक आधार पर हिंसा को रोकने के लिए कड़े कानून और निष्पक्ष जांच जरूरी हैं। बृजेंद्र बिस्वास के परिवार को न्याय मिलना चाहिए, ताकि अन्य अल्पसंख्यक सदस्यों में भय का माहौल न फैले।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 18:20:01 +0530</pubDate>
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                <title>खालिदा जिया का निधन: एक 'साधारण गृहिणी' के दक्षिण एशिया की ताकतवर राजनेता बनने तक का ऐतिहासिक सफर</title>
                                    <description><![CDATA[संघर्ष, सत्ता और विवादों से भरा रहा बेगम जिया का 80 साल का जीवन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/khaleda-zias-death-is-a-historic-journey-from-an-ordinary/article-1725"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/khalida_zia_died_bangladesh.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/khalida_zia_died_bangladesh.jpg" alt="khalida_zia_died_bangladesh" width="700" height="393"></img>
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया

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<p>बांग्लादेश की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया ने मंगलवार (30 दिसंबर) सुबह 80 वर्ष की आयु में ढाका के एवरकेयर अस्पताल में अंतिम सांस ली। लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहीं खालिदा जिया का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है—एक ऐसी महिला जो कभी राजनीति में नहीं आना चाहती थीं, लेकिन नियति ने उन्हें देश की बागडोर सौंप दी।<br /><br /><br /><strong>'पुतुल' से 'खालिदा जिया' तक: शुरुआती जीवन और निकाह</strong><br />1945 में अविभाजित भारत के जलपाईगुड़ी में जन्मीं खालिदा खानम (पुकार का नाम 'पुतुल') का परिवार विभाजन के बाद पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के दिनाजपुर में बस गया। 1960 में उनका निकाह पाकिस्तानी सेना के तत्कालीन कैप्टन जियाउर रहमान से हुआ। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान, जब उनके पति विद्रोह का नेतृत्व कर रहे थे, खालिदा को पाकिस्तानी सेना ने नजरबंद रखा था। आजादी के बाद जियाउर रहमान राजनीति के शीर्ष पर पहुंचे, लेकिन खालिदा ने खुद को घर की दहलीज और बच्चों की परवरिश तक ही सीमित रखा।<br /><br /><strong>किचन से सत्ता के गलियारे तक: मजबूरी में उठाया राजनीतिक कदम</strong><br />खालिदा जिया की राजनीति में एंट्री किसी महत्वाकांक्षा का परिणाम नहीं, बल्कि एक त्रासदी की उपज थी। 1981 में राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या के बाद BNP बिखरने की कगार पर थी। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं के दबाव और विरासत को बचाने के लिए खालिदा ने घर के 'किचन' से बाहर निकलकर पार्टी की कमान संभाली। उन्होंने सैन्य तानाशाह जनरल इरशाद के खिलाफ करीब 9 साल तक सड़क पर संघर्ष किया, जिसने उन्हें एक जननेता के रूप में स्थापित कर दिया।<br /><br /><strong>दो बार प्रधानमंत्री और प्रशासन पर पकड़</strong><br />खालिदा जिया के नाम इतिहास में कई कीर्तिमान दर्ज हैं:<br /><br /><strong>ऐतिहासिक जीत: </strong>1991 के लोकतांत्रिक चुनाव में जीत हासिल कर वे बांग्लादेश की पहली और किसी मुस्लिम राष्ट्र की दूसरी महिला प्रधानमंत्री (बेनजीर भुट्टो के बाद) बनीं।<br />दो कार्यकाल: उन्होंने 1991-1996 और 2001-2006 तक दो पूर्ण कार्यकाल पूरे किए।<br />नीतिगत बदलाव: उनके दौर में निजीकरण और मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला, लेकिन साथ ही उन पर प्रशासन का 'इस्लामीकरण' करने के भी आरोप लगे।<br />भारत के साथ 'खट्टे-मीठे' संबंध और कट्टरपंथ का साया<br />खालिदा जिया का कार्यकाल भारत के साथ कूटनीतिक उतार-चढ़ाव वाला रहा। विशेष रूप से उनके दूसरे कार्यकाल (2001-2006) के दौरान, जब उनकी सरकार में 'जमात-ए-इस्लामी' शामिल थी, भारत के साथ संबंधों में भारी तनाव देखा गया। उस दौर में बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी उग्रवादी समूहों द्वारा किए जाने के गंभीर आरोप लगे, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में दूरियां बढ़ गईं।