<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/administrator/author-1" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Pratyakshdarshi Samachar RSS Feed Generator</generator>
                <title>Pratyakshdarshi Samachar - Pratyakshdarshi Samachar</title>
                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/author/1/rss</link>
                <description>Pratyakshdarshi Samachar RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पूर्ण राज्य के प्रस्ताव पर J&amp;K विधानसभा में बवाल, BJP विधायक को मार्शलों ने निकाला; उमर बोले- सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष और BJP आमने-सामने आ गए। भाजपा ने प्रस्ताव में वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव का जिक्र किए जाने का विरोध किया। हंगामा बढ़ने पर BJP विधायक विक्रम रंधावा को सदन से बाहर निकाला गया और कार्यवाही सोमवार तक स्थगित कर दी गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/ruckus-in-jk-assembly-over-the-proposal-of-full-statehood/article-2197"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/jk-assembly-statehood-omar-abdullah-bjp-vikram-randhawa-2026.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h2><span><strong>स्टेटहुड प्रस्ताव पर भिड़े सत्ता पक्ष और BJP, 2000 के जिक्र से बढ़ा विवाद </strong></span></h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/jk-assembly-statehood-omar-abdullah-bjp-vikram-randhawa-2026.jpg2.jpg" alt="jk-assembly-statehood-omar-abdullah-bjp-vikram-randhawa-2026.jpg2" width="1366" height="768"></img>
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य बहाली के प्रस्ताव पर हुए हंगामे के बीच BJP विधायक विक्रम रंधावा को मार्शलों ने सदन से बाहर निकाला।

<p><span><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></span></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य दर्जा तत्काल बहाल करने का प्रस्ताव पेश किया</strong></li>
<li><strong>प्रस्ताव में 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 के पुराने प्रस्तावों का जिक्र</strong></li>
<li><strong>2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ पर BJP ने जताई आपत्ति</strong></li>
<li><strong>BJP विधायकों ने प्रस्ताव की प्रतियां फाड़ीं और सदन के वेल में पहुंचे</strong></li>
<li><strong>हंगामे के बीच BJP विधायक विक्रम रंधावा को बाहर निकाला गया</strong></li>
<li><strong>सदन की कार्यवाही सोमवार तक स्थगित</strong></li>
</ul>
<h6><strong>श्रीनगर।</strong> जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सदन में एक प्रस्ताव पेश कर केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की। प्रस्ताव सामने आते ही BJP विधायकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।</h6>
<h6>विवाद राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग से ज्यादा प्रस्ताव में शामिल एक पुराने संदर्भ को लेकर बढ़ा। प्रस्ताव में 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पारित प्रस्तावों का उल्लेख किया गया था। BJP ने खास तौर पर वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के जिक्र पर आपत्ति जताई।</h6>
<h2><span><strong>BJP ने प्रस्ताव का विरोध क्यों किया?</strong></span></h2>
<h6>वर्ष 2000 में तत्कालीन फारूक अब्दुल्ला सरकार के दौरान जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने अधिक स्वायत्तता की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था। शुक्रवार को उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश नए प्रस्ताव में उसी पुराने प्रस्ताव का उल्लेख किए जाने पर BJP विधायकों ने विरोध किया।</h6>
<h6>BJP विधायकों का कहना था कि वे सदन में स्वायत्तता के मुद्दे पर चर्चा नहीं होने देंगे। इसके बाद पार्टी के विधायक अपनी सीटों से उठकर नारेबाजी करने लगे और कुछ सदस्यों ने प्रस्ताव की प्रतियां भी फाड़ दीं।</h6>
<h6>यह भी महत्वपूर्ण है कि BJP का तत्काल विरोध प्रस्ताव में <strong>2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ</strong> को लेकर था; इसे केवल पूर्ण राज्य की मांग के विरोध के रूप में पेश करना पूरी तस्वीर नहीं होगी।</h6>
<h2><span><strong>हंगामे के बीच विक्रम रंधावा को सदन से बाहर निकाला</strong></span></h2>
<h6>विरोध बढ़ने के बाद BJP विधायक सदन के वेल में पहुंचे और नारेबाजी जारी रही। सत्ता पक्ष की ओर से भी जवाबी नारे लगाए गए, जिससे सदन का माहौल और गरमा गया।</h6>
<h6>हंगामे के दौरान BJP विधायक विक्रम रंधावा को मार्शलों ने सदन से बाहर निकाला। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक रंधावा आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद उन्हें बाहर ले जाया गया। लगातार हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।</h6>
<h2><span><strong>उमर अब्दुल्ला ने BJP को क्या जवाब दिया?</strong></span></h2>
<h6>विरोध के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी मांग उनकी पार्टी या सरकार के लिए नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की है। उन्होंने BJP नेताओं की ओर से लगाए गए राष्ट्र-विरोधी होने के आरोपों का भी जवाब दिया।</h6>
<h6>उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने देश के लिए कई बलिदान दिए हैं और उन्हें BJP से किसी तरह के “सर्टिफिकेट” की जरूरत नहीं है। यह प्रतिक्रिया BJP सदस्यों की ओर से नेशनल कॉन्फ्रेंस पर लगाए गए आरोपों के जवाब में आई।</h6>
<h2><span><strong>प्रस्ताव में आखिर लिखा क्या है?</strong></span></h2>
<h6>मुख्यमंत्री की ओर से पेश प्रस्ताव में कहा गया है कि 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को सदन द्वारा पारित प्रस्तावों के अतिरिक्त विधानसभा भारत सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग करती है और इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय करती है।</h6>
<h6>उमर अब्दुल्ला ने सदन में कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों से परिसीमन, चुनाव और उसके बाद राज्य का दर्जा बहाल करने की तीन चरणों वाली प्रक्रिया का वादा किया गया था। उन्होंने कहा कि परिसीमन और विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, इसलिए अब राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए। यह मुख्यमंत्री का पक्ष है।</h6>
<h2><span><strong>कांग्रेस, PDP और AAP का क्या रुख रहा?</strong></span></h2>
<h6>द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ कांग्रेस सदस्यों ने भी प्रस्ताव का स्वागत किया। PDP के सदस्यों और सदन में AAP के एकमात्र विधायक ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया।</h6>
<h6>दूसरी तरफ BJP ने स्पष्ट किया कि उसकी आपत्ति प्रस्ताव में 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव को शामिल किए जाने पर है। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नारेबाजी हुई।</h6>
<h2><span><strong>2000 और 2024 के प्रस्ताव क्यों बने विवाद का कारण?</strong></span></h2>
<h6>26 जून 2000 को फारूक अब्दुल्ला सरकार के समय जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने अधिक स्वायत्तता से जुड़ा प्रस्ताव पारित किया था। शुक्रवार के प्रस्ताव में इसका उल्लेख होने के कारण BJP ने इसे स्वीकार करने से इनकार किया।</h6>
<h6>वहीं 6 नवंबर 2024 के प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली से जुड़ी मांग की गई थी। शुक्रवार के नए प्रस्ताव में दोनों पुराने प्रस्तावों का संदर्भ शामिल किया गया।</h6>
<h2><span><strong>अब आगे क्या होगा?</strong></span></h2>
<h6>शुक्रवार को भारी हंगामे के कारण प्रस्ताव पर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार प्रस्ताव को सोमवार को मतदान के लिए रखे जाने की संभावना है। वहीं विधानसभा की कार्यवाही भी सोमवार तक स्थगित कर दी गई है।</h6>
<h6>ऐसे में अब नजर सोमवार की कार्यवाही पर रहेगी—क्या प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान हो पाएगा, और 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ को लेकर सत्ता पक्ष और BJP के बीच गतिरोध किस दिशा में जाता है।</h6>
<h6><strong>जम्मू-कश्मीर विधानसभा का विवाद केवल पूर्ण राज्य की मांग तक सीमित नहीं रहा। असली टकराव नए प्रस्ताव में वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव का संदर्भ जोड़ने पर हुआ। उमर अब्दुल्ला इसे जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकार से जोड़ रहे हैं, जबकि BJP उस पुराने स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ का विरोध कर रही है। अब सोमवार की कार्यवाही तय करेगी कि यह प्रस्ताव आगे किस रूप में बढ़ता है।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/ruckus-in-jk-assembly-over-the-proposal-of-full-statehood/article-2197</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/ruckus-in-jk-assembly-over-the-proposal-of-full-statehood/article-2197</guid>
                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 18:47:41 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/jk-assembly-statehood-omar-abdullah-bjp-vikram-randhawa-2026.jpg2.jpg"                         length="1091615"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CEC के खिलाफ प्रदर्शन से पहले AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लेने का दावा, दिल्ली पुलिस पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का दावा सामने आया है। नेहा बोरा ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। हालांकि उनकी हिरासत और उसके कारण को लेकर दिल्ली पुलिस की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/neha-bora-detained-claim-delhi-police-gyanesh-kumar-jantar-mantar-protest/article-2196"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/neha-bora-delhi-police-jantar-mantar-protest-2026.jpg.jpg" alt=""></a><br /><h2><span><strong>जंतर-मंतर पर होना था प्रदर्शन, उससे पहले नेहा बोरा को ले जाने का दावा</strong></span></h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/neha-bora-delhi-police-jantar-mantar-protest-2026.jpg.jpg" alt="neha-bora-delhi-police-jantar-mantar-protest-2026.jpg" width="1366" height="768"></img>
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का दावा सामने आया है।

<p><span><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></span></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस द्वारा ले जाए जाने का सोशल मीडिया पर दावा</strong></li>
<li><strong>CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का किया था ऐलान</strong></li>
<li><strong>CJP भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दे चुकी है</strong></li>
<li><strong>संगठन ने चेतावनी दी थी कि इस्तीफा नहीं हुआ तो ‘Jantar Mantar 2.0’ आंदोलन होगा</strong></li>
<li><strong>हिरासत की वजह और कानूनी आधार पर दिल्ली पुलिस का आधिकारिक बयान फिलहाल उपलब्ध नहीं</strong></li>
</ul>
<h6>नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बढ़ते विरोध के बीच AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का दावा सामने आया है। सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे पोस्ट में कहा गया है कि पुलिस ने उन्हें उनके घर से अपने साथ लिया।</h6>
<h6>यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब नेहा बोरा ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। <em>द टेलीग्राफ</em> ने भी 25 सितंबर को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में बताया कि AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने शुक्रवार के लिए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की घोषणा की थी।</h6>
<h6>हालांकि खबर लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस की ओर से इस कथित हिरासत के कारण, स्थान या कानूनी आधार को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं था। इसलिए इसे फिलहाल सोशल मीडिया पर सामने आए दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।</h6>
<h2><span><strong>नेहा बोरा ने क्यों किया था प्रदर्शन का ऐलान?</strong></span></h2>
<h6>चुनाव आयोग और SIR को लेकर जारी विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज हुई है।</h6>
<h6>इसी क्रम में नेहा बोरा ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। इससे पहले Cockroach Janta Party यानी CJP ने भी ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने की मांग करते हुए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी थी। CJP ने कहा था कि मांग पूरी नहीं होने पर ‘Jantar Mantar 2.0’ आयोजित किया जाएगा।</h6>
<h2><span><strong>हिरासत को लेकर सोशल मीडिया पर क्या दावा किया गया?</strong></span></h2>
<h6>सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस उनके घर से लेकर गई।</h6>
<h6>पोस्ट में इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे प्रस्तावित आंदोलन से भी जोड़ा गया है। हालांकि ऐसा कोई स्वतंत्र प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि अगर नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया, तो उसकी वजह ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन ही था।</h6>
<h6>यही वजह है कि पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।</h6>
<h2><span><strong>क्या इसे ‘अवैध हिरासत’ कहा जा सकता है?</strong></span></h2>
<h6>सोशल मीडिया पोस्ट में कार्रवाई को लेकर ‘अवैध हिरासत’ का सवाल उठाया गया है, लेकिन केवल पोस्ट के आधार पर ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।</h6>
<h6>यह जानना जरूरी है कि पुलिस ने नेहा बोरा को किस कानूनी प्रावधान के तहत रोका या हिरासत में लिया, क्या उन्हें कोई नोटिस दिया गया था और उन्हें कहां ले जाया गया।</h6>
<h6>इन तथ्यों के सामने आने के बाद ही हिरासत की वैधता पर कोई कानूनी निष्कर्ष निकाला जा सकता है।</h6>
<h2><span><strong>कौन हैं नेहा बोरा?</strong></span></h2>
<h6>नेहा बोरा All India Students’ Association यानी AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की शोधार्थी हैं। हाल के महीनों में वह छात्र आंदोलनों का एक प्रमुख चेहरा बनकर सामने आई हैं।</h6>
<h6>जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान उन्होंने करीब 23 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। बाद में भी वह परीक्षा, भर्ती और छात्र आंदोलनों से जुड़े कई प्रदर्शनों में सक्रिय रही हैं।</h6>
<h2><span><strong>CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्यों बढ़ा विरोध?</strong></span></h2>
<h6>विवाद उस रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के विभिन्न फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं।</h6>
<h6>CJP ने इसी विवाद के बीच ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच और कुछ अन्य मांगों को लेकर अभियान शुरू किया है। संगठन ने 48 घंटे में इस्तीफा नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।</h6>
<h6>चुनाव आयोग का पक्ष है कि किसी बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।</h6>
<h2><span><strong>अब दिल्ली पुलिस के जवाब का इंतजार</strong></span></h2>
<h6>फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि नेहा बोरा को वास्तव में हिरासत में लिया गया है या नहीं और अगर लिया गया है तो किस आधार पर।</h6>
<h6>जब तक दिल्ली पुलिस या AISA की ओर से हिरासत के समय, कारण और मौजूदा स्थिति की विस्तृत जानकारी नहीं आती, तब तक सोशल मीडिया पर किए जा रहे बड़े दावों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।</h6>
<h6><strong>CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से ठीक पहले नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने का दावा इस मामले को और संवेदनशील बनाता है। लेकिन सबसे जरूरी तथ्य अभी सामने आना बाकी है—दिल्ली पुलिस ने उन्हें किस आधार पर और किन परिस्थितियों में अपने साथ लिया। पुलिस की आधिकारिक जानकारी आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/neha-bora-detained-claim-delhi-police-gyanesh-kumar-jantar-mantar-protest/article-2196</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/neha-bora-detained-claim-delhi-police-gyanesh-kumar-jantar-mantar-protest/article-2196</guid>
                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 18:31:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/neha-bora-delhi-police-jantar-mantar-protest-2026.jpg.jpg"                         length="1001623"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>SIR विवाद पर चिराग के बाद उपेंद्र कुशवाहा भी बोले- जनता में कंफ्यूजन है, चुनाव आयोग तुरंत सफाई दे</title>
                                    <description><![CDATA[SIR और चुनाव आयोग को लेकर जारी विवाद के बीच NDA के सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव आयोग से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है। उनका कहना है कि इस मुद्दे को लेकर जनता में कंफ्यूजन पैदा हुआ है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी कहा था कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में संदेह नहीं रहना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/bihar/upendra-kushwaha-sir-election-commission-clarification-chirag-paswan/article-2195"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/upendra-kushwaha-sir-election-commission-clarification-2026.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h1><span><strong>विपक्ष के बाद अब NDA सहयोगियों ने भी उठाए सवाल, EC से मांगी स्थिति साफ करने की मांग</strong></span></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/upendra-kushwaha-sir-election-commission-clarification-2026.jpg2.jpg" alt="upendra-kushwaha-sir-election-commission-clarification-2026.jpg2" width="1366" height="768"></img>
SIR विवाद पर उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव आयोग से जनता के मन में बनी उलझन दूर करने के लिए स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

<p><span><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | बिहार डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></span></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li>
<h6><strong>SIR विवाद पर उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव आयोग से मांगा स्पष्टीकरण</strong></h6>
</li>
<li>
<h6><strong>कहा- जनता में इस मुद्दे को लेकर काफी कंफ्यूजन है</strong></h6>
</li>
<li>
<h6><strong>चिराग पासवान भी EC से जनता की शंकाएं दूर करने को कह चुके हैं</strong></h6>
</li>
<li>
<h6><strong>दोनों नेता NDA के सहयोगी हैं</strong></h6>
</li>
<li>
<h6><strong>चुनाव आयोग पहले कह चुका है कि अलग-अलग राय आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम फैसले सहमति से हुए</strong></h6>
</li>
</ul>
<h6><strong>पटना।</strong> Special Intensive Revision यानी SIR और चुनाव आयोग को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच अब उपेंद्र कुशवाहा ने भी चुनाव आयोग से खुलकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि पूरे मामले को लेकर जनता में काफी उलझन पैदा हो गई है और चुनाव आयोग को बिना देर किए सही स्थिति सामने रखनी चाहिए।</h6>
<h6>उपेंद्र कुशवाहा का बयान ऐसे समय आया है जब केंद्रीय मंत्री और NDA सहयोगी चिराग पासवान भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग से जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब देने की बात कह चुके हैं।</h6>
<h2><span><strong>उपेंद्र कुशवाहा ने क्या कहा?</strong></span></h2>
<h6>उपेंद्र कुशवाहा ने X पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि SIR से जुड़े विवाद के कारण जनता में काफी कंफ्यूजन पैदा हुआ है। उनके मुताबिक इस मुद्दे को स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।</h6>
<h6>उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि सही स्थिति पर तत्काल स्पष्टीकरण जारी किया जाए, ताकि लोगों के मन में बनी उलझन दूर हो सके।</h6>
<h6>कुशवाहा ने अपने बयान में किसी विपक्षी दल के आरोप को सही या गलत ठहराने के बजाय चुनाव आयोग से स्थिति साफ करने पर जोर दिया है।</h6>
<h2><span><strong>चिराग पासवान ने भी चुनाव आयोग से क्या कहा था?</strong></span></h2>
<h6>इससे पहले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी चुनाव आयोग से सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी।</h6>
<h6>चिराग ने कहा कि अगर चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था पर सवाल उठ रहे हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त को अपना पक्ष स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा होना चिंता की बात होगी।</h6>
<h6>चिराग पासवान ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को केवल विपक्षी नेताओं के आरोपों का जवाब देने के नजरिए से नहीं, बल्कि आम जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।</h6>
<h2><span><strong>दो NDA सहयोगियों के बयान क्यों अहम हैं?</strong></span></h2>
<h6>उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान दोनों NDA से जुड़े नेता हैं। ऐसे में चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगने वाले उनके बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बने हैं। हालांकि दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों को तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया है; उनका जोर जनता के बीच पैदा हुई शंकाओं को दूर करने पर है।</h6>
<h6>इसलिए उनके बयानों को चुनाव आयोग के खिलाफ निष्कर्ष के रूप में देखने के बजाय आयोग से अधिक स्पष्टता की मांग के रूप में देखना अधिक सटीक होगा।</h6>