<br /><br /><strong>सत्ता से जेल और लंबी बीमारी तक का दंश</strong><br />2008 में आवामी लीग की शेख हसीना से मिली करारी हार के बाद खालिदा जिया का राजनीतिक ग्राफ गिरता गया। 2018 में उन्हें भ्रष्टाचार के मामलों में 17 साल की सजा सुनाई गई। जेल की सलाखों और नजरबंदी ने उनके स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित किया। हालांकि, अगस्त 2024 में शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद उन्हें सभी आरोपों से आधिकारिक तौर पर मुक्त कर दिया गया था, लेकिन तब तक उनका शरीर बीमारियों से काफी कमजोर हो चुका था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 17:40:44 +0530</pubDate>
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                <title>भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्रालयों के बीच तीखे प्रत्यारोप; बांग्लादेश ने भारत के बयान को 'गुमराह करने वाला' बताया, भारत ने अल्पसंख्यक हिंसा की 2,900 घटनाओं का जिक्र किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF/tension-in-india-bangladesh-relations/article-1722"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2025-12/bangladesh-violence-killing-hindus.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2025-12/bangladesh-violence-killing-hindus.jpg" alt="bangladesh-violence-killing-hindus" width="800" height="557"></img>
उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में भड़की हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही

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<p><strong>नई दिल्ली/ढाका</strong>: भारत और बांग्लादेश के बीच अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर कूटनीतिक तलवारें खिंच गई हैं। बीते सप्ताह भारतीय विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की बर्बर हत्या का जिक्र करते हुए गहरी नाराजगी जताई थी। इसके जवाब में बांग्लादेश ने भारत के बयान को 'लक्षित हमला' करार देते हुए खारिज कर दिया, साथ ही भारत में मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यक समुदायों पर बढ़ते हमलों ने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संगठनों का ध्यान भी खींचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता का प्रतिबिंब है, जहां सांप्रदायिक सद्भाव की लंबी परंपरा खतरे में पड़ रही है।<br /><br /><strong>भारत का सख्त रुख: अल्पसंख्यक हिंसा पर चिंता, 2,900 घटनाओं का हवाला</strong><br />26 दिसंबर को नई दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बांग्लादेश में व्याप्त अशांति पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश में हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्धों समेत अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा को गंभीरता से देख रहा है। जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "कानून-व्यवस्था बनाए रखना बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी है। हमने वहां के झूठे भारत-विरोधी प्रचार को सिरे से खारिज किया है।"<br /><br />उन्होंने मैमनसिंह के भालुका इलाके में 18 दिसंबर को हुई दीपू चंद्र दास की हत्या का विशेष उल्लेख किया, जहां 'धर्म का अपमान' के आरोप में उग्र भीड़ ने युवक को पीट-पीटकर मार डाला और उसके शव को पेड़ से बांधकर आग लगा दी। जायसवाल ने इस घटना की कड़ी निंदा की और उम्मीद जताई कि अपराधियों को जल्द न्याय के कठघरे में लाया जाएगा। प्रवक्ता ने खुलासा किया कि अंतरिम सरकार के सत्ता संभालने के बाद अल्पसंख्यकों पर हमलों की 2,900 से अधिक घटनाएं विभिन्न स्रोतों से दर्ज की गई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन्हें महज 'राजनीतिक हिंसा' या 'मीडिया की अतिशयोक्ति' बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।