<h2><span><strong>SIR को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?</strong></span></h2>
<h6>हालिया विवाद उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के विभिन्न फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। इन मुद्दों में SIR, मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची और Form-6 से जुड़े विषय भी शामिल थे।</h6>
<h6>इसके बाद राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए और आयोग से ज्यादा जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।</h6>
<h2><span><strong>चुनाव आयोग पहले क्या सफाई दे चुका है?</strong></span></h2>
<h6>चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद की धारणा को खारिज करते हुए कहा है कि लिखित टिप्पणियां, सवाल और अलग-अलग राय किसी बहु-सदस्यीय संस्था में सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा हैं।</h6>
<h6>आयोग का कहना है कि SIR समेत अंतिम फैसले सभी चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए और ड्राफ्ट स्तर पर उठाए गए सवालों को अंतिम असहमति नहीं माना जाना चाहिए।</h6>
<h6>Form-6 को लेकर भी आयोग ने स्पष्ट किया कि मूल Form-6 में बदलाव नहीं किया गया और SIR से जुड़ा हिस्सा अलग annexure के रूप में जोड़ा गया था।</h6>
<h2><span><strong>अब सवाल जनता के भरोसे का</strong></span></h2>
<h6>मौजूदा विवाद में राजनीतिक आरोप और चुनाव आयोग की सफाई दोनों सामने आ चुके हैं। उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान का जोर इस बात पर है कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर आम मतदाता के मन में किसी तरह की उलझन या अविश्वास नहीं रहना चाहिए।</h6>
<h6>अब यह देखना होगा कि चुनाव आयोग इन बयानों के बाद कोई नया या विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करता है या अपनी पहले दी गई सफाई पर ही कायम रहता है।</h6>
<h6><strong>SIR विवाद अब केवल विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच की बहस तक सीमित नहीं रहा है। NDA के सहयोगी चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा भी आयोग से जनता की शंकाएं दूर करने की बात कह रहे हैं। हालांकि दोनों नेताओं ने आरोपों पर अपना कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। ऐसे में अब पूरी नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग जनता के सामने इस विवाद को लेकर और कितनी स्पष्टता लाता है।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिहार</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/bihar/upendra-kushwaha-sir-election-commission-clarification-chirag-paswan/article-2195</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/bihar/upendra-kushwaha-sir-election-commission-clarification-chirag-paswan/article-2195</guid>
                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 17:33:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/upendra-kushwaha-sir-election-commission-clarification-2026.jpg2.jpg"                         length="1043676"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ओवैसी की यूपी एंट्री पर उलेमा से टकराव क्यों? फिरंगी महली के बयान के बाद AIMIM समर्थकों का पलटवार</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले AIMIM अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में है। इसी बीच मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व को लेकर पार्टी और कुछ प्रमुख उलेमा के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। कानपुर रैली के बाद मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/owaisi-aimim-firangi-mahali-ulama-muslim-leadership-up-election-2027/article-2194"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/owaisi-firangi-mahali-ulama-up-election-2027.jpg2.jpg" alt=""></a><br /><h1><span><strong>यूपी चुनाव से पहले मुस्लिम नेतृत्व पर नई बहस, सियासत और उलेमा आमने-सामने</strong></span></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/owaisi-firangi-mahali-ulama-up-election-2027.jpg2.jpg" alt="owaisi-firangi-mahali-ulama-up-election-2027.jpg2" width="1366" height="768"></img>
यूपी चुनाव 2027 से पहले असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति और मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली के बयान ने मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

<p><span><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></span></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li>
<h6><strong>कानपुर में ओवैसी की रैली के बाद फिरंगी महली ने धार्मिक ध्रुवीकरण से बचने की अपील की</strong></h6>
</li>
<li>
<h6><strong>उन्होंने कहा—यूपी का मुस्लिम मतदाता विकास के मुद्दे पर फैसला करेगा</strong></h6>
</li>
<li>
<h6><strong>AIMIM नेताओं ने उनके बयान का विरोध किया</strong></h6>
</li>
<li>
<h6><strong>इससे पहले सज्जाद नोमानी और महमूद मदनी से भी AIMIM समर्थकों का विवाद हो चुका है</strong></h6>
</li>
<li>
<h6><strong>बहस के केंद्र में सवाल—मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व किसके हाथ में और किस रास्ते से आगे बढ़े?</strong></h6>
</li>
</ul>
<h6><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच मुस्लिम राजनीति में एक अलग बहस तेज होती दिख रही है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी प्रदेश में लगातार रैलियां कर रहे हैं और मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठा रहे हैं। इसी दौरान पार्टी के नेताओं और कुछ प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं के बीच सार्वजनिक मतभेद सामने आए हैं।</h6>
<h6>ताजा विवाद लखनऊ के ऐशबाग ईदगाह के इमाम और इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली के बयान के बाद शुरू हुआ है। फिरंगी महली ने ओवैसी की कानपुर रैली के बाद कहा था कि चुनावी राजनीति को धार्मिक आधार पर बांटने से बचना चाहिए।</h6>
<h2><span><strong>फिरंगी महली ने क्या कहा था?</strong></span></h2>
<h6>मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुसलमान राजनीतिक रूप से जागरूक हैं और प्रदेश में मुस्लिम सांसद और विधायक पहले से मौजूद हैं।</h6>
<h6>उन्होंने यह भी कहा कि मतदाताओं की धार्मिक भावनाओं को भड़काने के बजाय विकास के मुद्दों पर राजनीति होनी चाहिए। उनके मुताबिक यूपी का मुस्लिम मतदाता केवल भावनाओं के आधार पर नहीं बल्कि अपने मुद्दों को देखकर मतदान करेगा।</h6>
<h6>उनकी यह टिप्पणी ओवैसी की कानपुर रैली के बाद आई थी, जहां AIMIM प्रमुख ने मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व और प्रदेश की राजनीति में समुदाय की भूमिका का मुद्दा उठाया था।</h6>
<h2><span><strong>AIMIM नेताओं ने क्यों जताई नाराजगी?</strong></span></h2>
<h6>फिरंगी महली के बयान के बाद AIMIM से जुड़े नेताओं ने सार्वजनिक रूप से उनकी आलोचना की।</h6>
<h6>यूपी AIMIM नेता मुफ्ती मोहम्मद ओसामा नदवी ने आजतक से कहा कि उनकी पार्टी उलेमा का सम्मान करती है, लेकिन जो धर्मगुरु राजनीतिक टिप्पणी करेंगे, उनके बयानों की आलोचना भी की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ धार्मिक नेता स्वतंत्र मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व की कोशिशों का विरोध करते हैं। यह AIMIM नेता का राजनीतिक दावा है।</h6>
<h6>नदवी ने यह भी कहा कि AIMIM की कोशिश मुस्लिम समाज की स्वतंत्र राजनीतिक आवाज खड़ी करने की है। उनके अनुसार मुख्यधारा के दलों ने लंबे समय तक मुस्लिम मतदाताओं को वोट बैंक की तरह देखा है। यह AIMIM का राजनीतिक पक्ष है, जिसे अन्य दल और धार्मिक नेता अलग नजरिए से देखते हैं।</h6>
<h2><span><strong>सज्जाद नोमानी से भी क्यों हुआ था विवाद?</strong></span></h2>
<h6>मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली से पहले मौलाना सज्जाद नोमानी भी AIMIM नेताओं और समर्थकों की आलोचना का सामना कर चुके हैं।</h6>
<h6>आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान नोमानी ने महा विकास अघाड़ी के उम्मीदवारों के समर्थन में अपील की थी। AIMIM समर्थकों ने आरोप लगाया था कि इस राजनीतिक रुख से उनकी पार्टी को नुकसान हुआ। बाद में ओवैसी और AIMIM नेता इम्तियाज जलील ने भी नोमानी के राजनीतिक रुख की आलोचना की थी।</h6>
<h6>हालांकि किसी उम्मीदवार की हार को केवल एक अपील या किसी एक समुदाय के वोटों से जोड़ना सरल निष्कर्ष होगा; चुनाव परिणाम कई स्थानीय और राजनीतिक कारणों से प्रभावित होते हैं।</h6>
<h2><span><strong>महमूद मदनी और ओवैसी के बीच क्या विवाद रहा?</strong></span></h2>
<h6>जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महमूद मदनी भी ओवैसी की राजनीति की आलोचना करते रहे हैं।</h6>
<h6>रिपोर्ट के मुताबिक मदनी ने एक पॉडकास्ट में ओवैसी की राजनीतिक विचारधारा से असहमति जताई और कहा कि उनकी राजनीति से समाज में विभाजन बढ़ सकता है। उन्होंने ओवैसी की रैलियों में जुटने वाली भीड़ को लेकर भी तीखी टिप्पणी की थी। इसके बाद AIMIM समर्थकों ने मदनी की आलोचना की।</h6>
<h6>यहां दोनों पक्षों के राजनीतिक दृष्टिकोण अलग हैं—मदनी ओवैसी की शैली और राजनीति पर सवाल उठाते हैं, जबकि AIMIM का कहना है कि वह मुस्लिम समुदाय के स्वतंत्र राजनीतिक प्रतिनिधित्व की बात कर रही है।</h6>
<h2><span><strong>ओवैसी यूपी में किस रणनीति के साथ उतर रहे हैं?</strong></span></h2>
<h6>AIMIM ने उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाई हैं। ओवैसी ने कानपुर में सभा की और पार्टी की आगे श्रावस्ती तथा आजमगढ़ जैसे इलाकों में भी कार्यक्रम करने की योजना सामने आई है।</h6>
<h6>ओवैसी ने हाल में यह भी कहा है कि BJP को तीसरी बार सरकार बनाने से रोकने के लिए वह समान विचार रखने वाले दलों से गठबंधन की बातचीत के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने सपा समेत दूसरे विपक्षी दलों की राजनीति पर भी सवाल उठाए हैं।</h6>
<h6>यह गठबंधन होगा या नहीं और किन दलों के साथ होगा, इस पर अभी अंतिम स्थिति सामने नहीं आई है।</h6>
<h2><span><strong>असली विवाद मुस्लिम नेतृत्व को लेकर है?</strong></span></h2>
<h6>मौजूदा बहस केवल किसी एक बयान तक सीमित नहीं दिखती।</h6>
<h6>AIMIM का राजनीतिक तर्क है कि मुसलमानों को अपनी स्वतंत्र राजनीतिक ताकत और नेतृत्व विकसित करना चाहिए। दूसरी तरफ फिरंगी महली जैसे धर्मगुरु यह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व पहले से मौजूद है और चुनाव को धार्मिक आधार पर बांटने से बचना चाहिए।</h6>
<h6>यानी मतभेद दो सवालों पर केंद्रित है—मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व किस तरह होना चाहिए और धर्मगुरुओं की चुनावी राजनीति में कितनी भूमिका होनी चाहिए।</h6>
<h2><span><strong>यूपी चुनाव से पहले क्यों बढ़ी यह बहस?</strong></span></h2>
<h6>उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी सामाजिक और राजनीतिक रणनीति पर काम कर रहे हैं। AIMIM भी उन क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ा रही है जहां मुस्लिम आबादी महत्वपूर्ण है।</h6>
<h6>ऐसे में ओवैसी की राजनीति पर किसी प्रमुख धर्मगुरु की टिप्पणी और उस पर AIMIM नेताओं की प्रतिक्रिया केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं रह जाती, बल्कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व की बड़ी बहस का हिस्सा बन जाती है।</h6>
<h6>इसके बावजूद यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इस बहस का मतदाताओं के व्यवहार या चुनाव परिणाम पर क्या असर पड़ेगा।</h6>
<h6><strong>फिरंगी महली, सज्जाद नोमानी और महमूद मदनी से AIMIM समर्थकों के अलग-अलग विवादों के पीछे एक साझा सवाल दिखाई देता है—मुस्लिम समाज की राजनीतिक आवाज किस रूप में आगे बढ़े। AIMIM स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व की बात कर रही है, जबकि कई उलेमा धार्मिक पहचान के आधार पर चुनावी ध्रुवीकरण से बचने पर जोर दे रहे हैं। यूपी चुनाव करीब आने के साथ यह वैचारिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है, लेकिन मतदाता किस राजनीतिक रास्ते को चुनेंगे इसका फैसला आखिर चुनाव में ही होगा।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/owaisi-aimim-firangi-mahali-ulama-muslim-leadership-up-election-2027/article-2194</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/owaisi-aimim-firangi-mahali-ulama-muslim-leadership-up-election-2027/article-2194</guid>
                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 16:52:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/owaisi-firangi-mahali-ulama-up-election-2027.jpg2.jpg"                         length="1044502"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बारिश में बैरिकेडिंग पर चढ़े अजय राय, पुलिस ने हिरासत में लिया; CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ में तेज बारिश के बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय बैरिकेडिंग पर चढ़ गए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें नीचे उतारकर हिरासत में लिया। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए CEC के इस्तीफे की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/ajay-rai-congress-protest-lucknow-cec-gyanesh-kumar-barricade/article-2193"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/ajay-rai-congress-protest-lucknow-cec-gyanesh-kumar-barricade.jpg" alt=""></a><br /><h1><span><strong>बारिश नहीं रोक पाई प्रदर्शन, बैरिकेडिंग पर चढ़े अजय राय</strong></span></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/ajay-rai-congress-protest-lucknow-cec-gyanesh-kumar-barricade.jpg" alt="ajay-rai-congress-protest-lucknow-cec-gyanesh-kumar-barricade" width="1366" height="768"></img>
लखनऊ में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग पर चढ़े उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय।

<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>लखनऊ में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन</strong></li>
<li><strong>तेज बारिश के बावजूद निर्वाचन कार्यालय की ओर बढ़े कार्यकर्ता</strong></li>
<li><strong>सुन्नी वक्फ बोर्ड कार्यालय के पास पुलिस ने लगाई बैरिकेडिंग</strong></li>
<li><strong>बैरिकेडिंग पर चढ़े अजय राय, पुलिस ने नीचे उतारा</strong></li>
<li><strong>अजय राय समेत कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया</strong></li>
<li><strong>कांग्रेस ने CEC के इस्तीफे की मांग दोहराई</strong></li>
</ul>
<h6><strong>लखनऊ।</strong> मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस शुक्रवार को लखनऊ की सड़कों पर उतरी। तेज बारिश के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई।</h6>
<h6>कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे। सुन्नी वक्फ बोर्ड कार्यालय के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने इस दौरान हल्का बल प्रयोग भी किया।</h6>
<h2><span><strong>बैरिकेडिंग पर चढ़ गए अजय राय</strong></span></h2>
<h6>बारिश के बीच प्रदर्शन कर रहे अजय राय युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और दूसरी ओर जाने की कोशिश करने लगे।</h6>
<h6>पुलिसकर्मियों ने उन्हें बैरिकेडिंग से नीचे उतारा। इसके बाद अजय राय और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और उन्हें इको गार्डन ले जाया गया।</h6>
<h6>यही तस्वीरें इस प्रदर्शन का सबसे चर्चित हिस्सा बन गईं—एक तरफ तेज बारिश और दूसरी तरफ बैरिकेडिंग पर खड़े कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और कार्यकर्ता।</h6>
<h2><span><strong>अजय राय ने क्या कहा?</strong></span></h2>
<h6>प्रदर्शन के दौरान अजय राय ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।</h6>
<h6>अजय राय ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं और कांग्रेस इस मुद्दे पर सड़क से संसद तक अपनी लड़ाई जारी रखेगी। ये कांग्रेस और अजय राय के राजनीतिक आरोप हैं।</h6>
<h2><span><strong>सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं रहा विरोध</strong></span></h2>
<h6>CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। पार्टी ने शुक्रवार को दिल्ली, कोलकाता, लखनऊ, चंडीगढ़, जम्मू और देहरादून समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किए। कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और उन्हें पद से हटाने की मांग कर रही है।</h6>
<h6>देहरादून में भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सचिवालय की ओर मार्च किया, जहां पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।</h6>
<h2><span><strong>ज्ञानेश कुमार को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?</strong></span></h2>
<h6>मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर हालिया विवाद चुनाव आयोग के भीतर फैसलों पर कथित असहमति की रिपोर्ट सामने आने के बाद तेज हुआ है।</h6>
<h6>मीडिया रिपोर्टों के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते महीनों में SIR समेत आयोग के कई फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इन्हीं रिपोर्टों को आधार बनाकर CEC से जवाब और इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।</h6>
<h6>चुनाव आयोग का पक्ष रहा है कि अलग-अलग राय निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से किए गए। इसलिए विपक्ष के आरोप और आयोग की सफाई—दोनों इस राजनीतिक विवाद का हिस्सा हैं।</h6>
<h2><span><strong>CEC का यूपी दौरा भी हुआ स्थगित</strong></span></h2>
<h6>इसी विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मेरठ और वाराणसी में प्रस्तावित कार्यक्रम भी स्थगित हो चुके हैं।</h6>
<h6>मेरठ में 25 सितंबर को युवाओं के साथ संवाद और चुनाव से जुड़े कार्यक्रम का आयोजन प्रस्तावित था, जबकि वाराणसी में 28 सितंबर का कार्यक्रम था। चुनाव आयोग ने कार्यक्रम स्थगित किए जाने का कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है।</h6>
<h6>इसलिए कार्यक्रम स्थगित होने को सीधे मौजूदा राजनीतिक विवाद का परिणाम मानना अभी स्थापित तथ्य नहीं है।</h6>
<h2><span><strong>यूपी में चुनावी सियासत के बीच बढ़ी हलचल</strong></span></h2>
<h6>उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां पहले ही तेज हैं। ऐसे में चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस का यह प्रदर्शन भी राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।</h6>
<h6>अजय राय के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार संगठन और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी सक्रियता बढ़ाने की कोशिश कर रही है। शुक्रवार का प्रदर्शन मुख्य रूप से CEC और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर केंद्रित रहा।</h6>
<h6><strong>लखनऊ में तेज बारिश के बीच हुआ कांग्रेस का प्रदर्शन अब तस्वीरों और राजनीतिक संदेश—दोनों वजहों से चर्चा में है। कांग्रेस CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ी है, जबकि चुनाव आयोग अपने फैसलों की प्रक्रिया को लेकर सफाई दे चुका है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि आयोग की ओर से आगे कोई नया स्पष्टीकरण आता है या विपक्ष इस विरोध को और तेज करता है।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/ajay-rai-congress-protest-lucknow-cec-gyanesh-kumar-barricade/article-2193</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/ajay-rai-congress-protest-lucknow-cec-gyanesh-kumar-barricade/article-2193</guid>
                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 16:31:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/ajay-rai-congress-protest-lucknow-cec-gyanesh-kumar-barricade.jpg"                         length="1404093"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>19 साल बिलासपुर में रहा बांग्लादेशी अतीक, पासपोर्ट से वोटर ID तक मिले कई भारतीय दस्तावेज; STF ने पकड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में STF और पुलिस ने 42 वर्षीय अतीक हुसैन को पकड़ा है। पुलिस के अनुसार वह बांग्लादेश का नागरिक है और करीब 19 साल से बिलासपुर में रह रहा था। उसके पास से भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर ID, ड्राइविंग लाइसेंस समेत कई दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/bangladeshi-atiq-lived-in-bilaspur-for-19-years-many-indian/article-2192"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/bangladeshi-atique-hussain-bilaspur-stf-arrest-2026.jpg.jpg" alt=""></a><br /><h2><span><strong>19 साल तक पहचान पर नहीं उठा सवाल, अब दस्तावेजों की पूरी चेन जांच के घेरे में</strong></span></h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/bangladeshi-atique-hussain-bilaspur-stf-arrest-2026.jpg.jpg" alt="bangladeshi-atique-hussain-bilaspur-stf-arrest-2026.jpg" width="1366" height="768"></img>
बिलासपुर में STF की कार्रवाई में पकड़ा गया अतीक हुसैन, पुलिस के मुताबिक उसके पास कई भारतीय पहचान दस्तावेज मिले हैं।

<p><span><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></span></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>पुलिस के मुताबिक अतीक हुसैन बांग्लादेश के नारायणगंज का रहने वाला है</strong></li>
<li><strong>वर्ष 2005 में भारत आने और 2007 से बिलासपुर में रहने की जानकारी</strong></li>
<li><strong>NTPC सीपत में निजी कंपनी के जरिए करता था लिफ्ट मेंटेनेंस</strong></li>
<li><strong>पासपोर्ट, आधार, पैन, वोटर ID और ड्राइविंग लाइसेंस समेत कई दस्तावेज मिले</strong></li>
<li><strong>दस्तावेज बनवाने में किसने मदद की, इसकी जांच कर रही पुलिस</strong></li>
<li><strong>रायपुर के होल्डिंग सेंटर भेजा गया, डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू</strong></li>
</ul>