<br /><br /><strong>बांग्लादेश का पलटवार: 'अपराधी' था मृतक, भारत में हेट क्राइम पर सवाल</strong><br />रविवार को ढाका में बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एसएम महबूबुल आलम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर भारत के बयान का जवाब दिया। आलम ने इसे 'टारगेटेड' और 'गुमराह करने वाला' बताते हुए कहा, "भारत का बयान बांग्लादेश के वास्तविक हालातों को प्रतिबिंबित नहीं करता। हम किसी भी झूठी, अतिरंजित या जानबूझकर गढ़ी गई कहानी को खारिज करते हैं, जो हमारी सांप्रदायिक सद्भाव की परंपरा को धूमिल करने का प्रयास है।"<br /><br />मंत्रालय ने दीपू चंद्र दास को 'लिस्टेड अपराधी' करार देते हुए दावा किया कि उनकी मौत एक मुस्लिम साथी से पैसे वसूलने के दौरान हुई, जिसे बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। आलम ने कहा, "इस घटना को अल्पसंख्यक उत्पीड़न के रूप में पेश करना भ्रामक है।" बांग्लादेश ने भारत से अपील की कि वह अपने यहां अल्पसंख्यक मुद्दों पर गलत प्रचार से बचे।<br /><br />इसके साथ ही, बांग्लादेश ने भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर उंगली उठाई। आलम ने कहा, "भारत में मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ क्रूर हत्याएं, लिंचिंग, मनमानी गिरफ्तारियां और धार्मिक आयोजनों में बाधा जैसी घटनाएं चिंताजनक हैं।" उन्होंने विशेष रूप से पिछले सप्ताह क्रिसमस के दौरान पूरे भारत में ईसाइयों पर हुए सामूहिक हमलों का जिक्र किया, जिन्हें 'हेट क्राइम' और 'लक्षित हिंसा' बताया। बांग्लादेश ने भारत से इनकी निष्पक्ष जांच की उम्मीद जताई।<br /><br /><strong>उस्मान हादी हत्याकांड: अभियुक्तों के 'भारत भागने' के दावे का भारतीय खंडन</strong><br />विवाद को और हवा तब मिली जब बांग्लादेश ने 2024 के छात्र विद्रोह के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के अभियुक्तों के भारत भागने का दावा किया। ढाका मेट्रोपोलिटन पुलिस के अनुसार, अभियुक्त फैसल करीम मसूद और आलमगीर शेख ने मैमनसिंह की हलुआघाट सीमा पार कर मेघालय में शरण ली। लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया।<br /><br />समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से बीएसएफ महानिदेशक और मेघालय के इंस्पेक्टर जनरल ओपी उपाध्याय ने कहा, "ढाका पुलिस का यह दावा भ्रामक और गलत है।" यह घटना उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसक प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आई, जहां पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व करने वाले हादी की हत्या ने देशव्यापी आक्रोश पैदा कर दिया।<br /><br /><strong>मैमनसिंह हत्याकांड और अंतरिम सरकार का बयान</strong><br />मैमनसिंह की घटना ने बांग्लादेश में सांप्रदायिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। भालुका पुलिस स्टेशन के ड्यूटी अधिकारी रिपन मियां ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि 18 दिसंबर रात करीब 9 बजे उग्र भीड़ ने दीपू को पैगंबर का अपमान करने के आरोप में पकड़ लिया और क्रूरता से उनकी हत्या कर दी। हालांकि, बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने इसकी निंदा करते हुए फेसबुक पर बयान जारी किया: "नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा की कोई जगह नहीं। अपराधियों को सजा मिलेगी।"<br /><br />20 दिसंबर को नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर हुए कथित प्रदर्शन ने भी विवाद को भड़काया। भारत ने इसे 'भ्रामक प्रोपेगैंडा' बताया, जबकि बांग्लादेश ने इसका विरोध दर्ज कराया। यह घटनाक्रम भारत-बांग्लादेश संबंधों में विश्वास की कमी को उजागर करता है, जहां आर्थिक साझेदारी के बावजूद सांप्रदायिक मुद्दे कूटनीति को प्रभावित कर रहे हैं।<br /><br />अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकारों का कहना है कि यह विवाद दक्षिण एशिया में अल्पसंख्यक अधिकारों पर एक बड़ा परीक्षण है। यदि समय रहते दोनों देश संवाद बढ़ाएं, तो अपराध और हिंसा की यह चक्र टूट सकती है, वरना सीमा पर तनाव और गहरा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतराष्ट्रीय</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 15:54:18 +0530</pubDate>
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