<h6><strong>बिलासपुर।</strong> छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पहचान दस्तावेजों की जांच और उन्हें जारी करने की प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। STF और जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 42 वर्षीय अतीक हुसैन को पकड़ा गया है। पुलिस का कहना है कि अतीक मूल रूप से बांग्लादेश का नागरिक है और वह कई वर्षों से भारत में रह रहा था।</h6>
<h6>पुलिस के मुताबिक अतीक वर्ष 2005 में बांग्लादेश से भारत आया था। इसके बाद करीब दो साल तमिलनाडु में रहने के बाद वह 2007 में बिलासपुर पहुंचा। यहां वह लंबे समय से रह रहा था।</h6>
<h2><span><strong>NTPC सीपत तक कैसे पहुंचा अतीक?</strong></span></h2>
<h6>जांच में सामने आया कि अतीक बिलासपुर के सीपत स्थित NTPC प्लांट में लिफ्ट मेंटेनेंस का काम करता था। वह सीधे NTPC का कर्मचारी नहीं था, बल्कि BECO Lifts Private Limited नाम की निजी एजेंसी के जरिए काम कर रहा था।</h6>
<h6>बिलासपुर के SSP रजनेश सिंह ने <em>The New Indian Express</em> को बताया कि लिफ्ट मेंटेनेंस के काम के कारण उसे प्लांट की प्रशासनिक और परिचालन इमारतों में आने-जाने का अवसर मिलता था। इसके बाद सुरक्षा जांच और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं।</h6>
<h2><span><strong>पासपोर्ट से वोटर ID तक, क्या-क्या मिला?</strong></span></h2>
<h6>पुलिस ने अतीक के किराये के मकान की तलाशी के दौरान कई भारतीय दस्तावेज बरामद करने का दावा किया है।</h6>
<h6>इनमें भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर ID, ड्राइविंग लाइसेंस, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और नौवीं कक्षा की मार्कशीट शामिल हैं।</h6>
<h6>पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान अतीक ने इन दस्तावेजों को गलत तरीके से बनवाने की बात स्वीकार की है। हालांकि अब जांच इस बात की भी हो रही है कि अलग-अलग सरकारी दस्तावेज उसे किस प्रक्रिया के जरिए मिले और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।</h6>
<h2><span><strong>भारतीय पासपोर्ट कैसे बना, अब यही बड़ा सवाल</strong></span></h2>
<h6>रिपोर्टों के मुताबिक अतीक के पास भारतीय पासपोर्ट भी मिला है। स्थानीय रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से कहा गया है कि पासपोर्ट वर्ष 2018 में बनवाया गया था। इसके बाद दूसरे पहचान दस्तावेज भी बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।</h6>
<h6>अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन दस्तावेजों के आवेदन में किन कागजों का इस्तेमाल हुआ, सत्यापन किस स्तर पर हुआ और क्या किसी व्यक्ति ने जानबूझकर उसकी मदद की।</h6>
<h2><span><strong>वोटर ID मिलने से भी उठे सवाल</strong></span></h2>
<h6>अतीक के पास वोटर ID मिलने की पुष्टि कई रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से की गई है। इससे यह सवाल भी उठा है कि विदेशी नागरिक के नाम पर मतदाता पहचान पत्र बनने तक मामला कैसे पहुंचा।</h6>
<h6>हालांकि किसी व्यक्ति के पास वोटर ID मिलने और उसके वास्तव में चुनाव में मतदान करने के बीच अंतर है। एक स्थानीय रिपोर्ट में मतदान करने का दावा भी किया गया है, लेकिन इस बिंदु की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए फिलहाल इतना ही स्थापित है कि उसके पास वोटर ID मिलने की बात पुलिस ने कही है।</h6>
<h2><span><strong>सोशल मीडिया पर SIR को लेकर भी छिड़ी बहस</strong></span></h2>
<h6>मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे मतदाता सूची की जांच और SIR से भी जोड़ा जा रहा है। पत्रकार शुभम शुक्ला ने X पर सवाल उठाया कि इतने भारतीय दस्तावेज और वोटर ID आखिर कैसे बन गए और ऐसे मामलों में मतदाता सूची की गहन जांच होनी चाहिए।</h6>
<h6>यह उनका विचार और राजनीतिक-प्रशासनिक मांग है। फिलहाल पुलिस की जांच अतीक की नागरिकता, उसके दस्तावेजों और उन्हें बनवाने की प्रक्रिया पर केंद्रित है। उपलब्ध पुलिस रिपोर्ट में इस गिरफ्तारी को किसी SIR कार्रवाई का नतीजा नहीं बताया गया है।</h6>
<h2><span><strong>अब पुलिस किन लोगों की तलाश कर रही है?</strong></span></h2>
<h6>पुलिस अब उन लोगों की भूमिका की जांच कर रही है जिन्होंने कथित तौर पर अतीक को दस्तावेज तैयार कराने में मदद की हो सकती है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इतने वर्षों तक उसकी पहचान और दस्तावेज सत्यापन में गड़बड़ी कहां हुई।</h6>
<h6>अतीक को रायपुर के होल्डिंग सेंटर भेजा गया है। पुलिस के मुताबिक उसके बांग्लादेश डिपोर्टेशन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है और संबंधित अधिकारियों तथा बांग्लादेशी मिशन को सूचना भेजी जा रही है।</h6>
<h2><span><strong>19 साल बाद खुली पहचान, जांच अब दस्तावेजों से आगे</strong></span></h2>
<h6>यह मामला केवल एक विदेशी नागरिक के पकड़े जाने तक सीमित नहीं है। जांच का अहम हिस्सा अब यह भी है कि अलग-अलग स्तरों पर भारतीय पहचान से जुड़े इतने दस्तावेज आखिर जारी कैसे हुए और सत्यापन प्रक्रिया में कहां चूक हुई।</h6>
<h6>इन सवालों के जवाब पुलिस जांच पूरी होने और संबंधित विभागों के रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।</h6>
<h6><strong>अतीक हुसैन की गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वह इतने साल भारत में कैसे रहा, बल्कि यह भी है कि पासपोर्ट से लेकर वोटर ID तक अलग-अलग भारतीय दस्तावेज उसके नाम पर कैसे बने। अब पुलिस की जांच यह तय करेगी कि यह केवल फर्जी कागजों का मामला था या इसके पीछे मदद करने वालों की कोई बड़ी चेन भी मौजूद थी।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/bangladeshi-atiq-lived-in-bilaspur-for-19-years-many-indian/article-2192</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/bangladeshi-atiq-lived-in-bilaspur-for-19-years-many-indian/article-2192</guid>
                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 15:31:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/bangladeshi-atique-hussain-bilaspur-stf-arrest-2026.jpg.jpg"                         length="912136"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>14 आपत्तियां, फिर भी सर्वसम्मति से फैसले कैसे? चुनाव आयोग की सफाई के बाद उठे नए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग के भीतर दो आयुक्तों की कम से कम 14 लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद आयोग ने कहा कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। अब बहस इस बात पर है कि जिन मुद्दों पर शुरुआत में गंभीर सवाल उठे, उन पर आखिर सहमति कैसे बनी और क्या आयोग इससे जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions/article-2191"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions.jpg" alt=""></a><br /><h2><span><strong>आपत्तियां दर्ज हुईं, फिर सहमति कैसे बनी? अब इसी जवाब पर टिकी नजर</strong></span></h2>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions.jpg" alt="gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions" width="1366" height="768"></img>
दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के सर्वसम्मति से फैसले वाले दावे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

<h6><span><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></span></h6>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की—रिपोर्ट</strong></li>
<li><strong>चुनाव आयोग का दावा—अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए</strong></li>
<li><strong>Form-6, ECINet और मतदाता सूची से जुड़े मामलों पर उठे थे सवाल</strong></li>
<li><strong>आयोग ने मतभेद को सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा बताया</strong></li>
<li><strong>अब सवाल—आपत्तियों से अंतिम सहमति तक की पूरी प्रक्रिया क्या थी?</strong></li>
</ul>
<h6><strong>नई दिल्ली।</strong> चुनाव आयोग के अंदरूनी कामकाज को लेकर सामने आई रिपोर्ट और उसके बाद आयोग की सफाई ने एक नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के विभिन्न कदमों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। इसके बाद चुनाव आयोग ने कहा कि अलग-अलग राय आंतरिक विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा है और पिछले एक साल के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।</h6>
<h6>लेकिन आयोग की इसी सफाई के बाद अब एक बड़ा सवाल सामने आया है—अगर कई मामलों पर दोनों आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी, तो अंतिम फैसला लेते समय वे उसी फैसले से सहमत कैसे हुए?</h6>
<h2><span><strong>किन मुद्दों पर आयुक्तों ने उठाए थे सवाल?</strong></span></h2>
<h6><em>इंडियन एक्सप्रेस</em> की जांच रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों पर थीं। इनमें नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में बदलाव, ECINet की व्यवस्था, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा कुछ प्रशासनिक फैसले शामिल थे।</h6>
<h6>रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ मामलों में आयुक्तों ने कड़ी भाषा में अपनी आपत्ति दर्ज कराई। Form-6 में बदलाव को लेकर भी दोनों आयुक्तों की ओर से सवाल उठाए जाने की बात सामने आई।</h6>
<h2><span><strong>चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी?</strong></span></h2>
<h6>चुनाव आयोग ने इस विवाद पर कहा कि किसी बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग विचार, सुझाव और टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के मुताबिक बीते 10 महीनों में 40 से ज्यादा पहल और कई चुनाव सुधार किए गए, जबकि पिछले एक साल के अंतिम फैसले सभी चुनाव आयुक्तों की भागीदारी और सहमति से लिए गए।</h6>
<h6>आयोग का पक्ष यह है कि ड्राफ्ट स्तर पर दी गई टिप्पणियों या आपत्तियों को अंतिम फैसले से अलग करके देखने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।</h6>
<h2><span><strong>सफाई के बाद नया सवाल क्यों उठा?</strong></span></h2>
<h6>यहीं से विवाद का दूसरा हिस्सा शुरू होता है। अगर शुरुआत में किसी प्रस्ताव या प्रक्रिया पर लिखित आपत्ति थी, लेकिन अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से हुआ, तो बीच में ऐसा क्या बदला कि सभी सदस्य सहमत हो गए?</h6>
<h6>AajTak के विश्लेषण में भी इसी सवाल को प्रमुखता से उठाया गया है। लेख में कहा गया है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि आपत्तियों के बाद क्या विस्तृत चर्चा हुई, क्या संबंधित प्रस्तावों में बदलाव किए गए या किसी कानूनी और तकनीकी स्पष्टीकरण के बाद आयुक्तों की चिंताएं दूर हुईं। हालांकि लेख में रखी गई ये संभावनाएं हैं, स्थापित तथ्य नहीं।</h6>
<h2><span><strong>क्या आपत्तियां चर्चा के बाद दूर हो गई थीं?</strong></span></h2>
<h6>एक संभावना यह हो सकती है कि शुरुआती मसौदे पर सवाल उठने के बाद आयोग के भीतर चर्चा हुई हो और बाद में संबंधित बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मिलने से सहमति बन गई हो।</h6>
<h6>दूसरी संभावना यह भी हो सकती है कि कुछ आपत्तियां केवल प्रक्रिया से जुड़ी रही हों और अंतिम फैसले तक पहुंचने से पहले उनमें बदलाव किया गया हो।</h6>
<h6>लेकिन फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी से यह साफ नहीं है कि प्रत्येक आपत्ति पर अलग-अलग क्या समाधान निकला। इसलिए इस पर निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। AajTak के विश्लेषण ने भी इन कारणों को संभावनाओं के रूप में ही रखा है।</h6>
<h2><span><strong>क्या फैसलों की कॉपी सामने आएगी?</strong></span></h2>
<h6>ऐसा होने पर यह समझने में मदद मिल सकती है कि आयुक्तों ने किस बिंदु पर आपत्ति जताई थी और अंतिम फैसले में क्या बदलाव या स्पष्टीकरण आया। हालांकि चुनाव आयोग ने ऐसी प्रतियां जारी करने की कोई घोषणा की है, इसका सार्वजनिक प्रमाण फिलहाल सामने नहीं है।</h6>
<h2><span><strong>Form-6 को लेकर क्या था विवाद?</strong></span></h2>
<h6>नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में SIR से संबंधित अतिरिक्त सवाल जोड़े जाने को लेकर भी विवाद सामने आया था। <em>इंडियन एक्सप्रेस</em> की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों आयुक्तों ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी और इसके कानूनी आधार को लेकर सवाल किए थे।</h6>
<h6>यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि Form-6 नए मतदाता के रूप में पंजीकरण की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।</h6>
<h2><span><strong>अब असली सवाल पारदर्शिता का</strong></span></h2>
<h6>इस पूरे मामले में फिलहाल दो बातें साथ-साथ सामने हैं। पहली, दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कई मुद्दों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की रिपोर्ट। दूसरी, चुनाव आयोग का यह कहना कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।</h6>
<h6>इन दोनों बातों में अपने-आप विरोधाभास होना जरूरी नहीं है, क्योंकि विचार-विमर्श के दौरान मतभेद के बाद सहमति बन सकती है। लेकिन सार्वजनिक बहस का केंद्र अब यह है कि इस खास मामले में सहमति बनने की प्रक्रिया क्या थी।</h6>
<h6><strong>चुनाव आयोग के भीतर मतभेद होना अपने-आप में असामान्य नहीं है, लेकिन 14 लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद सवाल केवल मतभेद का नहीं बल्कि उसके समाधान का है। आयोग ने अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति वाला बताया है। अब यदि आपत्तियों से सहमति तक पहुंचने की प्रक्रिया और स्पष्ट होती है, तो इस विवाद से जुड़े कई सवालों के जवाब भी सामने आ सकते हैं।</strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions/article-2191</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/national/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions/article-2191</guid>
                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 15:10:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/gyanesh-kumar-election-commission-14-objections-unanimous-decisions.jpg"                         length="447458"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सड़कों पर कांग्रेस, लखनऊ से कोलकाता तक प्रदर्शन; इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन कर उनके इस्तीफे, पद से हटाने और गिरफ्तारी की मांग उठाई है। यह विरोध राहुल गांधी की ओर से चुनाव प्रक्रिया और वोटर लिस्ट को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद तेज हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/congress-protest-cec-gyanesh-kumar-election-commission-rahul-gandhi/article-2190"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/congress-protest-cec-gyanesh-kumar-25-september-2026.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></p>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/congress-protest-cec-gyanesh-kumar-25-september-2026.jpg.jpg" alt="congress-protest-cec-gyanesh-kumar-25-september-2026.jpg" width="1366" height="768"></img>
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस का विरोध तेज, कई शहरों में सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता

<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कई राज्यों में कांग्रेस का प्रदर्शन</strong></li>
<li><strong>लखनऊ, कोलकाता, दिल्ली और चंडीगढ़ समेत कई शहरों में कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे</strong></li>
<li><strong>कांग्रेस ने CEC के इस्तीफे, हटाने और गिरफ्तारी की मांग की</strong></li>
<li><strong>राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया पर लगाए गंभीर आरोप</strong></li>
<li><strong>BJP ने कांग्रेस और राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया</strong></li>
</ul>
<h6><strong>नई दिल्ली।</strong> मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब सड़कों तक पहुंच गया है। कांग्रेस ने शुक्रवार, 25 सितंबर को कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश के लखनऊ से लेकर पश्चिम बंगाल के कोलकाता तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।</h6>
<h6>कोलकाता में पश्चिम बंगाल कांग्रेस के कार्यकर्ता मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर मार्च के लिए निकले। वहीं लखनऊ में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू, देहरादून और अन्य जगहों से भी प्रदर्शन की खबरें सामने आईं।</h6>
<h2>Why Is Congress Protesting?</h2>
<h6>कांग्रेस का यह विरोध चुनाव आयोग और मतदाता सूची के <strong>Special Intensive Revision (SIR)</strong> को लेकर उठे सवालों के बाद तेज हुआ है। <em>इंडियन एक्सप्रेस</em> की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के दो अन्य सदस्यों ने कुछ फैसलों और निर्देशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। इसके बाद विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर अपने हमले तेज कर दिए।</h6>
<h6>कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पार्टी की प्रदेश इकाइयों को 25 सितंबर को राज्य निर्वाचन कार्यालयों की ओर मार्च करने के निर्देश दिए थे। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, उनकी गिरफ्तारी और उनके कार्यकाल में मतदाता सूची से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है। ये कांग्रेस की मांगें और आरोप हैं; इनका कानूनी निष्कर्ष अभी स्थापित नहीं हुआ है।</h6>
<h2>Rahul Gandhi Raised Questions</h2>
<h6>लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग की थी। उन्होंने चुनावों और वोटर लिस्ट को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए और कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। राहुल गांधी के ये आरोप राजनीतिक दावे हैं, जिन्हें BJP ने खारिज किया है।</h6>
<h6>राहुल गांधी के बयान के बाद कांग्रेस ने विरोध को देशव्यापी रूप देने का फैसला किया। पार्टी की योजना के मुताबिक 25 सितंबर को प्रदेश स्तर पर प्रदर्शन के बाद 28 सितंबर को जिला कांग्रेस कमेटियां जिला कलेक्ट्रेट तक मार्च करेंगी।</h6>
<h2>Protest From Lucknow To Kolkata</h2>
<h6>उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। वहीं कोलकाता में कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़े। वहां सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस की तैनाती और बैरिकेडिंग भी की गई।</h6>
<h6>कांग्रेस का विरोध केवल इन दो शहरों तक सीमित नहीं रहा। जम्मू-कश्मीर, असम, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, मणिपुर और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में प्रदर्शन की खबरें सामने आईं।</h6>
<h2>BJP Rejects Allegations</h2>
<h6>दूसरी ओर BJP ने राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। BJP प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने पहले कहा था कि चुनाव आयोग के भीतर अलग-अलग राय लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और कांग्रेस के आरोपों को सही नहीं माना जा सकता।</h6>
<h6>इस तरह चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर सामने आई रिपोर्ट और विपक्ष के आरोपों ने CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।</h6>
<h2>What Happens Next?</h2>
<h6>मामला अब सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है। कांग्रेस सड़कों पर प्रदर्शन कर रही है और विपक्षी दल संसद में CEC को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी चर्चा कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस अन्य विपक्षी दलों से इस संबंध में संपर्क कर रही है।</h6>
<h1><strong>CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब चुनाव आयोग से निकलकर सड़क और संसद की राजनीति तक पहुंचता दिख रहा है। कांग्रेस जहां इस्तीफे और कार्रवाई की मांग पर अड़ी है, वहीं BJP इन आरोपों को राजनीतिक अभियान बता रही है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव आयोग इन सवालों और बढ़ते राजनीतिक दबाव पर आगे क्या रुख अपनाता है।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/congress-protest-cec-gyanesh-kumar-election-commission-rahul-gandhi/article-2190</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/politics/congress-protest-cec-gyanesh-kumar-election-commission-rahul-gandhi/article-2190</guid>
                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 14:48:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/congress-protest-cec-gyanesh-kumar-25-september-2026.jpg.jpg"                         length="1413909"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमीर आलम को कांग्रेस में लाकर इमरान मसूद ने बढ़ाया दबाव, क्या इकरा हसन की हो रही सियासी घेराबंदी?</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे नवाजिश आलम के कांग्रेस में आने से पश्चिमी यूपी की राजनीति बदलती दिखाई दे रही है। इमरान मसूद की इस रणनीति को इकरा हसन और सपा पर दबाव बनाने से जोड़कर देखा जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%87%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%A6-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B5--%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%87%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%B8%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%98%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80/article-2189"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/imran-masood-amir-alam-iqra-hasan-western-2up.webp.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>पश्चिमी यूपी में इमरान मसूद और अमीर आलम की नई जोड़ी ने बदला सियासी खेल, क्या इकरा हसन के बढ़ते प्रभाव को रोकने की तैयारी कर रही कांग्रेस?</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/imran-masood-amir-alam-iqra-hasan-western-2up.webp.jpg" alt="imran-masood-amir-alam-iqra-hasan-western-2up.webp" width="1366" height="768"></img>
इमरान मसूद और अमीर आलम की नई राजनीतिक जोड़ी से पश्चिमी यूपी में बदले समीकरण

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>पूर्व सांसद अमीर आलम और बेटे नवाजिश आलम कांग्रेस में शामिल</strong></li>
<li><strong>दोनों नेताओं को कांग्रेस में लाने में इमरान मसूद की अहम भूमिका</strong></li>
<li><strong>पश्चिमी यूपी में मजबूत मुस्लिम चेहरा बनकर उभरी हैं इकरा हसन</strong></li>
<li><strong>सीट बंटवारे को लेकर सपा-कांग्रेस में पहले से चल रही बयानबाजी</strong></li>
<li><strong>थानाभवन और मुजफ्फरनगर की सीटों पर बढ़ सकती है दावेदारी</strong></li>
</ul>
<h6>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पश्चिमी यूपी में नए राजनीतिक समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश आलम ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। दोनों नेताओं को कांग्रेस में लाने में सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है।</h6>
<h6>अमीर आलम परिवार के कांग्रेस में शामिल होने के बाद राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है कि क्या इमरान मसूद पश्चिमी यूपी में कांग्रेस की ताकत बढ़ाने के साथ सपा सांसद इकरा हसन के बढ़ते प्रभाव को भी चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।</h6>
<h3>अमीर आलम से कांग्रेस को क्या फायदा होगा?</h3>
<h6>अमीर आलम पश्चिमी यूपी के पुराने और प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं में शामिल हैं। वह कई बार विधायक रहने के साथ कैराना से लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। उनके बेटे नवाजिश आलम वर्ष 2012 में सपा के टिकट पर बुढ़ाना से विधायक चुने गए थे।</h6>
<h6>अमीर आलम और नवाजिश आलम ने हाल ही में चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी छोड़ दी थी। अब उनके कांग्रेस में आने से शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में पार्टी अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश करेगी।</h6>
<h3>इकरा हसन के प्रभाव से जुड़ी चर्चा क्यों?</h3>
<h6>कैराना से सपा सांसद इकरा हसन पश्चिमी यूपी में एक मजबूत युवा मुस्लिम नेता के रूप में उभरी हैं। उनके परिवार का कैराना, शामली और मुजफ्फरनगर की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रहा है। उनके भाई नाहिद हसन भी कैराना से सपा विधायक हैं।</h6>
<h6>वहीं, अमीर आलम और इकरा हसन के परिवारों की राजनीतिक जमीन लगभग एक ही क्षेत्र में रही है। इसी कारण इमरान मसूद और अमीर आलम की नई राजनीतिक साझेदारी को कुछ जानकार इकरा हसन के प्रभाव की घेराबंदी के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक दावा नहीं किया गया है।</h6>
<h3>सीट बंटवारे पर बढ़ सकता है दबाव</h3>
<h6>सपा और कांग्रेस के बीच 2027 का विधानसभा चुनाव गठबंधन में लड़ने की संभावना है, लेकिन सीटों के बंटवारे पर दोनों पार्टियों में दबाव की राजनीति शुरू हो चुकी है। इमरान मसूद पश्चिमी यूपी में कांग्रेस के लिए अधिक सीटों की मांग करते रहे हैं।</h6>
<h6>अमीर आलम परिवार के कांग्रेस में आने के बाद थानाभवन, मुजफ्फरनगर सदर और आसपास की दूसरी विधानसभा सीटों पर कांग्रेस की दावेदारी मजबूत हो सकती है। चर्चा है कि नवाजिश आलम थानाभवन सीट से कांग्रेस का टिकट मांग सकते हैं। ऐसी स्थिति में सपा और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर खींचतान बढ़ सकती है।</h6>
<h3>इमरान और इकरा के बीच पहले भी हुई बयानबाजी</h3>
<h6>इकरा हसन ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराने की ताकत समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के पास है। इसके जवाब में इमरान मसूद ने गठबंधन की जरूरत बताते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति एक जैसी नहीं है।</h6>
<h6>दोनों सांसदों की बयानबाजी के बाद यह सवाल उठने लगा कि पश्चिमी यूपी में सपा और कांग्रेस के बीच सीटों का बंटवारा आसानी से हो पाएगा या दोनों दलों के क्षेत्रीय नेताओं की दावेदारी गठबंधन की मुश्किल बढ़ाएगी।</h6>
<h1><strong>अमीर आलम और नवाजिश आलम के कांग्रेस में आने से पश्चिमी यूपी में इमरान मसूद की ताकत बढ़ी है, लेकिन असली परीक्षा 2027 के सीट बंटवारे में होगी। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस की बढ़ती दावेदारी सपा पर दबाव बनाएगी या इकरा हसन का राजनीतिक प्रभाव गठबंधन में समाजवादी पार्टी की पकड़ मजबूत करेगा।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%87%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%A6-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B5--%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%87%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%B8%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%98%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80/article-2189</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%87%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%A6-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B5--%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%87%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%B8%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%98%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80/article-2189</guid>
                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 13:38:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/imran-masood-amir-alam-iqra-hasan-western-2up.webp.jpg"                         length="638310"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान Mayor Election 2026: जयपुर, जोधपुर और कोटा में मेयर की जंग, आज ही आएंगे नतीजे</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम में मेयर पद के लिए मतदान हो रहा है। वोटिंग के बाद मतगणना शुरू होगी और आज ही तीनों शहरों को नया मेयर मिल जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/rajasthan-mayor-election-2026-mayors-battle-in-jaipur-jodhpur-and/article-2188"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/rajasthan-mayor-election-2026-jaipur-jodhpur-kota.webp.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>राजस्थान के तीन बड़े शहरों में मेयर की कुर्सी पर भाजपा-कांग्रेस का सीधा मुकाबला, जयपुर से जोधपुर तक क्रॉस वोटिंग पर टिकी सभी की नजर</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/rajasthan-mayor-election-2026-jaipur-jodhpur-kota.webp.jpg" alt="rajasthan-mayor-election-2026-jaipur-jodhpur-kota.webp" width="1366" height="768"></img>
जयपुर, जोधपुर और कोटा में मेयर चुनाव के लिए भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबला

<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राजस्थान डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>जयपुर, जोधपुर और कोटा में मेयर पद के लिए मतदान</strong></li>
<li><strong>सुबह 10 बजे शुरू हुई वोटिंग, दोपहर 2 बजे तक चलेगी</strong></li>
<li><strong>मतदान के बाद तुरंत शुरू होगी वोटों की गिनती</strong></li>
<li><strong>जयपुर और कोटा में भाजपा का संख्या बल मजबूत</strong></li>
<li><strong>जोधपुर में निर्दलीय पार्षद निभा सकते हैं निर्णायक भूमिका</strong></li>
</ul>
<h6>राजस्थान के तीन प्रमुख शहरों जयपुर, जोधपुर और कोटा में आज मेयर पद के लिए चुनाव हो रहा है। तीनों नगर निगमों में भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। पार्षद मतदान के जरिए अपने शहर का नया मेयर चुनेंगे और आज ही नतीजे घोषित होने की संभावना है।</h6>
<h3>जयपुर में सुनील कोठारी और सुनीता मावर का मुकाबला</h3>
<h6>जयपुर नगर निगम में भाजपा ने वार्ड संख्या 112 के पार्षद सुनील कोठारी को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने उनके सामने वार्ड संख्या 118 की पार्षद सुनीता मावर को मैदान में उतारा है।</h6>
<h6>जयपुर नगर निगम में भाजपा के पास कांग्रेस से अधिक पार्षद हैं, इसलिए उसका दावा मजबूत माना जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग की उम्मीद है। इसी कारण दोनों पार्टियां मतदान पूरा होने तक अपने पार्षदों को एकजुट रखने में जुटी हैं।</h6>
<h3>जोधपुर में निर्दलीयों के हाथ सत्ता की चाबी</h3>
<h6>जोधपुर नगर निगम में भाजपा के प्रसन्न चंद मेहता और कांग्रेस के राजेंद्र सिंह सोलंकी के बीच मुकाबला है। यहां दोनों प्रमुख पार्टियों की ताकत लगभग बराबर रही है, इसलिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है।</h6>
<h6>भाजपा ने सात निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिलने का दावा किया है। यदि मतदान के दौरान पार्टी के पक्ष में तय संख्या बनी रहती है तो भाजपा मेयर पद पर जीत हासिल कर सकती है। कांग्रेस भी अंतिम समय तक अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।</h6>
<h3>कोटा में दो महिला उम्मीदवार आमने-सामने</h3>
<h6>कोटा नगर निगम के मेयर पद के लिए भाजपा की अनुसुइया गोस्वामी और कांग्रेस की सुनीता सुमन के बीच मुकाबला है। नगर निगम में भाजपा के पार्षदों की संख्या अधिक होने के कारण उसका पलड़ा भारी माना जा रहा है।</h6>
<h6>इसके बावजूद दोनों पार्टियों की नजर क्रॉस वोटिंग पर है। किसी भी पार्षद का वोट बदलने से परिणाम का अंतर कम या ज्यादा हो सकता है। इसलिए मतदान के दौरान भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।</h6>
<h3>कब आएंगे चुनाव परिणाम?</h3>
<h6>मेयर चुनाव के लिए मतदान सुबह 10 बजे शुरू हुआ और दोपहर 2 बजे तक चलेगा। इसके बाद करीब 2:15 बजे वोटों की गिनती शुरू होगी। दोपहर 3 बजे तक परिणाम घोषित होने और नए मेयरों के शपथ लेने की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।</h6>
<h6>राजस्थान के सात नगर निगमों के मेयर चुनाव पहले ही पूरे हो चुके हैं। इनमें भाजपा ने छह नगर निगमों में जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस बीकानेर में अपना मेयर बनाने में सफल रही। अब जयपुर, जोधपुर और कोटा के नतीजे प्रदेश के शहरी राजनीतिक समीकरण की अंतिम तस्वीर साफ करेंगे।</h6>
<h1><strong>राजस्थान के सात नगर निगमों में छह मेयर पद जीत चुकी भाजपा की नजर अब जयपुर, जोधपुर और कोटा पर है। कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग और निर्दलीय पार्षदों से उम्मीद है, इसलिए अंतिम वोट की गिनती होने तक तीनों शहरों की मेयर लड़ाई पर पूरे प्रदेश की नजर बनी रहेगी।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान </category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/rajasthan-mayor-election-2026-mayors-battle-in-jaipur-jodhpur-and/article-2188</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/rajasthan/rajasthan-mayor-election-2026-mayors-battle-in-jaipur-jodhpur-and/article-2188</guid>
                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 13:05:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/rajasthan-mayor-election-2026-jaipur-jodhpur-kota.webp.jpg"                         length="888571"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>20 करोड़ का रथ? अखिलेश यादव बोले—दो-चार करोड़ कम भी दे दें, घर के बाहर खड़ा कर देंगे</title>
                                    <description><![CDATA[PDA रथ को 20 करोड़ की वैनिटी वैन बताए जाने पर अखिलेश यादव ने कहा कि दो-चार करोड़ कम भी दे दें तो वह रथ बेचने के लिए तैयार हैं और उसे खरीदार के घर पहुंचा देंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/akhilesh-yadav-reply-pda-rath-20-crore-vanity-van-raebareli/article-2187"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/akhilesh-yadav-pda-rath-20-crore-reply.webp-(2).jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>20 करोड़ के PDA रथ पर अखिलेश यादव का सीधा जवाब—कीमत सही है तो पैसे दे दीजिए, रथ आपके घर पहुंचा देंगे</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/akhilesh-yadav-pda-rath-20-crore-reply.webp-(2).jpg" alt="akhilesh-yadav-pda-rath-20-crore-reply.webp (2)" width="1366" height="768"></img>
20 करोड़ के PDA रथ वाले सवाल पर अखिलेश यादव ने भाजपा को दिया सीधा जवाब

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>PDA रथ को 20 करोड़ की वैनिटी वैन बताने पर अखिलेश का जवाब</strong></li>
<li><strong>बोले—दो-चार करोड़ कम भी दे दें तो रथ बेच देंगे</strong></li>
<li><strong>भाजपा ने पोस्टर के जरिए रथ और सड़क को लेकर पूछा था सवाल</strong></li>
<li><strong>रायबरेली से शुरू हुई सपा की PDA रथ यात्रा</strong></li>
<li><strong>अखिलेश ने 2027 में गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने का किया ऐलान</strong></li>
</ul>
<h6>उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की PDA रथ यात्रा के बीच रथ की कीमत को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा की ओर से इसे 20 करोड़ रुपये की वैनिटी वैन बताए जाने पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया है।</h6>
<h3>कीमत सही है तो रथ खरीद लें—अखिलेश</h3>
<h6>रायबरेली में PDA रथ यात्रा के बाद मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग उनके रथ की कीमत 20 करोड़ रुपये बता रहे हैं, वे कुछ रकम कम करके उन्हें पैसे दे दें। वह अपना रथ बेचने के लिए तैयार हैं और उसे खरीदार के घर के बाहर खड़ा करवा देंगे।</h6>
<h6>अखिलेश यादव ने पहले 15 लाख रुपये कम देने की बात कही और फिर कहा कि दो से चार करोड़ रुपये कम भी दिए जाएं, तब भी वह रथ दे देंगे। उनके इस जवाब को भाजपा के आरोपों पर पलटवार के रूप में देखा जा रहा है।</h6>
<h3>भाजपा के पोस्टर से शुरू हुआ विवाद</h3>
<h6>रायबरेली में अखिलेश यादव की यात्रा से पहले भाजपा की ओर से एक पोस्टर जारी किया गया था। इसमें PDA रथ को 20 करोड़ रुपये की वैनिटी वैन बताते हुए सवाल किया गया कि जिस सड़क पर यह रथ चल रहा है, उसे किसने बनवाया है।</h6>
<h6>इसके जवाब में अखिलेश यादव ने रथ की कथित कीमत को ही मुद्दा बनाते हुए भाजपा को इसे खरीदने की चुनौती दे दी। उनके बयान के बाद रथ की कीमत को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है।</h6>
<h3>रथ को भारतीय संस्कृति से जोड़ा</h3>
<h6>अखिलेश यादव ने PDA रथ को भारतीय संस्कृति और महाभारत के कुरुक्षेत्र से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में रथ का विशेष महत्व है और इससे सीख मिलती है। समाजवादी पार्टी ने 24 सितंबर को रायबरेली से PDA रथ यात्रा की शुरुआत की है।</h6>
<h6>इस यात्रा को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा के बड़े चुनावी अभियान के रूप में देखा जा रहा है। रायबरेली में अखिलेश यादव का स्वागत फूलों की बारिश और बड़ी संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं के साथ किया गया।</h6>
<h3>गठबंधन के साथ चुनाव लड़ेगी सपा</h3>
<h6>अखिलेश यादव ने साफ किया कि समाजवादी पार्टी 2027 का विधानसभा चुनाव अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर लड़ेगी। उन्होंने कहा कि गठबंधन में सीटों की संख्या से अधिक जीतने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। जो दल जिस सीट पर जीत सकता है, उसे वही सीट मिलनी चाहिए।</h6>
<h6>उन्होंने भाजपा पर चुनावी व्यवस्था का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और दावा किया कि इस बार जनता अपने वोट से जवाब देगी। अखिलेश ने यह भी कहा कि PDA आंदोलन को रोकने की कोशिश सफल नहीं होगी।</h6>
<h1><strong>PDA रथ की कीमत पर उठे सवाल को अखिलेश यादव ने भाजपा के लिए खुली चुनौती में बदल दिया है। अब 20 करोड़ के कथित रथ से शुरू हुई यह राजनीतिक बहस 2027 के चुनाव में सपा और भाजपा के बीच नए सियासी टकराव का मुद्दा बन सकती है।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/akhilesh-yadav-reply-pda-rath-20-crore-vanity-van-raebareli/article-2187</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/akhilesh-yadav-reply-pda-rath-20-crore-vanity-van-raebareli/article-2187</guid>
                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 12:27:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/akhilesh-yadav-pda-rath-20-crore-reply.webp-%282%29.jpg"                         length="772715"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अखिलेश की रायबरेली यात्रा पर अजय राय का बड़ा बयान, बोले—वह यहां आए हैं तो हम इटावा-सैफई भी जा सकते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[अखिलेश यादव की रायबरेली PDA रथ यात्रा पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि चुनाव में कोई भी नेता कहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता भी कन्नौज, इटावा और सैफई जा सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/ajay-rai-reaction-akhilesh-yadav-raebareli-pda-yatra-etawah-saifai/article-2186"><img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/400/2026-09/ajay-rai-akhilesh-yadav-raebareli-pda-yatra.webp2.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>कांग्रेस के गढ़ रायबरेली में अखिलेश यादव के शक्ति प्रदर्शन के बाद अजय राय के ‘इटावा-सैफई जाने’ वाले बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल, क्या UP Election 2027 से पहले बदलेंगे सपा-कांग्रेस गठबंधन के समीकरण?</strong></h1>
<img src="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/ajay-rai-akhilesh-yadav-raebareli-pda-yatra.webp2.jpg" alt="ajay-rai-akhilesh-yadav-raebareli-pda-yatra.webp2" width="1366" height="768"></img>
रायबरेली PDA रथ यात्रा पर अखिलेश यादव को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने दिया बड़ा बयान

<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 25 सितंबर 2026</strong></p>
<h1><strong>खबर में खास</strong></h1>
<ul>
<li><strong>अखिलेश यादव की रायबरेली PDA रथ यात्रा पर अजय राय का बयान</strong></li>
<li><strong>बोले—चुनाव में कोई भी नेता कहीं भी जा सकता है</strong></li>
<li><strong>कांग्रेस नेताओं के इटावा, सैफई और कन्नौज जाने की कही बात</strong></li>
<li><strong>राहुल गांधी को बताया जनता के मुद्दों की मजबूत आवाज</strong></li>
<li><strong>2027 से पहले सपा-कांग्रेस के बीच शक्ति प्रदर्शन की चर्चा तेज</strong></li>
</ul>
<h6>उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की रायबरेली में निकाली गई PDA रथ यात्रा पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की प्रतिक्रिया सामने आई है। अजय राय ने कहा कि चुनाव के समय कोई भी नेता किसी भी क्षेत्र में जाकर प्रचार कर सकता है।</h6>
<h3>अखिलेश की यात्रा पर क्या बोले अजय राय?</h3>
<h6>अजय राय ने कहा कि अखिलेश यादव रायबरेली और अमेठी जा सकते हैं तो कांग्रेस के नेता भी कन्नौज, इटावा और सैफई जा सकते हैं। उन्होंने इसे चुनावी राजनीति का सामान्य हिस्सा बताते हुए कहा कि सभी दलों और नेताओं को किसी भी क्षेत्र में जनता के बीच जाने का अधिकार है।</h6>
<h6>अजय राय का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अखिलेश यादव ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से अपनी PDA रथ यात्रा के जरिए बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया है। इस यात्रा को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा की रणनीति और गठबंधन में अपनी मजबूत भूमिका दिखाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।</h6>
<h3>राहुल गांधी को लेकर किया बड़ा दावा</h3>
<h6>अजय राय ने कहा कि आज देश राहुल गांधी की तरफ देख रहा है। उनके मुताबिक राहुल गांधी आम जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठा रहे हैं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी लगातार सवाल कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस कार्यकर्ता अन्याय के खिलाफ जनता के बीच सक्रिय हैं।</h6>
<h3>क्या गठबंधन में बढ़ रही सियासी खींचतान?</h3>
<h6>समाजवादी पार्टी और कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सहयोगी दल हैं, लेकिन 2027 के चुनाव से पहले दोनों पार्टियां अपने-अपने संगठन और राजनीतिक प्रभाव को मजबूत करने में जुटी हैं। अखिलेश यादव का रायबरेली से अभियान शुरू करना और उसके बाद अजय राय का इटावा-सैफई वाला बयान गठबंधन के भीतर बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।</h6>
<h6>हालांकि, अजय राय ने अखिलेश यादव की यात्रा का सीधा विरोध नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चुनाव में सभी नेताओं को कहीं भी जाकर प्रचार करने की स्वतंत्रता है। इसके बावजूद उनके बयान से आगामी विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे और गठबंधन के भीतर नेतृत्व की भूमिका को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।</h6>
<h3>2027 के चुनाव पर टिकी नजर</h3>
<h6>रायबरेली को कांग्रेस का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है, जबकि इटावा और सैफई समाजवादी पार्टी के प्रमुख गढ़ हैं। ऐसे में दोनों दलों के नेताओं का एक-दूसरे के प्रभाव वाले क्षेत्रों में सक्रिय होना आने वाले समय में राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन को और तेज कर सकता है।</h6>
<h1><strong>रायबरेली में अखिलेश यादव की PDA रथ यात्रा और अजय राय के इटावा-सैफई वाले जवाब ने साफ कर दिया है कि 2027 से पहले सहयोगी सपा और कांग्रेस भी अपनी-अपनी ताकत दिखाने में पीछे नहीं रहेंगी। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह सियासी प्रतिस्पर्धा गठबंधन को मजबूत करेगी या सीट बंटवारे के समय नई खींचतान की वजह बनेगी।</strong></h1>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/ajay-rai-reaction-akhilesh-yadav-raebareli-pda-yatra-etawah-saifai/article-2186</link>
                <guid>https://www.pratyakshdarshisamachar.com/state/uttar-pradesh/ajay-rai-reaction-akhilesh-yadav-raebareli-pda-yatra-etawah-saifai/article-2186</guid>
                <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 12:11:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.pratyakshdarshisamachar.com/media/2026-09/ajay-rai-akhilesh-yadav-raebareli-pda-yatra.webp2.jpg"                         length="804117"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Pratyakshdarshi Samachar]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        